जब भी हम समाज की भीड़ से हटके कुछ अलग करना चाहते है तो समाज बीच में रोड़ा क्यों बनता है?...


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Vinod Kumar Pandey

Life Coach | Career Counsellor ::Relationship Counsellor :: Parenting Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप मेरे प्रश्न का उत्तर मैं यही कहना चाहता हूं कि ऐसा इसलिए होता है या समाज में ज्यादातर लोग केवल परंपरागत बात को ही खा लो करते हैं वह अपने जीवन में ना कुछ नया सोचते हैं कुछ नया करते हैं इसलिए उनका जीवन भी एक सामान्य जीवन ही होकर रह जाता है यह ध्यान रखना होगा कि हर एक व्यक्ति ने कुछ ना कुछ नहीं पता होती है कुछ ना कुछ अलग होती है लेकिन जब कोई भी व्यक्ति केवल परंपरागत बात को ही फॉलो करता है इसलिए उसका जीवन की एक सामान्य जीवन पर करके ही रह जाता है इतना न करो जब उस समाज में कुछ लोग नहीं सोच रखते हैं नहीं धारणा रखते हैं और जब वह कुछ नए रास्ते पर चलने की कोशिश करते हैं तो लोगों के अंदर कहीं ना कहीं एक जलन की भावना आती है लोगों को ऐसा महसूस होता है कि अगर कोई नया गलत रास्ता जा रहा है तो निश्चित उसे कहीं ना कहीं अलग कामयाबी मिल जाएगी और यही कारण है कि उनके अंदर जलन की भावना की वजह से बोलो उसके रास्ते में रुकावट बनने कोशिश करते हैं यह ध्यान रखना होगा कि जीवन में जिस व्यक्ति का जैसा खुद के बारे में नजरिया होता है खुद के जीवन के बारे में नजरिया होता है वही चीज वह दूसरों के ऊपर भी आरोपित करता है जो लोग समाज में अपने जीवन में कुछ नहीं कर पाते हैं या अपने जीवन में एक सामान्य जीवन जी पाते हैं वही ऐसे लोग होते हैं जो दूसरे लोगों के रास्ते में रुकावट पैदा करते हैं या दूसरों को भी आगे बढ़ने से रोक देना क्योंकि जितनी इसिक्योरिटी उनको अपने जीवन में होती है उतनी ही सिक्योरिटी दूसरे के जीवन में ऐसा महसूस करते हैं और यही कारण है कि जब कोई नया व्यक्ति आगे चलने की कोशिश करता है तो वह कहीं न कहीं उनके रास्ते में रुकावट पैदा करते हैं जैसे होता है या तो जलन की वजह से हो सकता है क्या उनके अंदर ऐसी भावना होती है कि अगला पर जीवन में कहीं आगे ना बढ़ जाए और यही कारण है कि वह लोग चाहे अपने विचारों से चाहे अपने कार्यों से उस पर को आगे बढ़ने से रोकते हैं लेकिन ध्यान रहे जीवन में जो व्यक्ति अलग सोच रखता है का कार्य करने की कोशिश करता है तो निश्चित तौर से एक दिन इतिहास जरूर लेता है क्योंकि परंपरागत बात पर चलकर के परंपरागत रास्तों से चल के जीवन में कुछ भी नया या कुछ भी अलग संभल तहसील बिल्कुल नहीं होती है जीवन में अलग कुछ बनना है तो अलग कुछ करना होता है और अलग कुछ करने के लिए अलग सोच रखना होता है कभी जीवन में कुछ नहीं और अलग सफलता मिल पाती है आज समाज में हर एक व्यक्ति के अंदर एक विशेष प्रतिभा होने के बावजूद समाज के ज्यादातर लोग एक सामान्य जीवन ऐसी बातें उसका सीधा सा मतलब है कि ना ही उनको अपनी प्रतिभा का ज्ञान होता है और ना ही वह अपनी सोच को इस तरीके से कर पाते हैं कि वह सामाजिक जो रूढ़ियां है समाजिक व परंपरागत रास्ते उसे अलग हटकर करने की कोशिश करें या अलग हटकर के कुछ कामयाबी हासिल करें ध्यान रहे जब कुछ नया रास्ता चुनते हैं उस रास्ते में बहुत सारी चुनौतियां होती हैं सारी परेशानियां होती है परेशानी को सोचकर के कि ज्यादातर लोग नया रास्ता बिल्कुल नहीं सकते वह अपने पुराने रास्तों पर चलते हैं तो पुरानी ही तरीके से काम करते हैं और यही कारण है कि सब कुछ होने के बावजूद उनका जीवन भी उसी तरह के सामान्य कृपया जाता है

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आप मेरे प्रश्न का उत्तर मैं यही कहना चाहता हूं कि ऐसा इसलिए होता है या समाज में ज्यादातर ल

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Rakesh Tiwari

Life Coach, Management Trainer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब भी हम समाज की भीड़ से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं समाज बनता है जो अलग हटके जब भी की जाती है बात की जाती है उसका प्रतिरोध एक प्रभावित प्रक्रिया प्रभावित लोग विरोध करते हैं लेकिन जो नया तरीका चलने लगता है लोग उसे अपनाते हैं धीरे-धीरे धीरे-धीरे है यह स्वीकार करने बढ़ जाता है इसलिए होता है जिस पथ का निर्माण कर रहा है उसके पक्के निर्माण में कितने सहयोगी हैं कितने नहीं हैं कितने पक्ष जा रहे हैं ऊपर फिदा है इसकी परवाह करता नहीं पुरानी लीक पर चलना तुम्हें शोभा नहीं देता धंधा करता होता है अपनी पगडंडी अपने मारकर स्वयं निर्माण करता है इसलिए नए प्रयोग के कारण विरोध करता है लेकिन विरोधी बाधाओं की चिंता नहीं करना चाहिए

jab bhi hum samaj ki bheed se hatakar kuch alag karna chahte hain samaj banta hai jo alag hatake jab bhi ki jaati hai baat ki jaati hai uska pratirodh ek prabhavit prakriya prabhavit log virodh karte hain lekin jo naya tarika chalne lagta hai log use apanate hain dhire dhire dhire dhire hai yah sweekar karne badh jata hai isliye hota hai jis path ka nirmaan kar raha hai uske pakke nirmaan me kitne sahyogi hain kitne nahi hain kitne paksh ja rahe hain upar fida hai iski parvaah karta nahi purani leak par chalna tumhe shobha nahi deta dhandha karta hota hai apni pagdandi apne marakar swayam nirmaan karta hai isliye naye prayog ke karan virodh karta hai lekin virodhi badhaon ki chinta nahi karna chahiye

जब भी हम समाज की भीड़ से हटकर कुछ अलग करना चाहते हैं समाज बनता है जो अलग हटके जब भी की जात

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Dr. Suman Aggarwal

Personal Development Coach

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके सवाल में ही आपका जवाब छिपा है जब कभी भी आप समाज से अलग होकर कुछ अलग करना चाहते हो तो इसी में आपका जवाब है कि आप समाज से अलग हो जाओगे आप लोगों के जैसे नहीं रहोगे इसलिए वह लोग ऐसा नहीं चाहते हैं वह आपको खोना नहीं चाहते इसलिए वह आपकी रास्ते में रुकावट डालेंगे ताकि आप भी हमेशा उन्हीं के जैसे बने रहो

aapke sawal mein hi aapka jawab chhipa hai jab kabhi bhi aap samaj se alag hokar kuch alag karna chahte ho toh isi mein aapka jawab hai ki aap samaj se alag ho jaoge aap logo ke jaise nahi rahoge isliye wah log aisa nahi chahte hain wah aapko khona nahi chahte isliye wah aapki raste mein rukavat daalenge taki aap bhi hamesha unhi ke jaise bane raho

आपके सवाल में ही आपका जवाब छिपा है जब कभी भी आप समाज से अलग होकर कुछ अलग करना चाहते हो तो

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Jyoti Bhardwaj

Psychologist, Counsellor

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इंसान एक सामाजिक प्राणी है और इस समाज हम ही बनाते हैं समाज हमारा ही बनाया हुआ है एक हिस्सा है एक नियम है तू यदि आप कुछ करना चाहते हैं और समाज उसके बीच में रोड़ा बनता है यदि आपका काम मानवता के हित में है तो आप अपना उद्देश्य स्पष्ट तरीके से आप उन्हें समझाएं जो कि आपको यह कार्य नहीं करने दे रहे हैं

insaan ek samajik prani hai aur is samaj hum hi banate hain samaj hamara hi banaya hua hai ek hissa hai ek niyam hai tu yadi aap kuch karna chahte hain aur samaj uske beech mein roda banta hai yadi aapka kaam manavta ke hit mein hai toh aap apna uddeshya spasht tarike se aap unhein samjhayen jo ki aapko yeh karya nahi karne de rahe hain

इंसान एक सामाजिक प्राणी है और इस समाज हम ही बनाते हैं समाज हमारा ही बनाया हुआ है एक हिस्सा

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देखिए इस पृथ्वी में जो लोग महान हुए हैं वह समाज की भीड़ से हटकर कुछ अलग करना चाहते थे उन्हें किया है ईसा मसीह को आप जानते हैं क्रूस पर लटका दिया गया भगवान कृष्ण को पैर में तीर मार दिया गया जो भी समाज के लिए कुछ अलग करना चाहते हैं कि समाज की परंपरा हजारों साल से चली आ रही है हम अनपढ़ अशिक्षित द्वार लोग यह समझते हैं कि जो हमारे वेद शास्त्र पंडित कर दी वहीं से जबकि जब एहसास लिखा गया था जब कुरान शरीफ लिखा गया था जब बाय में लिखा गया यह सब समय की पर्ची के अनुसार किया गया था अब परिस्थितियां चेंज हो गई है उस पर क्यों के अनुसार हमको अपने आप को बदलना चाहिए लेकिन समाज में ऐसे लोग हैं जो सोचते एक बार अगर हिंदू धर्म लिख दिया गया तो चीनी क्या कह सकता एक बार कुरान शरीफ में लिखा जा सकता क्या बात को नहीं समझते इन सब चीजों कोई भगवान नहीं लिखा है हम समाज के विकास के क्रम में हम ही लोगों ने लिखा है और जब समाज चेंज हो जाता है समय बदल जाता है परिस्थितियां बदल जाती है तो इसमें चेंज होना बड़ा स्वाभाविक है

dekhiye is prithvi me jo log mahaan hue hain vaah samaj ki bheed se hatakar kuch alag karna chahte the unhe kiya hai isa masih ko aap jante hain cruise par Latka diya gaya bhagwan krishna ko pair me teer maar diya gaya jo bhi samaj ke liye kuch alag karna chahte hain ki samaj ki parampara hazaro saal se chali aa rahi hai hum anpad ashikshit dwar log yah samajhte hain ki jo hamare ved shastra pandit kar di wahi se jabki jab ehsaas likha gaya tha jab quraan sharif likha gaya tha jab bye me likha gaya yah sab samay ki parchi ke anusaar kiya gaya tha ab paristhiyaann change ho gayi hai us par kyon ke anusaar hamko apne aap ko badalna chahiye lekin samaj me aise log hain jo sochte ek baar agar hindu dharm likh diya gaya toh chini kya keh sakta ek baar quraan sharif me likha ja sakta kya baat ko nahi samajhte in sab chijon koi bhagwan nahi likha hai hum samaj ke vikas ke kram me hum hi logo ne likha hai aur jab samaj change ho jata hai samay badal jata hai paristhiyaann badal jaati hai toh isme change hona bada swabhavik hai

देखिए इस पृथ्वी में जो लोग महान हुए हैं वह समाज की भीड़ से हटकर कुछ अलग करना चाहते थे उन्ह

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rajnishsaxena13

I am student of B.com

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देखिए जो हमारे अंदर कोई अच्छी गुणवत्ता होती है तो समाज को हमसे जलन होने लगती है हमारे आसपास खड़े लोग हमसे जलने लगते हैं इसलिए हमारे लिए यही जरूरी है कि सभी की बातों को इग्नोर करते हुए हमेशा आगे की ओर बने और अपने गुरु को पहचानने और अपने दिल की सुने और हमेशा कुछ अलग हटके करें समाज से पहले तो समाज आपका निरादर करेगा लेकिन जब आपके जवाब अपनी बात पर खरा उतरेंगे तो वही समाज के लोग आप आपके बात का प्रोत्साहन करेंगे और आपका उत्साहवर्धन भी करेंगे लेकिन आपको समाज की भेदभाव वाली बातों को अपने जेहन में नहीं रखना चाहिए बल्कि 79 बार समझ कर आगे बढ़ना चाहिए और हमेशा अपने कदम अग्रसर करने चाहिए इससे क्या होगा कि जो भी लोग आपकी निंदा करते हैं आपसे जलते हैं वह आपका एक दिन उत्साह वर्धन शुरू करेंगे बस यही तरीका है

dekhie jo hamare andar koi acchi gunavatta hoti hai toh samaj ko humse jalan hone lagti hai hamare aaspass khade log humse jalne lagte hain isliye hamare liye yahi zaroori hai ki sabhi ki baaton ko ignore karte hue hamesha aage ki aur bane aur apne guru ko pahachanane aur apne dil ki sune aur hamesha kuch alag hatake karein samaj se pehle toh samaj aapka narendra karega lekin jab aapke jawab apni baat par Khara utarenge toh wahi samaj ke log aap aapke baat ka protsahan karenge aur aapka utsahavardhan bhi karenge lekin aapko samaj ki bhedbhav wali baaton ko apne zahan mein nahi rakhna chahiye balki 79 baar samajh kar aage badhana chahiye aur hamesha apne kadam agrasar karne chahiye isse kya hoga ki jo bhi log aapki ninda karte hain aapse jalte hain wah aapka ek din utsaah vardhan shuru karenge bus yahi tarika hai

देखिए जो हमारे अंदर कोई अच्छी गुणवत्ता होती है तो समाज को हमसे जलन होने लगती है हमारे आसपा

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क्योंकि हम सभी जानते हैं समाज किसी को भी तरक्की करना नहीं दिखता है देखना चाहता है इसलिए समाज बीच में रोड़ा बनता है वह चाहता है हमसे आगे भी कोई ना जाए इसलिए सामान से हटकर जो आप कुछ कीजिए तो समाज चलता है मेरी बदनामी होगी असली समाज अपने सेहत का जो करता है इसलिए उससे थोड़ा ढलता है

kyonki hum sabhi jante hain samaj kisi ko bhi tarakki karna nahi dikhta hai dekhna chahta hai isliye samaj beech mein roda banta hai wah chahta hai humse aage bhi koi na jaye isliye saamaan se hatakar jo aap kuch kijiye toh samaj chalta hai meri badnami hogi asli samaj apne sehat ka jo karta hai isliye usse thoda dhalta hai

क्योंकि हम सभी जानते हैं समाज किसी को भी तरक्की करना नहीं दिखता है देखना चाहता है इसलिए सम

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Vivek Shukla

Life coach

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ठीक है आपका कहना कि जब भी आप समाज के भीड़ से हटकर अलग करना चाहते हैं तो आपके बीच में रोना क्यों होता है सबसे पहली बार मित्र एक चीज जान लीजिए जब तक आप सफलता नहीं प्राप्त कर सकती तब तक आपकी बुराई आवे ना होती रतिया समाज में आपका काम समाज का काम होता है कि लांछन लगाना यह किसी आदमी के विचारों को गलत साबित करना क्योंकि वह जब तक सफल नहीं होगा तब तक उसे हमेशा बुरा कहा जाता कि कहा जाता है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और काम से बड़ा कोई धर्म नहीं होता सकता इस वजह से उनकी बात ही नहीं सुनी जाएगी आपको सिर्फ अपने कार्य पर ध्यान देते हुए उनका क्योंकि वह पीठ पीछे आपकी बुराई करेंगे आपके मुंह पर उनकी हिम्मत नहीं है कि वह बोल दे इसलिए वह पीछे बुराई समाज आपका कर रहा है आप उससे मतलब ना रखी आप अपने लक्ष्य पर ध्यान दिया और पूरी मेहनत के साथ अपना काम करें कि जब भी आप सफल होंगे तो लोग आपके जैसा बनने की कोशिश करेंगे यदि आप सफल नहीं होंगे तब आपको बुराई होगी यदि आप अपने मन में पहले अगर आप निराश हो जाएंगे तो आपको सफलता नहीं मिलती इसलिए अपने मन को दूध पिलाते हुए लोगों की बातों को इग्नोर करते हो कि आप अपने समाज में अपने लक्ष्य को प्राप्त करें जैसे ही आपको उस लक्ष्य की प्राप्ति होगी वैसे ही सब लोग आप की वाहवाही करेंगे अपने बच्चों को आपके जैसा बनने की सलाह देंगे कि वह फ्रेंड

theek hai aapka kehna ki jab bhi aap samaj ke bheed se hatakar alag karna chahte hain toh aapke beech mein rona kyon hota hai sabse pehli baar mitra ek cheez jaan lijiye jab tak aap safalta nahi prapt kar sakti tab tak aapki burayi aawe na hoti ratia samaj mein aapka kaam samaj ka kaam hota hai ki lanchan lagana yeh kisi aadmi ke vicharon ko galat saabit karna kyonki wah jab tak safal nahi hoga tab tak use hamesha bura kaha jata ki kaha jata hai ki koi bhi kaam chota nahi hota aur kaam se bada koi dharm nahi hota sakta is wajah se unki baat hi nahi suni jayegi aapko sirf apne karya par dhyan dete hue unka kyonki wah peeth peeche aapki burayi karenge aapke mooh par unki himmat nahi hai ki wah bol de isliye wah peeche burayi samaj aapka kar raha hai aap usse matlab na rakhi aap apne lakshya par dhyan diya aur puri mehnat ke saath apna kaam karein ki jab bhi aap safal honge toh log aapke jaisa banne ki koshish karenge yadi aap safal nahi honge tab aapko burayi hogi yadi aap apne man mein pehle agar aap nirash ho jaenge toh aapko safalta nahi milti isliye apne man ko doodh peelate hue logo ki baaton ko ignore karte ho ki aap apne samaj mein apne lakshya ko prapt karein jaise hi aapko us lakshya ki prapti hogi waise hi sab log aap ki waahwahi karenge apne baccho ko aapke jaisa banne ki salah denge ki wah friend

ठीक है आपका कहना कि जब भी आप समाज के भीड़ से हटकर अलग करना चाहते हैं तो आपके बीच में रोना

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Manish Singh

VOLUNTEER

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा इसलिए होता है कि देखिए समाज है कभी भी नहीं चाहता है आपको क्या खबर है हर कोई उन्हें एक दूसरे से जलता रहता है आप देखेंगे आपके पड़ोसी से जो है आपको कभी लगता है वह बुरा कह कर उसे महंगी नौकरी मिल गई क्या आपको मिले तो आपको बुरा लगता होगा उसकी क्यों उसको मिल गई है तो संभाल तो हर वक्त एक दूसरे को बुरा ही चाहता है ऐसा चाहता कि कोई भी वह कितना भी तरक्की के लिए तुम मुझसे नीचे करें इस कारण से जो है वह दूसरों के रास्ते में मुश्किलें डालने की कोशिश करता है

aisa isliye hota hai ki dekhiye samaj hai kabhi bhi nahi chahta hai aapko kya khabar hai har koi unhe ek dusre se jalta rehta hai aap dekhenge aapke padosi se jo hai aapko kabhi lagta hai vaah bura keh kar use mehengi naukri mil gayi kya aapko mile toh aapko bura lagta hoga uski kyon usko mil gayi hai toh sambhaal toh har waqt ek dusre ko bura hi chahta hai aisa chahta ki koi bhi vaah kitna bhi tarakki ke liye tum mujhse niche kare is karan se jo hai vaah dusro ke raste mein mushkilen dalne ki koshish karta hai

ऐसा इसलिए होता है कि देखिए समाज है कभी भी नहीं चाहता है आपको क्या खबर है हर कोई उन्हें एक

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