सर्वेक्षण में कहा गया है कि भारत में 21 लाख 'अवांछित' लड़कियां हैं, क्योंकि दंपति बेटे होने तक बच्चे पैदा करते हैं ।इस पक्षपातपूर्ण सोच को कैसे बदला जा सकता है?...


play
user

Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

1:43

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें और आपको कदम उठाने की आवश्यकता होगी l मुझे लगता है जैसे बेटा होने की खुशी में आप लोग जश्न मनाते हैं वैसा अगर जश्न बेटियों के जन्म होने पर होने लगेगा तो जरुर ही भारत में इस तरह की चीजें आने लगेंगी l अभी तो भारत में यह आंकड़ा दिखाया जा चुका है कि 21 लाख अवन्शिनीय लड़कियां हैं l मुझे लगता है पहले अगर इस बात की अगर इस तरह का सर्वे किया था तुझे और ज्यादा आता l हाँ, मतलब सीधा-सीधा कहने का अर्थ है कि इसमें कमी आ रही है और आज की युवा पीढ़ी की सोच बदल रही है l वह लड़कियों को बाहर जैसा नहीं महसूस करती l हालांकि जो पुराना समाज था उस से ओतप्रोत चीजे खत्म होने में, ट्रांससीशन फेज में बहुत टाइम लगेगा लेकिन जब तक इस तरह के कार्य चल रहे हैं, जब तक लड़कियों को सामान सब तरीके से नहीं दिया जाता, समान अवसर नहीं दी जाती, जब तक उनके साथ पक्षपात पूर्ण सोच को हटाया नहीं जाता तब तक मुझे लगता है इस तरह की चीजें अपनाया जाना अति आवश्यक है कि आप समाज में जाकर स्वयं का उदाहरण पेश करें ताकि समाज आपको देखकर प्रेरित हो और लड़कियों के लिए अच्छी सोच रखें l जैसे कि साउथ इंडिया में अब जाएंगे तो केरल, तमिलनाडु में वहां पर काफी इज्जत की जाती l कल्चर भी मातृ सत्तात्मक टाइप का है, वहां पर लड़के की लड़कियों की शादी होती है तो लड़की को घर पर आ जाता है l मतलब अगर इंडिया में बात, नार्थ इंडिया बात की जाए तो मुझे लगता है शायद घर जमाई वाला जो केस होता है वह सैम साउथ इंडिया में कोई स्थानों पर किया जाता है l तो इस तरह की चीजें करना थोड़ा आवश्यक है ताकि महिलाओं को थोड़ा आजादी मिली और महिलाओं के साथ अच्छा व्यवहार हो, समाज एक सेफ सी जगह बनाए तो महिलाओं को भी बराबर सम्मान दिया जाएगा तो मुझे लगता नहीं है कि इस तरह के डाटा जो है वह आगे बढ़ेंगे, कमी होते जाएंगे अभी भी कम हो रहे हैं द्रासटीकलि कम करने की जरूरत है, धन्यवाद l

is soch ko badalne ke liye sabse pehle hamein aur aapko kadam uthane ki avashyakta hogi l mujhe lagta hai jaise beta hone ki khushi mein aap log jashn manate hain waisa agar jashn betiyon ke janam hone par hone lagega toh zaroor hi bharat mein is tarah ki cheezen aane lagengi l abhi toh bharat mein yah ankada dikhaya ja chuka hai ki 21 lakh avanshiniya ladkiyan hain l mujhe lagta hai pehle agar is baat ki agar is tarah ka survey kiya tha tujhe aur zyada aata l haan matlab seedha seedha kehne ka arth hai ki isme kami aa rahi hai aur aaj ki yuva peedhi ki soch badal rahi hai l vaah ladkiyon ko bahar jaisa nahi mehsus karti l halaki jo purana samaj tha us se otaprot chije khatam hone mein transasishan phase mein bahut time lagega lekin jab tak is tarah ke karya chal rahe hain jab tak ladkiyon ko saamaan sab tarike se nahi diya jata saman avsar nahi di jaati jab tak unke saath pakshapat purn soch ko hataya nahi jata tab tak mujhe lagta hai is tarah ki cheezen apnaya jana ati aavashyak hai ki aap samaj mein jaakar swayam ka udaharan pesh kare taki samaj aapko dekhkar prerit ho aur ladkiyon ke liye achi soch rakhen l jaise ki south india mein ab jaenge toh kerala tamil nadu mein wahan par kaafi izzat ki jaati l culture bhi matr sattatmak type ka hai wahan par ladke ki ladkiyon ki shadi hoti hai toh ladki ko ghar par aa jata hai l matlab agar india mein baat north india baat ki jaaye toh mujhe lagta hai shayad ghar jamai vala jo case hota hai vaah sam south india mein koi sthano par kiya jata hai l toh is tarah ki cheezen karna thoda aavashyak hai taki mahilaon ko thoda azadi mili aur mahilaon ke saath accha vyavhar ho samaj ek safe si jagah banaye toh mahilaon ko bhi barabar sammaan diya jaega toh mujhe lagta nahi hai ki is tarah ke data jo hai vaah aage badhenge kami hote jaenge abhi bhi kam ho rahe hain drasatikli kam karne ki zarurat hai dhanyavad l

इस सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें और आपको कदम उठाने की आवश्यकता होगी l मुझे लगता है जै

Romanized Version
Likes  8  Dislikes    views  146
WhatsApp_icon
2 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Samweta Gaur

Sports Enthusiast

0:47
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस पक्षपातपूर्ण सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें खुद एक उदाहरण बनना होगा l हमें हमारे घर की औरतों और लड़कियों को प्रोत्साहित करना होगा ताकि वह आगे बढ़े और उनको आगे बढ़ने में मदद भी करनी पड़ेगी l उसके बाद हम लोगों के पास जाकर यह बता सकते हैं कि लड़की का क्या महत्व है, अगर लड़की नहीं होगी तो उनका वंश भी आगे नहीं बढ़ेगा l और उन्हें यह भी बताना होगा हम सब लड़कियों को पराया धन कहते हैं l शादी करने के बाद उन्हें पराया समजने भी लगते हैं l लेकिन लड़कियां ही होती है जो शादी के बाद भी अपने मां बाप का ख्याल रखती है, उनके पास आती है l यहां तक कि कुछ लड़कियां अपने मां-बाप को अपने साथ भी रखती है l लेकिन जिन बेटों की वजह से हम यह सब करते हैं वही बेटे उन मां बाप को वृद्धाश्रम में डाल देते हैं l तो हमें यह सब उनको समझाना होगा तभी यह पक्षपात पूर्ण सोच बदली जा सकती है l

is pakshpatpurna soch ko badalne ke liye sabse pehle hamein khud ek udaharan banna hoga l hamein hamare ghar ki auraton aur ladkiyon ko protsahit karna hoga taki vaah aage badhe aur unko aage badhne mein madad bhi karni padegi l uske baad hum logo ke paas jaakar yah bata sakte hain ki ladki ka kya mahatva hai agar ladki nahi hogi toh unka vansh bhi aage nahi badhega l aur unhe yah bhi bataana hoga hum sab ladkiyon ko paraaya dhan kehte hain l shadi karne ke baad unhe paraaya samajhne bhi lagte hain l lekin ladkiyan hi hoti hai jo shadi ke baad bhi apne maa baap ka khayal rakhti hai unke paas aati hai l yahan tak ki kuch ladkiyan apne maa baap ko apne saath bhi rakhti hai l lekin jin beto ki wajah se hum yah sab karte hain wahi bete un maa baap ko vridha ashram mein daal dete hain l toh hamein yah sab unko samajhana hoga tabhi yah pakshapat purn soch badli ja sakti hai l

इस पक्षपातपूर्ण सोच को बदलने के लिए सबसे पहले हमें खुद एक उदाहरण बनना होगा l हमें हमारे घर

Romanized Version
Likes  1  Dislikes    views  129
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!