फांसी की सज़ा सुबह सूरज निकलने से पहले क्यों दी जाती है? दूसरे समय क्यों नहीं?...


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Aprameya

Co Founder CEO Vokal, Co Founder TaxiForSure, Angel Investor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बाकी लोग जब तक सो रहे होते हैं तब सोसाइटी अगर आप उसके विरुद्ध होते हैं हैंगिंग का तो वह रिएक्शन नहीं दे पाते या क्राउड जादा नहीं करते हैं यह क्रिश्चन है और यदि कल रीजन यह है कि वह शक्स को वेट नहीं करना होगा दिनभर अगर हां दोपहर 3:00 बजे को हैंगिंग है तो पूरा दिन वह बैठ कर सोचता रहेगा और वह बहुत मेंटल अगर नहीं होगा तो सुबह सुबह जब उठते हैं तो ज्यादा वह वेट नहीं करते और सोचते नहीं तो इसलिए सुबह हैंग करते हैं

baki log jab tak so rahe hote hai tab society agar aap uske viruddh hote hai hanging ka toh vaah reaction nahi de paate ya crowd zyada nahi karte hai yah christian hai aur yadi kal reason yah hai ki vaah shaks ko wait nahi karna hoga dinbhar agar haan dopahar 3 00 BA je ko hanging hai toh pura din vaah BA ith kar sochta rahega aur vaah BA hut mental agar nahi hoga toh subah subah jab uthte hai toh zyada vaah wait nahi karte aur sochte nahi toh isliye subah hang karte hain

बाकी लोग जब तक सो रहे होते हैं तब सोसाइटी अगर आप उसके विरुद्ध होते हैं हैंगिंग का तो वह रि

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Sampat Techno

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है फांसी की सजा सुबह सूरज निकलने से पहले क्यों दी जाती है दूसरे समय क्यों नहीं देखिए फांसी का सजा दे दिया जाता है क्योंकि इसका बहुत अधिक रूप से यह रीजन है उस समय सब सोते हैं मोरनी का समय होता है तो यदि फांसी की सजा किसी को दिया जाता है तो सरकार का दूसरा काम प्रभावित नहीं होता है पहला भाग दूसरा भाग की है यदि सांवेर में फांसी की सजा दिया जाता है सूर्य निकलने से पहले तो इसका नियम यह है कि जब तक वह व्यक्ति जिंदा रहता है तब तक उसे लटका कर रखा जाता है फांसी का आर्डर जी का जोरदार कोर्ट के द्वारा दिया जाता है तो वहां पर लास्ट में यह बताया जाता है कि बिल भी है टिल डेथ इसका मतलब यह हुआ कि इसको तब तक लगा के रखा जाएगा जब तक यह जिंदा रहता है तो बहुत से व्यक्ति है जिसका मतलब फांसी के दौरान यदि उसे फंदे पर लटकाया जाता है तो किसी का जाए 15 मिनट के अंदर प्राण निकल जाता जान के लिए होता है एक घंटा लग जाता है उसको चेक करती है कि क्या वह बिल्कुल जो है डेथ हो चुका है यदि बिल्कुल डेथ हो जाता है उसके बाद ही उसे फांसी पर से उतारा जाता है यह सफर किया करने में थोड़ा समय लग जाता है उसके बाद उसका अंतिम संस्कार के लिए भी परिजन को उसे सौंप दिया जाता है तो अंतिम संस्कार में भी जल्दी हो जाए जाने की टाइम ना लगे इसलिए ताबीर में सजा देकर कानूनी प्रक्रिया को जल्द ही पूरा किया जाता है और वह जो डेथ बॉडी है उसको उसे परेशान के पास रुकना पड़ता है ताकि परिजन भी जो है इस समय रहते ही उसका अंतिम संस्कार कर पाए इसीलिए सवेर में फांसी का सजा दिया जाता है

aapka prashna hai fansi ki saza subah suraj nikalne se pehle kyon di jaati hai dusre samay kyon nahi dekhiye fansi ka saza de diya jata hai kyonki iska bahut adhik roop se yah reason hai us samay sab sote hain morni ka samay hota hai toh yadi fansi ki saza kisi ko diya jata hai toh sarkar ka doosra kaam prabhavit nahi hota hai pehla bhag doosra bhag ki hai yadi saanwar me fansi ki saza diya jata hai surya nikalne se pehle toh iska niyam yah hai ki jab tak vaah vyakti zinda rehta hai tab tak use Latka kar rakha jata hai fansi ka order ji ka jordaar court ke dwara diya jata hai toh wahan par last me yah bataya jata hai ki bill bhi hai til death iska matlab yah hua ki isko tab tak laga ke rakha jaega jab tak yah zinda rehta hai toh bahut se vyakti hai jiska matlab fansi ke dauran yadi use fande par latkaaya jata hai toh kisi ka jaaye 15 minute ke andar praan nikal jata jaan ke liye hota hai ek ghanta lag jata hai usko check karti hai ki kya vaah bilkul jo hai death ho chuka hai yadi bilkul death ho jata hai uske baad hi use fansi par se utara jata hai yah safar kiya karne me thoda samay lag jata hai uske baad uska antim sanskar ke liye bhi parijan ko use saunp diya jata hai toh antim sanskar me bhi jaldi ho jaaye jaane ki time na lage isliye tabir me saza dekar kanooni prakriya ko jald hi pura kiya jata hai aur vaah jo death body hai usko use pareshan ke paas rukna padta hai taki parijan bhi jo hai is samay rehte hi uska antim sanskar kar paye isliye saver me fansi ka saza diya jata hai

आपका प्रश्न है फांसी की सजा सुबह सूरज निकलने से पहले क्यों दी जाती है दूसरे समय क्यों नहीं

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MD HAROON

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके द्वारा पूछा गया सवाल है फांसी की सजा सुबह सूरज निकलने से पहले क्यों दी जाती हैं दूसरे समय क्यों नहीं उसका मुख्य कारण एक यह के सूरज जब निकलता है तो दिन की शुरुआत होती है और दिन की शुरुआत आती है तो वह खुशियां लेकर आती है इसलिए ऐसा किसी के साथ नाइंसाफी ना हो के सूरज निकले और दिन की शुरुआत हो और किसी के साथ नाइंसाफी पेश आ जाए किसी को फांसी पर लटका दिया जाए इसलिए वह रात के जाते-जाते उस उनके आने से पहले उसे फांसी दी जाती हैं और दूसरा मुकर नहीं है क्या करूं उसका वक्त 12:00 बजे 2:00 बजे 4:00 बजे रखा जाएगा तो दिन भर उसे टच किया जाएगा जिसका मेंटली हालत खराब हो गई इसलिए रात में इंसान हो जाता है अशोक के जैसे ही वह बेदार काहे उठता है और उसे फांसी दी जाती है ताकि उसे मेंटली कोई दिक्कत न पहुंचे

aapke dwara poocha gaya sawaal hai fansi ki saza subah suraj nikalne se pehle kyon di jaati hain dusre samay kyon nahi uska mukhya karan ek yah ke suraj jab nikalta hai toh din ki shuruat hoti hai aur din ki shuruat aati hai toh vaah khushiya lekar aati hai isliye aisa kisi ke saath nainsafi na ho ke suraj nikle aur din ki shuruat ho aur kisi ke saath nainsafi pesh aa jaaye kisi ko fansi par Latka diya jaaye isliye vaah raat ke jaate jaate us unke aane se pehle use fansi di jaati hain aur doosra mukar nahi hai kya karu uska waqt 12 00 baje 2 00 baje 4 00 baje rakha jaega toh din bhar use touch kiya jaega jiska mentally halat kharab ho gayi isliye raat me insaan ho jata hai ashok ke jaise hi vaah bedar kaahe uthata hai aur use fansi di jaati hai taki use mentally koi dikkat na pahuche

आपके द्वारा पूछा गया सवाल है फांसी की सजा सुबह सूरज निकलने से पहले क्यों दी जाती हैं दूसरे

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Vatsal

Engineering Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

लिखे जो फांसी की सजा है वह हमारे देश में और सूरज निकलने से पहले दी जाती है उसका कारण यह है यह माना जाता है कि जो सूर्योदय होता है सन राइज़ होता है तब माना जाता है कि एक नए दिन की शुरुआत हो गई है और इस प्रकार से तो जेल का कोई भी है जो काम है वह कोई भी दिक्कत पैदा ना करें इसलिए सुबह सुबह ही उसे खत्म कर दिया जाता है निपटा दिया जाता है इसका दूसरा मुख्य कारण यह है कि जो भी वह सजा पा रहा है जो भी इंसान को फांसी मिलने वाली है उसको पनिशमेंट यह दिया गया है कि उसकी डेट वह है ढंग की चीज होगी उसमे दे दी जाएगी लेकिन उसको मेंटल टॉर्चर नहीं होना चाहिए और यदि वह आधे दिन बाद यह प्रोसेस होती है तो मेंटेन टॉर्चर हो गए तरीके से यहां की होने वाला है सुबह से कि अब आने वाली है इसलिए सूरत होने से पहले ही दे दिया तेरे से नए दिन की शुरुआत हो जेल के काम में नया दिन नई ढंग से

likhe jo fansi ki saza hai vaah hamare desh mein aur suraj nikalne se pehle di jaati hai uska karan yah hai yah mana jata hai ki jo suryoday hota hai san rise hota hai tab mana jata hai ki ek naye din ki shuruat ho gayi hai aur is prakar se toh jail ka koi bhi hai jo kaam hai vaah koi bhi dikkat paida na kare isliye subah subah hi use khatam kar diya jata hai nipta diya jata hai iska doosra mukhya karan yah hai ki jo bhi vaah saza paa raha hai jo bhi insaan ko fansi milne wali hai usko punishment yah diya gaya hai ki uski date vaah hai dhang ki cheez hogi usme de di jayegi lekin usko mental torture nahi hona chahiye aur yadi vaah aadhe din BA ad yah process hoti hai toh maintain torture ho gaye tarike se yahan ki hone vala hai subah se ki ab aane wali hai isliye surat hone se pehle hi de diya tere se naye din ki shuruat ho jail ke kaam mein naya din nayi dhang se

लिखे जो फांसी की सजा है वह हमारे देश में और सूरज निकलने से पहले दी जाती है उसका कारण यह है

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Apurva D

Optimistic Coder

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए फांसी की सजा सूरज निकलने से पहले देते हैं इस बारे में मुझे यह लगता है कि व्यक्ति उस टाइम पर स्वस्थ और शांत रहता है और उस टाइम पर व्यक्ति का स्वास्थ्य ठीक रहता है तू मुझे लगता है कि उस टाइम पास कर देना शायद सही माना बताओ का स्वास्थ्य केंद्र ठीक है और फिर बाद में भी लोगों को काम रहता है बाकी के भी सूरज निकलने के बाद में फांसी की सजा सूरज निकलने से पहले ही दी जाती है

dekhiye fansi ki saza suraj nikalne se pehle dete hai is BA re mein mujhe yah lagta hai ki vyakti us time par swasthya aur shaant rehta hai aur us time par vyakti ka swasthya theek rehta hai tu mujhe lagta hai ki us time paas kar dena shayad sahi mana BA tao ka swasthya kendra theek hai aur phir BA ad mein bhi logo ko kaam rehta hai BA ki ke bhi suraj nikalne ke BA ad mein fansi ki saza suraj nikalne se pehle hi di jaati hai

देखिए फांसी की सजा सूरज निकलने से पहले देते हैं इस बारे में मुझे यह लगता है कि व्यक्ति उस

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Rahul kumar

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सूर्योदय से पहले फांसी स्टेबिलिटी मॉर्निंग से लेकर इवनिंग दम स्टार्टिंग से पहले से सूचित किया जाता है कि ड्रामा ना हो कोई रिप्लाई नहीं हो

suryoday se pehle fansi stability morning se lekar evening dum starting se pehle se suchit kiya jata hai ki drama na ho koi reply nahi ho

सूर्योदय से पहले फांसी स्टेबिलिटी मॉर्निंग से लेकर इवनिंग दम स्टार्टिंग से पहले से सूचित क

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