पूजा का सही समय क्या है?...


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पूजा का सही समय प्रातः ब्रह्मवर्त 3:30 से 4:30 के बीच रहता है इसे शुभ माना गया है अभी तो किसी व्यक्ति को का कुछ सुख कोई 6:00 बजे का जाता है उस व्यक्ति को 10:00 बजे के अंदर 10 पूजा करनी चाहिए ब्रह्म मुहूर्त अमृतवेला घर में पूजा करने के बाद कई गुना पल रहे होता है और इस घड़ी में नाम जप ध्यान करने का फल कई गुना होता है इसलिए पूजा करने का सही समय ब्रह्म मुहूर्त में अभी पूजा कर सकते हैं और यही श्रेष्ठ समय है

puja ka sahi samay pratah brahmavart 3 30 se 4 30 ke beech rehta hai ise shubha mana gaya hai abhi toh kisi vyakti ko ka kuch sukh koi 6 00 baje ka jata hai us vyakti ko 10 00 baje ke andar 10 puja karni chahiye Brahma muhurt amritvela ghar me puja karne ke baad kai guna pal rahe hota hai aur is ghadi me naam jap dhyan karne ka fal kai guna hota hai isliye puja karne ka sahi samay Brahma muhurt me abhi puja kar sakte hain aur yahi shreshtha samay hai

पूजा का सही समय प्रातः ब्रह्मवर्त 3:30 से 4:30 के बीच रहता है इसे शुभ माना गया है अभी तो क

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Amit vishwakarma

Psychologist

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Vedachary Pathak Singrauli

सनातन सुरक्षा परिषद् संस्थापक

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हेलो दोस्त नमस्कार देखिए आपका सवाल है पूजा का सही समय क्या है हालांकि देखिए पूजन आपके पास जब भी समय मिलता है एक दुआ है एक घड़ी आधी घड़ी आधी में कछुआ तुलसी संगत साधु की कटे कोटि अपराध गाने का तात्पर्य है 1 घंटे आधे घंटे 1 मिनट 1 सेकंड जब भी आपको जितना वक्त आपके कामों से बसता है आपकी दिनचर्या से बसता है आप ईश्वर पूजन कर सकते हैं और यहां पर समय की कोई पाबंदी नहीं है याद रहे लेकिन शास्त्रों में अगर आप सभी दी को खो जाएंगे तो पूजा के 45 समय जरूर बताए गए जैसे एक प्रातः की पूजा एक मध्यान्ह की पूजा एक संध्या वंदन एक शरणार्थी और एक अधूरा ट्री जो कि रात्रि 12:00 बजे के बाद की पूजा कही गई देखी पूजन का आज के समय में दैनिक दिनचर्या में सही समय हम तो सुबह का ही मानते हैं सूर्योदय से पहले आप पूजन को प्रारंभ करें और सूर्योदय होने के बाद सूर्य को जल अर्पित करके तीन बार अपनी पूजन को आप बंद कर सकते हैं और पूरा पूरे दिन में आप अपने कामों की ओर जा सकते हैं समय मिले तो आप लौट कर शाम के वक्त 110 से 15 मिनट का समय निकाल करके जरूर संध्या वंदन भी कर ले तो सुबह और शाम की पूजा विशेष तौर पर महत्वपूर्ण और अच्छा समय कहां गया है धन्यवाद

hello dost namaskar dekhiye aapka sawaal hai puja ka sahi samay kya hai halaki dekhiye pujan aapke paas jab bhi samay milta hai ek dua hai ek ghadi aadhi ghadi aadhi mein kachua tulsi sangat sadhu ki kate koti apradh gaane ka tatparya hai 1 ghante aadhe ghante 1 minute 1 second jab bhi aapko jitna waqt aapke kaamo se basta hai aapki dincharya se basta hai aap ishwar pujan kar sakte hai aur yahan par samay ki koi pabandi nahi hai yaad rahe lekin shastron mein agar aap sabhi di ko kho jaenge toh puja ke 45 samay zaroor bataye gaye jaise ek pratah ki puja ek madhyanh ki puja ek sandhya vandan ek sharanarthi aur ek adhura tree jo ki ratri 12 00 baje ke baad ki puja kahi gayi dekhi pujan ka aaj ke samay mein dainik dincharya mein sahi samay hum toh subah ka hi maante hai suryoday se pehle aap pujan ko prarambh kare aur suryoday hone ke baad surya ko jal arpit karke teen baar apni pujan ko aap band kar sakte hai aur pura poore din mein aap apne kaamo ki aur ja sakte hai samay mile toh aap lot kar shaam ke waqt 110 se 15 minute ka samay nikaal karke zaroor sandhya vandan bhi kar le toh subah aur shaam ki puja vishesh taur par mahatvapurna aur accha samay kahaan gaya hai dhanyavad

हेलो दोस्त नमस्कार देखिए आपका सवाल है पूजा का सही समय क्या है हालांकि देखिए पूजन आपके पास

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Vivek Shukla

Life coach

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लेकिन मित्र पूजा का सही समय सूर्योदय होता है क्योंकि उसी समय सबसे ज्यादा भगवान की पूजा की जाती है उस समय देवताओं को आराधिका अपने जल देना का प्रयोग करें उससे आपको मन को शांति क्योंकि सूरत सुबह आपका अपमान होता है आप हर माने कार्य में निवृत हो जा के लिए शुरुआत करते हैं कैसे मैं अपने आराध्य को याद करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि सबसे पूजनीय होगा आप अपने माने सुबह उठते ही भगवान को मानने यहां स्नान करने के बाद जैसे सुबह के सूर्योदय का पहली किरण आपके घर पर पड़े आप उस समय भगवान को आराध्य को जल्द ही तो ज्यादा बेहतर होगा ओके बाय

lekin mitra puja ka sahi samay suryoday hota hai kyonki usi samay sabse zyada bhagwan ki puja ki jati hai us samay devatao ko aradhika apne jal dena ka prayog karein usse aapko man ko shanti kyonki surat subah aapka apman hota hai aap har maane karya mein nivrit ho ja ke liye shuruat karte hain kaise main apne aradhya ko yaad karna sabse shreshtha mana jata hai kyonki sabse pujaniya hoga aap apne maane subah uthte hi bhagwan ko manne yahan snan karne ke baad jaise subah ke suryoday ka pehli kiran aapke ghar par pade aap us samay bhagwan ko aradhya ko jald hi toh zyada behtar hoga ok by

लेकिन मित्र पूजा का सही समय सूर्योदय होता है क्योंकि उसी समय सबसे ज्यादा भगवान की पूजा की

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Rajesh Kumar Pandey

Career Counsellor

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लेकिन उस तक पहुंचने की पूजा का सही समय क्या है तो मैं बता दूं पूजा का जो सच है वह बताएं और बाकी बताओ शांत होता है और जो भाई हुए वह सच हो जाती है रात भर क्योंकि रात में गाड़ियां संबंध रखती है तो साफ हो हवा को मिलता है डालने पर पूजा करने पर जो भी है कि दिन में दो चलो 10:00 बजे पूजा पूजा पूजा के स्थान आगरा पहुंचे से जिंदगी जीनी है तो फिर सुबह होती है पवन की पूजा कीजिए और बहुत सही हो जाएगी

lekin us tak pahuchne ki puja ka sahi samay kya hai toh main bata doon puja ka jo sach hai vaah bataye aur baki batao shaant hota hai aur jo bhai hue vaah sach ho jaati hai raat bhar kyonki raat mein gadiyan sambandh rakhti hai toh saaf ho hawa ko milta hai dalne par puja karne par jo bhi hai ki din mein do chalo 10 00 baje puja puja puja ke sthan agra pahuche se zindagi gini hai toh phir subah hoti hai pawan ki puja kijiye aur bahut sahi ho jayegi

लेकिन उस तक पहुंचने की पूजा का सही समय क्या है तो मैं बता दूं पूजा का जो सच है वह बताएं और

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Siyaram Dubey

YouTuber/Spiritual Person/Thinker/Social-media Activist

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पूजा का सही समय अगर कहा जाए तो सुबह में 4:00 बजे से शुरू होकर सुबह के 8:00 बजे तक सबसे सर्वोपरि पूजा माना जाता है क्योंकि ब्रह्म मुहूर्त में जो भी पूजा होता है उसका फल कई गुना ज्यादा बढ़ जाता है वैसे आप अपने समय अनुसार किसी भी समय पूजा कर सकते हैं

puja ka sahi samay agar kaha jaaye toh subah mein 4 00 baje se shuru hokar subah ke 8 00 baje tak sabse sarvopari puja mana jata hai kyonki Brahma muhurt mein jo bhi puja hota hai uska fal kai guna zyada badh jata hai waise aap apne samay anusaar kisi bhi samay puja kar sakte hain

पूजा का सही समय अगर कहा जाए तो सुबह में 4:00 बजे से शुरू होकर सुबह के 8:00 बजे तक सबसे सर्

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जय श्री राम आपका प्रश्न बड़ा ही सुंदर और ज्ञानवर्धक दोनों प्रकार का है आपने पूछा की पूजा का सही समय क्या है तो वैसे तो लगभग सभी को पता होता है कि पूजा का सही समय क्या है परंतु फिर भी हमें यह ज्ञात होना चाहिए की पूजा कितने प्रकार की होती है भारत में लगभग तीन प्रकार की भुजाएं सनातन धर्म में मानी गई है एक सुबह की एक खाना खाने से पहले दोपहर की और उसके बाद में श्याम कि इन तीनों संध्या में प्रत्येक परिवार के लिए एक संध्या करनी अति आवश्यक है और वह संध्या है श्याम की संध्या वैसे बहुत से घरों में सुबह की संख्या भी होती है परंतु श्याम की संध्या हर घर में होनी चाहिए यह हमारा हिंदू धर्म और हमारा सनातन धर्म विस्तृत बताता है हमें अब आपका सवाल कि क्या पूजा का सही समय क्या है सुबह की संध्या का सही समय है 5:00 या 5:00 बजे से थोड़ा पहले और 40 मिनट की संध्या हो सकती है और शाम की संध्या शाम को गर्मियों में 7:00 बजे से लेकर 7:40 या 7:45 तक संध्या कर सकते हैं यह समय बहुत ही ज्यादा मानसिक शांति पर दो होता है और प्रत्येक गर्मी शाम की संध्या होनी चाहिए जय श्री राम

jai shri ram aapka prashna bada hi sundar aur gyanavardhak dono prakar ka hai aapne puchha ki puja ka sahi samay kya hai toh waise toh lagbhag sabhi ko pata hota hai ki puja ka sahi samay kya hai parantu phir bhi humein yeh gyaat hona chahiye ki puja kitne prakar ki hoti hai bharat mein lagbhag teen prakar ki bhujaen sanatan dharm mein maani gayi hai ek subah ki ek khana khane se pehle dopahar ki aur uske baad mein shyam ki in tatvo sandhya mein pratyek parivar ke liye ek sandhya karni ati aavashyak hai aur wah sandhya hai shyam ki sandhya waise bahut se gharon mein subah ki sankhya bhi hoti hai parantu shyam ki sandhya har ghar mein honi chahiye yeh hamara hindu dharm aur hamara sanatan dharm vistrit batata hai humein ab aapka sawal ki kya puja ka sahi samay kya hai subah ki sandhya ka sahi samay hai 5:00 ya 5:00 baje se thoda pehle aur 40 minute ki sandhya ho sakti hai aur shaam ki sandhya shaam ko garmiyo mein 7:00 baje se lekar 7:40 ya 7:45 tak sandhya kar sakte hain yeh samay bahut hi zyada mansik shanti par do hota hai aur pratyek garmi shaam ki sandhya honi chahiye jai shri ram

जय श्री राम आपका प्रश्न बड़ा ही सुंदर और ज्ञानवर्धक दोनों प्रकार का है आपने पूछा की पूजा

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अपनी पर्सनल पूजा का जो सही समय है वह है आपके 5:00 से 6:00 के बीच का 5:00 से 6:00 के बीच में पूजा करिए सबसे ज्यादा फल मिलेगा आपको बहुत ज्यादा मन में ऊर्जा एकत्रित होगी बहुत ही ज्यादा आप ऊर्जावान रहोगे आपका जो दिमाग इस तरह वह बहुत ही अच्छा चलेगा वही पर रहेगा मन में शांति रहेगी आपके दिमाग में किसी प्रकार का दुख लिस्ट नहीं होगा तो 5 से 6 के बीच का जो समय है वह सूर्योदय का समय होता है जैसी आप की भी अपील की बचत से धीरे-धीरे होता रहेगा

apni personal puja ka jo sahi samay hai vaah hai aapke 5 00 se 6 00 ke beech ka 5 00 se 6 00 ke beech me puja kariye sabse zyada fal milega aapko bahut zyada man me urja ekatrit hogi bahut hi zyada aap urjavan rahoge aapka jo dimag is tarah vaah bahut hi accha chalega wahi par rahega man me shanti rahegi aapke dimag me kisi prakar ka dukh list nahi hoga toh 5 se 6 ke beech ka jo samay hai vaah suryoday ka samay hota hai jaisi aap ki bhi appeal ki bachat se dhire dhire hota rahega

अपनी पर्सनल पूजा का जो सही समय है वह है आपके 5:00 से 6:00 के बीच का 5:00 से 6:00 के बीच मे

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Ramandeep Singh

Waheguru industry

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पूजा का सही समय हम जब ईश्वर परमात्मा की पूजा करते हैं तो उसको फिर समय चक्र में नहीं बांधना समय अगर चक्र में बांध लेंगे तो फिर पूजा सिर्फ समय की हो गई ईश्वर कि नहीं पूजा का कोई भी समय जो है आप किसी भी समय कर सकते हैं उसका कोई भी समय निश्चित नहीं है अभी अगर इस बात पर आ जाएगी बात की नमाज जो है वह पांच वक्त की पढ़ते हैं तो एक आम इंसान जो है वह पांच वक्त की नमाज पढ़ता है लेकिन एक जो संत है जो पीर पैगंबर है वह हर वक्त नमाज पढ़ते हैं हर वक्त उनकी जबान पर अल्लाह का नाम होता है हर वक्त वह खुदा की नमाज में विलीन रहते हैं एक इंसान को फिर भी दिया है कि चल जाने दे छोड़ दो पांच वक्त की नमाज पढ़ ले इसी तरीके से पूजा हर वक्त होनी चाहिए हर वक्त हमारे मुंह से राम हमारे मुंह से अल्लाह हमारे पंसेर आप हमारे मुंह से अल्लाह वाहेगुरु खुदा का नाम उच्चारण होना ही चाहिए धन्यवाद

puja ka sahi samay hum jab ishwar paramatma ki puja karte hain toh usko phir samay chakra me nahi bandhana samay agar chakra me bandh lenge toh phir puja sirf samay ki ho gayi ishwar ki nahi puja ka koi bhi samay jo hai aap kisi bhi samay kar sakte hain uska koi bhi samay nishchit nahi hai abhi agar is baat par aa jayegi baat ki namaz jo hai vaah paanch waqt ki padhte hain toh ek aam insaan jo hai vaah paanch waqt ki namaz padhata hai lekin ek jo sant hai jo pir paigambar hai vaah har waqt namaz padhte hain har waqt unki jaban par allah ka naam hota hai har waqt vaah khuda ki namaz me vileen rehte hain ek insaan ko phir bhi diya hai ki chal jaane de chhod do paanch waqt ki namaz padh le isi tarike se puja har waqt honi chahiye har waqt hamare mooh se ram hamare mooh se allah hamare panser aap hamare mooh se allah vaheguru khuda ka naam ucharan hona hi chahiye dhanyavad

पूजा का सही समय हम जब ईश्वर परमात्मा की पूजा करते हैं तो उसको फिर समय चक्र में नहीं बांधना

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Raja Yaduvanshi

Business Owner

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके क्वेश्चन के रिकॉर्डिंग की पूजा का सही समय क्या है ऐसे तो पूजा में कोई परफेक्ट टाइमिंग निश्चित नहीं होता है बट हमारा दिल हमारी आत्मा 2602 जब भी हमारा मन शांत हो उस टाइम हम पूजा कर सकते हैं लेकिन फिर भी एक परफेक्ट टाइमिंग की बात की जाए तो मॉर्निंग का टाइम सबसे बेस्ट होता है कि मॉर्निंग टाइम हमारा दिन का स्टार्टअप होता है उस टाइप सभी जगह शांति होती है एक अच्छा वातावरण होता है और हमारा मन भी शांत होता है और हमारी आत्मा की शुद्धि होती है तो सबसे परफेक्ट टाइमिंग होता है मॉर्निंग में टाइम और इस टाइम पूजा करना सबसे बेस्ट होता है थैंक यू

aapke question ke recording ki puja ka sahi samay kya hai aise toh puja me koi perfect timing nishchit nahi hota hai but hamara dil hamari aatma 2602 jab bhi hamara man shaant ho us time hum puja kar sakte hain lekin phir bhi ek perfect timing ki baat ki jaaye toh morning ka time sabse best hota hai ki morning time hamara din ka startup hota hai us type sabhi jagah shanti hoti hai ek accha vatavaran hota hai aur hamara man bhi shaant hota hai aur hamari aatma ki shudhi hoti hai toh sabse perfect timing hota hai morning me time aur is time puja karna sabse best hota hai thank you

आपके क्वेश्चन के रिकॉर्डिंग की पूजा का सही समय क्या है ऐसे तो पूजा में कोई परफेक्ट टाइमिंग

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yogi varunanand

योगाचार्य

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पूजा का सबसे अच्छा समय जब हमारा मन शुद्ध होता है साफ होता है पवित्र होता है जब उसमें बहुत सारे संस्कार कुसंस्कार जमे हुए नहीं होते जब उसे सहज ही ईश्वर से जोड़ा जा सकता है वह समय प्रात कालीन होता है अमृतवेला होता है जिस समय सूर्योदय हो तो होता है उससे भी कुछ समय पूर्व का जो समय होता है जब तक सूर्य की जो किरण है वह भी स्पर्श नहीं कर रही होती हैं हमें उस समय उठ करके यदि हम ईश्वर की अराधना करते हैं उसके वजन में बैठते हैं तो मन सहज ही लग जाता है क्योंकि दिन भर जब हम उठते हैं जाग जाते हैं और अपने कार्य के विषय में सोचते हैं दूसरे व्यक्तियों के शब्दों को सुनते हैं तो बहुत सारे मन में अच्छे बुरे ख्याल आते हैं बहुत तरफ मन भटक जाता है लेकिन जब हम उठे हैं शायद दूसरा कोई समय पर जाग-जाग भी नहीं रहा है और अगर जाग भी रहा है तो उसकी भी मनोवृत्ति उस प्रकार की नहीं है तांत्रिक नहीं है सात्विकता का उसमें प्रभाव अधिक है तो उस समय पर यदि ईश्वर का नाम लिया जाए तो वह सहज ही फल देने वाला होगा तो इसीलिए सबसे अच्छा समय है कि आप सूर्योदय से भी कुछ समय पहले उठे स्नानादि करें सोच आदि से निवृत हो और ईश्वर की उपासना करें पहली बात तो यह दूसरी बात यह है कि जब भी आपके जीवन में आपको कुछ प्राप्त होता है तो उसे समझें कि यह ईश्वर की कृपा से प्राप्त हुआ जैसे कि आज हमें प्राप्त होता है हम भोजन करते हैं तो वह बड़ी ही असीम अनुकंपा है ईश्वर की कि हमें प्राप्त हो रहा है सात्विक है शुद्ध है हमारे शरीर का पोषण करने वाला है तो उस समय भी हमारे धर्म में यह प्रथा है यह मान्यता है कि हम अन्य के लिए भी मंत्र उच्चारण करें अन्य के लिए मंत्र मंत्र होता है वह मनुष्य देह न्यू सूचना प्रदाता रंग उड़ जाते ही विपदा चतुष्पद अब इस प्रकार के मंत्रों का उच्चारण करके और ईश्वर से ही कहा गए जाता है कि हमें इस प्रकार से ही आप अन्य आदि प्रदान करते रहे जिससे कि हमारे शरीर का सही प्रकार से पोषण होता रहे तो इस प्रकार से भी हम ईश्वर का धन्यवाद करते हैं और एक होती है तत्व बोध की शुभ संध्या के समय हम अपने दिन भर के किए गए कार्यों का निरीक्षण करते हैं यह देखते हैं कि हम हमसे किसी का अहित तो नहीं हुआ किसी का दिल तो नहीं दुखा दिया किसी के प्रति कोई बुरे भाग तो हमारे मन में विकार की सभी जितने भी हमारे क्रियाकलाप होते हैं उनका निरीक्षण करने का समय संध्याकालीन होता है तो शाम के समय भी संध्या उपासना करनी जरूरी है थोड़ा सा धर्म शास्त्रों का अभी-अभी ज्ञात हूं दीदी के मंत्रों का ज्ञान हो उपासना के 8 मंत्र हमें याद हो तो बड़ा अच्छा है उनके माध्यम से हम शायद ही ईश्वर से बड़ी कुछ कम शब्दों में बहुत कुछ मांग सकते हैं और धन्यवाद कर सकते हैं तो यह सब तरीके हैं उपासना के और इन पर अगर गौर किया जाए तो बड़ा अच्छा मन लगेगा हरि ओम

puja ka sabse accha samay jab hamara man shudh hota hai saaf hota hai pavitra hota hai jab usme bahut saare sanskar kusanskar jame hue nahi hote jab use sehaz hi ishwar se joda ja sakta hai vaah samay praatha kaleen hota hai amritvela hota hai jis samay suryoday ho toh hota hai usse bhi kuch samay purv ka jo samay hota hai jab tak surya ki jo kiran hai vaah bhi sparsh nahi kar rahi hoti hain hamein us samay uth karke yadi hum ishwar ki aradhana karte hain uske wajan mein baithate hain toh man sehaz hi lag jata hai kyonki din bhar jab hum uthte hain jag jaate hain aur apne karya ke vishay mein sochte hain dusre vyaktiyon ke shabdon ko sunte hain toh bahut saare man mein acche bure khayal aate hain bahut taraf man bhatak jata hai lekin jab hum uthe hain shayad doosra koi samay par jag jag bhi nahi raha hai aur agar jag bhi raha hai toh uski bhi manovritti us prakar ki nahi hai tantrika nahi hai satwikata ka usme prabhav adhik hai toh us samay par yadi ishwar ka naam liya jaaye toh vaah sehaz hi fal dene vala hoga toh isliye sabse accha samay hai ki aap suryoday se bhi kuch samay pehle uthe snanadi kare soch aadi se nivrit ho aur ishwar ki upasana kare pehli baat toh yah dusri baat yah hai ki jab bhi aapke jeevan mein aapko kuch prapt hota hai toh use samajhe ki yah ishwar ki kripa se prapt hua jaise ki aaj hamein prapt hota hai hum bhojan karte hain toh vaah badi hi asim anukampa hai ishwar ki ki hamein prapt ho raha hai Satvik hai shudh hai hamare sharir ka poshan karne vala hai toh us samay bhi hamare dharm mein yah pratha hai yah manyata hai ki hum anya ke liye bhi mantra ucharan kare anya ke liye mantra mantra hota hai vaah manushya deh new soochna pradaata rang ud jaate hi vipada chatushpad ab is prakar ke mantron ka ucharan karke aur ishwar se hi kaha gaye jata hai ki hamein is prakar se hi aap anya aadi pradan karte rahe jisse ki hamare sharir ka sahi prakar se poshan hota rahe toh is prakar se bhi hum ishwar ka dhanyavad karte hain aur ek hoti hai tatva bodh ki shubha sandhya ke samay hum apne din bhar ke kiye gaye karyo ka nirikshan karte hain yah dekhte hain ki hum humse kisi ka ahit toh nahi hua kisi ka dil toh nahi dukha diya kisi ke prati koi bure bhag toh hamare man mein vikar ki sabhi jitne bhi hamare kriyakalap hote hain unka nirikshan karne ka samay sandhyakalin hota hai toh shaam ke samay bhi sandhya upasana karni zaroori hai thoda sa dharm shastron ka abhi abhi gyaat hoon didi ke mantron ka gyaan ho upasana ke 8 mantra hamein yaad ho toh bada accha hai unke madhyam se hum shayad hi ishwar se badi kuch kam shabdon mein bahut kuch maang sakte hain aur dhanyavad kar sakte hain toh yah sab tarike hain upasana ke aur in par agar gaur kiya jaaye toh bada accha man lagega hari om

पूजा का सबसे अच्छा समय जब हमारा मन शुद्ध होता है साफ होता है पवित्र होता है जब उसमें बहुत

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सूर्य होता है सुबह से लेकर सुबह 11:00 बजे तक पूजा उपासना करने का समय कितना

surya hota hai subah se lekar subah 11 00 baje tak puja upasana karne ka samay kitna

सूर्य होता है सुबह से लेकर सुबह 11:00 बजे तक पूजा उपासना करने का समय कितना

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पूजा का कोई अपना पर्सनल टाइम नहीं होता है जब आपका माइंड फ्रेश हो जब आपका मन

puja ka koi apna personal time nahi hota hai jab aapka mind fresh ho jab aapka man

पूजा का कोई अपना पर्सनल टाइम नहीं होता है जब आपका माइंड फ्रेश हो जब आपका मन

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पूजा का सही समय सुबह तो चार 4:30 बजे के आसपास से और शाम को सूर्यास्त के बाद पूजा का सही समय माना जाता है

puja ka sahi samay subah toh char 4 30 baje ke aaspass se aur shaam ko suryaast ke baad puja ka sahi samay mana jata hai

पूजा का सही समय सुबह तो चार 4:30 बजे के आसपास से और शाम को सूर्यास्त के बाद पूजा का सही सम

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शाम की पूजा का सही समय क्या है ; puja karne ka sahi time ; सुबह कितने बजे पूजा करनी चाहिए ; शाम को कितने बजे पूजा करनी चाहिए ; sham ko puja karne ka sahi time ; सुबह कितने बजे पूजा करना चाहिए ; shaam ki pooja ka time ; shaam ki pooja ka sahi time ; पूजा करने का सही समय क्या है ; puja ka samay ;

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