क्या आदिमानव का जीवन आरामदायक था?...


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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे मित्र आपका जो प्रश्न हैं वह और उसके लिए है आज की दृष्टि से आज के दृष्टिकोण से हम सोचेंगे तो हम यह सोचते आदिमानव पड़ा अब आपका जीवन जीता था बड़ा दुख मैं जीवन जीता था लेकिन उस समय के दौर से मानव ने अधिकतम सुविधाएं जुटाने का प्रयास किया हुआ और अधिकतम सुविधाएं जुटाने का प्रयास किया होगा वह सुख के लिए किया हुआ हो सकता है उस समय का जीवन में सुविधाएं दी थी उस समय के मानव की सोच इतनी थी उस समय उसके पास संसाधन भी इतने ही थे और उस समय के संसाधनों में सुधार होते होते मानव की सोच विकसित होते होते आज का जो जीवन देख रहे हैं वह सब कुछ सोच विचार और मानव मस्तिष्क की देन है इसलिए आज अपन जो सोचते हैं हम बाहर जी रहे हैं यदि हम इंग्लैंड के जीवन से कल्पना करें कि अमेरिका फ्रांस जापान चाइना आदि जहां की टेक्नोलॉजी बहुत हमसे आगे है उसके उनके जीवन से हम कल्पना करें तो उनके सामने तो हम बहुत दुख में जीवन जी रहे हैं कष्टदायक जीवन जी रहे हैं जबकि हमारी सुविधाओं के अनुसार हमारे संसाधनों के अनुसार हम बड़ा सुख में जीवन जी रहे हैं यह तो सब कुछ हमारी सोच पर डिपेंड है उनकी टेक्नोलॉजी बहुत आगे मां हर कार्य को हाथ से करना पसंद नहीं करते बल्कि मशीनें कर रही है जबकि यहां यहां पर बहुत सारी अभी तक टेक्नोलॉजी के अभाव में मानव कर रहा है यह गरीबी के कारण इस टेक्नोलॉजी को खरीद नहीं पाता है कि आज से कर रहा है तो यह ऐसा कुछ नहीं है सब कुछ आदमी को केवल आराम के गायकों पर नहीं सोचना चाहिए यह सोचना चाहिए और सुविधाजनक कितना है वह मानव जीवन के लक्ष्य पूर्ति करने में कितना सहायक है

mere mitra aapka jo prashna hain wah aur uske liye hai aaj ki drishti se aaj ke drishtikon se hum sochenge toh hum yeh sochte adimanav pada ab aapka jeevan jita tha bada dukh main jeevan jita tha lekin us samay ke daur se manav ne adhiktam suvidhayen jutane ka prayas kiya hua aur adhiktam suvidhayen jutane ka prayas kiya hoga wah sukh ke liye kiya hua ho sakta hai us samay ka jeevan mein suvidhayen di thi us samay ke manav ki soch itni thi us samay uske paas sansadhan bhi itne hi the aur us samay ke sansadhano mein sudhaar hote hote manav ki soch viksit hote hote aaj ka jo jeevan dekh rahe hain wah sab kuch soch vichar aur manav mastishk ki then hai isliye aaj apan jo sochte hain hum bahar ji rahe hain yadi hum england ke jeevan se kalpana karein ki america france japan china aadi jaha ki technology bahut humse aage hai uske unke jeevan se hum kalpana karein toh unke saamne toh hum bahut dukh mein jeevan ji rahe hain kashtdayak jeevan ji rahe hain jabki hamari suvidhaon ke anusaar hamare sansadhano ke anusaar hum bada sukh mein jeevan ji rahe hain yeh toh sab kuch hamari soch par depend hai unki technology bahut aage maa har karya ko hath se karna pasand nahi karte balki machine kar rahi hai jabki yahan yahan par bahut saree abhi tak technology ke abhaav mein manav kar raha hai yeh garibi ke kaaran is technology ko kharid nahi pata hai ki aaj se kar raha hai toh yeh aisa kuch nahi hai sab kuch aadmi ko keval aaram ke gayakon par nahi sochna chahiye yeh sochna chahiye aur suvidhajanak kitna hai wah manav jeevan ke lakshya purti karne mein kitna sahayak hai

मेरे मित्र आपका जो प्रश्न हैं वह और उसके लिए है आज की दृष्टि से आज के दृष्टिकोण से हम सोचे

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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अरे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आदिमानव का जो जीवन है वह आरामदायक जी उस समय के लिए कई सारे प्रॉब्लम थी वहां पर जंगल में रहना पड़ता था रहने के लिए कोई पक्का मकान मैप ओके खाना वगैरा भी तो था वह जंगल में कैसे जुगाड़ करके एनिमल्स कुमार कहने दो पल फुल जो था उसी से काम चलाना पड़ता था नहीं तो शिकार नहीं मिला तो भूखे सो तो उस समय बिजी थे आप नहीं अलग अलग तरीके की दिक्कतें थी और आज के डेट में भी अलग अलग तरीके की दिक्कतें हैं तो मैं समझता हूं कि कोई से भी युग में जो है आदमी वह चैन से नहीं रह पाया वह पहले भी नहीं आ पाया पहले भी इसके चीजें की कमी थी और आज ही चीजें मिल रहे हैं तो आज भी उसको और चीजों की कमी है तो मैं किसी से नहीं रह पाएगा जब तक उसको 6755 ना हो

arre aisa nahi kaha ja sakta ki adimanav ka jo jeevan hai vaah aaramadayak ji us samay ke liye kai saare problem thi wahan par jungle mein rehna padta tha rehne ke liye koi pakka makan map ok khana vagera bhi toh tha vaah jungle mein kaise jugaad karke animals kumar kehne do pal full jo tha usi se kaam chalana padta tha nahi toh shikaar nahi mila toh bhukhe so toh us samay busy the aap nahi alag alag tarike ki dikkaten thi aur aaj ke date mein bhi alag alag tarike ki dikkaten hain toh main samajhata hoon ki koi se bhi yug mein jo hai aadmi vaah chain se nahi reh paya vaah pehle bhi nahi aa paya pehle bhi iske cheezen ki kami thi aur aaj hi cheezen mil rahe hain toh aaj bhi usko aur chijon ki kami hai toh main kisi se nahi reh payega jab tak usko 6755 na ho

अरे ऐसा नहीं कहा जा सकता कि आदिमानव का जो जीवन है वह आरामदायक जी उस समय के लिए कई सारे प्र

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