सरकार रेलवे को ठेके पर क्यों दे रही है?...


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Aditya Kumar Tiwari

Director, Eduvento Classes

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रेलवे में काम को लेकर उतना एफिशिएंसी नहीं है इस वजह से सरकार रेलवे को कई के जगह पर प्राइवेटाइज इसलिए कर रहे ताकि रेलवे में काम और एफिशिएंट हो सके अकेले और भी बेहतर सेवाएं प्रदान कर सके अपने यात्रियों को यही मेन पर पर चर्चा

railway mein kaam ko lekar utana efishiensi nahi hai is wajah se sarkar railway ko kai ke jagah par praivetaij isliye kar rahe taki railway mein kaam aur efficient ho sake akele aur bhi behtar sevayen pradan kar sake apne yatriyon ko yahi main par par charcha

रेलवे में काम को लेकर उतना एफिशिएंसी नहीं है इस वजह से सरकार रेलवे को कई के जगह पर प्राइवे

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Vipin Giri

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर आपको रेलवे में सुविधाएं चाहिए तो सरकार के इस कदम की आपको सराहना करनी चाहिए जो कि रेलवे में बेहतर से बेहतर सुविधाएं अगर आपको चाहिए तो रेलवे को ठेके पर देना पड़ेगा इससे सरकार को तो आमदनी होगी ही साथ ही आप लोगों को यह रेलवे के जो यात्री हैं उनको बेहतर सुविधा मिल सकेगी रेलवे को अभी हम पैसा उतना ही देते हैं ठेके पर देने के बाद कोई हमें एक्स्ट्रा चार्ज देने नहीं तो इसलिए रेलवे को जो ठेके पर दिया जा रहा है उससे यात्रियों के लिए सुविधा बढ़ेगी

agar aapko railway mein suvidhaen chahiye toh sarkar ke is kadam ki aapko sarahana karni chahiye jo ki railway mein behtar se behtar suvidhaen agar aapko chahiye toh railway ko theke par dena padega isse sarkar ko toh aamdani hogi hi saath hi aap logo ko yah railway ke jo yatri hain unko behtar suvidha mil sakegi railway ko abhi hum paisa utana hi dete hain theke par dene ke baad koi hamein extra charge dene nahi toh isliye railway ko jo theke par diya ja raha hai usse yatriyon ke liye suvidha badhegi

अगर आपको रेलवे में सुविधाएं चाहिए तो सरकार के इस कदम की आपको सराहना करनी चाहिए जो कि रेलवे

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो लेसनर आदिशेष प्रवीण ऐश्वर्या आपने जो प्रश्न पूछा है सरकार रेलवे को ठेके ठेके पर क्यों दे रही है मैं आपको बता दूं कि बहुत सारी चीजें ऐसी होती है अब ऐसे तो देखने दो रेलवे जो है गारमेंट ऑर्गेनाइजेशन है सरकारी है लेकिन ठेके की बात जहां तक है तो सरकारों की सोच होती है और आजकल जो है सारी चीजें प्राइवेटाइजेशन हो रही है लोग सरकारी नौकरी दिखते हैं आराम के लिए और अपने बच्चों को पढ़ाते किसने है प्राइवेट स्कूल में पढ़ाते हैं कि उनको लगता है कि सरकारी स्कूल में अच्छी पढ़ाई नहीं होती है तो हमारी ऐसी सोच हो गई है कि जो प्राइवेट चीजें होती है वह अच्छी होती है अधिक हॉस्पिटल की बात करें अगर लोग क्या करते हैं लोगों को लगता है कि प्राइवेट हॉस्पिटल अच्छा होगा प्राइवेट डॉक्टर अच्छा होगा सरकारी डॉक्टर से कोई इलाज नहीं करवाता इसी सोच को ले करके हमारी सोच ऐसी बना दी गई है कि प्राइवेट चीजें होती हैं उसमें काम अच्छे से होता है तो कहीं ना कहीं सरकार यह सोचती है कि अगर जो भी काम है उसको अगर ठेके पर दे दिया जाता है तो प्राइवेट ऑर्गेनाइजेशन आ जाता है और प्राइवेटाइजेशन जो है वह नाम जो है अच्छे से करवा सकती है कोई काम रेलवे कोटा जो कि कुछ पाठ से कुछ वर्ष उन को ठेके पर दिया जाता है और अनुचित है सरकार को चाहिए था कि अपनी तरफ से आज चीजों को अच्छा करते अब अट सरकार जो है और कुछ प्राइवेट कंपनियों के मिलीभगत जो है लोग अपना फायदा उठाने के लिए जो मंत्री वगैरा होते हैं इस टाइप के काम की शुरुआत कर देते हैं कुछ चंद पैसों के लिए तो यह एक तरह से देखें तो अगर प्राइवेटाइजेशन की तरफ अगर सरकार पूछ रही है प्राइवेटाइजेशन में चीजें क्या होती है लोग मेहनत करते हैं मेहनत करने के बाद उनको पैसे दिया था उनको शोषण भी होता है जो काम करते हैं ठेके पर सरकार जो है उनकी मंशा है कि आज चीजों को प्राइवेटाइज कर दिया जाए और बीच में जो कमीशन वगैरह जो ऑफिसर वगैरह को मिलते हैं इसकी वजह से यहां पर ब्लैक मेलिंग होती है और चीज खराब होती जा रही है तू सरकारी सरकारों के ऊपर है और उनकी सोच पर डिपेंड करता है वैसे अगर सरकार जो है खुद से इसको चलाती तो बहुत अच्छा होता लोगों को सरकारी नौकरी मिलती और एक सिक्योरिटी मिलती लोगों को ठेकेदार जो होते हैं वह जब चाहे तब लोगों को जॉब से निकाल सकते हैं तो सरकार को सोचना चाहिए तो हम लोग बनाते हैं कुछ लोगों को वोट करें ऐसी जिनकी सोच अच्छी हो जिनका भी जान हो ऐसे लोगों को नाम मिनिस्टर बना दे या प्रधानमंत्री बनाते हैं जिनकी सोच दिखावा हो यह डिपेंड करता है कि हम किस टाइप के लोगों को चुनकर और सरकार में भेजते हैं क्योंकि वही हमारे पॉलिसी पॉलिसी लेकर होते हैं वह हमारे रिप्रेजेंटेटिव होते हैं ऐसे पढ़े लिखे लोगों को पेमेंट भेजना चाहिए decision-making के लिए जो कुछ अच्छा कर सके और इसी चीज की मुझे लगता है कि अब तक कमी नहीं है या तो लोगों को बरगला करके वोट ले लिया जाता है और फिर लोग परेशान होते हैं लोगों को सुना नहीं जाता तो आप इन चीजों पर ध्यान दीजिए और जो है अपने आसपास भी लोगों को अगर कीजिए ठेके पर मिल रहा है ऐसा नहीं करना चाहिए सरकार को चंद पैसों के लिए ठीक है तो अब कि आप समझ गए ठीक है

hello lesnar adishesh praveen aishwarya aapne jo prashna poocha hai sarkar railway ko theke theke par kyon de rahi hai aapko bata doon ki bahut saree cheezen aisi hoti hai ab aise toh dekhne do railway jo hai garment organization hai sarkari hai lekin theke ki baat jaha tak hai toh sarkaro ki soch hoti hai aur aajkal jo hai saree cheezen privatisation ho rahi hai log sarkari naukri dikhte hai aaram ke liye aur apne baccho ko padhate kisne hai private school mein padhate hai ki unko lagta hai ki sarkari school mein achi padhai nahi hoti hai toh hamari aisi soch ho gayi hai ki jo private cheezen hoti hai vaah achi hoti hai adhik hospital ki baat kare agar log kya karte hai logo ko lagta hai ki private hospital accha hoga private doctor accha hoga sarkari doctor se koi ilaj nahi karwata isi soch ko le karke hamari soch aisi bana di gayi hai ki private cheezen hoti hai usme kaam acche se hota hai toh kahin na kahin sarkar yah sochti hai ki agar jo bhi kaam hai usko agar theke par de diya jata hai toh private organization aa jata hai aur privatisation jo hai vaah naam jo hai acche se karva sakti hai koi kaam railway quota jo ki kuch path se kuch varsh un ko theke par diya jata hai aur anuchit hai sarkar ko chahiye tha ki apni taraf se aaj chijon ko accha karte ab attack sarkar jo hai aur kuch private companion ke milibhagat jo hai log apna fayda uthane ke liye jo mantri vagera hote hai is type ke kaam ki shuruat kar dete hai kuch chand paison ke liye toh yah ek tarah se dekhen toh agar privatisation ki taraf agar sarkar puch rahi hai privatisation mein cheezen kya hoti hai log mehnat karte hai mehnat karne ke baad unko paise diya tha unko shoshan bhi hota hai jo kaam karte hai theke par sarkar jo hai unki mansha hai ki aaj chijon ko praivetaij kar diya jaaye aur beech mein jo commision vagera jo officer vagera ko milte hai iski wajah se yahan par black mailing hoti hai aur cheez kharab hoti ja rahi hai tu sarkari sarkaro ke upar hai aur unki soch par depend karta hai waise agar sarkar jo hai khud se isko chalati toh bahut accha hota logo ko sarkari naukri milti aur ek Security milti logo ko thekedaar jo hote hai vaah jab chahen tab logo ko job se nikaal sakte hai toh sarkar ko sochna chahiye toh hum log banate hai kuch logo ko vote kare aisi jinki soch achi ho jinka bhi jaan ho aise logo ko naam minister bana de ya pradhanmantri banate hai jinki soch dikhawa ho yah depend karta hai ki hum kis type ke logo ko chunkar aur sarkar mein bhejate hai kyonki wahi hamare policy policy lekar hote hai vaah hamare representative hote hai aise padhe likhe logo ko payment bhejna chahiye decision making ke liye jo kuch accha kar sake aur isi cheez ki mujhe lagta hai ki ab tak kami nahi hai ya toh logo ko bargala karke vote le liya jata hai aur phir log pareshan hote hai logo ko suna nahi jata toh aap in chijon par dhyan dijiye aur jo hai apne aaspass bhi logo ko agar kijiye theke par mil raha hai aisa nahi karna chahiye sarkar ko chand paison ke liye theek hai toh ab ki aap samajh gaye theek hai

हेलो लेसनर आदिशेष प्रवीण ऐश्वर्या आपने जो प्रश्न पूछा है सरकार रेलवे को ठेके ठेके पर क्यों

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इसलिए ठेके पर दे रही है क्योंकि सरकार को मुझसे बेनिफिट ज्यादा होगा

isliye theke par de rahi hai kyonki sarkar ko mujhse benefit zyada hoga

इसलिए ठेके पर दे रही है क्योंकि सरकार को मुझसे बेनिफिट ज्यादा होगा

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shekhar11

Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पहले कंप्लीट सेंट्रल गवर्नमेंट के अंदर आती थी लेकिन अभी गवर्नमेंट प्राइवेट कंपनी का कांटेक्ट दे रही है वह सब कोई ग्रुप किया जा सके और कमेंट के ऊपर जो पैसा है वह प्रेशर को थोड़ी से रिलीज की जा सके और हम सभी जानते कि प्राइवेट सेक्टर कंपनीज होती है वह अपनी क्वालिटी के लिए जानी जाती है तो इस कारण से जो इन्फ्रास्ट्रक्चर इंप्रूवमेंट है शेड्यूल है टाइमिंग से कस्टमर सेटिस्फेक्शन है इन सब चीजों को बढ़ाने के लिए अगर प्राइवेट सेक्टर को देती है गवर्नमेंट तो कोई भी प्रॉब्लम नहीं है और जो गारमेंट के बस में बटन भी कम हो

pehle complete central government ke andar aati thi lekin abhi government private company ka Contact de rahi hai vaah sab koi group kiya ja sake aur comment ke upar jo paisa hai vaah pressure ko thodi se release ki ja sake aur hum sabhi jante ki private sector companies hoti hai vaah apni quality ke liye jani jaati hai toh is karan se jo infrastrakchar improvement hai schedule hai timing se customer setisfekshan hai in sab chijon ko badhane ke liye agar private sector ko deti hai government toh koi bhi problem nahi hai aur jo garment ke bus mein button bhi kam ho

पहले कंप्लीट सेंट्रल गवर्नमेंट के अंदर आती थी लेकिन अभी गवर्नमेंट प्राइवेट कंपनी का कांटेक

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