महाभारत में द्रौपदी वस्ञहरण क्यों हुआ था?...


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ज्योतिषी झा मेरठ (Pt. K L Shashtri)

Astrologer Jhaमेरठ,झंझारपुर और मुम्बई

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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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V. K. Bhardwaj

Parapsychologist

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DR.JAI KRISHNA PANDEY

Homoeopathic Physician

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महाभारत में द्रौपदी वस्त्र इसलिए हुआ क्योंकि द्रोपदी ने दुर्योधन का अपमान किया था उसे अंधे का पुत्र अंधा कहकर संबोधित किया जिससे दुर्गंध बहुत ही क्रोधित हो उठा था और उसने षड्यंत्र रच के शकुनी मामा का सहारा लेकर प्रपंच रचा और जुए में हराकर द्रोपदी को दासी बनाया और उसके वर्क करण का प्रयास किया

mahabharat me draupadi vastra isliye hua kyonki draupadi ne duryodhan ka apman kiya tha use andhe ka putra andha kehkar sambodhit kiya jisse durgandh bahut hi krodhit ho utha tha aur usne shadyantra rach ke shakuni mama ka sahara lekar PRAPANCH racha aur jue me harakar draupadi ko dasi banaya aur uske work karan ka prayas kiya

महाभारत में द्रौपदी वस्त्र इसलिए हुआ क्योंकि द्रोपदी ने दुर्योधन का अपमान किया था उसे अंधे

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द्रोपदी का हरण हुआ था कि पांडव कौरव से जुआ खेलते हुए द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार गए थे और अपना बदला लेने के लिए दूसरा संख्या तो द्रोपति का भरी सभा में चेलरण करवाया था

draupadi ka haran hua tha ki pandav kaurav se jua khelte hue draupadi ko dav par lagakar haar gaye the aur apna badla lene ke liye doosra sankhya toh dropati ka bhari sabha mein chelaran karvaya tha

द्रोपदी का हरण हुआ था कि पांडव कौरव से जुआ खेलते हुए द्रौपदी को दांव पर लगाकर हार गए थे और

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Ajay Sinh Pawar

Founder & M.D. Of Radiant Group Of Industries

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महाभारत में द्रोपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण होने का कारण यह था कि पांडवों ने जुआ जब खेल रहे थे कौरवों के साथ तब उन्होंने द्रौपदी को दांव पर लगाया था और वो हार गए तब द्रौपदी को भरी सभा में ले आया गया और दुशासन नाम कर दो भाई था 4 ओवर में उसने सीधा करना शुरू किया लेकिन श्री कृष्ण भगवान उन्होंने चीरते गए देते गए और पृथ्वी को निर्वस्त्र नहीं होने दिया इसलिए अच्छी रचना और वो के द्वारा दुशासन के पहरा हुआ है धन्यवाद

mahabharat mein draupadi ka vastraharan kyon hua tha mahabharat mein draupadi ka vastraharan hone ka karan yah tha ki pandavon ne jua jab khel rahe the kauravon ke saath tab unhone draupadi ko dav par lagaya tha aur vo haar gaye tab draupadi ko bhari sabha mein le aaya gaya aur dushasan naam kar do bhai tha 4 over mein usne seedha karna shuru kiya lekin shri krishna bhagwan unhone chirate gaye dete gaye aur prithvi ko nirvastra nahi hone diya isliye achi rachna aur vo ke dwara dushasan ke pahara hua hai dhanyavad

महाभारत में द्रोपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण होने का कार

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

1:29
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महाभारत जो हमारा महक हिंदू धर्म का महाभारत द्रोपदी कर्ण का जो के आ जाओ दौरान चाहिए हमारे पांडव थे और जो कौरव थे उन्होंने एक शाम को जुआ कैसे खत्म हुआ उसमें क्या हुआ कि हमारे जो पांडव थे वह से जुए में सब कुछ हार गया तेरा जी हार गए थे सब कुछ आ गया तो अंत में पांडवों ने अपनी पत्नी द्रौपदी को दांव पर लगाया और वह दुर्योधन से वह भी हार गए तो पति को सौंपा गया है तो उसको अपना अधिकार समझ कर उस ने पांडवों को नीचा दिखाने के लिए अपने भाई दुशासन को का चीर हरण करने के लिए का तो लेकिन प्रकृति का जो नियम है जो भक्ति होती है आजा पति जो कृष्ण जी की बहुत बड़ी भक्ति तो उन्होंने कृष्ण जी का नाम लिया और ने अपनी रक्षा के लिए आह्वान किया तो जब दुशासन उनका आचरण कर रहा था वह तुर्की साड़ी खेलते खेलते थक गया लेकिन जो साड़ी का जो लंबाई थी वह इतनी लंबी थी इतनी आरोन थी कि वह उसे कुछ नहीं कर पाया तो पूरा केस हुआ था यह कुल मिलाकर एक छोटी सी घटना आज छोटी सी इसे कहते हैं ना कि घटना की वजह से एक तूल देकर उसको बड़ा कर दिया गया था वरना यह महाभारत बहुत अच्छे से हो सकती थी और इसमें जमीन कांड द्रोपदी कोई मोबाइल फोन आएगा तो इस तरीके से

mahabharat jo hamara mahak hindu dharm ka mahabharat draupadi karn ka jo ke aa jao dauran chahiye hamare pandav the aur jo kaurav the unhone ek shaam ko jua kaise khatam hua usme kya hua ki hamare jo pandav the vaah se jue mein sab kuch haar gaya tera ji haar gaye the sab kuch aa gaya toh ant mein pandavon ne apni patni draupadi ko dav par lagaya aur vaah duryodhan se vaah bhi haar gaye toh pati ko saupaan gaya hai toh usko apna adhikaar samajh kar us ne pandavon ko nicha dikhane ke liye apne bhai dushasan ko ka chir haran karne ke liye ka toh lekin prakriti ka jo niyam hai jo bhakti hoti hai aajad pati jo krishna ji ki bahut baadi bhakti toh unhone krishna ji ka naam liya aur ne apni raksha ke liye aahvaan kiya toh jab dushasan unka aacharan kar raha tha vaah turkey saree khelte khelte thak gaya lekin jo saree ka jo lambai thi vaah itni lambi thi itni Aaron thi ki vaah use kuch nahi kar paya toh pura case hua tha yah kul milakar ek choti si ghatna aaj choti si ise kehte hai na ki ghatna ki wajah se ek tool dekar usko bada kar diya gaya tha varna yah mahabharat bahut acche se ho sakti thi aur isme jameen kaand draupadi koi mobile phone aayega toh is tarike se

महाभारत जो हमारा महक हिंदू धर्म का महाभारत द्रोपदी कर्ण का जो के आ जाओ दौरान चाहिए हमारे प

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Vivek Shukla

Life coach

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द्रोपति द्वारा अपने भवन में एक बार दुर्योधन का अपमान किया गया था जिसके बदला ले के लिए दुर्योधन ने मामा शकुनि के साथ मिलकर षड्यंत्र रचा और करूं तू माने एक-एक करके मूछ सब हार गए खुद को लगा भी चुके सब हार गए और अंत में जब द्रोपदी को लगाकर वह हार गए तब उसका बदला लेने के लिए माने दुशासन ने उनके वस्त्र धारण किया था लेकिन भगवान कृष्ण जी ने उनके रोल अच्छा किया और उनके वस्त्र को बढ़ाकर उनकी मर्यादा बचाई थी और अंत में दुशासन वस्त्र जीते जीते इतना थक गया खुद गिर पड़ा था ओके बाय

dropati dwara apne bhawan mein ek baar duryodhan ka apman kiya gaya tha jiske badla le ke liye duryodhan ne mama shakuni ke saath milkar shadyantra racha aur karu tu maane ek ek karke mooch sab haar gaye khud ko laga bhi chuke sab haar gaye aur ant mein jab dropadi ko lagakar wah haar gaye tab uska badla lene ke liye maane dushasan ne unke vastra dharan kiya tha lekin bhagwan krishna ji ne unke roll accha kiya aur unke vastra ko badhakar unki maryada bachai thi aur ant mein dushasan vastra jeete jeete itna thak gaya khud gir pada tha ok by

द्रोपति द्वारा अपने भवन में एक बार दुर्योधन का अपमान किया गया था जिसके बदला ले के लिए दुर्

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S Bajpay

Yoga Expert | Beautician & Gharelu Nuskhe Expert

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राम राम जी की जी की आपका प्रश्न है महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था तो मैं आपको बता दूं कि द्रौपदी के वस्त्रों के कई कारण थे सबसे बड़ा कारण था कि दुर्योधन से प्रस्ताव रखा था जो कि पुराने समय राजलोक खेला करते थे इसके बाद लगाते लगाते पांडे भारती गए मामा मामा शकुनि बहुत ही महत्वपूर्ण चला में उसकी रानी लोहार दी गई इन्होंने अपना राजू भी दांव पर लगा दिया राजू बिहार गई इसके बाद भी गंदगी को हीरो हार गई दुर्योधन द्रौपदी से बहुत नाराज था करणी सेना राजस्थान को ही मालूम था कि द्रौपदी उसकी मांग भाइयों की पत्नी और वह जानता था कि वह भी चकमा पांडव है सबसे बड़ा पांडव वही वह है करण कश्यप किस भगवान ने बता दी थी कि वह भी कुंती माता की कुमारी वर्षा की लेकिन यह जानते हुए भी कि जो भी उसकी बहू है उसके छोटे भाइयों की पत्नी हैं फिर भी कांड श्री श्री नाराज था इसमें कान का स्वयंवर के समय इसने जब प्राण मछली पर निशाना लगाने के लिए खड़ा हुआ तब द्रौपदी ने भरी सभा में कहा था मैं सूत पुत्र से शादी करो उसका अपमान किया था कान का गाना राजस्थानी चुप रहा क्योंकि ऐसा कहकर इसका अपमान किया था इन सभी कारणों से निर्मित करवाया गया पर उसका वस्तु के दुकान का और दुर्योधन का इस प्रकार अपमान न किया होता तो शायद उसका वस्त्र नहीं होता तब तबीयत प्रसूता जब उसका वस्त्र नवरात्र श्री कृष्ण को बुलाया तो भगवान कृष्ण ने आकर उसकी लज्जा की रक्षा की

ram ram ji ki ji ki aapka prashna hai mahabharat me draupadi ka vastraharan kyon hua tha toh main aapko bata doon ki draupadi ke vastron ke kai karan the sabse bada karan tha ki duryodhan se prastaav rakha tha jo ki purane samay rajlok khela karte the iske baad lagate lagate pandey bharati gaye mama mama shakuni bahut hi mahatvapurna chala me uski rani lohar di gayi inhone apna raju bhi dav par laga diya raju bihar gayi iske baad bhi gandagi ko hero haar gayi duryodhan draupadi se bahut naaraj tha karni sena rajasthan ko hi maloom tha ki draupadi uski maang bhaiyo ki patni aur vaah jaanta tha ki vaah bhi chakma pandav hai sabse bada pandav wahi vaah hai karan kashyap kis bhagwan ne bata di thi ki vaah bhi kuntee mata ki kumari varsha ki lekin yah jante hue bhi ki jo bhi uski bahu hai uske chote bhaiyo ki patni hain phir bhi kaand shri shri naaraj tha isme kaan ka sawamber ke samay isne jab praan machli par nishana lagane ke liye khada hua tab draupadi ne bhari sabha me kaha tha main sut putra se shaadi karo uska apman kiya tha kaan ka gaana rajasthani chup raha kyonki aisa kehkar iska apman kiya tha in sabhi karanon se nirmit karvaya gaya par uska vastu ke dukaan ka aur duryodhan ka is prakar apman na kiya hota toh shayad uska vastra nahi hota tab tabiyat prasuta jab uska vastra navaratra shri krishna ko bulaya toh bhagwan krishna ne aakar uski lajja ki raksha ki

राम राम जी की जी की आपका प्रश्न है महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था तो मैं आप

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Yogeshnath

Physical Instructor And Yoga Trainer

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द्रौपदी का वस्त्रहरण इसलिए हुआ क्योंकि जब द्रोपदी ने दुर्योधन का मजाक उड़ाया और जब वह पानी में गिर गया उसने कहा अंतक का बेटा अंधा की होता है इसी कारण दुर्योधन को गुस्सा आ गया और उसने योजना बनाई और द्रौपदी का वस्त्र हरण किया

draupadi ka vastraharan isliye hua kyonki jab draupadi ne duryodhan ka mazak udaya aur jab vaah paani mein gir gaya usne kaha antak ka beta andha ki hota hai isi karan duryodhan ko gussa aa gaya aur usne yojana banai aur draupadi ka vastra haran kiya

द्रौपदी का वस्त्रहरण इसलिए हुआ क्योंकि जब द्रोपदी ने दुर्योधन का मजाक उड़ाया और जब वह पानी

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Pankaj Kustala

Engineer | Asst. Professor

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महाभारत में द्रोपदी का वस्त्रहरण अंडों की वजह से वह पांडव जो है जो पति को जो द्वित्व कीड़ा के अंदर हार गए थे उसकी वजह से उनको उदासी में आवेदन को देना पड़ा था उसे तो उसकी वजह से उसका वस्त्र हरण हुआ था वहां पर

mahabharat mein draupadi ka vastraharan ando ki wajah se vaah pandav jo hai jo pati ko jo dwitwa kida ke andar haar gaye the uski wajah se unko udasi mein avedan ko dena pada tha use toh uski wajah se uska vastra haran hua tha wahan par

महाभारत में द्रोपदी का वस्त्रहरण अंडों की वजह से वह पांडव जो है जो पति को जो द्वित्व कीड़ा

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Shri Nirmal Dev Ji

Shirmad Bhagwat Kathaparwekta

3:01
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बहुत अच्छा प्रश्न है महाभारत में द्रोपदी वस्त्र हरण क्यों हुआ था वस्त्र हरण का कारण एक ही था कि एक बार शकुनी मामा दुर्योधन के साथ इंद्रप्रस्थ नगर में गए जहां धर्मराज युधिष्ठिर राजा की नगरी थी वहां से निमंत्रण आया तो भी मामा शकुनि और जो है दुर्योधन दुशासन सभी लोग गए तो वहां जो है इन्होंने सब कुछ भंग करने के लिए पहुंचे वहां यह किया कि होना था तो उस यज्ञ को भंग करना चाहते थे कि ना हो पाए किसी का लेकिन यज्ञ हुआ यज्ञ होने के बाद में जब दुर्योधन क्रोधित हो कर के चला तो महाराज युधिष्ठिर के महल में एक अजीब तरीके से कलाकारी द्वारा बनाया गया महल जो दिखता कुछ और था और सच्चाई में होता कुछ होता तो दुर्योधन ने आगे कदम बढ़ाया तो वहां पर जल ही जल था और जैसे ही कदम पर है तो जल में धूमधाम से गिर गया गिरने के बाद में पंचाली द्रोपदी ने देखा तो 28 करके हंसी और बोली अंधों के अंधे होते हैं इस बात पर क्रोधित होकर के दुर्योधन और शकुनि ने मन में ठान लिया इसका बदला जरूर लेंगे पंचाली यानी द्रोपदी को इस बात की सजा अवश्य दें इसीलिए इसी कारण द्रोपदी का वस्त्रहरण हुआ था

bahut accha prashna hai mahabharat me draupadi vastra haran kyon hua tha vastra haran ka karan ek hi tha ki ek baar shakuni mama duryodhan ke saath indraprasth nagar me gaye jaha Dharamraj yudhishthir raja ki nagari thi wahan se nimantran aaya toh bhi mama shakuni aur jo hai duryodhan dushasan sabhi log gaye toh wahan jo hai inhone sab kuch bhang karne ke liye pahuche wahan yah kiya ki hona tha toh us yagya ko bhang karna chahte the ki na ho paye kisi ka lekin yagya hua yagya hone ke baad me jab duryodhan krodhit ho kar ke chala toh maharaj yudhishthir ke mahal me ek ajib tarike se kalakari dwara banaya gaya mahal jo dikhta kuch aur tha aur sacchai me hota kuch hota toh duryodhan ne aage kadam badhaya toh wahan par jal hi jal tha aur jaise hi kadam par hai toh jal me dhumadham se gir gaya girne ke baad me panchali draupadi ne dekha toh 28 karke hansi aur boli andhon ke andhe hote hain is baat par krodhit hokar ke duryodhan aur shakuni ne man me than liya iska badla zaroor lenge panchali yani draupadi ko is baat ki saza avashya de isliye isi karan draupadi ka vastraharan hua tha

बहुत अच्छा प्रश्न है महाभारत में द्रोपदी वस्त्र हरण क्यों हुआ था वस्त्र हरण का कारण एक ही

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आपका सवाल है महाभारत में द्रौपदी वस्त्र हरण क्यों हुआ था तो इसका पीछे बहुत बड़ा राज है एक बार जब पांडवों द्वारा यज्ञ किया गया था तो उनके राजमहल में ऐसे ऐसे डिजाइन किए गए थे कि वह अवैध था तो दुर्योधन जब घूमने आया तो उनको दिखा कि यह रास्ता है और जब वह जा रहे थे तो अचानक सीखा से टकराकर के गिर गए तो इस पर द्रौपदी ने उनका मजाक उड़ाया द्रौपदी का कहना था कि अंधे का पुत्र अंधा तो यह बात दुर्योधन को बहुत ही गलत लगा और यह ठान लिया कि द्रौपदी ने मेरा मजाक उड़ाया है तो मैं भी उसका मजाक उड़ा लूंगा इसीलिए उसने चौपर बहाने से खेलकर जीत केयर और द्रौपदी का वस्त्रहरण करना है

aapka sawaal hai mahabharat me draupadi vastra haran kyon hua tha toh iska peeche bahut bada raj hai ek baar jab pandavon dwara yagya kiya gaya tha toh unke rajmahal me aise aise design kiye gaye the ki vaah awaidh tha toh duryodhan jab ghoomne aaya toh unko dikha ki yah rasta hai aur jab vaah ja rahe the toh achanak seekha se takraakar ke gir gaye toh is par draupadi ne unka mazak udaya draupadi ka kehna tha ki andhe ka putra andha toh yah baat duryodhan ko bahut hi galat laga aur yah than liya ki draupadi ne mera mazak udaya hai toh main bhi uska mazak uda lunga isliye usne chopper bahaane se khelkar jeet care aur draupadi ka vastraharan karna hai

आपका सवाल है महाभारत में द्रौपदी वस्त्र हरण क्यों हुआ था तो इसका पीछे बहुत बड़ा राज है एक

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क्यों हुआ था इस पर तो बहुत सारी तथ्य है कि महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था पर दो समक्ष रूप से जो कारण है वह कारण यही है कि जॉब भी ने दुर्योधन का अपमान किया था जब दुर्योधन इंद्रप्रस्थ आए थे और उस अपमान का बदला लेने के लिए दुर्योधन ने युद्ध क्रीड़ा की चाल चली थी और अब जब युधिष्ठिर द्रोपती को हार जाते हैं तब वह व्यक्ति को भरी सभा में बुला जाता है और उसे नंगा करने के लिए का आदेश देता है तो यही है अब इसके पीछे तो काफी सारे तथ्य हैं क्यों हुआ था शायद यह महाभारत कराने के लिए हुआ था ताकि उनका अपमान हो और महाभारत का युद्ध हो तो बहुत सारे कारण हैं परंतु जो समस्त रूप से कारण है वही है

kyon hua tha is par toh bahut saari tathya hai ki mahabharat me draupadi ka vastraharan kyon hua tha par do samaksh roop se jo karan hai vaah karan yahi hai ki job bhi ne duryodhan ka apman kiya tha jab duryodhan indraprasth aaye the aur us apman ka badla lene ke liye duryodhan ne yudh krida ki chaal chali thi aur ab jab yudhishthir draupadi ko haar jaate hain tab vaah vyakti ko bhari sabha me bula jata hai aur use nanga karne ke liye ka aadesh deta hai toh yahi hai ab iske peeche toh kaafi saare tathya hain kyon hua tha shayad yah mahabharat karane ke liye hua tha taki unka apman ho aur mahabharat ka yudh ho toh bahut saare karan hain parantu jo samast roop se karan hai wahi hai

क्यों हुआ था इस पर तो बहुत सारी तथ्य है कि महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था प

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जब द्रोपदी ने दुर्योधन दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा कहकर पुकारा MP3 और धन की जानकारी हो तो उसके मन में बदले की भावना प्रबल हो गई और उसने उस दूध युद्ध में जब देखो ना उसकी अवहेलना करने के लिए उसको मान घटाने के लिए उसका पतला करने की चेष्टा की नहीं सकते

jab draupadi ne duryodhan duryodhan ko andhe ka putra andha kehkar pukaara MP3 aur dhan ki jaankari ho toh uske man me badle ki bhavna prabal ho gayi aur usne us doodh yudh me jab dekho na uski avhelna karne ke liye usko maan ghatane ke liye uska patla karne ki cheshta ki nahi sakte

जब द्रोपदी ने दुर्योधन दुर्योधन को अंधे का पुत्र अंधा कहकर पुकारा MP3 और धन की जानकारी हो

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आपका प्रश्न है महाभारत में द्रोपती वस्त्रहरण क्यों हुआ था तो इसका उत्तर है कि महाभारत में जब पांडवों और कौरवों की भीड़ के बीच में दूध प्रिया हुई थी अर्थात जो वित्त का जुए का खेल होता है वह हो रहा था तो उससे में युधिष्ठिर ने द्रौपदी को जब वह अपना सब कुछ हार जाते हैं तो वह अंत में अपनी पत्नी द्रौपदी को दांव पर लगा देते हैं उसके पश्चात वह द्रोपती को भी हार जाते हैं इसके कारण दुर्योधन दुशासन को आदेश देता है कि द्रोपती का जाकर महल से बाल घसीटते हुए ले कर आओ क्योंकि वह मेरी दासी है और दुशासन ने द्रौपदी को बाल घसीटते हुए ले कर आ राजदरबार में और उसके आदेश देता है दुशासन और दुर्योधन के आदेश पर रोक टी के वस्त्र खोलने के आदेश देता है और दुशासन द्रोपती के वस्त्र उतारने लगता है

aapka prashna hai mahabharat me draupadi vastraharan kyon hua tha toh iska uttar hai ki mahabharat me jab pandavon aur kauravon ki bheed ke beech me doodh priya hui thi arthat jo vitt ka jue ka khel hota hai vaah ho raha tha toh usse me yudhishthir ne draupadi ko jab vaah apna sab kuch haar jaate hain toh vaah ant me apni patni draupadi ko dav par laga dete hain uske pashchat vaah draupadi ko bhi haar jaate hain iske karan duryodhan dushasan ko aadesh deta hai ki draupadi ka jaakar mahal se baal ghasitate hue le kar aao kyonki vaah meri dasi hai aur dushasan ne draupadi ko baal ghasitate hue le kar aa rajadarabar me aur uske aadesh deta hai dushasan aur duryodhan ke aadesh par rok T ke vastra kholne ke aadesh deta hai aur dushasan draupadi ke vastra utarane lagta hai

आपका प्रश्न है महाभारत में द्रोपती वस्त्रहरण क्यों हुआ था तो इसका उत्तर है कि महाभारत में

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नमस्कार आपका प्रश्न है महाभारत में द्रोपती का चीर हरण क्यों हुआ था देखिए एक बात बोला बोली जाते हैं कि भर सकता घाव तलवार का बोली का घाव भरे ना एक बार तो तलवार की जंग भी लड़ी गई है किसी के बीच में तो उसका गांव समय के साथ भर जाता है लेकिन अपन अपनी वाणी से किसी को दुख पहुंचाते हैं उसका गांव कभी नहीं भरा जा सकता अपने महाभारत में सुना होगा कि एक बार पांडवों के राज्य में और रोम में अंतर से अलग से राज्य बना लिया था तो पांडवों के राज्य में तुमको कौरवों को बुलाया गया था तो वहां पर क्या था कि डबल सिस्टम था जहां आपको पानी दिख रहा है वहां पर जमीन थी और जहां आपको जमीन बिक रही है ऑनलाइन दिख रहा है वहां पर पानी था उल्टा सिस्टम था तो उल्टा सिस्टम को पांडवों को पता सपोर्ट करो मुझे नहीं पता था उनको रूम में सबसे आगे दुर्योधन था तो दुर्योधन जैसे अंदर गया महल के तो उसने पानी को आंगन समझ के पैर रखा रूप पानी में गिर गई अभी उधर झरोखे में से द्रोपती देख रही थी द्रोपती द्रोपती की सखियां खूब खीर खिलाकर हंसी तो वही बात है गिरता है लोकल दूसरा कोई उस पर हंसता है तो गिरने वाले के दिल की दिल पर ठेस पहुंचती है तो दुर्योधन फेस भरी नजरों से उसकी तरफ देखा कि कौन हंसा तो उसकी तरफ देखा उसी टाइम कहा कि अंडे के तो अंधे ही जन्म लेते हैं जोशी ने कमेंट किया कि दुर्योधन धृतराष्ट्र का पुत्र था तथा जन्म से ही इसलिए जो तूने कमेंट कर दिया कि अंडे के तो अंधे ही जन्म लेते हैं मतलब उसको दिखाने की भी पानी है और अब वह बात दुर्योधन को चुप गई अब तो पहले से ही की जमीन भी रहने के लिए नहीं देनी है लेकिन अब तो द्रोपती भी उसका निशाना बन गई थी उस समय मेरी अपमान का बदला लूंगा फिर उन्होंने षड्यंत्र रचा मामा शकुनि के साथ मिल और पांडवों को जुए के लिए महाराज रजिस्टर को जो यह के लिए आमंत्रित किया महाराज युधिष्ठिर ने मना किया लेकिन पहले के राजाओं में यह था कि अगर आपको युद्ध के लिए लड़कियां अर्थात आप म्यूट करो अब कोई ध्वनि चौपड़ के लिए ललकार रहा है उसको प्यार को स्वीकार करना पड़ता था इसलिए झूठ के डाटा के लिए या चौपड़ पासा जो खेल रहे थे वह जुआ उसके लिए महाराज युधिष्ठिर को मानना पड़ा और वह खेलने लग गए अब वह अपना के महल जो बनाया था उन्हें वह वाला वह भी वह हार गए उसके अलावा उसमें सिस्टम था कि आपके पास जिस जिस जिस चीज का अधिपत्य है वह सब दाव पर लगा तो अपने चार भाई वह भी दांव पर लगा दी है मेरे पास कुछ नहीं है द्रोपती द्रोपती का नाम लिया पांचो पांडव की भृकुटी टेडी हुई लेकिन कर क्या सकते हैं चार पांडवों को तो जांच पहले बनाया था तो अब बोले कि आपके पास लगाने के लिए वह है आप यह कह दो कि द्रोपती आपकी संपत्ति नहीं है लेकिन महाराज युधिष्ठिर धर्मराज थे वह कभी भी झूठ नहीं बोलते थे इसलिए उनको सत्य बोलना पड़ा कि नहीं मेरी संपत्ति है और वह हार का कारण देखो जो एक बहुत बड़ा खिलाड़ी था हारने का सवाल है लेकिन समस्या यह थी बड़ी कि मामा शकुनि के पास जो पैसे थे वह एक जैसी के हड्डी के बने हुए थे और मामा शकुनि जोश को आदेश दे रहे थे वह उतनी पार्शियल आ रहे थे जितनी उनको जरूरत होती है वरना ऐसे थोड़ी होता है कि उनके पास गाड़ी नहीं है सिर्फ युधिस्टर के पास बारी है सिर्फ दुर्योधन दुर्योधन के अंतरिक्ष और अगर यह डिस्टिक के पास बारी आई तो बेवफा से उल्टे सीधे ना पड़े हमको चाहिए उतने ले सकता है किसी की बनी हुई थी इसलिए वह मामा शकुनि की दुर्योधन की बात मान रही थी और उसे के अकॉर्डिंग हर चीज हारता चला जा रहा था द्रोपती को भी हार गया अब बारिश ही दुर्योधन के अपमान का बदला लेने की दुर्योधन ने कहा कि जो व्यक्ति को भरी सभा में लेकर आओ और उसको मेरी जांघ में बैठा हूं मैं मैं अपनी दासी बना लूंगा उसको त्योहार चुकी ना चारों पांडवों को दास बनाकर मुकुट नीचे उतरा के गर्दन नीचे करा के नीचे बिठा दिया तो अब की बारी आई तो वहां पर सभा में सब लोगों ने उसका विरोध किया लेकिन दुर्योधन के सामने किसकी तलने वाली थी उसने आदेश दे दिया अब द्रोपती ग्रुप यही तो प्रॉब्लम है तो उसके केस पकड़ कर खींच के लाया गया उसको पकड़ कर खींच से मदद मांगी किस ने मदद नहीं की और वह उसी का नतीजा था कि द्रोपती नहीं बोल मारा जिसकी वजह से मुकर चीर हरण हुआ कि आपके प्रश्न का उत्तर यहां तक कंप्लीट होता है और फिर भगवान श्रीकृष्ण को आवाज देती है कि कोई मेरी रक्षा करने वाला नहीं है आप तो द्वारिकाधीश मुझे बता सकते हो द्वारकाधीश की याद करती है उसका चीर जो वस्त्र था वो इतना बढ़ गया कि दुशासन और दुर्योधन की दो भुजाएं थक गई चीज को खींचते खींचते लेकिन द्रोपती नग्न नहीं है भगवान कृष्ण भगवान श्रीकृष्ण खुद प्रकट हुई और इस लीला का अंत किया उनको इस प्रकार से चालू हुआ इसलिए इस कथा से हमें सीख मिलती है कि किसी का भी अपने शब्दों के द्वारा अपनी वाणी के द्वारा दिल ना दुखाए दिल दुखाते हैं तो उसका बदला बदला कैसे भी किसी भी हालत में हमारी इज्जत पर बात आ सकती है ध्यान रखें किसी की इज्जत के साथ खिलवाड़ आप ना करें धन्यवाद जय श्री कृष्णा

namaskar aapka prashna hai mahabharat me draupadi ka chir haran kyon hua tha dekhiye ek baat bola boli jaate hain ki bhar sakta ghaav talwar ka boli ka ghaav bhare na ek baar toh talwar ki jung bhi ladi gayi hai kisi ke beech me toh uska gaon samay ke saath bhar jata hai lekin apan apni vani se kisi ko dukh pahunchate hain uska gaon kabhi nahi bhara ja sakta apne mahabharat me suna hoga ki ek baar pandavon ke rajya me aur roam me antar se alag se rajya bana liya tha toh pandavon ke rajya me tumko kauravon ko bulaya gaya tha toh wahan par kya tha ki double system tha jaha aapko paani dikh raha hai wahan par jameen thi aur jaha aapko jameen bik rahi hai online dikh raha hai wahan par paani tha ulta system tha toh ulta system ko pandavon ko pata support karo mujhe nahi pata tha unko room me sabse aage duryodhan tha toh duryodhan jaise andar gaya mahal ke toh usne paani ko aangan samajh ke pair rakha roop paani me gir gayi abhi udhar jharokhe me se draupadi dekh rahi thi draupadi draupadi ki sakhiyan khoob kheer khilakar hansi toh wahi baat hai girta hai local doosra koi us par hansata hai toh girne waale ke dil ki dil par thes pohchti hai toh duryodhan face bhari nazro se uski taraf dekha ki kaun hansa toh uski taraf dekha usi time kaha ki ande ke toh andhe hi janam lete hain joshi ne comment kiya ki duryodhan Dhritarashtra ka putra tha tatha janam se hi isliye jo tune comment kar diya ki ande ke toh andhe hi janam lete hain matlab usko dikhane ki bhi paani hai aur ab vaah baat duryodhan ko chup gayi ab toh pehle se hi ki jameen bhi rehne ke liye nahi deni hai lekin ab toh draupadi bhi uska nishana ban gayi thi us samay meri apman ka badla lunga phir unhone shadyantra racha mama shakuni ke saath mil aur pandavon ko jue ke liye maharaj register ko jo yah ke liye aamantrit kiya maharaj yudhishthir ne mana kiya lekin pehle ke rajaon me yah tha ki agar aapko yudh ke liye ladkiya arthat aap mute karo ab koi dhwani chaupad ke liye lalkar raha hai usko pyar ko sweekar karna padta tha isliye jhuth ke data ke liye ya chaupad pasa jo khel rahe the vaah jua uske liye maharaj yudhishthir ko manana pada aur vaah khelne lag gaye ab vaah apna ke mahal jo banaya tha unhe vaah vala vaah bhi vaah haar gaye uske alava usme system tha ki aapke paas jis jis jis cheez ka adhipatya hai vaah sab daav par laga toh apne char bhai vaah bhi dav par laga di hai mere paas kuch nahi hai draupadi draupadi ka naam liya paancho pandav ki bhrikuti teddy hui lekin kar kya sakte hain char pandavon ko toh jaanch pehle banaya tha toh ab bole ki aapke paas lagane ke liye vaah hai aap yah keh do ki draupadi aapki sampatti nahi hai lekin maharaj yudhishthir Dharamraj the vaah kabhi bhi jhuth nahi bolte the isliye unko satya bolna pada ki nahi meri sampatti hai aur vaah haar ka karan dekho jo ek bahut bada khiladi tha haarne ka sawaal hai lekin samasya yah thi badi ki mama shakuni ke paas jo paise the vaah ek jaisi ke haddi ke bane hue the aur mama shakuni josh ko aadesh de rahe the vaah utani partial aa rahe the jitni unko zarurat hoti hai varna aise thodi hota hai ki unke paas gaadi nahi hai sirf yudhistar ke paas baari hai sirf duryodhan duryodhan ke antariksh aur agar yah district ke paas baari I toh bewafaa se ulte sidhe na pade hamko chahiye utne le sakta hai kisi ki bani hui thi isliye vaah mama shakuni ki duryodhan ki baat maan rahi thi aur use ke according har cheez harta chala ja raha tha draupadi ko bhi haar gaya ab barish hi duryodhan ke apman ka badla lene ki duryodhan ne kaha ki jo vyakti ko bhari sabha me lekar aao aur usko meri jaangh me baitha hoon main main apni dasi bana lunga usko tyohar chuki na charo pandavon ko das banakar mukut niche utara ke gardan niche kara ke niche bitha diya toh ab ki baari I toh wahan par sabha me sab logo ne uska virodh kiya lekin duryodhan ke saamne kiski talane wali thi usne aadesh de diya ab draupadi group yahi toh problem hai toh uske case pakad kar khinch ke laya gaya usko pakad kar khinch se madad maangi kis ne madad nahi ki aur vaah usi ka natija tha ki draupadi nahi bol mara jiski wajah se mukar chir haran hua ki aapke prashna ka uttar yahan tak complete hota hai aur phir bhagwan shrikrishna ko awaaz deti hai ki koi meri raksha karne vala nahi hai aap toh dwarikadhish mujhe bata sakte ho dwarakadheesh ki yaad karti hai uska chir jo vastra tha vo itna badh gaya ki dushasan aur duryodhan ki do bhujaen thak gayi cheez ko khichte khichte lekin draupadi nagna nahi hai bhagwan krishna bhagwan shrikrishna khud prakat hui aur is leela ka ant kiya unko is prakar se chaalu hua isliye is katha se hamein seekh milti hai ki kisi ka bhi apne shabdon ke dwara apni vani ke dwara dil na dukhaya dil dukhate hain toh uska badla badla kaise bhi kisi bhi halat me hamari izzat par baat aa sakti hai dhyan rakhen kisi ki izzat ke saath khilwad aap na kare dhanyavad jai shri krishna

नमस्कार आपका प्रश्न है महाभारत में द्रोपती का चीर हरण क्यों हुआ था देखिए एक बात बोला बोली

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Jyotsna

Homemaker

1:50
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महाभारत में युधिष्ठिर खेड़ा में हार गए थे दुर्योधन से अपना राजपाट हार गए पांचों भाई चार्ज है वह सब हार गए खुद को भी दांव पर लगा दिया हार गए चार जो खाई थी वह भी अदाओं पर लगे हमारे लास्ट में द्रोपदी वॉच उनको भी नाम पर लगाया और जहां पर लगाने के बाद जब हार गए तो वह सब दुर्योधन के दास और द्रोपदी दासी होगी और दुर्योधन ने कोई मर्यादा का ख्याल नहीं रखा और बोला वह दासी हो गई है हमारी उसको बाल उसे घसीटते हुए ले कर आओ राज महल में द्रौपदी को अब कोई महारानी नहीं है वह दासी की भांति है तो दुशासन उनको घसीटना हुआ राज महल मेला और यह बोलता है दुर्योधन किसकी साड़ी खींचकर निर्वस्त्र कर दो और दुशासन साड़ी खींचना शुरू कर देता है लेकिन श्री कृष्ण ने चीर हरण होने से बचा लिया उनकी साड़ी को इतना बड़ा किया कि दुशासन किस्त किस्त थक गया और लेकिन उनकी साड़ी नहीं उतार पाया मतलब जो अपमान करने का जो मन था उनकी हसरत नहीं पूरी हो पाई जुआ में हार जाने के कारण निरस्त करने के कारण हुआ था

mahabharat me yudhishthir kheda me haar gaye the duryodhan se apna rajpat haar gaye panchon bhai charge hai vaah sab haar gaye khud ko bhi dav par laga diya haar gaye char jo khai thi vaah bhi adaon par lage hamare last me draupadi watch unko bhi naam par lagaya aur jaha par lagane ke baad jab haar gaye toh vaah sab duryodhan ke das aur draupadi dasi hogi aur duryodhan ne koi maryada ka khayal nahi rakha aur bola vaah dasi ho gayi hai hamari usko baal use ghasitate hue le kar aao raj mahal me draupadi ko ab koi maharani nahi hai vaah dasi ki bhanti hai toh dushasan unko ghasitana hua raj mahal mela aur yah bolta hai duryodhan kiski saree khichkar nirvastra kar do aur dushasan saree khinchana shuru kar deta hai lekin shri krishna ne chir haran hone se bacha liya unki saree ko itna bada kiya ki dushasan kist kist thak gaya aur lekin unki saree nahi utar paya matlab jo apman karne ka jo man tha unki hasrat nahi puri ho payi jua me haar jaane ke karan nirast karne ke karan hua tha

महाभारत में युधिष्ठिर खेड़ा में हार गए थे दुर्योधन से अपना राजपाट हार गए पांचों भाई चार्ज

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नमस्कार मित्र आपका प्रश्न है महाभारत में द्रोपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था इसका उत्तर है क्योंकि पांडवों ने दूध कीड़ा और साथ दोनों खेलते हैं उसमें अपने जो राज्य हैं और अपने चारों भाई हैं उनके साथ द्रोपति को हार गया था इस कारण उसका वस्त्र धारण किया गया था और मैं अपने फॉलो वर्ष कहना चाहता हूं कि मेरा मोबाइल खराब हो गया था इस कारण मैं जवाब नहीं दे पाया आप मेरे अगर फॉलोअर हैं तो मुझे प्रश्न भेजिए मुंह तोड़ दूंगा और मोबाइल ठीक हो गया धन्यवाद

namaskar mitra aapka prashna hai mahabharat me draupadi ka vastraharan kyon hua tha iska uttar hai kyonki pandavon ne doodh kida aur saath dono khelte hain usme apne jo rajya hain aur apne charo bhai hain unke saath dropati ko haar gaya tha is karan uska vastra dharan kiya gaya tha aur main apne follow varsh kehna chahta hoon ki mera mobile kharab ho gaya tha is karan main jawab nahi de paya aap mere agar follower hain toh mujhe prashna bhejiye mooh tod dunga aur mobile theek ho gaya dhanyavad

नमस्कार मित्र आपका प्रश्न है महाभारत में द्रोपदी का वस्त्रहरण क्यों हुआ था इसका उत्तर है क

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Rajput Paras

Traveler

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महाभारत में द्रोपदी वस्त्र इसलिए हुआ था कि पांडव कौरव के सामने सब कुछ हार चुके थे और मामा शकुनि अर्जुन को और युधिष्ठिर को उकसाया कि आपके पास अभी आपकी पत्नी है आप उसको उसको अदाओं पर लगाओ आपकी ही उन्होंने अपने सम्मान के लिए उन्होंने अपनी पत्नी को भी दांव पर लगा दिया था और दांव पर लगाने के बाद वह हार चुके थे और हारने के बाद प्रशासन ने उनका पत्नी का वस्त्र होना द्रोपदी का किया था हारने के बाद हार गई इसीलिए उन्होंने वस्त्रहरण किया था

mahabharat mein draupadi vastra isliye hua tha ki pandav kaurav ke saamne sab kuch haar chuke the aur mama shakuni arjun ko aur yudhishthir ko ukasaya ki aapke paas abhi aapki patni hai aap usko usko adaon par lagao aapki hi unhone apne sammaan ke liye unhone apni patni ko bhi dav par laga diya tha aur dav par lagane ke baad vaah haar chuke the aur haarne ke baad prashasan ne unka patni ka vastra hona draupadi ka kiya tha haarne ke baad haar gayi isliye unhone vastraharan kiya tha

महाभारत में द्रोपदी वस्त्र इसलिए हुआ था कि पांडव कौरव के सामने सब कुछ हार चुके थे और मामा

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Arvind Kumar

Youtuber

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आपने शकुनी मामा का नाम सुना ही होगा भी या नहीं जो शकुनी मामा की कहानी स्टार्ट होती है जब कौरव पक्ष और पांडव पक्ष के बीच दोनों ने जुआ खेलना स्टार्ट किया तो कौरव पक्ष के सपोर्टर थे शकुनी मामा और पांडव पक्ष अपने से खुद खेल रहे थे शकुनी मामा ने कुछ इस तरीका से पंजा खेला की पांडव पक्ष को हराकर कौरव पक्ष को जीता दिया इसी में जब और वक्त सब कुछ जीते जीते पांडे को पूर्णता नील कर दिया था पांडव पक्ष ने अपनी बीवी को भी साथ में लगा दिया और सरकार ने के मुताबिक के मुताबिक कौरव पक्ष में पांचाली को बुलवाया और उसका वास *

aapne shakuni mama ka naam suna hi hoga bhi ya nahi jo shakuni mama ki kahani start hoti hai jab kaurav paksh aur pandav paksh ke beech dono ne jua khelna start kiya toh kaurav paksh ke supporter the shakuni mama aur pandav paksh apne se khud khel rahe the shakuni mama ne kuch is tarika se panja khela ki pandav paksh ko harakar kaurav paksh ko jita diya isi mein jab aur waqt sab kuch jeete jeete pandey ko purnata neel kar diya tha pandav paksh ne apni biwi ko bhi saath mein laga diya aur sarkar ne ke mutabik ke mutabik kaurav paksh mein panchali ko bulvaya aur uska was

आपने शकुनी मामा का नाम सुना ही होगा भी या नहीं जो शकुनी मामा की कहानी स्टार्ट होती है जब क

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Mona Kumar

Accountant

1:31
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हां तो हेलो दोस्तों आप का क्वेश्चन है कि महाभारत में द्रौपदी का वस्त्र क्यों हुआ था तो इसका मुख्य कारण है कि जब पांडव के महाराजा मराठी दृष्टि और गौरव की तरफ से दूध अकीरा का आयोजन की रचना के गया जिसमें कौरवों ने पांडवों को दूध अकीरा का आमंत्रण दिया तो अगर पांडव को आना पड़ा क्योंकि अगर पांडव नहीं आते तो एक क्षेत्रीय थे और क्षेत्रीय किसान के खिलाफ था कि वह किसी का लड़का और शिकार ना करें इसलिए उनको लड़का और शिकार करना पड़ा क्योंकि वह क्षेत्रीय थे इससे वह दूध की राह में आए और भगवान कृष्ण ने जानते थे कि मामा शकुनि डिस्ट्रिक्ट को दुरुस्त नहीं जीने देगा क्योंकि उस पार से उस पार से मामा शकुनि का गुलाम था तब मामा शौक नहीं है उसके कारण उस पैसे को अपना गुलाम बना रखा था उस पैसे को मामा शकुनि ने अपने चालबाज से जो कहा वही आता गया और क्षेत्रीय थे वह मैदान से भाग नहीं सकते थे इसलिए उन्होंने अपना सब कुछ दाव लगाते रहे कुछ सब कुछ हारने के बाद उसने महारानी द्रोपदी का भी दांव पर लगा दिया और वह भी हार गए इसके बाद खान ने आदेश दिया कि जाओ दुशासन द्रौपदी को भेजकर भी सभा में लिया ले आओ और उसका लाया गया द्रोपति को भी सभा में जोश उनके द्वारा संगठन का प्रयास किया पर ऐसा भगवान कृष्ण होने नहीं दिया

haan toh hello doston aap ka question hai ki mahabharat mein draupadi ka vastra kyon hua tha toh iska mukhya karan hai ki jab pandav ke maharaja marathi drishti aur gaurav ki taraf se doodh akira ka aayojan ki rachna ke gaya jisme kauravon ne pandavon ko doodh akira ka aamantran diya toh agar pandav ko aana pada kyonki agar pandav nahi aate toh ek kshetriya the aur kshetriya kisan ke khilaf tha ki vaah kisi ka ladka aur shikaar na kare isliye unko ladka aur shikaar karna pada kyonki vaah kshetriya the isse vaah doodh ki raah mein aaye aur bhagwan krishna ne jante the ki mama shakuni district ko durast nahi jeene dega kyonki us par se us par se mama shakuni ka gulam tha tab mama shauk nahi hai uske karan us paise ko apna gulam bana rakha tha us paise ko mama shakuni ne apne chalabaj se jo kaha wahi aata gaya aur kshetriya the vaah maidan se bhag nahi sakte the isliye unhone apna sab kuch daav lagate rahe kuch sab kuch haarne ke baad usne maharani draupadi ka bhi dav par laga diya aur vaah bhi haar gaye iske baad khan ne aadesh diya ki jao dushasan draupadi ko bhejkar bhi sabha mein liya le aao aur uska laya gaya dropati ko bhi sabha mein josh unke dwara sangathan ka prayas kiya par aisa bhagwan krishna hone nahi diya

हां तो हेलो दोस्तों आप का क्वेश्चन है कि महाभारत में द्रौपदी का वस्त्र क्यों हुआ था तो इसक

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Naren khatri

Student And Social Worker

0:53
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आपका सवाल है कि महाभारत में द्रोपदी वस्त्र हरण क्यों हुआ था तो वस्त्रहरण है इसलिए माता की क्योंकि पांडव पांडव को अपना राज्य सबको सैनिक सब कुछ कौरवों के एक खेल में हार चुके थे और और आखरी दाव द्रोपदी भरता पर द्रौपदी को दांव पर लगा दिया और द्रौपदी भी हार गए तो द्रोपदी पांडव कौरवों की हो गई इसीलिए कौरवों ने द्रौपदी को बीच फिल्में लाकर उसका वस्त्र हरण किया और वस्त्र हरण करने करने पर द्रोपदी ने भगवान कृष्ण से प्रार्थना की और भगवान कृष्ण उनकी मदद के लिए आए और उन्होंने उनकी मदद की धन्यवाद

aapka sawaal hai ki mahabharat mein draupadi vastra haran kyon hua tha toh vastraharan hai isliye mata ki kyonki pandav pandav ko apna rajya sabko sainik sab kuch kauravon ke ek khel mein haar chuke the aur aur aakhri daav draupadi bharta par draupadi ko dav par laga diya aur draupadi bhi haar gaye toh draupadi pandav kauravon ki ho gayi isliye kauravon ne draupadi ko beech filme lakar uska vastra haran kiya aur vastra haran karne karne par draupadi ne bhagwan krishna se prarthna ki aur bhagwan krishna unki madad ke liye aaye aur unhone unki madad ki dhanyavad

आपका सवाल है कि महाभारत में द्रोपदी वस्त्र हरण क्यों हुआ था तो वस्त्रहरण है इसलिए माता की

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Deepak Kumar

Life Advicer

2:51
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नमस्कार दोस्तों मेरा नाम दीपक जा जा सकता है कि महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण क्या बताऊं कि कुछ समय पहले की बात है जब जब असरानी माता उससे कुछ समय पहले की बात इसमें था कि जो पांडवों तथा कौरवों का बंटवारा हुआ था तो पांडवों को दूसरी जगह दी थी खांडवप्रस्थ जो उन्होंने जिसको इंद्रप्रस्थ बनाया था अपने रहने के लिए इंद्रप्रस्थ का जो नगर का निर्माण हुआ था उस नगर के निर्माण में जब कौरवों को बुलाया गया अन्य समस्त आर्यव्रत के राजाओं के साथ जब गौरव को विद्या अर्थात दुर्योधन को तथा अंगराज कर्ण को बुलाया गया तो यह दुर्योधन और अंगराज कर्ण ने वहां पर और तथा दुर्योधन के छोटे भाई दिशा समाजशास्त्र बता लिए थे तो किसी के राजसूय यज्ञ में किसी के कार्य में शुभ कार्य में वहां उन्होंने लड़ाई झगड़े का आरंभ किया था कि शास्त्रों का लिए थे द्रोपति क्या है उस समय चक्रवर्तिन सम्राट चक्रवर्ती सम्राट चौथे महाराज युधिष्ठिर से तो उस समय प्रॉपर्टी भी चक्रवर्ती सम्राट की थी तो उन्होंने शाम शाम राखी होने के कारण योद्धाओं से उनके शस्त्र छीन लेना एक सजा होती है इस तरह से सजा दी कि दुर्योधन अंगराज कर्ण तथा दुशासन से उनके शास्त्री की भरी सभा में लिए गए थे वापस यानी कि दंड भोगने के बाद जब दुर्योधन आप रेवा महल हस्तिनापुर आया तो दुर्योधन तथा उसके मामा शकुनि ने मिलकर यह योजना बनाई कि हम आ पांडवों तथा द्रोपति को आमंत्रित करेंगे ड्यूटी ड्यूटी खेल होता है गुटखा के लिए तो उस दिन सवार के लिए आमंत्रित किया गया हो ना उस दिन सभा में उस चीज का बदला लेने के लिए की तरह पति ने उनसे उनके शस्त्र जीने दे तो उससे उसके मस्त इस तरीके से वह बहुत पापी था तो उसे बदला लेने के लिए शस्त्र की जगह उसने वस्त्र चीज है तो इस कारण द्रौपदी का वस्त्रहरण किया गया था मेरा जो आपको कैसा लगा लाइक कीजिएगा

namaskar doston mera naam deepak ja ja sakta hai ki mahabharat mein draupadi ka vastraharan kya bataun ki kuch samay pehle ki baat hai jab jab asrani mata usse kuch samay pehle ki baat ismein tha ki jo pandavon tatha kauravon ka batwara hua tha toh pandavon ko dusri jagah di thi khandavaprasth jo unhone jisko indraprasth banaya tha apne rehne ke liye indraprasth ka jo nagar ka nirmaan hua tha us nagar ke nirmaan mein jab kauravon ko bulaya gaya anya samast aryavrat ke rajao ke saath jab gaurav ko vidya arthat duryodhan ko tatha ang raj karn ko bulaya gaya toh yeh duryodhan aur ang raj karn ne wahan par aur tatha duryodhan ke chote bhai disha samajshastra bata liye the toh kisi ke rajsuy yagya mein kisi ke karya mein shubha karya mein wahan unhone ladai jhagde ka aarambh kiya tha ki shashtro ka liye the dropati kya hai us samay chakravartin samrat chakravarti samrat chauthe maharaj yudhishthir se toh us samay property bhi chakravarti samrat ki thi toh unhone shaam shaam rakhi hone ke kaaran yoddhaon se unke shastr chin lena ek saza hoti hai is tarah se saza di ki duryodhan ang raj karn tatha dushasan se unke shastri ki bhari sabha mein liye gaye the wapas yani ki dand bhogane ke baad jab duryodhan aap reva mahal hastinapur aaya toh duryodhan tatha uske mama shakuni ne milkar yeh yojana banai ki hum aa pandavon tatha dropati ko aamantrit karenge duty duty khel hota hai gutka ke liye toh us din savar ke liye aamantrit kiya gaya ho na us din sabha mein us cheez ka badla lene ke liye ki tarah pati ne unse unke shastr jeene de toh usse uske mast is tarike se wah bahut papi tha toh use badla lene ke liye shastr ki jagah usne vastra cheez hai toh is kaaran draupadi ka vastraharan kiya gaya tha mera jo aapko kaisa laga like kijiyega

नमस्कार दोस्तों मेरा नाम दीपक जा जा सकता है कि महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण क्या बताऊं

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अगर हम महाभारत में द्रोपदी वस्त्र हरण का कारण जाने तो इसमें जब दुर्योधन महल घूमने गए थे तब उन्हें पानी तहसील पर पानी भी सिर्फ की तरह दिखाई दिया था और वे उसमें गिर पड़ता तो दवा बनती है इसका बदला लेने के लिए दुर्योधन ने सरेंडर और उसके बाद पांडवों को जुआ में हराकर द्रोपदी की बाजी लगा दी हराया और फिर उनके पास कुछ ना बता दो प्रॉपर्टी को भी उन्होंने बाजी पर लगा दिया

agar hum mahabharat mein draupadi vastra haran ka karan jaane toh isme jab duryodhan mahal ghoomne gaye the tab unhe paani tehsil par paani bhi sirf ki tarah dikhai diya tha aur ve usme gir padta toh dawa banti hai iska badla lene ke liye duryodhan ne surrender aur uske baad pandavon ko jua mein harakar draupadi ki baazi laga di haraya aur phir unke paas kuch na bata do property ko bhi unhone baazi par laga diya

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महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण फ्री हुआ था क्यों कि पांडवों यानी कि युधिष्ठिर ने द्रौपदी को दांव पर लगा दिया था उसे हार

mahabharat me draupadi ka vastraharan free hua tha kyon ki pandavon yani ki yudhishthir ne draupadi ko dav par laga diya tha use haar

महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण फ्री हुआ था क्यों कि पांडवों यानी कि युधिष्ठिर ने द्रौपदी

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Preetisingh

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महाभारत में द्रौपदी का वस्त्रहरण हुआ था वह उसके पीछे एक लंबी कहानी है जब पांडव और कौरव जो था दोनों के बीच में शतरंज का खेल हुआ जिसमें कि पांडवों लगातार कुंवारे थे और हर एक बार जाने दो उनको कुछ अपनी भेजो चाहिए थी वह देनी थी तो भारतीय आर्थिक सेवा फ्री मोड को उनके पास अब कुछ भी नहीं बचा यहां तक कि उन्होंने अपने भाइयों को भी जो था मैं उन्होंने दान कर दिया था मैंने दे दिया था तो उसकी वजह द्रोपती बजे तूने लास्ट में अपनी पत्नी द्रोपती को भी जो था वह कौरवों को दे दिया था तब कॉल में जो था उन्होंने वस्त्रहरण तब किया था कि आज पांडव जो थे वह जो भी को हार चुके थे

mahabharat mein draupadi ka vastraharan hua tha vaah uske peeche ek lambi kahani hai jab pandav aur kaurav jo tha dono ke beech mein shatranj ka khel hua jisme ki pandavon lagatar kunware the aur har ek baar jaane do unko kuch apni bhejo chahiye thi vaah deni thi toh bharatiya aarthik seva free mode ko unke paas ab kuch bhi nahi bacha yahan tak ki unhone apne bhaiyo ko bhi jo tha main unhone daan kar diya tha maine de diya tha toh uski wajah draupadi baje tune last mein apni patni draupadi ko bhi jo tha vaah kauravon ko de diya tha tab call mein jo tha unhone vastraharan tab kiya tha ki aaj pandav jo the vaah jo bhi ko haar chuke the

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