कोई भी राजनीतिक पार्टी न्यायालय के सुधार का मुद्दा नहीं उठाती । क्यों?...


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KRISHNA KUMAR SINGH

Social Activist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सबसे पहली बात यह है कि सबसे पहला हमारे संविधान का फार्मूला यह है कि सरकार में लेने लेने में कोई ज्ञान नहीं हिंदी बोल सकता है और 2 लाइन लिखने सकता वह भी है लेकिन यहां जाकर जनजाति बन जाते हैं जब तक नहीं हो जाता से क्यों नहीं माना जाता है इसमें फंस गया और उसको ऐसा लिखा है ग्रेजुएट है हर चीज से क्वालिटी किसी फॉल्स केस में फस गया था तूफान करके उसको नहीं देंगे टिकट लड़ने के लिए यह भी गलत होगा

sabse pehli baat yah hai ki sabse pehla hamare samvidhan ka formula yah hai ki sarkar mein lene lene mein koi gyaan nahi hindi bol sakta hai aur 2 line likhne sakta vaah bhi hai lekin yahan jaakar janjaati ban jaate hain jab tak nahi ho jata se kyon nahi mana jata hai isme fans gaya aur usko aisa likha hai graduate hai har cheez se quality kisi FALSE case mein fas gaya tha toofan karke usko nahi denge ticket ladane ke liye yah bhi galat hoga

सबसे पहली बात यह है कि सबसे पहला हमारे संविधान का फार्मूला यह है कि सरकार में लेने लेने मे

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एटी परसेंट जितने भी राजनीतिक व्यक्ति के ऊपर कुछ न कुछ मुकदमा झूठा केस स्टेटस बना हो 2 साल में खत्म हो जाए सारे नेता सारे नेताओं के पास

eighty percent jitne bhi raajnitik vyakti ke upar kuch na kuch mukadma jhutha case status bana ho 2 saal mein khatam ho jaaye saare neta saare netaon ke paas

एटी परसेंट जितने भी राजनीतिक व्यक्ति के ऊपर कुछ न कुछ मुकदमा झूठा केस स्टेटस बना हो 2 साल

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कोई भी राय की पिक्चर

koi bhi rai ki picture

कोई भी राय की पिक्चर

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Vijay Singh

Social Worker

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Moazam Khan

Politician, Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सफाई करने के मुद्दा उठाया रहेगा

safaai karne ke mudda uthaya rahega

सफाई करने के मुद्दा उठाया रहेगा

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कोई भी राजनीतिक पार्टी नालों के मुद्दों को इसलिए नहीं उठाती है और उनके सुधार के बारे में इसलिए नहीं सोचती है क्योंकि जो न्यायालय होता है उद्यानिकी जुडिशरी और चौपाटी सोते हैं यानी कि लेजिस्लेटिव यह दोनों अलग-अलग पार्ट होते हैं गवर्नमेंट के भजन एवं अलग-अलग गवर्नमेंट के ऑर्गन कहते हैं और जिनकी वजह से गवर्नमेंट काम करवाती है किसी भी देश की लेकिन हमको यह बात जान ली होगी यह दोनों अलग-अलग पार्ट्स MP3 एक दूसरे से मिलकर नहीं रह सकते हैं और ना ही एक दूसरे का इन के लोगों का एक दूसरे पर कोई भी पावर होती है जिससे वह अपने आप कुछ कर सके तो अगर न्यायालय कोई भी फैसला लेता है या वह कोई भी जजमेंट देता है तो उसमें किसी भी राजनीतिक पार्टी का कोई भी हाथ नहीं हो सकता है और ना ही कोई राजनीतिक पार्टी न्यायालय को फोर्स कर सकती है कि कुछ काम करने के लिए और इंडिया कोई जजमेंट देने के लिए और यही वजह है जिसकी वजह से हम को न्याय पुर जजमेंट मिल पाते हैं किसी कोई पार्टी अपना फैसला होली सकती है चाहे वह कितनी भी रूलिंग पार्टी में रही हो और उसके बाद जो न्यायालय के सुधार की बात है तो उसके लिए सुप्रीम कोर्ट बनाया हुआ है अगर आपको किसी भी नीचे के न्यायलय में कोई भी दिक्कत होती है कोई भी ऐसी जगह जजमेंट मिलता है जो कि आपको यह लगता है कि वह दयापुर नहीं है तो आप उसको सुधार के लिए या फिर उसको बदलवाने के लिए फेस को चैलेंज करने के लिए किसी भी ऊपर रख कि कोर्ट में जाकर अपील कर सकते हैं और वहां पर जरूर आपकी कॉन्स्टिट्यूशन पंचवटी की जिसमें एक नहीं बल्कि 2 दिन या 5 या फिर उससे ज्यादा जज बैठकर आपका फैसला लेते हैं जो कि ज़रूर रहने अपूर्ण ही होगा

koi bhi raajnitik party naalon ke muddon ko isliye nahi uthaati hai aur unke sudhaar ke bare mein isliye nahi sochti hai kyonki jo nyayalaya hota hai udyaniki judiciary aur chaupati sote hain yani ki legislative yah dono alag alag part hote hain government ke bhajan evam alag alag government ke organ kehte hain aur jinki wajah se government kaam karwati hai kisi bhi desh ki lekin hamko yah baat jaan li hogi yah dono alag alag parts MP3 ek dusre se milkar nahi reh sakte hain aur na hi ek dusre ka in ke logo ka ek dusre par koi bhi power hoti hai jisse vaah apne aap kuch kar sake toh agar nyayalaya koi bhi faisla leta hai ya vaah koi bhi judgement deta hai toh usme kisi bhi raajnitik party ka koi bhi hath nahi ho sakta hai aur na hi koi raajnitik party nyayalaya ko force kar sakti hai ki kuch kaam karne ke liye aur india koi judgement dene ke liye aur yahi wajah hai jiski wajah se hum ko nyay pur judgement mil paate hain kisi koi party apna faisla holi sakti hai chahen vaah kitni bhi ruling party mein rahi ho aur uske baad jo nyayalaya ke sudhaar ki baat hai toh uske liye supreme court banaya hua hai agar aapko kisi bhi niche ke nayayalaya mein koi bhi dikkat hoti hai koi bhi aisi jagah judgement milta hai jo ki aapko yah lagta hai ki vaah dayapur nahi hai toh aap usko sudhaar ke liye ya phir usko badalvane ke liye face ko challenge karne ke liye kisi bhi upar rakh ki court mein jaakar appeal kar sakte hain aur wahan par zaroor aapki Constitution panchawati ki jisme ek nahi balki 2 din ya 5 ya phir usse zyada judge baithkar aapka faisla lete hain jo ki zarur rehne apurn hi hoga

कोई भी राजनीतिक पार्टी नालों के मुद्दों को इसलिए नहीं उठाती है और उनके सुधार के बारे में इ

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Anukrati

Journalism Graduate

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कोई भी राजनीतिक पार्टी न्यायालय में सुधार का मुद्दा नहीं उठाती है ना ही उठाएगी क्योंकि राजनीतिक दखल की वजह से ही न्याय व्यवस्था का यह हाल हुआ है राजनीति में जिनके ऊंचे बहुत छोटी है वह लोग कुछ गलत कर के भी अपने राजनैतिक सोर्सेस की वजह से बच निकलते हैं भ्रष्टाचार की वजह से न्याय व्यवस्था भी अंदर से खोखली हो गई है कुछ ईमानदार लोगों की इमानदारी भी बेईमानी के आगे चल नहीं पाती है ऐसा नहीं है कि ईमानदारी बची नहीं है अभी भी सच्चाई और ईमानदारी है और न्याय मिलता है लेकिन कई बार इसमें बहुत वक्त लग जाता है अगर राजनीति से भ्रष्टाचार और बेईमानी खत्म हो जाए तो बाकी सब जगह से भी इसे हटाने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा जरूरत है आज राजनीति में युवा सोच पढ़े-लिखे और ईमानदार नेताओं की जो देश को सेवा का संकल्प लेकर राजनीति में आए जनता की भलाई के बारे में सोचते तभी वह व्यवस्था बदल शक्ति है

koi bhi raajnitik party nyayalaya mein sudhaar ka mudda nahi uthaati hai na hi uthayegee kyonki raajnitik dakhal ki wajah se hi nyay vyavastha ka yah haal hua hai raajneeti mein jinke unche bahut choti hai vaah log kuch galat kar ke bhi apne rajnaitik sources ki wajah se bach nikalte hain bhrashtachar ki wajah se nyay vyavastha bhi andar se khokhli ho gayi hai kuch imaandaar logo ki imaandari bhi baimani ke aage chal nahi pati hai aisa nahi hai ki imaandaari bachi nahi hai abhi bhi sacchai aur imaandaari hai aur nyay milta hai lekin kai baar isme bahut waqt lag jata hai agar raajneeti se bhrashtachar aur baimani khatam ho jaaye toh baki sab jagah se bhi ise hatane mein zyada waqt nahi lagega zarurat hai aaj raajneeti mein yuva soch padhe likhe aur imaandaar netaon ki jo desh ko seva ka sankalp lekar raajneeti mein aaye janta ki bhalai ke bare mein sochte tabhi vaah vyavastha badal shakti hai

कोई भी राजनीतिक पार्टी न्यायालय में सुधार का मुद्दा नहीं उठाती है ना ही उठाएगी क्योंकि राज

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