मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी के बीच क्या अंतर है?...


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Vishal Gupta

Astrologer (मार्गदर्शक)

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आपका सवाल है कि मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी के बीच में क्या अंतर होता है पहला सवाल हम आपसे पूछते हैं कि वह प्रेम ही कहा जहां अंतर दिखना शुरू हो जाए यह मुस्लिम और हिंदू प्रेम का क्या मतलब है आप जब किसी बाहरी व्यक्ति या हिंदू या मुस्लिम से मिलते हैं तो आपको कभी ऐसा लगता है कि यह अलग तरह का प्रेम कराई अलग तरह का प्रेम कर रहा है और वैसे भी जिस प्रकार आने का कोई अलग अंतर नहीं होता है पानी जो शुद्ध पानी जो होता है उसका स्वाद साधारण ही होता है और यह अलग बात है कि बारिश के पानी का अंतर हो सकता है लेकिन अगर शुद्ध पानी है तो अंतर नहीं होगा वह उसके वह कहीं अंतर आपको दिखाई नहीं पड़ेगा आप चाहे जिस संस्थान का पानी पीते अगर वह पानी में शुद्धता अधिक होगी चिंता की मात्रा अधिक होगी तो वह आपकी शरीर में जाकर फायदा करेगा नंगे इंसान करें उसी प्रकार अगर शुद्ध प्रेम होगा सत्य प्रेम होगा वह हिंदू के द्वारा दिया गया हो चाहे मुस्लिम के द्वारा और एक बात और आपको हम बता दें हिंदू और मुस्लिम आपने आप शब्द जो दिया हुआ है तो यह जान लीजिए कि आप बहुत सारे हिंदू के घर में चले जाइए आपको लोग झगड़ा करते हुए बहस करते हुए बहुत से लोग मिल जाएंगे इसका मतलब प्रेम को जानते नहीं समझते नहीं और बहुत सारे ऐसे मुस्लिम परिवार भी आपको मिल जाएंगे जहां पर लोग एक दूसरे से बहस जहां पर दूसरे से लोग बहस कर झगड़ा करते हैं लड़ाई करते हैं तो समस्या क्या है समस्या प्रेम को जानने में है लोग प्रेम को समझ ही नहीं पाए और जो समझ जाते हैं उनके बीच में समझते हैं कम होती है और हमेशा ध्यान रखें कि प्रेम जहां होता है वहां विश्वास होता है वहां पर एक दूसरे के प्रति एक सच्ची भावना निष्ठा निष्ठा की भावना होती है और प्रेम देने का कार्य है प्रेम एक कर्म है जो किया जाता है जो दिया जाता है ना कि प्रेम एक एक एहसास है जो लिया जाता हो तो सबसे पहले इस आपको विशेषकर जानने का प्रयास करें कि हिंदू-मुस्लिम इसको डिवाइड मिलकर के बन्ना प्रेम को नहीं समझ पाएंगे अगर आपने यह शब्द लगा दिया कि हिंदू क्या है हिंदू का प्रेम और मुस्लिम का प्रेम और इस जाति के लोग उस जाति के लोग कैसे होते हैं अगर आपने आईडेंटिफाई करना शुरू किया प्रेम को तो कभी जीवन में सौ परसेंट आफ प्रेम को समझ ही नहीं पाए और मेरा यह मानना है जिसने यह सवाल पूछती है कि हिंदू का प्रेम मुस्लिम का प्रेम कैसा होता है तो समझ जाओ प्रेम को समझ नहीं पाया वह प्रेम को कभी समझ ही नहीं पाया जिसने इस प्रकार का अंतर दे दिया हो कि प्रेम का अर्थ क्या होता है इस प्रकार हवा चलती है भाई चलती है पानी जब हम पीते हैं तो हवा पानी जल आकाश अग्नि यह किसी इंसान के बीच का अंतर नहीं देखता तो उसको अपने हिसाब से अपना कार्य देती है जैसे अग्नि है उसको कोई मुस्लिम से हिंदू है उसका हाथ जलना है पानी है कोई भी व्यक्ति पिएगा या ना हाय का तो उसके शरीर पर वैसा ही होगा तो उसी प्रकार प्रेम है अगर आपने सबके प्रेम को स्थापित किया है अपने हृदय में तो आपको खूब ऐसी ही अनुभूति होगी जैसी होनी चाहिए और अगर आपने प्रेम के नाम पर कुछ और या प्रेम के नाम पर एक बेवकूफी को समझा कि लोग समझते हैं कि प्रेम का मतलब होता है कुर्बान हो जाना प्रेम का मतलब होता है कि प्रेम पाने के लिए प्रेमिका को पाने के लिए किसी भी हद तक चले जाना तो यह प्रेम थोड़ी है और दूसरी बात प्रेम का वास्तविक अर्थ होता है कि जो व्यक्ति अपने माता-पिता और अपने प्रेमी या प्रेमिका के बीच में अंतर ना करता हो वह प्रेम है कुछ लोग क्या सोचते हैं कि अगर उनके जीवन में प्रेमी-प्रेमिका आ जाते हैं तो माता-पिता से दूर होना शुरू हो प्रेम नहीं था वह मात्र एक आकर्षण था तो पहले ही तो यह समझ आया कि प्रेम कभी पक्षपात नहीं करता है 220 के दो बत्ती के बीच का अंतर नहीं देखता है कि माता-पिता को अलग तरह का प्रेम दे रहा है और कोई पत्नियां पति को अलग तरह का प्रेम दे रहा वह प्रेम नहीं है वह मात्र एक आकर्षण है उसके प्रति आकर खुशियों के प्रति आकर्षण जो सामने वाला हमें दे रहा है और मैं माता-पिता से नहीं मिलाया अपने प्रेमिका प्रेमी से नहीं मिला तो प्रेम कभी अंतर नहीं होता है और एक चीज सबसे बड़ी जो प्रेम करते हैं माता-पिता और अनजान के बीच में भी अंतर नहीं देखते जो व्यक्ति वास्तविक प्रेम करते हैं वह अपने माता-पिता और किसी अनजान के बीच में भी अंतर नहीं देख पाते उनको लगता कि दोनों एक ही तरह के लोग हैं तू बातचीत प्रेम वह होता है लेकिन जो जो व्यक्ति केवल अपने माता-पिता से प्रेम करता हो या अपने बहन भाई से प्रेम का तो या अपने पति पत्नी से प्रेम करता हूं लेकिन अनजान के लिए एकदम एकदम दयालु ना होता हो तो वह प्रेम नहीं है वह अपनी इच्छा की पूर्ति के लिए जो मिलने वाला व्यक्ति है उससे उसके पति उसका आकर्षण है जैसे क्या होता है कि हमें परिवार से सुख प्राप्त होता है परिवार के लोगों से में सुख प्राप्त होता है उनकी सेवा प्राप्त होती है उनके द्वारा बनाया हुआ भोजन प्राप्त होता है उनकी सेवा प्राप्त होती है तो हम उन से प्रेम करना शुरू कर देते हैं अनजान से मुझसे प्रेम नहीं करते तो वह प्रेम थोड़ी है वह तो जिस व्यक्ति से आप को आप आपका काम निकल रहा है आप उसको परिंदे रहे हो तो वह प्रेम नहीं है वह मात्र एक अपनी इच्छा पूरी करने का साधन बना लिया गया तो प्रेम का वास्तविक अर्थ नहीं होता है जो व्यक्ति अनजान और अपनों के बीच में अंतर ना देखता हूं जिसके लिए दोनों व्यक्ति समय बराबर हो उसके बाद आवश्यकता है कहीं-कहीं इंसान को मजबूर करती हैं अपनों के प्रति ज्यादा हमारा अनुभूति रखने में लेकिन जहां पर बड़े चीजों की बात आती है वहां पर इंसान को अंतर नहीं करना चाहिए उसके बाद जो प्रेम करता है वह किसी इंसान से प्यार करता है ना कि उसकी अच्छाई से प्यार करता है जो किसी इंसान की अच्छाई से प्रेम कर रहा है वह अच्छाई से प्रेम कर रहा है ना कि इंसान से प्रेम कर रहा है ओके अच्छा जी से प्रेम करने वाला व्यक्ति भाई को स्वीकार नहीं कर पाता स्कूल अगर उसके अगर उस व्यक्ति को दूसरा की में हल्की सी बुराई तक जाती है तो वह उस बात को लेकर बैठ जाता है या बैठ जाती है तो यह प्रेम है यह माता अच्छाई के प्रति आकर्षण है और जगह की प्रेम करते हैं ना वह सामने वाले की अच्छाई को भी प्रेम करते हैं और बुराई को भी संभव स्वीकार करते हैं तो वह प्रेम होता है और प्रेम करने वाला व्यक्ति माह अवश्य करता है भीतर से माफ करता है यह की छड़ी माफ कर दे वह बात दिमाग में रख कर बैठा रहे और मौका आने पर फिर उस बात का बदला ले वह प्रेम नहीं होता है और वह माफ नहीं कर सकता जिस व्यक्ति का दिल बड़ा होता है जो व्यक्ति अपने ऊपर समस्याओं को लेकर दूसरे व्यक्ति को प्रेम देने की शक्ति रखता हो वही प्रेम और ध्यान रहे प्रेम लेने का नहीं देने का नाम है इसीलिए जो व्यक्ति प्रेमी होते हैं वह व्यक्ति सत्य के रास्ते पर भी चलते हैं विश्वास होता है जहां प्रेम तामा विश्वास भी होता है इसलिए हिंदू मुस्लिम के बीच में इसका अंतर्नाद 1 हिंदुओं में बहुत सारे ऐसे लोग हैं जो आतंक मचाए हुए हैं और मुस्लिम में भी ऐसे लोग हैं जो अपने परिवार में आतंक मजाक के बैठे हुए हैं तो प्रेमी और प्रेमिका से यहां पर कोई अंतर नहीं है कि आप किसी कैटेगरी में इसको डिवाइड करते हैं प्रेम प्रेम होता है वह चाहे हिंदू का हो मुस्लिम का सिक्का हो इसाई का हो जानवर का हो या किसी का भी हो प्रेम प्रेम होता है अगर कोई ऑडियो अच्छा लगे तो कमेंट लाइक करें कुछ भी सवाल के लिए आप मुझसे सवाल पूछ सकते हैं धन्यवाद

aapka sawaal hai ki muslim premi aur hindu premi ke beech me kya antar hota hai pehla sawaal hum aapse poochhte hain ki vaah prem hi kaha jaha antar dikhana shuru ho jaaye yah muslim aur hindu prem ka kya matlab hai aap jab kisi bahri vyakti ya hindu ya muslim se milte hain toh aapko kabhi aisa lagta hai ki yah alag tarah ka prem karai alag tarah ka prem kar raha hai aur waise bhi jis prakar aane ka koi alag antar nahi hota hai paani jo shudh paani jo hota hai uska swaad sadhaaran hi hota hai aur yah alag baat hai ki barish ke paani ka antar ho sakta hai lekin agar shudh paani hai toh antar nahi hoga vaah uske vaah kahin antar aapko dikhai nahi padega aap chahen jis sansthan ka paani peete agar vaah paani me shuddhta adhik hogi chinta ki matra adhik hogi toh vaah aapki sharir me jaakar fayda karega nange insaan kare usi prakar agar shudh prem hoga satya prem hoga vaah hindu ke dwara diya gaya ho chahen muslim ke dwara aur ek baat aur aapko hum bata de hindu aur muslim aapne aap shabd 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आपका सवाल है कि मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी के बीच में क्या अंतर होता है पहला सवाल हम आ

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

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मुस्लिम प्रेमी प्रेमी अपने इस्लाम धर्म के लिए कटनी मरने को तैयार रहते हैं और हिंदू प्रेमी लंबे होते हैं फिर भी वह अपने धर्म के प्रति इतने जागरूक नहीं हैं उनकी नम्रता का ही फायदा उठाकर मुसलमान उन्हें परेशान करते आ रहे हैं उन्हें थक जा रहे हैं

muslim premi premi apne islam dharm ke liye katni marne ko taiyar rehte hain aur hindu premi lambe hote hain phir bhi vaah apne dharm ke prati itne jagruk nahi hain unki namrata ka hi fayda uthaakar musalman unhe pareshan karte aa rahe hain unhe thak ja rahe hain

मुस्लिम प्रेमी प्रेमी अपने इस्लाम धर्म के लिए कटनी मरने को तैयार रहते हैं और हिंदू प्रेमी

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Sefali

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मुझे नहीं लगता मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी में कोई अंतर होता है क्योंकि आप जब किसी को प्रेम करते हैं आप उनकी जाति धर्म और दे को देखकर प्यार नहीं करते क्योंकि प्यार एक इमोशन इमोशन है एक भावना है जो किसी के साथ जुड़े इमोशन कनेक्ट होती है तो इस में जाति-धर्म पौधे का कुछ भी लेना देना नहीं है तो मुझे नहीं लगता हिंदू प्रेमी में और मुस्लिम प्रेमी में कोई अंतर होता है

mujhe nahi lagta muslim premi aur hindu premi mein koi antar hota hai kyonki aap jab kisi ko prem karte hain aap unki jati dharm aur de ko dekhkar pyar nahi karte kyonki pyar ek emotion emotion hai ek bhavna hai jo kisi ke saath jude emotion connect hoti hai toh is mein jati dharm paudhe ka kuch bhi lena dena nahi hai toh mujhe nahi lagta hindu premi mein aur muslim premi mein koi antar hota hai

मुझे नहीं लगता मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी में कोई अंतर होता है क्योंकि आप जब किसी को प

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देखें मेरी सोच पर यहां पर थोड़ी सी अलग है मुझे नहीं लगता कि मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी में कोई भी अंतर होता है अगर आप किसी से सच्चे दिल का प्यार करते हैं या आप किसी के साथ आपका थोड़ा प्यार सच्चा नहीं है उन दोनों में जरूर फर्क हो सकता है पर एक मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी में कुछ फर्क नहीं होता अगर आप किसी को प्रेम करते हैं तो वह एक दिल की बात ना होती है वह आपका अंतर्गत एक पर्सनालिटी होती है जहां अंतर आता है पर उसमें हिंदू या मुस्लिम होने में कोई ज्यादा फर्क नहीं होता है हां थोड़ा कल्चर का जरूर थोड़ा फर्क है जिसे मुसलमानों के अंदर दो तीन शादियां करना हो जाता है पर हिंदुओं में ऐसा बिल्कुल भी इसको आप मानते हैं तो जहां थोड़ा बहुत फर्क आ जाता है पर अगर देखा जाए प्रेमी इधर की बात हुई जाए तो कोई ज्यादा फर्क नहीं होता कहां है अगर कुछ ऐसे मुस्लिम प्रेमी होते हैं जो अपनी बीवियों को सही से नहीं रखते किसी एक को अच्छे से नहीं टाइप करते 34 विलियम लाइट है वहीं पर कई ऐसे हिंदू प्रेमी भी होते हैं जो फेयर चलाते हैं यह जो अच्छे से काम नहीं कर सकता मुझे पता है कि यह किस तरीके का प्रयोग करते हैं अपनी प्रेमिका से उस पर निर्भर करता है ना कि आपकी हिंदू और मुस्लिम होने पर

dekhen meri soch par yahan par thodi si alag hai mujhe nahi lagta ki muslim premi aur hindu premi mein koi bhi antar hota hai agar aap kisi se sacche dil ka pyar karte hai ya aap kisi ke saath aapka thoda pyar saccha nahi hai un dono mein zaroor fark ho sakta hai par ek muslim premi aur hindu premi mein kuch fark nahi hota agar aap kisi ko prem karte hai toh vaah ek dil ki baat na hoti hai vaah aapka antargat ek personality hoti hai jaha antar aata hai par usme hindu ya muslim hone mein koi zyada fark nahi hota hai haan thoda culture ka zaroor thoda fark hai jise musalmanon ke andar do teen shadiyan karna ho jata hai par hinduon mein aisa bilkul bhi isko aap maante hai toh jaha thoda bahut fark aa jata hai par agar dekha jaaye premi idhar ki baat hui jaaye toh koi zyada fark nahi hota kahaan hai agar kuch aise muslim premi hote hai jo apni beeviyon ko sahi se nahi rakhte kisi ek ko acche se nahi type karte 34 william light hai wahi par kai aise hindu premi bhi hote hai jo fair chalte hai yah jo acche se kaam nahi kar sakta mujhe pata hai ki yah kis tarike ka prayog karte hai apni premika se us par nirbhar karta hai na ki aapki hindu aur muslim hone par

देखें मेरी सोच पर यहां पर थोड़ी सी अलग है मुझे नहीं लगता कि मुस्लिम प्रेमी और हिंदू प्रेमी

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Ishita Seth

Obstinate Programmer

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देखें मुझे ऐसा लगता है कि अगर आप किसी से प्रेम करते हैं किसी को सच्चे दिल से चाहते हैं तो यह बिल्कुल फर्क नहीं पड़ता कि उसका रिलीजिंग क्या है मतलब प्रेम का और रिलीजन का आपस में कोई लेना देना नहीं है चाहे वह हिंदू प्रेमी हो चाहे वह मुस्लिम प्रेमी हो या किसी और रिलीजिंग आप रेडी हो प्यार तो आखिर प्यार है इसमें दिल्ली जिनका इसमें का स्तर में कीट का कुछ लेना देना नहीं है अगर आप किसी से प्रेम करते हैं आप उससे वैसे ही उससे उसी तरह से बर्ताव करेंगे आपसे प्यार से रहेंगे आप उसका ख्याल रखेंगे आप उसके सुख दुख में उसका साथ रहेंगे फीलिंग्स है जो एक इंसान में हिंदू की यही करेगा और मुस्लिम भी वही करेगा मुश्किल भी अपने प्रेमी का साथ देगा अपने प्रेमी की शेयर करेगा और हिंदू भी यही करेगा तो इसमें कुछ डिफरेंस मुझे नहीं लगता कि कुछ

dekhen mujhe aisa lagta hai ki agar aap kisi se prem karte hain kisi ko sacche dil se chahte hain toh yah bilkul fark nahi padta ki uska rilijing kya hai matlab prem ka aur religion ka aapas mein koi lena dena nahi hai chahen vaah hindu premi ho chahen vaah muslim premi ho ya kisi aur rilijing aap ready ho pyar toh aakhir pyar hai isme delhi jinka isme ka sthar mein kit ka kuch lena dena nahi hai agar aap kisi se prem karte hain aap usse waise hi usse usi tarah se bartaav karenge aapse pyar se rahenge aap uska khayal rakhenge aap uske sukh dukh mein uska saath rahenge feelings hai jo ek insaan mein hindu ki yahi karega aur muslim bhi wahi karega mushkil bhi apne premi ka saath dega apne premi ki share karega aur hindu bhi yahi karega toh isme kuch difference mujhe nahi lagta ki kuch

देखें मुझे ऐसा लगता है कि अगर आप किसी से प्रेम करते हैं किसी को सच्चे दिल से चाहते हैं तो

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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विजय जी चाहे प्रेमी मुस्लिम हो हिंदू हो क्रिश्चियन हो या सुख हो या किसी और देश का हो किसी और प्लांट का हो मुझे नहीं लगता कि नहीं विष्णु को भी फरक होता है कि प्यार एक ऐसी चीज है जिसको कभी भाषाएं धर्म जाति देश को भी कोई बात नहीं पाया तुझे प्यार को कोई बात नहीं पाया जब प्यार सबसे पवित्र चीज इसे बोलते हैं तू प्रेमी में क्या डिफरेंस हो सकता है आप सोचिए ऐसा तो नहीं होगा ना सर जी जो हिंदू प्रेमी है वह अपनी गर्लफ्रेंड को ज्यादा प्यार करेगा या अपनी प्रेमिका को सागर प्यार करेगा और मुस्लिम प्रेमी कम करेगा यह तो पॉसिबल नहीं है तो हिंदू प्रेमी मुस्लिम पर भी में ऐसा कोई खास फर्क खास तो क्या मेरे साथ तो तो कोई भी फर्क नहीं होता उतना ही प्यार कोई जनवरी हिंदू प्रेमी भी कर सकता जितना ही कोई मुस्लिम प्रेमी करेगा तो ऐसा कुछ फर्क मेरे ध्यान में तो है नहीं

vijay ji chahen premi muslim ho hindu ho Christian ho ya sukh ho ya kisi aur desh ka ho kisi aur plant ka ho mujhe nahi lagta ki nahi vishnu ko bhi farak hota hai ki pyar ek aisi cheez hai jisko kabhi bhashayen dharm jati desh ko bhi koi baat nahi paya tujhe pyar ko koi baat nahi paya jab pyar sabse pavitra cheez ise bolte hain tu premi mein kya difference ho sakta hai aap sochiye aisa toh nahi hoga na sir ji jo hindu premi hai vaah apni girlfriend ko zyada pyar karega ya apni premika ko sagar pyar karega aur muslim premi kam karega yah toh possible nahi hai toh hindu premi muslim par bhi mein aisa koi khaas fark khaas toh kya mere saath toh toh koi bhi fark nahi hota utana hi pyar koi january hindu premi bhi kar sakta jitna hi koi muslim premi karega toh aisa kuch fark mere dhyan mein toh hai nahi

विजय जी चाहे प्रेमी मुस्लिम हो हिंदू हो क्रिश्चियन हो या सुख हो या किसी और देश का हो किसी

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हिंदू और मुस्लिम के बीच का अंतर ;

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