मनुष्य का व्यक्तित्व कैसा होता है?...


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महेश सेठ

रेकी ग्रैंडमास्टर,लाइफ कोच

1:48

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मनुष्य का व्यक्तित्व कैसा होता है कैसा होता है प्रश्न नहीं है व्यक्ति तू ही मनुष्य की पहचान होती जैसे आप अपने आप को कैसे जानता हूं आपका व्यक्तित्व किसी और को कैसे जानते हो उसका व्यक्तित्व और बात रही कि जो जैसा व्यक्ति तो रखता है सबसे पहले तो उसको खुद को अपने व्यक्ति को स्वीकार करना होता अगर वह स्वीकार कर लेता है तब फिर वो जीवन में ज्यादा सहजता से ज्यादा सरलता से रहता है आप जैसे हो आपका व्यक्तित्व जैसा है उसके ऊपर ही काम करना जैसे कि ऐसे समझिए कि आम का पेड़ कभी नहीं सोचता कि उसको अनुज बनना है और अमरूद का पेड़ कभी नहीं सोचता कि उसको आम बनना है इसी प्रकार आपका जैसा भी स्वभाव है जैसा भी व्यक्ति है जो आपके कौन है जो आपके दुर्गुण हैं वही समग्रता से आपका व्यक्तित्व बनाते हैं समस्या यहां आती है कि हम अपने व्यक्तित्व को भी नहीं जानते और दूसरे के खेत को भी कंफ्यूज करते हैं तो इससे सही तरीके से समझना है कैसा होता है कि बात ही नहीं है जैसा है जैसा स्वीकार करना है इंजॉय करें लाइफ को हर पल हर क्षण जैसा व्यक्तित्व का है उसी को इंजॉय करें मुझसे संपर्क करने के लिए मुझसे फोन कर सकते हैं मेरी वेबसाइट पर जा सकते हैं मेरा फोन नंबर है 96401 एक्स एक्स पंजाब की मदद करके खुश होगी धन्यवाद नमस्कार

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मनुष्य का व्यक्तित्व कैसा होता है कैसा होता है प्रश्न नहीं है व्यक्ति तू ही मनुष्य की पहचा

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Umesh Upaadyay

Life Coach | Motivational Speaker

4:33
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दूसरी समझते हैं दुनिया में इतने सारे लोग हैं करोड़ों लोग हर एक इंसान अलग है सोचिए हालांकि उन्हें पांच तत्वों से वह बना हुआ है लेकिन फिर भी वो अलग है लोकेश अलग क्यों है उसकी मानसिकता अलग दृष्टिकोण अलग है नजरिया अलग है लाइफ में अप्रोचा लागे लाइफ की फिलॉसफी अलग है उसके संस्कार अलग है उसके नजरिए के कारण उसके काम करने का तरीका बदल जाता है तो बहुत सारी चीजें हैं जिसके कारण एक इंसान दूसरे से भिन्न है अलग अब इंसान का व्यक्तित्व बनता कैसे पहले यह समझ लेते हैं लिखिए कोई भी इंसान आता है 21 जीवन में तो वह अपने पुराने कुछ संस्कार लेकर आते हैं अपने कर्मों के साथ है वह किसी एक घर परिवार में पैदा होते हैं उसका जीवन से शुरू होता है जहां से भी उसका जीवन शुरू होते हैं वहां पर उसको क्या शिक्षा मिलती है क्या नहीं संस्कार उस को मिलते हैं वह स्कूल में क्या सीखता है पड़ोसी से क्या सीखते घर परिवार में क्या सीखता है वह सब वह उसके ऑब्जर्वेशन में आती जाती है वह उसे नोट करते चले जाता है और इंप्लीमेंटर करते चले जाते हैं इसी से बनता है उसका एजुकेशन और उसके लाइफ के अपने एक्सपीरियंस एस हर एक इंसान के का एक्सपीरियंस अलग होता है एजुकेशन मोर ओर लेस सबको ऑलमोस्ट एक समय एक समान है मिल सकता है आज गुस्से में स्कूल में जा रहे हैं सेम इंवॉल्वमेंट है वगैरा-वगैरा लेकिन फिर भी इंसान डिफरेंट होता है एजुकेशन पॉइंट ऑफ व्यू से भी ओके लेकिन सबसे इंपोर्टेंट होता है कि लाइफ में उसको क्या एक्सपीरियंस अजमेर कौन से वातावरण में एनवायरनमेंट में वो अपना जीवन यापन कर रहा है और धीरे-धीरे वह बड़ा होता चला जाता है जब वह बड़ा होता है चला जाता है तो साथ में उसका डेवलपर होता है उसकी पर्सनैलिटी उसका व्यक्तित्व व्यक्तित्व में क्या आता है उसकी सोच उसके विचारधारा उसके संस्कारों से उसका आचरण आता है उसका बिहेवियर बनता है वह करता है किसी परिस्थिति में ऐसा क्यों ऐसी परिस्थिति में ऐसा वह अपने आप को एक तरीके से ढाल नहीं लगता है और डाल देता है काफी हद तक कई बार उसे खुद पता नहीं होता क्योंकि परिस्थितियां और घर का माहौल जब जिस किसी भी माहौल में वह जाता है रहता है जीवन यापन करता है वहां उसे उस सांचे में ऑटोमेटिक के लिए वोट डाल जाता है या फिर उसे डाल दिया जाता है तो बहुत सारे पैकेज होते हैं जिनके कारण एक इंसान का व्यक्तित्व निर्मित होता है हमें तो यह देखना है कि देखी जब हम बहुत छोटे होते हैं बचपन में होते हैं और हमें इतना ज्ञान नहीं होता है तो जो हम हमें जो देखता है जो हम सब कहते हैं हम उसको समझ से यही सही है और उसको अपने जीवन में उतार के और आगे चले जाते हैं अब जीवन में ऐसा तो है नहीं ना कि भैया अपनी को आपको कोई लाइफ की मैनुअल दे दी गई है अब बोला कि भाई लाइफ को ऐसे जीना है ऐसा तो है नहीं हालांकि हमारे पास अज्ञानता है किताबे गीता है वगैरा-वगैरा बचपन में गीता कौन भरता है तो हमें तो यह देखना है प्रैक्टिकली हो रियलिस्टिकली जहां से हमें समझ आता है कि भाई मैं किस एनरोलमेंट पर हूं अब मैं क्या ग्रहण कर रहा हूं क्या स्वीकार कर रहा हूं क्या चीज इंप्लीमेंट कर रहा हूं क्या यह मेरे हित में है क्या यह दूसरों के हित में हैं अगर नहीं है तो उसको नहीं अपनाना चाहिए उसको वहीं छोड़ देना चाहिए और हमें यह देखना चाहिए कि मैं के सांचे में ढल था चला जा रहा हूं और उसको रोक लगानी चाहिए वहां पर क्यों क्योंकि अगर वह सांचा सही नहीं अगर मैं इस आधार का बनने जा रहा हूं तो मुझे डेफिनिटी थोड़ा बहुत आईडिया होता ही है और अपने आप को रोक लेना चाहिए वहीं पर पता चला कि मैं बनना तो यह चाहता था असल में मैं यहां आ गया यह छोटी से छोटी बात हो सकती एक परिसर कि मुझे गुस्सा बहुत आता है या बड़ी से बड़ी बात होती है कि मेरी अप्रोच र थिंकिंग कंपलीटली डिफरेंट डायरेक्शन में है वर्ल्डस्तर विचार है और मैं उस तरफ जा रहा हूं तो इस तरीके से व्यक्ति का निर्माण होता है और हमेशा हमें अवनीश के साथ रहना चाहिए ताकि जो भी है जहां पर भी हैं हम हम फिर भी अपने आप को ट्रांसफार्म कर सकते हैं बदल सकते हैं अपने अंदर वह चला सकते हैं सूची से हटा सकते हैं जो हमें पसंद नहीं है और नई चीजें डाल सकते हैं और है तो इसका हम ध्यान रख सकते हैं जस्ट बाय बीइंग अवेयर फुली अवेयर इन आर प्रेजेंट अभिभूत डेफिनटली बे एबल टो ब्रिंग चेंज ओवर दिनांक

dusri samajhte hai duniya mein itne saare log hai karodo log har ek insaan alag hai sochie halaki unhein paanch tatvon se wah bana hua hai lekin phir bhi vo alag hai lokesh alag kyon hai uski mansikta alag drishtikon alag hai najariya alag hai life mein aprocha lage life ki philosophy alag hai uske sanskar alag hai uske nazariye ke kaaran uske kaam karne ka tarika badal jata hai toh bahut saree cheezen hai jiske kaaran ek insaan dusre se bhinn hai alag ab insaan ka vyaktitva baata kaise pehle yeh samajh lete hai likhiye koi bhi insaan aata hai 21 jeevan mein toh wah apne purane kuch sanskar lekar aate hai apne karmon ke saath hai wah kisi ek ghar parivar mein paida hote hai uska jeevan se shuru hota hai jaha se bhi uska jeevan shuru hote hai wahan par usko kya shiksha milti hai kya nahi sanskar us ko milte hai wah school mein kya sikhata hai padosi se kya sikhate ghar parivar mein kya sikhata hai wah sab wah uske observation mein aati jati hai wah use note karte chale jata hai aur implimentar karte chale jaate hai isi se baata hai uska education aur uske life ke apne experience s har ek insaan ke ka experience alag hota hai education mor aur less sabko almost ek samay ek saman hai mil sakta hai aaj gusse mein school mein ja rahe hai same involvement hai vagera vagaira lekin phir bhi insaan different hota hai education point of view se bhi ok lekin sabse important hota hai ki life mein usko kya experience ajmer kaunsi vatavaran mein environment mein vo apna jeevan yaapan kar raha hai aur dhire dhire wah bada hota chala jata hai jab wah bada hota hai chala jata hai toh saath mein uska Developer hota hai uski personality uska vyaktitva vyaktitva mein kya aata hai uski soch uske vichardhara uske sanskaron se uska aacharan aata hai uska behaviour baata hai wah karta hai kisi paristithi mein aisa kyon aisi paristithi mein aisa wah apne aap ko ek tarike se dhal nahi lagta hai aur daal deta hai kaafi had tak kai baar use khud pata nahi hota kyonki paristhiyaann aur ghar ka maahaul jab jis kisi bhi maahaul mein wah jata hai rehta hai jeevan yaapan karta hai wahan use us sanche mein Automatic ke liye vote daal jata hai ya phir use daal diya jata hai toh bahut saare package hote hai jinke kaaran ek insaan ka vyaktitva nirmit hota hai humein toh yeh dekhna hai ki dekhi jab hum bahut chote hote hai bachpan mein hote hai aur humein itna gyaan nahi hota hai toh jo hum humein jo dekhta hai jo hum sab kehte hai hum usko samajh se yahi sahi hai aur usko apne jeevan mein utar ke aur aage chale jaate hai ab jeevan mein aisa toh hai nahi na ki bhaiya apni ko aapko koi life ki manual de di gayi hai ab bola ki bhai life ko aise jeena hai aisa toh hai nahi halaki hamare paas agyanata hai kitabe geeta hai vagera vagaira bachpan mein geeta kaun bharta hai toh humein toh yeh dekhna hai practically ho realistically jaha se humein samajh aata hai ki bhai main kis enrollment par hoon ab main kya grahan kar raha hoon kya sweekar kar raha hoon kya cheez implement kar raha hoon kya yeh mere hit mein hai kya yeh dusro ke hit mein hai agar nahi hai toh usko nahi apnana chahiye usko wahi chod dena chahiye aur humein yeh dekhna chahiye ki main ke sanche mein dhal tha chala ja raha hoon aur usko rok lagani chahiye wahan par kyon kyonki agar wah sancha sahi nahi agar main is aadhaar ka banne ja raha hoon toh mujhe definiti thoda bahut idea hota hi hai aur apne aap ko rok lena chahiye wahi par pata chala ki main banana toh yeh chahta tha asal mein main yahan aa gaya yeh choti se choti baat ho sakti ek parisar ki mujhe gussa bahut aata hai ya baadi se baadi baat hoti hai ki meri approach r thinking kampalitli different direction mein hai varldastar vichar hai aur main us taraf ja raha hoon toh is tarike se vyakti ka nirmaan hota hai aur hamesha humein avnish ke saath rehna chahiye taki jo bhi hai jaha par bhi hai hum hum phir bhi apne aap ko transform kar sakte hai badal sakte hai apne andar wah chala sakte hai suchi se hata sakte hai jo humein pasand nahi hai aur nayi cheezen daal sakte hai aur hai toh iska hum dhyan rakh sakte hai just by being aveyar fully aveyar in r present abhibhut definatali be Abal to bring change over dinank

दूसरी समझते हैं दुनिया में इतने सारे लोग हैं करोड़ों लोग हर एक इंसान अलग है सोचिए हालांकि

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

2:32
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मानव का व्यक्ति एक ऐसा आदर्श विकसित होना चाहिए जो अपनी 5 वर्ष के लिए एक आदर्श जून को एक सामाजिक जीवन के लिए तो उनके राजनीतिक जीवन जीवन के लिए एक महत्व शस्त्र कर सकती आप सब मिलनसार ता सदाबहार हूं उदार चरित्र को सरल स्वभाव चरित्र हो विद्वानों और सभी का आभार रखने वाला सेवाभावी हो नंबर को ऐसा व्यक्ति ही सभी को रास्ता प्रशस्त कर सकता है और वह यहां कि देश स्थान क्षेत्र के विकास में विभक्त ना भरपूर सहयोग दे सकता है क्योंकि मैं यह मानता हूं मैं राष्ट्रवादी हूं मुझे देश के लिए करने देश के विकास में अपना सहयोग देने समाज के विकास में सहयोग देने का भी एक मानव कर्तव्य मैं मानता हूं एक सुयोग्य नागरिक का यह प्रथम कर्तव्य होता है कि वह धर्म जाति क्षेत्र आदि के बंधनों को तोड़कर के देश में सोचें देश विकास में सहयोग दें और मान्यता के लिए जितना कुछ हो सके वह ऐसा करके जाए जिससे आने वाली पीढ़ियां उनके रामू को याद कर सकते जैसे हमारे आदर्श महापुरुषों को देखो आप जय शिवाजी की जीवनी पढ़ो चाहे आप महाराणा प्रताप की जीवनी पढ़ो चाय अपना गांधी जी की जीवनी पढ़ो सुभाष चंद्र बोस की पढ़ो सब ने समाज के लिए मानवता के लिए बहुत कुछ दिया है जिसको तुम लोग मरते रहेंगे याद करते रहेंगे और उस रास्ते पर चलते रहेंगे

manav ka vyakti ek aisa adarsh viksit hona chahiye jo apni 5 varsh ke liye ek adarsh june ko ek samajik jeevan ke liye toh unke raajnitik jeevan jeevan ke liye ek mahatva shastr kar sakti aap sab milansaar ta sadabahar hoon udaar charitra ko saral swabhav charitra ho vidvaano aur sabhi ka aabhar rakhne vala sevabhavi ho number ko aisa vyakti hi sabhi ko rasta prashast kar sakta hai aur wah yahan ki desh sthan kshetra ke vikas mein vibhakt na bharpur sahyog de sakta hai kyonki main yeh manata hoon main rashtrawadi hoon mujhe desh ke liye karne desh ke vikas mein apna sahyog dene samaj ke vikas mein sahyog dene ka bhi ek manav kartavya main manata hoon ek suyogya nagarik ka yeh pratham kartavya hota hai ki wah dharm jati kshetra aadi ke bandhane ko todkar ke desh mein sochen desh vikas mein sahyog de aur manyata ke liye jitna kuch ho sake wah aisa karke jaye jisse aane wali peedhiyaan unke ramu ko yaad kar sakte jaise hamare adarsh mahapurushon ko dekho aap jai shivaji ki jeevni padho chahe aap maharana pratap ki jeevni padho chai apna gandhi ji ki jeevni padho subhash chandra bose ki padho sab ne samaj ke liye manavta ke liye bahut kuch diya hai jisko tum log marte rahenge yaad karte rahenge aur us raste par chalte rahenge

मानव का व्यक्ति एक ऐसा आदर्श विकसित होना चाहिए जो अपनी 5 वर्ष के लिए एक आदर्श जून को एक सा

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Vivek Shukla

Life coach

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आपका क्वेश्चन है कि मनुष्य का व्यक्तित्व कैसा होना चाहिए जितना सरल एवं अच्छे स्वभाव की आपका व्यक्तित्व उतना ही महत्वपूर्ण और ऊंचा होगा लोगों की भावनाओं को समझिए फिर लोगों के साथ दुख सुख में काम आए तो आपका या फिर आप के सम्मान में ज्यादातर होती होगी आप जितना हो सके दूसरों की मदद करिए फिर दूसरों के साथ व्यवहार करें अगर आप मदद ना कर सके पक्षी वाणी से सब कुछ पाया जा सकता है अगर आप सब का सम्मान करें और प्यार से बात करें आदर करें तो आप दुनिया में बहुत ही ज्यादा महत्वपूर्ण माने इंसान मन के लोगों की नजर में प्रशंसा के योग्य बनेंगे और आपको लोग तरह-तरह से प्रेम करेंगे लोग आपका सम्मान करेंगे आपको कहीं भी ज्यादा दिक्कत नहीं हो सकती मान कोई भी प्रॉब्लम आपको आए तो लोग आपके भी मुसीबत में आपका साथ देंगे और जहां तक होगा आपका रितु सबसे ऊंचा होगा विवाह फ्रेंड

aapka question hai ki manushya ka vyaktitva kaisa hona chahiye jitna saral evam acche swabhav ki aapka vyaktitva utana hi mahatvapurna aur uncha hoga logo ki bhavnao ko samajhie phir logo ke saath dukh sukh mein kaam aaye toh aapka ya phir aap ke sammaan mein jyadatar hoti hogi aap jitna ho sake dusro ki madad kariye phir dusro ke saath vyavahar karein agar aap madad na kar sake pakshi vani se sab kuch paya ja sakta hai agar aap sab ka sammaan karein aur pyar se baat karein aadar karein toh aap duniya mein bahut hi zyada mahatvapurna maane insaan man ke logo ki nazar mein prashansa ke yogya banenge aur aapko log tarah tarah se prem karenge log aapka sammaan karenge aapko kahin bhi zyada dikkat nahi ho sakti maan koi bhi problem aapko aaye toh log aapke bhi musibat mein aapka saath denge aur jaha tak hoga aapka ritu sabse uncha hoga vivah friend

आपका क्वेश्चन है कि मनुष्य का व्यक्तित्व कैसा होना चाहिए जितना सरल एवं अच्छे स्वभाव की आपक

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ramraj

Teaching Mo. 9602696394

0:26
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मनुष्य का व्यक्तित्व वैसा ही होगा जैसा व वातावरण में रहता है अगर मनुष्य अच्छे वातावरण में रहता है तो उसका व्यक्ति चाहूंगा और मनुष्य पूरे वातावरण में रहता है तो उसका व्यक्तित्व भी बुरा ही होगा यह मनुष्य का व्यक्ति उसके वातावरण पर निर्भर करता है

manushya ka vyaktitva waisa hi hoga jaisa va vatavaran mein rehta hai agar manushya acche vatavaran mein rehta hai toh uska vyakti chahunga aur manushya poore vatavaran mein rehta hai toh uska vyaktitva bhi bura hi hoga yeh manushya ka vyakti uske vatavaran par nirbhar karta hai

मनुष्य का व्यक्तित्व वैसा ही होगा जैसा व वातावरण में रहता है अगर मनुष्य अच्छे वातावरण में

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Manish Singh

VOLUNTEER

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देखिए ऐसे तो हर इंसान एक दूसरे से अलग होता है गोरी क्योंकि अगर सब लोग एक तरफ ही होंगे तो दुनिया फिर चले जाएंगे तुम कुछ चीजें होती हैं जो कि हर इंसान के व्यक्तित्व के अंदर होनी चाहिए जैसे की औरतों की इज्जत करना बड़ों की इज्जत करना अब इसको भी अपने छोटे हैं कपड़े हमको एक समान समझना कभी भी जो है वह घमंड ना करना किसी भी चीज को अगर आपने लाइफ में किसी से पहले ज्यादा घमंड न करने के लिए अच्छा पुलिस

dekhiye aise toh har insaan ek dusre se alag hota hai gori kyonki agar sab log ek taraf hi honge toh duniya phir chale jaenge tum kuch cheezen hoti hain jo ki har insaan ke vyaktitva ke andar honi chahiye jaise ki auraton ki izzat karna badon ki izzat karna ab isko bhi apne chote hain kapde hamko ek saman samajhna kabhi bhi jo hai vaah ghamand na karna kisi bhi cheez ko agar aapne life mein kisi se pehle zyada ghamand na karne ke liye accha police

देखिए ऐसे तो हर इंसान एक दूसरे से अलग होता है गोरी क्योंकि अगर सब लोग एक तरफ ही होंगे तो द

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