इंसान के दिमाग़ की गहराई ज़्यादा है या ब्रहम्मंड की गहराई?...


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हां भाई तो आपने बहुत अच्छा क्वेश्चन पूछा है देखिए ऐसा कोई बात नहीं इंसान के दिमाग की गहराई और ब्रह्मांड ब्रह्मांड का भी अंदाजा नहीं लगाया गया है कि कितना बड़ा है और ना ही दिमाग की क्षमता को पता किया गया है कि की एक जितना ज्यादा मतलब सोच सके लेकिन यदि देखा जाए तो साइंस की माने तो साइड में कहा है कि दिमाग की जो संरचना है वह ब्रह्मांड की रचना से मैच करती है और मेरे नजरिए से तो देखिए गहराई जो है दोनों की बड़ी है गरीबी के दिमाग ब्रह्मांड से भी गहरी मेरे साथी दिमाग दिमाग हमारा दिमाग में यदि ब्रह्मांड आ रहा है तो इसका मतलब दिमाग बड़ा है तभी उसमें आ रहा है हम सोच सकते हैं कि ब्रह्मांड है इसका मतलब दिमाग हमारा ब्रह्मांड से भी बड़ा है सोच इसकी थिंकिंग पावर उससे अधिक है

haan bhai toh aapne bahut accha question poocha hai dekhiye aisa koi baat nahi insaan ke dimag ki gehrai aur brahmaand brahmaand ka bhi andaja nahi lagaya gaya hai ki kitna bada hai aur na hi dimag ki kshamta ko pata kiya gaya hai ki ki ek jitna zyada matlab soch sake lekin yadi dekha jaaye toh science ki maane toh side mein kaha hai ki dimag ki jo sanrachna hai vaah brahmaand ki rachna se match karti hai aur mere nazariye se toh dekhiye gehrai jo hai dono ki badi hai garibi ke dimag brahmaand se bhi gehri mere sathi dimag dimag hamara dimag mein yadi brahmaand aa raha hai toh iska matlab dimag bada hai tabhi usme aa raha hai hum soch sakte hain ki brahmaand hai iska matlab dimag hamara brahmaand se bhi bada hai soch iski thinking power usse adhik hai

हां भाई तो आपने बहुत अच्छा क्वेश्चन पूछा है देखिए ऐसा कोई बात नहीं इंसान के दिमाग की गहराई

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Roshan Prasad Jaiswal

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इंसान की दिमाग की गहराई ज्यादा है या ब्रह्मांड की गहराई तो आकाश को आनंद है इसका कोई और तो नहीं है तो यह कितना बड़ा है इसका कोई ठोस अंदाजा अब से पहले तक नहीं था मगर बस इतना दिमाग का कुछ वैज्ञानिक के दावा करने लगे उन्होंने ब्रह्मांड को ना पिया बता जानेमन कहते हैं कि ब्रह्मांड में टिकरी अरब प्रकाश वर्ष जोड़ा है तो प्रकाश वर्ष को पैमाना है जिससे हम लंबिया दूरबीन आते हैं तो इसकी गहराई के बारे में अगर यदि ज्ञात करें तो गहराई का हिसाब नहीं लगाया जा सकता है ना कि दिमाग की गहराई

insaan ki dimag ki gehrai zyada hai ya brahmaand ki gehrai toh akash ko anand hai iska koi aur toh nahi hai toh yah kitna bada hai iska koi thos andaja ab se pehle tak nahi tha magar bus itna dimag ka kuch vaigyanik ke daawa karne lage unhone brahmaand ko na piya bata jaaneman kehte hain ki brahmaand mein tikri arab prakash varsh joda hai toh prakash varsh ko paimaana hai jisse hum lambiya doorbeen aate hain toh iski gehrai ke bare mein agar yadi gyaat kare toh gehrai ka hisab nahi lagaya ja sakta hai na ki dimag ki gehrai

इंसान की दिमाग की गहराई ज्यादा है या ब्रह्मांड की गहराई तो आकाश को आनंद है इसका कोई और तो

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