अन्ना हजारे कौन है?...


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Vivek Shukla

Life coach

1:10

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अन्ना हजारे आपने पूछा है कि अन्ना हजारे कौन थे तो अन्ना हजारे वास्तव नाम बाबूराव हजारे 15 जून 1938 में इनका जन्म हुआ महाराष्ट्र के अहमदनगर में दिनभर कस्बे में जन्म हुआ था इनका इनके गरीब परिवार से बिलॉन्ग करते हैं उनके पिताजी मजबूत है उनके दादा हम खोज में थे और फौज में ही इनका भिंगारे में पोस्टिंग हुई थी उन्होंने विवेकानंद से प्रेरणा लेकर उनकी एक पुस्तक कॉल टू दी यूथ फॉर नेशन को पढ़कर इनका माने समाज की तरफ जागरूकता बढ़ गया और यह नो ने अपना जिंदगी समाज की तरफ आकर्षित कर दिया 1970 में आजीवन अविवाहित रहकर जीवन माली समाज को समर्पण करने का संकल्प लिया 1992 में भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण पुरस्कार भी मिला है जन लोकपाल विधेयक को पारित कराने उन्होंने 2011 में आमरण अनशन चालू किया जिसके कारण को काफी हद तक प्रसिद्धि मिली या फिर लॉगइन को महात्मा गांधी का दूसरा रूप मानने लगे

anna hazare aapne puchha hai ki anna hazare kaun the toh anna hazare vaastav naam baburao hazare 15 june 1938 mein inka janam hua maharashtra ke ahmednagar mein dinbhar kasbe mein janam hua tha inka inke garib parivar se Bilong karte hain unke pitaji majboot hai unke dada hum khoj mein the aur fauj mein hi inka bhingare mein posting hui thi unhone vivekananda se prerna lekar unki ek pustak call to di youth for nation ko padhakar inka maane samaj ki taraf jagrukta badh gaya aur yeh no ne apna zindagi samaj ki taraf aakarshit kar diya 1970 mein aajivan avivahit rahkar jeevan mali samaj ko samarpan karne ka sankalp liya 1992 mein bharat sarkar dwara padma vibhushan puraskar bhi mila hai jan lokpal vidhayak ko paarit karane unhone 2011 mein aamran anshan chalu kiya jiske kaaran ko kaafi had tak prasiddhi mili ya phir login ko mahatma gandhi ka doosra roop manne lage

अन्ना हजारे आपने पूछा है कि अन्ना हजारे कौन थे तो अन्ना हजारे वास्तव नाम बाबूराव हजारे 15

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आम आदमी पार्टी के कर्ताधर्ता थे अन्ना हजारे उन्हीं के अनशन की वजह से आम आदमी पार्टी बनी थी

aam aadmi party ke kartadharta the anna hazare unhi ke anshan ki wajah se aam aadmi party bani thi

आम आदमी पार्टी के कर्ताधर्ता थे अन्ना हजारे उन्हीं के अनशन की वजह से आम आदमी पार्टी बनी थी

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समाजसेवी

samajsevi

समाजसेवी

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देखिए अन्ना हजारे एक ऐसा आदमी है जो कहने को तो समाजसेवी है परंतु यह आदमी केवल कांग्रेस के कार्यकाल में आंदोलन करता है देखिए अभी बीजेपी ने लोकपाल बिल पास नहीं किया फिर भी वह संतुष्ट है

dekhie anna hazare ek aisa aadmi hai jo kehne ko toh samajsevi hai parantu yeh aadmi keval congress ke karyakal mein andolan karta hai dekhie abhi bjp ne lokpal bill paas nahi kiya phir bhi wah santusht hai

देखिए अन्ना हजारे एक ऐसा आदमी है जो कहने को तो समाजसेवी है परंतु यह आदमी केवल कांग्रेस के

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munmun

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अन्ना हजारे अन्ना हजारे का वास्तविक नाम किशन बाबूराव हजारे हैं 15 जून 1936 को महाराष्ट्र के अहमदनगर के विनर कस्बे में जन्मे अन्ना हजारे का बचपन बहुत गरीबी में गुजरा पिता मजदूर थे दादा फ़ौज में थे दादा की पोस्टिंग भीम नगर में थी और अन्ना हजारे का वास्ता अन्ना हजारे जो है पुश्तैनी गांव अहमदनगर जिले में स्थित डाले रालेगण सिद्धि में थे और परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुंबई ले गई और वहां उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की और परिवार पर कष्टों का बोझ देखकर वह दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचने वाले की दुकान में ₹40 की पगार में काम करने लगे इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगण से बुला लिया और छठे दशक के आसपास में फौज में शामिल हो गए और उनकी फौजी और उनकी पहली जो पोस्टिंग थी बतौर ड्राइवर पंजाब में हुई और यही पाकिस्तानी हमले में मौत को धता बताकर बचे थे तो इसी दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में से उन्होंने विवेकानंद की एक पुस्तक कोल्ड यूथ फॉर नेशन खरीदी और उसको पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी समाज को समर्पित कर दी और उन्होंने गांधी और विनोबा को भी पड़ा 1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया और मुंबई पोस्टिंग के दौरान मैं अपने गांव रालेगण आते जाते रहे जम्मू पोस्टिंग के दौरान 15 साल फौज में पूरे होने पर 1975 में उन्होंने वीआरएस ले लिया और गांव में आकर जो हद हार्ट और परिवार में तंगी का आलम देखकर अन्ना की बुआ उन्हें मुंबई ले गई और वहां उन्होंने सातवीं तक पढ़ाई की और परिवार पर स्टोर का बोझ देखकर वह दादर स्टेशन के बाहर एक फूल बेचने वाले की दुकान में ₹40 की पगार में काम करने लगे इसके बाद उन्होंने फूलों की अपनी दुकान खोल ली और अपने दो भाइयों को भी रालेगण से बुला लिया और छठे दशक के आसपास में फौज में शामिल हो गए और उनकी फौजी और उनकी पहली जो पोस्टिंग थी बतौर ड्राइवर पंजाब में हुई हो रही पाकिस्तानी हमले में वह मौत को धता बताकर बचे थे तो इसी दौरान नई दिल्ली रेलवे स्टेशन में से उन्होंने विवेकानंद की पुस्तक कॉल टू द यूथ फॉर नेशन खरीदी और उसको पढ़ने के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी समाज को समर्पित कर दी और उन्होंने गांधी और विनोबा को भी पड़ा 1970 में उन्होंने आजीवन अविवाहित रहने का संकल्प किया और मुंबई पोस्टिंग के दौरान वह अपने गांव रालेगण आते जाते रहे जम्मू पोस्टिंग के दौरान 15 साल फौज में पूरे होने पर 1975 में उन्होंने वीआरएस ले लिया और गांव में आकर जो हट गए उन्होंने गांव की तस्वीर ही बदल दी और उन्होंने अपनी जमीन बच्चों के हॉस्टल के लिए दान कर दी आज उनकी पेंशन का सारा पैसा गांव के विकास में खर्च होता है और वह गांव के मंदिर में रहते हैं और हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए बनने वाला खाना ही खाते हैं राज गांव का हर शख्स जो है आत्म निर्भर है आस पड़ोस के गांव के लिए भी यहां से चारा दूध आदि जाता है और गांव में भी एक तरह का राज रामराज है और गांव में तो उन्होंने राम राज स्थापित कर दिया है अब वह अपने दल बल के साथ देश में राम राज की स्थापना की मुहिम में निकले

anna hazare anna hazare ka vastavik naam kishan baburao hazare hain 15 june 1936 ko maharashtra ke ahmednagar ke winner kasbe mein janme anna hazare ka bachpan bahut garibi mein gujara pita majdur the dada fauz mein the dada ki posting bhim nagar mein thi aur anna hazare ka vasta anna hazare jo hai pushtaini gaon ahmednagar jile mein sthit dale ralegan siddhi mein the aur parivar mein tangi ka aalam dekhkar anna ki buaa unhe mumbai le gayi aur wahan unhone satvi tak padhai ki aur parivar par kaston ka bojh dekhkar vaah dadar station ke bahar ek fool bechne waale ki dukaan mein Rs ki pagar mein kaam karne lage iske baad unhone fulo ki apni dukaan khol li aur apne do bhaiyo ko bhi ralegan se bula liya aur chhathe dashak ke aaspass mein fauj mein shaamil ho gaye aur unki fauji aur unki pehli jo posting thi bataur driver punjab mein hui aur yahi pakistani hamle mein maut ko dhata batakar bache the toh isi dauran nayi delhi railway station mein se unhone vivekananda ki ek pustak cold youth for nation kharidi aur usko padhne ke baad unhone apni zindagi samaj ko samarpit kar di aur unhone gandhi aur vinoba ko bhi pada 1970 mein unhone aajivan avivahit rehne ka sankalp kiya aur mumbai posting ke dauran main apne gaon ralegan aate jaate rahe jammu posting ke dauran 15 saal fauj mein poore hone par 1975 mein unhone VRS le liya aur gaon mein aakar jo had heart aur parivar mein tangi ka aalam dekhkar anna ki buaa unhe mumbai le gayi aur wahan unhone satvi tak padhai ki aur parivar par store ka bojh dekhkar vaah dadar station ke bahar ek fool bechne waale ki dukaan mein Rs ki pagar mein kaam karne lage iske baad unhone fulo ki apni dukaan khol li aur apne do bhaiyo ko bhi ralegan se bula liya aur chhathe dashak ke aaspass mein fauj mein shaamil ho gaye aur unki fauji aur unki pehli jo posting thi bataur driver punjab mein hui ho rahi pakistani hamle mein vaah maut ko dhata batakar bache the toh isi dauran nayi delhi railway station mein se unhone vivekananda ki pustak call to the youth for nation kharidi aur usko padhne ke baad unhone apni zindagi samaj ko samarpit kar di aur unhone gandhi aur vinoba ko bhi pada 1970 mein unhone aajivan avivahit rehne ka sankalp kiya aur mumbai posting ke dauran vaah apne gaon ralegan aate jaate rahe jammu posting ke dauran 15 saal fauj mein poore hone par 1975 mein unhone VRS le liya aur gaon mein aakar jo hut gaye unhone gaon ki tasveer hi badal di aur unhone apni jameen baccho ke hostel ke liye daan kar di aaj unki pension ka saara paisa gaon ke vikas mein kharch hota hai aur vaah gaon ke mandir mein rehte hain aur hostel mein rehne waale baccho ke liye banne vala khana hi khate hain raj gaon ka har sakhs jo hai aatm nirbhar hai aas pados ke gaon ke liye bhi yahan se chara doodh aadi jata hai aur gaon mein bhi ek tarah ka raj ramraj hai aur gaon mein toh unhone ram raj sthapit kar diya hai ab vaah apne dal bal ke saath desh mein ram raj ki sthapna ki muhim mein nikle

अन्ना हजारे अन्ना हजारे का वास्तविक नाम किशन बाबूराव हजारे हैं 15 जून 1936 को महाराष्ट्र क

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