क्या योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना / ईश्वर से डरना आवश्यक है?...


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Pradeep Solanki

Corporate Yoga Consultant

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जी नहीं योगाभ्यास करने के लिए आपका धार्मिक होना कोई जरूरी नहीं है सर पर विश्वास होना भी जरूरी नहीं योग कहीं नहीं कहता आपको धर्म से डिलीट नहीं करता योग एक जीवन जीने की कला है आप बचपन से लेकर मृत्यु तक कैसे जीना है वह योग सिखाता है तो योग सिर्फ शारीरिक मानसिक आध्यात्मिक ही नहीं बल्कि आपका पूरा समाज में कैसे रहना है आपने लिए क्या करना है योग को आप देखेंगे तो इसमें आसन और प्राणायाम करने से पहले यम और नियम आते हैं कि यम सोशल कंडक्ट समाज में कैसे रहना है जिसने आपका आता है अहिंसा मन वचन कर्म से जोड़ना पूछना अहिंसा है सत्य है अपरिग्रह ब्रह्मचर्य है तो यह इसी तरह आप के नियम आते हैं सोच संतोष तक स्वाध्याय ईश्वर प्राणी धान फिर आपके यहां सर प्रणाम आते हैं तो यह जरूर लेकर आप किसी विश्वास हो या ना हो लेकिन आप योग करोगे तो हो सकता है आपको इन चीजों पर विश्वास शुरू हो आपके इंटरव्यू लेने सुख शमशीर सब की बॉडी एक्टिवेट हो तब शायद आपको लगे पर ऐसा कोई जरूरत धार्मिक प्रयोग कर सकते कोई भी योग कर सकता है एटलीस्ट वह स्वस्थ शारीरिक और मानसिक रूप से रहेगा धन्यवाद

ji nahi yogabhayas karne ke liye aapka dharmik hona koi zaroori nahi hai sir par vishwas hona bhi zaroori nahi yog kahin nahi kahata aapko dharm se delete nahi karta yog ek jeevan jeene ki kala hai aap bachpan se lekar mrityu tak kaise jeena hai vaah yog sikhata hai toh yog sirf sharirik mansik aadhyatmik hi nahi balki aapka pura samaj me kaise rehna hai aapne liye kya karna hai yog ko aap dekhenge toh isme aasan aur pranayaam karne se pehle yum aur niyam aate hain ki yum social conduct samaj me kaise rehna hai jisne aapka aata hai ahinsa man vachan karm se jodna poochna ahinsa hai satya hai aparigrah brahmacharya hai toh yah isi tarah aap ke niyam aate hain soch santosh tak swaadhyaay ishwar prani dhaan phir aapke yahan sir pranam aate hain toh yah zaroor lekar aap kisi vishwas ho ya na ho lekin aap yog karoge toh ho sakta hai aapko in chijon par vishwas shuru ho aapke interview lene sukh shamshir sab ki body activate ho tab shayad aapko lage par aisa koi zarurat dharmik prayog kar sakte koi bhi yog kar sakta hai etalist vaah swasth sharirik aur mansik roop se rahega dhanyavad

जी नहीं योगाभ्यास करने के लिए आपका धार्मिक होना कोई जरूरी नहीं है सर पर विश्वास होना भी जर

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bhaand's Theatre and Acting Classes

Acting And drama Coach Casting director Drama Director

1:05
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बिल्कुल जरूरी नहीं है कि वह धार्मिक रहे या ईश्वर से डर है क्योंकि अब योग के माध्यम से मन की शांति की बात करते हैं कहीं भी इसमें ईश्वर से या कुछ ऐसा करने की चेष्टा नहीं करते कि आप कुछ अलग करेंगे जी सिर्फ आप मन की शांति के लिए करते हैं और इसमें आपका धार्मिक होना जरूरी नहीं है बिल्कुल जरूरी नहीं है और इसके लिए आपको किसी भी ईश्वर या किसी से भी डरने की भी आवश्यकता नहीं है क्यों डरे किस बात से डर है तो यह जो भी आज आपको ज्ञान मिला है या जहां से भी आपको यह इंफॉर्मेशन मिली है गलत है तो आप को डरने की जरूरत नहीं है और ना ही धार्मिक होने के योग योग धर्म धर्म ढेर सारी चीजें अलग अलग है कि कोई भी चीज किसी से जुड़ी नहीं जा सकते

bilkul zaroori nahi hai ki vaah dharmik rahe ya ishwar se dar hai kyonki ab yog ke madhyam se man ki shanti ki baat karte hain kahin bhi isme ishwar se ya kuch aisa karne ki cheshta nahi karte ki aap kuch alag karenge ji sirf aap man ki shanti ke liye karte hain aur isme aapka dharmik hona zaroori nahi hai bilkul zaroori nahi hai aur iske liye aapko kisi bhi ishwar ya kisi se bhi darane ki bhi avashyakta nahi hai kyon dare kis baat se dar hai toh yah jo bhi aaj aapko gyaan mila hai ya jaha se bhi aapko yah information mili hai galat hai toh aap ko darane ki zarurat nahi hai aur na hi dharmik hone ke yog yog dharm dharm dher saari cheezen alag alag hai ki koi bhi cheez kisi se judi nahi ja sakte

बिल्कुल जरूरी नहीं है कि वह धार्मिक रहे या ईश्वर से डर है क्योंकि अब योग के माध्यम से मन

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अशोक गुप्ता

Founder of Vision Commercial Services.

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ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं है जो शक्ति इस पूरे ब्रह्मांड को संचालित कर रही है जो सृजन कर रही है विध्वंस बिक रही है उसे हमने एक संकेत देने के लिए ईश्वर शब्द का उपयोग किया है और यह शब्द ऐश्वर्य से वह हमेशा ऐश्वर्या रहता है जहां तक डरने की बात है डर लगना हमारी हमारा स्वभाव है हमारे अहंकार को भी लगता है मिट जाने का इसलिए डरने से थोड़ा हमारा मन नियंत्रित होता है लेकिन यहां डर होता है वहां हम प्रेम खून नहीं हो सकते इसलिए ईश्वर को अनुभव करने की जरूरत है और जब हम भी शरद को अनुभव करने लगते हैं उसे अपने भीतर महसूस करने लगते हैं तब हमें ईश्वर के प्रति प्रेम जागृत होता है इसलिए डरना थोड़ा सा उपयोगी है आवश्यक नहीं है

ishwar koi vyakti nahi hai jo shakti is poore brahmaand ko sanchalit kar rahi hai jo srijan kar rahi hai vidhawanse bik rahi hai use humne ek sanket dene ke liye ishwar shabd ka upyog kiya hai aur yah shabd aishwarya se vaah hamesha aishwarya rehta hai jaha tak darane ki baat hai dar lagna hamari hamara swabhav hai hamare ahankar ko bhi lagta hai mit jaane ka isliye darane se thoda hamara man niyantrit hota hai lekin yahan dar hota hai wahan hum prem khoon nahi ho sakte isliye ishwar ko anubhav karne ki zarurat hai aur jab hum bhi sharad ko anubhav karne lagte hain use apne bheetar mehsus karne lagte hain tab hamein ishwar ke prati prem jagrit hota hai isliye darna thoda sa upyogi hai aavashyak nahi hai

ईश्वर कोई व्यक्ति नहीं है जो शक्ति इस पूरे ब्रह्मांड को संचालित कर रही है जो सृजन कर रही ह

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Manish

Health & Medical Officer

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नमस्कार दोस्तों क्या क्वेश्चन है क्या यह बात योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना अथवा ईश्वर से डरना आवश्यक है इसका उत्तर तो यही हो सकता है कि योगाभ्यास में इंसान का धार्मिक होना आवश्यक नहीं धार्मिक योग एक धर्म धर्म से परे चीजें योग एवं शारीरिक व मानसिक जो परेशानियां हैं शारीरिक मानसिक विकास के लिए हम लोग करते हैं उसमें किसी धर्म को योग के साथ किसी धर्म को जोड़ना उचित नहीं है धन्यवाद

namaskar doston kya question hai kya yah baat yogabhayas karne ke liye upyogkartaa ka dharmik hona athva ishwar se darna aavashyak hai iska uttar toh yahi ho sakta hai ki yogabhayas me insaan ka dharmik hona aavashyak nahi dharmik yog ek dharm dharm se pare cheezen yog evam sharirik va mansik jo pareshaniya hain sharirik mansik vikas ke liye hum log karte hain usme kisi dharm ko yog ke saath kisi dharm ko jodna uchit nahi hai dhanyavad

नमस्कार दोस्तों क्या क्वेश्चन है क्या यह बात योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक ह

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Dr Priya Shankar

Homeopath Doctor

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योगाभ्यास करने के लिए योग साधन ज्ञान प्रणब करने के लिए धार्मिक होना बिल्कुल जरूरी नहीं है पैसों से डरना तो कतई जरूरी नहीं है क्योंकि डर एक नकारात्मक उर्जा है जिससे निश्चय ही आपके शरीर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है

yogabhayas karne ke liye yog sadhan gyaan pranab karne ke liye dharmik hona bilkul zaroori nahi hai paison se darna toh katai zaroori nahi hai kyonki dar ek nakaratmak urja hai jisse nishchay hi aapke sharir par pratikul prabhav padta hai

योगाभ्यास करने के लिए योग साधन ज्ञान प्रणब करने के लिए धार्मिक होना बिल्कुल जरूरी नहीं है

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Jaivindra Singh

Financial Expert & Corporate Consultant.

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो फ्रेंड्स क्या योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना ईश्वर से डरना आवश्यक है चेक करना चाहिए लेकिन जरूरी नहीं कि आप धार्मिक हो या ना हो आप किसी भी धर्म को मानते हो जो योगाभ्यास से वह अपने आपके अंदर शांति आपके अंदर इमानदारी आपके अंदर निसंकोच निस्वार्थ भावना को उत्पन्न करता है जिससे आपका मन शांत रहता है और आप बिना नहीं सरदा आपके प्रसन्न मन से कोई भी काम बड़े आराम से कर सकते हैं

hello friends kya yogabhayas karne ke liye upyogkartaa ka dharmik hona ishwar se darna aavashyak hai check karna chahiye lekin zaroori nahi ki aap dharmik ho ya na ho aap kisi bhi dharm ko maante ho jo yogabhayas se vaah apne aapke andar shanti aapke andar imaandari aapke andar nisankoch niswarth bhavna ko utpann karta hai jisse aapka man shaant rehta hai aur aap bina nahi sarada aapke prasann man se koi bhi kaam bade aaram se kar sakte hain

हेलो फ्रेंड्स क्या योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना ईश्वर से डरना आवश्यक ह

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Sheram Zaidi

Marketing specialist

2:07
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आपका जो सवाल है ना ईश्वर से डरना आवश्यक है कि नहीं मकसद यह है कि क्या ईश्वर आपको डराना चाहता है सवारी है आप ईश्वर से उठाना चाहते हो क्या ईश्वर भी चाहता है कि तुम मुझसे डरो ईश्वर ऐसा बिल्कुल नहीं जाता इस वरना आपको आगाह पैदा किया है और आप जो इस दुनिया में आए हो इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए यानी के यहां पर लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए अगर आप इस दुनिया को बेहतर बना सकते हो तो ईश्वर से आप को डरने की जरूरत नहीं है क्योंकि आप ईश्वर के काम में मदद कर दो ₹1 लगाते हो तो कहीं ना कहीं ईश्वर ऑक्सीजन है ना ईश्वर की बनाई हुई तो ऑक्सीजन ना आप का इजाफा कर रहा हूं आपको इंसान है कोई इंसान की मदद कर दो ईश्वर ने इंसान बनाया उसकी आप मदद कर रहे हो तो ईश्वर से कामना आप सहयोग कर रहे हो तो आपको भेजने की जरूरत नहीं है और अगर ईश्वर डराकर आपसे कोई काम काम कराना चाहता तो आप ना तो कोई पूजा पाठ छोड़ सकते थे ना मुसलमान नमाज छोड़ सकते थे एक तरह का वायरस डालता तुम्हारे दिमाग कंधा जब तक तुम पूजा ना करते तुम्हें सुकून नहीं मिलता मुसलमान नमाज में पढ़ते हो नहीं सुकून नहीं मिलता जो है ईश्वर ने आपको आज पैदा किया है आप इस दुनिया में हर बात हासिल करना है और इस दुनिया को बेहतर बनाने के लिए आप क्या कर सकते हो यह आपको सोचना है ईश्वर नहीं चाहता कि आप उस से डरो और वह आपको कभी भी नहीं रहना चाहता वह चाहता है कि आप ईश्वर की बनाई हुई चीजों से प्यार करो उन्हें समझा यही धर्म और यही आदत है और यही योग है सब चीज यही है

aapka jo sawaal hai na ishwar se darna aavashyak hai ki nahi maksad yah hai ki kya ishwar aapko darana chahta hai sawari hai aap ishwar se uthana chahte ho kya ishwar bhi chahta hai ki tum mujhse daro ishwar aisa bilkul nahi jata is varna aapko agah paida kiya hai aur aap jo is duniya me aaye ho is duniya ko behtar banane ke liye yani ke yahan par logo ko fayda pahunchane ke liye agar aap is duniya ko behtar bana sakte ho toh ishwar se aap ko darane ki zarurat nahi hai kyonki aap ishwar ke kaam me madad kar do Rs lagate ho toh kahin na kahin ishwar oxygen hai na ishwar ki banai hui toh oxygen na aap ka ijafa kar raha hoon aapko insaan hai koi insaan ki madad kar do ishwar ne insaan banaya uski aap madad kar rahe ho toh ishwar se kamna aap sahyog kar rahe ho toh aapko bhejne ki zarurat nahi hai aur agar ishwar darakar aapse koi kaam kaam krana chahta toh aap na toh koi puja path chhod sakte the na musalman namaz chhod sakte the ek tarah ka virus dalta tumhare dimag kandha jab tak tum puja na karte tumhe sukoon nahi milta musalman namaz me padhte ho nahi sukoon nahi milta jo hai ishwar ne aapko aaj paida kiya hai aap is duniya me har baat hasil karna hai aur is duniya ko behtar banane ke liye aap kya kar sakte ho yah aapko sochna hai ishwar nahi chahta ki aap us se daro aur vaah aapko kabhi bhi nahi rehna chahta vaah chahta hai ki aap ishwar ki banai hui chijon se pyar karo unhe samjha yahi dharm aur yahi aadat hai aur yahi yog hai sab cheez yahi hai

आपका जो सवाल है ना ईश्वर से डरना आवश्यक है कि नहीं मकसद यह है कि क्या ईश्वर आपको डराना चाह

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Anshu Sarkar

Founder & Director, Sarkar Yog Academy

2:06
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सबसे पहले तो आप को मेरा नमस्कार साथियों मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा क्योंकि आपका सवाल का जवाब देने के लिए आपने मुझे आपसे अभी आपका सवाल है क्या योगा करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना ईश्वर से डरना आवश्यक है बिल्कुल नहीं सबसे पहला पिया जानी है आप करना क्या चाहते हैं आप करना चाह रहे हैं योग अगर अब योग करना चाह रहे हैं तो योग का परिभाषा क्या है जीव आत्मा से परमात्मा का मिलन को योग्यता है जब इतना नेक काम अच्छा काम आप करने जा रहे हैं तो उसमें सर्च करने का तो कोई बात ही नहीं है अब घर में क्या बात है आप धर्म कभी है पहली बात है योग का तो कोई धर्म होता है कोई भी धर्म को कर सकता है जैसे कि जीव आत्मा से परमात्मा का मिलन को जो कहता है मनुष्य में है जीव आत्मा अनुपम है परमात्मा सुपर पावर भगवान अल्लाह वाहेगुरु आप अपना आत्मा से परमात्मा का अब जो भी रिजल्ट का रिजल्ट क्या है आप उससे अपना मिलन करा रहे हैं इसमें धार्मिक होना नहीं होगी मिलन कराने अपना आत्मा से परमात्मा का तो यह दोनों का काम हो रहा है यह तो अच्छा काम हो रहा है अपना सुपर पावर का से आप अपना आत्मा का मिलन करा रहे हैं भगवान सब कुछ अच्छा हो जाएगा धन्यवाद

sabse pehle toh aap ko mera namaskar sathiyo main aapko dhanyavad dena chahunga kyonki aapka sawaal ka jawab dene ke liye aapne mujhe aapse abhi aapka sawaal hai kya yoga karne ke liye upyogkartaa ka dharmik hona ishwar se darna aavashyak hai bilkul nahi sabse pehla piya jani hai aap karna kya chahte hain aap karna chah rahe hain yog agar ab yog karna chah rahe hain toh yog ka paribhasha kya hai jeev aatma se paramatma ka milan ko yogyata hai jab itna neck kaam accha kaam aap karne ja rahe hain toh usme search karne ka toh koi baat hi nahi hai ab ghar me kya baat hai aap dharm kabhi hai pehli baat hai yog ka toh koi dharm hota hai koi bhi dharm ko kar sakta hai jaise ki jeev aatma se paramatma ka milan ko jo kahata hai manushya me hai jeev aatma anupam hai paramatma super power bhagwan allah vaheguru aap apna aatma se paramatma ka ab jo bhi result ka result kya hai aap usse apna milan kara rahe hain isme dharmik hona nahi hogi milan karane apna aatma se paramatma ka toh yah dono ka kaam ho raha hai yah toh accha kaam ho raha hai apna super power ka se aap apna aatma ka milan kara rahe hain bhagwan sab kuch accha ho jaega dhanyavad

सबसे पहले तो आप को मेरा नमस्कार साथियों मैं आपको धन्यवाद देना चाहूंगा क्योंकि आपका सवाल का

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Dr Ashwin Arora

Holistic healer & Naturopath

2:37

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Gautam Sinha

Yoga Trainer And HOLISTIC HEALER

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नहीं क्या योग क्या योग अभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना ईश्वर से जरा आवश्यक नहीं योग करना हमारे शरीर के लिए अच्छी चीज है इसमें ईश्वर से डरना या किसी चीज से डरने की जरूरत नहीं है योग करेंगे तो आप अपना शरीर स्वस्थ रखेंगे योग का प्रभाव हमारे शरीर पर और हमारे मन पर पड़ता है भक्ति का प्रभाव हमारे आत्मा पर पड़ता है तो यूं अब भक्ति दो अलग-अलग चीजें भक्ति योग में ही भक्ति आता है ईश्वर कभी नहीं बोलते हैं कि हमें डरना चाहिए ईश्वर से देना चाहिए धन्यवाद

nahi kya yog kya yog abhyas karne ke liye upyogkartaa ka dharmik hona ishwar se zara aavashyak nahi yog karna hamare sharir ke liye achi cheez hai isme ishwar se darna ya kisi cheez se darane ki zarurat nahi hai yog karenge toh aap apna sharir swasth rakhenge yog ka prabhav hamare sharir par aur hamare man par padta hai bhakti ka prabhav hamare aatma par padta hai toh yun ab bhakti do alag alag cheezen bhakti yog me hi bhakti aata hai ishwar kabhi nahi bolte hain ki hamein darna chahiye ishwar se dena chahiye dhanyavad

नहीं क्या योग क्या योग अभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना ईश्वर से जरा आवश्यक न

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Manish Dev

Motivational Speaker, Yoga-Meditation Guide, Spiritualist, Psycho-analyst, Astrologer, Spiritual Healer, Life Coach

3:09
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अब यहां पर क्या है कि आपकी कुछ व्यक्तिगत धारणाएं प्रस्तुत हो रही है प्रश्न कर रहे हैं कि क्या योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धार्मिक होना ईश्वर से डरना आवश्यक है ऐसा कहीं भी लिखा नहीं गया तो आप ऐसा क्यों माने धार्मिक होने का क्या तात्पर्य है भाई धार्मिक होना बहुत ही अलग विषय है धर्म तो अपरिहार्य है अर्थात उसका त्याग नहीं हो सकता फिर तू धार्मिक होना तो हो किसी न किसी रूप में व्यक्ति धार्मिक होता ही है अगर आप धर्म की परिभाषा को पढ़ेंगे तो प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी रूप में धार्मिक होता है दो विरोधी लोग भी आपस में धार्मिक हो सकते हैं दो शत्रु भी आपस में धार्मिक हो सकते हैं तो धार्मिक होना एक बहुत ही अलग बात है और योगाभ्यास करना है योगा भास्कर नाभिक धार्मिक होना हो गया अब योग का धर्म अपना लिया आपने जिसको अपने व्यवहार में लाया जिसको आपने धारण किया वह आपका धर्म हुआ तो आप धार्मिक तो हो ही गए योगाभ्यास करेंगे जो आपने धारण किया तो धार्मिक योगाभ्यास करने के लिए धार्मिक होना ईश्वर से डरना ईश्वर से डरना यह तो कहीं नहीं लिखा गया था ईश्वर का ध्यान करना जरूरी है ईश्वर प्राणी धान आवश्यक है वरशिप अंजलि ने पतंजलि ने क्रिया योग में ईश्वर पानी दान तप स्वाध्याय ईश्वर प्रधान की बात की है तो ईश्वर प्रधान आवश्यक है उसकी धारणा आवश्यक है आप ईश्वर का ध्यान करें तो ईश्वर में प्रेम रखें डरिए मत प्रेम रखें ध्यान और प्रेम में कोई विशेष अंतर नहीं है प्रेम में प्रेमी जो है अपने प्रेमी के लिए आपने प्रेमी उसी का चिंतन करता रहता है और ध्यान में भी अपने इष्ट का निरंतर चिंतन चलता रहता है एक ही भाग हो जाता है योगी वह अवस्था ही ध्यान है एक भाव के अलावा दूसरा कोई हाउस के मन में रहे ना तो वह अवस्था ध्यान हो जाती है तो ध्यान करना भी इस प्रकार से तो योग करना ध्यान करने की आप बात कर रहे हैं तो इसलिए ईश्वर से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है आपकी निजी परिभाषा है कि धार्मिक होने का मतलब ईश्वर से डरना होता है कि कुछ शास्त्र सम्मत परिभाषा नहीं तो हमारे शास्त्र है वैदिक शास्त्र वेदांत योग मीमांसा उनको हमें समझना जानना चाहिए तो ईश्वर से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है आप उससे प्रेम की थी और उसको जानिए जानने की आवश्यकता है माननीय से ऊपर उठना नियमत जानिए जब जानेंगे तभी जाकर हम उसको सही समन्वय कर पाएंगे और हम समझ पाएंगे कि हां हमें स्वर से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है उससे प्रेम करने की आवश्यकता है इस पर विचार करें

ab yahan par kya hai ki aapki kuch vyaktigat dharnae prastut ho rahi hai prashna kar rahe hain ki kya yogabhayas karne ke liye upyogkartaa ka dharmik hona ishwar se darna aavashyak hai aisa kahin bhi likha nahi gaya toh aap aisa kyon maane dharmik hone ka kya tatparya hai bhai dharmik hona bahut hi alag vishay hai dharm toh apariharya hai arthat uska tyag nahi ho sakta phir tu dharmik hona toh ho kisi na kisi roop me vyakti dharmik hota hi hai agar aap dharm ki paribhasha ko padhenge toh pratyek vyakti kisi na kisi roop me dharmik hota hai do virodhi log bhi aapas me dharmik ho sakte hain do shatru bhi aapas me dharmik ho sakte hain toh dharmik hona ek bahut hi alag baat hai aur yogabhayas karna hai yoga bhaskar nabhik dharmik hona ho gaya ab yog ka dharm apna liya aapne jisko apne vyavhar me laya jisko aapne dharan kiya vaah aapka dharm hua toh aap dharmik toh ho hi gaye yogabhayas karenge jo aapne dharan kiya toh dharmik yogabhayas karne ke liye dharmik hona ishwar se darna ishwar se darna yah toh kahin nahi likha gaya tha ishwar ka dhyan karna zaroori hai ishwar prani dhaan aavashyak hai worship anjali ne patanjali ne kriya yog me ishwar paani daan tap swaadhyaay ishwar pradhan ki baat ki hai toh ishwar pradhan aavashyak hai uski dharana aavashyak hai aap ishwar ka dhyan kare toh ishwar me prem rakhen dariye mat prem rakhen dhyan aur prem me koi vishesh antar nahi hai prem me premi jo hai apne premi ke liye aapne premi usi ka chintan karta rehta hai aur dhyan me bhi apne isht ka nirantar chintan chalta rehta hai ek hi bhag ho jata hai yogi vaah avastha hi dhyan hai ek bhav ke alava doosra koi house ke man me rahe na toh vaah avastha dhyan ho jaati hai toh dhyan karna bhi is prakar se toh yog karna dhyan karne ki aap baat kar rahe hain toh isliye ishwar se darane ki koi avashyakta nahi hai aapki niji paribhasha hai ki dharmik hone ka matlab ishwar se darna hota hai ki kuch shastra sammat paribhasha nahi toh hamare shastra hai vaidik shastra vedant yog mimansa unko hamein samajhna janana chahiye toh ishwar se darane ki koi avashyakta nahi hai aap usse prem ki thi aur usko janiye jaanne ki avashyakta hai mananiya se upar uthna niyamat janiye jab jaanege tabhi jaakar hum usko sahi samanvay kar payenge aur hum samajh payenge ki haan hamein swar se darane ki koi avashyakta nahi hai usse prem karne ki avashyakta hai is par vichar kare

अब यहां पर क्या है कि आपकी कुछ व्यक्तिगत धारणाएं प्रस्तुत हो रही है प्रश्न कर रहे हैं कि क

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Shahe Alam

Sports Coach

1:17
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देखिए यहां पर सवाल है क्या योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धर्म धार्मिक होना पब्लिक ईश्वर से डरना आवश्यक है योगाभ्यास जो है यह जिस तरह से यह फिजिकल फिटनेस के लिए होता है और फिजिकल फिटनेस आप कर सकते हैं कोई भी धर्म का आदमी कर सकता है इसमें धार्मिक होना या धार्मिक होना इसमें कोई शर्त नहीं है कोई भी आदमी योगाभ्यास कर सकता है और रहा जहां तक सवाल यह है कि ईश्वर से डरना चाहिए क्या यह आवश्यक है कि बिल्कुल आवश्यक है ईश्वर से हमेशा डर के रहना चाहिए अगर उससे डर के रहेंगे तभी हम कोई भी बुरा काम नहीं करेंगे यह सोचते कि अगर हम यह कोई गलत काम कर रहे हैं तो ईश्वर हमें देख रहा है इसलिए हमें ईश्वर से डर के रहना चाहिए ईश्वर से डरेंगे तो हमेशा हम अच्छे ही काम करेंगे मानवता है कहीं काम करेंगे थैंक यू

dekhiye yahan par sawaal hai kya yogabhayas karne ke liye upyogkartaa ka dharm dharmik hona public ishwar se darna aavashyak hai yogabhayas jo hai yah jis tarah se yah physical fitness ke liye hota hai aur physical fitness aap kar sakte hain koi bhi dharm ka aadmi kar sakta hai isme dharmik hona ya dharmik hona isme koi sart nahi hai koi bhi aadmi yogabhayas kar sakta hai aur raha jaha tak sawaal yah hai ki ishwar se darna chahiye kya yah aavashyak hai ki bilkul aavashyak hai ishwar se hamesha dar ke rehna chahiye agar usse dar ke rahenge tabhi hum koi bhi bura kaam nahi karenge yah sochte ki agar hum yah koi galat kaam kar rahe hain toh ishwar hamein dekh raha hai isliye hamein ishwar se dar ke rehna chahiye ishwar se darenge toh hamesha hum acche hi kaam karenge manavta hai kahin kaam karenge thank you

देखिए यहां पर सवाल है क्या योगाभ्यास करने के लिए उपयोगकर्ता का धर्म धार्मिक होना पब्लिक ईश

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आचार्य प्रशांत

IIT-IIM Alumnus, Ex Civil Services Officer, Mystic

9:22
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योग का अर्थ इतना ही है तेजू दो फाड़ मैंने कर रखे होते हैं अच्छा बुरा यह दोनों एक हो गए इनका योग हो गया क्योंकि योग होने के लिए और कोई दो होते नहीं है योग तो तभी होगा ना जब दो हिस्से होंगे यह दोनों मिलकर एक हो गए मिल्की एक कैसे हो गए इन दोनों का जो एक मूल तत्व है वह उजागर हो गया मूल तत्व दोनों का एक है यह बात समझ में आ गई यही होगे योग के लिए कुछ पाना नहीं है जिस एक पर आप बैठे थे उसके साथ-साथ दूसरे को भी देख लेना है योग का संयोग का अर्थ है आपने पर बैठे हो स्कॉर्पियो की नहीं हो सकती क्यों दूर बैठा है और वह आपकी दुनिया से निष्कासित अभी नहीं हो सकते क्योंकि होने का अर्थ है मैं बैठा हूं और काबिलियत पर भी चला जाऊं बिल्कुल करीब चला जाऊं उसके बिल्कुल बिल्कुल करीब इतना करीब कि पापी कहला ही जाऊं और वहां जाकर के साथ साथ में ही देख लूं कि आपका तत्वों भी वही है जो पुण्य का तत्व है यह योग है रंग अलग अलग ही दोनों के तुम्हारी मम्मी से जो लोग किसी भी व्यक्ति के एक सिरे पर बैठे हैं उनको दूसरे सिरे के करीब जाना पड़ेगा अगर उन्हें योग में प्रतिस्थापित होना है जिन चीजों को आज तक आपने महत्वपूर्ण बोला है कि भारत का एक सिरा है कि यह महत्वपूर्ण है और दूसरा क्या होता है यह महत्व चीन है जिन बातों को आपने आज तक महत्वपूर्ण बोला है उनको आप को जागरूक होकर महत्वहीन कहना पड़ेगा इस कार्य को पूर्ण होता है और कुछ होता है होता है नहीं होता है होता है बस होता है बिट्टू कि आप कुछ बातों को बहुत महत्व देता आए हो इसीलिए अब आपके लिए आवश्यक हो जाएगा कि आप उनको जानबूझकर वह तो देना छोड़ो तुम के विपरीत ओं को महत्व देना शुरू करो दो चाहता हूं यह मैं कहता हूं की चमक दमक को रुपए कैसे के प्रदर्शन को भोग को ब्रह्मा तो दिया है ना पूजा करके फ्री शॉपिंग मॉल के सामने खड़े हो जाओ और इसी को ध्यान से देख लूंगा सब ध्यान से देख लूंगा तब और फिर जोर से कहूंगा अपने आप से यह सब झूठ है आज तत्वों की शॉपिंग मॉल में उस ज्वेलरी की दुकान को देख करके उसको देख कर के गारमेंट शॉप को देख कर के अपने आप से यही कहा है कि यह सब कुछ असली है और महत्वपूर्ण है तो बहुत जरूरी है कि तुम वहां पर जाओ और खड़े हो और जोर से अपने आप को ही घोषणा करो कि यह सब कुछ झूठा है और नकली है पद को प्रतिष्ठा को और ताकत को तुमने बहुत महत्व दिया है आज तक तो बहुत जरूरी है कि सड़क से जब लाल बत्ती वाला काफिला गुजर रहा हो तो उसको देखो और बजाय इसके कि तुम कुत्ते हो जाओ एक आदमी के पीछे 20 गाड़ियां और गुंडे खड़े हो जाओ ध्यान से देखो और कहो झूठ है यह सब यही योग है एस्से पर बैठे थे और उसको भी सच मान लिया था उसी से अपनी पहचान बना ली थी उसी से जुड़ गए थे हम जा रहे हैं दूसरे पर भी इसका अर्थ यह नहीं है कि एक सिरे से उठकर दूसरे पर बैठ जाना है गलत मत समझ लेना नहीं कहा जा रहा है कि पहले चिल्लाते थे महत्वपूर्ण महत्वपूर्ण और चलाओ मातहीन माधुरी नहीं कहा जा रहा है कि पहले तुम वह सारे काम करते थे जो तुमने कहलाते हैं और अब तो वह सारे काम करने लगे तो आप कहलाते हैं मिनी कहां जा रहा है कहा जा रहा है कि जब तक तुम पाप के करीब नहीं जाओगे तुम जानोगे कैसे आप कब तक तो वही है जो खोलने का है तुम्हारा नहीं अगर तुम पाप से दूर ही दूर रहे इसलिए जो लोग बड़ा शुचिता पूर्ण जीवन बिताते हैं वह जाते हैं लगता तो है तभी उनका बड़ा सांप रहा कभी रोने कोई बुरा काम नहीं करा और उनका जीवन पृथ्वी भी नहीं पाता क्योंकि बुराई के करीब ही नहीं गया जिसको बुरा कहा जाता है तो उसे कहीं भी नहीं गया उसको जाने का कैसे भूलना नहीं जिसको तुम बुरा कहते हो उसका करता भी वही परमात्मा है तुम अगर बुराई को ठुकरा रहे हो तो उस परमात्मा को ठुकरा रहे हो योगी की आंख को पाप में भी हत्या में भी चोरी और डकैती में भी स्पष्ट कर में भी वही तत्व दिखाई देता है जो उसे गिरी मंदिर में दिखाई देता है कब आती होगी हुए यू कार्तीय कि मेरी आंख को अब तो दिखते ही नहीं एक ही नजर आता है असुविधा की स्थिति बड़ी मुश्किल से तो हमने संयम साधा है बड़ी मुश्किल से तो हमने हवाला आचरण साधा है और उनसे कह रही जो अच्छा वाला साथ लिया है वही तुम्हारा बंधन है पूरे हो जाओ बुरे सो भी जाओ उसके बहुत करीब जाओ उसे देखना पड़ेगा जैसे कि नहीं हो जाओ वैसे ही बुरे भी जाओ कैसे जानोगे कि क्रोध क्या है गुरु से करीब नहीं गए जिन बातों को पाप की संज्ञा दे दी है उनको समझोगे कैसे अगर उन्हें कभी उतर ही नहीं सुबह पहले से तुम बचोगे सब कुछ ट्राई करने के लिए कह तो ऐसे रहे हो जैसे तुम परम पुरुष हो सब कुछ अभी जो कहा उस में कितनी मान्यताएं छुट्टियों को समझना यह समझ रहे हैं बैठे हुए हैं यह सोच रहे एक कर्म करेगा फिर दूसरा कर्म करेगा फिर तीसरा करेगा और ए सब कुछ करेगा जो उन्होंने कहा कि सब कुछ ट्राई करें यह सब कुछ करेगा लेकिन फिर भी यही रहेगा अरे तुम पहला ही कर्म करोगे तुम ए प्लस बी माइनस हो जाने वाले हो यहां सब कुछ ट्राई करने के लिए और सब कुछ कर करके भी यही बता रहा है तो एक कुछ कर नहीं रहा एक ही काम कर रहा है क्यों अपने आप को बचा रहा है जीवन के जो मूल है जंक्शन से उनको देखो ना तो मानते हो ना वही रहूंगा घड़ी 2 घंटे पहले जो थे वह अब नहीं हो तुम एक गहरे कर्म में उतर ओके जो तुमने आज तक नहीं किया उसके बाद तुम भी रह जाओगे तुम पहले थे मैं जा रहा हूं जिन बातों को तुमने जीवन से निष्कासित कर रखा है जरा उनके करीब जाओ उनके करीब जाने के बाद तुम बचोगे क्या तुम्हें भूल जाना है तुम्हारी अपनी हस्ती खुशी जानी है यह सवाल भी कि सब कुछ ट्राई करें यह पूछ रहा है एडेश्वर ज्यादा समझदार होगा

yog ka arth itna hi hai teju do faad maine kar rakhe hote hain accha bura yah dono ek ho gaye inka yog ho gaya kyonki yog hone ke liye aur koi do hote nahi hai yog toh tabhi hoga na jab do hisse honge yah dono milkar ek ho gaye milki ek kaise ho gaye in dono ka jo ek mul tatva hai vaah ujagar ho gaya mul tatva dono ka ek hai yah baat samajh mein aa gayi yahi hoge yog ke liye kuch paana nahi hai jis ek par aap baithe the uske saath saath dusre ko bhi dekh lena hai yog ka sanyog ka arth hai aapne par baithe ho scorpio ki nahi ho sakti kyon dur baitha hai aur vaah aapki duniya se nishkasit abhi nahi ho sakte kyonki hone ka arth hai baitha hoon aur kabiliyat par bhi chala jaaun bilkul kareeb chala jaaun uske bilkul bilkul kareeb itna kareeb ki papi kahela hi jaaun aur wahan jaakar ke saath saath mein hi dekh loo ki aapka tatvon bhi wahi hai jo punya ka tatva hai yah yog hai rang alag alag hi dono ke tumhari mummy se jo log kisi bhi vyakti ke ek sire par baithe hain unko dusre sire ke kareeb jana padega agar unhe yog mein pratisthapit hona hai jin chijon ko aaj tak aapne mahatvapurna bola hai ki bharat ka ek sira hai ki yah mahatvapurna hai aur doosra kya hota hai yah mahatva china hai jin baaton ko aapne aaj tak mahatvapurna bola hai unko aap ko jagruk hokar mahatwahin kehna padega is karya ko purn hota hai aur kuch hota hai hota hai nahi hota hai hota hai bus hota hai bittu ki aap kuch baaton ko bahut mahatva deta aaye ho isliye ab aapke liye aavashyak ho jaega ki aap unko janbujhkar vaah toh dena chodo tum ke viprit on ko mahatva dena shuru karo do chahta hoon yah main kahata hoon ki chamak damak ko rupaye kaise ke pradarshan ko bhog ko brahma toh diya hai na puja karke free shopping mall ke saamne khade ho jao aur isi ko dhyan se dekh lunga sab dhyan se dekh lunga tab aur phir jor se kahunga apne aap se yah sab jhuth hai aaj tatvon ki shopping mall mein us jewellery ki dukaan ko dekh karke usko dekh kar ke garment shop ko dekh kar ke apne aap se yahi kaha hai ki yah sab kuch asli hai aur mahatvapurna hai toh bahut zaroori hai ki tum wahan par jao aur khade ho aur jor se apne aap ko hi ghoshana karo ki yah sab kuch jhutha hai aur nakli hai pad ko prathishtha ko aur takat ko tumne bahut mahatva diya hai aaj tak toh bahut zaroori hai ki sadak se jab laal batti vala kaafila gujar raha ho toh usko dekho aur bajay iske ki tum kutte ho jao ek aadmi ke peeche 20 gadiyan aur gunde khade ho jao dhyan se dekho aur kaho jhuth hai yah sab yahi yog hai essay par baithe the aur usko bhi sach maan liya tha usi se apni pehchaan bana li thi usi se jud gaye the hum ja rahe hain dusre par bhi iska arth yah nahi hai ki ek sire se uthakar dusre par baith jana hai galat mat samajh lena nahi kaha ja raha hai ki pehle chillate the mahatvapurna mahatvapurna aur chalao mathin madhuri nahi kaha ja raha hai ki pehle tum vaah saare kaam karte the jo tumne kehlate hain aur ab toh vaah saare kaam karne lage toh aap kehlate hain mini kahaan ja raha hai kaha ja raha hai ki jab tak tum paap ke kareeb nahi jaoge tum janoge kaise aap kab tak toh wahi hai jo kholne ka hai tumhara nahi agar tum paap se dur hi dur rahe isliye jo log bada shuchita purn jeevan Bitate hain vaah jaate hain lagta toh hai tabhi unka bada saap raha kabhi rone koi bura kaam nahi kara aur unka jeevan prithvi bhi nahi pata kyonki burayi ke kareeb hi nahi gaya jisko bura kaha jata hai toh use kahin bhi nahi gaya usko jaane ka kaise bhoolna nahi jisko tum bura kehte ho uska karta bhi wahi paramatma hai tum agar burayi ko thukara rahe ho toh us paramatma ko thukara rahe ho yogi ki aankh ko paap mein bhi hatya mein bhi chori aur dakaiti mein bhi spasht kar mein bhi wahi tatva dikhai deta hai jo use giri mandir mein dikhai deta hai kab aati hogi hue you kartiya ki meri aankh ko ab toh dikhte hi nahi ek hi nazar aata hai asuvidha ki sthiti badi mushkil se toh humne sanyam saadha hai badi mushkil se toh humne hawala aacharan saadha hai aur unse keh rahi jo accha vala saath liya hai wahi tumhara bandhan hai poore ho jao bure so bhi jao uske bahut kareeb jao use dekhna padega jaise ki nahi ho jao waise hi bure bhi jao kaise janoge ki krodh kya hai guru se kareeb nahi gaye jin baaton ko paap ki sangya de di hai unko samjhoge kaise agar unhe kabhi utar hi nahi subah pehle se tum bachoge sab kuch try karne ke liye keh toh aise rahe ho jaise tum param purush ho sab kuch abhi jo kaha us mein kitni manyatae chhuttiyon ko samajhna yah samajh rahe hain baithe hue hain yah soch rahe ek karm karega phir doosra karm karega phir teesra karega aur a sab kuch karega jo unhone kaha ki sab kuch try kare yah sab kuch karega lekin phir bhi yahi rahega are tum pehla hi karm karoge tum a plus be minus ho jaane waale ho yahan sab kuch try karne ke liye aur sab kuch kar karke bhi yahi bata raha hai toh ek kuch kar nahi raha ek hi kaam kar raha hai kyon apne aap ko bacha raha hai jeevan ke jo mul hai junction se unko dekho na toh maante ho na wahi rahunga ghadi 2 ghante pehle jo the vaah ab nahi ho tum ek gehre karm mein utar ok jo tumne aaj tak nahi kiya uske baad tum bhi reh jaoge tum pehle the main ja raha hoon jin baaton ko tumne jeevan se nishkasit kar rakha hai zara unke kareeb jao unke kareeb jaane ke baad tum bachoge kya tumhe bhool jana hai tumhari apni hasti khushi jani hai yah sawaal bhi ki sab kuch try kare yah puch raha hai edeshwar zyada samajhdar hoga

योग का अर्थ इतना ही है तेजू दो फाड़ मैंने कर रखे होते हैं अच्छा बुरा यह दोनों एक हो गए इ

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Kishore Kunal

Yoga Trainer

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बिल्कुल नहीं होगा अभ्यास करने के लिए उपभोग करता को उपयोगकर्ता का धार्मिक होना कोई अनिवार्य नहीं है बहुत जगह पर इसको भ्रामक रूप में बताया गया है कि यह विशेष जाति धर्म या किसी से जोड़ दिया गया है मगर योग सभी लोगों के लिए सभी धर्म के लोगों के लिए है यह कोई खास हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई के दिन नहीं हर कोई इसको अपना सकते हैं ईश्वर से डरना योग नहीं सिखाता है ईश्वर से जुड़ने का प्रयास आपका योग करवाता है आप भी चिंतन मनन ध्यान करते हैं इससे आप परमात्मा से जुड़ने का प्रयास करते हैं उन्हें किसी भी नाम से जान सकते हैं उम्मीद करता हूं आपको इसका उत्तर मिल गया होगा धन्यवाद

bilkul nahi hoga abhyas karne ke liye upbhog karta ko upyogkartaa ka dharmik hona koi anivarya nahi hai bahut jagah par isko bhramak roop mein bataya gaya hai ki yah vishesh jati dharm ya kisi se jod diya gaya hai magar yog sabhi logo ke liye sabhi dharm ke logo ke liye hai yah koi khaas hindu muslim sikh isai ke din nahi har koi isko apna sakte hain ishwar se darna yog nahi sikhata hai ishwar se judne ka prayas aapka yog karwata hai aap bhi chintan manan dhyan karte hain isse aap paramatma se judne ka prayas karte hain unhe kisi bhi naam se jaan sakte hain ummid karta hoon aapko iska uttar mil gaya hoga dhanyavad

बिल्कुल नहीं होगा अभ्यास करने के लिए उपभोग करता को उपयोगकर्ता का धार्मिक होना कोई अनिवार्

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Neha Kohli

Yoga Instructor

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जरूरी नहीं है जरूरी नहीं है बैलेंस डाल उसको कोई गलती करी अगर आप सेल्फ कॉन्फिडेंस हटाकर अंदर ही अंदर कोई कमी नहीं है जिस मॉनिटर थी और अब खुद अपने आप को बैलेंस करने की हर चीज में त्रिशूल और दोनों डिफरेंट धार्मिक और एक आध्यात्मिक दोनों डिफरेंट है आपके अंदर एक आध्यात्मिक ज्ञान होना चाहिए आपके अंदर भगवान का डर नहीं होना जी और धन का डर नहीं होना चाहिए

zaroori nahi hai zaroori nahi hai balance daal usko koi galti kari agar aap self confidence hatakar andar hi andar koi kami nahi hai jis monitor thi aur ab khud apne aap ko balance karne ki har cheez mein trishool aur dono different dharmik aur ek aadhyatmik dono different hai aapke andar ek aadhyatmik gyaan hona chahiye aapke andar bhagwan ka dar nahi hona ji aur dhan ka dar nahi hona chahiye

जरूरी नहीं है जरूरी नहीं है बैलेंस डाल उसको कोई गलती करी अगर आप सेल्फ कॉन्फिडेंस हटाकर अंद

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Laxmi

Yoga Acharya

0:19
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योगाभ्यास करने के लिए यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि आपका धार्मिक होना जरूरी है या किसी धर्म विशेष संप्रदाय को योगा बिल्कुल नहीं सकता योगा सभी के लिए होता है तो उसको सब लोग कर सकते हैं

yogabhayas karne ke liye yah bilkul bhi zaroori nahi hai ki aapka dharmik hona zaroori hai ya kisi dharm vishesh sampraday ko yoga bilkul nahi sakta yoga sabhi ke liye hota hai toh usko sab log kar sakte hain

योगाभ्यास करने के लिए यह बिल्कुल भी जरूरी नहीं है कि आपका धार्मिक होना जरूरी है या किसी धर

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Girijakant Singh

Founder/ President Yog Bharati Foundation Trust

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धार्मिक होना जरूरी नहीं है लेकिन प्राकृतिक होना जरूरी है पर किसी को मारना जरूरी है मेरे यहां पर डिपेंड करती हैं अलग-अलग धार्मिक भी मानते हैं कुछ लोग को सूरज को मानेगा किशोरी देता अगर हिंदू धर्म की बात करें अगर मुस्लिम धर्म की मानते हैं तो वह आप उसको बोलते हैं कि कोई बड़ी चीज हो गई तो हर धर्म में भगवान को मानना है तो एक बार की बात करेगा तो करेगा तो उसमें भी हमें किसी ना किसी को मानकर कि हम लोग मेडिटेशन करते हैं

dharmik hona zaroori nahi hai lekin prakirtik hona zaroori hai par kisi ko marna zaroori hai mere yahan par depend karti hain alag alag dharmik bhi maante hain kuch log ko suraj ko manega kishori deta agar hindu dharm ki baat kare agar muslim dharm ki maante hain toh vaah aap usko bolte hain ki koi badi cheez ho gayi toh har dharm mein bhagwan ko manana hai toh ek baar ki baat karega toh karega toh usme bhi hamein kisi na kisi ko maankar ki hum log meditation karte hain

धार्मिक होना जरूरी नहीं है लेकिन प्राकृतिक होना जरूरी है पर किसी को मारना जरूरी है मेरे यह

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Princy Sonik

Yoga Instructor

1:42
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ऐसा कुछ नहीं है कि धार्मिक होना जरूरी है और इश्वर से डरना योगा ठीक है कि कब इंडिया में अगर आप देखेंगे तो योग की शक्ति शिव से हुई है तो वह ठीक है लेकिन आप अगर किसी धर्म से जोड़ना चाहेंगे तो वह गलत है क्योंकि भगवान ने तो सभी इंसानों को बनाया था हम लोगों ने आप हिंदू मुस्लिम सिख इसाई किया है उसको और आप ही दिखे कि अगर कोई मुस्लिम नमाज पढ़ते हैं नमाज पढ़ने में भी काफी सारे योगा के पोस्टर चाहते हैं बेसिकली योगा आपके शरीर को फिट करने के लिए है आपका ब्रीडिंग सही हो आपका बॉडी फ्लैक्सिबल रहे इसके लिए इसमें धर्म से तो मुझे नहीं लगता कि कोई चीज जुड़ी हुई है जब मैं अपनी क्लास में मुस्लिम की भी क्लास में जाकर उसकी क्लास में भेजा था कि मेरी क्लास स्टार्टिंग होती है और लास्ट होता है गायत्री मंत्र महामृत्युंजय तू कई होते हैं जो कि अपना बोल दो कोई दिक्कत नहीं है तुमसे मैं चीज को नहीं मानती हूं और ना ही होगा करता हूं भगवान से कि वह धर्म से जुड़े गाया फिर भगवान से डर नहीं देखता ही है हमारे कर्मों के

aisa kuch nahi hai ki dharmik hona zaroori hai aur ishvar se darna yoga theek hai ki kab india mein agar aap dekhenge toh yog ki shakti shiv se hui hai toh vaah theek hai lekin aap agar kisi dharm se jodna chahenge toh vaah galat hai kyonki bhagwan ne toh sabhi insano ko banaya tha hum logo ne aap hindu muslim sikh isai kiya hai usko aur aap hi dikhe ki agar koi muslim namaz padhte hain namaz padhne mein bhi kaafi saare yoga ke poster chahte hain basically yoga aapke sharir ko fit karne ke liye hai aapka Breeding sahi ho aapka body flaiksibal rahe iske liye isme dharm se toh mujhe nahi lagta ki koi cheez judi hui hai jab main apni class mein muslim ki bhi class mein jaakar uski class mein bheja tha ki meri class starting hoti hai aur last hota hai gayatri mantra mahamrityunjay tu kai hote hain jo ki apna bol do koi dikkat nahi hai tumse main cheez ko nahi maanati hoon aur na hi hoga karta hoon bhagwan se ki vaah dharm se jude gaaya phir bhagwan se dar nahi dekhta hi hai hamare karmon ke

ऐसा कुछ नहीं है कि धार्मिक होना जरूरी है और इश्वर से डरना योगा ठीक है कि कब इंडिया में अगर

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Miss. Priyanka Singh

Yoga Instractor

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हमारी हमारी लड़ाई नहीं सकते

hamari hamari ladai nahi sakte

हमारी हमारी लड़ाई नहीं सकते

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Alok Sharma

Yoga Teacher

0:58
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इसका किसी भी धर्म से किसी से लेना देना नहीं है कोई भी दवा ठीक है ना अगर वह मुझको फायदा करती है इससे मुझे आराम मिलता है तो मैं उसको नहीं देखूंगा कि यह किस धर्म की है और किस डॉक्टर ने बनाई है और कहां से आई है क्योंकि अगर मुझे सही मगर दर्द है मुझे कोई दवा खाने से चाहे वह किसी भी धर्म की हो अगर आराम मिलता है तो मैं वह खाऊंगा इसी तरीके से हमारा योग है वह एक दवा है उसको धर्म और यह सब जोड़ने वाले हमें लोग हैं वह क्रिटिसाइज करने वाली बात है लेकिन इसको एक अगर दवा के रूप में अगर देखा जाए तो एक दवा है जो हमारी संस्कृति की उपज है उस तरीके से आप कॉलेज ने उस सब करेंगे उसी से हमारा और हमारे समाज का कल्याण होगा

iska kisi bhi dharm se kisi se lena dena nahi hai koi bhi dawa theek hai na agar vaah mujhko fayda karti hai isse mujhe aaram milta hai toh main usko nahi dekhunga ki yah kis dharm ki hai aur kis doctor ne banai hai aur kahaan se I hai kyonki agar mujhe sahi magar dard hai mujhe koi dawa khane se chahen vaah kisi bhi dharm ki ho agar aaram milta hai toh main vaah khaunga isi tarike se hamara yog hai vaah ek dawa hai usko dharm aur yah sab jodne waale hamein log hain vaah criticize karne wali baat hai lekin isko ek agar dawa ke roop mein agar dekha jaaye toh ek dawa hai jo hamari sanskriti ki upaj hai us tarike se aap college ne us sab karenge usi se hamara aur hamare samaj ka kalyan hoga

इसका किसी भी धर्म से किसी से लेना देना नहीं है कोई भी दवा ठीक है ना अगर वह मुझको फायदा करत

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Rishi Ranjan

Yoga Instructor

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इंसान को देख करके सोना चाहिए अब ऐसा नहीं कि दिन भर ही रहो यह मैटर नहीं करता है इंसान सामाजिक कार्य करते हुए अपना दैनिक कार्य करते हुए कुछ टाइम भगवान के लिए निकालना यह चीज बोर्ड इंपॉर्टेंट ऐसा करेंगे तो खुद ब खुद के लोग धार्मिक स्वभाव के होते हैं कुछ लोगों को फिर से रिपीट करना है कुछ लोगों को साथ रिलेटेड प्रॉब्लम है कुछ तो बहुत है तो प्रॉब्लम है तो हर टाइप के लोगों के लिए योगा बेनिफिट्स आने की धार्मिक होना है भोजन कीजिए तब आप योगा कर सकते हो

insaan ko dekh karke sona chahiye ab aisa nahi ki din bhar hi raho yah matter nahi karta hai insaan samajik karya karte hue apna dainik karya karte hue kuch time bhagwan ke liye nikalna yah cheez board important aisa karenge toh khud bsp khud ke log dharmik swabhav ke hote hain kuch logo ko phir se repeat karna hai kuch logo ko saath related problem hai kuch toh bahut hai toh problem hai toh har type ke logo ke liye yoga benefits aane ki dharmik hona hai bhojan kijiye tab aap yoga kar sakte ho

इंसान को देख करके सोना चाहिए अब ऐसा नहीं कि दिन भर ही रहो यह मैटर नहीं करता है इंसान सामाज

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Rasbihari Pandey

लेखन / कविता पाठ

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लोग बस और धार्मिक आस्था का कोई आपसी तालमेल नहीं है योगाभ्यास आपके शरीर से जुड़ी हुई क्रिया है जिसमें जिसे करने से आप स्वस्थ रहते हैं आप ईश्वर को माने या ना माने प्रयोग कर सकते हैं और अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं

log bus aur dharmik astha ka koi aapasi talmel nahi hai yogabhayas aapke sharir se judi hui kriya hai jisme jise karne se aap swasth rehte hain aap ishwar ko maane ya na maane prayog kar sakte hain aur apne sharir ko swasth rakh sakte hain

लोग बस और धार्मिक आस्था का कोई आपसी तालमेल नहीं है योगाभ्यास आपके शरीर से जुड़ी हुई क्रिया

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Arun Kochar

Yoga Trainer

0:41
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मैंडेटरी नहीं है बाबा कोई बेवफा ना गायन से कनेक्शन आपको कितनी पढ़ाई करना

maindetari nahi hai baba koi bewafaa na gaayan se connection aapko kitni padhai karna

मैंडेटरी नहीं है बाबा कोई बेवफा ना गायन से कनेक्शन आपको कितनी पढ़ाई करना

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Pandit Prem

शायर, पुस्तक संपादक

0:52
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नहीं योगाभ्यास को धर्म से पहली बात तो जोड़ना ही नहीं चाहिए तुलसीवादी सर की बात रही तो ईश्वर से हर इंसान को कहीं ना कहीं डरना चाहिए क्योंकि ईश्वर है कोई इंसान के अंदर अच्छाइयों का रहता है अच्छाइयां रहती है और वह ईश्वर से डरकर अच्छे काम ही करता है बुरे नहीं करता तो ईश्वर का डर एक अलग चीज है लेकिन योगा को या व्यायाम को या ईश्वर यह रूप में किसी भी नाम से ईश्वर की उपासना को किसी धर्म संप्रदाय से नहीं छोड़ना चाहिए और धार्मिकता से ईश्वर से बिल्कुल योगाभ्यास को नहीं छोड़ना चाहिए आत्मा की शुद्धि होती है अलग बात है लेकिन शारीरिक विकास के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के लिए व्यायाम बावरिया योगा बहुत ही उपयोगी चीज है धन्यवाद

nahi yogabhayas ko dharm se pehli baat toh jodna hi nahi chahiye tulasivadi sir ki baat rahi toh ishwar se har insaan ko kahin na kahin darna chahiye kyonki ishwar hai koi insaan ke andar acchhaiyon ka rehta hai achaiya rehti hai aur vaah ishwar se darker acche kaam hi karta hai bure nahi karta toh ishwar ka dar ek alag cheez hai lekin yoga ko ya vyayam ko ya ishwar yah roop mein kisi bhi naam se ishwar ki upasana ko kisi dharm sampraday se nahi chhodna chahiye aur dharmikata se ishwar se bilkul yogabhayas ko nahi chhodna chahiye aatma ki shudhi hoti hai alag baat hai lekin sharirik vikas ke liye sharirik swasthya ke liye vyayam bawreya yoga bahut hi upyogi cheez hai dhanyavad

नहीं योगाभ्यास को धर्म से पहली बात तो जोड़ना ही नहीं चाहिए तुलसीवादी सर की बात रही तो ईश्व

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Mit Prasanna

Yoga Instructor

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नहीं मां तो मां तो नास्तिक नहीं करने वाले को नहीं करना बंद कर रहे हैं हमको यह जानना बहुत जरूरी है कि उन देशों में लोग सबसे ज्यादा है जहां पर हिंदुओं की आबादी सबसे कम हुआ उनको जगा हुआ इंसान भी अपने नहीं है

nahi maa toh maa toh nastik nahi karne waale ko nahi karna band kar rahe hai hamko yah janana bahut zaroori hai ki un deshon mein log sabse zyada hai jaha par hinduon ki aabadi sabse kam hua unko jagah hua insaan bhi apne nahi hai

नहीं मां तो मां तो नास्तिक नहीं करने वाले को नहीं करना बंद कर रहे हैं हमको यह जानना बहुत ज

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