सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करना चाहिए?...


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Hariom Bhargava

Journalist

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मित्र आपका प्रसन्न है सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए मित्र नहीं राय से सरकारी स्कूलों में तभी सुधार हो सकता है जब सभी एवं क्लास अधिकारियों के बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाना अनिवार्य कर दिया जाए प्राचीन गुरुकुल पद्धति अपनाई जाए जहां राजा और रंक के बच्चे एक विद्यालय में शिक्षा प्राप्त करें

mitra aapka prasann hai sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ke liye kaun kaun se upay karne chahiye mitra nahi rai se sarkari schoolon me tabhi sudhaar ho sakta hai jab sabhi evam class adhikaariyo ke baccho ko sarkari schoolon me padhana anivarya kar diya jaaye prachin gurukul paddhatee apnai jaaye jaha raja aur rank ke bacche ek vidyalaya me shiksha prapt kare

मित्र आपका प्रसन्न है सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए म

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Dr Ajay Prakash

Naturopath , Acupressure And Ayurveda Doctor

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DR. MANISH

MULTI TASKER & DR.M.D (A.M.), B-PHARMA, PGDM-M

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देखे तुम्हारे सिवा बहुत ही लाजवाब है बहुत ही बढ़िया सवाल है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए देखिए सबसे पहली बात यह है कि जो भी पेरेंट्स कम से कम भी पोस्ट ग्रेजुएट है उनसे महीने में एक बार पंछी पर को मीटिंग करनी चाहिए और उन से डिस्कस करके कोई भी नया आईडिया सामने आता है उसको स्कूल में लागू करना चाहिए नंबर दूसरी बात हर महीने या हर 6 महीने में 3 महीने में जितने भी टीचर से उनको कुछ न कुछ एग्जाम क्वालीफाई करना चाहिए इंटरनल प्रिंसिपल ले या शिक्षा बोर्ड ऐसी वैसी इंटरनेशनल जो बोर्ड है वह उसको बनाकर भेजें तो जिससे टीचर पे रिवीजन करते रहेंगे तो सरकारी स्कूलों में टीचर रिवीजन नहीं करते बच्चों को भूख देते हैं पूरा पढ़ कर सुनाओ बस इसके अलावा कुछ नहीं आता है तीसरी चीज की प्रणाली सरकारी टीचर ने किया कि स्कूल में पढ़ाती नहीं शाम को ट्यूशन पढ़ने आया करो भाई यह बंद कराई जाए इनकी तहकीकात की जय लगातार इन पर विजिलेंस चलाई जाए इसके अलावा जो भी टीचर से उर्दू पैरंट्स और प्रिंसिपल और दो बच्चे हैं हर महीने में दो बार इन कंट्रक्शन होना चाहिए वह भी ओपन डिस्कशन होने से तेज और ग्राउंड बैठकर जिससे कि सब लोग रूबरू हो सके कि हमारे टीचर को क्या आता है तीसरी बात हर उस में सीसीटीवी कैमरे लगने से क्लास रूम में और उनके मॉनिटरिंग होनी चाहिए और इसके अलावा जो प्रिंसिपल है देखो वह को मैनेजमेंट का आदमी नहीं है एडमिनिस्ट्रेशन अकादमी में पढ़ा लिखा आदमी है अपने फील्ड लिखा तो स्कूल के अंदर जो भी मैनेजमेंट का पार्ट है वो एक बेड में स्टेट ऑफिसर नियुक्त करना चाहिए जो पूरे क्लास रूम के अंदर टेबल की सेटिंग है बोर्ड की सेटिंग से टीचर की प्लेसमेंट प्रिंसिपल रिप्लेसमेंट है जितने एडमिनिस्ट्रेटिव वार को करें जिससे कि तक पढ़ाई में ध्यान लगाए इसको टीचर को चला से भेजना है इस पे स्ट्रक्चर भेजना है क्वेश्चन भेजना है यह कि चलिए क्लास देगा या नहीं आई है ऐसा आएगा यह वह करेगा उसको आल द थिंग्स बहुत सारे उपाय हैं तभी मैं आपको अलग से भेजूंगा इसे उपाय के पूरी लिस्ट है कम से कम बीच में सौ तरह के उपायों पर कॉमेंट को फॉलो करती है 15 दिन के अंदर देखेंगे

dekhe tumhare siva bahut hi lajawab hai bahut hi badhiya sawaal hai ki sarkari schoolon me shiksha sudhaarne ke liye kaun kaun se upay karne chahiye dekhiye sabse pehli baat yah hai ki jo bhi parents kam se kam bhi post graduate hai unse mahine me ek baar panchhi par ko meeting karni chahiye aur un se discs karke koi bhi naya idea saamne aata hai usko school me laagu karna chahiye number dusri baat har mahine ya har 6 mahine me 3 mahine me jitne bhi teacher se unko kuch na kuch exam qualify karna chahiye internal principal le ya shiksha board aisi vaisi international jo board hai vaah usko banakar bheje toh jisse teacher pe revision karte rahenge toh sarkari schoolon me teacher revision nahi karte baccho ko bhukh dete hain pura padh kar sunao bus iske alava kuch nahi aata hai teesri cheez ki pranali sarkari teacher ne kiya ki school me padhati nahi shaam ko tuition padhne aaya karo bhai yah band karai jaaye inki tahkikat ki jai lagatar in par vijilens chalai jaaye iske alava jo bhi teacher se urdu Parents aur principal aur do bacche hain har mahine me do baar in kantrakshan hona chahiye vaah bhi open discussion hone se tez aur ground baithkar jisse ki sab log rubaru ho sake ki hamare teacher ko kya aata hai teesri baat har us me cctv camera lagne se class room me aur unke monitoring honi chahiye aur iske alava jo principal hai dekho vaah ko management ka aadmi nahi hai administration academy me padha likha aadmi hai apne field likha toh school ke andar jo bhi management ka part hai vo ek bed me state officer niyukt karna chahiye jo poore class room ke andar table ki setting hai board ki setting se teacher ki placement principal replacement hai jitne administrative war ko kare jisse ki tak padhai me dhyan lagaye isko teacher ko chala se bhejna hai is pe structure bhejna hai question bhejna hai yah ki chaliye class dega ya nahi I hai aisa aayega yah vaah karega usko all the things bahut saare upay hain tabhi main aapko alag se bhejunga ise upay ke puri list hai kam se kam beech me sau tarah ke upayo par comment ko follow karti hai 15 din ke andar dekhenge

देखे तुम्हारे सिवा बहुत ही लाजवाब है बहुत ही बढ़िया सवाल है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा स

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सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए क्या उपाय करना चाहिए इमानदारी पूर्वक योग्य शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए जिससे छात्रों में जो है अच्छी शिक्षा प्राप्त हो और समय-समय पर छात्रों को पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए जिससे कि प्रतियोगिता परीक्षा में संकुल या प्रखंड स्तर पर जिला स्तर पर राज्य स्तर पर एक वर्ग के विद्यार्थियों को प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित करना चाहिए और उसमें प्रोत्साहन देना चाहिए उनको इनाम देना चाहिए जो फर्स्ट सेकंड थर्ड आए और उसी स्कूल के शिक्षक को भी प्रोत्साहन करना चाहिए भारतीय खेलों में खेलकूद या अन्य क्षेत्रों में भी विद्यार्थी को शुरुआती प्रारंभिक शिक्षा से ही उसको परेशान करना चाहिए और एक बात जो हर प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालयों में जो पढ़ाई हो उसकी मातृभाषा में पढ़ाई होनी चाहिए मात्री भाषा में क्या होता है कि बच्चों को सीखने की शक्ति होती है ज्यादा तीव्र होती है जिससे बच्चों जो है उस चीज को बहुत जल्दी एग्जाम कर लेता है जिसे वह उसको जो है काफी विकास करें पागलम बच्चे और वे एक बात है जो स्कूल में खेलकूद की भी व्यवस्था होनी चाहिए स्कूल में खेलकूद की व्यवस्था होनी चाहिए और तरह-तरह के मनोवैज्ञानिक तौर पर जैसे कि बच्चों में पेड़ पौधे में किस तरह से विकास होता है किस तरह हर तरह का मतलब हुआ अनुभव लेना चाहिए जिसमें उन्हें चिड़ियाखाना भी घुमाने जाना ले जाना चाहिए ताकि जो है बच्चों इसमें भी को सहन हो जो हमें सरकारी स्कूल में अन्य तरह केला भी मिलती है चिड़ियाखाना जाने से उसमें क्या होगा तरह के जानवरों को विभिन्न तरीके से देखेगा और उसको समझने की कोशिश करेगा जिसे प्रारंभ से ही शिक्षा में होना चाहिए छात्रों को काफी प्रेमिका से हर चीज सीखने का और आगे बढ़ने का लाभ मिल सके

sarkari schoolon me shiksha sudhaarne ke liye kya upay karna chahiye imaandari purvak yogya shikshakon ki niyukti honi chahiye jisse chhatro me jo hai achi shiksha prapt ho aur samay samay par chhatro ko padhai ke liye protsahit karna chahiye jisse ki pratiyogita pariksha me sankul ya prakhand sthar par jila sthar par rajya sthar par ek varg ke vidyarthiyon ko pratiyogita me bhag lene ke liye aamantrit karna chahiye aur usme protsahan dena chahiye unko inam dena chahiye jo first second third aaye aur usi school ke shikshak ko bhi protsahan karna chahiye bharatiya khelo me khelkud ya anya kshetro me bhi vidyarthi ko shuruati prarambhik shiksha se hi usko pareshan karna chahiye aur ek baat jo har prathmik evam madhyamik vidhayalayo me jo padhai ho uski matrubhasha me padhai honi chahiye matri bhasha me kya hota hai ki baccho ko sikhne ki shakti hoti hai zyada tivra hoti hai jisse baccho jo hai us cheez ko bahut jaldi exam kar leta hai jise vaah usko jo hai kaafi vikas kare pagalam bacche aur ve ek baat hai jo school me khelkud ki bhi vyavastha honi chahiye school me khelkud ki vyavastha honi chahiye aur tarah tarah ke manovaigyanik taur par jaise ki baccho me ped paudhe me kis tarah se vikas hota hai kis tarah har tarah ka matlab hua anubhav lena chahiye jisme unhe chidiyakhana bhi ghumaane jana le jana chahiye taki jo hai baccho isme bhi ko sahan ho jo hamein sarkari school me anya tarah kela bhi milti hai chidiyakhana jaane se usme kya hoga tarah ke jaanvaro ko vibhinn tarike se dekhega aur usko samjhne ki koshish karega jise prarambh se hi shiksha me hona chahiye chhatro ko kaafi premika se har cheez sikhne ka aur aage badhne ka labh mil sake

सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए क्या उपाय करना चाहिए इमानदारी पूर्वक योग्य शिक्षक

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Adv Anil Agarwal

Tanushka Associates, Advocate High Court

2:26
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए सबसे पहले तो स्कूलों से राजनीति को खत्म किया जाए लोगों के अंदर प्रॉपर रूप से साधन उपलब्ध कराए गए बच्चों को बैठने के लिए कुर्सियां दी जाएं शौचालय प्रॉपर उस आफ शौचालय की व्यवस्था की जाए पानी की व्यवस्था की जाए पंखे हैं कूलर हैं इनकी व्यवस्था की जाए बच्चों के लिए और सबसे बड़ी चीज है कि जो बच्चे वह पढ़ रहे हैं उनके लिए खेलकूद कि उनके लिए ले ले वगैरा की और वहां पर उनके लिए कंप्यूटर वगैरह की व्यवस्था प्रॉपर रूप से की जाए जिससे वह बच्चे पढ़ सकें और जो बच्चे सीरियसली पढ़ना चाहते हैं उन बच्चों के लिए जो सक्षम नहीं है उनके लिए बुक्स वगैरह की प्रॉपर व्यवस्था की जाए जो बच्चे सक्षम नहीं है उनको ड्रेस वगैरह की और भी फाइनेंस जो हेल्प गवर्नमेंट कर सकते हो कर सकती है कुछ टीचर्स टैनिंग देनी होगी कैसे बच्चों को पढ़ाना है कैसे आगे ले जाना है और जो टीचर बच्चों के ऊपर मेहनत करें वर्कआउट करें उसकी मॉनिटरिंग करनी होगी हर छह महीने से क्यों मैंने क्या किया है किस तरीके से पढ़ा रहे हैं और जब रिजल्ट आता है तो उसका इलाज करना होगा कि किस का रिजल्ट अच्छा रहा है इसका नॉर्मल आ रहा है और कितना खराब है जिसका खराब आ रहा है तो क्यों आ रहा है क्या कारण है देखना पड़ेगा तभी स्कूलों में आगे ले जा सकते हैं और स्कूल में टीचर के प्रशंसक की मॉनिटरिंग होना बहुत जरूरी है वह सारी स्कूलों में तो पोजीशन है टीचर हाजिरी लगाकर भाग जाते हैं आते ही नहीं दो-दो तीन-तीन इंजेक्शन लगा देते हैं बच्चों को एडमिशन सिर्फ इसलिए दिखाया जाता है जो खाने-पीने की गाड़ी आती है तो इस वजह से उस गाड़ी के लिए आस पड़ोस में बच्चे जो लेबर के बच्चे होते हैं उनका एडमिशन दिखा दिया जाता है जबकि मुझे कल रुप से मानना पढ़ते नहीं पूछा कुछ इतनी देर गाड़ी आती है उतनी देर में रहते हैं खाना खाएंगे और फिर भाग जाते हैं उसे वाटी जल्दी चले जाते हैं तो यह सब चीजें हिंदुस्तान में लोगों ने मिलकर आंखों को धोखा दे रहे हैं कितनी तनखा लेने के बाद भी बच्चों को नहीं पढ़ा रहे हैं इनका मोरल गिर चुका है सबसे बड़ी चीज है जो आपको यह सब चीज मॉनिटरिंग करनी होगी

sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ke liye sabse pehle toh schoolon se raajneeti ko khatam kiya jaaye logo ke andar proper roop se sadhan uplabdh karae gaye baccho ko baithne ke liye kursiyan di jayen shauchalay proper us of shauchalay ki vyavastha ki jaaye paani ki vyavastha ki jaaye pankhe hain cooler hain inki vyavastha ki jaaye baccho ke liye aur sabse badi cheez hai ki jo bacche vaah padh rahe hain unke liye khelkud ki unke liye le le vagera ki aur wahan par unke liye computer vagera ki vyavastha proper roop se ki jaaye jisse vaah bacche padh sake aur jo bacche seriously padhna chahte hain un baccho ke liye jo saksham nahi hai unke liye books vagera ki proper vyavastha ki jaaye jo bacche saksham nahi hai unko dress vagera ki aur bhi finance jo help government kar sakte ho kar sakti hai kuch teachers tanning deni hogi kaise baccho ko padhana hai kaise aage le jana hai aur jo teacher baccho ke upar mehnat kare workout kare uski monitoring karni hogi har cheh mahine se kyon maine kya kiya hai kis tarike se padha rahe hain aur jab result aata hai toh uska ilaj karna hoga ki kis ka result accha raha hai iska normal aa raha hai aur kitna kharab hai jiska kharab aa raha hai toh kyon aa raha hai kya karan hai dekhna padega tabhi schoolon me aage le ja sakte hain aur school me teacher ke prasanshak ki monitoring hona bahut zaroori hai vaah saari schoolon me toh position hai teacher hajiri lagakar bhag jaate hain aate hi nahi do do teen teen injection laga dete hain baccho ko admission sirf isliye dikhaya jata hai jo khane peene ki gaadi aati hai toh is wajah se us gaadi ke liye aas pados me bacche jo labour ke bacche hote hain unka admission dikha diya jata hai jabki mujhe kal roop se manana padhte nahi poocha kuch itni der gaadi aati hai utani der me rehte hain khana khayenge aur phir bhag jaate hain use vati jaldi chale jaate hain toh yah sab cheezen Hindustan me logo ne milkar aakhon ko dhokha de rahe hain kitni tankha lene ke baad bhi baccho ko nahi padha rahe hain inka moral gir chuka hai sabse badi cheez hai jo aapko yah sab cheez monitoring karni hogi

सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए सबसे पहले तो स्कूलों से राजनीति को खत्म किया जाए ल

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Dr. Abhinav Khare

Doctor (MBBS,MD)

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सबसे पहले सरकारी स्कूलों में अगर शिक्षा की व्यवस्था सुधारने है तो उसके लिए हमें सबसे पहले आरक्षण मुक्त करना पड़ेगा आरक्षण मुक्त के अलावा फिर हमको है ना सरकारी स्कूल में जैसे कि बच्चों को बैठने के लिए प्रॉपर बैंक लॉकर क्लासेस मतलब हमें गवर्नमेंट स्कूल को इस तरह से करना रहेगा कि जैसे कि प्राइवेट स्कूल को इतनी सुविधाएं देनी रहेंगे दूसरी चीज सरकारी और प्राइवेट स्कूल में मेन अंतर क्या है कि जो भी इवन गवर्नमेंट ऑफिसर भी होता है वह चाहता है कि हम अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा है अभी सरकारी स्कूल में कौन बच्चे जाते हैं क्योंकि मजदूर वर्ग के लोग हो या अनवर क्लास फैमिली के लोगों को लोग जाते हैं लेकिन फिर भी अगर हमें सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं सुधारने है तो हमें अच्छे टीचर अच्छा स्टाफ अच्छी व्यवस्थाएं अच्छी सुविधाएं हमें स्कूल को देनी होगी तभी सरकारी स्कूलों की व्यवस्थाएं बदल पाएंगे

sabse pehle sarkari schoolon me agar shiksha ki vyavastha sudhaarne hai toh uske liye hamein sabse pehle aarakshan mukt karna padega aarakshan mukt ke alava phir hamko hai na sarkari school me jaise ki baccho ko baithne ke liye proper bank locker classes matlab hamein government school ko is tarah se karna rahega ki jaise ki private school ko itni suvidhaen deni rahenge dusri cheez sarkari aur private school me main antar kya hai ki jo bhi even government officer bhi hota hai vaah chahta hai ki hum apne baccho ko private school me padha hai abhi sarkari school me kaun bacche jaate hain kyonki majdur varg ke log ho ya anwar class family ke logo ko log jaate hain lekin phir bhi agar hamein sarkari schoolon ki vyavasthaen sudhaarne hai toh hamein acche teacher accha staff achi vyavasthaen achi suvidhaen hamein school ko deni hogi tabhi sarkari schoolon ki vyavasthaen badal payenge

सबसे पहले सरकारी स्कूलों में अगर शिक्षा की व्यवस्था सुधारने है तो उसके लिए हमें सबसे पहले

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सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए बहुत सारे ऊपर हैं कुछ छुपाया है जिस पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए पर लेकर सरकारी नौकरी हो या सरकारी टीचर है प्राइवेट और सरकारी में क्या डिफरेंस है आज हर कोई जितने भी बाल गांव या शहर के बाल बच्चे हैं वह अपने बाल बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पड़ना चाहते हैं कि सबसे पहले से कम है के टीचर का भी सरकारी टीचर बनने के बाद जो वही टीचर का प्राइवेट में रुका करके आते हैं तो उसका असर और सरकारी में हो जाने का उसका स्तर दोनों में डिफरेंस हो जाता है कि मेरी नौकरी सिक्स है उसको अपना धर्म मान करके जो मेरा कर्तव्य उसको भुला जाते हैं और उस चीज को मानकर के अच्छे से अगर पढ़ाई करेंगे अपने टाइम पर स्कूल जाएंगे और टाइम पाएंगे अपनी जितना क्लास का पोषण है उसको ठीक करेंगे यह तो हो गया दूसरी अवस्था है कि सरकारी स्कूल में टीचर लोग का भी शिकायतें की थीं कि उनका वेतन समझ में नहीं आया इस पर भी ध्यान देना चाहिए कि वेतन उन लोगों का समय पर मिले और यह सरकारी स्कूल में टीचर के बहाली का जो प्रक्रिया है इसको इसको थोड़ा चेंज करना पड़ेगा कभी आप मार्केट चिपक कर देते हैं कभी की टॉप किया है उसे मार्क्स की सब सिलेक्शन होता है एक कंप्यूटर एग्जाम और कंप्यूटर एक्जाम अच्छी तरीका सुना चंपी होती तो एग्जाम में धांधली हो जाता है कुछ लोग पैसे वाले हैं तो वहां पैसे देकर का जाते हैं उसके पास क्वालिटी नहीं है उसके पास खुद नॉलेज नहीं है तो फिर वह बच्चों को क्या शिक्षा देना और सिलेबस सिलेबस अभी भी सरकारी स्कूल में कुछ ओल्ड सिलेबस जिस समय के कोड इन मॉडर्न एज के कोडिंग नहीं है तो उस पर ध्यान देना पड़ेगा और देवास में बदलाव करने पर कुछ भी चीज और टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना पड़ेगा अगर हम स्कूल आते हैं तो बच्चे को स्कूल आने के लिए कुछ प्रेरणादायक कार्य हर एक सप्ताहिक मानसिक या 15 दिन होते रहना चाहिए सरकार ने इस कदम उठाया है जो सराहनीय है सरकार के भरोसे रहेंगे तब बसना सुधरेगा ऐसा नहीं हो सकता यह गार्डन को भी गार्डन बाल बच्चे की कार जन को भी ध्यान देना पड़ेगा साथ साथ पिक्चर को ध्यान देना पड़ेगा और वहां की समाज समाज क P1 देखरेख बनता है कि हम स्कूल में बराबर जाए शिक्षक से मिले गार्डन और शिक्षक में आपस में एक समंदर बने सप्ताहिक 15 दिन या मासिक मीटिंग हो सारे बच्चों के कार जन्मों के साथ और उनका वह मार्कशीट उनका प्रोग्रेसिव यह सब कर चेक किया जाए इस बातों का धर्म ध्यान देंगे तो डेफिनेटली बहुत कुछ बदलाव आएगा प्राइवेट में हम इतने पैसे इन्वेस्ट करते हैं प्राइवेट स्कूल में जॉब सरकारी में मुफ्त में हमें तो बच्चों का आजकल खाना भी दिया जा रहा है माध्यमिक भोजन जो होता दिन का भोजन वह भोजन मिलता उसमें भी पोस्टिक आहार का ख्याल रखा जरा

sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ke liye bahut saare upar hain kuch chupaya hai jis par zyada dhyan dena chahiye par lekar sarkari naukri ho ya sarkari teacher hai private aur sarkari me kya difference hai aaj har koi jitne bhi baal gaon ya shehar ke baal bacche hain vaah apne baal baccho ko sarkari schoolon me nahi padhna chahte hain ki sabse pehle se kam hai ke teacher ka bhi sarkari teacher banne ke baad jo wahi teacher ka private me ruka karke aate hain toh uska asar aur sarkari me ho jaane ka uska sthar dono me difference ho jata hai ki meri naukri six hai usko apna dharm maan karke jo mera kartavya usko bhula jaate hain aur us cheez ko maankar ke acche se agar padhai karenge apne time par school jaenge aur time payenge apni jitna class ka poshan hai usko theek karenge yah toh ho gaya dusri avastha hai ki sarkari school me teacher log ka bhi shikayaten ki thi ki unka vetan samajh me nahi aaya is par bhi dhyan dena chahiye ki vetan un logo ka samay par mile aur yah sarkari school me teacher ke bahali ka jo prakriya hai isko isko thoda change karna padega kabhi aap market chipak kar dete hain kabhi ki top kiya hai use marks ki sab selection hota hai ek computer exam aur computer exam achi tarika suna champi hoti toh exam me dhandhali ho jata hai kuch log paise waale hain toh wahan paise dekar ka jaate hain uske paas quality nahi hai uske paas khud knowledge nahi hai toh phir vaah baccho ko kya shiksha dena aur syllabus syllabus abhi bhi sarkari school me kuch old syllabus jis samay ke code in modern age ke coding nahi hai toh us par dhyan dena padega aur devas me badlav karne par kuch bhi cheez aur technology ka istemal karna padega agar hum school aate hain toh bacche ko school aane ke liye kuch preranadayak karya har ek saptahik mansik ya 15 din hote rehna chahiye sarkar ne is kadam uthaya hai jo sarahniya hai sarkar ke bharose rahenge tab basana sudhrega aisa nahi ho sakta yah garden ko bhi garden baal bacche ki car jan ko bhi dhyan dena padega saath saath picture ko dhyan dena padega aur wahan ki samaj samaj k P1 dekhrekh banta hai ki hum school me barabar jaaye shikshak se mile garden aur shikshak me aapas me ek samundar bane saptahik 15 din ya maasik meeting ho saare baccho ke car janmon ke saath aur unka vaah marksheet unka progressive yah sab kar check kiya jaaye is baaton ka dharm dhyan denge toh definetli bahut kuch badlav aayega private me hum itne paise invest karte hain private school me job sarkari me muft me hamein toh baccho ka aajkal khana bhi diya ja raha hai madhyamik bhojan jo hota din ka bhojan vaah bhojan milta usme bhi paustik aahaar ka khayal rakha zara

सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए बहुत सारे ऊपर हैं कुछ छुपाया है जिस पर ज्यादा ध्या

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Shubham Namdev

Business owner(Engineer)

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इस विषय में सिर्फ मेरा यह मानना है कि शिक्षा का काम सिर्फ शिक्षा देना है ना कि पल्स पोलियो पिलाना जनसंख्या जनगणना सर्वे करना बच्चों के लिए मेंटेनेंस का प्रबंध करना किराना लाला जन संपर्क करना यह सब काम शिक्षक के शिक्षक का काम केवल शिक्षा देना है और अगर वह शिक्षा किसी ने बहुत ही अच्छा रहेगा सरकारी स्कूलों को सुधारने के लिए आज भी अगर देखें तो शिक्षा का प्राइवेटाइजेशन पहुंचकर काम में व्यस्त रहता है टाइम नहीं दे पाता है उसके साथ सरकार कहती है कि इतने बच्चों को पास कीजिए यह सब चीजें है सरकारी स्कूलों के शिक्षक का काम सिर्फ कि जो व्यक्ति काम है उसी में रहता है जन शिक्षक कहीं व्हाट्सएप पर यह रिपोर्ट भिजवा दो वह भिजवा दो बढ़ता जा रहा है प्रशिक्षण देने की कंडीशन कर दिया जाएगा यह सब चीजें सरकारी स्कूलों को एकदम घर तक छोड़ रही हैं इसके सुधार के लिए सबसे पहले क्या करना चाहिए ऐसे ही चलता है कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जहां पर कवरेज नहीं है इंटरनेट नहीं है मोबाइल नेटवर्क नहीं है वहां पर किसी शिक्षक को आप टेबलेट जिसे कहते हैं वह देखकर किसी इंटीरियर के बच्चों को पढ़ाने कहेंगे तो बातें शिक्षकों में तीसरा सिर्फ गणित शिक्षा पर जोर देने की प्राथमिकता देकर गवर्नमेंट सरकारी स्कूल बहुत अच्छा काम कर सकते हैं हम पहले देखते हैं कि पहले के जमाने में सरकारी स्कूलों की शिक्षा बहुत अच्छी होती थी मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह सब चीजें खराब है या फिर जो आजकल 10 मुख्य रूप से शिक्षकों को शिक्षा परिषद रखें अगर सरकार ऐसा होगा और धीरे-धीरे अपना चालू हुआ है हमें नकारात्मक बातें नहीं कर सकते हैं वह पहले से ही बीएड डीएड डीएलएड करेंगे होते हैं तो वह शिक्षा पद्धति अच्छी तरह समझते हैं जैसे-जैसे शिक्षा का रहे हो बिल्कुल टेक्नोलॉजी से जुड़े हुए इसलिए धीरे-धीरे धन्यवाद

is vishay me sirf mera yah manana hai ki shiksha ka kaam sirf shiksha dena hai na ki pulse polio pilaana jansankhya janganana survey karna baccho ke liye Maintenance ka prabandh karna kirana lala jan sampark karna yah sab kaam shikshak ke shikshak ka kaam keval shiksha dena hai aur agar vaah shiksha kisi ne bahut hi accha rahega sarkari schoolon ko sudhaarne ke liye aaj bhi agar dekhen toh shiksha ka privatisation pahuchkar kaam me vyast rehta hai time nahi de pata hai uske saath sarkar kehti hai ki itne baccho ko paas kijiye yah sab cheezen hai sarkari schoolon ke shikshak ka kaam sirf ki jo vyakti kaam hai usi me rehta hai jan shikshak kahin whatsapp par yah report bhijwa do vaah bhijwa do badhta ja raha hai prashikshan dene ki condition kar diya jaega yah sab cheezen sarkari schoolon ko ekdam ghar tak chhod rahi hain iske sudhaar ke liye sabse pehle kya karna chahiye aise hi chalta hai kuch kshetra aise hain jaha par coverage nahi hai internet nahi hai mobile network nahi hai wahan par kisi shikshak ko aap tablet jise kehte hain vaah dekhkar kisi interior ke baccho ko padhane kahenge toh batein shikshakon me teesra sirf ganit shiksha par jor dene ki prathamikta dekar government sarkari school bahut accha kaam kar sakte hain hum pehle dekhte hain ki pehle ke jamane me sarkari schoolon ki shiksha bahut achi hoti thi main yah nahi keh raha hoon ki yah sab cheezen kharab hai ya phir jo aajkal 10 mukhya roop se shikshakon ko shiksha parishad rakhen agar sarkar aisa hoga aur dhire dhire apna chaalu hua hai hamein nakaratmak batein nahi kar sakte hain vaah pehle se hi BEd died dled karenge hote hain toh vaah shiksha paddhatee achi tarah samajhte hain jaise jaise shiksha ka rahe ho bilkul technology se jude hue isliye dhire dhire dhanyavad

इस विषय में सिर्फ मेरा यह मानना है कि शिक्षा का काम सिर्फ शिक्षा देना है ना कि पल्स पोलियो

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Neha Singh

Journalist

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Rajender Singh

Journalist

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Laxmikant Vyas

Politician

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सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों और जितने भी पॉलिटिक्स में हैं उनके बच्चों को सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए भी जाना चाहिए सरकार की तरफ से आदेश लागू जाना जी बीजेपी पॉलीटिशियन है मिनिस्टर है या जितने भी पदाधिकारी है सरकारी पदाधिकारी उनके बच्चे अक्षर अप सरकारी स्कूल में ही पड़ेंगे वह प्राइवेट स्कूल में अपने बच्चों को नहीं पढ़ा भाई जिस दिन ऐसा हो जाएगा सरकारी शिक्षा प्रणाली भी सुधर जाएगी और शिक्षा का स्तर भी सुधर जाएगा

sabse pehle sarkari karmachariyon aur jitne bhi politics me hain unke baccho ko sarkari school me padhne ke liye bhi jana chahiye sarkar ki taraf se aadesh laagu jana ji bjp politician hai minister hai ya jitne bhi padadhikaari hai sarkari padadhikaari unke bacche akshar up sarkari school me hi padenge vaah private school me apne baccho ko nahi padha bhai jis din aisa ho jaega sarkari shiksha pranali bhi sudhar jayegi aur shiksha ka sthar bhi sudhar jaega

सबसे पहले सरकारी कर्मचारियों और जितने भी पॉलिटिक्स में हैं उनके बच्चों को सरकारी स्कूल में

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सरकारी स्कूलों को सुधार के लिए शिक्षा में सुधार के लिए सर्वप्रथम दीजिए दीजिए जो है शिक्षा जिला शिक्षा अधिकारी है उन पर आई पी एस आर एस लगाने चाहिए और पूरे मॉनिटरिंग गांव के स्तर पर होनी चाहिए जैसा किसके सरकारी में डरा बदला हुआ है सरकारी कर्मचारियों को शिक्षकों को अलग-अलग कामों में लगा दिया जाता शिक्षक की जो भावना मूल्य उनसे दूर हटा कर दूसरे कामों में लगाया जाता सरकार के दूसरे कार्यों के लिए जैसे बीएलओ लगा दिया इससे पशु गणना में लगा दिया जनगणना में लगा दिया मैंने लगाकर सिर्फ शिक्षा पर ध्यान दिया जाए तो हो सकता शिक्षा पर सुधार हो और थोड़ा मां-बाप अभिभावकों को भी यह चाहिए कि शिक्षा के प्रति जागरूकता लाएं सवाल पूछे लेकिन ऐसा कर नहीं पाते इससे क्या शिक्षा का डेरा बिगड़ा हुआ है सबसे पहले मैं यह चाहूंगा जिला शिक्षा अधिकारी हो उनको आई पी एस आर एस जैसे अधिकारियों के लगेंगे तो वह सुधार कर

sarkari schoolon ko sudhaar ke liye shiksha me sudhaar ke liye sarvapratham dijiye dijiye jo hai shiksha jila shiksha adhikari hai un par I p S R S lagane chahiye aur poore monitoring gaon ke sthar par honi chahiye jaisa kiske sarkari me dara badla hua hai sarkari karmachariyon ko shikshakon ko alag alag kaamo me laga diya jata shikshak ki jo bhavna mulya unse dur hata kar dusre kaamo me lagaya jata sarkar ke dusre karyo ke liye jaise BLO laga diya isse pashu ganana me laga diya janganana me laga diya maine lagakar sirf shiksha par dhyan diya jaaye toh ho sakta shiksha par sudhaar ho aur thoda maa baap abhibhavakon ko bhi yah chahiye ki shiksha ke prati jagrukta laye sawaal pooche lekin aisa kar nahi paate isse kya shiksha ka dera bigda hua hai sabse pehle main yah chahunga jila shiksha adhikari ho unko I p S R S jaise adhikaariyo ke lagenge toh vaah sudhaar kar

सरकारी स्कूलों को सुधार के लिए शिक्षा में सुधार के लिए सर्वप्रथम दीजिए दीजिए जो है शिक्षा

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Surendra Sharma

अध्यापन

1:18

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वर्तमान में सरकारी स्कूलों में जो कार्यक्रम चल रहा है वह निसंदेह परिवर्तन की दौड़ में शामिल हो रहे हैं यानी जागरूकता पैदा हो रही है और शिक्षक वर्तमान में अच्छे कार्य करने लगे हैं दोबारा से खोई हुई गरिमा को लौटाने में युवा शिक्षक निश्चित रूप से कामयाब होंगे मेरी सभी शिक्षकों को शुभकामनाएं इसे और बेहतर बनाने के लिए युवाओं को सोशियल एप्स के द्वारा जोड़कर इस तरह के कार्यक्रम में भाग लेकर और अधिक सजग बनना चाहिए जिससे अपने आप हमें नए-नए आईडिया प्राप्त होंगे और हम उन्हें अप्लाई करके या अच्छे विचारों को फॉलो करके इन कार्यों को भूमि पटेल पर उतारने का प्रयास करें तो निश्चित रूप से सफल हो

vartmaan mein sarkari schoolon mein jo karyakram chal raha hai vaah nisandeh parivartan ki daudh mein shaamil ho rahe hain yani jagrukta paida ho rahi hai aur shikshak vartaman mein acche karya karne lage hain dobara se khoi hui garima ko lautane mein yuva shikshak nishchit roop se kamyab honge meri sabhi shikshakon ko subhkamnaayain ise aur behtar banane ke liye yuvaon ko social apps ke dwara jodkar is tarah ke karyakram mein bhag lekar aur adhik sajag banna chahiye jisse apne aap hamein naye naye idea prapt honge aur hum unhe apply karke ya acche vicharon ko follow karke in karyo ko bhoomi patel par utarane ka prayas kare toh nishchit roop se safal ho

वर्तमान में सरकारी स्कूलों में जो कार्यक्रम चल रहा है वह निसंदेह परिवर्तन की दौड़ में शामि

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विकेश कुमार प्रकाशन का भविष्य अंधकार में है उचित होता है क्योंकि उनको पता है कि वह कुछ लिख दी जिंदगी पंजाबी चुटकुले

vikas kumar prakashan ka bhavishya andhakar mein hai uchit hota hai kyonki unko pata hai ki vaah kuch likh di zindagi punjabi chutkule

विकेश कुमार प्रकाशन का भविष्य अंधकार में है उचित होता है क्योंकि उनको पता है कि वह कुछ लिख

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Akash Mishra

Yoga Expert | Author | Naturopathist | Acupressure Specialist |

2:49
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आपका प्रश्न है सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार आने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए पहली बात तो यह है कि सरकार को हर एक स्तर पर इस चीज के लिए ध्यान देना चाहिए उसी बाजू अच्छा उच्चाधिकारी है जो इससे शिक्षा के क्षेत्र क्षेत्र में ऊंचे पायदान पर आने वाली अधिकारी है उनको ध्यान देना चाहिए कि सबसे पहली बात तो शिक्षा रोज आ रहे कि नहीं आ रहे हैं यह बहुत बड़ा सवाल है क्योंकि अधिकतर सरकारी विद्यालयों में जो शिक्षक हैं वह फूल जाती ही नहीं है यदि वास्तविक रूप से हम इसका सर्वे करना स्टार्ट करें तो हर एक टीचर 15 से 20 दिन या कह सकते उससे भी कम दिनों के लिए विद्यालय जाता होगा जो ग्राउंड लेवल की रैली ग्राउंड लेवल की रैली थी यह भी है कि कई सारे टीचर जाते ही नहीं है किसी प्रकार का उन्होंने किसी तरीके से जुगाड़ कर लिया यह किसी बड़े अधिकारी को कुछ ले दे कर के उन्होंने ऐसा सिस्टम सेट कर लिया कि वह जाते ही नहीं है विद्यालय तो इन सारी चीजों पर विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए दूसरी बात यह है कि वह किस प्रकार की शिक्षा बच्चों को मुहैया करा रही है अभी दिखना चाहिए क्योंकि सरकारी कॉलेज विद्यालयों में खासकर जो प्राइमरी है प्री प्राइमरी और फैमिली के जो स्कूल है उसमें क्या होता है कि वह फर्स्ट से लेकर सिर तक के बच्चों को हर दिन लगभग एक ही पढ़ाते हैं तो कोई कैटिगराइजेशन नहीं है फर्स्ट क्लास के बच्चे को भी एबीसीडी 1 क्लास के बच्चों को भी से बनाई जाती है इन सारी चीजों पर ध्यान देने टेबल पर दूसरी चीज का पैसा कटला चाहिए यदि आप सही से नहीं पढ़ाते हैं यदि आप रोज विद्यालय नहीं जाते हैं इस चीज की पुष्टि होती है तो उनका पैसा काटना चाहिए तीसरी चीज यह है एक और बात जो शिक्षकों के लिए एक अवश्य है कि शिक्षक का कार्य सिर्फ शिक्षा देना होता है उनको अन्य प्रकार के कार्यों में नहीं लगाना चाहिए चुनाव की ड्यूटी अन्य प्रकार के जोक्स काम उनको दिए रहते हैं इस प्रकार की ऋतु में उनको नहीं लगाना चाहिए क्योंकि जब गवर्नमेंट उनके साथ ऐसी सारी चीजें करती है तो डायरेक्टली इलेक्टेड फिर उनका अपना काम है उससे मनाया जाता है तो इन सारी चीजों को ध्यान देना चाहिए दूसरी चीज गवर्नमेंट को अगर सख्त होना है इन सारी चीजों को अच्छा करना है एक रूल बनाने के जितने भी सरकारी कर्मचारी है उनके बच्चे सरकारी स्कूलों में ही पड़ेंगे यदि ऐसा रूल बनेगा तब दबाव होगा सबके ऊपर की उच्च शिक्षा स्तर को प्राइवेट कॉलेजेस स्कूल के बराबर रह गए उनको बढ़ाया जाए यूट्यूब चैनल योग नाम से तो कृपया इस चैनल को सब्सक्राइब शेयर लाइक और कमेंट करें धन्यवाद

aapka prashna hai sarkari schoolon mein shiksha sudhaar aane ke liye kaun kaunsi upay karne chahiye pehli baat toh yah hai ki sarkar ko har ek sthar par is cheez ke liye dhyan dena chahiye usi baju accha uchchadhikari hai jo isse shiksha ke kshetra kshetra mein unche payadan par aane wali adhikari hai unko dhyan dena chahiye ki sabse pehli baat toh shiksha roj aa rahe ki nahi aa rahe hai yah bahut bada sawaal hai kyonki adhiktar sarkari vidhayalayo mein jo shikshak hai vaah fool jaati hi nahi hai yadi vastavik roop se hum iska survey karna start kare toh har ek teacher 15 se 20 din ya keh sakte usse bhi kam dino ke liye vidyalaya jata hoga jo ground level ki rally ground level ki rally thi yah bhi hai ki kai saare teacher jaate hi nahi hai kisi prakar ka unhone kisi tarike se jugaad kar liya yah kisi bade adhikari ko kuch le de kar ke unhone aisa system set kar liya ki vaah jaate hi nahi hai vidyalaya toh in saree chijon par vishesh roop se dhyan dena chahiye dusri baat yah hai ki vaah kis prakar ki shiksha baccho ko muhaiya kara rahi hai abhi dikhana chahiye kyonki sarkari college vidhayalayo mein khaskar jo primary hai pri primary aur family ke jo school hai usme kya hota hai ki vaah first se lekar sir tak ke baccho ko har din lagbhag ek hi padhate hai toh koi kaitigraijeshan nahi hai first kashi ke bacche ko bhi ABCD 1 kashi ke baccho ko bhi se banai jaati hai in saree chijon par dhyan dene table par dusri cheez ka paisa katala chahiye yadi aap sahi se nahi padhate hai yadi aap roj vidyalaya nahi jaate hai is cheez ki pushti hoti hai toh unka paisa kaatna chahiye teesri cheez yah hai ek aur baat jo shikshakon ke liye ek avashya hai ki shikshak ka karya sirf shiksha dena hota hai unko anya prakar ke karyo mein nahi lagana chahiye chunav ki duty anya prakar ke jokes kaam unko diye rehte hai is prakar ki ritu mein unko nahi lagana chahiye kyonki jab government unke saath aisi saree cheezen karti hai toh directly elected phir unka apna kaam hai usse manaya jata hai toh in saree chijon ko dhyan dena chahiye dusri cheez government ko agar sakht hona hai in saree chijon ko accha karna hai ek rule banne jitne bhi sarkari karmchari hai unke bacche sarkari schoolon mein hi padenge yadi aisa rule banega tab dabaav hoga sabke upar ki ucch shiksha sthar ko private colleges school ke barabar reh gaye unko badhaya jaaye youtube channel yog naam se toh kripya is channel ko subscribe share like aur comment kare dhanyavad

आपका प्रश्न है सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधार आने के लिए कौन-कौन से उपाय करने चाहिए पहली

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Ritu Goyal

Motivational Speaker

2:24
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आपका क्वेश्चन है सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करना चाहिए शायद यह बात मैं और आप बहुत अच्छे से जानते हैं पहले के टाइम के लेकर सरकारी स्कूलों के कंडीशन आज के टाइम में बहुत ज्यादा अच्छी हो चुकी है लेकिन फिर भी पता नहीं कहीं ना कहीं ऐसा क्यों लगता है कि प्राइवेट स्कूल और सरकारी स्कूल में कहीं ना कहीं अब डाउन रहता है जैसे सरकारी स्कूल के बच्चों को बहुत टैलेंटेड बच्चे हैं बहुत अच्छा ड्रेसिंग सेंस है बहुत अच्छे मैनर्स है बट कहीं ना कहीं 10 20% यह चीज तो की जाती है कि आप लोग डाउन टू अर्थ है तो प्लीज आई नो कि रूल्स रेगुलेशन सीक्वल है प्राइवेट के कंपेयर में गवर्नमेंट में काफी फिट हो चुके हैं टीचर स्टडी काफी अच्छी है लेकिन सरकारी स्कूलों की शिक्षा को दूर भगाने के लिए मैं फिर भी यह बात कहना चाहूंगी कि बच्चों को कुछ दिल्ली क्लासेस में जरूरी नहीं है कि हर बच्चों को सब कुछ समझ में आता हो तो आप को टेक्स्ट क्लासिक देना प्रोवाइड कीजिए एंड सेकंड थिंग इज नॉट और आपको एक डाउट लार्जेस्ट रखनी चाहिए बीच में ओन्ली वन टाइम इन्वेस्टमेंट को डाउट है किसी भी तरह के टॉपिक में किसी भी तरह के सब्जेक्ट में या वह पूरा ज्यादा पढ़ने में इंटरेस्टेड है मुझे यह मैं ही बात जानती हूं कि आज के टाइम में सरकारी है प्राइवेट स्कूल में कोई भी ऐसी मनमानी नहीं चलती है टीचर्स की प्राइवेट स्कूल में भी काफी हो चुका है कि जो स्कूल के टीचर से है वह सिम स्कूल इन क्लास के बच्चों को या सेम स्कूल में रहने वाले टीचर उनको होम ट्यूशंस प्रोवाइड नहीं कर सकते ऐसे स्ट्रिक्टनेस की जाती है इसलिए मैं यह कहना चाहूंगी सरकारी स्कूल में ऐसी स्थित में सही है वह बच्चों को डाउट क्लासेस प्रोवाइड कीजिए स्कूल में एक्स्ट्रा क्लासेस प्रोवाइड कीजिए जिसकी वजह से बच्चों की शिक्षा में सुधार होगा जो कमजोर बच्चे हैं वह भी अपने आप को बहुत अच्छा समझने लगेंगे उनके लिए मोटिवेशनल पॉइंट होगा और बाकी सरकारी स्कूल की शिक्षा सुधारने के लिए आप लोगों को कुछ अलग अलग सा मीनार इवेंट्स कुछ ऐसे भी प्रोवाइड करने चाहिए आई नो कि आप सरकारी स्कूलों का वजन ज्यादा नहीं होता लेकिन बजट में आप गवर्नमेंट के साइड से और कुछ सूरज के साइड से कलेक्शन करके बच्चों को इवेंट सेमिनार एक्स्ट्रा क्लासेस डाउन क्लासेस और कुछ एक्स्ट्रा क्रिएटिव सर्विसेस प्रोवाइड कर सकते हैं थैंक यू

aapka question hai sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ke liye kaun kaun se upay karna chahiye shayad yah baat main aur aap bahut acche se jante hain pehle ke time ke lekar sarkari schoolon ke condition aaj ke time me bahut zyada achi ho chuki hai lekin phir bhi pata nahi kahin na kahin aisa kyon lagta hai ki private school aur sarkari school me kahin na kahin ab down rehta hai jaise sarkari school ke baccho ko bahut talented bacche hain bahut accha dressing sense hai bahut acche Manners hai but kahin na kahin 10 20 yah cheez toh ki jaati hai ki aap log down to arth hai toh please I no ki rules regulation sequel hai private ke compare me government me kaafi fit ho chuke hain teacher study kaafi achi hai lekin sarkari schoolon ki shiksha ko dur bhagane ke liye main phir bhi yah baat kehna chahungi ki baccho ko kuch delhi classes me zaroori nahi hai ki har baccho ko sab kuch samajh me aata ho toh aap ko text classic dena provide kijiye and second thing is not aur aapko ek doubt largest rakhni chahiye beech me only van time investment ko doubt hai kisi bhi tarah ke topic me kisi bhi tarah ke subject me ya vaah pura zyada padhne me interested hai mujhe yah main hi baat jaanti hoon ki aaj ke time me sarkari hai private school me koi bhi aisi manmani nahi chalti hai teachers ki private school me bhi kaafi ho chuka hai ki jo school ke teacher se hai vaah sim school in class ke baccho ko ya same school me rehne waale teacher unko home tyushans provide nahi kar sakte aise strictness ki jaati hai isliye main yah kehna chahungi sarkari school me aisi sthit me sahi hai vaah baccho ko doubt classes provide kijiye school me extra classes provide kijiye jiski wajah se baccho ki shiksha me sudhaar hoga jo kamjor bacche hain vaah bhi apne aap ko bahut accha samjhne lagenge unke liye Motivational point hoga aur baki sarkari school ki shiksha sudhaarne ke liye aap logo ko kuch alag alag sa minar events kuch aise bhi provide karne chahiye I no ki aap sarkari schoolon ka wajan zyada nahi hota lekin budget me aap government ke side se aur kuch suraj ke side se collection karke baccho ko event seminar extra classes down classes aur kuch extra creative services provide kar sakte hain thank you

आपका क्वेश्चन है सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करना चाहिए शायद य

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आपका सवाल है सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करना चाहिए जी हां वर्तमान समय में सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने की नितांत आवश्यकता है सरकारी स्कूल बिगड़े क्यों है सवाल यह भी है इसका कारण है लगातार बाहरी और आंतरिक तुच्छ राजनीति का प्रवेश पाठ्यक्रमों में सत्तासीन के अनुसार परिवर्तन और अधिकांश राज्य और केंद्र की कार्य योजनाओं को सरकारी स्कूलों के माध्यम से लागू करवाना विभिन्न प्रकार की घटनाएं आंकड़े जुटाने का काम सरकारी स्कूलों को सौंप देना जिसके कारण सरकारी स्कूल में सब कुछ हो रहा है केवल पढ़ाई नहीं हो पा रहे हैं यदि वास्तव में सरकारी स्कूलों को सुधारना है तो सभी प्रकार का हस्तक्षेप वहां से बंद करना होगा शिक्षकों को शिक्षण कार्य करने के लिए स्वतंत्रता देनी होगी उनको अपने बच्चों के लिए पर्याप्त समय देना होगा उनके और उनके बीच शिक्षार्थियों के बीच में जो काम का बोझ है योजनाओं आंकड़ों का खेल है उसे हटाना होगा और इसके साथ-साथ उनकी जो समस्याएं हैं उनके जो कार हैं उनकी पूर्ति में समय पात्रता और निरंतरता लानी होगी तो सरकारी स्कूल सुधरेंगे शिक्षा सुधरेगी बच्चे सुधरेंगे और उसका एक अच्छा संदेश परिवार समाज देश में जाएगा धन्यवाद

aapka sawaal hai sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ke liye kaun kaunsi upay karna chahiye ji haan vartaman samay mein sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ki nitant avashyakta hai sarkari school bigade kyon hai sawaal yah bhi hai iska karan hai lagatar bahri aur aantarik tucch raajneeti ka pravesh paathyakramon mein sattasin ke anusaar parivartan aur adhikaansh rajya aur kendra ki karya yojnao ko sarkari schoolon ke madhyam se laagu karwana vibhinn prakar ki ghatnaye aankade jutane ka kaam sarkari schoolon ko saunp dena jiske karan sarkari school mein sab kuch ho raha hai keval padhai nahi ho paa rahe hain yadi vaastav mein sarkari schoolon ko sudharna hai toh sabhi prakar ka hastakshep wahan se band karna hoga shikshakon ko shikshan karya karne ke liye swatantrata deni hogi unko apne baccho ke liye paryapt samay dena hoga unke aur unke beech shiksharthiyon ke beech mein jo kaam ka bojh hai yojnao aankado ka khel hai use hatana hoga aur iske saath saath unki jo samasyaen hain unke jo car hain unki purti mein samay patrata aur nirantarata lani hogi toh sarkari school sudhrenge shiksha sudharegi bacche sudhrenge aur uska ek accha sandesh parivar samaj desh mein jaega dhanyavad

आपका सवाल है सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए कौन-कौन से उपाय करना चाहिए जी हां वर्

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दिखी सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए उपाय हैं पहली बार की सरकारी स्कूल जो शिक्षक है पहले तो समय पर आएं और बच्चों को अपनी जिम्मेदारी के साथ बच्चों को उज्जवल भविष्य के लिए अच्छी शिक्षा दें अच्छी शिक्षा के साथ उन्हें अच्छा व्यवहार में बताएं कैसे क्या किसके साथ पेश आना है उन्हें अच्छे माहौल में कैसे रहना है वह सारी चीजें और मेरा मानना है कि सरकारी स्कूलों की शिक्षा अभी तक मुझे तो लगता है कि ऐसे स्कूल हैं जहां पर ऐसे कैसे जाते हैं बाकी यह बहुत बहुत ज्यादा और सुधार आया सरकारी स्कूलों में क्योंकि आप समझते हैं कि आपका जब इंटर लेवल तक जाते हैं तो आप टाइप होता है कि मैं अच्छे सरकारी स्कूल से मैं वहां पर प्रवेश लूं और वहां से पढ़ाई करके कुछ अच्छा करने की सोचो तो सरकारी स्कूल की तुलना ही नहीं चलता है और रही बात को तो जैसे कुछ प्राथमिक विद्यालय हैं उसके कुछ ऐसे आते हैं मां की आवश्यकता है और जैसे शिक्षक है जो इतनी जिम्मेदारी से पढ़ाते हैं कि बच्चे आज अपने अपने मुकाम पर पहुंचे हैं कि अब तारीफ का जवाब मेरी तरफ से शिक्षक और विद्यार्थी को दोनों को एक दूसरे को

dikhi sarkari schoolon ki shiksha sudhaarne ke liye upay hain pehli baar ki sarkari school jo shikshak hai pehle toh samay par aaen aur baccho ko apni jimmedari ke saath baccho ko ujjawal bhavishya ke liye achi shiksha de achi shiksha ke saath unhe accha vyavhar mein bataye kaise kya kiske saath pesh aana hai unhe acche maahaul mein kaise rehna hai vaah saari cheezen aur mera manana hai ki sarkari schoolon ki shiksha abhi tak mujhe toh lagta hai ki aise school hain jaha par aise kaise jaate hain baki yah bahut bahut zyada aur sudhaar aaya sarkari schoolon mein kyonki aap samajhte hain ki aapka jab inter level tak jaate hain toh aap type hota hai ki main acche sarkari school se main wahan par pravesh loon aur wahan se padhai karke kuch accha karne ki socho toh sarkari school ki tulna hi nahi chalta hai aur rahi baat ko toh jaise kuch prathmik vidyalaya hain uske kuch aise aate hain maa ki avashyakta hai aur jaise shikshak hai jo itni jimmedari se padhate hain ki bacche aaj apne apne mukam par pahuche hain ki ab tareef ka jawab meri taraf se shikshak aur vidyarthi ko dono ko ek dusre ko

दिखी सरकारी स्कूलों की शिक्षा सुधारने के लिए उपाय हैं पहली बार की सरकारी स्कूल जो शिक्षक ह

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सरकारी स्कूलों में शिक्षा की दशा सुधारने के लिए बहुत से उपाय भी करने हैं बहुत से उपाय सरकार समय-समय पर करती रही है और आगे भी करती रहेगी लेकिन सबसे बड़ा जो पाए है वह यह है कि समाज को जागृत होना पड़ेगा अपने उत्तरदायित्व को समझना पड़ेगा अपनी जिम्मेदारी जवाबदेही तय करना पड़ेगा शिक्षक पूरा समय तल्लीनता के साथ में अपना हंड्रेड परसेंट दे शैक्षणिक स्तर को सुधारने के लिए जो निदेशक नियुक्त किए जाते हैं सपने दशक में कह रहा हूं अनुदेशक किए जाते हैं अपनी जिम्मेदारी निभाएं शिक्षामित्र कोई अच्छे से भोजन बनाया साफ सुथरा पूजन बने प्रधानाचार्य की निगरानी करें मॉनिटरिंग में प्रधान भी होता है वह भी जा कर के इनको देखे जो विद्यालय में बच्चों के लिए खाने पीने के सामान आ रहे हैं क्या वह सुरक्षित हैं हाइजीनिक तरीके से सब चीजें बन गई है कि नहीं बन रही हैं जो भी खाद्य रसद आ रही है वह क्या कहीं और जा रही है विद्यालय के अतिरिक्त तो इन सब चीजों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है और यह जिम्मेदारी सरकार की नहीं बनती है प्रधान अध्यापक सहायक अध्यापक शिक्षा मित्र आंगनबाड़ी कर्मी और नीचे विद्यालय में कोई श्रीपद्मा दार्शनिक प्रॉपर तरीके से उसको चेक करें और अपने फोन को समय से विद्यालय भेजें उजाले में भी खाने-पीने से लेकर जूते मुझे तक का प्रबंध है इसका ध्यान रखना है सार्वजनिक संपत्ति है तो उसका रखरखाव देखरेख नंबर दी तैयारी भी सब कुछ समय अनुकूल होना चाहिए और विद्यालय में बच्चों की संख्या बढ़ गई आसपास के लोगों को जागरूक करना यह सारे अधिकार विद्यालय समिति के पास होते हैं अगर वह इमानदारी से कर्तव्य निष्ठा के साथ अपना काम करेंगे शैक्षणिक स्तर सरकारी स्कूलों का भी बहुत अच्छा हो सकता है सरकार साधन उपलब्ध करा सकती है लेकिन उसको सही तरीके से का सही उपयोग करने की जिम्मेदारी विद्यालय तंत्र की है विभाग को कि अगर विद्यालय में कहीं किसी प्रकार की कोई गड़बड़ियां हैं तो सिर्फ जागरूक करने का कार्य भी विद्यालय के छात्रों और उनके अभिभावक की जिम्मेदारी बनती है

sarkari schoolon me shiksha ki dasha sudhaarne ke liye bahut se upay bhi karne hain bahut se upay sarkar samay samay par karti rahi hai aur aage bhi karti rahegi lekin sabse bada jo paye hai vaah yah hai ki samaj ko jagrit hona padega apne uttardayitva ko samajhna padega apni jimmedari javabdehi tay karna padega shikshak pura samay tallinata ke saath me apna hundred percent de shaikshnik sthar ko sudhaarne ke liye jo nideshak niyukt kiye jaate hain sapne dashak me keh raha hoon anudeshak kiye jaate hain apni jimmedari nibhayen shikshamitra koi acche se bhojan banaya saaf suthara pujan bane pradhanacharya ki nigrani kare monitoring me pradhan bhi hota hai vaah bhi ja kar ke inko dekhe jo vidyalaya me baccho ke liye khane peene ke saamaan aa rahe hain kya vaah surakshit hain haijinik tarike se sab cheezen ban gayi hai ki nahi ban rahi hain jo bhi khadya rasad aa rahi hai vaah kya kahin aur ja rahi hai vidyalaya ke atirikt toh in sab chijon ka dhyan rakhna bahut zaroori hai aur yah jimmedari sarkar ki nahi banti hai pradhan adhyapak sahayak adhyapak shiksha mitra anganwadi karmi aur niche vidyalaya me koi shripadma darshnik proper tarike se usko check kare aur apne phone ko samay se vidyalaya bheje ujale me bhi khane peene se lekar joote mujhe tak ka prabandh hai iska dhyan rakhna hai sarvajanik sampatti hai toh uska rakharakhav dekhrekh number di taiyari bhi sab kuch samay anukul hona chahiye aur vidyalaya me baccho ki sankhya badh gayi aaspass ke logo ko jagruk karna yah saare adhikaar vidyalaya samiti ke paas hote hain agar vaah imaandari se kartavya nishtha ke saath apna kaam karenge shaikshnik sthar sarkari schoolon ka bhi bahut accha ho sakta hai sarkar sadhan uplabdh kara sakti hai lekin usko sahi tarike se ka sahi upyog karne ki jimmedari vidyalaya tantra ki hai vibhag ko ki agar vidyalaya me kahin kisi prakar ki koi gadabdiyan hain toh sirf jagruk karne ka karya bhi vidyalaya ke chhatro aur unke abhibhavak ki jimmedari banti hai

सरकारी स्कूलों में शिक्षा की दशा सुधारने के लिए बहुत से उपाय भी करने हैं बहुत से उपाय सरका

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Arpita kumari

Journalist

2:45
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सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए बहुत से कदम तो उठाए जा रहे हैं लेकिन उनका यह कदम नाकाफी लगते हैं इसकी वजह है कि सरकारी स्कूलों को लेकर एक मानसिकता बन चुकी है कि इन स्कूलों में अच्छी शिक्षा नहीं मिलती है और बता दो यह भी कहा जाता है कि जो शिक्षक है वह समय पर स्कूल में नहीं पहुंचते हैं और ज्यादातर वक्त जो शिक्षक होते हैं अपने मोबाइल फोन में या अपने पर्सनल कामों में बिता देते बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान नहीं देते तो इसके लिए सबसे बेहतर उपाय यही लगता है कि जिस तरह प्राइवेट स्कूलों में एक माहौल तैयार किया जाता है जिसे वहां पर पेरेंट्स टीचर मीटिंग होती है और पारण सोते हैं वह ध्यान रखते हैं कि स्कूल बच्चों को क्या पढ़ा रहा है क्या नहीं पढ़ा रहा है क्या शिक्षा दे रहा है वह स्कूल बार-बार आते हैं और बातचीत करते हैं और इस तरह से एक कहा जा सकता है कि उनका पूरा ध्यान केंद्रित रहता है अपने बच्चों की शिक्षा पर सरकारी स्कूलों में ज्यादातर यह देखा जाता है कि जो बच्चे के माता पिता होते हैं उतना ध्यान नहीं देते हैं और जिसकी वजह यह भी है कि जो स्कूल के टीचर है वो भी लापरवाही बरत देते हैं तो बेहतर तरीका है कि यह हो सकता है कि जो माता पिता है स्कूल आया जाया जाया करें और बच्चों को टीचर क्या पढ़ा रहे हैं क्या शिक्षा दे रहे इससे जुड़ी बातचीत स्कूल के अध्यापकों से करते रहे ऐसे में वहां की स्थिति मोटिवेट हो गए और उनके भी कोशिश कहीं ना कहीं घूमने क्यों को बच्चों को बेहतर शिक्षा दें तो यह जो कम्युनिकेशन गैप है जो सरकारी और प्राइवेट स्कूलों के बीच दिखता है प्राइवेट स्कूलों में हम ज्यादातर और शिक्षकों के बीच एक कम्युनिकेशन होता है और वह चीज बच्चों की शिक्षा पर भी दिखती है टीचर्स मोटिवेट होते हैं पैरंट्स की मोटिवेट होती है और बच्चा भी करता है सरकारी स्कूलों में यह दिक्कत रहती है कि बच्चे को छोड़ दिया जाता है ना पूरा ध्यान टीचर का रहता है ना माता-पिता का रहता है यह एक बेहतर उपाय हो सकता है शिक्षा को बेहतर करने का सरकारी स्कूलों में इसके अलावा एक यह चीज भी की जा सकती है कि जो सरकारी स्कूल है वहां पर जो प्रोग्राम होते हैं जो कल्चरल प्रोग्राम होते हैं स्पोर्ट्स होते हैं वह भी कम होते हैं अगर होते भी हैं तो सरकार उनको मोटिवेट किया जाता है इस पर भी ध्यान दिया जा सकता है इससे क्या होगा बच्चों की रुचि बढ़ेगी स्कूल जाने में और स्कूल में रहने में और स्कूल की टीचर है उनका खास योगदान रहना चाहिए और टीचर का योगदान कैसे रहे इसके लिए बच्चों के माता-पिता खजूर स्कूल पर जरूर होना चाहिए दोनों तरीकों से जो है सरकारी स्कूलों की दशा है वह बेहतर हो सकती है

sarkari schoolon me shiksha sudhaarne ke liye bahut se kadam toh uthye ja rahe hain lekin unka yah kadam nakafi lagte hain iski wajah hai ki sarkari schoolon ko lekar ek mansikta ban chuki hai ki in schoolon me achi shiksha nahi milti hai aur bata do yah bhi kaha jata hai ki jo shikshak hai vaah samay par school me nahi pahunchate hain aur jyadatar waqt jo shikshak hote hain apne mobile phone me ya apne personal kaamo me bita dete baccho ki padhai par dhyan nahi dete toh iske liye sabse behtar upay yahi lagta hai ki jis tarah private schoolon me ek maahaul taiyar kiya jata hai jise wahan par parents teacher meeting hoti hai aur paaran sote hain vaah dhyan rakhte hain ki school baccho ko kya padha raha hai kya nahi padha raha hai kya shiksha de raha hai vaah school baar baar aate hain aur batchit karte hain aur is tarah se ek kaha ja sakta hai ki unka pura dhyan kendrit rehta hai apne baccho ki shiksha par sarkari schoolon me jyadatar yah dekha jata hai ki jo bacche ke mata pita hote hain utana dhyan nahi dete hain aur jiski wajah yah bhi hai ki jo school ke teacher hai vo bhi laparwahi barat dete hain toh behtar tarika hai ki yah ho sakta hai ki jo mata pita hai school aaya jaya jaya kare aur baccho ko teacher kya padha rahe hain kya shiksha de rahe isse judi batchit school ke adhyapakon se karte rahe aise me wahan ki sthiti motivate ho gaye aur unke bhi koshish kahin na kahin ghoomne kyon ko baccho ko behtar shiksha de toh yah jo communication gap hai jo sarkari aur private schoolon ke beech dikhta hai private schoolon me hum jyadatar aur shikshakon ke beech ek communication hota hai aur vaah cheez baccho ki shiksha par bhi dikhti hai teachers motivate hote hain Parents ki motivate hoti hai aur baccha bhi karta hai sarkari schoolon me yah dikkat rehti hai ki bacche ko chhod diya jata hai na pura dhyan teacher ka rehta hai na mata pita ka rehta hai yah ek behtar upay ho sakta hai shiksha ko behtar karne ka sarkari schoolon me iske alava ek yah cheez bhi ki ja sakti hai ki jo sarkari school hai wahan par jo program hote hain jo cultural program hote hain sports hote hain vaah bhi kam hote hain agar hote bhi hain toh sarkar unko motivate kiya jata hai is par bhi dhyan diya ja sakta hai isse kya hoga baccho ki ruchi badhegi school jaane me aur school me rehne me aur school ki teacher hai unka khas yogdan rehna chahiye aur teacher ka yogdan kaise rahe iske liye baccho ke mata pita khajur school par zaroor hona chahiye dono trikon se jo hai sarkari schoolon ki dasha hai vaah behtar ho sakti hai

सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए बहुत से कदम तो उठाए जा रहे हैं लेकिन उनका यह कदम

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Devendra Dwivedi

Business Owner

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सरकारी स्कूलों की शिक्षा को सुधारने के लिए क्या-क्या उपाय करना चाहिए सबसे पहले जो पुरानी टीचर हैं काम पर नहीं आते पढ़ाते दिखाते नहीं है उनको नौकरी से निकाल देना चाहिए दूसरी चीज ही स्कूलों को जो मैनेजमेंट प्राइवेट कर देना चाहिए पढ़े लिखे शिक्षित लोगों को उसने रखना चाहिए और कंपटीशन के हिसाब से उनको टारगेट देना चाहिए

sarkari schoolon ki shiksha ko sudhaarne ke liye kya kya upay karna chahiye sabse pehle jo purani teacher hain kaam par nahi aate padhate dikhate nahi hai unko naukri se nikaal dena chahiye dusri cheez hi schoolon ko jo management private kar dena chahiye padhe likhe shikshit logo ko usne rakhna chahiye aur competition ke hisab se unko target dena chahiye

सरकारी स्कूलों की शिक्षा को सुधारने के लिए क्या-क्या उपाय करना चाहिए सबसे पहले जो पुरानी ट

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सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए प्रशिक्षित अध्यापकों की आवश्यकता है इसके अलावा जो शिक्षक गण जब सरकारी विद्यालय में लगते हैं तो वह अपने कर्तव्य को भूल जाता है और अधिकारों के बारे में चिंता करता है मैंने देखा है कि जो अध्यापक है वह जब अपनी सरकारी नौकरी में स्थाई रूप धारण कर लेता तो अपने अधिकारों की लड़ता है वह विद्यार्थियों की लड़की लड़ाई छोड़ देता है और अपनी लड़ाई शुरू करता है वह अपने तनख्वाह के बारे में सोचता है धन कमाने के बारे में सोचता है और अध्यापन की जगह वह अन्य कार्य में लग जाता है अगर आप चाहते हैं कि सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर अच्छा हो तो सबसे पहले शिक्षक को उसका मुख्य उद्देश्य पूर्ण कार्य दिया जाए अध्यापन करवाना इसके अलावा जो आज निकाली है वह उसे ना दिया जाए उसे केवल छात्र से संबंधित जितने कार्य वही भेजा है एक अध्यापक का कार्य है कि वह अपने विद्यालय में और शिक्षण गतिविधियों में पूर्ण रूप से भाग इसके अलावा जो स्थाई कमीशन है वह मोड़ दे हटा दिया जाए उसे स्थाई कमीशन के रूप में धारण करें जैसे कि प्राइवेट स्कूलों में होता है प्राइवेट स्कूलों में 1 शिक्षक जब पढ़ाता है तो उसका फीडबैक लिया जाता है अगर प्राइवेट स्कूल में एक भी अध्यापक पढ़ाते पढ़ाते कमजोर स्थिति में आ जाता है या लापरवाही करने लगता है तो उसे चेतावनी दी जाती है उसे कहा जाता है कि मैं आपको प्राइवेट स्कूल में हटा दिया जाएगा तो वह अध्यापक के मन में भय रहता है कि मैं अपने कार्य में लापरवाही ना करो इससे उसकी गुणवत्ता बनी रहती है दूसरा उसके आर्थिक स्थिति भी उसके अध्यापन पर निर्भर करती है जबकि ठीक इसका उलटा सरकारी विद्यालय में उसकी आर्थिक स्थिति अध्यापन पर निर्भर नहीं करती है क्योंकि जब वह सरकारी विद्यालय में एक बार लगता है उसके बाद में वह स्थाई रूप धारण कर लेता है और उसकी जो सैलरी है वह परमानेंट रूप से चालू हो जाती है और अध्यापन करवाया ना करवाए उसे आर्थिक रूप से पूर्ण रूप मिलता रहता है दूसरा उसे कोई हटा नहीं सकता उसे यह पता है कि मैं जरा अध्यापन नहीं करूंगा तो मुझे कोई हटाएगा नहीं मेरी जान को आप मेरी सैलरी कटौती नहीं होगी और मुझे किसी के प्रति जो आप दे नहीं एक अध्यापक की जवाबदेही होनी चाहिए उसका अध्यापन कार्य की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उसके ऊपर एक वह होना चाहिए ताकि वह अपना अध्यापन कार्य सुचारू रूप से जारी रखें इसके अलावा शिक्षा का जो फंड है वह अन्य किरिया वीडियो की जगह शिक्षा के ऊपर ही फोकस होना चाहिए एक शिक्षक को कई तरह के कार्य में रखें और उसका फंड कई विभिन्न मदों में बैठ जाता है जो कि गलत है

sarkari schoolon me shiksha sudhaarne ke liye prashikshit adhyapakon ki avashyakta hai iske alava jo shikshak gan jab sarkari vidyalaya me lagte hain toh vaah apne kartavya ko bhool jata hai aur adhikaaro ke bare me chinta karta hai maine dekha hai ki jo adhyapak hai vaah jab apni sarkari naukri me sthai roop dharan kar leta toh apne adhikaaro ki ladata hai vaah vidyarthiyon ki ladki ladai chhod deta hai aur apni ladai shuru karta hai vaah apne tankhvaah ke bare me sochta hai dhan kamane ke bare me sochta hai aur adhyapan ki jagah vaah anya karya me lag jata hai agar aap chahte hain ki sarkari vidhayalayo me shiksha ka sthar accha ho toh sabse pehle shikshak ko uska mukhya uddeshya purn karya diya jaaye adhyapan karwana iske alava jo aaj nikali hai vaah use na diya jaaye use keval chatra se sambandhit jitne karya wahi bheja hai ek adhyapak ka karya hai ki vaah apne vidyalaya me aur shikshan gatividhiyon me purn roop se bhag iske alava jo sthai commision hai vaah mod de hata diya jaaye use sthai commision ke roop me dharan kare jaise ki private schoolon me hota hai private schoolon me 1 shikshak jab padhata hai toh uska feedback liya jata hai agar private school me ek bhi adhyapak padhate padhate kamjor sthiti me aa jata hai ya laparwahi karne lagta hai toh use chetavani di jaati hai use kaha jata hai ki main aapko private school me hata diya jaega toh vaah adhyapak ke man me bhay rehta hai ki main apne karya me laparwahi na karo isse uski gunavatta bani rehti hai doosra uske aarthik sthiti bhi uske adhyapan par nirbhar karti hai jabki theek iska ulta sarkari vidyalaya me uski aarthik sthiti adhyapan par nirbhar nahi karti hai kyonki jab vaah sarkari vidyalaya me ek baar lagta hai uske baad me vaah sthai roop dharan kar leta hai aur uski jo salary hai vaah permanent roop se chaalu ho jaati hai aur adhyapan karvaya na karwaye use aarthik roop se purn roop milta rehta hai doosra use koi hata nahi sakta use yah pata hai ki main zara adhyapan nahi karunga toh mujhe koi hataega nahi meri jaan ko aap meri salary katauti nahi hogi aur mujhe kisi ke prati jo aap de nahi ek adhyapak ki javabdehi honi chahiye uska adhyapan karya ki gunavatta banaye rakhne ke liye uske upar ek vaah hona chahiye taki vaah apna adhyapan karya sucharu roop se jaari rakhen iske alava shiksha ka jo fund hai vaah anya kiriya video ki jagah shiksha ke upar hi focus hona chahiye ek shikshak ko kai tarah ke karya me rakhen aur uska fund kai vibhinn mardo me baith jata hai jo ki galat hai

सरकारी स्कूलों में शिक्षा सुधारने के लिए प्रशिक्षित अध्यापकों की आवश्यकता है इसके अलावा जो

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Beniram Birla

Teacher बी एड समाज सेवा

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सरकारी शिक्षकों को अन्य कार्यों से मुक्ता कर देना चाहिए वह केवल पढ़ाई पर ध्यान दें एवं सरकारी स्कूल में अधिकतर गरीब वर्ग के बच्चे आते हैं तो सरकार को चाहिए कि उन बच्चों पर ज्यादा ध्यान दें वह स्कूल के शिक्षकों को अधिकार दे ताकि वह उन बच्चों को नियमित रूप से साला आने के लिए प्रेरित कर सकें गरीब बच्चे के मां बाप अपने रोजमर्रा काम में लगे रहते हैं बच्चे नियमित स्कूल नहीं आ पाते शिक्षक मजबूर हूं कुछ नहीं कर पाता इसके साथ ही शासन की मंशा यह लगती है वह सरकारी स्कूलों को बंद करना चाहता है इसलिए सरकारी स्कूलों में नए नए प्रयोग किए जाते हैं हर साल नए नियम बनाए जाते हैं नहीं तेरे पास परीक्षाएं भी जाती है बार-बार परीक्षाएं भी जाती है बच्चों को पढ़ाने नहीं दिया जाता और गुस्से दूसरे काम जो टीचरों से करवाए जाते हैं अधिकतर सरकारी स्कूलों में टीचर कम होते हैं जो अन्य कामों में लगे रहते हैं इससे कॉल बच्चों का अध्यापन में डिस्टर्ब होता है साथ ही शिक्षकों पर भी जवाबदारी आना चाहिए जैसे क्लास के बच्चों की पढ़ाई का क्या मानक होना चाहिए क्लास 2 में क्या होना चाहिए दिन में क्या होना चाहिए बाद में क्या होना चाहिए सबसे पहले तो शिक्षकों को कार्यमुक्त करें दूसरे कामों से मुक्त कर दे

sarkari shikshakon ko anya karyo se mukta kar dena chahiye vaah keval padhai par dhyan de evam sarkari school me adhiktar garib varg ke bacche aate hain toh sarkar ko chahiye ki un baccho par zyada dhyan de vaah school ke shikshakon ko adhikaar de taki vaah un baccho ko niyamit roop se sala aane ke liye prerit kar sake garib bacche ke maa baap apne rozmarra kaam me lage rehte hain bacche niyamit school nahi aa paate shikshak majboor hoon kuch nahi kar pata iske saath hi shasan ki mansha yah lagti hai vaah sarkari schoolon ko band karna chahta hai isliye sarkari schoolon me naye naye prayog kiye jaate hain har saal naye niyam banaye jaate hain nahi tere paas parikshaen bhi jaati hai baar baar parikshaen bhi jaati hai baccho ko padhane nahi diya jata aur gusse dusre kaam jo ticharon se karwaye jaate hain adhiktar sarkari schoolon me teacher kam hote hain jo anya kaamo me lage rehte hain isse call baccho ka adhyapan me disturb hota hai saath hi shikshakon par bhi javabdari aana chahiye jaise class ke baccho ki padhai ka kya maanak hona chahiye class 2 me kya hona chahiye din me kya hona chahiye baad me kya hona chahiye sabse pehle toh shikshakon ko karyamukt kare dusre kaamo se mukt kar de

सरकारी शिक्षकों को अन्य कार्यों से मुक्ता कर देना चाहिए वह केवल पढ़ाई पर ध्यान दें एवं सरक

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सरकारी स्कूल के शिक्षक को सुधारने के लिए हमें सभी प्राइवेट स्कूलों को सरकारी स्कूल में कन्वर्ट करना चाहिए इसका रीजन यह है कि एक तो अवधारणा सभी व्यक्तियों में सरकारी स्कूल में पढ़ाई तो होती ही नहीं और सरकारी स्कूलों में ना बच्चों को कोई फैसिलिटी मिलती है सभी पैसे देकर काफी काफी ज्यादा फीस भरकर प्राइवेट स्कूलों में अपने बच्चों को डालते हैं और इसलिए सरकारी स्कूलों में बच्चे भी बहुत कम जानते हैं अगर हम सरकारी स्कूलों को अधिक मात्रा में बढ़ाएं और जितने भी प्राइवेट स्कूल हैं सबको सरकारी स्कूलों में ही कन्वर्ट करते इसके वैसे सभी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजेंगे और शिक्षा के स्तर के आकर देखा जाए तो प्राइवेट स्कूलों में टीचर होते हैं वह इतने अधिक एक्सपीरियंस और इतने जो अध्यापक होते हैं यह जो हम लोग अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं डालते अगर हम सभी सर प्राइवेट और स्कूलों का निजीकरण करके उन्हें सरकारी बना दे तो हम सरकार को सुधार सकते हैं

sarkari school ke shikshak ko sudhaarne ke liye hamein sabhi private schoolon ko sarkari school me convert karna chahiye iska reason yah hai ki ek toh avdharna sabhi vyaktiyon me sarkari school me padhai toh hoti hi nahi aur sarkari schoolon me na baccho ko koi facility milti hai sabhi paise dekar kaafi kaafi zyada fees bharkar private schoolon me apne baccho ko daalte hain aur isliye sarkari schoolon me bacche bhi bahut kam jante hain agar hum sarkari schoolon ko adhik matra me badhaye aur jitne bhi private school hain sabko sarkari schoolon me hi convert karte iske waise sabhi apne baccho ko sarkari school me bhejenge aur shiksha ke sthar ke aakar dekha jaaye toh private schoolon me teacher hote hain vaah itne adhik experience aur itne jo adhyapak hote hain yah jo hum log apne baccho ko sarkari schoolon me nahi daalte agar hum sabhi sir private aur schoolon ka nijikaran karke unhe sarkari bana de toh hum sarkar ko sudhaar sakte hain

सरकारी स्कूल के शिक्षक को सुधारने के लिए हमें सभी प्राइवेट स्कूलों को सरकारी स्कूल में कन्

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Jaynath

Politician

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सरकारी स्कूल की शिक्षा पहले से बहुत बेहतर है बट एक मुसीबत है जो मिड डे मील को खत्म कर दी जाए और सभी बच्चों को इस कारण सी के रूप में उसको दिया जाए उनके अकाउंट में तब जाकर और अधिक शिक्षा स्तर सुधरेगी अन्यथा आधा दिन तो मिड डे मील में ही निकल जाता है बाकी 4 घंटे में क्या पढ़ाएंगे बच्चों को टीचर

sarkari school ki shiksha pehle se bahut behtar hai but ek musibat hai jo mid day meal ko khatam kar di jaaye aur sabhi baccho ko is karan si ke roop me usko diya jaaye unke account me tab jaakar aur adhik shiksha sthar sudharegi anyatha aadha din toh mid day meal me hi nikal jata hai baki 4 ghante me kya padhaenge baccho ko teacher

सरकारी स्कूल की शिक्षा पहले से बहुत बेहतर है बट एक मुसीबत है जो मिड डे मील को खत्म कर दी ज

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