राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण क्यों कहा जाता है?...


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Vikas Singh

Political Analyst

1:34

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राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण इसलिए कहा जाता है सबसे पहले तो हमें राजतंत्र को समझना होगा शासन तंत्र तंत्र को समझना होगा और उसके बाद लोकतंत्र को समझना को राजतंत्र में जो राजतंत्र हुआ करता था तो उसमें राजाओं का जमाना हुआ करता था और राजा का बेटा ही राजा बनता था लेकिन लोकतंत्र में ऐसा नहीं है लोग में परिवारवाद नहीं है जातिवाद नहीं है ऐसा कुछ भी नहीं है लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधि को चुनती है और जनता चाहे भी तो अशिक्षित हो सब के वोट का बराबर बराबर महत्व है और सब कुछ करिए भारत की जनसंख्या सवा सौ करोड़ है तो सवा सौ करोड़ देशवासियों का सबका अपना अलग-अलग विचार है सभी लोग अपने विचार के आधार पर वोट देते हैं उसमें से बहुत सारे लोग शिक्षित हैं बहुत सारे लोग अशिक्षित भी हैं लेकिन दोनों लोग शिक्षित और अशिक्षित दोनों के वोट का बरा वह तो है सभी लोग अपना वोट देते हैं और एक बहुत सारी राजनीतिक पार्टियों में से एक पार्टी का प्रतिनिधि प्रधानमंत्री बनता है मुख्यमंत्री बनता है सांसद विधायक बनता है तो लोकतंत्र सबको समान अधिकार देता है समान विचारधारा सबको बराबर नजर से देखता है तो लोकतंत्र में राजनीतिक पार्टियों का होना बहुत महत्व है 100 200 पार्टी है सभी पार्टियां चुनाव लड़ती हैं उसमें से एक एक पार्टी बहुमत में आती है जिस की सरकार बनती है यही है लोकतंत्र धन्यवाद

raajnitik dal ko loktantra ka praan isliye kaha jata hai sabse pehle toh humein rajtantra ko samajhna hoga shasan tantra tantra ko samajhna hoga aur uske BA ad loktantra ko samajhna ko rajtantra mein jo rajtantra hua karta tha toh usme rajao ka jamana hua karta tha aur raja ka beta hi raja BA nta tha lekin loktantra mein aisa nahi hai log mein parivaarvaad nahi hai jaatiwad nahi hai aisa kuch bhi nahi hai loktantra mein janta apne pratinidhi ko chunati hai aur janta chahe bhi toh ashikshit ho sab ke vote ka BA rabar BA rabar mahatva hai aur sab kuch kariye bharat ki jansankhya sava sau crore hai toh sava sau crore deshvasiyon ka sabka apna alag alag vichar hai sabhi log apne vichar ke aadhaar par vote dete hai usme se BA hut saare log shikshit hai BA hut saare log ashikshit bhi hai lekin dono log shikshit aur ashikshit dono ke vote ka BA ra wah toh hai sabhi log apna vote dete hai aur ek BA hut saree raajnitik partiyon mein se ek party ka pratinidhi Pradhanmantri BA nta hai mukhyamantri BA nta hai saansad vidhayak BA nta hai toh loktantra sabko saman adhikaar deta hai saman vichardhara sabko BA rabar nazar se dekhta hai toh loktantra mein raajnitik partiyon ka hona BA hut mahatva hai 100 200 party hai sabhi partyian chunav ladati hai usme se ek ek party BA humat mein aati hai jis ki sarkar BA nti hai yahi hai loktantra dhanyavad

राजनीतिक दल को लोकतंत्र का प्राण इसलिए कहा जाता है सबसे पहले तो हमें राजतंत्र को समझना होग

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Neha S

UPSC कोच

0:46
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निकी क्या होता है जब समाज बड़ी और जटिल हो जाते हैं तो उन्हें विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न मुद्दों पर अलग-अलग विचारों को समेटने और सरकार की नजर में लाने के लिए एक माध्यम की या किसी एजेंसी की जरूरत होती है अलग-अलग जगहों से आए प्रतिनिधियों को एक साथ करने की जरूरत होती है ताकि एक जिम्मेदार सरकार बन सके उन्हें सरकार को समर्थन करने या उस पर रोकने लगाने की अफीम नीति बनाने के लिए समर्थन या विरोध करने के लिए बहुत सारे उपकरणों की भी जरूरत होती है ऐसे में क्या होता है की प्रतिनिधि सरकार की की ऐसी जो भी जरूरत होती है जो भी प्रतिनिधि और सरकार की जोडी ऐसे जरूरत होती है उनको कौन पूरा करता है उनको पूरा करता है राजनीतिक दल अगर राजनीतिक दल नहीं होगा तो यह सारी चीजें नहीं हो सकती इस तरह से हम कह सकते हैं कि जो राजनीतिक लोकतंत्र की एक अनिवार्य शर्त है या फिर क्या प्लान है

niki kya hota hai jab samaj BA di aur jatil ho jaate hai toh unhe vibhinn muddon par vibhinn muddon par alag alag vicharon ko sametane aur sarkar ki nazar mein lane ke liye ek madhyam ki ya kisi agency ki zarurat hoti hai alag alag jagaho se aaye pratinidhiyo ko ek saath karne ki zarurat hoti hai taki ek zimmedar sarkar BA n sake unhe sarkar ko samarthan karne ya us par rokne lagane ki afeem niti BA naane ke liye samarthan ya virodh karne ke liye BA hut saare upkarnon ki bhi zarurat hoti hai aise mein kya hota hai ki pratinidhi sarkar ki ki aisi jo bhi zarurat hoti hai jo bhi pratinidhi aur sarkar ki jodi aise zarurat hoti hai unko kaun pura karta hai unko pura karta hai raajnitik dal agar raajnitik dal nahi hoga toh yah saree cheezen nahi ho sakti is tarah se hum keh sakte hai ki jo raajnitik loktantra ki ek anivarya sart hai ya phir kya plan hai

निकी क्या होता है जब समाज बड़ी और जटिल हो जाते हैं तो उन्हें विभिन्न मुद्दों पर विभिन्न मु

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Dimpal

Student

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जाने दे धना दल को लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है क्योंकि राजनीति दल लोकतंत्र में भूमिका का निर्वहन करते हैं राजनीतिक दल स्वस्थ समाज के निर्माण में अपनी भूमिका का निर्वहन करते हैं हमारे देश में दो दलीय शासन प्रणाली है जिसके अंतर्गत हमारे देश में दो या दो से अधिक स्थाई निर्दल है जिसको तू चिंतल को जन्नत से प्राप्त होता है वह केंद्र में सरकार की स्थापना करता है और शासन का संचालन करता है और जनता के लिए योजनाएं बनाता है उसके विकास में कार्य करता है और जो दल जो दल जो दल जनमत प्राप्त नहीं कर पाते हैं वह विपक्षी दल के रूप में महत्वपूर्ण का का निर्माण करते हैं और शासन को निरंकुश नहीं होने देते हैं और शासन का ध्यान जनता के कष्टों परेशानियों और उनकी आवश्यकताओं की तरफ खींचते हैं जिससे वह लोकतंत्र को और सुधा और मजबूत बना

jaane de dhana dal ko loktantra ka praan kaha jata hai kyonki raajneeti dal loktantra mein bhumika ka nirvahan karte hai raajnitik dal swasthya samaj ke nirmaan mein apni bhumika ka nirvahan karte hai hamare desh mein do daliyaa shasan pranali hai jiske antargat hamare desh mein do ya do se adhik sthai nirdal hai jisko tu chintal ko jannat se prapt hota hai vaah kendra mein sarkar ki sthapna karta hai aur shasan ka sanchalan karta hai aur janta ke liye yojanaye BA nata hai uske vikas mein karya karta hai aur jo dal jo dal jo dal janmat prapt nahi kar paate hai vaah vipakshi dal ke roop mein mahatvapurna ka ka nirmaan karte hai aur shasan ko nirankush nahi hone dete hai aur shasan ka dhyan janta ke kaston pareshaniyo aur unki avashayaktaon ki taraf khichte hai jisse vaah loktantra ko aur sudha aur majboot BA na

जाने दे धना दल को लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है क्योंकि राजनीति दल लोकतंत्र में भूमिका का

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Deepak Kumar

Student life

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लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दल जीवन के एक अंग बन चुके हैं राजनीतिक दल नीतियां एवं कार्यक्रम तय करता है यही शासन का संचालन करता है चुनाव का संचालन लोकमत का निर्माण तथा सरकार एवं जनता के बीच मध्यस्थ का कार्य करता है इसलिए राजनीतिक दल लोकतंत्र का प्राण कहा गया है

loktantrik deshon mein raajnitik dal jeevan ke ek ang BA n chuke hai raajnitik dal nitiyan evam karyakram tay karta hai yahi shasan ka sanchalan karta hai chunav ka sanchalan lokmat ka nirmaan tatha sarkar evam janta ke beech madhyasth ka karya karta hai isliye raajnitik dal loktantra ka praan kaha gaya hai

लोकतांत्रिक देशों में राजनीतिक दल जीवन के एक अंग बन चुके हैं राजनीतिक दल नीतियां एवं कार्य

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Pragati

Aspiring Lawyer

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राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का प्राण इसलिए कहा जाता है क्योंकि लोकतंत्र का एक देश में होने के लिए अलग-अलग राजनीतिक दलों का होना बहुत जरूरी है क्योंकि अलग अलग राजनीतिक दल जब अपना उम्मीदवार खड़ा करेंगे और तभी उनको हम जैसे आप लोग सुन पाएंगे और तभी लोकतंत्र का प्रमाण भी मिल पाएगा क्या डेमोक्रेसी है या नहीं लोकतंत्र का है हमारे देश में ताकि हम लोगों के ऊपर यह चीज डाली जाए कि हम किसको अपना नेता सुनना चाहते हैं और ऐसा ना हो कि सिर्फ एक राजनीतिक पार्टी है और उसने अपना कोई भी उम्मीदवार खड़ा किया और वह जीत किसी कोई दूसरी विपक्ष में पार्टी ही नहीं थी कोई इंसान ही नहीं था जिससे उनको सामना करना पड़े तो इसलिए लोग प्रजातंत्र का होने के लिए राजनीतिक दलों का होना बहुत जरूरी है

raajnitik dalon ko loktantra ka praan isliye kaha jata hai kyonki loktantra ka ek desh mein hone ke liye alag alag raajnitik dalon ka hona BA hut zaroori hai kyonki alag alag raajnitik dal jab apna ummidvar khada karenge aur tabhi unko hum jaise aap log sun payenge aur tabhi loktantra ka pramaan bhi mil payega kya democracy hai ya nahi loktantra ka hai hamare desh mein taki hum logo ke upar yah cheez dali jaaye ki hum kisko apna neta sunana chahte hai aur aisa na ho ki sirf ek raajnitik party hai aur usne apna koi bhi ummidvar khada kiya aur vaah jeet kisi koi dusri vipaksh mein party hi nahi thi koi insaan hi nahi tha jisse unko samana karna pade toh isliye log prajatantra ka hone ke liye raajnitik dalon ka hona BA hut zaroori hai

राजनीतिक दलों को लोकतंत्र का प्राण इसलिए कहा जाता है क्योंकि लोकतंत्र का एक देश में होने क

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लोकतंत्र का प्राण क्यों कहा जाता है देखे ऐसी वैसी कोई टाइम नहीं है और इसलिए कहा जाता है वह क्योंकि देखिए जो पॉलिटिकल राजनीतिक दल होते हैं वह हमारे लिए विकास करते हैं वहीं सरकार होती है और वही एक देश के लिए जितना ज्यादा विकास कर सकती है करती है तू पैसे हमसे ही लेती है लेकिन इसीलिए हमें वोट देने का हकदार होता है जितने भी हम प्रोडक्ट्स के लिए पैसे देता हूं तुझे भी टैक्स लगता है वह टेक्स्ट आरा सरकार के पास जाता है और सब चीजों पर टैक्स लगता है दुनिया में जितनी भी चीज है तो इसलिए वह पैसों को इकट्ठा करके हमारे लिए और तरीके विकास करती है तो इसलिए शायद कहा जाता है

loktantra ka praan kyon kaha jata hai dekhe aisi vaisi koi time nahi hai aur isliye kaha jata hai vaah kyonki dekhiye jo political raajnitik dal hote hai vaah hamare liye vikas karte hai wahi sarkar hoti hai aur wahi ek desh ke liye jitna zyada vikas kar sakti hai karti hai tu paise humse hi leti hai lekin isliye hamein vote dene ka haqdaar hota hai jitne bhi hum products ke liye paise deta hoon tujhe bhi tax lagta hai vaah text aara sarkar ke paas jata hai aur sab chijon par tax lagta hai duniya mein jitni bhi cheez hai toh isliye vaah paison ko ikattha karke hamare liye aur tarike vikas karti hai toh isliye shayad kaha jata hai

लोकतंत्र का प्राण क्यों कहा जाता है देखे ऐसी वैसी कोई टाइम नहीं है और इसलिए कहा जाता है वह

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Anukrati

Journalism Graduate

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक निष्पक्ष और पारदर्शी सरकार बनाने के लिए राजनैतिक दलों का होना आवश्यक है सभी समान विचारों वाले व्यक्तियों का एक दल बन जाता है अलग-अलग विचारों वाले कई दल मिलकर एक परिपूर्ण सरकार बनाते हैं राजनीतिक दलों के आपसी मतभेद आपसी मुद्दे जनता के लिए उनके लिए गए कार्यों का लेखा जोखा जनता में उस दल की छवि को चुनाव के समय स्पष्ट करता है जनता अनेक दलों में से अपनी पसंद का एक नेता अपना मत देकर चुनती है और सभी राजनीतिक दल मिलकर एक लोकतांत्रिक सरकार बनाते हैं इसलिए राजनैतिक दलों का लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है

ek nishpaksh aur pardarshi sarkar BA naane ke liye rajnaitik dalon ka hona aavashyak hai sabhi saman vicharon waale vyaktiyon ka ek dal BA n jata hai alag alag vicharon waale kai dal milkar ek paripurna sarkar BA nate hai raajnitik dalon ke aapasi matbhed aapasi mudde janta ke liye unke liye gaye karyo ka lekha jokha janta mein us dal ki chhavi ko chunav ke samay spasht karta hai janta anek dalon mein se apni pasand ka ek neta apna mat dekar chunati hai aur sabhi raajnitik dal milkar ek loktantrik sarkar BA nate hai isliye rajnaitik dalon ka loktantra ka praan kaha jata hai

एक निष्पक्ष और पारदर्शी सरकार बनाने के लिए राजनैतिक दलों का होना आवश्यक है सभी समान विचारो

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shekhar11

Volunteer

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11 एवरेज सेक्स की बात की जाए तो ए कैमरा सेक्स कुछ 15 मिनट से 25 मिनट तक की होती है

11 average sex ki baat ki jaaye toh a camera sex kuch 15 minute se 25 minute tak ki hoti hai

11 एवरेज सेक्स की बात की जाए तो ए कैमरा सेक्स कुछ 15 मिनट से 25 मिनट तक की होती है

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Gulnaz

लेवल 1 (बिगिनर)

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राजनीतिक दल यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य करता है सरकार के लिए और इनकी नियंत्रण पाने के लिए लोगों को एक साथ लाते हैं उनकी रुचियां उनके समर्थन वाले समूहों के लिए अनुकूल नीतियां विकासित करते हैं और अपने उम्मीदवारों को कार्यालय में चुनने के लिए जैसे कि वह कंडीडेट को सेलेक्ट करने के लिए जो है व्यवस्थित और मनाने का प्रयास करते हैं इसलिए लोकतंत्र का प्राण कहा जाता है

raajnitik dal yah ek BA hut hi mahatvapurna karya karta hai sarkar ke liye aur inki niyantran paane ke liye logo ko ek saath laate hai unki ruchiyan unke samarthan waale samuho ke liye anukul nitiyan viksit karte hai aur apne ummidwaron ko karyalay mein chunane ke liye jaise ki vaah kandidet ko select karne ke liye jo hai vyavasthit aur manne ka prayas karte hai isliye loktantra ka praan kaha jata hai

राजनीतिक दल यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण कार्य करता है सरकार के लिए और इनकी नियंत्रण पाने के ल

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Anumita Dutta

Volunteer

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राजनीति दल को लोकतंत्र का प्राण बोला जाता है क्योंकि एक राजनीतिक दल ही सब कुछ डिसाइड करते हैं अगर कोई भी प्रॉब्लम होता है कोई देश का तो राजनीतिक दल ही वह लोग संभालते हैं पूरा और जो और रिस्पांस ब्लिटिंग होते हैं वह हमेशा राजनीतिक दलों के ऊपर ही होता है मंडी से अगर कोई राजनीतिक दल अगर वोट से जीते हैं तो उस समय उन लोगों का बहुत ही रिस्पांस बलटी हो जाता है जो देश का जो क्षमता है या फिर देश का जो रिस्पांसिबिलिटीज है पूरा उन लोगों के पास आ जाता है और इसकी जो डिफेंस डिफेंस का रिस्पांस बलटी भी रहता है उसके साथ साथ जो-जो मेंटेनेंस का जो रिस्पांसिबिलिटी होता है तो एक नेता के ऊपर ही होता है पर अगर वह और जो पावर है देश के बहुत सारे काम होते हैं तो पावर्ड जो है एक राजनीतिक दलों के अंदर ही वह डिवाइडेड हो जाता है और उसी के अनुसार जो मिनिस्टर है मिनिस्टर होता है या फिर सोते हैं जैसे कि हम लोग का प्रधानमंत्री होम मिनिस्टर या फिर डिफेंस मिनिस्टर तो ऐसे ही डिसाइडेड होता है और बोलो कि रिस्पांसिबल होते हैं हम लोगों का जो डिफरेंस है या फिर जो जो और इस पॉसिबल काम है उसके लिए तो इसी कारण राजनीतिक दल है उनको लोकतंत्र का प्रोग्राम बोला जाता है

raajneeti dal ko loktantra ka praan bola jata hai kyonki ek raajnitik dal hi sab kuch decide karte hai agar koi bhi problem hota hai koi desh ka toh raajnitik dal hi vaah log sambhalate hai pura aur jo aur response bliting hote hai vaah hamesha raajnitik dalon ke upar hi hota hai mandi se agar koi raajnitik dal agar vote se jeete hai toh us samay un logo ka BA hut hi response BA lati ho jata hai jo desh ka jo kshamta hai ya phir desh ka jo rispansibilitij hai pura un logo ke paas aa jata hai aur iski jo defence defence ka response BA lati bhi rehta hai uske saath saath jo jo Maintenance ka jo responsibility hota hai toh ek neta ke upar hi hota hai par agar vaah aur jo power hai desh ke BA hut saare kaam hote hai toh powered jo hai ek raajnitik dalon ke andar hi vaah divided ho jata hai aur usi ke anusaar jo minister hai minister hota hai ya phir sote hai jaise ki hum log ka pradhanmantri home minister ya phir defence minister toh aise hi decided hota hai aur bolo ki rispansibal hote hai hum logo ka jo difference hai ya phir jo jo aur is possible kaam hai uske liye toh isi karan raajnitik dal hai unko loktantra ka program bola jata hai

राजनीति दल को लोकतंत्र का प्राण बोला जाता है क्योंकि एक राजनीतिक दल ही सब कुछ डिसाइड करते

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