क्या सांवरलाल जाट की जगह उनके बेटे रामस्वरूप जाट को BJP उमीदवार बनाना सही है?...


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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

0:38

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखें मुझे लगता है कि यह BJP का अंदरुनी मामला है BJP की अपनी चॉइस है वह किस को मिलवा बनाना चाहते हैं और किस को मिला नहीं बनाना चाहते दूसरी बात मैं कहना चाहूंगा अगर बीजेपी ने उनको मृदा बनाया है तो मुझे लगता है कि कुछ ना कुछ उनके अंदर जरूर बात होगी बीजेपी बीजेपी को लगता होगा उनकी मार्केट वैल्यू जाता है लोगों में अच्छी खासी इमेज है उनकी लोग इन लोगों के अंदर ज्यादा पागल हैं तो मुझे लगता है कि बीजेपी हमेशा जो इलेक्शन करती को जीतने की लड़की है तो मुझे लग रहा होगा कि वह बीजेपी को लगा होगा विजेता उम्मीदवार है तो इसीलिए मुझे लगता है बीजेपी उम्मीदवार बनाया

dekhen mujhe lagta hai ki yah BJP ka andaruni maamla hai BJP ki apni choice hai vaah kis ko milva banana chahte hain aur kis ko mila nahi banana chahte dusri baat main kehna chahunga agar bjp ne unko mrida banaya hai toh mujhe lagta hai ki kuch na kuch unke andar zaroor baat hogi bjp bjp ko lagta hoga unki market value jata hai logo mein achi khasee image hai unki log in logo ke andar zyada Pagal hain toh mujhe lagta hai ki bjp hamesha jo election karti ko jitne ki ladki hai toh mujhe lag raha hoga ki vaah bjp ko laga hoga vijeta ummidvar hai toh isliye mujhe lagta hai bjp ummidvar banaya

देखें मुझे लगता है कि यह BJP का अंदरुनी मामला है BJP की अपनी चॉइस है वह किस को मिलवा बनाना

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sourabh

Mechanical engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे कहने का मतलब यह था कि जो आदमी अपने पिताजी के देहांत के 20 दिन बाद में चुनाव प्रचार में लग गया ऐसे आदमी का क्या विश्वास दूसरी बात यह है कि जो भी कोई काम लोकसभा में हमारे विधानसभा क्षेत्र में किए गए उनके पिताजी के द्वारा किया जाएगा उनका कोई भी पार्टिसिपेट पार्टिसिपेशन नहीं था तो हम जिंदा आदमी को जानते भी नहीं उनके हिसाब से होते हैं

mere kehne ka matlab yah tha ki jo aadmi apne pitaji ke dehant ke 20 din baad mein chunav prachar mein lag gaya aise aadmi ka kya vishwas dusri baat yah hai ki jo bhi koi kaam lok sabha mein hamare vidhan sabha kshetra mein kiye gaye unke pitaji ke dwara kiya jaega unka koi bhi participate participation nahi tha toh hum zinda aadmi ko jante bhi nahi unke hisab se hote hain

मेरे कहने का मतलब यह था कि जो आदमी अपने पिताजी के देहांत के 20 दिन बाद में चुनाव प्रचार मे

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