मुसलमान लोग नहीं बहन बेटियों से शादी क्यों कर लेते हैं?...


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Mehmood Alum

Law Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मुसलमान लोग अपनी बहन या बेटियों से शादी नहीं कर सकते हैं ऐसा करना बिल्कुल भी हराम है और जो लोग ऐसा सोचते हैं उन्हें पहले अपने दिमाग की सफाई कर लेनी चाहिए

musalman log apni behen ya betiyon se shadi nahi kar sakte hain aisa karna bilkul bhi haraam hai aur jo log aisa sochte hain unhe pehle apne dimag ki safaai kar leni chahiye

मुसलमान लोग अपनी बहन या बेटियों से शादी नहीं कर सकते हैं ऐसा करना बिल्कुल भी हराम है और जो

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महेश हिन्दू

विधार्थी

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम नमस्कार दोस्तों किसी एक मुस्लिम समाज से तालुकात रखने वाले भाई ने मुझे पूछा है कि मुसलमान अपनी बहन बेटियों से ही शादी क्यों कर लेते हैं जैसे फुफेरी मेरी चचेरी तो ऐसा है कि जो मोहम्मद थे जो इस्लाम के प्रवर्तक तो कुछ लोग कहते हैं कि उन्होंने यह परंपरा शुरू की मैं इस बात से सहमत नहीं हूं कुछ से मुल्ले मौलवी कहते हैं कि बहन बेटियों की औरों की नजरों से बचाने कि मैं इस बात से भी सहमत नहीं हूं आपकी जानकारी के लिए बता दूं फिर मुस्लिमों के लिए आप सभी से पढ़िए और कुरान को बार बार पढ़िए जिस प्रकार आप एक कविता कहानी या कॉमेडी शो देखते हैं कपिल शर्मा का ठीक उसी प्रकार आप एक कुरान पढ़ कर देखिए आपको खुद ब खुद पता चल जाएगा बाकी ऐसा कुछ नहीं है जो मैंने कहा है वह मैं राष्ट्रीय के लिए कहता हूं धर्म के लिए कहता हूं जिस किसी भाई मुसलमान को मेरे से देश है या घृणा हो सकती है उससे मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता मैं मेरे धर्म के लिए जीता हूं राष्ट्र के लिए जीता हूं और जो सच्चाई है उसी को स्वीकार करता हूं वही बताऊंगा जय हिंद जय भारत

bismillah a rahman a rahim namaskar doston kisi ek muslim samaj se talukat rakhne wale bhai ne mujhe puchha hai ki musalman apni behen betiyon se hi shadi kyon kar lete hain jaise fuferi meri chacheri toh aisa hai ki jo muhammad the jo islam ke pravartak toh kuch log kehte hain ki unhone yeh parampara shuru ki main is baat se sahmat nahi hoon kuch se mulle maulavi kehte hain ki behen betiyon ki auron ki nazro se bachane ki main is baat se bhi sahmat nahi hoon aapki jankari ke liye bata doon phir muslimo ke liye aap sabhi se padhie aur quraan ko baar baar padhie jis prakar aap ek kavita kahani ya comedy show dekhte hain kapil sharma ka theek usi prakar aap ek quraan padh kar dekhie aapko khud b khud pata chal jayega baki aisa kuch nahi hai jo maine kaha hai wah main rashtriya ke liye kahata hoon dharm ke liye kahata hoon jis kisi bhai musalman ko mere se desh hai ya ghrina ho sakti hai usse mujhe koi fark nahi padta main mere dharm ke liye jita hoon rashtra ke liye jita hoon aur jo sacchai hai usi ko sweekar karta hoon wahi bataunga jai hind jai bharat

बिस्मिल्लाह ए रहमान ए रहीम नमस्कार दोस्तों किसी एक मुस्लिम समाज से तालुकात रखने वाले भाई न

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इस्लाम धर्म की शुरुआत के वक्त लगभग 560 ईसवी में इस्लाम धर्म मक्का में शुरू हुआ तो उस वक्त वहां पर इतने अज्ञानता थी कि लड़कियों को पालना और लोग पाप समझते थे और लड़कियों को पैदा होते ही जान से मार देते थे या उनको जिंदा कब्र में डाल देते तुम सामने लड़कियों को बचाने के लिए इनके वूमेन एंपावरमेंट के लिए उन्होंने क्या किया कि वे आपस में ही ताऊ चाचा मामा फूफा वगैरह में बयान के जोकर जींस होते हैं उनमें आपस में रिश्ते शुरू करा दी है उसे फायदा बाद ऐसी कोई लड़की पैदा हुई तो उसके बुआ ने या उसकी मौसी ने उसको कह दे कि हम उसकी शादी हमारे लड़के सोगी यानी कि उन्होंने उसको उसको मारने नहीं दिया उन्होंने उसको मारने नहीं दिया जिससे लड़कियों की संख्या बढ़ी और फिर यह रिवाज धीरे धीरे चलता चला गया आज भी भारत में मुस्लिम अपने परिवार ने अपने कजन से शादी करते हैं अगर ज्यादातर अवसाद या बाहर करने लगे हैं तो इस्लाम में जन्मे के मानने वाले जो मुसलमान लोग हैं वह अपनी जो सादिया अपने कचिंस में अपने घर परिवार में करते हैं उसका मतलब यह है कि एक तो दहेज प्रथा से बचा जाता है इससे और शादी के बाद अगर कोई आपसी मनमुटाव जो झगड़ा होता है तो घर परिवार के लोग मिल बैठकर कुछ को सुलझा सकते हैं और दूसरे शादी में यह भी होता है कि हम को यह पता होता है कि यह लड़की कैसे लड़का कैसा है उसका परिवार कैसा है क्योंकि वहां का परिचित होता है इसलिए अपने परिवार में शादियां की जाती है

islam dharm ki shuruat ke waqt lagbhag 560 isvi mein islam dharm makka mein shuru hua toh us waqt wahan par itne agyanata thi ki ladkiyon ko paalnaa aur log paap samajhte the aur ladkiyon ko paida hote hi jaan se maar dete the ya unko zinda kabr mein daal dete tum saamne ladkiyon ko bachane ke liye inke women empavarament ke liye unhone kya kiya ki ve aapas mein hi taau chacha mama fufa vagera mein bayan ke joker jeans hote hai unmen aapas mein rishte shuru kara di hai use fayda baad aisi koi ladki paida hui toh uske buaa ne ya uski mausi ne usko keh de ki hum uski shadi hamare ladke sogi yani ki unhone usko usko maarne nahi diya unhone usko maarne nahi diya jisse ladkiyon ki sankhya badhi aur phir yeh rivaaj dhire dhire chalta chala gaya aaj bhi bharat mein muslim apne parivar ne apne cousin se shadi karte hai agar jyadatar avasad ya bahar karne lage hai toh islam mein janme ke manne wale jo muslim log hai wah apni jo saadia apne kachins mein apne ghar parivar mein karte hai uska matlab yeh hai ki ek toh dahej pratha se bacha jata hai isse aur shadi ke baad agar koi aapasi manmutaav jo jhadna hota hai toh ghar parivar ke log mil baithkar kuch ko sulajha sakte hai aur dusre shadi mein yeh bhi hota hai ki hum ko yeh pata hota hai ki yeh ladki kaise ladka kaisa hai uska parivar kaisa hai kyonki wahan ka parichit hota hai isliye apne parivar mein shadiyan ki jati hai

इस्लाम धर्म की शुरुआत के वक्त लगभग 560 ईसवी में इस्लाम धर्म मक्का में शुरू हुआ तो उस वक्त

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smart king

Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप कहना क्या चाहते हैं आप का क्वेश्चन है क्या देखो सोचो समझो बैलेंस के ऊपर बुला लो बोल क्या रहे हैं मुसलमान लोग नहीं बहन बेटी से शादी क्यों करता है क्या है क्वेश्चन सही करिए जब जवाब दे जाना

aap kehna kya chahte hain aap ka question hai kya dekho socho samjho balance ke upar bula lo bol kya rahe hain musalman log nahi behen beti se shaadi kyon karta hai kya hai question sahi kariye jab jawab de jana

आप कहना क्या चाहते हैं आप का क्वेश्चन है क्या देखो सोचो समझो बैलेंस के ऊपर बुला लो बोल क्य

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Sk -Khan

Property

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इस्लाम में ही रिश्ता जायज है

islam mein hi rishta jayaj hai

इस्लाम में ही रिश्ता जायज है

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Preetisingh

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आदि के मुसलमानों में जो है जो अपने खुद की रियल बहन होते जैसे कि जो अपनी मां के कोख से पैदा होते उन दिनों से वह शादी नहीं कर सकते हैं और दूसरों को उनके बुआ बुआ की या उनके मौसम कोई भी दूसरों की ज्योति उनकी उनकी मां तो है मां के बच्चे नहीं होते तो उन्हें अपना एक अलग सिस्टम होता सबके ही जैसे अब हमारे हिंदू जातियों और दूसरे दूसरे रिश्तेदारों तक मैं भी शादी नहीं की जा सकती है बहुत दूर दूर तक

aadi ke musalmanon mein jo hai jo apne khud ki real behen hote jaise ki jo apni maa ke kokh se paida hote un dino se vaah shadi nahi kar sakte hain aur dusro ko unke buaa buaa ki ya unke mausam koi bhi dusro ki jyoti unki unki maa toh hai maa ke bacche nahi hote toh unhe apna ek alag system hota sabke hi jaise ab hamare hindu jaatiyo aur dusre dusre rishtedaron tak main bhi shadi nahi ki ja sakti hai bahut dur dur tak

आदि के मुसलमानों में जो है जो अपने खुद की रियल बहन होते जैसे कि जो अपनी मां के कोख से पैदा

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