ज़िंदगी को आरामदायक बनाना चाहिए या कष्टदायक?...


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Kinnari Raval

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0:45

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

नमस्कार आपका क्वेश्चन यह है कि जिंदगी को आरामदायक बनाना चाहिए या कष्टदायक देखिए जिंदगी को ना तो इतना आरामदायक बनाइए और नाते इतना कष्ट दायक बनाइए क्योंकि जिंदगी से हो जीवन में परिवर्तन शील होता है तो जिंदगी परिवर्तनशील होती रहती है ताकि जिंदगी के अंदर जो भी परिवर्तन आता रहता है तो उसको हम एक्सेप्ट करना चाहिए या पॉजिटिव या नेगेटिव जो भी परिवर्तन जिंदगी के अंदर आते हैं उसको हम एक्सेप्ट करना चाहिए और उसी के हिसाब से हमें आगे बढ़ना चाहिए तो जिंदगी कब किस तरह से लेते हैं उसी के ऊपर डिपेंड करता है और उसी से आपकी जिंदगी आराम है क्या कष्टदायक बनी हुई है और ऐसी है धन्यवाद

namaskar aapka question yeh hai ki zindagi ko aaramadayak banana chahiye ya kashtdayak dekhie zindagi ko na toh itna aaramadayak banaiye aur naate itna kasht dayak banaiye kyonki zindagi se ho jeevan mein parivartan sheela hota hai toh zindagi parivartanshil hoti rehti hai taki zindagi ke andar jo bhi parivartan aata rehta hai toh usko hum except karna chahiye ya positive ya Negative jo bhi parivartan zindagi ke andar aate hain usko hum except karna chahiye aur usi ke hisab se humein aage badhana chahiye toh zindagi kab kis tarah se lete hain usi ke upar depend karta hai aur usi se aapki zindagi aaram hai kya kashtdayak bani hui hai aur aisi hai dhanyavad

नमस्कार आपका क्वेश्चन यह है कि जिंदगी को आरामदायक बनाना चाहिए या कष्टदायक देखिए जिंदगी को

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरे मित्र ही आपके हाथ में नहीं है जिंदगी को आरामदायक बना सकता आपके कर्मों पर डिपेंड होता है तो जीवन आपका रामधनी का मैं आपको दृष्टांत से चलना चाहता हूं एक तो बोर्ड के एग्जाम होते हैं तो उसमें करीब 800000 स्टूडेंट एग्जाम देते हैं प्रत्येक विद्यार्थी कि तुम्हारी डिवीजन कैसी आई तो फिर क्यों नहीं बताएगा कोई विद्यार्थी नहीं करते हो जाऊंगा लेकिन जिसमें जितना लिखा है उसके अनुसार उसे और प्रिंटर जाती है फेल होते हैं और उसके गुण होते हैं ठीक इसी प्रकार से ही जीवन में जैसे अपने कर्म किए हैं उसके अनुसार आपका जीवन चलता हूं का चला जाता है आपको थोड़ा लक्ष्मण वरना बनाना होता है तो लक्ष्य के लिए अब आप यह कहेंगे आप जैसे पड़ रहे हैं मालूम तो आपने लक्ष्य बना लिया कि मुझे फर्स्ट डिवीजन ऊपर आना आना है मेरे लिए तो आपको कर्म भी उतने ही उच्च कोटि के करने होंगे तैयारी भी उतनी ही उच्च कोटि की करनी होगी और जब आपने लक्ष्य निश्चित ही कर लिया कि मुझे केवल येन केन प्रकारेण थर्ड डिविजन से पास होना है तो मिस आपका लकी नहीं चाहता आप के प्रयास ऑटोमेटिक वेस्ट हो जाएंगे अब आप ही कहेंगे हर आदमी से पूछिए तो क्यों तू दूकान लेना चाहता है क्या राम वनवास जाने के लिए तैयार थे लेकिन समय ने अपने आप ऐसा मूड बनाया कि राम लक्ष्मण और सीता वनवास गए क्या पांडव वनवास जाना चाहती थी लेकिन समय ने मोड़ ऐसा लिया कि उनको बनवास जाना पड़ा मित्र आपके कर्मों पर डिपेंड है कि आप अपने जीवन को किस ओर मुड़ते हैं आपके कर्म अच्छे होते हैं तो आप आराम जीवन आरामदायक हो जाता है अन्यथा कष्ट में

mere mitra hi aapke hath mein nahi hai zindagi ko aaramadayak bana sakta aapke karmon par depend hota hai toh jeevan aapka ramadhani ka main aapko drishtant se chalna chahta hoon ek toh board ke exam hote hai toh usme kareeb 800000 student exam dete hai pratyek vidyarthi ki tumhari division kaisi I toh phir kyon nahi batayega koi vidyarthi nahi karte ho jaunga lekin jisme jitna likha hai uske anusaar use aur printer jaati hai fail hote hai aur uske gun hote hai theek isi prakar se hi jeevan mein jaise apne karm kiye hai uske anusaar aapka jeevan chalta hoon ka chala jata hai aapko thoda lakshman varna banana hota hai toh lakshya ke liye ab aap yah kahenge aap jaise pad rahe hai maloom toh aapne lakshya bana liya ki mujhe first division upar aana aana hai mere liye toh aapko karm bhi utne hi ucch koti ke karne honge taiyari bhi utani hi ucch koti ki karni hogi aur jab aapne lakshya nishchit hi kar liya ki mujhe keval yen cane prakaren third divison se paas hona hai toh miss aapka lucky nahi chahta aap ke prayas Automatic west ho jaenge ab aap hi kahenge har aadmi se puchiye toh kyon tu dukan lena chahta hai kya ram vanvas jaane ke liye taiyar the lekin samay ne apne aap aisa mood banaya ki ram lakshman aur sita vanvas gaye kya pandav vanvas jana chahti thi lekin samay ne mod aisa liya ki unko banvaas jana pada mitra aapke karmon par depend hai ki aap apne jeevan ko kis aur mudte hai aapke karm acche hote hai toh aap aaram jeevan aaramadayak ho jata hai anyatha kasht mein

मेरे मित्र ही आपके हाथ में नहीं है जिंदगी को आरामदायक बना सकता आपके कर्मों पर डिपेंड होता

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Gunjan

Junior Volunteer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं क्या कर बात करे जिंदगी को आरामदायक बनाना चाहिए या फिर कष्टदायक तो देखे जीवन में कष्ट कोई भी नहीं लेना चाहता है हर कोई यही प्रयास करता है कि ज्यादा से ज्यादा सुख और संविधान को अपने आप को अपने परिवार को देख सके तो इसके लिए आपको जरूर कष्ट मिल जाता है यानी कि इसके लिए आपको जो है वह कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी और जो है वह चुनौतियां आपको मिलती रहेगी तू जीवन को सुखमय बनाने के लिए कष्ट आपको जरूर खेलना ही चाहिए

main kya kar baat kare zindagi ko aaramadayak banana chahiye ya phir kashtdayak toh dekhe jeevan mein kasht koi bhi nahi lena chahta hai har koi yahi prayas karta hai ki zyada se zyada sukh aur samvidhan ko apne aap ko apne parivar ko dekh sake toh iske liye aapko zaroor kasht mil jata hai yani ki iske liye aapko jo hai vaah kadi mehnat karni padegi aur jo hai vaah chunautiyaan aapko milti rahegi tu jeevan ko sukhmay banane ke liye kasht aapko zaroor khelna hi chahiye

मैं क्या कर बात करे जिंदगी को आरामदायक बनाना चाहिए या फिर कष्टदायक तो देखे जीवन में कष्ट क

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