थियेटर में राष्ट्रीय गान बजाना अब वैकल्पिक है, आप की राय?...


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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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देवी महिपाल जी मेरे हिसाब से यह कच्छा डिसीजन है इस देश भक्ति किसी पर विश्वास नहीं कर सकते देशभक्ति क्या आप कोई भी फीलिंग आई मोसम किसी व्यक्ति पर फोन नहीं कर सकती हो आपके अंदर से आना चाहिए और बहुत सारी टेररिस्ट में बहुत सारे ऐसे लोग जो देश के हित के बारे में नहीं सोचते वह भी ठीक है उसमें जाते हैं और अगर वह फॉर्मेलिटी में खड़ी थी हो जाए राष्ट्रगान के दौरान उनके अंदर कोई चेंजेस तो नहीं आया ना वह रहेंगे तो वैसे ही और वह तेरे से हमारे राष्ट्रगान का अपमान भी है तू अब राष्ट्रगान होना जो अब ऑप्शन कर दिया गया धीरे से मेरी तरफ से यह बात ठीक है और दूसरा यह भी कि आप मूवीस वगैरा की Entertainment propose चाहते हैं वह भी अगर आप अशोक सीरियल सपने में राष्ट्रभक्ति ऐसे जो भी फीलिंग्स साथ रखेंगे तो कुछ लोगों को यह एंकर मीनिंग लग लगता है सबको नहीं क्योंकि राष्ट्रभक्ति हर समय आपके दिल के अंदर होनी ही चाहिए तो अभी सरकार का एक अच्छा डिसीजन है यह लोग को एक अच्छा लोहिया 11092 है कि अभी ऑप्शनल होगा चाहेंगे तो अलार्म बजेगा बढ़ा नहीं बचेगा जो कि सही है मेरे हिसाब से

devi mahipal ji mere hisab se yah kaccha decision hai is desh bhakti kisi par vishwas nahi kar sakte deshbhakti kya aap koi bhi feeling I mosam kisi vyakti par phone nahi kar sakti ho aapke andar se aana chahiye aur bahut saree terrorist mein bahut saare aise log jo desh ke hit ke bare mein nahi sochte vaah bhi theek hai usme jaate hain aur agar vaah formality mein khadi thi ho jaaye rashtragan ke dauran unke andar koi changes toh nahi aaya na vaah rahenge toh waise hi aur vaah tere se hamare rashtragan ka apman bhi hai tu ab rashtragan hona jo ab option kar diya gaya dhire se meri taraf se yah baat theek hai aur doosra yah bhi ki aap Movies vagera ki Entertainment propose chahte hain vaah bhi agar aap ashok serial sapne mein rashtra bhakti aise jo bhi feelings saath rakhenge toh kuch logo ko yah anchor meaning lag lagta hai sabko nahi kyonki rashtra bhakti har samay aapke dil ke andar honi hi chahiye toh abhi sarkar ka ek accha decision hai yah log ko ek accha lohiya 11092 hai ki abhi optional hoga chahenge toh alarm bajega badha nahi bachega jo ki sahi hai mere hisab se

देवी महिपाल जी मेरे हिसाब से यह कच्छा डिसीजन है इस देश भक्ति किसी पर विश्वास नहीं कर सकते

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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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अंधे के हाथ जो हमारे देश की सर्वोच्चन्यायालय हैं जो सुप्रीम कोर्ट है उसने वाटर पार्क किया कि थिएटर में जो राष्ट्र ज्ञान है अब बजाना वैकल्पिक हो गया है जैसा कि थोड़े महीनों पहले हमारे भारत सरकार ने यह आर्डर पास गया था कि सारे जो मूवी थिएटर सेवंथ को बजाया अगर ऐसा नहीं बजाया जाता है तू उनके खिलाफ जो है कार्रवाई की जाएगी जो हो सके उसे दो माली के मोबाइल पर चलाना भी जरुरी नहीं है और वह कैसे के मालिक को चलाना चाहते हैं नहीं तो मैं समझता हूं कि कोई प्रॉब्लम नहीं है तो उन लोग लोग हमारे देश को सम्मान देने के लिए खड़े हो रहे थे और उसे कोई प्रॉब्लम सुप्रीम कोर्ट जो है इसको ऑप्शनल करने का ऑप्शन ही नहीं रहता चित्र वालों के सामने अगर ऐसा कुछ बड़ी बात होती है सीरियस बात होती तो सुप्रीम कोर्ट जो है वह बोल देता कि सुप्रीम कोर्ट ने उसे ऑप्शन कर दिया है जो लोग चाहे वह खड़े हो सकते हैं अगर वह चाहे थिएटर वाले के ऊपर ही कर दिया गया है कि वह बताना चाहते हैं तो बताएं काम करके देंगे हमारे भारत देश के प्रति जो ग्रुप हैं उसमे अपना भाग्य देकर करें

andhe ke hath jo hamare desh ki sarvochchanyayalay hain jo supreme court hai usne water park kiya ki theater mein jo rashtra gyaan hai ab bajana vaikalpik ho gaya hai jaisa ki thode mahinon pehle hamare bharat sarkar ne yah order paas gaya tha ki saare jo movie theater sevanth ko bajaya agar aisa nahi bajaya jata hai tu unke khilaf jo hai karyawahi ki jayegi jo ho sake use do maali ke mobile par chalana bhi zaroori nahi hai aur vaah kaise ke malik ko chalana chahte hain nahi toh main samajhata hoon ki koi problem nahi hai toh un log log hamare desh ko sammaan dene ke liye khade ho rahe the aur use koi problem supreme court jo hai isko optional karne ka option hi nahi rehta chitra walon ke saamne agar aisa kuch badi baat hoti hai serious baat hoti toh supreme court jo hai vaah bol deta ki supreme court ne use option kar diya hai jo log chahen vaah khade ho sakte hain agar vaah chahen theater waale ke upar hi kar diya gaya hai ki vaah bataana chahte hain toh bataye kaam karke denge hamare bharat desh ke prati jo group hain usme apna bhagya dekar karen

अंधे के हाथ जो हमारे देश की सर्वोच्चन्यायालय हैं जो सुप्रीम कोर्ट है उसने वाटर पार्क किया

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Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत की सर्वोच्चन्यायालय यानी कि सुप्रीम कोर्ट ने आज एक निर्णय देते हुए कहा है कि कोई भी सिनेमाघरों में राष्ट्रीय गीत बजना एक कंपनी से नहीं है या फिर भी जरूरी नहीं है अगर कोई भी सिनेमाघर में का नेशनल एंथम या फिर राष्ट्रगीत नहीं बचता है तो भी वह चलता है मेरे हिसाब से जो कोर्ट का निर्णय है वह सही है कि कि हम लोगों को देश भक्ति दिखानी है तो जरूरी नहीं है कि हम सिनेमाघर में राष्ट्रगान राष्ट्रगीत बजाना जरूरी है और मेरी सांसे मुझे नहीं लगता के सिनेमाघरों में राष्ट्र गीत पचरा अगर कोई भी राष्ट्रीय मूवी हो या फिर हम कह सकते हैं पेट्रियोटिक मूवी हो या फिर कोई भी तुमसे मुझे कि फ्रीडम फाइटर्स पर भेज दूंगा उसके पहले राष्ट्रीय गीत होता है तो मेरे हिसाब से छत पर खड़ा होना सही है या फिर उपेंद्र खत्म होने के बाद एक राष्ट्र गीत बेचता है तो मेरे हिसाब से वह सही होगा परंतु मुझे एसा लगता के सिनेमाघरों में नेशनल एंथम किया फिर Aashiqui सकता मैं भी तरीके से जरूरत है वह फिल्म गीत सिनेमा हॉल सेक्सी लगती है जहां पर जाते हैं और वह में राष्ट्रीय गीत होना चाहिए और आज से सुप्रीम कोर्ट से पहले भी कहा जाता राष्ट्रगीत हो रहा है तो जरूरी मित्रों को खड़ा ही होना है कि किस बात में विवाद हुआ था तो मुझे नहीं लगता कि सुप्रीम कोर्ट ने जो कहा है वह बिल्कुल गलत कहा सुप्रीम कोर्ट ने सही कहा की राष्ट्र गीत चोय सिनेमाघरों में बैटरी नहीं है और जो भीम को 2016 का जो कि उन्होंने वॉटर पार्क किया था उन्होंने कहा था कि अगर सिनेमाघरों में राष्ट्रगान भेजना है तो खड़ा होना जरूरी नहीं है तो इसमें यह और एक ना डा आर्डर दिया है कि नेशनल एंथम जो है वह जरूरी नहीं है सिनेमाघरों में तू मेरी शाम से जोबनेर नहीं लिया है सुप्रीम कोर्ट का बिल्कुल सही है और भारत सरकार को भी ओपन कर सकते हैं बीजेपी सरकार को भी इस बात का पालन करना चाहिए

bharat ki sarvochchanyayalay yani ki supreme court ne aaj ek nirnay dete hue kaha hai ki koi bhi sinemagharon mein rashtriya geet bajna ek company se nahi hai ya phir bhi zaroori nahi hai agar koi bhi cinemaghar mein ka national Anthem ya phir rashtrageet nahi bachta hai toh bhi vaah chalta hai mere hisab se jo court ka nirnay hai vaah sahi hai ki ki hum logo ko desh bhakti dikhaani hai toh zaroori nahi hai ki hum cinemaghar mein rashtragan rashtrageet bajana zaroori hai aur meri sanse mujhe nahi lagta ke sinemagharon mein rashtra geet pachara agar koi bhi rashtriya movie ho ya phir hum keh sakte hain petriyotik movie ho ya phir koi bhi tumse mujhe ki freedom fighters par bhej dunga uske pehle rashtriya geet hota hai toh mere hisab se chhat par khada hona sahi hai ya phir upendra khatam hone ke baad ek rashtra geet bechta hai toh mere hisab se vaah sahi hoga parantu mujhe aisa lagta ke sinemagharon mein national Anthem kiya phir Aashiqui sakta main bhi tarike se zarurat hai vaah film geet cinema hall sexy lagti hai jaha par jaate hain aur vaah mein rashtriya geet hona chahiye aur aaj se supreme court se pehle bhi kaha jata rashtrageet ho raha hai toh zaroori mitron ko khada hi hona hai ki kis baat mein vivaad hua tha toh mujhe nahi lagta ki supreme court ne jo kaha hai vaah bilkul galat kaha supreme court ne sahi kaha ki rashtra geet choy sinemagharon mein battery nahi hai aur jo bhim ko 2016 ka jo ki unhone water park kiya tha unhone kaha tha ki agar sinemagharon mein rashtragan bhejna hai toh khada hona zaroori nahi hai toh isme yah aur ek na da order diya hai ki national Anthem jo hai vaah zaroori nahi hai sinemagharon mein tu meri shaam se jobner nahi liya hai supreme court ka bilkul sahi hai aur bharat sarkar ko bhi open kar sakte hain bjp sarkar ko bhi is baat ka palan karna chahiye

भारत की सर्वोच्चन्यायालय यानी कि सुप्रीम कोर्ट ने आज एक निर्णय देते हुए कहा है कि कोई भी स

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Hhhgnbhh

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिखे तो क्या चीज है थिएटर में राष्ट्रगान बजाना भी कहते कहते ऐसा बिल्कुल होना चाहिए था क्योंकि पहले हो जाना चाहिए था क्योंकि होता क्या कि हम अगर उस समय पर खड़े हो रहे हैं या नहीं हो रहे हमारा जो हमारी पेट्रोल स्टेशन है वह मरी उसकी से नहीं दिखती है हम जो अपने देश के लिए क्या महसूस करते हैं उसकी इतनी रिस्पेक्ट करते हैं उसे देखती है तो अगर अगर ऐसा हो रहा है कि मूवी के अंदर लोग आ रहे हैं जा रहे हैं कुछ रिप्लाई नहीं हो पाता था उस टाइम पर और सब लोग खड़े नहीं हो पा रहे हैं करते तो हम लोग अपने देश की रिस्पेक्ट नहीं करे तो ऐसा उल्लंघन नहीं होना चाहिए इसकी जानकारी पैक नहीं हो पा रही है वह मेरे को लगता है कि मैं राजस्थान से बजाओ ही माता पर तेरे रिस्पेक्ट करना सिखा उसके बाद बच्चों की कुछ ही कारण रहे हैं जिसकी वजह से लोगों का भी छुट्टी 50% इलाज है कि कुछ लोग चाहते हैं कि ऐसा राष्ट्रगान बजाओ उसको कहते हैं कि राष्ट्रगान 8:00 बजे ऐसी जगह पर हो गई है आपकी बस वैसे आपका खुद का वर्णन है क्या चाहते हैं ऐसे नहीं चाहते हैं और ज्यादा की बातें थिएटर में राष्ट्रगान बजाना तो मेरे हिसाब से यह बिल्कुल ही सही है अब इसको बगैर तो पहले ही कर देना चाहिए अगर आप को देखना चाहिए पर एक मैसेज कैसा प्रूफ देख रहे क्या तुम हॉस्टल में कोई तो रोक नहीं है उधर घूम रहे तो नहीं दिखने वाले हैं तो आप राष्ट्रगान में जाकर करी क्या लेंगे पर यह बिल्कुल उन पर डिपेंड करता है कि वहां की जनता क्या पसंद करती है और क्या नहीं पसंद करती है

dikhen toh kya cheez hai theater mein rashtragan bajana bhi kehte kehte aisa bilkul hona chahiye tha kyonki pehle ho jana chahiye tha kyonki hota kya ki hum agar us samay par khade ho rahe hain ya nahi ho rahe hamara jo hamari petrol station hai vaah mari uski se nahi dikhti hai hum jo apne desh ke liye kya mehsus karte hain uski itni respect karte hain use dekhti hai toh agar agar aisa ho raha hai ki movie ke andar log aa rahe hain ja rahe hain kuch reply nahi ho pata tha us time par aur sab log khade nahi ho paa rahe hain karte toh hum log apne desh ki respect nahi kare toh aisa ullanghan nahi hona chahiye iski jaankari pack nahi ho paa rahi hai vaah mere ko lagta hai ki main rajasthan se bajao hi mata par tere respect karna sikha uske baad baccho ki kuch hi karan rahe hain jiski wajah se logo ka bhi chhutti 50 ilaj hai ki kuch log chahte hain ki aisa rashtragan bajao usko kehte hain ki rashtragan 8 00 baje aisi jagah par ho gayi hai aapki bus waise aapka khud ka varnan hai kya chahte hain aise nahi chahte hain aur zyada ki batein theater mein rashtragan bajana toh mere hisab se yah bilkul hi sahi hai ab isko bagair toh pehle hi kar dena chahiye agar aap ko dekhna chahiye par ek massage kaisa proof dekh rahe kya tum hostel mein koi toh rok nahi hai udhar ghum rahe toh nahi dikhne waale hain toh aap rashtragan mein jaakar kari kya lenge par yah bilkul un par depend karta hai ki wahan ki janta kya pasand karti hai aur kya nahi pasand karti hai

दिखे तो क्या चीज है थिएटर में राष्ट्रगान बजाना भी कहते कहते ऐसा बिल्कुल होना चाहिए था क्यो

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

1:31

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत की सर्वोच्चन्यायालय यानी कि सुप्रीम कोर्ट ने आज एक निर्णय देते हुए बताया कि अब किसी भी मूवी थिएटर में राष्ट्रगान बजाना वैकल्पिक होगा यानी कि इसे बजाना अनिवार्य नहीं है सरकार ने कुछ दिनों पहले यह निर्णय लिया था कि किसी भी मूवी थियेटर में मूवी स्टार्ट होने के पहले राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य है और ऐसा नहीं करने पर मूवी थियेटर के मालिक के खिलाफ कार्यवाही की जाएगी लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने इस नियम में बदलाव करते हुए पैसे वैकल्पिक कर दिया है तो मेरे मुताबिक यह बिल्कुल सही निर्णय है क्योंकि आप किसी भी व्यक्ति पर जबरदस्ती राष्ट्र भक्ति नहीं सोच सकते हैं अगर राष्ट्रभक्ति किसी के मन में है तो वह बिना राष्ट्रगान के भी आ सकती है और अगर किसी के मन में राष्ट्रभक्ति नहीं है तो आप उसे कितनी भी बार राष्ट्रगान सुनवा दीजिए वह उसके मन में नहीं आ सकती हैं तो इस निर्णय से मैं काफी खुश हूं कि कम से कम हमारे राष्ट्रगान का सम्मान होता रहेगा ज्यादा कॉल ऑक्सफ़ोर्ड स्कूल ही नहीं है मतलब की फील करेंगे क्योंकि कई बार ऐसा देखा जाता है कि लोगों को मूवी थियेटर में खड़े होने का मन नहीं है लेकिन फिर भी मजबूरी में अब राष्ट्रगान बज रहा है तुंहें खड़ा होना पड़ता है तो यह सारी चीजें अच्छी नहीं होती थी तो अब इस नियम में बदलाव होने की वजह से यह ज्यादा अच्छा हो गया है कि अगर किसी मूवी थिएटर वाले को राष्ट्रगान बजे आना है तो वह बजा सकता है और नहीं बजाना तो नहीं बता सकता है तो यह बहुत ही अच्छा नहीं है

bharat ki sarvochchanyayalay yani ki supreme court ne aaj ek nirnay dete hue bataya ki ab kisi bhi movie theater mein rashtragan bajana vaikalpik hoga yani ki ise bajana anivarya nahi hai sarkar ne kuch dino pehle yah nirnay liya tha ki kisi bhi movie theater mein movie start hone ke pehle rashtragan bajana anivarya hai aur aisa nahi karne par movie theater ke malik ke khilaf karyavahi ki jayegi lekin ab supreme court ne is niyam mein badlav karte hue paise vaikalpik kar diya hai toh mere mutabik yah bilkul sahi nirnay hai kyonki aap kisi bhi vyakti par jabardasti rashtra bhakti nahi soch sakte hain agar rashtra bhakti kisi ke man mein hai toh vaah bina rashtragan ke bhi aa sakti hai aur agar kisi ke man mein rashtra bhakti nahi hai toh aap use kitni bhi baar rashtragan sunva dijiye vaah uske man mein nahi aa sakti hain toh is nirnay se main kaafi khush hoon ki kam se kam hamare rashtragan ka sammaan hota rahega zyada call aksaford school hi nahi hai matlab ki feel karenge kyonki kai baar aisa dekha jata hai ki logo ko movie theater mein khade hone ka man nahi hai lekin phir bhi majburi mein ab rashtragan baj raha hai tunhen khada hona padta hai toh yah saree cheezen achi nahi hoti thi toh ab is niyam mein badlav hone ki wajah se yah zyada accha ho gaya hai ki agar kisi movie theater waale ko rashtragan baje aana hai toh vaah baja sakta hai aur nahi bajana toh nahi bata sakta hai toh yah bahut hi accha nahi hai

भारत की सर्वोच्चन्यायालय यानी कि सुप्रीम कोर्ट ने आज एक निर्णय देते हुए बताया कि अब किसी भ

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राष्ट्रीय गान हमारे देश का सम्मान सूचक कौन है हमें उसे आवश्यक करना अच्छी पहल थी परंतु फिर भी कई लोगों द्वारा इसका विरोध हुआ मुझे लगता है कि देश के सम्मान की भावना को राष्ट्रगान से जोड़ना गलत है देशभक्ति हर इंसान की अपनी होती है कई कारण हो सकते हैं जब राष्ट्रगान चल रहा हो और व्यक्ति खड़ा नहीं हो वैसे भी हमारे देश का सम्मान किसी व्यक्ति के खड़े होने पर निर्भर नहीं करता है इंसानी फितरत होती है किसी चीज के लिए करने को कहा जाए तो नहीं करेंगे जबकि सच्चा से वही कार्य कर लेंगे इसलिए इसे वैकल्पिक करना अच्छा नहीं है

rashtriya gaan hamare desh ka sammaan suchak kaun hai hamein use aavashyak karna achi pahal thi parantu phir bhi kai logo dwara iska virodh hua mujhe lagta hai ki desh ke sammaan ki bhavna ko rashtragan se jodna galat hai deshbhakti har insaan ki apni hoti hai kai karan ho sakte hain jab rashtragan chal raha ho aur vyakti khada nahi ho waise bhi hamare desh ka sammaan kisi vyakti ke khade hone par nirbhar nahi karta hai insani phitarat hoti hai kisi cheez ke liye karne ko kaha jaaye toh nahi karenge jabki saccha se wahi karya kar lenge isliye ise vaikalpik karna accha nahi hai

राष्ट्रीय गान हमारे देश का सम्मान सूचक कौन है हमें उसे आवश्यक करना अच्छी पहल थी परंतु फिर

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे अनुसार यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है जिसमें थिएटर में राष्ट्रगान बजाना वैकल्पिक है उसकी कोई जरूरी नहीं है कोई मजबूरी नहीं है क्या आप उसे बजाना बहुत ही जरूरी माना जाएगा तो यह मेरे सब से बहुत सही नहीं है क्योंकि देश भक्ति कहीं भी दिखाना है उसको देशभक्ति की भावना जागृत करना एक मजबूरी ना होकर एक अपने अंदर से उठी हुई भावना होनी चाहिए और राजू की एक निर्णय आया था क्या आपको हर मूवी चलाने से पहले थिएटर में राष्ट्रगान बजाना पड़ेगा एक बहुत ही मजबूरी का कार्य था क्या आपको राष्ट्रगान बजेगा तो आपको खड़ा होना है और उसका सम्मान में खड़ा होकर दिखाना है तो यह मजबूरी थी और कोई भी जरुरत नहीं थी इसकी के थिएटर में राष्ट्रगान बजाया जाए जिससे लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत होगी और अगर इसी को बंद किया गया है वह सही किया गया है और हमारे कॉन्स्टिट्यूशन में भी लिखा हुआ है कि कोई भी इंसान अगर राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होना चाहता है तो कोई भी उसको जरुरी नहीं है कोई शक नहीं कर सकता कि वह खड़ा हुआ और उसके सम्मान प्रतीक और सम्मान प्रतीक करें कि हमारा राष्ट्रगान के लिए खड़ा हो रहा हूं या हो रही हूं तो वह यह बिल्कुल ही सही निर्णय सुप्रीम कोर्ट का के राष्ट्रीय गान को थिएटर में बजाना वैकल्पिक किया गया है

mere anusaar yah supreme court ka nirnay hai jisme theater mein rashtragan bajana vaikalpik hai uski koi zaroori nahi hai koi majburi nahi hai kya aap use bajana bahut hi zaroori mana jaega toh yah mere sab se bahut sahi nahi hai kyonki desh bhakti kahin bhi dikhana hai usko deshbhakti ki bhavna jagrit karna ek majburi na hokar ek apne andar se uthi hui bhavna honi chahiye aur raju ki ek nirnay aaya tha kya aapko har movie chalane se pehle theater mein rashtragan bajana padega ek bahut hi majburi ka karya tha kya aapko rashtragan bajega toh aapko khada hona hai aur uska sammaan mein khada hokar dikhana hai toh yah majburi thi aur koi bhi zaroorat nahi thi iski ke theater mein rashtragan bajaya jaaye jisse logo mein deshbhakti ki bhavna jagrit hogi aur agar isi ko band kiya gaya hai vaah sahi kiya gaya hai aur hamare Constitution mein bhi likha hua hai ki koi bhi insaan agar rashtragan ke liye khada nahi hona chahta hai toh koi bhi usko zaroori nahi hai koi shak nahi kar sakta ki vaah khada hua aur uske sammaan prateek aur sammaan prateek kare ki hamara rashtragan ke liye khada ho raha hoon ya ho rahi hoon toh vaah yah bilkul hi sahi nirnay supreme court ka ke rashtriya gaan ko theater mein bajana vaikalpik kiya gaya hai

मेरे अनुसार यह सुप्रीम कोर्ट का निर्णय है जिसमें थिएटर में राष्ट्रगान बजाना वैकल्पिक है उस

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