क्या वेस्टर्न कल्चर को आत्मसात करके भारतीय युवा पीढ़ी ने कुछ खोया है?...


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Dr. KRISHNA CHANDRA

Rehabilitation Psychologist

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्ते दोस्तों मेरी आनी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं देखिए वेस्टर्न कल्चर ओवरऑल यानी की पूरी तरह की से खराब नहीं है प्रॉब्लम यहां आ जाती है जब हम लोग कोई भी चीज में जो खराब या है मतलब जो जो एकदम ऐसी चीज है जो जिस का रिजल्ट यानी कि जिन का परिणाम जो है वह अच्छा नहीं निकलने वाला है अगर हम उसको कॉपी करने लग जाएंगे और अगर हमारा जो विचारधारा है वैसा बन जाएगा तो प्रॉब्लम उसमें है मुझे अगर आप पूछोगे तो वेस्टर्न कल्चर का यह बात मुझे अच्छा लगता है मैं अप्रिशिएट करती हूं कि लोग अपनी मन की बात मन की बात बोलने में कहने में लेकिन दूसरों को चोट पहुंचाने में डिफरेंस होता है तो अगर आपको अपना ओपिनियन यानी कि आपके मन में जो बात है वह सामने पेश करना है तो एक लिहाज से एक तमीज से आपको बात करनी चाहिए और फिर दूसरा आ गया कपड़े लोग बोलते हैं कि क्या फटे हुए कपड़े पहने हुए लड़कियों ने छोटे कपड़े पहने लड़की को तुम्हारा प्रॉब्लम नहीं है कुछ भी कैसे भी करके रहे लेकिन लड़की है बॉडी है सब लड़कियों का बॉडी सेमी होता है तो उसमें अगर आपको ज्यादा एक्साइटमेंट हो रहा तो प्रॉब्लम आपके दिमाग में ठीक है अभी यह छोड़कर अगर कपड़े हैं लेकिन अगर आप एकदम वेस्ट में नीचे पहने लगोगे लड़की कपड़े पहनते हैं पूरा उनका नीचे उतर रहा होता है जो इसमें उनको देखना होगा फिर कि यार मैं जहां जा रहा हूं वहां पर यह कपड़े सूट कर रहे हो बहुत सारे ऐसे काफी चीजों पर डिपेंड करता है कि आपका जो भी है वह जायज है कि जायज नहीं है दूसरा यह कि जो उनका खुला अप्रोच है ना मतलब जो फ्री फ्री फ्रीडम आफ स्पीच ओं फ्रीडम आफ बिहेवियर यह सब अच्छी चीज है लेकिन मैं अगेन फिर से ये बात कहना चाहूंगी कि कोई ऐसा काम करके जिससे आप दूसरों को 295 आपकी मम्मी पापा को ही शर्मिंदा कर रहे हो यह सारी चीजें आप कॉपी करना यह अच्छी बात नहीं है थैंक यू

namaste doston meri aani doctor priya jha ke taraf se aap sab ko din ki bahut saree subhkamnaayain dekhie western culture overall yani ki puri tarah ki se kharab nahi hai problem yahan aa jati hai jab hum log koi bhi cheez mein jo kharab ya hai matlab jo jo ekdam aisi cheez hai jo jis ka result yani ki jin ka parinam jo hai wah accha nahi nikalne vala hai agar hum usko copy karne lag jaenge aur agar hamara jo vichardhara hai waisa ban jayega toh problem usme hai mujhe agar aap puchoge toh western culture ka yeh baat mujhe accha lagta hai appreciate karti hoon ki log apni man ki baat man ki baat bolne mein kehne mein lekin dusro ko chot pahunchane mein difference hota hai toh agar aapko apna opinion yani ki aapke man mein jo baat hai wah saamne pesh karna hai toh ek lihaj se ek tamij se aapko baat karni chahiye aur phir doosra aa gaya kapde log bolte hai ki kya phate hue kapde pehne hue ladkiyon ne chote kapde pehne ladki ko tumhara problem nahi hai kuch bhi kaise bhi karke rahe lekin ladki hai body hai sab ladkiyon ka body semi hota hai toh usme agar aapko zyada exitement ho raha toh problem aapke dimag mein theek hai abhi yeh chhodkar agar kapde hai lekin agar aap ekdam west mein niche pehne lagoge ladki kapde pehente hai pura unka niche utar raha hota hai jo ismein unko dekhna hoga phir ki yaar main jaha ja raha hoon wahan par yeh kapde suit kar rahe ho bahut saare aise kaafi chijon par depend karta hai ki aapka jo bhi hai wah jayaz hai ki jayaz nahi hai doosra yeh ki jo unka khula approach hai na matlab jo free free freedom of speech yuvaon freedom of behaviour yeh sab acchi cheez hai lekin main again phir se ye baat kehna chahungi ki koi aisa kaam karke jisse aap dusro ko 295 aapki mummy papa ko hi sarminda kar rahe ho yeh saree cheezen aap copy karna yeh acchi baat nahi hai thank you

नमस्ते दोस्तों मेरी आनी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सब को दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं दे

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नाटक पता करें कहां तक पहुंचा है दिखाओ भारत की परंपरागत एक परिवार की तरह ग्रुप में बहुत सारी चीजें हमारे को बहुत कुछ आज हमारे यहां बहुत पहले से बहुत अच्छा है किस धर्म से रिलेटेड है तो हमारा काम हो जाए

natak pata karein kahaan tak pohcha hai dikhaao bharat ki paramparagat ek parivar ki tarah group mein bahut saree cheezen hamare ko bahut kuch aaj hamare yahan bahut pehle se bahut accha hai kis dharm se related hai toh hamara kaam ho jaye

नाटक पता करें कहां तक पहुंचा है दिखाओ भारत की परंपरागत एक परिवार की तरह ग्रुप में बहुत सार

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Sandeep Kumar

Journalist

2:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंडिया युवा पीढ़ी मुक्त कुछ नहीं कह सकता लेकिन हां जितना हमारा चित्र आगे बढ़ा है कितना हमारा देश आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है उतना कुछ खोया की है लेकिन फिर भी पहले के मुकाबले एक परसेंट लगाया जाए तो पहले के मुकाबले आज पहले 5 साल में स्कूल जाते थे लेकिन पहले लोग उंगलियों पर हिसाब लगा दिया करते थे आज के टाइम में 3 साल में एक स्कूल में एडमिशन हो जाता है लेकिन लगाने के लिए पेंसिल पेन कॉपी जरूरी हो गई मैं यह मानता हूं कि यह प्रेशर है और प्रेशर यदि प्रेशर खत्म कर दिया जाए तो क्या अमेरिका है अमेरिका में जो माइंड है अवस्था होती है सबसे पहले हमारी पैसे बाबा क्या होती है पीड़ा होती है उस पर एक भक्त किसी भी बच्चे के माइंड पर पैसे डाल दिया जाएगा बाल्यावस्था में डिप्रेशन में बदल जाएगा और डिप्रेशन जो है हमें आगे क्लिक नहीं कर पाता यदि हम नहीं होंगे तो ऐसा होगा के पहले के मुकाबले आज शायद वह काम ना हो पाए जो ऑफ रिमाइंड कर सकते थे डिप्रेशन से अलग हटने के लिए मोटिवेट जरूरी है वह मोटिवेट के लिए रिमाइंड जरूरी है तो मैं यह पैसा हटाया जाए मानना है मेरा के हाथ कुछ खोया है लेकिन सब कुछ नहीं खोया बहुत कुछ नहीं कोई ऐसा मेरा मानना है कि यदि कुछ भूल चुकी है अमेरिका से दिखा सकते हैं

india yuva peedhi mukt kuch nahi keh sakta lekin haan jitna hamara chitra aage badha hai kitna hamara desh aage badhne ki koshish kar raha hai utana kuch khoya ki hai lekin phir bhi pehle ke muqable ek percent lagaya jaye toh pehle ke muqable aaj pehle 5 saal mein school jaate the lekin pehle log ungaliyon par hisab laga diya karte the aaj ke time mein 3 saal mein ek school mein admission ho jata hai lekin lagane ke liye pencil pen copy zaroori ho gayi main yeh manata hoon ki yeh pressure hai aur pressure yadi pressure khatam kar diya jaye toh kya america hai america mein jo mind hai avastha hoti hai sabse pehle hamari paise baba kya hoti hai peeda hoti hai us par ek bhakt kisi bhi bacche ke mind par paise daal diya jayega baalyaavastha mein depression mein badal jayega aur depression jo hai humein aage click nahi kar pata yadi hum nahi honge toh aisa hoga ke pehle ke muqable aaj shayad wah kaam na ho paye jo of remind kar sakte the depression se alag hatane ke liye motivate zaroori hai wah motivate ke liye remind zaroori hai toh main yeh paisa hataya jaye manana hai mera ke hath kuch khoya hai lekin sab kuch nahi khoya bahut kuch nahi koi aisa mera manana hai ki yadi kuch bhul chuki hai america se dikha sakte hain

इंडिया युवा पीढ़ी मुक्त कुछ नहीं कह सकता लेकिन हां जितना हमारा चित्र आगे बढ़ा है कितना हमा

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धर्मदेव सिंह भाटी

कुश्ती प्रशिक्षक

1:21
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्या वेस्टर्न कल्चर को आत्मसात करके भारतीय युवा पीढ़ी ने कुछ खोया है मेरे विचार से पश्चिमी सभ्यता को आत्मसात का भारतीय युवा पीढ़ी ने अपने अमूल्य धरोहर को खोया है जिसकी पूर्ति करना असंभव सा लगता पश्चिमी सभ्यता में पश्चिमी कल्चर ने वेस्टर्न कल्चर में हमारे युवाओं के मन मस्तिष्क को गंदा कर दिया है दूषित कर दिया है जिसका परिणाम यह है आज की युवा पीढ़ी अपने ही संस्कारों को भूल गई है अपनों से बड़ों का सम्मान नहीं करती भारतीय संस्कृति की विरासत उन्हें अपने पूर्वजों से धरोहर के रूप में मिली थी उसी धरोहर को आज की युवा पीढ़ी ने वेस्टर्न कल्चर के प्रभाव में आकर धूमिल सा कर दिया है जबकि होना यह चाहिए कि भारतीय संस्कृति को युवाओं को आत्मसात करना चाहिए

kya western culture ko aatmsat karke bharatiya yuva peedhi ne kuch khoya hai mere vichar se pashchimi sabhyata ko aatmsat ka bharatiya yuva peedhi ne apne amuly dharohar ko khoya hai jiski purti karna asambhav sa lagta pashchimi sabhyata mein pashchimi culture ne western culture mein hamare yuvaon ke man mastishk ko ganda kar diya hai dushit kar diya hai jiska parinam yah hai aaj ki yuva peedhi apne hi sanskaron ko bhool gayi hai apnon se badon ka sammaan nahi karti bharatiya sanskriti ki virasat unhe apne purvajon se dharohar ke roop mein mili thi usi dharohar ko aaj ki yuva peedhi ne western culture ke prabhav mein aakar dhumil sa kar diya hai jabki hona yah chahiye ki bharatiya sanskriti ko yuvaon ko aatmsat karna chahiye

क्या वेस्टर्न कल्चर को आत्मसात करके भारतीय युवा पीढ़ी ने कुछ खोया है मेरे विचार से पश्चिमी

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Sachin Sinha

Journalist

2:09
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत कुछ खोया है युवा पीढ़ी ऑस्टन पंचायत जिस हिसाब से अपना रही है पूरी एक पल चैन मरती जा रही है और करण और मुकेश चल रहे हैं तुम्हारी याद में दो से हम तो ऐसे ही पहनेंगे जैसा बने हैं लेकिन करोड़ों अरबों की ऐड की जरूरत नहीं भाई साहब ने किसी महिलाओं को भड़कने क्या सकता है कुछ कहना चाहता हूं केवल एक सिंपली बात बोलना चाहता हूं जो नग्नता बस स्टैंड तक थी वह अब सानिया पहन रही हैं तो कुछ तो कारण होगा ठीक है हमारी आंखें दोस्त है तो जब संबंध बनते हैं तो क्या इसमें महिलाओं और पुरुषों का एक दूसरे से अपने कीमती होने से ही बनता है सब तो वेस्टर्न कल्चर आत्मसात की है जो भर्ती है कि वह अपनी पूरी सभ्यता संस्कृति लगभग खत्म है और जिस हिसाब से युवा इसे अपना ही है तो उसे कल्चर कल्चर का ज्यादा है और खासकर जो महिलाएं गौर से देखें तुम विदेशी तब देखे जहां लोग बढ़िया पहन पहन के आ संस्कृत के वर्ड से सन में और विभिन्न जगह क्या बोलते हैं संस्कृत में संस्कृत हिंदी बोल रही हैं तो एक कल्चर का पूरा नुकसान है युवक पढ़िए इस बारे में सोचें ना कि हमारे यहां आंखों में दोस्त है कि तुम्हारे आंखों में दो से बजा संपूर्ण की ऐड की जरूरत नहीं भाई साहब उसे किसी अच्छे दोस्त ग्राम स्वरोजगार में लगाएं धन्यवाद

bahut kuch khoya hai yuva peedhi astan panchayat jis hisab se apna rahi hai puri ek pal chain marti ja rahi hai aur karan aur mukesh chal rahe hain tumhari yaad mein do se hum toh aise hi pahnenge jaisa bane hain lekin karodo araboon ki aid ki zarurat nahi bhai saheb ne kisi mahilaon ko bhadkane kya sakta hai kuch kehna chahta hoon keval ek simply baat bolna chahta hoon jo nagnata bus stand tak thi vaah ab saniya pahan rahi hain toh kuch toh karan hoga theek hai hamari aankhen dost hai toh jab sambandh bante hain toh kya isme mahilaon aur purushon ka ek dusre se apne kimti hone se hi baata hai sab toh western culture aatmsat ki hai jo bharti hai ki vaah apni puri sabhyata sanskriti lagbhag khatam hai aur jis hisab se yuva ise apna hi hai toh use culture culture ka zyada hai aur khaskar jo mahilaye gaur se dekhen tum videshi tab dekhe jaha log badhiya pahan pahan ke aa sanskrit ke word se san mein aur vibhinn jagah kya bolte hain sanskrit mein sanskrit hindi bol rahi hain toh ek culture ka pura nuksan hai yuvak padhiye is bare mein sochen na ki hamare yahan aankho mein dost hai ki tumhare aankho mein do se baja sampurna ki aid ki zarurat nahi bhai saheb use kisi acche dost gram swarojgar mein lagaye dhanyavad

बहुत कुछ खोया है युवा पीढ़ी ऑस्टन पंचायत जिस हिसाब से अपना रही है पूरी एक पल चैन मरती जा र

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंडिया युवा पीढ़ी बहुत कुछ नहीं कह सकता लेकिन हां जितना हमारा चित्र आगे बढ़ा है जितना हमारा देश आगे बढ़ने की कोशिश कर रहा है उतना ही उन्होंने कुछ खोया कि आजकल देखो पहले पहले में ज्यादा होता था कल के मुकाबले आर्मी स्कूल जाते थे लेकिन पहले लोग उंगलियों पर हिसाब लगा दिया करते थे आज के टाइम में स्कूल में एडमिशन हो जाता है लेकिन जरूरी हो गई है मैं यह मानता हूं कि यह प्रेशर है और प्रेशर यदि प्रेशर खत्म कर दिया जाए तो क्या अमेरिका है अमेरिका में जो माइंड है इस अवस्था होती सबसे पहले हमारी पैसे वापस होती है और किसी भी बच्चे के माइंड पर प्रेशर डाल दिया जाएगा सब बाल्यावस्था में डिप्रेशन में बदल जाएगा और डिप्रेशन जो है हमें आगे मोटिवेट नहीं कर पाता यदि हम नहीं होंगे तो ऐसा होगा के पहले के मुकाबले आज शायद वह काम ना हो पाए जो फ्री माइंड से कर सकते थे प्रेशर घटने के लिए मोटिवेट जरूरी है और मोटिवेट के लिए रिमाइंड जरूरी है यह पैसा हटाया जाए मानना है मेरा क्या कुछ खोया है लेकिन सब कुछ नहीं खोया बहुत कुछ नहीं कोई ऐसा मेरा मानना है कि यदि हटा दिया जाए कुछ रूप है जो किए जाएं अमेरिका से हम भी उनसे भी आगे बढ़कर

india yuva peedhi bahut kuch nahi keh sakta lekin haan jitna hamara chitra aage badha hai jitna hamara desh aage badhne ki koshish kar raha hai utana hi unhone kuch khoya ki aajkal dekho pehle pehle mein zyada hota tha kal ke muqable army school jaate the lekin pehle log ungaliyon par hisab laga diya karte the aaj ke time mein school mein admission ho jata hai lekin zaroori ho gayi hai yah manata hoon ki yah pressure hai aur pressure yadi pressure khatam kar diya jaaye toh kya america hai america mein jo mind hai is avastha hoti sabse pehle hamari paise wapas hoti hai aur kisi bhi bacche ke mind par pressure daal diya jaega sab baalyaavastha mein depression mein badal jaega aur depression jo hai hamein aage motivate nahi kar pata yadi hum nahi honge toh aisa hoga ke pehle ke muqable aaj shayad vaah kaam na ho paye jo free mind se kar sakte the pressure ghatane ke liye motivate zaroori hai aur motivate ke liye remind zaroori hai yah paisa hataya jaaye manana hai mera kya kuch khoya hai lekin sab kuch nahi khoya bahut kuch nahi koi aisa mera manana hai ki yadi hata diya jaaye kuch roop hai jo kiye jayen america se hum bhi unse bhi aage badhkar

इंडिया युवा पीढ़ी बहुत कुछ नहीं कह सकता लेकिन हां जितना हमारा चित्र आगे बढ़ा है जितना हमार

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