हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज़्यादा महत्व क्यों नहीं देते?...


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मित्रों नमस्कार हमारे समाज में लोकप्रियता को ज्यादा महत्व नहीं देता है कि यह शारीरिक आकर्षण को देख कर के अपने काम वासना की पूर्ति के लिए चाहते हैं एक दूसरे के पैदा करते हैं बहुत लोग जो विवाह के पहले ही संबंध बनाना शुरु कर देते हैं और कई सालों तक संबंध बनाते हैं उसके बाद उसे बता कर सकता हो जाता है तो छोड़ देता है इसलिए कैंडीबार हो जाए सटीक नहीं माना जाता है इसके साथ में जो मां-बाप का विवाह करते हैं तो एक सामाजिक बंधन होता है और यह होता है कि सेज है अगर हम एक दूसरे के साथ छोड़ेंगे 12 से बताएंगे कुछ दबाव डालेगा हमारे ऊपर कानूनी कार्रवाई है पत्नी एक दूसरे पर अपना कर्तव्य समझकर के एक दूसरे का यह सहयोग करते हैं और इसलिए वो समय एवं संबंध लंबे समय से प्रेम विवाह की सारी रात होता है इस वजह से ज्यादा रुपए में चलता है आ कर सकता है और उनको लगता है कि समाज दबाव डाल रहा है पापा तो आर्डर लेने यह शादी ठीक नहीं है एक दूसरे की हत्या कर दी उतारू हो जाते हैं प्रेम विवाह करें तो समय-समय कम से कम 100 साल और पापा और अभी शादी विवाह का धन्यवाद

mitron namaskar hamare samaj me lokpriyata ko zyada mahatva nahi deta hai ki yah sharirik aakarshan ko dekh kar ke apne kaam vasana ki purti ke liye chahte hain ek dusre ke paida karte hain bahut log jo vivah ke pehle hi sambandh banana shuru kar dete hain aur kai salon tak sambandh banate hain uske baad use bata kar sakta ho jata hai toh chhod deta hai isliye kaindibar ho jaaye sateek nahi mana jata hai iske saath me jo maa baap ka vivah karte hain toh ek samajik bandhan hota hai aur yah hota hai ki sej hai agar hum ek dusre ke saath chodenge 12 se batayenge kuch dabaav dalega hamare upar kanooni karyawahi hai patni ek dusre par apna kartavya samajhkar ke ek dusre ka yah sahyog karte hain aur isliye vo samay evam sambandh lambe samay se prem vivah ki saari raat hota hai is wajah se zyada rupaye me chalta hai aa kar sakta hai aur unko lagta hai ki samaj dabaav daal raha hai papa toh order lene yah shaadi theek nahi hai ek dusre ki hatya kar di utaru ho jaate hain prem vivah kare toh samay samay kam se kam 100 saal aur papa aur abhi shaadi vivah ka dhanyavad

मित्रों नमस्कार हमारे समाज में लोकप्रियता को ज्यादा महत्व नहीं देता है कि यह शारीरिक आकर्ष

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Tanay Mishra

Head Control Clerk In Forest Department U.P.

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विकी अभी हमारे समाज में पुराने लोग जो हैं वह भी सभ्यता से जुड़े हुए और उनको यह लगता है कि प्रेम विवाह गलत है नियम कानून से नहीं होता है तो वह बहुत ही अदालत ने संजय को अपनी कंपैटिबिलिटी देखकर शादी करनी चाहिए क्या पढ़ा लिखा आदमी शुक्ला नीचे पेरेंट्स को पता होना चाहिए हर चीज देखने बोलो तब करें अपने पैरंट्स से बता सके तो किस तरीके से करण सुमिताभा क्योंकि उसने मेरे ख्याल से चीज आनी चाहिए धन्यवाद

vicky abhi hamare samaj me purane log jo hain vaah bhi sabhyata se jude hue aur unko yah lagta hai ki prem vivah galat hai niyam kanoon se nahi hota hai toh vaah bahut hi adalat ne sanjay ko apni kampaitibiliti dekhkar shaadi karni chahiye kya padha likha aadmi shukla niche parents ko pata hona chahiye har cheez dekhne bolo tab kare apne Parents se bata sake toh kis tarike se karan sumitabha kyonki usne mere khayal se cheez aani chahiye dhanyavad

विकी अभी हमारे समाज में पुराने लोग जो हैं वह भी सभ्यता से जुड़े हुए और उनको यह लगता है कि

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मीनाक्षी शर्मा

Enterpreneur, Author, Teacher, Motivational Speaker, Career Counsellor.

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हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व इसलिए नहीं देते हैं क्योंकि प्रेम विवाह एक आवेश में लिया गया निर्णय है जो प्रेम के आवेश में आकर निर्णय लिया गया है और वह युवाओं के द्वारा क्षणभंगुर होता है और शादी हो जाने के बाद अक्सर यह देखा गया है कि अधिकतर प्रेम विवाह करने वाले व्यक्ति आपस में इतना ज्यादा कटुता भरा जीवन जीते हैं कि ऐसा कभी भी जब आप मां-बाप की रजामंदी से बड़ों की राय से कोई शादी विवाह जैसा संबंध जोड़ते हैं तो उस विवाह में ऐसा कभी नहीं देखा जाता कि वह दोनों जो पति-पत्नी के बंधन में बने हैं एक दूसरे की बात सुनना ही नहीं चाहते या किसी भी प्रकार की अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं या एक दूसरे को एकदम मार देने पर उतारू हो जाते हैं उनके अंदर इतनी भी सहनशीलता नहीं पचती कि मैं अपने रिश्ते का ही सम्मान करें

hamare samaj me log prem vivah ko zyada mahatva isliye nahi dete hain kyonki prem vivah ek aavesh me liya gaya nirnay hai jo prem ke aavesh me aakar nirnay liya gaya hai aur vaah yuvaon ke dwara kshanabhangur hota hai aur shaadi ho jaane ke baad aksar yah dekha gaya hai ki adhiktar prem vivah karne waale vyakti aapas me itna zyada katuta bhara jeevan jeete hain ki aisa kabhi bhi jab aap maa baap ki rajamandi se badon ki rai se koi shaadi vivah jaisa sambandh jodte hain toh us vivah me aisa kabhi nahi dekha jata ki vaah dono jo pati patni ke bandhan me bane hain ek dusre ki baat sunana hi nahi chahte ya kisi bhi prakar ki abhadra bhasha ka prayog karte hain ya ek dusre ko ekdam maar dene par utaru ho jaate hain unke andar itni bhi sahansheelta nahi pachati ki main apne rishte ka hi sammaan kare

हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व इसलिए नहीं देते हैं क्योंकि प्रेम विवाह एक

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MRI

Retired Executive (PSU), Electrical Engineer, AUTHOR, हिंदी भषा में चार पुस्तकें प्रकाशित. जल्द ही तीन और प्रकाशित होने वाली हैं ।

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Vikas Singh

Political Analyst

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देखें ऐसा नहीं है कि हमारे समाज में प्रेम विवाह को लोग ज्यादा महत्व नहीं देते हैं आज के डेट में लड़का अगर किसी लड़की से बहुत प्यार करता है तो अपने घर पर बता रहा है लड़की अपने घर पर बता रही है और माता-पिता उन दोनों का शादी भी कर दे रहे हैं लेकिन लड़का अगर अच्छा है लड़की अच्छी है तो शादी हो रही है और बहुत धूमधाम से हो रही है आज के डेट में मैक्सिमम जो लव मैरिज है वह अरेंज मैरिज में कन्वर्ट हो रहा है और जब अरेंज मैरिज में कन्वर्ट ओके शादी हो रही है तो बहुत लोगों को उससे खुशी भी मिल रही है रिश्ता भी एक अनमोल और मजबूत बन रहा है लेकिन कुछ दिक्कतें हैं हमारे देश में जिन दिक्कतों को समझ पूछ कर किसी से शादी करने के बारे में बात भी करना चाहिए अगर आपका उठे तो अगर आप किसी राजपूत लड़की से प्यार करते हो तो आप शादी कर लो कोई दिक्कत नहीं है आप पंडित हो तो पंडित लड़की से प्यार करते हो तो घर वालों को बताओ घर वाले शादी कर देंगे जाती है कि शादी करने के लिए ही बना है राजपूत राजपूत लोग से शादी करें पंडित पंडित लोग से शादी करें हरिजन हरिजन लोग से शादी करें यादव यादव लोग से शादी करें तो फिर कोई दिक्कत नहीं आती है हां जब धर्म की बात आए तो धर्म के नाम पर पूरे हिंदुत्व को एक हो जाना चाहिए लेकिन शादी में अगर कोई चाहे कि मैं पंडित हूं मैं अर्जुन से शादी करूंगी या करूंगा तो इसमें थोड़ा दिक्कत आती है क्योंकि थोड़ा सा सामाजिक बहिष्कार होता है और थोड़ी सी दिक्कतें हैं और इन दिक्कतों को समझना चाहिए तो ऐसा कोई काम मत करिए जिससे आपके घर परिवार के लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़े मुस्लिम समुदाय में भी जनरल एससी एसटी ओबीसी के तीन कैटेगरी है और उनके में भी जाती है लेकिन जब धर्म की बात आती है तो वह अपने आप को मुसलमान बोलते हैं हम लोगों को भी ठीक वैसे ही करना होगा हम लोगों को शादी अपनी जाति में करना चाहिए अगर आप किसी से प्यार करते हो अपनी जाति में तो अपने घर वालों से बताइए घर वाले पक्का राजी हो जाएंगे शादी करने के लिए लेकिन जब धर्म की बात आए तो पूरा हिंदुत्व एक होना चाहिए हिंदुत्व एक होगा तो भारतीय एकता मजबूत होगी धन्यवाद

dekhen aisa nahi hai ki hamare samaj me prem vivah ko log zyada mahatva nahi dete hain aaj ke date me ladka agar kisi ladki se bahut pyar karta hai toh apne ghar par bata raha hai ladki apne ghar par bata rahi hai aur mata pita un dono ka shaadi bhi kar de rahe hain lekin ladka agar accha hai ladki achi hai toh shaadi ho rahi hai aur bahut dhumadham se ho rahi hai aaj ke date me maximum jo love marriage hai vaah arrange marriage me convert ho raha hai aur jab arrange marriage me convert ok shaadi ho rahi hai toh bahut logo ko usse khushi bhi mil rahi hai rishta bhi ek anmol aur majboot ban raha hai lekin kuch dikkaten hain hamare desh me jin dikkaton ko samajh puch kar kisi se shaadi karne ke bare me baat bhi karna chahiye agar aapka uthe toh agar aap kisi rajput ladki se pyar karte ho toh aap shaadi kar lo koi dikkat nahi hai aap pandit ho toh pandit ladki se pyar karte ho toh ghar walon ko batao ghar waale shaadi kar denge jaati hai ki shaadi karne ke liye hi bana hai rajput rajput log se shaadi kare pandit pandit log se shaadi kare harijan harijan log se shaadi kare yadav yadav log se shaadi kare toh phir koi dikkat nahi aati hai haan jab dharm ki baat aaye toh dharm ke naam par poore hindutv ko ek ho jana chahiye lekin shaadi me agar koi chahen ki main pandit hoon main arjun se shaadi karungi ya karunga toh isme thoda dikkat aati hai kyonki thoda sa samajik bahishkar hota hai aur thodi si dikkaten hain aur in dikkaton ko samajhna chahiye toh aisa koi kaam mat kariye jisse aapke ghar parivar ke logo ko dikkat ka samana karna pade muslim samuday me bhi general SC ST OBC ke teen category hai aur unke me bhi jaati hai lekin jab dharm ki baat aati hai toh vaah apne aap ko musalman bolte hain hum logo ko bhi theek waise hi karna hoga hum logo ko shaadi apni jati me karna chahiye agar aap kisi se pyar karte ho apni jati me toh apne ghar walon se bataiye ghar waale pakka raji ho jaenge shaadi karne ke liye lekin jab dharm ki baat aaye toh pura hindutv ek hona chahiye hindutv ek hoga toh bharatiya ekta majboot hogi dhanyavad

देखें ऐसा नहीं है कि हमारे समाज में प्रेम विवाह को लोग ज्यादा महत्व नहीं देते हैं आज के डे

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तुझे माता-पिता जानते हैं कि प्रेम विवाह ज्यादा सफल नहीं होते हैं अक्सर घर में तनाव और कलर होती रहती है क्योंकि दोनों जब प्यार करते हैं तो समय का मानसिकता के कारण जो प्यार कर लेते हैं लड़की प्यार करती है उसके अंदर कोई संस्कार ने क्यों उसने बाबा की चोरी से उस दिन प्रेम विवाह किया तो वह हमें कहीं नहीं सकते को उसके अंदर कोई संस्कार इसलिए प्रेम दुआ मत नहीं दिया जाता

tujhe mata pita jante hain ki prem vivah zyada safal nahi hote hain aksar ghar me tanaav aur color hoti rehti hai kyonki dono jab pyar karte hain toh samay ka mansikta ke karan jo pyar kar lete hain ladki pyar karti hai uske andar koi sanskar ne kyon usne baba ki chori se us din prem vivah kiya toh vaah hamein kahin nahi sakte ko uske andar koi sanskar isliye prem dua mat nahi diya jata

तुझे माता-पिता जानते हैं कि प्रेम विवाह ज्यादा सफल नहीं होते हैं अक्सर घर में तनाव और कलर

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Shipra Ranjan

Life Coach

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क्या पता कुछ भी हो सकता है वहीं डिसाइड करके इस सोच कर के नहीं करेंगे कि हमें अपनी जात की इस लड़की से ही शादी करनी है या अपने जा एक लड़के से ही शादी करनी है और अपनी यही कारण होता है कि मैं रेडी नहीं होते हैं लव मैरिज के लिए क्योंकि जो भी पार्टनर उनके बच्चे अपने हिसाब से मिलाते हैं वह उनके हिसाब से तो इस वजह से बहुत ज्यादा डिफरेंस होता है जैसे जंक्शन टाइम से कह सकते हैं क्योंकि मैं हमेशा अपने बच्चों के प्रति सोचने का नजरिया अलग होता है उन्होंने अपने एक्सपीरियंस एस अपनी लाइफ में देखा है जो उनके बच्चे ऐसा करें मराठी बड़े बूढ़े होते हैं गुलाब मारी जिसको नहीं माने तो देते आपका दिन शुभ रहे धन्यवाद

kya pata kuch bhi ho sakta hai wahi decide karke is soch kar ke nahi karenge ki hamein apni jaat ki is ladki se hi shaadi karni hai ya apne ja ek ladke se hi shaadi karni hai aur apni yahi karan hota hai ki main ready nahi hote hain love marriage ke liye kyonki jo bhi partner unke bacche apne hisab se milaate hain vaah unke hisab se toh is wajah se bahut zyada difference hota hai jaise junction time se keh sakte hain kyonki main hamesha apne baccho ke prati sochne ka najariya alag hota hai unhone apne experience S apni life me dekha hai jo unke bacche aisa kare marathi bade budhe hote hain gulab mari jisko nahi maane toh dete aapka din shubha rahe dhanyavad

क्या पता कुछ भी हो सकता है वहीं डिसाइड करके इस सोच कर के नहीं करेंगे कि हमें अपनी जात की इ

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DR OM PRAKASH SHARMA

Principal, Education Counselor, Best Experience in Professional and Vocational Education cum Training Skills and 25 years experience of Competitive Exams. 9212159179. dsopsharma@gmail.com

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आपने हमारे समाज में लो तेंदुआ को ज्यादा मैच क्यों नहीं देते हैं वास्तव में विवाह तक तो ठीक हैं समाजिक है लेकिन प्रेम विवाह जिसकी ना जान ना पहचान ना कोई पश्चिम ट्रेन में चलते हुए 2 यात्री मिल गए आंखें में लिखेंगे प्रेम हो गया अब परिवार बंद किया ना यह प्रेम उठाएं नए परिवार उठा नहीं वह देवा और चित्र पूर्ण होता है विवाह के बाद भी पेन किया जा सकता है जरूरी है कि पहले प्रेम करें फिर भी वह करें अक्षय नीचे अवधारणा बदल जाती है समाज में अगर कोई दूसरे को पसंद भी करता है तो माता-पिता को उनके विषय में बताकर उनसे चैनल लेकर अगर उनके ट्रक टाइम तनिष्क सोचे बिना किसी कनीज के शिकार करने अगर वह निकाल करते हैं तो उसके लिए तो यह सामाजिक रूप से अच्छा नहीं माना जाता क्योंकि डिफरेंट समाज डिफरेंट जाति डिफरेंट धर्म के लोग तेंदुआ में उतरते हैं जो दोनों ही समुदाय के लोग क्यों काम नहीं करते हैं अगर शिकार कर लेते हैं तुम्हें नहीं मानता हूं जो प्रेम हुआ है वह सिविल है मैरिज या अरेंज मैरिज मानी जाती है और अगर कोई भी काम करना है तो सलाम उसका से करने में कोई बुराई नहीं था प्रेम विवाह नक्षत्र थे ना कभी भविष्य में होंगे

aapne hamare samaj me lo tenduaa ko zyada match kyon nahi dete hain vaastav me vivah tak toh theek hain samajik hai lekin prem vivah jiski na jaan na pehchaan na koi paschim train me chalte hue 2 yatri mil gaye aankhen me likhenge prem ho gaya ab parivar band kiya na yah prem uthaye naye parivar utha nahi vaah deva aur chitra purn hota hai vivah ke baad bhi pen kiya ja sakta hai zaroori hai ki pehle prem kare phir bhi vaah kare akshay niche avdharna badal jaati hai samaj me agar koi dusre ko pasand bhi karta hai toh mata pita ko unke vishay me batakar unse channel lekar agar unke truck time tanishk soche bina kisi kanij ke shikaar karne agar vaah nikaal karte hain toh uske liye toh yah samajik roop se accha nahi mana jata kyonki different samaj different jati different dharm ke log tenduaa me utarate hain jo dono hi samuday ke log kyon kaam nahi karte hain agar shikaar kar lete hain tumhe nahi maanta hoon jo prem hua hai vaah civil hai marriage ya arrange marriage maani jaati hai aur agar koi bhi kaam karna hai toh salaam uska se karne me koi burayi nahi tha prem vivah nakshtra the na kabhi bhavishya me honge

आपने हमारे समाज में लो तेंदुआ को ज्यादा मैच क्यों नहीं देते हैं वास्तव में विवाह तक तो ठ

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प्रेम वाहन हमारे समाज में एक सक्सेसफुल शादी नहीं हो पाती हो अरे की शादी होने के बाद में मरे तक कोई कोर्ट कचहरी तलाक दिवस का मामला नहीं आता है पर प्रेम विवाह में एक सोंग्स से होता है पति को पत्नी के ऊपर पत्नी को पति के ऊपर इसीलिए हमारा समाज प्रेम रोग को ज्यादा करके मान्यता नहीं देता है कि प्रेम विवाह के अंदर एक अंधाधुन गरीब की चीज देखी जाती है और अरेंज मैरिज के अंदर सब चीजों का विचार किया जाता है इसीलिए हमारे समाज के अंदर प्रेम विवाह को मान्यता नहीं है

prem vaahan hamare samaj me ek successful shaadi nahi ho pati ho are ki shaadi hone ke baad me mare tak koi court kachahari talak divas ka maamla nahi aata hai par prem vivah me ek songs se hota hai pati ko patni ke upar patni ko pati ke upar isliye hamara samaj prem rog ko zyada karke manyata nahi deta hai ki prem vivah ke andar ek andhadhun garib ki cheez dekhi jaati hai aur arrange marriage ke andar sab chijon ka vichar kiya jata hai isliye hamare samaj ke andar prem vivah ko manyata nahi hai

प्रेम वाहन हमारे समाज में एक सक्सेसफुल शादी नहीं हो पाती हो अरे की शादी होने के बाद में मर

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Dinesh Mishra

Theosophists | Accountant

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हमारी समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व क्यों नहीं देते यह के माता-पिता इस पर ज्यादा विश्वास नहीं किया करते हैं इसलिए प्रेम विवाह पर पुजारा महत्व नहीं दिया जाता है

hamari samaj me log prem vivah ko zyada mahatva kyon nahi dete yah ke mata pita is par zyada vishwas nahi kiya karte hain isliye prem vivah par pujara mahatva nahi diya jata hai

हमारी समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व क्यों नहीं देते यह के माता-पिता इस पर ज्याद

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Isu Vasava

PASTOR in CHURCH.

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गोपाल पांडेय

Journalist, Counselor, motivational speaker

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सुरेश चंद आचार्य

Social Worker ( Self employed )

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नमस्कार साथियों देखिए हमारे समाज में प्रेम विवाह पसली में तो नहीं देते क्योंकि वर्तमान उचित प्रेम विवाह का है घरवालों से बगावत कर साथ ही साथ में की आर्थिक और सामाजिक दृष्टि से असुरक्षा हो जाती है क्योंकि व्यक्ति परिजनों और समाज के साथ रहने पर ही आर्थिक रूप से सामाजिक रूप से सुरक्षित रहता है ऐसे जोड़े जो परिवार और समाज से अलग हो जाते हैं अधिकांश सर इन दोनों क्षेत्रों में असुरक्षित हो जाते हैं और मैं झगड़े क्यों जाते हैं और उनमें तलाक तक की नौबत भी आ जाती है

namaskar sathiyo dekhiye hamare samaj me prem vivah pasali me toh nahi dete kyonki vartaman uchit prem vivah ka hai gharwaalon se bagavat kar saath hi saath me ki aarthik aur samajik drishti se asuraksha ho jaati hai kyonki vyakti parijanon aur samaj ke saath rehne par hi aarthik roop se samajik roop se surakshit rehta hai aise jode jo parivar aur samaj se alag ho jaate hain adhikaansh sir in dono kshetro me asurakshit ho jaate hain aur main jhagde kyon jaate hain aur unmen talak tak ki naubat bhi aa jaati hai

नमस्कार साथियों देखिए हमारे समाज में प्रेम विवाह पसली में तो नहीं देते क्योंकि वर्तमान उचि

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Shailesh Kumar Dubey

Yoga Teacher , Retired Government Employee

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Amar Gurubaxani

वकालत

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नमस्कार हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व क्यों नहीं देते इस सवाल का जवाब समाज शब्द आपने लिखा है समाज के कुछ रूल्स रेगुलेशन नियम होते हैं दूसरा है प्रेम विवाह तू प्रेम विवाह अपने ही समाज में हो तो फिर किसी को कोई आपत्ति नहीं होती यदि अपने समाज में ना होकर अगर किसी अन्य समाज के साथ लड़की एक समाज की और लड़का दूसरे समाज का इस टाइप का यदि प्रेम है वहां का कांबिनेशन आता है तो समाज को फिर आपत्ति होती है कि उनका कहना है कि हम दूसरे समाज की लड़की को स्वीकार नहीं करेंगे और हम इनका सामाजिक बहिष्कार करेंगे यदि सामाजिक बहिष्कार करेंगे वह समाज वाले निर्णय लेते हैं तो यह जरूर एक अपराध की श्रेणी में आता है कि आप किसी भी व्यक्ति का किसी भी व्यक्ति के संबंध में सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लेने के लिए आपको कोई भी कानूनन अधिकार प्राप्त नहीं आप ऐसा नहीं कर सकते यह कानूनी अपराध भी है लेकिन कहीं ना कहीं कहीं ना कहीं समाज से हर व्यक्ति जुड़ा होता है समाज से बढ़कर कुछ भी नहीं होता समाज ही सर्वोपरि होता है समाज में रहकर ही मान सम्मान होता है इसलिए जो है महत्व नहीं दिया जाता प्रेम वहां को क्योंकि अंतर जाति विवाह होने लगी है यह सच है करके क्यों हो रहे हैं होने लगे हैं और लोगों ने स्वीकार भी किया है और यह सच बात है कि प्रेम जहां होता है वहां माता-पिता को भी झुकना पड़ता है तो ऐसा इसमें कुछ भी नहीं है जो गंभीर हो महत्त्व ना देने के पीछे जो कारण रहते हैं वह प्रेम विवाह से संबंधित अनेक कारण हो सकते हैं इसके विचारों में भिन्नता हो और योग्य ना हो बहुत सारी बातें जो है समाज देखता है पहले सबसे पहले तो दोनों को जो विभाग के आधार हैं वह कभी भी जितना हो इस बात का ध्यान देना चाहिए इससे मेरा आशय यह है कि विवाह की उम्र जो है निर्धारित है लड़की 18 से ऊपर होना चाहिए लड़का 21 से ऊपर होना चाहिए वेल इस्टैबलिश्ड और अपने पैरों पर खड़ा हो सकता मुंह और उसे न सिर्फ समाज बल्कि लड़की के और लड़के के दोनों परिवार वाले उसको स्वीकार करें और भगत कदापि भागकर जो शादी कर लेते हैं वैसा कदम ना उठाएं बहुत सारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है होता यह है कि लड़की को माता-पिता पाल पोस कर बड़ा करके वह अक्सर अपने गार्जियन से अपने प्रेमी के संबंध में खुलकर चर्चा नहीं करती और भाग कर शादी करने का जो निर्णय ले लेती है वह उसके लिए घातक भी हो जाता है क्योंकि उसके परिजन कदापि नहीं चाहेंगे कि वह भाग कर शादी करें पर प्रेम विवाह करने वाले अक्सर यह देखते हैं कि यदि माता-पिता ने विरोध किया है या माता-पिता ने उस रिश्ते को स्वीकार नहीं किया है तो वह भागने का एक निर्णय ले लेते हैं जो कि कई बार गलत भी हो जाता है और कई बार दुर्घटनाएं भी घटित हो जाती है क्योंकि एक सर्टिफिकेट लेकर आप आर्य समाज मंदिर का इधर-उधर भागते जो रहते हैं वह सर्टिफिकेट एक सीमा तक तो काम आता है लेकिन कभी-कभी अनेक करकट नहीं और अर्चना भी आती है सामाजिक महत्व न मिलने का कारण यही है कि प्रेम विवाह को यदि अरेंज विवाह में कन्वर्ट किया जाए और दोनों परिवार को राजी करके विवाह किया जाए तो दांपत्य जीवन सफल हो जाता है और बच्चों के आगे किराया मां-बाप झुकते हैं मां-बाप जो हैं अक्सर उन्हें स्वीकार कर लेते हैं और मां-बाप जो भी करेंगे वो कभी भी गलत नहीं करेंगे मां बाप का आशीर्वाद अगर मिल जाए तो जीवन सफल हो जाता है मां-बाप के दुखी करके कोई भी आज तक सुखी नहीं रहा है इस बात का इतिहास गवाह है कोशिश कीजिए कि प्रेम है वहां को अरेंज मैरिज में करने के लिए प्रयास कीजिए और दोनों खुलकर अपने माता-पिता से चर्चा कीजिए दोनों परिवार मिली और उसे मान्यता देकर और जो भी सामाजिक बंधन है उसे दूर करके अपने दांपत्य जीवन का सुख पूर्वक निर्वहन करें मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं धन्यवाद जय हिंद जय भारत

namaskar hamare samaj me log prem vivah ko zyada mahatva kyon nahi dete is sawaal ka jawab samaj shabd aapne likha hai samaj ke kuch rules regulation niyam hote hain doosra hai prem vivah tu prem vivah apne hi samaj me ho toh phir kisi ko koi apatti nahi hoti yadi apne samaj me na hokar agar kisi anya samaj ke saath ladki ek samaj ki aur ladka dusre samaj ka is type ka yadi prem hai wahan ka combination aata hai toh samaj ko phir apatti hoti hai ki unka kehna hai ki hum dusre samaj ki ladki ko sweekar nahi karenge aur hum inka samajik bahishkar karenge yadi samajik bahishkar karenge vaah samaj waale nirnay lete hain toh yah zaroor ek apradh ki shreni me aata hai ki aap kisi bhi vyakti ka kisi bhi vyakti ke sambandh me samajik bahishkar ka nirnay lene ke liye aapko koi bhi kanunan adhikaar prapt nahi aap aisa nahi kar sakte yah kanooni apradh bhi hai lekin kahin na kahin kahin na kahin samaj se har vyakti juda hota hai samaj se badhkar kuch bhi nahi hota samaj hi sarvopari hota hai samaj me rahkar hi maan sammaan hota hai isliye jo hai mahatva nahi diya jata prem wahan ko kyonki antar jati vivah hone lagi hai yah sach hai karke kyon ho rahe hain hone lage hain aur logo ne sweekar bhi kiya hai aur yah sach baat hai ki prem jaha hota hai wahan mata pita ko bhi jhukna padta hai toh aisa isme kuch bhi nahi hai jo gambhir ho mahatva na dene ke peeche jo karan rehte hain vaah prem vivah se sambandhit anek karan ho sakte hain iske vicharon me bhinnata ho aur yogya na ho bahut saari batein jo hai samaj dekhta hai pehle sabse pehle toh dono ko jo vibhag ke aadhar hain vaah kabhi bhi jitna ho is baat ka dhyan dena chahiye isse mera aashay yah hai ki vivah ki umar jo hai nirdharit hai ladki 18 se upar hona chahiye ladka 21 se upar hona chahiye well istaibalishd aur apne pairon par khada ho sakta mooh aur use na sirf samaj balki ladki ke aur ladke ke dono parivar waale usko sweekar kare aur bhagat kadapi bhagkar jo shaadi kar lete hain waisa kadam na uthaye bahut saari dikkaton ka samana karna padta hai hota yah hai ki ladki ko mata pita pal pos kar bada karke vaah aksar apne guardian se apne premi ke sambandh me khulkar charcha nahi karti aur bhag kar shaadi karne ka jo nirnay le leti hai vaah uske liye ghatak bhi ho jata hai kyonki uske parijan kadapi nahi chahenge ki vaah bhag kar shaadi kare par prem vivah karne waale aksar yah dekhte hain ki yadi mata pita ne virodh kiya hai ya mata pita ne us rishte ko sweekar nahi kiya hai toh vaah bhagne ka ek nirnay le lete hain jo ki kai baar galat bhi ho jata hai aur kai baar durghatanaen bhi ghatit ho jaati hai kyonki ek certificate lekar aap arya samaj mandir ka idhar udhar bhagte jo rehte hain vaah certificate ek seema tak toh kaam aata hai lekin kabhi kabhi anek karakat nahi aur archna bhi aati hai samajik mahatva na milne ka karan yahi hai ki prem vivah ko yadi arrange vivah me convert kiya jaaye aur dono parivar ko raji karke vivah kiya jaaye toh danpatya jeevan safal ho jata hai aur baccho ke aage kiraaya maa baap jhukate hain maa baap jo hain aksar unhe sweekar kar lete hain aur maa baap jo bhi karenge vo kabhi bhi galat nahi karenge maa baap ka ashirvaad agar mil jaaye toh jeevan safal ho jata hai maa baap ke dukhi karke koi bhi aaj tak sukhi nahi raha hai is baat ka itihas gavah hai koshish kijiye ki prem hai wahan ko arrange marriage me karne ke liye prayas kijiye aur dono khulkar apne mata pita se charcha kijiye dono parivar mili aur use manyata dekar aur jo bhi samajik bandhan hai use dur karke apne danpatya jeevan ka sukh purvak nirvahan kare meri subhkamnaayain aapke saath hain dhanyavad jai hind jai bharat

नमस्कार हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व क्यों नहीं देते इस सवाल का जवाब स

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Santosh Singh indrwar

Business Consultant & Life Couch

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बहुत बड़ी परीक्षण से पता चला है कि जितने भी प्रेम विवाह होते हैं वह पिछले शुरुआती 5 साल के अंदर उनमें सत्तर से अस्सी परसेंट खत्म हो जाते हैं क्योंकि वह जगह किसी ना किसी चीज से लोग या लालच या आकर्षण के कारण होते हैं उन पर किसी प्रकार का भाव लेकर नहीं होता वह सिर्फ दो लोगों के मेल होता है जो किसी कारण से कभी भी भटक सकते हैं और भटक जाते हैं

bahut badi parikshan se pata chala hai ki jitne bhi prem vivah hote hain vaah pichle shuruati 5 saal ke andar unmen sattar se assi percent khatam ho jaate hain kyonki vaah jagah kisi na kisi cheez se log ya lalach ya aakarshan ke karan hote hain un par kisi prakar ka bhav lekar nahi hota vaah sirf do logo ke male hota hai jo kisi karan se kabhi bhi bhatak sakte hain aur bhatak jaate hain

बहुत बड़ी परीक्षण से पता चला है कि जितने भी प्रेम विवाह होते हैं वह पिछले शुरुआती 5 साल के

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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

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दक्षिण भारत का जो कल्चर है वह कहीं ना कहीं मैं हमेशा से ऐसा रहा है कि जो पीरियड से वह समझते हैं कि हम बड़े हैं हमें ज्यादा अनुभव है हम जितना अपने बच्चों के लिए अच्छा सोच सकते हैं उनके लिए एक अच्छा मार्च को ढूंढ सकते हैं खुद नही ढूंढ पाएंगे उन्हें क्या पता कि जो है उनके लिए क्या सही है क्या गलत है हमने दुनिया देखी है हम अच्छा मास्टर पाएंगे इसलिए प्रेम विवाह को साधन है क्यों नहीं दिया जाता यह चीजें बदल रही है समय के साथ ऐसा नहीं है कि ऐसा मतलब बदल नहीं रहा है पर बहुत धीरे-धीरे जो है यह चीज आ रही है समाज में

dakshin bharat ka jo culture hai wah kahin na kahin main hamesha se aisa raha hai ki jo period se wah samajhte hain ki hum bade hain humein zyada anubhav hai hum jitna apne baccho ke liye accha soch sakte hain unke liye ek accha march ko dhundh sakte hain khud nahi dhundh payenge unhein kya pata ki jo hai unke liye kya sahi hai kya galat hai humne duniya dekhi hai hum accha master payenge isliye prem vivah ko sadhan hai kyon nahi diya jata yeh cheezen badal rahi hai samay ke saath aisa nahi hai ki aisa matlab badal nahi raha hai par bahut dhire dhire jo hai yeh cheez aa rahi hai samaj mein

दक्षिण भारत का जो कल्चर है वह कहीं ना कहीं मैं हमेशा से ऐसा रहा है कि जो पीरियड से वह समझत

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Dr. Hemlata Gupta

Psychologist

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हेलो फ्रेंड्स हमारे इंडियन समाज में प्रेम विवाह को महत्व क्यों नहीं देते दिखे प्रेम विवाह हमारे यहां कंसेप्ट बहुत ज्यादा ही मिस हैं विवाह अपने आप में एक कॉन्स्टिट्यूशन है शादी एक कॉन्स्टिट्यूशन है जिसे हमें निभाना पड़ता है जिसमें अच्छाई बुराई समाज घर परिवार की उसमें इस मायने रखती है और हर चीज उसमें इंपॉर्टेंट है क्योंकि शादी इसे उस सोशल कॉन्स्टिट्यूशन प्रेम विवाह प्रेम तो एक अलग ही कंसेप्ट है जिसे हम प्यार करते हैं जरूरी नहीं है उससे शादी भी हो और अगर शादी होती है तो क्या वह प्यार आपका रियल था या सिर्फ उसके साथ जिंदगी गुजारने के लिए एक कंफर्टेबल सोंग था क्योंकि किसी के साथ जिंदगी गुजारना और प्यार करना दोनों बातें बहुत अलग है पता नहीं हम इंडियन समाज में इन दोनों बातों को मिलाकर क्यों शादी में प्रेम विवाह को इसलिए इंपॉर्टेंट नहीं देते क्योंकि विवाह सिर्फ दो लोगों का मिलन नहीं है यह दो परिवारों का है चाहे परिवार साथ रहे या ना रहे पर दोनों ने अपने आप में उन परिवारों के जींस उन परिवारों की परवरिश उन परिवारों के संस्कार अपने साथ लिए हुए आते हैं इसीलिए प्रेम विवाह में हम कहते हैं कि शायद सक्सेस रेट कम बट ऐसा कुछ नहीं है कोई मापदंड नहीं है किसी भी शादी की सक्सेस को नापने का शायद हमें अपनी सोच को बदलने की जरूरत है धन्यवाद

hello friends hamare indian samaj mein prem vivah ko mahatva kyon nahi dete dikhe prem vivah hamare yahan concept bahut zyada hi miss hain vivah apne aap mein ek Constitution hai shadi ek Constitution hai jise humein nibhana padta hai jisme acchai burayi samaj ghar parivar ki usme is maayne rakhti hai aur har cheez usme important hai kyonki shadi ise us social Constitution prem vivah prem toh ek alag hi concept hai jise hum pyar karte hain zaroori nahi hai usse shadi bhi ho aur agar shadi hoti hai toh kya wah pyar aapka real tha ya sirf uske saath zindagi gujarne ke liye ek Comfortable song tha kyonki kisi ke saath zindagi gujarna aur pyar karna dono batein bahut alag hai pata nahi hum indian samaj mein in dono baaton ko milakar kyon shadi mein prem vivah ko isliye important nahi dete kyonki vivah sirf do logo ka milan nahi hai yeh do parivaron ka hai chahe parivar saath rahe ya na rahe par dono ne apne aap mein un parivaron ke jeans un parivaron ki parvarish un parivaron ke sanskar apne saath liye hue aate hain isliye prem vivah mein hum kehte hain ki shayad success rate kam but aisa kuch nahi hai koi maapdand nahi hai kisi bhi shadi ki success ko napne ka shayad humein apni soch ko badalne ki zarurat hai dhanyavad

हेलो फ्रेंड्स हमारे इंडियन समाज में प्रेम विवाह को महत्व क्यों नहीं देते दिखे प्रेम विवाह

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Dr. Priya Shatanjib Jha

Psychologist|Counselor|Dentist

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नमस्ते दोस्तों मेरी रानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं देखिए अभी फिलहाल तो यह सारी चीजें थोड़ी बदल रही हैं इनफैक्ट मैंने देखा है कि आज हां छोटे शहरों में आज भी यह प्रॉब्लम रहती है छोटे शहरों और वह भी उसमें अंदर अंदर जो इलाके होते हैं जो काम होती है उसमें यह भी प्रॉब्लम है मुझे मतदाता है यह बात लेकिन जो बड़े शहर की मुंबई दिल्ली यह सब यहां पर उतना प्रॉब्लम नहीं है इस चीज का क्योंकि अब लो इन फैक्ट आपको पता है अभी लोग नहीं मिल रहे शादी करने के लिए तो अभी ऐसा है कि सपोर्ट कोई महाराष्ट्र कोई मराठी तू अब तो ऐसा आ गया कि अगर मराठी सपोर्ट में मराठी ब्राह्मण है तो वह अपने मराठी ब्राह्मण जात में नहीं देखता है सोचता है कि चलो मराठी मिल जाए कोई भले को ब्राह्मण नहीं है जो भी हो या तो दूसरे कास्ट में वह सोचेगा कि चलो मुझे कोई मलयालम या कोई तमिल ब्राह्मण मिल जाए लेकिन ब्राह्मण ही हो तो आप समझ रहे हो मैं आपको क्या कहना चाह रही हूं कि आजकल ऐसा हो गया कि लोग दूसरे दूसरे सिटी मतलब दूसरा अगर शहर हो गया था वह गुजरात हो गया या तमिलनाडु हो गया या कुछ भी तो दूसरे जगह का ब्राह्मण जो है उससे भी मराठी ब्राह्मण शादी कर सकता है तो आजकल थोड़ा सा लोग खुल रहे हैं हां छोटे जो छोटे जगह हैं वहां अभी भी यह प्रॉब्लम है इसका इसका रीजन और इसकी वजह यह है कि देखिए हर घर में जो सोच विचार होता है वह अलग होता है तो कोई भी माता-पिता यूं ही चाहेंगे कि मेरी बेटी को या मेरे बेटे को आगे चलकर लाइफ में प्रॉब्लम हो तो वह यही सोचते हैं कि हमारी बिरादरी के लोग जो है उसमें जो थिंकिंग है जो सोच है सब का सिम होगा और झगड़े काम होंगे से प्रॉब्लम नहीं होगा तो वह उस हिसाब से चलता रहे हैं जिसमें मैं नहीं बोलूंगी वह पूरी तरह गलत भी है लेकिन यह सारी चीजें बहुत छोटी है जिंदगी यह सबके बहुत ऊपर है लेकिन एडिशन के हिसाब से और उनके समय में ही होता था इसीलिए वही करते चले आ रहे थे

namaste doston meri rani doctor priya jha ke taraf se aap sabko din ki bahut saree subhkamnaayain dekhie abhi filhal toh yeh saree cheezen thodi badal rahi hain inafaikt maine dekha hai ki aaj haan chote shaharon mein aaj bhi yeh problem rehti hai chote shaharon aur wah bhi usme andar andar jo ilake hote hain jo kaam hoti hai usme yeh bhi problem hai mujhe matdata hai yeh baat lekin jo bade sheher ki mumbai delhi yeh sab yahan par utana problem nahi hai is cheez ka kyonki ab lo in fact aapko pata hai abhi log nahi mil rahe shadi karne ke liye toh abhi aisa hai ki support koi maharashtra koi marathi tu ab toh aisa aa gaya ki agar marathi support mein marathi brahman hai toh wah apne marathi brahman jaat mein nahi dekhta hai sochta hai ki chalo marathi mil jaye koi bhale ko brahman nahi hai jo bhi ho ya toh dusre caste mein wah sochega ki chalo mujhe koi malayalam ya koi tamil brahman mil jaye lekin brahman hi ho toh aap samajh rahe ho main aapko kya kehna chah rahi hoon ki aajkal aisa ho gaya ki log dusre dusre city matlab doosra agar sheher ho gaya tha wah gujarat ho gaya ya tamil nadu ho gaya ya kuch bhi toh dusre jagah ka brahman jo hai usse bhi marathi brahman shadi kar sakta hai toh aajkal thoda sa log khul rahe hain haan chote jo chote jagah hain wahan abhi bhi yeh problem hai iska iska reason aur iski wajah yeh hai ki dekhie har ghar mein jo soch vichar hota hai wah alag hota hai toh koi bhi mata pita yun hi chahenge ki meri beti ko ya mere bete ko aage chalkar life mein problem ho toh wah yahi sochte hain ki hamari biradari ke log jo hai usme jo thinking hai jo soch hai sab ka sim hoga aur jhagde kaam honge se problem nahi hoga toh wah us hisab se chalta rahe hain jisme main nahi bolungi wah puri tarah galat bhi hai lekin yeh saree cheezen bahut choti hai zindagi yeh sabke bahut upar hai lekin edition ke hisab se aur unke samay mein hi hota tha isliye wahi karte chale aa rahe the

नमस्ते दोस्तों मेरी रानी डॉक्टर प्रिया झा के तरफ से आप सबको दिन की बहुत सारी शुभकामनाएं दे

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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आपके समझ में ही नहीं अपितु पूरे भारत में कहीं आप क्योंकि भारत में लव मैरिज सक्सेस नहीं है कि नहीं लड़कों में लड़कियों में केवल पिक्चर आदि देखने के कारण से फैशन बन चुका है बाकी उन्नति समझ नहीं होती है न्यू जीवनसाथी का चयन करते समय केवल उसकी स्क्रीन देख पाते हैं गोरिया काले रंग की चौकी उसके गुण नहीं देख पाते हैं उसका विवाह करने के लिए सबसे पहले संस्कारों को देखा जाता है उसके स्वभाव को उसके गुणों को उसकी एक्टिविटीज को सबको ध्यान रखना बहुत आवश्यक होता है क्योंकि तुम देखो भारत में 90 परसेंट तक अरेंज मैरिज सक्सेज है केवल 10 परसेंट में फेल है जबकि भारत में लव मैरिज 80 और पचासी परसेंट फेल हैं केवल 10 स्वतंत्र परसेंट पर जाकर के लव मैरिज सेक्सी सीन उसका मेन कारण है कि फिल्मों की जिंदगी है हमारे लड़के और लड़कियां बिजनेस अपनाते जा रहे हैं बस उनका दिमाग तो सिर्फ इतना ही काम करता है गोरी स्कीम बा कि इसकी वजह पाते कुमकुम आदि को नहीं देख पाते चरित्र को नहीं देख पाते व्यवहार को नहीं देख पाते हैं संस्कारों को नहीं देख पाते हैं जो विवाहित गुड़ियों का खेल नहीं है जीवन भर का संबंध होता है उसी का दुष्परिणाम है कि यह लड़के लड़कियां आधुनिकता के बहाव में बह कर के जो लव मैरिज अपनाने की चित्र करते हैं माता-पिता के घर में स्टोर करके विवाह दी कर लेते हैं परिणाम स्वरूप उनकी मेरे अधिक समय नहीं चल पाती है 2305 साल में जीवन मानकर चलें उस में जो भूत होता है वह भूत उतर जाता है तभी उनके डायमंड सो जाते हैं वहीं प्रभास के लिए समस्या का कारण बनते हैं और देश की सरकार के लिए भी समस्या कारण बनते हैं

aapke samajh me hi nahi apitu poore bharat me kahin aap kyonki bharat me love marriage success nahi hai ki nahi ladko me ladkiyon me keval picture aadi dekhne ke karan se fashion ban chuka hai baki unnati samajh nahi hoti hai new jeevansathi ka chayan karte samay keval uski screen dekh paate hain goriya kaale rang ki chowki uske gun nahi dekh paate hain uska vivah karne ke liye sabse pehle sanskaron ko dekha jata hai uske swabhav ko uske gunon ko uski activities ko sabko dhyan rakhna bahut aavashyak hota hai kyonki tum dekho bharat me 90 percent tak arrange marriage succsej hai keval 10 percent me fail hai jabki bharat me love marriage 80 aur pachasi percent fail hain keval 10 swatantra percent par jaakar ke love marriage sexy seen uska main karan hai ki filmo ki zindagi hai hamare ladke aur ladkiya business apanate ja rahe hain bus unka dimag toh sirf itna hi kaam karta hai gori scheme ba ki iski wajah paate kumkum aadi ko nahi dekh paate charitra ko nahi dekh paate vyavhar ko nahi dekh paate hain sanskaron ko nahi dekh paate hain jo vivaahit gudiyon ka khel nahi hai jeevan bhar ka sambandh hota hai usi ka dushparinaam hai ki yah ladke ladkiya adhunikata ke bahav me wah kar ke jo love marriage apnane ki chitra karte hain mata pita ke ghar me store karke vivah di kar lete hain parinam swaroop unki mere adhik samay nahi chal pati hai 2305 saal me jeevan maankar chalen us me jo bhoot hota hai vaah bhoot utar jata hai tabhi unke diamond so jaate hain wahi prabhas ke liye samasya ka karan bante hain aur desh ki sarkar ke liye bhi samasya karan bante hain

आपके समझ में ही नहीं अपितु पूरे भारत में कहीं आप क्योंकि भारत में लव मैरिज सक्सेस नहीं है

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हाय फ्रेंड गुड मॉर्निंग आपके द्वारा काफी बढ़िया कुशन किया गया पर मैं आपको बता दूं कि आज प्रेम विवाह को इसलिए ज्यादा मान्यता नहीं मिली है क्योंकि अपना समाज काफी पिछड़ा हुआ समाज एक तो है कि यहां पर पढ़े-लिखे लोग कम है जिसके कारण ऐसी भावनाएं या ऐसा के सोच बन जाती है दूसरी चीजें होती है कि जाति व्यवस्था जाति व्यवस्था में कई तो होता है ऐसा कि जैसे निम्न जाति के लोग होते हैं वह हमेशा ही अपने काश के अंदर ही शादी करना पेपर करते हैं लेकिन कुछ काश ऐसे भी हैं जिसमें इंटर कास्ट मैरिज होते हैं जैसे क्यों कहा कि जनरल कांच के अंदर ओबीसी के अंदर इन एसएसटी के अंदर भी कुछ चीजें ऐसी बदल रही है लेकिन एक लंबे टाइम के बाद ही बुरी तरह तीसरी चाहिए होती है क्योंकि एक शिक्षा का दायरा तो कम ही है लेकिन जिस में शिक्षा का धारा है वह काफी ज्यादा ट्रस्ट है तथा कहने का मतलब यह है उनके प्रति इतना ज्यादा वह सांस्कृतिक से इस तरह जुड़े हुए हैं क्योंकि वह चेंज को अपने यहां समझना ही नहीं चाहते यह उस चीज को परिवर्तित करना ही नहीं चाहते जिसके कारण इस चीज होती है तो उन्हें एक जागरूकता लाने की जोर देना चाहिए और समाज को इन धर्म कास्ट से ऊपर ले जाकर सोचना चाहिए तभी यह चीजें बहुत आसानी से चेंज हो सकती है लेकिन मैं तो उम्मीद करता हूं कि आने वाले 20 साल के अंदर यह चीजें और ज्यादा बढ़ेगी जैसे प्रेम विवाह हो गया क्योंकि अरेंज मैरिज की भावनाएं वहां पर कम होने के आसार ज्यादा दिख रहे हैं थैंक यू

hi friend good morning aapke dwara kaafi badhiya cushion kiya gaya par main aapko bata doon ki aaj prem vivah ko isliye zyada manyata nahi mili hai kyonki apna samaj kaafi pichda hua samaj ek toh hai ki yahan par padhe likhe log kam hai jiske karan aisi bhaavnaye ya aisa ke soch ban jaati hai dusri cheezen hoti hai ki jati vyavastha jati vyavastha me kai toh hota hai aisa ki jaise nimn jati ke log hote hain vaah hamesha hi apne kash ke andar hi shaadi karna paper karte hain lekin kuch kash aise bhi hain jisme inter caste marriage hote hain jaise kyon kaha ki general kanch ke andar OBC ke andar in sst ke andar bhi kuch cheezen aisi badal rahi hai lekin ek lambe time ke baad hi buri tarah teesri chahiye hoti hai kyonki ek shiksha ka dayara toh kam hi hai lekin jis me shiksha ka dhara hai vaah kaafi zyada trust hai tatha kehne ka matlab yah hai unke prati itna zyada vaah sanskritik se is tarah jude hue hain kyonki vaah change ko apne yahan samajhna hi nahi chahte yah us cheez ko parivartit karna hi nahi chahte jiske karan is cheez hoti hai toh unhe ek jagrukta lane ki jor dena chahiye aur samaj ko in dharm caste se upar le jaakar sochna chahiye tabhi yah cheezen bahut aasani se change ho sakti hai lekin main toh ummid karta hoon ki aane waale 20 saal ke andar yah cheezen aur zyada badhegi jaise prem vivah ho gaya kyonki arrange marriage ki bhaavnaye wahan par kam hone ke aasaar zyada dikh rahe hain thank you

हाय फ्रेंड गुड मॉर्निंग आपके द्वारा काफी बढ़िया कुशन किया गया पर मैं आपको बता दूं कि आज प्

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santosh Kumar santosh

College Chairman

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देखिए हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व क्यों नहीं देते हैं तो इसके लिए बहुत सारे कारण हैं कुछ मुख्य कारण यह है कि आज के दौर में जो लोग प्रेम करते हैं तो सबसे बड़ी चीज क्या करते हैं अट्रैक्शन करता है प्यार नहीं करते और अट्रैक्शन होने की वजह से एक दूसरे को लोग रिलेशनशिप में आने के बाद छोड़ देते हैं और ज्यादातर केस ऐसे नजर आते हैं 80% किस जो प्यार करते हैं एक दूसरे से ब्रेकअप कर लेते हैं और जब ब्रेकअप कर लेते हैं तो प्यार खत्म हो जाता है तो जिसकी वजह से यह जो वजह बनती है जिसके कारण एटी परसेंट प्यार सक्सेसफुल नहीं हो पाता है फैमिली कारण है किसी भी कारण से इसीलिए लोग जो हैं वह प्रेम विवाह को मापने पहले रीज़न दूसरे रीजन है कि प्रेम विवाह को लोग इसलिए नहीं धनु देते हैं जाट समाज ऊंच-नीच यह सब चीजों को लोग बहुत ज्यादा तीसरी सबसे बड़ी रीजन है कि प्रेम विवाह जो है उसमें दहेज प्रथा की कोई मतलब नहीं होती यह भी एक बहुत बड़ा रीजन है यह सब रीजन से इसके कारण तेंदुआ को वैल्यू नहीं देते

dekhiye hamare samaj me log prem vivah ko zyada mahatva kyon nahi dete hain toh iske liye bahut saare karan hain kuch mukhya karan yah hai ki aaj ke daur me jo log prem karte hain toh sabse badi cheez kya karte hain attraction karta hai pyar nahi karte aur attraction hone ki wajah se ek dusre ko log Relationship me aane ke baad chhod dete hain aur jyadatar case aise nazar aate hain 80 kis jo pyar karte hain ek dusre se breakup kar lete hain aur jab breakup kar lete hain toh pyar khatam ho jata hai toh jiski wajah se yah jo wajah banti hai jiske karan eighty percent pyar successful nahi ho pata hai family karan hai kisi bhi karan se isliye log jo hain vaah prem vivah ko mapne pehle region dusre reason hai ki prem vivah ko log isliye nahi dhanu dete hain jaat samaj unch neech yah sab chijon ko log bahut zyada teesri sabse badi reason hai ki prem vivah jo hai usme dahej pratha ki koi matlab nahi hoti yah bhi ek bahut bada reason hai yah sab reason se iske karan tenduaa ko value nahi dete

देखिए हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को ज्यादा महत्व क्यों नहीं देते हैं तो इसके लिए बहुत

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Rakesh Samdadiya

Business Owner

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इसलिए नहीं देते पहली बार कि मां-बाप चाहते हैं कि हमारा कंसेंट हो और दूसरी बात कि अक्सर यह देखा जा रहा है जिस तरह प्रेम विवाह जल्दी सो जाता है उसी तरह जल्दी से टूट जाता है वह प्रेम विवाह जिसमें मां-बाप का भी सुनाइए गोदान रहता है उससे भी सलाह ली जाती है थोड़ा सा उसमें अगर मैं गलत नहीं हूं तो ऐसे रिश्ते बरकरार रहते हैं पासून नहीं चल रहा है क्यों मरेगी या बहुत टूट चुके हैं अब बाबू से लव मैरिज भी जिंदगी चल रहे नहीं हम नहीं पसंद करना पड़ेगा करने लगेगा अब तो सब वही कर रहे हैं इसलिए अब तक होना पसंद करेगा

isliye nahi dete pehli baar ki maa baap chahte hain ki hamara consent ho aur dusri baat ki aksar yah dekha ja raha hai jis tarah prem vivah jaldi so jata hai usi tarah jaldi se toot jata hai vaah prem vivah jisme maa baap ka bhi sunaiye Godan rehta hai usse bhi salah li jaati hai thoda sa usme agar main galat nahi hoon toh aise rishte barkaraar rehte hain pasun nahi chal raha hai kyon maregi ya bahut toot chuke hain ab babu se love marriage bhi zindagi chal rahe nahi hum nahi pasand karna padega karne lagega ab toh sab wahi kar rahe hain isliye ab tak hona pasand karega

इसलिए नहीं देते पहली बार कि मां-बाप चाहते हैं कि हमारा कंसेंट हो और दूसरी बात कि अक्सर यह

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Jyotsna

Homemaker

1:03
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हमारे समाज में प्रेम विवाह होता है लेकिन कम लोग स्वीकार करते हैं इस वजह से अभी इतना प्रचलन नहीं है प्रेम विवाह का तो इसलिए जो है हमारे यहां बाकी समाज में अभी भी यह बच्चे मानते हैं कि मम्मी पापा पसंद करेंगे और हम उस लड़की से शादी करेंगे तो इस वजह से बोलो यह निर्णय अपने मां बाप पर छोड़ देते हैं इस वजह से प्रेम विवाह अभी इतना सकी है और कुछ घरों में यह भी होता है कि बच्चे पसंद करते हैं और मां-बाप का इतना पैसा रहता है कि वह अपने निर्णय खोल को छोड़ना पड़ता है इस वजह से प्रेम विवाह कम अभी कंप्रेसर लाने भारतीय समाज में औरतें सुख के मुकाबले

hamare samaj me prem vivah hota hai lekin kam log sweekar karte hain is wajah se abhi itna prachalan nahi hai prem vivah ka toh isliye jo hai hamare yahan baki samaj me abhi bhi yah bacche maante hain ki mummy papa pasand karenge aur hum us ladki se shaadi karenge toh is wajah se bolo yah nirnay apne maa baap par chhod dete hain is wajah se prem vivah abhi itna saki hai aur kuch gharon me yah bhi hota hai ki bacche pasand karte hain aur maa baap ka itna paisa rehta hai ki vaah apne nirnay khol ko chhodna padta hai is wajah se prem vivah kam abhi compressor lane bharatiya samaj me auraten sukh ke muqable

हमारे समाज में प्रेम विवाह होता है लेकिन कम लोग स्वीकार करते हैं इस वजह से अभी इतना प्रचलन

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Manu

Nursing

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Kamlesh Kumar Jay Mata ki

Berojgar Vyavsay Ki Khoj

1:24
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जय माता दी बहुत ही सुंदर प्रश्न आपने किया है कि आज समाज में लोग प्रेमी हो को मैं क्यों नहीं देते देखे भाई ना तो ऐसा समाज है जो उस प्रेम की पवित्रता को समझ सकते हैं क्योंकि आज का समाज काम क्रोध लोभ मोह स्वार्थ इन चीजों के आवेश में किसी चीज को ना तो उस धर्म को समझता है ना प्रेम को समझता है ना पवित्रता को समझता है ना त्याग को समझता है ना भावनाओं को समझता है अर्थात अगर वह इस चीज को समझेगा नहीं तो महत्व कैसे देगा और ना ही आज ऐसे प्रेम करने वाले क्योंकि प्रेम की परिभाषा ही अलग है ना तो प्रेम करने वाले उसको परिभाषित कर सकते हैं और ना ही देखने वाले उस चीज को अमल में ला सकते नव चीज को समझ सकते हैं आप समझे इस बात को इस आवरण नहीं है यहां पर लोगों के द्वारा कलयुग बनाया गया है यहां संभव नहीं है यहां कुछ भी संभव नहीं सारा उल्टा पुल्टा है बहुत समय लगेगा आप सिर्फ अपने आप को संभाल लिया और रहने दीजिए बहुत ज्यादा उथल-पुथल है प्रेम की परिभाषा आज के समय में समझना समझाना बहुत कठिन प्रयत्न है जय माता दी

jai mata di bahut hi sundar prashna aapne kiya hai ki aaj samaj me log premi ho ko main kyon nahi dete dekhe bhai na toh aisa samaj hai jo us prem ki pavitrata ko samajh sakte hain kyonki aaj ka samaj kaam krodh lobh moh swarth in chijon ke aavesh me kisi cheez ko na toh us dharm ko samajhata hai na prem ko samajhata hai na pavitrata ko samajhata hai na tyag ko samajhata hai na bhavnao ko samajhata hai arthat agar vaah is cheez ko samjhega nahi toh mahatva kaise dega aur na hi aaj aise prem karne waale kyonki prem ki paribhasha hi alag hai na toh prem karne waale usko paribhashit kar sakte hain aur na hi dekhne waale us cheez ko amal me la sakte nav cheez ko samajh sakte hain aap samjhe is baat ko is aavaran nahi hai yahan par logo ke dwara kalyug banaya gaya hai yahan sambhav nahi hai yahan kuch bhi sambhav nahi saara ulta pulta hai bahut samay lagega aap sirf apne aap ko sambhaal liya aur rehne dijiye bahut zyada uthal puthal hai prem ki paribhasha aaj ke samay me samajhna samajhana bahut kathin prayatn hai jai mata di

जय माता दी बहुत ही सुंदर प्रश्न आपने किया है कि आज समाज में लोग प्रेमी हो को मैं क्यों नही

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guest_195F3रामफल

डायरेट सेलिंग

2:12
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हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को जा जाए महत्त्व क्यों नहीं देते इसलिए नहीं देते कि प्रेम विवाह जो है या अधिकांश रिश्ता टूट जाता है क्योंकि जब तक उनकी बनती है तब तक रिश्ते का फर्ज निभाते हैं जिस दिन उनकी बिगड़ जाती है और रिश्ते को तोड़ देते हैं इसीलिए समाज जो है प्रेम विवाह को स्वीकार नहीं करता अब प्रेम विवाह को लोग एक ताना मारते हैं कि क्या हमसे तुमसे विवाह थोड़ी हुआ है यह तो प्रेम विवाह है आज है कल नहीं रहेगा लोग ऐसा बोल करके पड़ताल करते हैं इसीलिए समाज जो है क्या कहता है कि आप अपने ही धर्म में विवाह करें समाज की व्यवस्था है आप दूसरे समाज में विवाह ना करें इसीलिए प्रेम विवाह को संस्कार नहीं किया जाता बहुत पुरानी प्रथा है और प्रेम विवाह एक ऐसा विवाह है कि जब तक बनती है तब तक गाड़ी चलती है जिस दिन गाड़ी में कुछ खटास आ जाता है वह गाड़ी जो है वहीं पर बंद हो जाती है इसीलिए समाज जो है प्रेम विवाह को संख्या नहीं करता है और प्रेम विवाह यदि अगर 100 परसेंट में से ऐसे विवाह जो है और 74 परसेंट तक टूट जाते हैं इसलिए प्रेम विवाह नहीं करना चाहिए और हमारे समाज के लोग प्रेम विवाह को जाजाज महत्त्व इसीलिए नहीं देते क्योंकि यह रिश्ता जो है बहुत कम चलता है

hamare samaj me log prem vivah ko ja jaaye mahatva kyon nahi dete isliye nahi dete ki prem vivah jo hai ya adhikaansh rishta toot jata hai kyonki jab tak unki banti hai tab tak rishte ka farz nibhate hain jis din unki bigad jaati hai aur rishte ko tod dete hain isliye samaj jo hai prem vivah ko sweekar nahi karta ab prem vivah ko log ek tana marte hain ki kya humse tumse vivah thodi hua hai yah toh prem vivah hai aaj hai kal nahi rahega log aisa bol karke padatal karte hain isliye samaj jo hai kya kahata hai ki aap apne hi dharm me vivah kare samaj ki vyavastha hai aap dusre samaj me vivah na kare isliye prem vivah ko sanskar nahi kiya jata bahut purani pratha hai aur prem vivah ek aisa vivah hai ki jab tak banti hai tab tak gaadi chalti hai jis din gaadi me kuch khatas aa jata hai vaah gaadi jo hai wahi par band ho jaati hai isliye samaj jo hai prem vivah ko sankhya nahi karta hai aur prem vivah yadi agar 100 percent me se aise vivah jo hai aur 74 percent tak toot jaate hain isliye prem vivah nahi karna chahiye aur hamare samaj ke log prem vivah ko jajaj mahatva isliye nahi dete kyonki yah rishta jo hai bahut kam chalta hai

हमारे समाज में लोग प्रेम विवाह को जा जाए महत्त्व क्यों नहीं देते इसलिए नहीं देते कि प्रेम

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