भारत में कौन सा संसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते खाने की कैंटीन खोल रखी है?...


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MD HAROON

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके द्वारा पूछा गया सवाल है भारत में कौन सा सांसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते खाने के कैंटीन खोल रखे हैं ऐसा कुछ नहीं है भारत में कोई भी सांसद गरीब नहीं है बल्कि यह सांसदों को एक फैसिलिटी दी गई है जो आज भी सस्ते खाने खा रहे हैं बल्कि भारत सरकार को यह चाहिए कि यह सुविधा सांसदों और विधायकों को न देकर के गरीब तबके के लोगों को देते हैं गरीब परिवारों को देते तो और ज्यादा अच्छा होता लेकिन आज जो सारी सुविधाएं हैं वह गरीबों को छोड़कर सबसे पहले हमारे सांसदों और विधायकों को दी जाती है आप देखिए कि जिस मोबाइल का खर्चा डेढ़ सौ रुपया महीना में कर लेते हैं आज हमारे विधायक जी को सांसद जी को मोबाइल चलाने के लिए ₹15000 टेलीफोन खर्च दिया जा रहा है तो काश यह खर्च क्यों है असुविधा बड़े लोगों को न देकर के गरीब लोगों को दिया जाता है तो और ही बेहतर होता

aapke dwara poocha gaya sawaal hai bharat me kaun sa saansad garib hai jo ki sansad bhawan me itne saste khane ke canteen khol rakhe hain aisa kuch nahi hai bharat me koi bhi saansad garib nahi hai balki yah sansadon ko ek facility di gayi hai jo aaj bhi saste khane kha rahe hain balki bharat sarkar ko yah chahiye ki yah suvidha sansadon aur vidhayakon ko na dekar ke garib tabke ke logo ko dete hain garib parivaron ko dete toh aur zyada accha hota lekin aaj jo saari suvidhaen hain vaah garibon ko chhodkar sabse pehle hamare sansadon aur vidhayakon ko di jaati hai aap dekhiye ki jis mobile ka kharcha dedh sau rupya mahina me kar lete hain aaj hamare vidhayak ji ko saansad ji ko mobile chalane ke liye Rs telephone kharch diya ja raha hai toh kash yah kharch kyon hai asuvidha bade logo ko na dekar ke garib logo ko diya jata hai toh aur hi behtar hota

आपके द्वारा पूछा गया सवाल है भारत में कौन सा सांसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते ख

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Sefali

Media-Ad Sales

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा तो नहीं है उसका संसद भवन में सिर्फ संसद ही खाना खाते हैं संसद को छोड़कर का वह बहुत दूसरे कर्मचारी भी होते हैं जो कि वहां पर खाना खाते हैं संसदों की संसद को जो पैसे मिलते होंगे जो सैलरी मिलती होगी वह बहुत अच्छी होगी गरीबी की कोई गुंजाइश ना हो वहां पर कर्मचारी है जो कि अगर वह खाना बहुत महंगा मिले तो शायद वह ना वहां पर खा पाए यह संसद की तरफ से सबके लिए एक विनती है कि आप अब जब भी है और कल तक के अंदर आप खाना खाए कम पैसों में खाई है ऐसा नहीं है कि खाली पर संसद में है आप कोई भी दूसरी गवर्मेंट Happy मल्टीनेशनल कंपनी में काम कर लीजिए कि आपकी कंपनी देती है जब भी कैंटीन में खाते हैं ऑफिस के 1 फायदे मूल्य में खाना मिलता है

aisa toh nahi hai uska sansad bhawan mein sirf sansad hi khana khate hain sansad ko chhodkar ka vaah bahut dusre karmchari bhi hote hain jo ki wahan par khana khate hain sansadon ki sansad ko jo paise milte honge jo salary milti hogi vaah bahut achi hogi garibi ki koi gunjaiesh na ho wahan par karmchari hai jo ki agar vaah khana bahut mehnga mile toh shayad vaah na wahan par kha paye yah sansad ki taraf se sabke liye ek vinati hai ki aap ab jab bhi hai aur kal tak ke andar aap khana khaye kam paison mein khai hai aisa nahi hai ki khaali par sansad mein hai aap koi bhi dusri government Happy multinational company mein kaam kar lijiye ki aapki company deti hai jab bhi canteen mein khate hain office ke 1 fayde mulya mein khana milta hai

ऐसा तो नहीं है उसका संसद भवन में सिर्फ संसद ही खाना खाते हैं संसद को छोड़कर का वह बहुत दूस

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Shubham

Software Engineer in IBM

1:45
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वात्सल्य जो आपने एक प्रश्न डाला है कि भारत में कौन सा संसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने सस्ते खाने की कैंटीन खोल रखी है जो अपनी प्रश्न डालना है यह हमेशा चर्चा में रहा है यह सोशल मीडिया और यह काफी पर चर्चा में रहा है तो वैसे मैं आपको एक एग्जांपल के तौर पर से मिलना चाहता हूं जैसे कि कि आपको बताया अगर हम इस गवर्नमेंट एंप्लोई को हटाकर अगर हम देखें कि जो प्राइवेट प्राइवेट कंपनी है जिसमें लोग प्राइवेट काम करते हैं उनकी सैलरी भी बहुत अच्छी होती है लेकिन फिर भी उनको ना प्राइवेट कंपनी में फूट-फूट कर आती है वह भी फ्री हो फ्री मिल पर कुछ कम नहीं हो फ्री ऑफ कॉस्ट होता है यह तो इसका मतलब यह नहीं है कि जो प्राइवेट एंप्लाइज है कि वह गरीब है ऐसा कुछ भी नहीं है इनकी रेगुलेशंस में जो उनकी कंपनी प्रोवाइड कर आती है इसी तरीके से अगर हम समझे समझे संसद को दूसरे मराठी अरे यह भी फॉलो करती हैं तो मुझे नहीं लगता है कि हम लोगों को इस पर उंगली उठाने चाहिए कुछ सवाल और जवाब करना चाहिए ऐसा मेरा मानना है तो बजे समझाऊंगा कि हर हर सेक्टर का हर को ऑफ गवर्नमेंट सेक्टर का या प्राइवेट सेक्टर का सबका अपना-अपना क्राइटेरिया है वो अपने रूल रेगुलेशन से जो वह फॉलो करते हैं जैसे आप देखो रेलवे में बहुत अच्छे-अच्छे रेलवे रेलवे स्कोर एंप्लॉय होते हैं जो रेलवे में काम करते हैं उनको तो घर भी दिया कर दिया जाता है ऐसा नहीं है कि उनकी सैलरी तो नहीं है कि वह खुद घर फोन नहीं कर सकते लेकिन फिर भी उनको घर दिया जाता है तो अब हम उस पर ऑब्जेक्ट तो नहीं लगा सकते ना क्योंकि उनके रूल्स रेगुलेशन को फॉलो करता है तो बस एक सिंपल सा फंडा है इसका भी तो हम अगर को इस तरीके समझेंगे तो शायद उसको कोई क्वेश्चन नहीं होना चाहिए

vatsalya jo aapne ek prashna dala hai ki bharat mein kaun sa sansad garib hai jo ki sansad bhawan mein itne saste khane ki canteen khol rakhi hai jo apni prashna dalna hai yah hamesha charcha mein raha hai yah social media aur yah kaafi par charcha mein raha hai toh waise main aapko ek example ke taur par se milna chahta hoon jaise ki ki aapko bataya agar hum is government employee ko hatakar agar hum dekhen ki jo private private company hai jisme log private kaam karte hain unki salary bhi bahut achi hoti hai lekin phir bhi unko na private company mein feet foot kar aati hai vaah bhi free ho free mil par kuch kam nahi ho free of cost hota hai yah toh iska matlab yah nahi hai ki jo private emplaij hai ki vaah garib hai aisa kuch bhi nahi hai inki reguleshans mein jo unki company provide kar aati hai isi tarike se agar hum samjhe samjhe sansad ko dusre marathi are yah bhi follow karti hain toh mujhe nahi lagta hai ki hum logo ko is par ungli uthane chahiye kuch sawaal aur jawab karna chahiye aisa mera manana hai toh baje samajhaunga ki har har sector ka har ko of government sector ka ya private sector ka sabka apna apna criteria hai vo apne rule regulation se jo vaah follow karte hain jaise aap dekho railway mein bahut acche acche railway railway score employee hote hain jo railway mein kaam karte hain unko toh ghar bhi diya kar diya jata hai aisa nahi hai ki unki salary toh nahi hai ki vaah khud ghar phone nahi kar sakte lekin phir bhi unko ghar diya jata hai toh ab hum us par object toh nahi laga sakte na kyonki unke rules regulation ko follow karta hai toh bus ek simple sa fanda hai iska bhi toh hum agar ko is tarike samjhenge toh shayad usko koi question nahi hona chahiye

वात्सल्य जो आपने एक प्रश्न डाला है कि भारत में कौन सा संसद गरीब है जो कि संसद भवन में इतने

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सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बहुत सारे लोगों का कहना है कि एक फैसिलिटी है टाइपिंग की फैसिलिटी उस जमाने में थी जब Politics समाज सेवा का एक हिस्सा था लेकिन अब तो पॉलिटिक्स एक प्रोफेसर नहीं हूं मैं गुड मॉर्निंग पॉलिटिशन अगर आप राजनीतिक आपको बहुत पैसे निश्चित तौर पर कमाने के मौके मिलते हैं और पार्लियामेंट के अंदर जितने भी आपके रिप्रजेंटेटिव सब के सब कहीं ना कहीं अगर नॉर्मल रेट पर भी खाना मिलेगा तो आराम से एयरपोर्ट करने लायक है तो वैसे मैं अब के जमाने में इस प्रथा को चलते रहने देना मुझे लगता है फिक्स न्यूसेंस इसका कोई तर्क नहीं बनता है और अगेन बिलिंग में हमारे पॉलिटिशंस जो आज के हैं उनके अंदर उसकी कमी है वह दिखाता है अगर वह छोटी सी चीज का भी खात्मा नहीं कर सकते तो मुझे लगता है यह एक बहुत बड़ी नाकामी है तो कंटेंपरेरी पॉलिटिशंस है जो अपने आप को प्रोग्रेस से बताते हैं उन सब की

bahut saare logo ka kehna hai ki ek facility hai typing ki facility us jamane mein thi jab Politics samaj seva ka ek hissa tha lekin ab toh politics ek professor nahi hoon main good morning politician agar aap raajnitik aapko bahut paise nishchit taur par kamane ke mauke milte hain aur parliament ke andar jitne bhi aapke representative sab ke sab kahin na kahin agar normal rate par bhi khana milega toh aaram se airport karne layak hai toh waise main ab ke jamane mein is pratha ko chalte rehne dena mujhe lagta hai fix nyusens iska koi tark nahi banta hai aur again billing mein hamare politicians jo aaj ke hain unke andar uski kami hai vaah dikhaata hai agar vaah choti si cheez ka bhi khatma nahi kar sakte toh mujhe lagta hai yah ek bahut badi nakami hai toh contemporary politicians hai jo apne aap ko progress se batatey hain un sab ki

बहुत सारे लोगों का कहना है कि एक फैसिलिटी है टाइपिंग की फैसिलिटी उस जमाने में थी जब Politi

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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका क्वेश्चन का पॉइंट अच्छा है कि जो सांसद रहते हैं उनको इतना शक्ति हमें Candy Crush ऋतिक के ऊपर बैठकर जाते हैं तो इसका जस्ट बेसिक में क्या है कि आप कहीं पर भी काम करते हैं तो आपको वहां पर फैसिलिटी प्रोवाइड से जाते हैं जैसे गाड़ियां हुई है खाने का फैसिलिटी हुआ मैसेज नहीं अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी में भी जाएंगे या किसी गवर्नमेंट जॉब में भी जाएंगे तो वहां का जो कंपनी का एहसास अच्छा रहता है उसमें मैसेज लिटिया खाने पीने का फैसिलिटी रहता है रहता तुम यहां पर भी जो पार्लिमेंट है क्योंकि वह किस चीज में इंटरेस्ट है हमारे कंट्री का तो वहां पर थोड़ा ज्यादा गवर्नमेंट सब्सिडी देकर फैसिलिटी प्रोवाइड की गई मेंबर ऑफ पार्लियामेंट के लिए कोई नहीं है इसको बड़ी पार्लिमेंट में है और या फिर मिलेंगे को पकड़कर बहुत दूर ले ले तू इतना कोई इंपॉर्टेंस वाली बात नहीं है यह हर ऑर्गनाइजेशन में हर कंपनी में यह फैसिलिटी दी जाती है जो

aapka question ka point accha hai ki jo saansad rehte hain unko itna shakti hamein Candy Crush ritik ke upar baithkar jaate hain toh iska just basic mein kya hai ki aap kahin par bhi kaam karte hain toh aapko wahan par facility provide se jaate hain jaise gadiyan hui hai khane ka facility hua massage nahi agar aap kisi private company mein bhi jaenge ya kisi government mein bhi jaenge toh wahan ka jo company ka ehsaas accha rehta hai usme massage litiya khane peene ka facility rehta hai rehta tum yahan par bhi jo Parliament hai kyonki vaah kis cheez mein interest hai hamare country ka toh wahan par thoda zyada government subsidy dekar facility provide ki gayi member of parliament ke liye koi nahi hai isko badi Parliament mein hai aur ya phir milenge ko pakadakar bahut dur le le tu itna koi importance wali baat nahi hai yah har organisation mein har company mein yah facility di jaati hai jo

आपका क्वेश्चन का पॉइंट अच्छा है कि जो सांसद रहते हैं उनको इतना शक्ति हमें Candy Crush ऋतिक

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Bari khan

Practicing journalist

1:33

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक बेहतरीन सवाल आपने पूछा है क्योंकि कई बार यह सवाल मेरे जहन में आया कि संसद में जब इंसान को और मतलब पहले से इतना ज्यादा सरकार तन्हा दे रही है तो उसके बाद इन सारी चीजों की क्या जरूरत है कि उनको इतना सस्ता खाना दिया जाता है संसद के अंदर तो सीधी सी बात है अगर आप किसी भी आर्गेनाईजेशन में काम करते हो चाहे वह परम आपकी सरकारी हो या गैर सरकारी तो वहां पर उस परम के हिसाब से जो भी उसके रूप होते हैं जो भी अभिलाषाएं कन्हैया जो भी फर्क है इतना सा ताल्लुक हैं अगर आप देखोगे अगर आपको आप किसी कंपनी में अगर जॉब करते हो और उसको कंपनी आपको अलाउंस देती है खाने का और रहने का तो वह कंपनी की तरफ से आपको एक तरफ से दी गई कलावंत है तो उसी तरह से जो संसद में जो लोग काम करते हैं उनके लिए यह अलाउंस दिया गया है बाकी यह कितना गलत है कितना सही है इस बात पर टिप्पणी नहीं करुंगा क्योंकि मेरा अपना मानना कुछ अलग हो सकता है और भी कुछ चीज है जो उस पर मैटर कर सकती है लेकिन सीधी सी बात है संसद में जो काम करता है उसके लिए संसद द्वारा जो भी अलार्म्स दिया जाता है जो भी सब्सिडी दी जाती है यह उसी का एक हिस्सा है और मेरा खुद का मानना यह है कि यह सस्ता खाना जो है एक बार हमें फिर से इस बात पर गौर करना चाहिए एक बार फिर से देखना चाहिए कि यह फैसला हमने सही तरीके से लिया है या नहीं

ek behtareen sawaal aapne poocha hai kyonki kai baar yah sawaal mere zahan mein aaya ki sansad mein jab insaan ko aur matlab pehle se itna zyada sarkar tanha de rahi hai toh uske baad in saree chijon ki kya zarurat hai ki unko itna sasta khana diya jata hai sansad ke andar toh seedhi si baat hai agar aap kisi bhi organisation mein kaam karte ho chahen vaah param aapki sarkari ho ya gair sarkari toh wahan par us param ke hisab se jo bhi uske roop hote hain jo bhi abhilashaen kanhaiya jo bhi fark hai itna sa talluk hain agar aap dekhoge agar aapko aap kisi company mein agar job karte ho aur usko company aapko Allowance deti hai khane ka aur rehne ka toh vaah company ki taraf se aapko ek taraf se di gayi kalavant hai toh usi tarah se jo sansad mein jo log kaam karte hain unke liye yah Allowance diya gaya hai baki yah kitna galat hai kitna sahi hai is baat par tippani nahi karunga kyonki mera apna manana kuch alag ho sakta hai aur bhi kuch cheez hai jo us par matter kar sakti hai lekin seedhi si baat hai sansad mein jo kaam karta hai uske liye sansad dwara jo bhi alarms diya jata hai jo bhi subsidy di jaati hai yah usi ka ek hissa hai aur mera khud ka manana yah hai ki yah sasta khana jo hai ek baar hamein phir se is baat par gaur karna chahiye ek baar phir se dekhna chahiye ki yah faisla humne sahi tarike se liya hai ya nahi

एक बेहतरीन सवाल आपने पूछा है क्योंकि कई बार यह सवाल मेरे जहन में आया कि संसद में जब इंसान

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