महाभारत की रचना किस भाषा में है?...


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Deepak

Godly Sewa Mai Samrpit

8:57
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नमस्कार भाइयों और बहनों सवाल है कि महाभारत की रचना किस भाषा में है सबसे पहले पहले वेदव्यास जी ने स्लोगन भले उन्हें पूरा संस्कृत में दिया था बाद में फिर हिंदी में भी बना कर ब्रिज भी बना और भारत के अनेक भाषाएं जितने हैं सभी भाषा में कन्वर्ट हो वो धीरे धीरे जैसे-जैसे समय गुजरता गया बहुत सारे साधु संत ऋषि मुनि आए वह भी अपनी अपनी बातों को ने अपनी मतों को उसमें महाभारत में जोड़ा कहते हैं कि शुरू शुरू में जब महाभारत की रचना रची गई थी उसमें टोटल वेदव्यास जी के द्वारा जो लिखी गई थी लगभग 700 800 श्लोक के टोटल महाभारत और गीता ज्ञान में मात्र 70 से अधिक लोग की गीता थी जिसमें 18 अध्याय था परंतु बाद में क्या होता है कि जो भी साधु संत ऋषि मुनि आते जाते हैं वह भी अपनी अपनी बातों को उस में ऐड करते जाते हैं अपनी अपनी बातों में और अपनी-अपनी विचारधारा क्योंकि कहते हैं कि महाभारत या गीत ज्ञान था उसका जम्मू विस्तार करते थे उसको समझते थे उसको क्लियर करते थे तो उनके अंदर बहुत सारी कोई और गहरी जहाज रहस्य आध्यात्मिक बातें समझ में आती थी जो बहुत अच्छा लगता था उनको उन्होंने भी अपनी अपनी मतों को अपनी बातों को उसमें और जोड़ा तो जोड़ते जोड़ते जो 7080 स्थलों की गीता थी जो वेदव्यास जी के द्वारा ओरिजिनल लिखी गई थी उसमें वह जुड़ते जुड़ते 700 800 शुरू हो गए टोटल 18 अध्याय में कहीं तो स्लो कैसे थे कि वेदों में लिखा गया था चारों वेद माने जाते रिंग वेद सामवेद यजुर्वेद और उनमें से भी उठा उठा कर दिया गया ज्यादातर पुरस्कृत किए थे वह बातें भी इसमें जोड़ दी गई ओरिजिनल जो गीता में थे वह चार चार लाइन की जो लोग थे वह ओरिजिनल ते हैं बाकी दो दो लाइन के जो जोड़े गए थे बाद में वह अपनी मनमर्जी से कई कई जगह से उठा उठा किसने ला लिया गया था ऐसे ही महाभारत में भी छोड़ दिया गया और महाभारत के जो 708 लोग थे लगभग वह शुरू शुरू में जो पहले लिखा गया भैया जी के द्वारा उसमें भी जोड़ते जोड़ते जोड़ते जो आज 7080 कर जांच शुरु बनी बस एक मोटी किताब बन गई और मोटी किताब हो गई वह इस प्रकार से और उसका फिर भी विस्तार किया गया तो बहुत सारी बातें बहुत सारी भाषाओं में किया गया जो आज भी पूरे वर्ल्ड में नंबर वन किताब जो मानी जाती है गीता का ही माना जाता है और इसमें फायदा क्या हुआ कि दूसरी तरफ से धर्मों में उनको भी अपने जीवन के बारे में समझने में समाज को परिवार को समझने में चलाने में मिली तो सही लेकिन ओरिजिनल में जो बातें भगवान की थी भगवान की बातों में और सारी बातें भी जोड़ दें कि कार जो मीन भगवान थे गीता को पढ़कर मालूम पड़े वह चुप बे को भगवान उनको पढ़ने के बाद में गीता का पता नहीं पड़ता कि कौन है भगवान क्योंकि उस गीता के अनुसार भगवान तो होना चाहिए कि निराकार ज्योति बिंदु क्योंकि उनमें उन्होंने स्पष्ट बोला गया कि अर्जुन मैं अजन्मा हूं मेरा कार हूं ज्योति बिंदु हूं परकाया प्रवेश करता हूं मैं जन्म मरण रहित हूं मैं ज्ञान गुण सागर हूं मैं तुम्हारी तरह जन्म मरण नहीं लेता परंतु आप कृष्ण को भी उसने बता दिया उसमें इसीलिए महाभारत का किताब के ऊपर लिखा दे श्रीमद भगवत गीता और अंदर भी लिखा क्या भगवान हुआ लेकिन बाद में लोगों ने उसको क्या समझा कृष्ण जी के कृष्ण वाच्य तो नहीं था भगवान हुआ था लेकिन उसने किसने का नाम समझ लिया जाता है कि कृष्ण जी बोल रहे हैं कि बाद में मिस्टेक हुआ और उन्होंने कोई भगवान समझ गया ओग्गी गीता के अनुसार और कृष्ण जी का जन्म मरण कब है वह परकाया प्रवेश शुरू हुए थे वह अपने शरीर में खुद आए थे किसी और के शरीर में नहीं घुसे अभी जन्म होता है के लिए कृष्ण जन्माष्टमी बनाते हैं रामनवमी मनाते परशुराम जयंती मनाते हैं उनके सारे जन्म मनाया जाता है मदन भैया उनका लेकिन भगवान का जन्म नहीं होता है क्योंकि वह भगवान गीता जो ज्ञान सुने थे वह भगवान कहां थे ताकि खुदा अल्लाह परमात्मा ईश्वर अब उस ईश्वर का कभी जन्म नहीं होता है और वही जो गीता का असली भगवान था वही भगवान खुदा भी है अगर यह निराकार ज्योति बिंदु के बारे में किसी को समझ में आता क्योंकि हम सब आत्माएं हैं उस गीता ज्ञान के अनुसार तो हम आत्मा को पीता भी एक निराकार ज्योति बिंदु आत्मा ही होना चाहिए और वह आत्मा ऐसा होगा कि जो जन्म नहीं लेगा लेकिन देवी-देवता है ना 33 करोड़ जिसमें रामकृष्णन मानस्कृति स्कूल सब देवी जातक का जन्म मरण होता तो भगवान देवी देवताओं से भी ऊपर है जो गॉड कहलाता है मदन जी यानी जनरेट सिस्टम को जनरेट करने वाला ज्ञानी उसको फिर चलाने वाला हड्डी अनुष्का डिस्ट्रक्शन कभी ना कर देने वाली ऑडी गॉड गॉड परमात्मा हुआ लेकिन इस बात को समझ नहीं पाए लोगों ने और कृष्ण को भगवान समझ कर मुझे उनको ही आज तक उतर आए हैं जो कि वह देवता थे लॉर्ड ऑफ कृष्णा थे वह गॉड ऑफ कृष्णा नहीं है वह उनको गॉडफादर नहीं कह सकते इसमें जी को भी ऑपरेटर है सृष्टि को चलाने का काम करते हैं शंकर जी डिस्ट्रक्शन का और ब्रह्मा जी का नंबर लकी जनरेट करते हैं इसीलिए जिओडी कहलाते ना तो गॉड ऊपरवाला हुआ और यह ब्रह्मा विष्णु में भी बताए हैं यह बातें जो थी उतनी बातें जो छुप गई क्योंकि लोग अपने आप को भी नहीं जानते थे कि हम आत्माएं आप उस ज्ञान में सुनते पढ़ते महात्मा श्री नहीं फिर भी अपने आप को मनुष्य ही मानते हैं आत्मा नहीं मांगते जब आत्मा माने तब जरूरत माता-पिता भी ढूंढ ले कि कौन है वह पिता तब पता पड़ेगा हम आत्मा का पिता तुम ही हो गई कि निराकर ज्योति जिन जिन को इस्लाम धर्म में भी खुदा ज्योति बिंदु कहा जाता है ज्योतिर्लिंग के वह ज्योति बिंदु कोई नूर ए इलाही कहते हैं खुदा नूर ए इलाही इसी तरह से सिख धर्म में भी एक ओंकार निराकार ज्योति बिंदु कोई कहां गया था जो उन्होंने गीता का ज्ञान सुना अपनी ज्योति बिंदु को ही सिख धर्म ईसाई धर्म में उन्होंने बोला कि गाड़ी की लाइट भगवान लाइट एक रोशनी तो जब भगवान अगर कृष्ण को नहीं बनाया जाता गलत नहीं बोला जाता गलती से तो ज्योति बिंदु का घर बात रहती तो कोई दूसरा धर्म शास्त्र बनने की आवश्यकता हिंदी थी दूसरे धर्मों को इस धरती पर आने का धर्म आत्माओं को आने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती जो ज्योति बिंदु का फिर से ज्ञान बताते सुनाते समझाते आना इसीलिए हुआ क्योंकि यहां पर मिस्टेक हुआ था इसलिए भगवान को भी जरूरत पड़ा कि लालू ने दूसरे धर्मात्मा को भेजें यह धरती पर जाकर लोगों को फिर मेरे बारे में बताएं इसीलिए अलग-अलग धर्म है लेकिन फिर भी गीता का ज्ञान सभी धर्मों से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है क्योंकि इसमें किसी भी धर्म जाति पाति मजहब का विरोध नहीं करते हैं सबको मानवता और इंसानियत की दृष्टि से देखा जाए इसमें किसी के साथ में कोई जोर जबरदस्ती करके उसमें धर्म में कन्वर्ट करो ऐसा मन भाव है तो कुछ भी नहीं बाकी सब धर्मों में है उनको अपने धर्म में मिला नाम बना लेना ऐसा करने से वो समझते हैं कि स्वर्ग में चले जाएंगे जन्नत में जाएंगे वही तुम्हें जाएंगे खुदा उनको मिलेगा है जो सामान करो दूसरों को मारना पीटना जबरदस्ती शादी ब्याह कर ले ना करा देना रेप बलात्कार कर देना ऐसे ऐसे करते हैं और सोचते कि वह तो उल्टा वह हिंसक रास्ते पर चले गए रास्ते में इंसानियत भूल जाता है इसलिए भगवान ने कहा था कि अनेक धर्मों का में विनाश कर देता हूं और एक फिर से सत्य धर्म की स्थापना करता हूं तो वह वह ओरिजिनल आकर फिर से गीता सुनाते हैं यह तो वेद जी के द्वारा लिखा हुआ लेकिन पूरी जिंदगी तांबा की सुनाते तो पता पड़ता है कि कैसा कौन भगवान आकर सच्चा ज्ञान देते हैं और यह ज्ञान जो दिए हैं वहीं ज्ञान विभा कुमारी समिति जा रही है कि ब्रह्मा कुमारीज का खुद का वह ज्ञान नहीं है भगवान में ज्ञान दिया है और वह 7 दिन का कोर्स के रूप में जो बताते हैं तो उसमें ही वह बातें क्लियर होती है तब जाकर मैं पता करता कि भगवान आकर अपना कार्य कर रहे तो आप सुनेंगे ब्रम्हाकुमारी का कोर्स या फिर 7 दिन का कोर्स आफ यूट्यूब पर एक बेकरार निकलेगी करते हैं तो भी आपको पता पड़ सकता है और कुछ कर सकती हो ना दिन का तो आपको पूरा क्लियर हो जाएगा नमस्कार ओम शांति

namaskar bhaiyo aur bahnon sawaal hai ki mahabharat ki rachna kis bhasha me hai sabse pehle pehle vedvyas ji ne slogan bhale unhe pura sanskrit me diya tha baad me phir hindi me bhi bana kar bridge bhi bana aur bharat ke anek bhashayen jitne hain sabhi bhasha me convert ho vo dhire dhire jaise jaise samay guzarta gaya bahut saare sadhu sant rishi muni aaye vaah bhi apni apni baaton ko ne apni maton ko usme mahabharat me joda kehte hain ki shuru shuru me jab mahabharat ki rachna rachi gayi thi usme total vedvyas ji ke dwara jo likhi gayi thi lagbhag 700 800 shlok ke total mahabharat aur geeta gyaan me matra 70 se adhik log ki geeta thi jisme 18 adhyay tha parantu baad me kya hota hai ki jo bhi sadhu sant rishi muni aate jaate hain vaah bhi apni apni baaton ko us me aid karte jaate hain apni apni baaton me aur apni apni vichardhara kyonki kehte hain ki mahabharat ya geet gyaan tha uska jammu vistaar karte the usko samajhte the usko clear karte the toh unke andar bahut saari koi aur gehri 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नमस्कार भाइयों और बहनों सवाल है कि महाभारत की रचना किस भाषा में है सबसे पहले पहले वेदव्यास

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