आपने UPSC परीक्षा के लिए बैठने का फ़ैसला कैसे और क्यों किया?...


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Isha Pant

IPS Officer

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Mittali Sethi

IAS 2017 Batch

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यूपीएससी एग्जाम के लिए बैठने का फैसला और मैंने कैसे और क्यों किया बहुत ही पुरानी कहानी है मुझे मैंने यूपीएससी का एग्जाम पहली बार दिया 2015 में 2014 में और 2013 तक भी आप सबके साथ मुझे आईएस का फुल फॉर्म भी पता नहीं था मुझे पता नहीं था कि यूपीएससी क्या होता है आईएएस क्या होता है मैं डॉक्टर हूं और मैं एक हॉस्पिटल में प्रैक्टिस कर रही थी काफी से की थी शादी हो चुकी थी और ना कभी सोचा नहीं कि यह फिल्म सुनूंगी ऐसा कुछ भी करूंगी लेकिन बीच में महाराष्ट्र में एक गडचिरोली नाम का एक का जिला है और कुछ तो इंटरनेट पर सर्च करते करते मुझे ऐसा मिला कि गढ़चिरौली में कयुत वर्कशॉप है नौजवानों के लिए नौजवान युवक और युवतियों के लिए 1 का 10 दिन का वर्कशॉप किया जाता है और किस लिए हो गया कि बा मैंने सोचा कि मुझे यहां पर जाना है उनका ही 15 पेज का फॉर्म था बहुत ही मुश्किल का नाम निर्माण था गढ़चिरौली में कर गडचिरोली एक नक्सलाइट इंप्रेस्ड डिस्ट्रिक्ट है तू बहुत अजीब लग रहा था उस टाइम पर कि मुझे यह करने का मन है पर आई थिंक उसका फंडामेंटल यह था कि शायद जीवन में मैं बहुत अच्छे हॉस्पिटल में नौकरी कर रही थी और सब करना था बट कहीं ना कहीं ऐसा लग रहा था कि शायद जीवन में में जो अच्छी नहीं करना चाहती हूं जो एक मिसिंग लिंक रहता है कि कुछ तो अधूरा है कुछ तो ऐसा है जो शायद मैं नहीं कर रही पर मेरा करने का बहुत मन है उसमें से एक चीज जो मैं आज रिलाइज करती हूं वह यह थी कि मुझे हमेशा ग्रास रूट पर लोगों के साथ काम करना बहुत पसंद था बचपन शौक था कि मैं ब्लू को से मिली लोगों से बातें करूं गांव में जाओ और एक प्रॉब्लम कुल्लू और उसे सुझाव और अपने लिए नहीं शायद किसी और के लिए दुनिया के लिए या लोगों के लिए या क्या ऐसा चीज है जो सोसाइटी में मैं कंट्रीब्यूट कर सकती हूं तू जब मैं गढ़चिरौली गई तू गढ़चिरौली में एक एनजीओ है जिसका नाम सर्च और यह डॉक्टर अभय बांगो डॉक्टर रानी बाग नाम के दो डॉक्टर से जो चलाते हैं और बहुत रिसर्च होता है सच में और जब मैं वहां गई तू मुझे ब्रेड हुआ के महाराष्ट्र में यह जो 10 दिन का युद्ध कैंप होता है इसमें मैं पहली रोल महाराष्ट्रीयन थी और मुझे मराठी आती नहीं थी तो मुझे यह काम दिया गया कि आप जो एक मोबाइल मेडिकल यूनिट है जो गांव-गांव में फिरता पथक जिसको बोलते हैं वह जा जा के लोगों के हेल्थ इश्यूज ऑटो करता था या कैंप कंडक्ट करता था तुम मुझे भुला दिया कि आप डेंटिस्ट हैं और आप अपनी सेवाएं थोड़ा देखिए और देखें कि यहां पर क्या डिजीज है हमको थोड़ा बॉर्डर ऑफ डिग्री फाइंड आउट करना है तू मैंने भी सहमति दे दी और मैंने सोचा कि चलिए मैं मैं देख कर आती हूं कि यह क्या है अपॉर्चुनिटी मेरे हस्बैंड का मुझे बहुत सपोर्ट था वह आए मुझे छोड़ने के लिए आए और 2 दिन रहे वहां पर और वहां जाकर सर्टेनली ऐसा लगा कि अब यही तो वह काम था जो करना था लाइफ में हमेशा से कि यह किसने तो बहुत मजा आता है कि हम गांव में जा रहे हैं लोगों से बातें कर रहे हैं और बहुत अच्छे एक्सपीरियंस एस हुए गढ़चिरौली में रहकर में बहुत अंदर अंदर के गांव में गई आपको एक कप किस्सा सुनाते हुए गांव में गई थी तो हमेशा से लगता था कि बच्चों को दूध मिलता है तो सबसे ज्यादा दातों की तकलीफ हमेशा के लिए कीड़ा लग नहीं होता है तो वही मिलेगा बच्चों में हमेशा ही प्रश्न रहता था कि इतना क्या देखना है कि क्या मिलेगा यही तो मिलेगा और फिर जब मैं गई जंगलों में खूब गाड़ी भूमि और एक गांव में गए तो पता चला कि यह गांव में तो आज तक जो भी नहीं आया बिकॉज दम नहीं है गांव तक सड़क नहीं पहुंचती और किसी ने जब सड़क बनाई थी तो किसने उड़ा दे बम से रास्ते में पुलिस देखती थी और गढ़चिरौली में देती थी कि कैसे डॉक्टर बांगो डॉक्टर रानी बाग में अपने पूरे जीवन गांव में कांटा है लोगों की प्रॉब्लम समझाते हुए कैसे उन्होंने निमोनिया से दिल की आग कैसे हो इन्फेंट मोर्टालिटी बच्चे कितने मर रहे हैं उनका मरना कैसे रोके मऊ का मरना कैसे रोके इस पर काम किया है मुझे बहुत टाइम लगा मुझे लगा कि यह जो एक सोशल साइंस का एरिया है वह मुझे देखना है उसके बाद जब मैं आई वापस तो मैंने देखना शुरू किया कि मेरे पास क्या क्या ऑप्शन है बहुत ऑप्शन से टटोली भी बहुत सोचा कि क्या कर सकती हूं क्या अपना करियर चेंज करना इतना आसान होगा जब मैं इतना सेटल हो चुकी हूं अच्छे पैसे मारी हूं फैमिली को कैसे कनविंस करो बहुत बहुत सारे सवाल थे आने के बाद एक और किस्सा जो मेरे साथ हुआ वह भी था कि एक का लड़की मुझे 17 साल की मिली जिसने जो घर पर थी और उसे ऐसे ही पूछा कि आप पढ़ना चाहेंगे कि हम कभी पढ़ी नहीं थी स्कूल में उसे पढ़ाना शुरू किया और रियल लाइफ किया कि यह काम करने में तो बहुत मजा आता है मतलब अपना जो काम कर रही हूं वह पसंद है पर शायद इतना पसंद नहीं है क्या होता है कितने अटेम्प्ट्स हैं और कैसे प्रिपेयर करते हैं और शुरू में बहुत तकलीफ हुई बहुत लोगों ने ऐसा भी बोला कि आप आप से नहीं हो पाएगा आप कैसे करेंगे आप साथ में नौकरी कर रहे हैं वह सब सवाल उस थे हमेशा से थे और फिर भी धीरे-धीरे सोचा कि चलो थोड़ा एक बेबी चक ले कर देखते हैं पढ़ कर देखते हैं पढ़ने लगी तो ऐसा लगा कि यह तो बहुत इंटरेस्टिंग है पॉलिटिक्स बहुत इंटरेस्टिंग है 19 मिक्स बहुत इंटरेस्टिंग है वक्त लगता था शुरू शुरू में मुझे याद है कि मैं अखबार लेकर जाती थी अपने ऑफिस में तो मुझे 8 घंटा लगता था एक न्यूज़ पेपर पढ़ने में क्योंकि मैंने पिछले 10 साल से न्यूज़पेपर पढ़ा नहीं था धीरे-धीरे बढ़ती गई और यह तो एक ऐसा एरिया है जो मुझे बहुत पसंद आएगा यह काम मुझे बहुत पसंद आएगा पेरेंट्स को समझाना शुरू किया इन लॉ उसको समझाना शुरू किया उसने बोला कि ठीक है आप कर लीजिए पर नौकरी मत छोड़िए और ऐसे मत कीजिए कि आपके पास कोई बात का प्लान ना रहे तो वह जरूर मैं बोलूंगी कि मैंने यह डिसाइड किया कि मैं नौकरी छोडूंगी नहीं साथ में इतना ही प्रॉब्लम था कि मैं पांडिचेरी में थी और वहां पर कोचिंग क्लास भी अवेलेबल नहीं थी तो शुक्रिया अदा करना चाहूंगी वह इंस्टीट्यूट का जो ऑनलाइन थे उन्होंने बहुत हेल्प किया उनकी वजह से मुझे कोचिंग क्लास कभी ले की जरूरत नहीं पड़ी तो मैंने सिर्फ ऑनलाइन रिसोर्सेज यूज किए ऑफिस में बैठकर पढ़ती थी ऑफिस के लोगों ने बहुत मदद किया और आई थिंग सब लोगों का योगदान है मेरा रांका ने में हम सब लोगों का कुछ तो कुछ तो हर किसी ने कुछ ना कुछ मेरे लिए किया ही मेरे ऑफिस में तो इस तरह से डिसाइड किया और अब आसान नहीं था किसी के लिए भी आसान नहीं रहता है पर स्कोप शायद ही बोलूंगी कि धीरे-धीरे इंक्रीमेंटली आपको समझ में आएगा कि आपका जो फैसला है वह सही है या नहीं सही है बट इतना जल्दी मत सोचिए कि यह फैसला आपको 2 दिन में करना है या दोस्तों में करना है अपना टाइम लेकर पूरे उसके कंसीक्वेंसेस क्या है आपने क्लियर किया उसके कंसीक्वेंसेस किया है आपने क्लियर नहीं किया तो आपके पास बैकअप प्लान है क्या यह सब चीज है अच्छे से सोच कर अगर आपने नहीं करेंगे तो फिर भी कोई ऑफर

upsc exam ke liye baithne ka faisla aur maine kaise aur kyon kiya bahut hi purani kahani hai mujhe maine upsc ka exam pehli baar diya 2015 mein 2014 mein aur 2013 tak bhi aap sabke saath mujhe ias ka full form bhi pata nahi tha mujhe pata nahi tha ki upsc kya hota hai IAS kya hota hai doctor hoon aur main ek hospital mein practice kar rahi thi kaafi se ki thi shadi ho chuki thi aur na kabhi socha nahi ki yah film sunungi aisa kuch bhi karungi lekin beech mein maharashtra mein ek gadchiroli naam ka ek ka jila hai aur kuch toh internet par search karte karte mujhe aisa mila ki gadhachirauli mein kayut workshop hai naujavanon ke liye naujawan yuvak aur yuvatiyon ke liye 1 ka 10 din ka workshop kiya jata hai aur kis liye ho gaya ki BA maine socha ki mujhe yahan par jana hai unka hi 15 page ka form tha bahut hi mushkil ka naam nirmaan tha gadhachirauli mein kar gadchiroli ek Naxalite impressed district hai tu bahut ajib lag raha tha us time par ki mujhe yah karne ka man hai par I think uska 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यूपीएससी एग्जाम के लिए बैठने का फैसला और मैंने कैसे और क्यों किया बहुत ही पुरानी कहानी है

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Dr Jayadev Sarangi

Worked at Indian Administrative Service (AGMUT), Formerly SECRETARY,GOVERNMENT OF NCT OF DELHI/Goa Government .Formerly Expert UNODC

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

पिछली हम लोगों की जनरेशन में जैसे मैं उड़ीसा के वेस्टर्न उड़ीसा से आता हूं जहां पर जाति ज्यादा डेवलपमेंट नहीं है और वहां पर लिखा जाता है कि जो आईएस तरह कलेक्टर है या सब डिविजनल मजिस्ट्रेट से लोगों की जिंदगी में काफी प्रभाव डालते हैं अगर कोई चीज होता है तो उन्हीं के माध्यम से होता है तो हमें बचपन से यही लगता था कि शायद अगर जनता की सेवा करना चाहते हो या किसी भी जगह की सेवा करना चाहते हो तो सिविल सर्विसेज सी एक माध्यम है तो इसीलिए बचपन से ही यह बताया कि सिविल सर्विस एसी दिया जाए और समाज के लिए यह लोगों के लिए कुछ किया जाए

pichali hum logo ki generation mein jaise main odisha ke western odisha se aata hoon jaha par jati zyada development nahi hai aur wahan par likha jata hai ki jo ias tarah collector hai ya sab divijanal magistrate se logo ki zindagi mein kaafi prabhav daalte hain agar koi cheez hota hai toh unhi ke madhyam se hota hai toh hamein bachpan se yahi lagta tha ki shayad agar janta ki seva karna chahte ho ya kisi bhi jagah ki seva karna chahte ho toh civil services si ek madhyam hai toh isliye bachpan se hi yah bataya ki civil service ac diya jaaye aur samaj ke liye yah logo ke liye kuch kiya jaaye

पिछली हम लोगों की जनरेशन में जैसे मैं उड़ीसा के वेस्टर्न उड़ीसा से आता हूं जहां पर जाति ज्

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Dr Devansh Yadav

Additional Deputy Commissioner at ADC Bordumsa, Government of Arunachal Pradesh

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेडिकल कॉलेज में पहले 3 या 4 साल तो मेडिसिन की पढ़ाई में ही मन लगा रहा और फिर उसके बाद जब चौथा साल खत्म होने वाला था तो पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए विचार किया जाता है जो जो ऑप्शन होते हैं उनके बारे में सोचा जाता है तो उनमें से एक ऑप्शन यूपीएससी का भी था हमेशा से ही मन था कि अगर मेडिसिन भी करनी है तो ऐसी करनी है जो कि लोगों को लाभदाई हो गरीब से गरीब तबका समाज का उससे लाभ उठा सके तो उस समय काफी सारे सीनियर्स तो नहीं बोलूंगा बट कुछ सीनियर से जो यूपीएससी का एग्जाम देकर क्लियर भी कर चुके थे और सिविल सर्विस में जा चुके थे उनसे बातचीत करके मैं काफी प्रभावित हुआ मुझे लगा के सिविल सर्विस के माध्यम से जैसे डॉक्टर मरीज का इलाज करता है ऐसे ही मैं समाज की परेशानियों का इलाज कर सकता हूं तो उस समय मन बनाया आपके मैं पीजी की तैयारी शुरू नहीं करूंगा मैंने यूपी सी की तैयारी शुरू कर लूंगा आपने फाइनल ईयर का एग्जाम देने के बाद वह जो मैंने मन बनाया फिर उसके बाद से तैयारी शुरू हुई और फिर उसके बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा

medical college mein pehle 3 ya 4 saal toh medicine ki padhai mein hi man laga raha aur phir uske baad jab chautha saal khatam hone vala tha toh post graduation ke liye vichar kiya jata hai jo jo option hote hai unke bare mein socha jata hai toh unmen se ek option upsc ka bhi tha hamesha se hi man tha ki agar medicine bhi karni hai toh aisi karni hai jo ki logo ko labhdai ho garib se garib tabaka samaj ka usse labh utha sake toh us samay kaafi saare seniors toh nahi boloonga but kuch senior se jo upsc ka exam dekar clear bhi kar chuke the aur civil service mein ja chuke the unse batchit karke main kaafi prabhavit hua mujhe laga ke civil service ke madhyam se jaise doctor marij ka ilaj karta hai aise hi main samaj ki pareshaniyo ka ilaj kar sakta hoon toh us samay man banaya aapke main PG ki taiyari shuru nahi karunga maine up si ki taiyari shuru kar lunga aapne final year ka exam dene ke baad vaah jo maine man banaya phir uske baad se taiyari shuru hui aur phir uske baad peeche mudkar nahi dekha

मेडिकल कॉलेज में पहले 3 या 4 साल तो मेडिसिन की पढ़ाई में ही मन लगा रहा और फिर उसके बाद जब

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Pamela Satpathy

IAS Officer, Telangana

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अछनेरा बचपन से ट्राइबल एरिया में पली-बढ़ी हूं तो वहां पर और डिस्टिक एडमिनिस्ट्रेशन को डिस्टिक कलेक्टर को काम करते हुए देखा है मदद भी मेरी एग्रीकल्चर रिसर्च फील्ड में है तो उनके साथ काफी सारे गांव वितरित किए हैं तो आप मिनिस्ट्रेशन या फिर से कैसे इंप्लीमेंट होता है यह से देखा है बचपन से इसका हिस्सा बनने का चली पहले से ही बहुत मन था बीच में कहीं भटक गए इधर उधर इंजीनियरिंग किया और फिर उसे थोड़ा डिस्टेंस हो गया था लेकिन बाद में तो ड्यूटी सी का सिलेबस देखा तो लगा कि यह एक बार पढ़ कर देखता है यह काफी इंटरेस्टिंग है तो इसकी तरफ मेरा एक्शन कर सकते हैं या फिर सिलेबस को जानने की इच्छा बोल सकते हैं तो इसलिए अब यूपीएससी देने का सोचा इस बीच में तीन जॉब्स भी कर लिए लेकिन कहीं पर मन नहीं लगा फाइनली और सोचा कि यूपी एक बार लिखना चाहिए तो वैसे ही लिखने के लिए बैठकर

achanera bachpan se trival area mein pali badhi hoon toh wahan par aur district administration ko district collector ko kaam karte hue dekha hai madad bhi meri agriculture research field mein hai toh unke saath kaafi saare gaon vitrit kiye hain toh aap ministreshan ya phir se kaise implement hota hai yah se dekha hai bachpan se iska hissa banne ka chali pehle se hi bahut man tha beech mein kahin bhatak gaye idhar udhar Engineering kiya aur phir use thoda distance ho gaya tha lekin baad mein toh duty si ka syllabus dekha toh laga ki yah ek baar padh kar dekhta hai yah kaafi interesting hai toh iski taraf mera action kar sakte hain ya phir syllabus ko jaanne ki iccha bol sakte hain toh isliye ab upsc dene ka socha is beech mein teen jobs bhi kar liye lekin kahin par man nahi laga finally aur socha ki up ek baar likhna chahiye toh waise hi likhne ke liye baithkar

अछनेरा बचपन से ट्राइबल एरिया में पली-बढ़ी हूं तो वहां पर और डिस्टिक एडमिनिस्ट्रेशन को डिस्

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