सरकार अधिक मात्रा में नोट छापकर गरीबी क्यों नहीं मिटा देती?...


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Rajesh Kumar

Worker at Bahujan Mukti Party

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नोटों से गरीबी थोड़ी दूर होगी मोटर गरीबी जरूर नहीं होगी गरीबी दूर होगी इमानदारी से लोगों को शंका मोदी जी ऐसा नहीं चाहिए अगर यह सारा लोग पैसा वापस कर दे

noton se garibi thodi dur hogi motor garibi zaroor nahi hogi garibi dur hogi imaandari se logo ko shanka modi ji aisa nahi chahiye agar yah saara log paisa wapas kar de

नोटों से गरीबी थोड़ी दूर होगी मोटर गरीबी जरूर नहीं होगी गरीबी दूर होगी इमानदारी से लोगों क

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Abrar Ahmad

Social Worker

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भैया भाभी सुना दो मेरे पास फोटो जोड़ने की योजना है लेकिन गरीबी हटाई नहीं सोच कल आप दिल्ली वाले को नहीं मिल पा रहा वह आपके सामने दिखा रहा है देर से तेरी भेजना है उसके लाभ उठाकर देख ले उसमें कोई पूछेगा बजे पहुंच रही है

bhaiya bhabhi suna do mere paas photo jodne ki yojana hai lekin garibi hatai nahi soch kal aap delhi waale ko nahi mil paa raha vaah aapke saamne dikha raha hai der se teri bhejna hai uske labh uthaakar dekh le usme koi puchhega baje pohch rahi hai

भैया भाभी सुना दो मेरे पास फोटो जोड़ने की योजना है लेकिन गरीबी हटाई नहीं सोच कल आप दिल्ली

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत के पास जितना आप ज्यादा नहीं सकते हो आपको पता है जितना नोट सपना पड़ता है उतने का सोना रखता है रिजल्ट माली जी आरबीआई एक नोट छपरा 1000 का ₹2000 का सोना आरबीआई अपना पैसा बचता है वहां हम चाह कर भी नोट छापने सकते अब दूसरी बार गरीबी हटाने का नाइंथ चैप्टर सिक्स में पहला कदम उठाया था नेहरू ने पंचवार्षिक योजना भारत में पंचवर्षीय योजना के ही लग गया 10 लाख करोड़ का बजट पूरे 5 साल में 10 करोड़ का क्या होगा गरीबी मिटाने के लिए भारत में पंचवर्षीय योजना 1956 कम से कम 5 साल लग गया होगा लेकिन अभी भी गरीबी मिटाने के कारण मैं पहले ही बोल चुका हूं कि भ्रष्टाचार कैसा आता है बजट आता है लेकिन इस इलाज होता नहीं

bharat ke paas jitna aap zyada nahi sakte ho aapko pata hai jitna note sapna padta hai utne ka sona rakhta hai result maali ji RBI ek note chapra 1000 ka Rs ka sona RBI apna paisa bachta hai wahan hum chah kar bhi note chaapne sakte ab dusri baar garibi hatane ka ninth chapter six mein pehla kadam uthaya tha nehru ne panchavarshik yojana bharat mein panchvarshiya yojana ke hi lag gaya 10 lakh crore ka budget poore 5 saal mein 10 crore ka kya hoga garibi mitne ke liye bharat mein panchvarshiya yojana 1956 kam se kam 5 saal lag gaya hoga lekin abhi bhi garibi mitne ke karan main pehle hi bol chuka hoon ki bhrashtachar kaisa aata hai budget aata hai lekin is ilaj hota nahi

भारत के पास जितना आप ज्यादा नहीं सकते हो आपको पता है जितना नोट सपना पड़ता है उतने का सोना

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नहीं ऐसा नहीं होता है कि भारत सरकार कितना पैसा उसके लिए आपको कितना रन हुआ है सब कुछ करके अपने मन पर कोई भी व्यक्ति ऐसा सांप लगा दे उसको कोई भी दिन करीब नहीं होगा तो हम को दी परमिशन लेनी होती बाकी

nahi aisa nahi hota hai ki bharat sarkar kitna paisa uske liye aapko kitna run hua hai sab kuch karke apne man par koi bhi vyakti aisa saap laga de usko koi bhi din kareeb nahi hoga toh hum ko di permission leni hoti baki

नहीं ऐसा नहीं होता है कि भारत सरकार कितना पैसा उसके लिए आपको कितना रन हुआ है सब कुछ करके अ

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Ashish Singh

Co-Founder

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मेरी भी नहीं आना चाहिए जवाब देगा वह अपने-अपने टुकड़ा हो पाएगा

meri bhi nahi aana chahiye jawab dega wah apne apne tukda ho payega

मेरी भी नहीं आना चाहिए जवाब देगा वह अपने-अपने टुकड़ा हो पाएगा

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Kishan Kumar

Motivational speaker

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हेलो दोस्तों आप का क्वेश्चन है सरकार अधिक मात्रा में नोट छाप कर गरीबी क्यों नहीं मिटा देती दोस्तों अगर सरकार गरीब मिटा गरीबी को मिटा देगी दादी की गरीबी तो वह दोबारा सरकार कैसे बनेगी अगर राजनीति होता है और कोई सरकार बनती है तो गरीबी मुद्दा देखकर उन्हें पर ही बातों का अपना स्थित खड़ा करती है और सरकार बनाती है इसलिए गरीबी हटाना नहीं चाहती है गरीबी नहीं रहेगी तो हम जीतेंगे कैसे यह मुद्दा सबसे बड़ा यह है इसलिए सरकार गरीबी छोड़ देती है मैं दिक्कत यही है नहीं तो सरकार चाहे तो गरीबी मिट सकती है

hello doston aap ka question hai sarkar adhik matra mein note chhaap kar garibi kyon nahi mita deti doston agar sarkar garib mita garibi ko mita degi dadi ki garibi toh vaah dobara sarkar kaise banegi agar raajneeti hota hai aur koi sarkar banti hai toh garibi mudda dekhkar unhe par hi baaton ka apna sthit khada karti hai aur sarkar banati hai isliye garibi hatana nahi chahti hai garibi nahi rahegi toh hum jitenge kaise yah mudda sabse bada yah hai isliye sarkar garibi chod deti hai dikkat yahi hai nahi toh sarkar chahen toh garibi mit sakti hai

हेलो दोस्तों आप का क्वेश्चन है सरकार अधिक मात्रा में नोट छाप कर गरीबी क्यों नहीं मिटा देती

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इमानदारी से चाहिए तो अधिक नोट छापने की जरूरत ही नहीं है जनतंत्र की औरतों की करेंसी की वैल्यू और जॉन हो जाएगी

imaandari se chahiye toh adhik note chaapne ki zarurat hi nahi hai jantantra ki auraton ki currency ki value aur john ho jayegi

इमानदारी से चाहिए तो अधिक नोट छापने की जरूरत ही नहीं है जनतंत्र की औरतों की करेंसी की वैल्

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Sachin Sinha

Journalist

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सरकार अधिक मात्रा में छप्पर गरीबी क्यों नहीं मिटा देती गरीबी जब मीठी जाएगी तो वोट बैंक कहां से आएंगे ही धर्म की लड़ाई जबकि लड़ाई है और दूसरा दिन भी की लड़ाई है यही तो तुम देश है जिसमें सरकार बनती और बिगड़ती है जो की मलाई सत्तापक्ष विपक्ष द्वारा खा जाती है अगर गरीबी मिटा देंगे तो फिर इनके पास जो सोने के महान है सोने की लंका है वह पैसे ही दिन पर दिन बढ़ते ही बढ़ती जाएगी जिसमें हीरे मोती कैसे लगेंगे तक गरीबी नहीं मिली हैं गरीबी मिटाने के लिए सरकार को एक अच्छा कदम उठाने की जरूरत है लोगों के हाथ में रोजगार देने की आवश्यकता है जो होता नहीं है खाली नोट 7 देने से भी नहीं होगा ज्यादा अधिक मात्रा में फूल बिछा देना छापने से कुछ नहीं होने वाला इसके लिए रोजगार देना बहुत जरूरी है तब जाकर गरीबी मिटेगी नोट छापने से मेरे ख्याल में गिरवी कहीं नहीं मिलती इसके लिए रोजगार स्वरोजगार खुद का खुला हुआ कार्य जो है उसकी फैमिली के सब लोग इन मॉल घूमने की जगह बाहरी लोगों काम देंगे तो गरीबी हटेगी

sarkar adhik matra mein chhappar garibi kyon nahi mita deti garibi jab mithi jayegi toh vote bank kahan se aayenge hi dharm ki ladai jabki ladai hai aur doosra din bhi ki ladai hai yahi toh tum desh hai jisme sarkar banti aur bigadati hai jo ki malai sattapaksh vipaksh dwara kha jaati hai agar garibi mita denge toh phir inke paas jo sone ke mahaan hai sone ki lanka hai vaah paise hi din par din badhte hi badhti jayegi jisme heere moti kaise lagenge tak garibi nahi mili hai garibi mitne ke liye sarkar ko ek accha kadam uthane ki zarurat hai logo ke hath mein rojgar dene ki avashyakta hai jo hota nahi hai khaali note 7 dene se bhi nahi hoga zyada adhik matra mein fool bicha dena chaapne se kuch nahi hone vala iske liye rojgar dena bahut zaroori hai tab jaakar garibi mitegi note chaapne se mere khayal mein girvi kahin nahi milti iske liye rojgar swarojgar khud ka khula hua karya jo hai uski family ke sab log in mall ghoomne ki jagah bahri logo kaam denge toh garibi hategi

सरकार अधिक मात्रा में छप्पर गरीबी क्यों नहीं मिटा देती गरीबी जब मीठी जाएगी तो वोट बैंक कहा

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Sandeep Saini

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यादें नोट छापने से तो ज्यादा डूंगरगढ़ जाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण का नोट

yaadain note chaapne se toh zyada dungargarh jaane ke liye jansankhya niyantran ka note

यादें नोट छापने से तो ज्यादा डूंगरगढ़ जाने के लिए जनसंख्या नियंत्रण का नोट

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Abhishek Sharma

Forest Range Officer, MP

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमारे पास चीज चीज की अधिकता होती है हम उस चीज को कभी वैल्यू नहीं करते सबसे सरल आंसर आपकी परेशानी कर रही है सरकार अगर अधिक मात्रा में नोट छापने की तो आज जो डॉलर की अपेक्षा पैरों पर का प्राइस 64654 पर चल रहा है वह गिर कर सो रुपए तक हो जाएगा अगर और अधिक मात्रा में चाबी तो डेढ़ सौ हो जाएगा यानी कि हम एक तरह से हम अपने आपको बर्बाद कर लेंगे तो फिर आप कहेंगे कि सरकार ऐसा क्यों नहीं करती की कम मात्रा में नोट छापने तो यह भी मुमकिन नहीं है क्योंकि अगर कम नोट छाप देगी तो महंगाई बढ़ जाएगी क्यों उस समय नोट की वैल्यू बढ़ जाएगी जिसके पास पैसा होगा उसको सब कुछ माना जाएगा Sony वगैरा की कीमत सब कुछ नहीं चाहिए धड़ाम से आ जाएगी पूरा का पूरा मार्केट बहुत महंगा हो जाएगा क्योंकि सब लोग नोट मांगेंगे और जो व्यक्ति नोट मांगेगा वह अपनी चीज को किसी भी हद तक देने को तैयार हो जाएगा यानी कि महंगाई सिर से ऊपर निकल जाएगी तो महंगाई को कंट्रोल करने के लिए तथा मुद्रास्फीति को कंट्रोल करने के लिए एक लिमिटेड मात्रा में नोटों को छापा जाता है जिस से इंपोर्ट एक्सपोर्ट की प्रभावित ना हो जिससे भारत की अर्थव्यवस्था को प्रभावित ना हो जिससे हमारे देश का विकास प्रभावित ना हो जिससे पुराने फटे नोट हैं या चीज जो हो रहे हैं उनको चीज प्रभावित ना हो हर साल हजारों करोड़ रुपए के नोट है कि चीन चुकी जाते हैं जला दिए जाते हैं जो कटे फटे नोट है वह इन सब की चीजें इफेक्ट ना हो इसके अलावा हमारे पास जो हम बजट में सामान पेश कर रहे हैं या हम जो गरीबों को पैसे देने वह चीज भेज ना हो उस को परेशानी ना हो इसके अलावा जो हमारे पास 550 टन का सोने का जो अमाउंट है भारत सरकार के पास उस चीज को वैल्यू रखते हुए हम नोटों की छपाई करते हैं सारी की सारी चीजें एक साथ मिक्स होकर तब हमें पता चलता है कि हमें नोट कितने छापने चाहिए अधिक मात्रा में नोट छापकर हम अपने आप को बर्बाद करने की सबसे तीव्र का घर पहुंच जाएंगे तो यह बिल्कुल भी सही चीज नहीं है उम्मीद करता हूं आप समझ गए होंगे धन्यवाद

hamare paas cheez cheez ki adhikata hoti hai hum us cheez ko kabhi value nahi karte sabse saral answer aapki pareshani kar rahi hai sarkar agar adhik matra mein note chaapne ki toh aaj jo dollar ki apeksha pairon par ka price 64654 par chal raha hai vaah gir kar so rupaye tak ho jaega agar aur adhik matra mein chabi toh dedh sau ho jaega yani ki hum ek tarah se hum apne aapko barbad kar lenge toh phir aap kahenge ki sarkar aisa kyon nahi karti ki kam matra mein note chaapne toh yah bhi mumkin nahi hai kyonki agar kam note chhaap degi toh mahangai badh jayegi kyon us samay note ki value badh jayegi jiske paas paisa hoga usko sab kuch mana jaega Sony vagera ki kimat sab kuch nahi chahiye dhadam se aa jayegi pura ka pura market bahut mehnga ho jaega kyonki sab log note mangege aur jo vyakti note mangega vaah apni cheez ko kisi bhi had tak dene ko taiyar ho jaega yani ki mahangai sir se upar nikal jayegi toh mahangai ko control karne ke liye tatha mudrasfiti ko control karne ke liye ek limited matra mein noton ko chapa jata hai jis se import export ki prabhavit na ho jisse bharat ki arthavyavastha ko prabhavit na ho jisse hamare desh ka vikas prabhavit na ho jisse purane phate note hai ya cheez jo ho rahe hai unko cheez prabhavit na ho har saal hazaro crore rupaye ke note hai ki china chuki jaate hai jala diye jaate hai jo kate phate note hai vaah in sab ki cheezen effect na ho iske alava hamare paas jo hum budget mein saamaan pesh kar rahe hai ya hum jo garibon ko paise dene vaah cheez bhej na ho us ko pareshani na ho iske alava jo hamare paas 550 ton ka sone ka jo amount hai bharat sarkar ke paas us cheez ko value rakhte hue hum noton ki chapai karte hai saree ki saree cheezen ek saath mix hokar tab hamein pata chalta hai ki hamein note kitne chaapne chahiye adhik matra mein note chapkar hum apne aap ko barbad karne ki sabse tivra ka ghar pohch jaenge toh yah bilkul bhi sahi cheez nahi hai ummid karta hoon aap samajh gaye honge dhanyavad

हमारे पास चीज चीज की अधिकता होती है हम उस चीज को कभी वैल्यू नहीं करते सबसे सरल आंसर आपकी प

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Suraj kandpal

Mechatronics engineer fresher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह असली ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इससे अगर हम ऐसा करेंगे तो यह भारत की इकोनॉमी को गिरा देगा होता है ऐसा होता है कि अगर हमारी इकनोमिक चलिए अगर आज इतने नोट छपते हैं वह हमारे एक नामी के अंदर जाते हैं पर अगर उसको साफ कर सब को बांट देंगे तो हमारे इंडिया का शहर खुद गिर जाएगा और हमारे ₹2 का भाव है वह और भी गिर जाएगा तो इसलिए हम ऐसा नहीं कर सकते कि हम 10 नोट्स आपकी किसी गरीब को बांटते हैं कि वह नोटों का हिसाब हुआ जाता है और फिर वह वर्ल्ड बैंक वर्ल्ड में खुशी का हिसाब करके हमारा इकोनॉमिक का एक स्टेटस देता है और वही का नाम ही हमारे पूरे वर्ल्ड के तू जाती है जहां पर जैसे जैसे हम लोग कम पर कर सकते कि डॉलर और रुपए के बीच में कितना अंतर है इसलिए ऐसा नहीं हो सकता

yah asli aisa nahi ho sakta kyonki isse agar hum aisa karenge toh yah bharat ki economy ko gira dega hota hai aisa hota hai ki agar hamari economic chaliye agar aaj itne note chupte hain vaah hamare ek nami ke andar jaate hain par agar usko saaf kar sab ko baant denge toh hamare india ka shehar khud gir jaega aur hamare Rs ka bhav hai vaah aur bhi gir jaega toh isliye hum aisa nahi kar sakte ki hum 10 notes aapki kisi garib ko bantate hain ki vaah noton ka hisab hua jata hai aur phir vaah world bank world mein khushi ka hisab karke hamara economic ka ek status deta hai aur wahi ka naam hi hamare poore world ke tu jaati hai jaha par jaise jaise hum log kam par kar sakte ki dollar aur rupaye ke beech mein kitna antar hai isliye aisa nahi ho sakta

यह असली ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि इससे अगर हम ऐसा करेंगे तो यह भारत की इकोनॉमी को गिरा देगा

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Dev Airon

Rtd Addl VAT Commissioner

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कुछ कारणों के कारण एक सीमा से अधिक नोट छापने संभव नहीं है उसके भाव सारी इंप्लिकेशंस कम्युनिकेशंस है फिर भी माल ने एक रात को मोदी जी टीवी पर मनोज करें मित्रों आपके दिलों की धड़कन बढ़ जाएगी और वह माउस करते हैं कि कल से हर एक गरीब भारतीय के खाते में ₹50000 महीना आने शुरू हो जाएंगे इसका क्या नतीजा होगा जो लोग मेहनत कैसा है उनको मेहनत करने की जरूरत महसूस होनी बंद हो जाएगी मजदूर मजदूरी करना छोड़ देंगे लॉकर ड्राइवर इलेक्ट्रिशियन प्लंबर मकैनिक अध्यापक सब अपना काम बंद कर देंगे क्योंकि अब तुमको बैठे-बैठे खाते में रुपए आ जाएंगे तो काम करने की जरूरत क्या है लगभग 70 80 करोड़ भारतीयों के खातों में अचानक अरबों खरबों रुपए आ जाएंगे बाजार में कीमतों की डिमांड बढ़ जाए क्योंकि ऊपर आसमान छूने रहेंगे जो पहले खर्च ₹10000 में जो खर्च चलता था अब वह 50000 में चलने लगेगा दूसरी ओर बाजार में लेबर की कारीगर की बहुत कमी आ जाएगी अर्जुन जो लोग अमीर लोग हैं उनकी इनकम कम हो जाएगी तो यह संभव नहीं है

kuch karanon ke karan ek seema se adhik note chaapne sambhav nahi hai uske bhav saree implikeshans kamyunikeshans hai phir bhi maal ne ek raat ko modi ji TV par manoj kare mitron aapke dilon ki dhadkan badh jayegi aur vaah mouse karte hai ki kal se har ek garib bharatiya ke khate mein Rs mahina aane shuru ho jaenge iska kya natija hoga jo log mehnat kaisa hai unko mehnat karne ki zarurat mehsus honi band ho jayegi majdur mazdoori karna chod denge locker driver Electrician Plumber mechanic adhyapak sab apna kaam band kar denge kyonki ab tumko baithe baithe khate mein rupaye aa jaenge toh kaam karne ki zarurat kya hai lagbhag 70 80 crore bharatiyon ke khaaton mein achanak araboon kharbo rupaye aa jaenge bazaar mein kimton ki demand badh jaaye kyonki upar aasman chune rahenge jo pehle kharch Rs mein jo kharch chalta tha ab vaah 50000 mein chalne lagega dusri aur bazaar mein labour ki karigar ki bahut kami aa jayegi arjun jo log amir log hai unki income kam ho jayegi toh yah sambhav nahi hai

कुछ कारणों के कारण एक सीमा से अधिक नोट छापने संभव नहीं है उसके भाव सारी इंप्लिकेशंस कम्युन

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shiv chaudhary

Journalist ..

1:46
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अधिक मात्रा में नोट छापने से गरीबी नहीं मिटेगी अपितु देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा इसका उदाहरण लेते हैं इसका जिंबाब्वे से जिंबाब्वे में सन 2000 में सरकार ने लगभग इसी तरह के काम कितने बड़े-बड़े नोट छापने शुरू कर दिए और 2000 में सन 2000 में जिंबाब्वे की महंगाई लगभग 23 करोड़ पर्सेंट पड़ गई और वहां पर 100 अरब डॉलर में 100 अरब डॉलर में तीन अंडे केवल लोग खरीद पाते थे इस तरह की कौन में क्लास कहां पर हुई अगर हमारे देश में भी यही हो कि सरकार मान लीजिए अभी कह दे कि सब के पास हम 50 50 करोड़ रुपए देंगे तो जरूरत है उतनी है संसाधन सीमित हैं लोगों के पास पैसे हैं तो लोग उस सामान को खरीदने जब जाएंगे आपूर्ति कम होगी मांग ज्यादा होगी तो निश्चित तौर पर क्या होगा कि चीजें महंगाई बढ़ेगी महंगाई बढ़ेगी तो ध्यान में आएगा कि जो चीज पहले ₹50 की थी उसकी डिमांड ज्यादा होने की वजह से वह ₹50 की चीज अब 50 हजार की हो गई है अंततः जल्दी पैसे फिर खत्म हो जाएंगे घूम के पति पत्नी आ जाएगी तो इस तरह से नहीं होता क्योंकि जो आपूर्ति है डिमांड है WhatsApp लाई है उसकी जो रेश्यो है उसका जो अनुपात है उसके आधार पर यह सब चीजें होती हैं जहां तक नए नोट छापने की बात है तो वह अगर ज्यादा मंदी हो तब रिजर्व बैंक छपता है या पुराने नोट ज्यादा खराब हो गए हो तब छपता है विकास दर कैसी है देश की उस आधार पर छपता है मुद्रास्फीति की दर कैसी है उस आधार पर रिजर्व बैंक नए नोट छापने का निर्णय लेता है

adhik matra mein note chaapne se garibi nahi mitegi apitu desh ki arthavyavastha ke liye bada sankat khada ho jaega iska udaharan lete hai iska Zimbabwe se Zimbabwe mein san 2000 mein sarkar ne lagbhag isi tarah ke kaam kitne bade bade note chaapne shuru kar diye aur 2000 mein san 2000 mein Zimbabwe ki mahangai lagbhag 23 crore percent pad gayi aur wahan par 100 arab dollar mein 100 arab dollar mein teen ande keval log kharid paate the is tarah ki kaun mein class kahaan par hui agar hamare desh mein bhi yahi ho ki sarkar maan lijiye abhi keh de ki sab ke paas hum 50 50 crore rupaye denge toh zarurat hai utani hai sansadhan simit hai logo ke paas paise hai toh log us saamaan ko kharidne jab jaenge aapurti kam hogi maang zyada hogi toh nishchit taur par kya hoga ki cheezen mahangai badhegi mahangai badhegi toh dhyan mein aayega ki jo cheez pehle Rs ki thi uski demand zyada hone ki wajah se vaah Rs ki cheez ab 50 hazaar ki ho gayi hai antatah jaldi paise phir khatam ho jaenge ghum ke pati patni aa jayegi toh is tarah se nahi hota kyonki jo aapurti hai demand hai WhatsApp lai hai uski jo ratio hai uska jo anupat hai uske aadhaar par yah sab cheezen hoti hai jaha tak naye note chaapne ki baat hai toh vaah agar zyada mandi ho tab reserve bank chhapta hai ya purane note zyada kharab ho gaye ho tab chhapta hai vikas dar kaisi hai desh ki us aadhaar par chhapta hai mudrasfiti ki dar kaisi hai us aadhaar par reserve bank naye note chaapne ka nirnay leta hai

अधिक मात्रा में नोट छापने से गरीबी नहीं मिटेगी अपितु देश की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकट

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Ashish Tyagi

Computer Engineer Masters

1:53
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

दिस इज अ वेरी इंटरेस्टिंग क्वेश्चन पेपर सेंड किया था उन्होंने मुझे बताया था कि जैसे कोई कमोडिटी टाइप होना चाहिए WhatsApp तो कुत्ता समझ नहीं पाया था और धीरे-धीरे जैसे मतलब देखते गई चीजों को तो अब जाकर थोड़ी अंडरस्टेंडिंग है जिसके बारे में दीजिए तो है गोरमेंट अन्य एसेसरी ऐसे करेंसी को मतलब प्रिंट नहीं कर सकती है क्योंकि उसके पास में यादों कोई कमोडिटी होनी चाहिए या फिर सेट होने चाहिए जिसने देखा वो पहले के टाइम में एक्सचेंज गुड चलता था कोई करेंसी तो थी नहीं कोई परेशानी तो उस टाइम पर क्या था एक्सीडेंट गुड चला करता था जैसे किसी के पास गांव है वह गेहूं नहीं है तो उसको डाल देता था दूसरा बंदा उसको बोल देना था मैंने अपने बचपन में बहुत भारी एक गिलास अनार से आइसक्रीम खाई है तो ऐसा होता है कि अगर आप करेंसी छापने की बात करते हैं तो उसके लिए हमारे पास इक्वलिटी कोई एसेट्स होने चाहिए जिसको हम की वैल्यू एडिट करके उठते ही अमाउंट की करेंसी सकते हैं तो हमारी गवर्नमेंट के पास में जितना एसिड है यह जितने सेट को उसने बिल्कुल डेट किया वह इन द फॉर्म ऑफ करेंसी वही अवेलेबल है और फिर बाकी कीजिए अगर हम थोड़ा डीपली जाए तो फॉरेन एक्सचेंज वगैरा पर भी चली जाती है वहां पर फिस्कल डेफिसिट वगैरा मीटर करते हैं तो थोड़ा कंफ्यूज हो जाएगा बट आप ही समझिए कि खाली अगर आपके पास आपके पास इतनी ही करेंसी हो सकती है जितने आपके पास ऐसे हैं थैंक यू

this is a very interesting question paper send kiya tha unhone mujhe bataya tha ki jaise koi commodity type hona chahiye WhatsApp toh kutta samajh nahi paya tha aur dhire dhire jaise matlab dekhte gayi chijon ko toh ab jaakar thodi andarastending hai jiske bare mein dijiye toh hai garment anya esesari aise currency ko matlab print nahi kar sakti hai kyonki uske paas mein yaadon koi commodity honi chahiye ya phir set hone chahiye jisne dekha vo pehle ke time mein exchange good chalta tha koi currency toh thi nahi koi pareshani toh us time par kya tha accident good chala karta tha jaise kisi ke paas gaon hai vaah gehun nahi hai toh usko daal deta tha doosra banda usko bol dena tha maine apne bachpan mein bahut bhari ek gilas anaar se icecream khai hai toh aisa hota hai ki agar aap currency chaapne ki baat karte hai toh uske liye hamare paas Equality koi esets hone chahiye jisko hum ki value edit karke uthte hi amount ki currency sakte hai toh hamari government ke paas mein jitna acid hai yah jitne set ko usne bilkul date kiya vaah in the form of currency wahi available hai aur phir baki kijiye agar hum thoda deeply jaaye toh foreign exchange vagera par bhi chali jaati hai wahan par fiskal deficit vagera meter karte hai toh thoda confuse ho jaega but aap hi samjhiye ki khaali agar aapke paas aapke paas itni hi currency ho sakti hai jitne aapke paas aise hai thank you

दिस इज अ वेरी इंटरेस्टिंग क्वेश्चन पेपर सेंड किया था उन्होंने मुझे बताया था कि जैसे कोई कम

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Raj ambade

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अगर सरकार ऐसा करती है तो इस देश में मुद्रा का कोई मूल्य रह नहीं पाएगा जिस तरह को लेकर हम काम करते हैं जिसके लिए हम काम करते हैं उस मुद्रा का कोई मूल्य नहीं हो पाएगा और इंसान हर कार्य कर भी नहीं पाएगा इंसान पैसों के खातिर जो काम करता है वह जो कि मर के खातिर काम करता है तो वह काम नहीं कर पाएगा

agar sarkar aisa karti hai toh is desh mein mudra ka koi mulya reh nahi payega jis tarah ko lekar hum kaam karte hain jiske liye hum kaam karte hain us mudra ka koi mulya nahi ho payega aur insaan har karya kar bhi nahi payega insaan paison ke khatir jo kaam karta hai vaah jo ki mar ke khatir kaam karta hai toh vaah kaam nahi kar payega

अगर सरकार ऐसा करती है तो इस देश में मुद्रा का कोई मूल्य रह नहीं पाएगा जिस तरह को लेकर हम क

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Kriti

Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सरकार गरीब देश की गरीबी दूर करने के लिए भारी मात्रा में नोट क्यों नहीं चाहती तो देखिए अगर भारी मात्रा में नोट छापने लग जाएंगे तो चीजों की कीमत भी बढ़ने लग जाएगी तो इसका कोई यह नहीं कि अगर ज्यादा नोट छापन की तो गरीबी देखी कम हो जाने वाली है वह चीजों की कीमत बढ़ जाएगी वापस वही गरीबी हो जाएगी तो जितनी भी नोट है जो करेंसी है जिसकी जितनी भी जरूरत हमारे देश में होती है उतनी ही नोट छापे जाते हैं उससे ज्यादा नोट छापने का अधिकार किसी को नहीं है

sarkar garib desh ki garibi dur karne ke liye bhari matra mein note kyon nahi chahti toh dekhiye agar bhari matra mein note chaapne lag jaenge toh chijon ki kimat bhi badhne lag jayegi toh iska koi yah nahi ki agar zyada note chapan ki toh garibi dekhi kam ho jaane wali hai vaah chijon ki kimat badh jayegi wapas wahi garibi ho jayegi toh jitni bhi note hai jo currency hai jiski jitni bhi zarurat hamare desh mein hoti hai utani hi note chaape jaate hai usse zyada note chaapne ka adhikaar kisi ko nahi hai

सरकार गरीब देश की गरीबी दूर करने के लिए भारी मात्रा में नोट क्यों नहीं चाहती तो देखिए अगर

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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आदि के सवाल आपने बहुत ही अच्छा पूछा है सरकार अधिक मात्रा में WhatsApp का जो है वह गरीबी क्यों नहीं मिटा देती इतना आसान भी नहीं है यह चीज करना कि अगर सरकार के पास नोट छापने की मशीन है तो वह नोट्स आपके सब को गरीबों को बांट दी और बोला कि भाई चले तुम्हारा घर भी खत्म हो गया ऐसा नहीं होता है जो इकनोमिक सर्कल होता है जो इकनोमिक कल हमारे कंट्री में चल रहा है जो कैश फ्लो ऑफ फ्लो हो रहा है जब तक कोई चीज के बदले में आप उसको कैंट देंगे नहीं तो मैं तो उसका व्यापार कैसे होगा अभी जैसे एक किसान है वह किसान फसल उगाता है जो फसल उगाता है तो उसे पैसे मिलेंगे हम को पसंद मिलेंगे अगर हम बिना फसल के उसको पैसे दे देंगे तो हमारे से 1 किलोमीटर कर ले वह पूरा डिस्टर्ब हो जाएगा इतना आसान भी नहीं होता यह सब चीज का ज्ञान जो है वह लेना पड़ता है तो जो उसे इकनोमिक सर्कल है उसको डिस्टर्ब किए बिना सरकार को जो है वह करना पड़ता है और जितनी डिमांड होती है सरकार उतने ही छाती है ऐसे नहीं है अनलिमिटेड से आपके जो है चलो कैश फ्लो जो है वह बढ़ा देते हैं और एक गरीब रोएंगे इतना भी आसान होता है इससे पूरा को डिस्टर्ब हो सकता है और अगर वह डिस्टर्ब होगा होगा तो पूरा शेयर मार्केट जो है और पूरा देश की चुनाव में जो है वह डिस्टर्ब हो जाएगी इसलिए इतना आसान भी नहीं होता है जो सब होता है अकॉर्डिंग टू रिक्वायरमेंट जो जितना दिमाग आता है उतना वह कैसे प्रोडक्शन जो है वह चलता है ऐसे अनलिमिटेड नहीं होता है

aadi ke sawaal aapne bahut hi accha poocha hai sarkar adhik matra mein WhatsApp ka jo hai vaah garibi kyon nahi mita deti itna aasaan bhi nahi hai yah cheez karna ki agar sarkar ke paas note chaapne ki machine hai toh vaah notes aapke sab ko garibon ko baant di aur bola ki bhai chale tumhara ghar bhi khatam ho gaya aisa nahi hota hai jo economic circle hota hai jo economic kal hamare country mein chal raha hai jo cash flow of flow ho raha hai jab tak koi cheez ke badle mein aap usko cantt denge nahi toh main toh uska vyapar kaise hoga abhi jaise ek kisan hai vaah kisan fasal ugaata hai jo fasal ugaata hai toh use paise milenge hum ko pasand milenge agar hum bina fasal ke usko paise de denge toh hamare se 1 kilometre kar le vaah pura disturb ho jaega itna aasaan bhi nahi hota yah sab cheez ka gyaan jo hai vaah lena padta hai toh jo use economic circle hai usko disturb kiye bina sarkar ko jo hai vaah karna padta hai aur jitni demand hoti hai sarkar utne hi chhati hai aise nahi hai unlimited se aapke jo hai chalo cash flow jo hai vaah badha dete hai aur ek garib roenge itna bhi aasaan hota hai isse pura ko disturb ho sakta hai aur agar vaah disturb hoga hoga toh pura share market jo hai aur pura desh ki chunav mein jo hai vaah disturb ho jayegi isliye itna aasaan bhi nahi hota hai jo sab hota hai according to requirement jo jitna dimag aata hai utana vaah kaise production jo hai vaah chalta hai aise unlimited nahi hota hai

आदि के सवाल आपने बहुत ही अच्छा पूछा है सरकार अधिक मात्रा में WhatsApp का जो है वह गरीबी क्

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Pragati

Aspiring Lawyer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए सरकार नोट छापने का काम नहीं करती है नोट छापना और बनाने का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया करती है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भी नोट छापकर सरकार को तभी देती है जब सरकार उतनी ही मात्रा यानी उतनी ही अमाउंट का सोना रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया को रखने के लिए देती है ताकि उसके सोने के अगेंस्ट हो रिजर्व बैंक से पैसे ले सके और उसे कॉल मी में लेकर आ सके और किसी योजना में यूज कर सकें या फिर किसी बजट में डाल सके तो अगर आप कह रहे हैं कि गरीबों को एकदम नोट छापकर देख दें ताकि उनकी गरीबी मिट जाए तो सरकार ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकते क्योंकि उनके पास इतना सोना है ही नहीं कि वह रिजर्व बैंक को दें और रिजर्व बैंक से नोट ले ले और अगर ऐसा वह करती भी है किसी भी वजह से किसी भी तरह से तू कहीं ना कहीं हमारी कॉल मी काजोल रेट है वह बहुत नीचे चला जाएगा और जो डॉलर के अगेंस्ट हमारे रूपी का रेट है वह भी बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा और जिससे हमारे देश में फ्री कॉल मी में डेवलपमेंट हुआ इतने सालों में वह सब बिल्कुल खत्म हो जाएगा और और देशों के मुकाबले हमारी कौन भी बहुत ही नीचे चली जाएगी और इतनी पॉपुलेशन होने के बावजूद हमारी कॉल में अगर इतनी नीचे जाती है तो यह हमारे देश की सरकार की नाकामी होगी की सरकार को हमारे देश के अलावा बाहर के देशों के साथ अपने संबंध भी देखने चल देख कर चलना होता है और जो भी चीजें इंपोर्ट एक्सपोर्ट होती है उनको भी हिसाब लगा कर चलना होता है तो सरकार ऐसा बिल्कुल भी नहीं कर सकती है कि वह नोट छापकर पूरे देश की गरीबी एक साथ में ताले क्योंकि उनके बस में होता ही नहीं है यह सब काम रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया का होता है

dekhiye sarkar note chaapne ka kaam nahi karti hai note chapna aur banane ka kaam reserve bank of india karti hai aur reserve bank of india bhi note chapkar sarkar ko tabhi deti hai jab sarkar utani hi matra yani utani hi amount ka sona reserve bank of india ko rakhne ke liye deti hai taki uske sone ke against ho reserve bank se paise le sake aur use call me mein lekar aa sake aur kisi yojana mein use kar sake ya phir kisi budget mein daal sake toh agar aap keh rahe hai ki garibon ko ekdam note chapkar dekh de taki unki garibi mit jaaye toh sarkar aisa bilkul bhi nahi kar sakte kyonki unke paas itna sona hai hi nahi ki vaah reserve bank ko de aur reserve bank se note le le aur agar aisa vaah karti bhi hai kisi bhi wajah se kisi bhi tarah se tu kahin na kahin hamari call me kajol rate hai vaah bahut niche chala jaega aur jo dollar ke against hamare rupee ka rate hai vaah bhi bahut zyada badh jaega aur jisse hamare desh mein free call me mein development hua itne salon mein vaah sab bilkul khatam ho jaega aur aur deshon ke muqable hamari kaun bhi bahut hi niche chali jayegi aur itni population hone ke bawajud hamari call mein agar itni niche jaati hai toh yah hamare desh ki sarkar ki nakami hogi ki sarkar ko hamare desh ke alava bahar ke deshon ke saath apne sambandh bhi dekhne chal dekh kar chalna hota hai aur jo bhi cheezen import export hoti hai unko bhi hisab laga kar chalna hota hai toh sarkar aisa bilkul bhi nahi kar sakti hai ki vaah note chapkar poore desh ki garibi ek saath mein tale kyonki unke bus mein hota hi nahi hai yah sab kaam reserve bank of india ka hota hai

देखिए सरकार नोट छापने का काम नहीं करती है नोट छापना और बनाने का काम रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया

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Arnab Bhor

Awesome people all around xD

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सरकार अधिक मात्रा में नोट छाप कर गरीबों में बांट क्यों नहीं सकते एक ऐसी पहली बार तेज तलवार ही अपने आप में बहुत गलत है क्योंकि सरकार के पास को अथॉरिटी नहीं है कि वह अभी खुद से नूर साहब गरीबों में बांट दें अगर यह सब कर सकती फिर क्यों कुछ देश अमीर और गरीब होता है नहीं तो बात यह इंडिया हमारा देश है भारत वह अभी है थोड़ा सा मतलब ग्रोइंग करनी है तो थोड़ा सा पीछे से पाकिस्तान मोड काली छाया को पॉसिबल नहीं है कि हर एक गवर्नमेंट के पास अपनी अपनी एक लिमिट होती है इकोनॉमिक रिकॉर्डिंग नहीं साफ रखना YouTube पर काम करते अच्छे से धूप ले जाना पड़ेगा तभी यह हो सकता है

sarkar adhik matra mein note chhaap kar garibon mein baant kyon nahi sakte ek aisi pehli baar tez talwar hi apne aap mein bahut galat hai kyonki sarkar ke paas ko authority nahi hai ki vaah abhi khud se noor saheb garibon mein baant de agar yah sab kar sakti phir kyon kuch desh amir aur garib hota hai nahi toh baat yah india hamara desh hai bharat vaah abhi hai thoda sa matlab growing karni hai toh thoda sa peeche se pakistan mode kali chhaya ko possible nahi hai ki har ek government ke paas apni apni ek limit hoti hai economic recording nahi saaf rakhna YouTube par kaam karte acche se dhoop le jana padega tabhi yah ho sakta hai

सरकार अधिक मात्रा में नोट छाप कर गरीबों में बांट क्यों नहीं सकते एक ऐसी पहली बार तेज तलवार

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Sefali

Media-Ad Sales

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सरकार अधिक मात्रा में नोट नहीं छाप रही है क्योंकि मुझे ऐसा लगता है एक तो और सरकार का जो सबसे मेजर फोकस और सबसे बड़ा मुकेश है अजय भारत को डिजिटल बनाना वह चाहते कि सारे जितने भी ट्रांजैक्शन सो और जो 8 9 9 प्रश्न जितने भी ट्रांजैक्शन से और डिजिटल ही किया जाए और यहां तक कि जो पेट्रोल प्राइस विद्रोह होते हैं ATM से उसमें भी लिमिट है कि नहीं आप 5 से अधिक जब ट्रांजैक्शन करते हैं उसमें चार्जेस लगनी स्टार्ट हो जाते हैं तो मुझे सरकारी बहुत ज्यादा कोशिश कर रही है कि यह जो फिजिकल डिस्ट्रीब्यूशन ऑफ नोट है वह बहुत घटा दिया जाए और सब को डिजिटल कर दिया जाए इसीलिए एक यह एक के जो है मेरे सबसे कारण है जिसकी वजह से सरकार नोट अधिक मात्रा में नहीं छप रही है और इसका मतलब यह नहीं कि वह अधिक मात्रा में सांप ने नहीं की तो आमच जनता को गरीब बनाना चाहती है या कुछ ऐसा कुछ भी नहीं है वह फोकस कर रही है कि कैसे हमारा देश जो है और डिजिटल बने और जो भी जितने भी मंत्री ट्रांजैक्शन किसी के भी हो रहे हैं उसका ट्रैक रिकॉर्ड प्रॉपर नहीं रहे ताकि उसको इनकम टैक्स के समय ठीक से मॉनिटर किया जा सके तो मेरे सबसे इस फोटो पर से अभी फिलहाल हमारी और जो है सरकार का

sarkar adhik matra mein note nahi chhaap rahi hai kyonki mujhe aisa lagta hai ek toh aur sarkar ka jo sabse major focus aur sabse bada mukesh hai ajay bharat ko digital banana vaah chahte ki saare jitne bhi transaction so aur jo 8 9 9 prashna jitne bhi transaction se aur digital hi kiya jaaye aur yahan tak ki jo petrol price vidroh hote hain ATM se usme bhi limit hai ki nahi aap 5 se adhik jab transaction karte hain usme Charges lagani start ho jaate hain toh mujhe sarkari bahut zyada koshish kar rahi hai ki yah jo physical distribution of note hai vaah bahut ghata diya jaaye aur sab ko digital kar diya jaaye isliye ek yah ek ke jo hai mere sabse karan hai jiski wajah se sarkar note adhik matra mein nahi chhap rahi hai aur iska matlab yah nahi ki vaah adhik matra mein saap ne nahi ki toh amach janta ko garib banana chahti hai ya kuch aisa kuch bhi nahi hai vaah focus kar rahi hai ki kaise hamara desh jo hai aur digital bane aur jo bhi jitne bhi mantri transaction kisi ke bhi ho rahe hain uska track record proper nahi rahe taki usko income tax ke samay theek se monitor kiya ja sake toh mere sabse is photo par se abhi filhal hamari aur jo hai sarkar ka

सरकार अधिक मात्रा में नोट नहीं छाप रही है क्योंकि मुझे ऐसा लगता है एक तो और सरकार का जो सब

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