रेलवे को प्राइवेटाइजेशन करने से क्या लाभ होगी और सरकार सेक्टर में है तो क्या लाभ नहीं है?...


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Jeet Dholakia

Anchor and Media Professional

3:38

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हां हमारी सरकार जो है वह काफी ऐसे क्षेत्र हैं जिनको उनके बारे में सोच रही है कि उनका प्राइवेटाइजेशन कर देना चाहिए मतलब कि प्राइवेटाइजेशन मतलब कि प्राइवेट कंपनीस के हाथों में दे दिया जाए सौंप दिया जाए उसका कारण एक ही होता है कि ऑपरेशन हो जाएगा तो उसमें लोगों को लोगों के लिए अच्छी अच्छी व्यवस्था है बनेगी लोगों का लोगों के लिए अलग व्यवस्था बनेगी और साथ में जो सरकार के ऊपर बाहर है उसका उत्तर क्षेत्र का हो सरकार अगर वह पार्टी से शंकर देगी तो वह भार उनके सिर से चला जाएगा इसलिए सरकार क्या सोच रही है कि एक दूसरे त्रस्त हैं जिनका प्लांटेशन हो जाना चाहिए उसमें से क्षेत्र है रेलवे यहां पर जो पूछा गया कि रेलवे को पराठे सेशन करने से क्या लाभ होगा और रेलवे और पोस्टल डिपार्टमेंट वह दोनों ऐसे डिपार्टमेंट है गवर्नमेंट के जिनका प्राइवेटाइजेशन अगर हो जाता है तो बहुत अच्छा होता है आगरा में रेलवे की बात करो तो रेलवे में अगर प्राइवेटाइजेशन हो जाता है तो अभी जो ट्रेन की स्थिति है अभी जो ट्रेन किराया है अभी जो ट्रेन में ग्राहकों को मिलती मुसाफिरों को मिलती जो सुविधाएं हैं उसमें काफी इजाफा होगा और ट्रेन की कंडीशन भी आज क्योंकि अभी जो ट्रेन में नाश्ता दिया जाता है ट्रेन में जो खाना दिया जाता है उसमें काफी कंप्लेंट गवर्नमेंट के पास आती है ट्विटर पर लोग फिट करते हैं कि खाने में यह था खाना बहुत घटिया क्वालिटी का था और गारमेंट को यह देखना चाहिए वह देखना चाहिए या तो फिर वह बेडिंग देते हैं ट्रेन में रात की ट्रेन में जो स्लीपिंग कोच होता है उसमें बेडिंग देते हैं उसकी क्वालिटी अच्छी नहीं होती या फिर ट्रेन का डिब्बा जो होता है वह कंपार्टमेंट अंदर से बहुत ही खराब होता है और क्लीनलीनेस नहीं होती उसमें तो कहीं ना कहीं मुझे लगता है कि प्राइवेटाइजेशन अगर हो जाएगा तो यह सारी कंप्लेंट है लोगों की बहुत दूर हो जाएगी और यह भी सवाल किया कि अगर गवर्नमेंट सेक्टर में है तो क्या पता है मैंने कहा कि गवर्नमेंट सेक्टर में अभी रेलवे डिपार्टमेंट आता है तो हम देखते हैं कि ट्रेंस काफी लेट होती है या तो फिर ट्रेन के डिब्बे बहुत ही घटिया क्वालिटी के होते हैं और ट्रेन में जो खाना दिया जाता है उसकी क्वालिटी भी बहुत खराब होती है इनके कारण लोग वहां खाना खाना पसंद नहीं करते या फिर ट्रेन में सफर करना पसंद नहीं करते हैं और या तो फिर अभी जो है वह ट्रेन में टिकट मिलना भी बहुत असंभव हो गया है और रा पूरी इंडिया की अगर मैं बात करूं तो पूरे इंडिया में अहमदाबाद और मुंबई के बीच का जो रूट है वहां पर जितनी भी नई ट्रेन गवर्नमेंट रख सकती है गवर्नमेंट को रखनी चाहिए क्योंकि यह दो जगह के बीच में जो ट्रैफिक है लोगों का आवन जावन रहता है वह काफी रहता है और मुझे लगता है कि अगर सरकार इस दिशा में कुछ विचार करें या तो फिर भी प्राइवेटाइजेशन अगर हो जाता है रेलवे का तो जो भी कंपनियों और रेलवे को अपने हाथ में लेगी उसको यह ध्यान में रखना जरूर रहेगा कि अहमदाबाद और मुंबई के बीच का जो रेल ट्रैफिक है उसको थोड़ा बढ़ावा देना चाहिए और दोनों में दोनों के बीच में अच्छी-अच्छी ट्रेन रखनी चाहिए ज्यादा ट्रेन रखनी चाहिए ज्यादा सुविधा वाली ट्रेन रखनी चाहिए ताकि जिससे रेलवे को फायदा हो उस कंपनी को फायदा हो और लोग रेलवे में रेलवे का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा करें तो मेरे ख्याल से लेकर हो जाते लोग लोगों को काफी सारी सुविधाएं प्राप्त होगी और रेलवे में जो भी टाइमिंग के प्रॉब्लम है अलग से सारे क्लीनलीनेस के प्रॉब्लम है वह सारे मुझे लगता है कि दूर हो सकते हैं अगर प्राइवेट हाथों में चला जाए तो

haan hamari sarkar jo hai vaah kaafi aise kshetra hain jinako unke bare mein soch rahi hai ki unka privatisation kar dena chahiye matlab ki privatisation matlab ki private kampanis ke hathon mein de diya jaaye saunp diya jaaye uska karan ek hi hota hai ki operation ho jaega toh usme logo ko logo ke liye achi achi vyavastha hai banegi logo ka logo ke liye alag vyavastha banegi aur saath mein jo sarkar ke upar bahar hai uska uttar kshetra ka ho sarkar agar vaah party se shankar degi toh vaah bhar unke sir se chala jaega isliye sarkar kya soch rahi hai ki ek dusre trast hain jinka plantation ho jana chahiye usme se kshetra hai railway yahan par jo poocha gaya ki railway ko parathe session karne se kya labh hoga aur railway aur postal department vaah dono aise department hai government ke jinka privatisation agar ho jata hai toh bahut accha hota hai agra mein railway ki baat karo toh railway mein agar privatisation ho jata hai toh abhi jo train ki sthiti hai abhi jo train kiraaya hai abhi jo train mein grahakon ko milti musafiron ko milti jo suvidhaen hain usme kaafi ijafa hoga aur train ki condition bhi aaj kyonki abhi jo train mein nashta diya jata hai train mein jo khana diya jata hai usme kaafi complaint government ke paas aati hai twitter par log fit karte hain ki khane mein yah tha khana bahut ghatiya quality ka tha aur garment ko yah dekhna chahiye vaah dekhna chahiye ya toh phir vaah bedding dete hain train mein raat ki train mein jo Sleeping coach hota hai usme bedding dete hain uski quality achi nahi hoti ya phir train ka dibba jo hota hai vaah compartment andar se bahut hi kharab hota hai aur cleanliness nahi hoti usme toh kahin na kahin mujhe lagta hai ki privatisation agar ho jaega toh yah saree complaint hai logo ki bahut dur ho jayegi aur yah bhi sawaal kiya ki agar government sector mein hai toh kya pata hai maine kaha ki government sector mein abhi railway department aata hai toh hum dekhte hain ki trens kaafi late hoti hai ya toh phir train ke dibbe bahut hi ghatiya quality ke hote hain aur train mein jo khana diya jata hai uski quality bhi bahut kharab hoti hai inke karan log wahan khana khana pasand nahi karte ya phir train mein safar karna pasand nahi karte hain aur ya toh phir abhi jo hai vaah train mein ticket milna bhi bahut asambhav ho gaya hai aur ra puri india ki agar main baat karu toh poore india mein ahmedabad aur mumbai ke beech ka jo root hai wahan par jitni bhi nayi train government rakh sakti hai government ko rakhni chahiye kyonki yah do jagah ke beech mein jo traffic hai logo ka avan javan rehta hai vaah kaafi rehta hai aur mujhe lagta hai ki agar sarkar is disha mein kuch vichar kare ya toh phir bhi privatisation agar ho jata hai railway ka toh jo bhi companion aur railway ko apne hath mein legi usko yah dhyan mein rakhna zaroor rahega ki ahmedabad aur mumbai ke beech ka jo rail traffic hai usko thoda badhawa dena chahiye aur dono mein dono ke beech mein achi achi train rakhni chahiye zyada train rakhni chahiye zyada suvidha wali train rakhni chahiye taki jisse railway ko fayda ho us company ko fayda ho aur log railway mein railway ka istemal zyada se zyada kare toh mere khayal se lekar ho jaate log logo ko kaafi saree suvidhaen prapt hogi aur railway mein jo bhi timing ke problem hai alag se saare cleanliness ke problem hai vaah saare mujhe lagta hai ki dur ho sakte hain agar private hathon mein chala jaaye toh

हां हमारी सरकार जो है वह काफी ऐसे क्षेत्र हैं जिनको उनके बारे में सोच रही है कि उनका प्राइ

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्राइवेटाइजेशन जो है उसमें एक रेलवे का भी आता है तो उसमें ट्रेन का अंदर से विभाग का भी कोई संस्था नहीं होता है जैसे रिजर्वेशन बोगी हो गया उसमें क्वालिटी जाम रहता है और उसमें लेडीस लोग नैपकिन ऐसा कुछ डाल देते हैं तो जाम हो जाता है तो ऐसा पब्लिक को समझाना चाहिए इसके लिए कुछ कार्रवाई करना चाहिए और पानी भी नहीं रहता है तो हम लोग लैट्रिन करने जाते हैं बाथरूम करने जाते हैं तो ना बाथरूम कर पाते नेटवर्क ऐड कर पाते हैं तो पानी का भी और सुविचार होता है यह सब जो है बहुत दिक्कत है यह सब को सा ध्यान देना चाहिए सरकार को और खाना जो ट्रेन का मिलता है वह भी खास अच्छा टेस्टिंग नहीं होता है ठंडा भी रहता है तो खाना कभी था बढ़िया नहीं आता है तो इस पर ध्यान देना चाहिए थैंक यू

privatisation jo hai usme ek railway ka bhi aata hai toh usme train ka andar se vibhag ka bhi koi sanstha nahi hota hai jaise reservation boggie ho gaya usme quality jam rehta hai aur usme ladies log napkin aisa kuch daal dete hain toh jam ho jata hai toh aisa public ko samajhana chahiye iske liye kuch karyawahi karna chahiye aur paani bhi nahi rehta hai toh hum log latrine karne jaate hain bathroom karne jaate hain toh na bathroom kar paate network aid kar paate hain toh paani ka bhi aur suvichar hota hai yah sab jo hai bahut dikkat hai yah sab ko sa dhyan dena chahiye sarkar ko aur khana jo train ka milta hai vaah bhi khaas accha testing nahi hota hai thanda bhi rehta hai toh khana kabhi tha badhiya nahi aata hai toh is par dhyan dena chahiye thank you

प्राइवेटाइजेशन जो है उसमें एक रेलवे का भी आता है तो उसमें ट्रेन का अंदर से विभाग का भी कोई

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जहां तक मेरा मानना है रेलवे को प्राइवेटाइजेशन प्राइवेटाइजेशन करने से कोई फायदा नहीं होने वाला है लेकिन यह सरकारों का राजनेताओं का है देश का एक अपना अलग नजरिया है अब देखते हैं से कितना विकास हो कर पाते हैं लेकिन जहां तक की मीरा मेरी सोच है वहां तक प्राइवेटाइजेशन करने से कोई भी लाभ नहीं होने वाला है

jahan tak mera manana hai railway ko privatisation privatisation karne se koi fayda nahi hone vala hai lekin yah sarkaro ka rajnetao ka hai desh ka ek apna alag najariya hai ab dekhte hain se kitna vikas ho kar paate hain lekin jaha tak ki meera meri soch hai wahan tak privatisation karne se koi bhi labh nahi hone vala hai

जहां तक मेरा मानना है रेलवे को प्राइवेटाइजेशन प्राइवेटाइजेशन करने से कोई फायदा नहीं होने व

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प्राइवेटाइजेशन में योगा की रेलवे जो है वह पब्लिक से प्राइवेट में चली जाएगी गवर्नमेंट से प्राइवेट में चली जाएगी लाभ होगा के प्राइवेट सेक्टर में बहुत ही अच्छे से काम होता है और बहुत तरीके से काम किया जाता है एक एक चीज जो है वह उसका हिसाब होता है एक एक चीज का जो है अच्छे से की जाती है तो प्राइवेट सेक्टर में बहुत ज्यादा लाभ ही होगा इसलिए प्राइवेट सेक्टर वाले बहुत अच्छे से सारे कार्य को करते हैं उसके बाद में यह होगा कि एंप्लॉय सैलरी भी ज्यादा मांगते हैं प्राइवेट सेक्टर में सैलरी ज्यादा चाहिए लोगों को क्योंकि वो काम है इतना बढ़िया करते हैं तो ऐसे होता है बिल्कुल होगा और में है तो क्या लाभ नहीं है यह नहीं है कि देखे मुंबई सेक्टर में भी लाभ हो सकता है अगर काम अच्छे से किया जाए तो इंडिया में ऐसा ही माना जाता है कि कॉमेंट सेक्टर में लोग अच्छे से काम नहीं करते हैं इंडियन लोगों की थिंकिंग है काफी लोग करते हैं काफी नहीं करते तो ऐसे ही होता है

privatisation mein yoga ki railway jo hai vaah public se private mein chali jayegi government se private mein chali jayegi labh hoga ke private sector mein bahut hi acche se kaam hota hai aur bahut tarike se kaam kiya jata hai ek ek cheez jo hai vaah uska hisab hota hai ek ek cheez ka jo hai acche se ki jaati hai toh private sector mein bahut zyada labh hi hoga isliye private sector waale bahut acche se saare karya ko karte hain uske baad mein yah hoga ki employee salary bhi zyada mangate hain private sector mein salary zyada chahiye logo ko kyonki vo kaam hai itna badhiya karte hain toh aise hota hai bilkul hoga aur mein hai toh kya labh nahi hai yah nahi hai ki dekhe mumbai sector mein bhi labh ho sakta hai agar kaam acche se kiya jaaye toh india mein aisa hi mana jata hai ki comment sector mein log acche se kaam nahi karte hain indian logo ki thinking hai kaafi log karte hain kaafi nahi karte toh aise hi hota hai

प्राइवेटाइजेशन में योगा की रेलवे जो है वह पब्लिक से प्राइवेट में चली जाएगी गवर्नमेंट से प्

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