एक बेटे ने अपनी बीमार मां को छत से फेंक दिया, क्या भारत धीरे-धीरे परिवार के मूल्यों को खो रहा है, जिसे इसके लिए जाना जाता था?...


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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

0:44

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं समझता हूं कि किसी एक व्यक्ति के एक्शन को पूरे देश के हिसाब से लागू करना उचित नहीं है| और यह कोई पहली बार नहीं है, कि किसी बेटे ने अपने मां बाप के साथ में दुर्व्यवहार किया हो| हां यह बात जरुर है कि यह ऐसा इंसिडेंट है कि जिसको की कैमरे में कैद कर लिया गया| और उसके बावजूद में यह बहुत बड़ा मुद्दा बन गया| लेकिन यह कोई पहला मुद्दा नहीं है| लेकिन यह हकीकत है, कि भारत में ज्यादातर बच्चे जो हैं| अपने मां बाप की सेवा करते हैं| और वह अपने मां बाप की सेवा करना अपना धर्म समझते हैं |और इसलिए मुझे ऐसा लगता नहीं किस तरीके जो आइसोलेटेड इंसिडेंट है| इससे ये कन्क्लूजन ड्रा करना चाहिए की भारत धीरे-धीरे अपने मूल्यों को खो रहा है|

main samajhata hoon ki kisi ek vyakti ke action ko poore desh ke hisab se laagu karna uchit nahi hai aur yeh koi pehli baar nahi hai ki kisi bete ne apne maa baap ke saath mein durvyavahaar kiya ho haan yeh baat zaroor hai ki yeh aisa incident hai ki jisko ki cameras mein kaid kar liya gaya aur uske bawajud mein yeh bahut bada mudda ban gaya lekin yeh koi pehla mudda nahi hai lekin yeh haqiqat hai ki bharat mein jyadatar bacche jo hain apne maa baap ki seva karte hain aur wah apne maa baap ki seva karna apna dharm samajhte hain aur isliye mujhe aisa lagta nahi kis tarike jo isolated incident hai isse ye kanklujan dra karna chahiye ki bharat dhire chahiye dhire chahiye apne mulyon ko kho raha hai

मैं समझता हूं कि किसी एक व्यक्ति के एक्शन को पूरे देश के हिसाब से लागू करना उचित नहीं है|

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखी सदियों से हमारा देश एक ऐसा देश रहा है जहां हमेशा छोटू को बड़ों का सम्मान करना सिखाया जाता है वहां उन्हें यह सिखा जाता है कि बड़े हमारे लिए एक जीवन में एक शिक्षक की तरह होते हैं और उन्हें हमेशा सम्मान दिया जाना चाहिए लेकिन आज की बदलती व्यवस्था ने इस सोच को बिल्कुल खत्म कर दिया है आज के समय में यदि किसी व्यक्ति को जो अपने पैरों पर खड़ा हो जाता है और उसके माता-पिता जिनका बहुत महत्वपूर्ण योगदान रहता है उसे यहां तक पहुंचाने में अगर वह किसी काम के नहीं रहते हैं तो यहां कोई काम नहीं कर पाते हैं तो बच्चा उन्हें अपने ऊपर एक बात समझ में आता है उनकी बीवी साथ संस्कारों को भूल जाता है और यह सोचता कि कैसी है ना कैसे करके हमें छुटकारा मिल जाए उस चीज से उस पर किसी और ज्यादातर लोग इस काम को करने के लिए उन्हें प्रदान श्रम जैसी जगह पर भेज देते हैं और बाद में उनकी कोई खोज खबर नहीं गए थे जहां तक इस घटना का सवाल है तो वहीं बेटा यह भूल गया कि उसकी माता ने उसे 9 महीने को परखा उसके माता-पिता का एकमात्र पूरी योगदान है उसे इस स्तर तक पहुंचाने में औरतों और सबसे बड़ी बात जो आज के टाइम में निराशाजनक होती है कि लोग अपने संस्कारों से दूर होते जा रहे हैं लोग अपने संस्कारों से बढ़ते जा रहे हैं किसी को यह याद नहीं है कि हमारे देश का इतिहास है वह कैसा रहा हमारा देश कितना संस्कार में दे रहा है तो मैं यही कहूंगा की बदलती व्यवस्था की वजह से जो है हमारे ज़ी युवा है वह संस्कार भूलते जा रहे हैं और कहीं ना कहीं थोड़ा बहुत जो माता-पिता ने स्ट्रीट जाना छोड़ दिया बच्चों के साथ में वह भी इस बात में उनकी बहुत मदद करता है कि वह संस्कार दिया जो सादर समाने को भूलते चली जा रहे हैं

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देखी सदियों से हमारा देश एक ऐसा देश रहा है जहां हमेशा छोटू को बड़ों का सम्मान करना सिखाया

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Hhhgnbhh

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जैसा हमे सुनने में आया है कि बेटे ने अपनी बीमार मां को छत से फेंक दिया| तो एक बहुत ही दुखनिय किस्सा सामने आया है| क्योंकि देखे तो अगर हम अपने मां बाप को इज्जत नहीं दे सकते| तो हम दुनिया में किसी को इज्जत नहीं दे सकते| अगर अपने मां-बाप के सगे नहीं हो सके| तो दुनिया में किसी के सगे नहीं हो पाएगे | तो पर सगे होने का तो विषय ही बहुत दूर आता है| अगर आप जिस व्यक्ति ने अपनी जान पर खेल कर आप को बचाया है| जिसने आपको जन्म दिया | जिसके कारण आप आज जिन्दा है| अगर आप उसकी मां के साथ अगर आप यह कर सकते हैं तो|

jaisa hume sunne mein aaya hai ki bete ne apni bimar maa ko chhat se fenk diya to ek bahut hi dukhniya kissa samane aaya hai kyonki dekhe to agar hum apne maa baap ko izzat nahi de sakte to hum duniya mein kisi ko izzat nahi de sakte agar apne maa baap ke sage nahi ho sake to duniya mein kisi ke sage nahi ho payenge | to par sage hone ka to vishay hi bahut dur aata hai agar aap jis vyakti ne apni jaan par khel kar aap ko bachaya hai jisne aapko janm diya | jiske kaaran aap aaj zinda hai agar aap uski maa ke saath agar aap yeh kar sakte hain to

जैसा हमे सुनने में आया है कि बेटे ने अपनी बीमार मां को छत से फेंक दिया| तो एक बहुत ही दुखन

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Ravi Sharma

Advocate

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत हमेशा से ही अपने पारिवारिक मूल्य संस्कृति और धर्म के लिए विश्व मंच पर विश्व गुरु की तरह जाना जाता था विगत कुछ वर्षों में इस प्रकार की घटनाएं आम हो चली हैं जब अपने माता पिता के प्रति अत्याचार और द्वेष की भावना रखने वाले युवा वर्क फ्रॉम राष्ट्रीय मंच पर दिखाई देने लगे हैं पिछले कुछ दिनों में इस प्रकार की घटनाओं में विशेषकर प्रति हुई है जैसा की हमने एक वीडियो में देखा कि अपनी बीमार मां को छत से एक लड़की ने फेंक दिया उसके बाद उसे आत्महत्या का केस पता कर पुलिस ने भी उसके उस मामले को रफा दफा कर दिया देखिए बहुत ही दुखद घटना है और इस घटना को देखकर मेरा भी कलेजा कहां किया कि किस प्रकार से एक मां जिसने अपने बेटे को कितने वर्षों तक अपने अपने छाया में रखा उसका लालन पालन किया एक बेटे ने कुछ दिनों के लिए महज 15 दिनों के लिए उसकी सेवा नहीं कर सका या अत्यंत दुखद घटना है और मुझे चढ़ मुझे लगता है कि हम पाश्चात्य पति की ओर बढ़ता रहे हैं लेकिन पाश्चात्य संस्कृति से भी कुछ अच्छी चीजें नहीं ले पा रहे हैं इस प्रकार की घटनाओं के लिए मुझे लगता है कठोरतम कानून होने चाहिए तथा किस प्रकार से सामाजिक मूल्यों में गिरावट आ रही है उसके लिए एक सामाजिक क्रांति युवा जागृति की का उद्घोष होना चाहिए तथा भारतीय संस्कृति मंत्रालय जो की एक विशेष मंत्रालय है संस्कृति व सांस्कृतिक मूल्यों को जिंदा रखने के लिए उसको भी इस प्रकार के कुछ कार्यक्रम प्रारंभ करना चाहिए जिससे कि युवाओं में वह पूर्ण वर्ग में जिस प्रकार से माता-पिता व अपने वृद्धों के प्रति सेवा भाव खत्म होता जा रहे उसकी उसको एक बार पुनः जागृत कर सके तथा समाज में यह संदेश जा सके कि भारत हमेशा से अपने माता पिता वह अपने मूल्य व संस्कृतियों का रखवाला रहा है ना कि वह इस प्रकार की घटनाओं का प्रतिबिंब पूरे विश्व में बने यह बहुत ही दुखद घटना है मैं वह मैं इसकी घोर निंदा करता हूं धन्यवाद

bharat hamesha se hi apne parivarik mulya sanskriti aur dharm ke liye vishwa manch par vishwa guru ki tarah jana jata tha vigat kuch varshon mein is prakar ki ghatnaye aam ho chali hain jab apne mata pita ke prati atyachar aur dvesh ki bhavna rakhne wale yuva work from rashtriya manch par dikhai dene lage hain pichle kuch dinon chahiye mein is prakar ki ghatnaon mein visheshkar prati hui hai jaisa ki humne ek video chahiye mein dekha ki apni bimar maa ko chhat se ek ladki ne fenk diya uske baad use aatmahatya ka case pata kar police ne bhi uske us mamle ko rafa dafa kar diya dekhie chahiye bahut hi dukhad ghatna hai aur is ghatna ko dekhkar mera bhi kaleja Kahan chahiye kiya ki kis prakar se ek maa jisne apne bete ko kitne varshon tak apne apne chaya mein rakha uska lalani palan kiya ek bete ne kuch dinon chahiye ke liye mahaj 15 dinon chahiye ke liye uski seva nahi kar saka ya atyant dukhad ghatna hai aur mujhe chadh mujhe lagta hai ki hum pashchayat chahiye pati ki oar badhta rahe hain lekin pashchayat chahiye sanskriti se bhi kuch acchi cheezen nahi le pa rahe hain is prakar ki ghatnaon ke liye mujhe lagta hai kathoratam kanoon hone chahiye tatha kis prakar se samajik mulyon mein giravat aa rahi hai uske liye ek samajik kranti yuva jagriti ki ka udghosh hona chahiye tatha bhartiya sanskriti mantralay jo ki ek vishesh mantralay hai sanskriti va sanskritik mulyon ko zinda rakhne ke liye usko bhi is prakar ke kuch karyakram prarambh karna chahiye jisse ki yuvaon mein wah poorn varg mein jis prakar se mata pita va apne vriddhon ke prati seva bhav khatam hota ja rahe uski usko ek baar punh jaagarrit kar sake tatha samaj mein yeh sandesh ja sake ki bharat hamesha se apne mata pita wah apne mulya va sanskritiyo ka rakhavala raha hai na ki wah is prakar ki ghatnaon ka pratibimb poore vishwa mein bane yeh bahut hi dukhad ghatna hai wah main iski ghoar ninda karta hoon dhanyavad

भारत हमेशा से ही अपने पारिवारिक मूल्य संस्कृति और धर्म के लिए विश्व मंच पर विश्व गुरु की त

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह घटना पिछले साल सितंबर में और राजकोट में हुई थी जहां एक 64 वर्षीय मां की हत्या उसके बेटे नहीं करती थी पुलिस ने बताया कि यह जो व्यक्ति है जिसने अपनी मां की हत्या की वह एक प्रोफेसर है और शुरू में उसने बताया था कि उसकी मां बीमार बीमार है मानसिक तौर पर और वह छत पर गजब गई तो उनका वहां पर संतुलन बिगड़ गया है जिसकी वजह से वह छत से गिर गई और उनकी मौत हो गई लेकिन बाद में सीसीटीवी फुटेज में यह पता चला की यह जो महिला थी जिनका नाम जय श्री था वह संतुलन खोने की वजह से नहीं बल्कि खुद उनके बेटे ने उन्हें छत पर ले जाकर के वहां से धक्का दिया जिससे उस उनकी मौत हुई थी तो पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है इस आदमी के खिलाफ आप प्रोफेसर के खिलाफ जिसका नाम संदीप नथवाणी है और मुझे लगता है कि जो यहां अब बहुत बिजी लाइफ हो गई है लोगों की दुआ अपनी मां को भी मां की भी हत्या करने से पीछे नहीं हट रहे हैं और लोग अपने और जो मूल्य हैं उन्हें खोते जा रहे हैं तो यह बात बिल्कुल सही नहीं है जिस मां ने हमें जन्म दिया और उसे कोई कैसे मार सकता है तो इस तरह के लोगों को तो कड़ी से कड़ी सजा देनी चाहिए सबसे पहले तो उन्होंने अपनी बीमार मां की हालत के बारे में नहीं सोचा कि अगर उन्हें कोई परेशानी है तो उनकी सेवा करनी चाहिए और ना तो उनकी हत्या कर देनी चाहिए तो मेरे मुताबिक तो यह कदम बहुत ही ज्यादा गलत है और इसमें कड़ी से कड़ी सजा होनी चाहिए

yeh ghatna pichle saal september mein aur rajkot mein hui thi jaha ek 64 varshiye maa ki hatya uske bete nahi karti thi police ne bataya ki yeh jo vyakti hai jisne apni maa ki hatya ki wah ek professor hai aur shuru mein usne bataya tha ki uski maa bimar bimar hai mansik taur par aur wah chhat par gajab gayi to unka wahan par santulan bigad gaya hai jiski wajah se wah chhat se gir gayi aur unki maut ho gayi lekin baad mein cctv futej mein yeh pata chala ki yeh jo mahila thi jinka naam jai shri tha wah santulan khone ki wajah se nahi balki khud unke bete ne unhen chahiye chhat par le jaakar ke wahan se dhakka diya jisse us unki maut hui thi to police ne maamla darj kar liya hai is aadmi ke khilaf aap professor ke khilaf jiska naam sandeep nathavani hai aur mujhe lagta hai ki jo yahan ab bahut busy life ho gayi hai logo chahiye ki dua apni maa ko bhi maa ki bhi hatya karne se piche nahi hut rahe hain aur log apne aur jo mulya hain unhen chahiye khote ja rahe hain to yeh baat bilkul sahi nahi hai jis maa ne hume janm diya aur use koi kaise maar sakta hai to is tarah ke logo chahiye ko to kadi se kadi saja deni chahiye sabse pehle to unhone apni bimar maa ki halat ke baare mein nahi socha ki agar unhen chahiye koi pareshani hai to unki seva karni chahiye aur na to unki hatya kar deni chahiye to mere mutabik to yeh kadam bahut hi jyada galat hai aur isme kadi se kadi saja honi chahiye

यह घटना पिछले साल सितंबर में और राजकोट में हुई थी जहां एक 64 वर्षीय मां की हत्या उसके बेटे

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Sameer Tripathy

Political Critic

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भीगी राजकोट में जय श्री नाम की महिला को उसके बेटे संदीप नाथ वाणी में फोर्थ फ्लोर से फेंक दिया जहां से उनकी मृत्यु हो गई जो जैसी थी थी उनको प्रणाम रेस था और वह पागल आई थी वह अपना काम खुद से नहीं कर सकती थी और संदीप जाता है उनका इकलौता बेटा था तो मदद के लिए या फिर उनकी देखभाल के लिए कोई कितना होता सहारा था संदीप अपनी मां की देखभाल नहीं करना चाहता था और तंग आकर उन्होंने अपनी 64 साल की मां को छत से फेंक दिया इस दुखद चीज कुछ मेरी रब से हो नहीं सकती एक मां अपने बेटे को बड़ा करके पालने के लिए बहुत कुछ करती है और अपने बेटे के लिए बहुत सारे सपने देखती है और जब उस बेटे को अपनी मां के लिए कुछ करने का मौका मिले तो वह गुस्से मतारी से पीछे भागता है और उससे मैं सारी से बचने के लिए उसने अपनी मां को छत से फेंक दिया लिखी मुझे जरुर लगता है कि हमारा जो भारत है हमारा हम हम जो आज की जनरेशन है हमको नैतिक मूल्य एक होते जा रहे हैं जो हमारे पूर्वजों मेथी जो हम से पहले की जनरेशन हमारे माता पिता या उनसे पहले की जनरेशन जो है वह अपने मां बाप को लेकर इतने ज्यादा कमिटेड है उसमें ज्यादा इमोशनल देगी मां बाप के लिए चारों और इनकी दुनिया घूमती थी हम सब तो ऐसे नहीं हैं लेकिन जिंदगी की भाग दौड़ में हम इतने खो गए हैं कि हम अपने मां बाप के लिए समय नहीं निकाल पा रहे हैं टी नया साल शुरु हो रहा है हम हलचल रेजोल्यूशन लेते हैं तो चाहते हैं पर आइए कोशिश करते हैं किस बारे में कैसे रेगुलेशन लेकर और कुछ नहीं तो अपने मां-बाप के लिए कुछ समय जरुर निकालेंगे और तू नैतिक मूल्यों को खो चुके हैं ना उन्हें वापस लाने का पूरा प्रयास करेंगे

bhigi rajkot mein jai shri naam ki mahila ko uske bete sandeep nath vani mein fourth floor se fenk diya jaha se unki mrityu ho gayi jo jaisi thi thi unko pranam race tha aur wah Pagal chahiye eye thi wah apna kaam khud se nahi kar sakti thi aur sandeep jata hai unka ikalauta beta tha to madad ke liye ya phir unki dekhbhal ke liye koi kitna hota sahara tha sandeep apni maa ki dekhbhal nahi karna chahta tha aur tang aakar unhone apni 64 saal ki maa ko chhat se fenk diya is dukhad cheez kuch meri rab se ho nahi sakti ek maa apne bete ko bada karke palne ke liye bahut kuch karti hai aur apne bete ke liye bahut sare sapne dekhti hai aur jab us bete ko apni maa ke liye kuch karne ka mauka mile to wah gusse matari se piche bhagta hai aur usse main saree se bachane ke liye usne apni maa ko chhat se fenk diya chahiye likhi mujhe zaroor lagta hai ki hamara jo bharat hai hamara hum hum jo aaj ki generation hai hamko naitik mulya ek hote ja rahe hain jo hamare purwaajon methi jo hum se pehle ki generation hamare mata pita ya unse pehle ki generation jo hai wah apne maa baap ko lekar itne jyada committed hai usamen chahiye jyada emotional degi maa baap ke liye charo aur inki duniya ghoomti thi hum sab to aise nahi hain lekin zindagi ki bhag daudh mein hum itne kho gaye hain ki hum apne maa baap ke liye samay nahi nikal chahiye pa rahe hain t naya saal shuru ho raha hai hum hulchul rejolyushan lete hain to chahte hain par aaiye koshish karte hain kis baare mein kaise regulation lekar aur kuch nahi to apne maa baap ke liye kuch samay zaroor nikalenge aur tu naitik mulyon ko kho chuke hain na unhen chahiye wapas lane ka pura prayas karenge

भीगी राजकोट में जय श्री नाम की महिला को उसके बेटे संदीप नाथ वाणी में फोर्थ फ्लोर से फेंक द

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Ridhima

Mass Communications Student

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इंटर एक ऐसा देश रहा है जो हर टाइम जॉइंट फैमिली के विचारों को ज्यादा बढ़ा देता है और जो सांस्कृतिक विचारों को बढ़ा देता है और यह भी है कि भारत में ज्यादातर लोग अपने पेरेंट्स को बहुत मानते हैं और उनका बहुत सेवा करते हैं बट यह जो हादसा हुआ है जहां पर एक बेटे ने अपनी बीमार मां को छत से फेंक दिया तो यह देखो तो ऐसे तो आप बोल नहीं सकते कि भारत धीरे-धीरे परिवार के मूल्य हो रहा है चिट्ठी में हड़कंप के इंसान होते हैं तो यह वैसे इंसान निकले जो बहुत ही पत्थर दिल कह दे कि जो अपनी मां को ऐसे ढकेल सके तो आप उससे एक और इंसिडेंट साथ यह नहीं कह सकते कि पूरा देश वैसा बन जाएगा यह बनने वाला है टाइप के लोग होते सोसाइटी में जो हर टाइप के काम करते हैं और यह जो बुरा काम था यह एक बूढ़े आदमी ने किया है

inter ek aisa desh raha hai jo har time joint family ke vicharon ko jyada badha deta hai aur jo sanskritik vicharon ko badha deta hai aur yeh bhi hai ki bharat mein jyadatar log apne parents ko bahut manate hain aur unka bahut seva karte hain but yeh jo hadsa hua hai jaha par ek bete ne apni bimar maa ko chhat se fenk diya to yeh dekho to aise to aap bol nahi sakte ki bharat dhire chahiye dhire chahiye parivar ke mulya ho raha hai chitthi mein hadkamp ke insaan hote hain to yeh waise insaan nikale jo bahut hi pathar dil keh de ki jo apni maa ko aise dhakel sake to aap usse ek aur incident saath yeh nahi keh sakte ki pura desh waisa ban jayega yeh banane wala hai type ke log hote society mein jo har type ke kaam karte hain aur yeh jo bura kaam tha yeh ek budhe aadmi ne kiya hai

इंटर एक ऐसा देश रहा है जो हर टाइम जॉइंट फैमिली के विचारों को ज्यादा बढ़ा देता है और जो सां

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Apurva D

Optimistic Coder

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत एक परिवार जतन करने वाला देश है जहां पर हर नाता एक आदर्श ना तामनकर हमारे सामने आता है मतलब प्राचीन काल से हर एक माता हमें कुछ ना कुछ बताता है अभी अगर देखा जाए तो यह सिचुएशन बदल रही है लोगों को अपने ऑफिस में क्यों उसे कुछ न कुछ प्रॉब्लम होती जा रही है और ना कि मतलब आप तो बच्चे अपने मां बाप मतलब इन अपने बारे में सब लोग ख्याल नहीं कर रहे अपने मतलब भाई बहन का भी ख्याल नहीं कर रहे अब यह जो आपका क्वेश्चन है स्वर्ग इससे भी यही पता चलता है कि एक मां बेटे का रिलेशन भी अभी एक बहुत ही खराब होता जा रहा है मतलब एक बेटा अगर अपनी बीमार मां का ख्याल नहीं रख रहा है तो यह कितनी शर्मनाक बात है उस्मान है उस बेटे को पाला है बड़ा किया और अगर वह मैं भी बीमार पड़ी है तो एक बेटे का उसको ऐसे फेक देना मतलब सीरियसली इमोशन लिस्ट बात हो गई है वह और यहां के यहां सही होगा कि धीरे-धीरे पारिवारिक मूल्यों को भारत को रहा है हालांकि इसका रिजल्ट हम अगर उस बेटे की मतलब ऐसे साइकोलॉजी से सूट ले तू एक बार तो यह हो सकता है कि मतलब उसके पास पैसे नहीं हो हम अपनी बीमार मां के इलाज कराने के लिए बिहाग गरीबी का परदरशन देता है हमें कि भारत में कितनी गरीबी है इसका यह मतलब नहीं है कि उसको मतलब अपनी मां को ही मार दे मेरे ख्याल से इस पर विचार होना चाहिए लोगों की साइकोलॉजी बहुत ही बदलती जा रही है और मुझे लगता है कि भारत एवं पारिवारिक मूल्यों को जा रहे हैं कहीं

dekhie chahiye bharat ek parivar jatan karne wala desh hai jaha par har nataa ek adarsh na tamanakar hamare samane aata hai matlab prachin kaal se har ek mata hume kuch na kuch batata hai abhi agar dekha jaye to yeh situation badal rahi hai logo chahiye ko apne office mein kyu use kuch n kuch problem hoti ja rahi hai aur na ki matlab aap to bacche apne maa baap matlab in apne baare mein sab log khayal nahi kar rahe apne matlab bhai behen ka bhi khayal nahi kar rahe ab yeh jo aapka question hai swarg isse bhi yahi pata chalta hai ki ek maa bete ka relation bhi abhi ek bahut hi kharab hota ja raha hai matlab ek beta agar apni bimar maa ka khayal nahi rakh raha hai to yeh kitni sharmnaak baat hai usmaan hai us bete ko pala hai bada kiya aur agar wah main bhi bimar padi hai to ek bete ka usko aise fake dena matlab siriyasali emotion list baat ho gayi hai wah aur yahan ke yahan sahi hoga ki dhire chahiye dhire chahiye parivarik mulyon ko bharat ko raha hai halaki iska result hum agar us bete ki matlab aise psychology se suit le tu ek baar to yeh ho sakta hai ki matlab uske paas paise nahi ho hum apni bimar maa ke ilaj karane ke liye bihag garibi ka paradarashan deta hai hume ki bharat mein kitni garibi hai iska yeh matlab nahi hai ki usko matlab apni maa ko hi maar de mere khayal se is par vichar hona chahiye logo chahiye ki psychology bahut hi badalati ja rahi hai aur mujhe lagta hai ki bharat evam parivarik mulyon ko ja rahe hain kahin

देखिए भारत एक परिवार जतन करने वाला देश है जहां पर हर नाता एक आदर्श ना तामनकर हमारे सामने आ

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Bari khan

Practicing journalist

1:32
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अरे भाई हिंदुस्तान के अंदर ऐसी बातें सुनकर रोंगटे खड़े हो गए मेरे इस तरह के लोग भी ज़मीन पर जिंदा है जिस मां ने आपको जवाब कि हम नहीं हैं जिंदगी भर आप को बड़ा करने के लिए न जाने कितने मासूम उठाए आपको अपने अपने पेट में रखा और तमाम आलम से है और उसके बाद एक वक्त आता है और आप उसको इतनी हिम्मत कहां से लाते हो मेरे भाई हिम्मत कहां से लाते हो सर मेरा हीरो बजा है सीधी सी क्योंकि आज हिंदुस्तान में जो वेस्टर्न कल्चर आ रहा है जितना ज्यादा जल्दी हम उसको अपना रहे हैं और उतना ज्यादा भी जिंदगी खराब होती जा रही तो अच्छी बात है पढ़ना लिखना चाहिए अच्छी चीज लेना चाहिए दूसरे कल सर से लेकर मेरे ख्याल से जिस तरह से यह साक्षरता बढ़ रही है उस हिसाब से वृद्ध आश्रम इन पर रहे हैं आप देखेंगे केरल जो इंडिया का सबसे ज्यादा साक्षरता वाला स्टेट है उसके अंदर वेदों की संख्या भी सबसे ज्यादा है तो मेरे ख्याल से अगर आप मॉडल हो रहे हो तो अच्छी बात है लेकिन यकीन रखो मेरे भाई जिसने पैदा किया है उसके साथ इस तरह की नाइंसाफी फिर तो ऊपर वाला भी आपके साथ बहुत नाइंसाफी करने वाला है तो इससे पहले कि यह आपके साथ भी हो आप बिल्कुल इस बात का ध्यान रखें

arre bhai hindustan ke andar aisi batein sunkar rongate khade ho gaye mere is tarah ke log bhi zamin par zinda hai jis maa ne aapko jawab ki hum nahi hain zindagi bhar aap ko bada karne ke liye n jaane kitne masoom uthye aapko apne apne pet mein rakha aur tamam chahiye aalam se hai aur uske baad ek waqt aata hai aur aap usko itni himmat Kahan chahiye se late ho mere bhai himmat Kahan chahiye se late ho sar mera hero baja hai sidhi si kyonki aaj hindustan mein jo western culture aa raha hai jitna jyada jaldi hum usko apna rahe hain aur utana chahiye jyada bhi zindagi kharab hoti ja rahi to acchi baat hai padhna likhna chahiye acchi cheez lena chahiye dusre chahiye kal sar se lekar mere khayal se jis tarah se yeh saksharta badh rahi hai us hisab se vriddh ashram in par rahe hain aap dekhenge kerala jo india ka sabse jyada saksharta wala state hai uske andar vedo ki sankhya bhi sabse jyada hai to mere khayal se agar aap model ho rahe ho to acchi baat hai lekin yakin rakho mere bhai jisne paida kiya hai uske saath is tarah ki nainsafi phir to upar wala bhi aapke saath bahut nainsafi karne wala hai to isse pehle ki yeh aapke saath bhi ho aap bilkul is baat ka dhyan rakhen

अरे भाई हिंदुस्तान के अंदर ऐसी बातें सुनकर रोंगटे खड़े हो गए मेरे इस तरह के लोग भी ज़मीन प

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