परियोजना में देरी की वजह से भारतीय रेलवे में 1.73 लाख करो़ड़ अधिक खर्च होता है। क्या हमारा नागरिक निकाय बहुत धीमा है?...


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Arvind rajpurohit

Entrepreneur , Mentor,

1:47

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिल्कुल सही बात है परियोजना में देरी होने की वजह से भारतीय रेल में 176000 करोड़ से भी अधिक का खर्चा होता है और हमारी जो वर्तमान गवर्नमेंट है गौर करने वाली बात है कि इसने अपने तीनों ही बजट में कोई ऐसी बड़ी घोषणा नहीं की है जिसमें रेलवे पर सबसे ज्यादा खर्चा हो इसने एक ही बात पर फोकस किया है कि आप जो पुरानी जो योजनाएं हैं उनको पूरा करें इसी का कारण है क्योंकि जो योजना आज से 15 साल पहले जिसकी घोषणा हुई उस टाइम उसका बजट अलग था आज के जब वह पूरी नहीं हुई है आज उसको पूरा करेंगे ऑफिस लिए बजट तो पड़ेगा ठीक है ना तो इसलिए मैं यह मानता हूं कि बिल्कुल सही है और इसके पीछे का जो कारण है वह नगरीय निकाय नहीं है उसके पीछे पॉलिटिकल रीजन है क्योंकि हम लोग अपनी क्षमता से अधिक एक राजनीतिक लाभ लेने के लिए हमारे राजनेता अपने अलग-अलग घोषणाएं तो कर देते हैं लेकिन उनको इंप्लीमेंट करने के बारे में बिल्कुल नहीं सोचते बजट आमंत्रित करना अलग चीज होती है टेंडर सो जाते हैं लेकिन उनको पूरा करने पर ध्यान नहीं देते वह नई नई घोषणा है करते रहते थे अभी वह ट्रेन चेंज हुआ है देखते उसके बारे में क्या रिजल्ट निकलता है यह लॉन्ग टर्म प्रोसेस होता है अभी तो पुरानी योजनाएं भी पेंडिंग चल रही है गवर्नमेंट ट्राई कर रही है कि उसको जल्द से जल्द पूरा किया जाए मैं भी रिजल्ट अच्छा है और आगे ऐसा नहीं हो और जो पॉलिटिकल जो घोषणा है उन पर लगाम लगाने की जरूरत है यह देश हमारा है हमें केवल वोट पाने के लिए घोषणा नहीं करनी है रियल में इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलप करने के लिए और देश के डेवलपमेंट के लिए घोषणा करनी है काम करने हैं ऐसे नेताओं को चुनना होगा तो सिस्टम अपने आप सुधरेगा

bilkul sahi baat hai pariyojana mein deri hone ki wajah se bharatiya rail mein 176000 crore se bhi adhik ka kharcha hota hai aur hamari jo vartaman government hai gaur karne wali baat hai ki isne apne tatvo hi budget mein koi aisi badi ghoshana nahi ki hai jisme railway par sabse zyada kharcha ho isne ek hi baat par focus kiya hai ki aap jo purani jo yojanaye hain unko pura kare isi ka karan hai kyonki jo yojana aaj se 15 saal pehle jiski ghoshana hui us time uska budget alag tha aaj ke jab vaah puri nahi hui hai aaj usko pura karenge office liye budget toh padega theek hai na toh isliye main yah manata hoon ki bilkul sahi hai aur iske peeche ka jo karan hai vaah nagriye nikaay nahi hai uske peeche political reason hai kyonki hum log apni kshamta se adhik ek raajnitik labh lene ke liye hamare raajneta apne alag alag ghoshnaen toh kar dete hain lekin unko implement karne ke bare mein bilkul nahi sochte budget aamantrit karna alag cheez hoti hai tender so jaate hain lekin unko pura karne par dhyan nahi dete vaah nayi nayi ghoshana hai karte rehte the abhi vaah train change hua hai dekhte uske bare mein kya result nikalta hai yah long term process hota hai abhi toh purani yojanaye bhi pending chal rahi hai government try kar rahi hai ki usko jald se jald pura kiya jaaye main bhi result accha hai aur aage aisa nahi ho aur jo political jo ghoshana hai un par lagaam lagane ki zarurat hai yah desh hamara hai hamein keval vote paane ke liye ghoshana nahi karni hai real mein infrastructure develop karne ke liye aur desh ke development ke liye ghoshana karni hai kaam karne hain aise netaon ko chunana hoga toh system apne aap sudhrega

बिल्कुल सही बात है परियोजना में देरी होने की वजह से भारतीय रेल में 176000 करोड़ से भी अधिक

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