भारत में नये पर्यटन स्थलों के विकास की गति इतनी धीमी क्यों है?...


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ऐसा है ना हमारे यहां अगर हम बात करें मैं पर्यटन स्थलों की तो बहुत सारे पर्यटन स्थल हमारी राजनीति में पढ़ते हुए हैं और हमारी इच्छाशक्ति की कमी है हमारी सरकारें जो है वह कोई भी डेस्टिनेशन को जागृत नहीं करती सबसे पहले राजीव गांधी ने एक बात स्वीकार की थी मैं उनका कोई बहुत बड़ा प्रशंसक नहीं हूं लेकिन उनकी एक बात का मैं प्रशंसक हूं कि उन्होंने इमानदारी से कहा था कि ₹1 अगर सरकारी खजाने से डेवलपमेंट के लिए या किसी योजना के लिए आता है तो उसका 15 पैसे खर्च होता है बाकी सब बीच में आ चला जाता है तो हमारे यहां तो प्लीज जो बजट है और करप्शन से उसकी भी जाते हैं तो एक तो यह कि बात करने के लिए हमेशा पैसे का रोना रोया जाता है दूसरी बात की है कि हमारे जो रूलर पार्टी रहती है वह किसी भी पार्टी का आजादी के बाद से अब उन्होंने पर्यटन स्थलों को ठीक से मेंटेन करने का अधिकार नहीं किया नए डिवेलप करने की बात तो बहुत दूर की बात है मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है आप बहुत सारी हमारी जो ऐतिहासिक महत्व की इमारतें हैं वह आज उनकी बहुत दुर्दशा है और उन पर कोई रखरखाव पर विशेष ध्यान नहीं दिया जाता आगरा में ताजमहल कितना इंपॉर्टेंट है कितना महत्त्व रखता है उसके अलावा भी वहां पर बहुत सारे ऐसे मॉन्यूमेंट है से स्मारक है जो उससे कहीं मतलब कम नहीं है उसे कम महत्वपूर्ण नहीं है

aisa hai na hamare yahan agar hum baat kare main paryatan sthalon ki toh bahut saare paryatan sthal hamari raajneeti mein padhte hue hain aur hamari ichchhaashakti ki kami hai hamari sarkaren jo hai vaah koi bhi destination ko jagrit nahi karti sabse pehle rajeev gandhi ne ek baat sweekar ki thi main unka koi bahut bada prasanshak nahi hoon lekin unki ek baat ka main prasanshak hoon ki unhone imaandari se kaha tha ki Rs agar sarkari khajaane se development ke liye ya kisi yojana ke liye aata hai toh uska 15 paise kharch hota hai baki sab beech mein aa chala jata hai toh hamare yahan toh please jo budget hai aur corruption se uski bhi jaate hain toh ek toh yah ki baat karne ke liye hamesha paise ka rona roya jata hai dusri baat ki hai ki hamare jo ruler party rehti hai vaah kisi bhi party ka azadi ke baad se ab unhone paryatan sthalon ko theek se maintain karne ka adhikaar nahi kiya naye develop karne ki baat toh bahut dur ki baat hai mujhe yah kehne mein koi sankoch nahi hai aap bahut saree hamari jo etihasik mahatva ki imaraten hain vaah aaj unki bahut durdasha hai aur un par koi rakharakhav par vishesh dhyan nahi diya jata agra mein tajmahal kitna important hai kitna mahatva rakhta hai uske alava bhi wahan par bahut saare aise monument hai se smarak hai jo usse kahin matlab kam nahi hai use kam mahatvapurna nahi hai

ऐसा है ना हमारे यहां अगर हम बात करें मैं पर्यटन स्थलों की तो बहुत सारे पर्यटन स्थल हमारी र

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Girish Soni

Indian Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कि मैं ही मैं आपको बता रहा हूं जो देश का विकास होता है यह सच्ची सरकार से अच्छी सरकार से जो कि हर चीज के विषय में सोचे कि मुझे हमारे देश के पर्यटन का हमारे देश का ध्यान इस ओर ना होकर सिर्फ सत्ता पर काबिज रहना और कुछ लोगों की गुलाम गुलामी करना अगर हम अपने पूरे संसद को आज उठा कर दो सारे के सारे सांसद कहीं ना कहीं भी कोई ना कोई उनको यह पता होता है कि आज नहीं तो कल अगर वह अंबानी जी चाहे तो मेरा क्या कहते हैं मेरे को मंत्री पद से हटाने में लगे देश को कोई अच्छा कुछ बना पाएंगे जब तक बनेगा नहीं होंगे पर्यटक अगर उस जिस देश में जागरण जाना चाहता है उस देश में शांति चाहता है उस देश के अंदर यह नहीं चाहता कि आपसी झगड़े होने कौन जाएगा पाकिस्तान घूमने जाएंगे टंकी अगर बहुत अच्छा सुंदर बनाया भी नहीं पहले अपने देश को ठीक कीजिए देश की मछलियों का विकास कीजिए जो देश की मानसिकता का अपहरण हो चुका है उसको ठीक कीजिए उसके बाद फिर पर्यटक स्थलों को ठीक कीजिए देखिए पर्यटक जरूर आएंगे उन लोगों को शिक्षित कीजिए आज क्योंकि आज देश में जो इस तरह की स्थिति पैदा हुए पर्यटक किस लिए काम आता है क्योंकि वह जानता है किस देश के अंदर लूट बलात्कार की घटनाएं होती है

ki main hi main aapko bata raha hoon jo desh ka vikas hota hai yah sachi sarkar se achi sarkar se jo ki har cheez ke vishay mein soche ki mujhe hamare desh ke paryatan ka hamare desh ka dhyan is aur na hokar sirf satta par kabij rehna aur kuch logo ki gulam gulaami karna agar hum apne poore sansad ko aaj utha kar do saare ke saare saansad kahin na kahin bhi koi na koi unko yah pata hota hai ki aaj nahi toh kal agar vaah ambani ji chahen toh mera kya kehte hain mere ko mantri pad se hatane mein lage desh ko koi accha kuch bana payenge jab tak banega nahi honge paryatak agar us jis desh mein jagran jana chahta hai us desh mein shanti chahta hai us desh ke andar yah nahi chahta ki aapasi jhagde hone kaun jaega pakistan ghoomne jaenge tanki agar bahut accha sundar banaya bhi nahi pehle apne desh ko theek kijiye desh ki machliyo ka vikas kijiye jo desh ki mansikta ka apahran ho chuka hai usko theek kijiye uske baad phir paryatak sthalon ko theek kijiye dekhiye paryatak zaroor aayenge un logo ko shikshit kijiye aaj kyonki aaj desh mein jo is tarah ki sthiti paida hue paryatak kis liye kaam aata hai kyonki vaah jaanta hai kis desh ke andar loot balatkar ki ghatnaye hoti hai

कि मैं ही मैं आपको बता रहा हूं जो देश का विकास होता है यह सच्ची सरकार से अच्छी सरकार से जो

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