क्या किसी को अपने वयस्क जीवन भर सामाजिक चिंता थी? क्या वे इसे दूर करने में सक्षम थे? यदि हां, तो कैसे?...


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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

1:07

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका प्रश्न है क्या किसी को अपने वश का जीवन पर जीवन भर सामाजिक चिंता थी क्या वह इसे दूर करने में सक्षम थे यदि हां तो कैसे हैं जी हां बस का जीवन पर सामाजिक चिंता थी और उसे दूर करने में वह सक्षम है कैसे तो उन्हें हर लोगों का सब लोगों का सपोर्ट मिलता था इसलिए उनकी चिंता दूर होते थे वह खुद को फिट रखते थे मेंटली फिट रखते शारीरिक तरीके से पीटते थे इसलिए उनकी सामाजिक चिंता दूर होते थे और फिजिकल फिट रखने के लिए आप लोग मेडिटेशन योगा प्राणायाम एक्सरसाइज करते और खुद को फिट रखते हैं पॉजिटिव थिंकिंग ज्यादा यूज करते हैं नेगेटिव थिंकिंग नहीं लाते हैं और उनसे उसको उन लोगों को काफी फायदा रहता था अब भी यह काम कर सकते हो और सोशल एंजाइटी से सामाजिक चिंता से दूर रह सकते हो और काफी फायदा भी होगा आपको हिम्मत मिलेगी आपका दिन शुभ हो धन्यवाद गुल्लक पर इलेक्शन

aapka prashna hai kya kisi ko apne vash ka jeevan par jeevan bhar samajik chinta thi kya vaah ise dur karne mein saksham the yadi haan toh kaise hain ji haan bus ka jeevan par samajik chinta thi aur use dur karne mein vaah saksham hai kaise toh unhe har logon ka sab logon ka support milta tha isliye unki chinta dur hote the vaah khud ko fit rakhte the mentally fit rakhte sharirik tarike se pitate the isliye unki samajik chinta dur hote the aur physical fit rakhne ke liye aap log meditation yoga pranayaam exercise karte aur khud ko fit rakhte hain positive thinking zyada use karte hain Negative thinking nahi laate hain aur unse usko un logon ko kafi fayda rehta tha ab bhi yah kaam kar sakte ho aur social anxiety se samajik chinta se dur reh sakte ho aur kafi fayda bhi hoga aapko himmat milegi aapka din shubha ho dhanyavad gullak par election

आपका प्रश्न है क्या किसी को अपने वश का जीवन पर जीवन भर सामाजिक चिंता थी क्या वह इसे दूर कर

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जो किसी को अपने व्यस्त जीवन भर सामाजिक चिंता थे कैसे दूर करने में सक्षम थे यदि हां तो कैसे महात्मा गांधी भगत सिंह सुभाष चंद्र बोस जवाहरलाल नेहरू चंद्रशेखर आजाद कई ऐसे महान व्यक्तियों और कई ऐसे सामाजिक सुधारक रहे जिन्हें अपने कम उम्र में ही देश की समाज की चिंता रहती थी और जो समाज में फैल रही गंदगी के समाज में फैल रही रीवा जीता रीति रिवाज के रमता इन चीजों को उन्होंने समझा इन्हें दूर करने का प्रयत्न किया और पूरे जीवन भर इन चीजों के लिए लड़ते रहे और कई ने तो अपना जीवन देश के इस कार्य में पुनीत कार्य में अपने आप को समर्पित कर दिया क्या चंद्रशेखर आजाद ने देश के लिए समाज के लिए किस चिंता नहीं की थी जिसके अजय जी की विचार नहीं किया था शाम को गोली से मारने एक बहुत बहादुरी की बातें होती है जब वह दुश्मन से गिर गए थे और अपने आप को गोली मारी उसकी एक महानता की बातें भगत सिंह जिस उम्र में थे जो कि एक शादी की उम्र कैसे कह सकते हैं उस उम्र में वह समाज की चिंता करते रहे हो देश की चिंता कर रहे हैं और देश की जनता के लिए उन्होंने अपने आप को फांसी के तख्ते तक पहुंचा दिया महात्मा गांधी ने भी एक साधारण जीवन जी आप और जिंदगी पर साधारण जीवन जीते हुए उन्होंने देश हित के लिए अपने आप को यह प्राण त्याग दिए पंडित जवाहरलाल नेहरु ज्योति धनवान कुल में उत्पन्न हुए थे और पूरे जीवन सुख में अच्छे से आराम भी कर सकते थे परंतु उन्होंने जब देश प्रेम उनके जागा समाज की चिंता हुई उन्होंने अपना जीवन भी देश के कार्य में भोग दिया तो इससे उसके पश्चात भी कोई कड़ी में हम नाम लेंगे तो इंदिरा गांधी तक के नाम आते हैं और आज वर्तमान में नरेंद्र मोदी तक अपने जीवन देश के लिए जो कर रहे हैं जीवन लगा रखे हैं तो क्या काम उदाहरण है तो इसमें कोई है अगर यदि हां तो कैसे तो उनकी 1 रन की मन्नता उनके विचार उनका अनुशासनात्मक था उनका देश प्रेम और अपने समक्ष बड़ी और इसके सिवा समाज हित के दृष्टिकोण से प्रमुख यह सब चीजें उन्होंने ने उस कार्य को रोने लगा तो इसी प्रकार यदि आप इस आगे बढ़ेंगे विचारों को ऊंचे स्तर भी ले जाएंगे बड़े सपना देखेंगे देश हित में कार्य करने का सोचेंगे जल्दी से देखे आप एक अच्छे नागरिक देश के लेकर आएंगे और आप उसमें निश्चित के सफल होंगे और अपना नाम समाज में नहीं घर परिवार में नहीं देश हित में भी लिखा जाएगा इस उम्मीद के साथ धन्यवाद

jo kisi ko apne vyast jeevan bhar samajik chinta the kaise dur karne mein saksham the yadi haan toh kaise mahatma gandhi bhagat Singh subhash chandra bose jawaharlal nehru chandrashekhar azad kai aise mahaan vyaktiyon aur kai aise samajik sudharak rahe jinhen apne kam umr mein hi desh ki samaaj ki chinta rehti thi aur jo samaaj mein fail rahi gandagi ke samaaj mein fail rahi reeva jita riti rivaaj ke ramta in chijon ko unhone samjha inhen dur karne ka prayatn kiya aur poore jeevan bhar in chijon ke liye ladtey rahe aur kai ne toh apna jeevan desh ke is karya mein puneeth karya mein apne aap ko samarpit kar diya kya chandrashekhar azad ne desh ke liye samaaj ke liye kis chinta nahi ki thi jiske ajay ji ki vichar nahi kiya tha shaam ko goli se maarne ek bahut bahaduri ki batein hoti hai jab vaah dushman se gir gaye the aur apne aap ko goli mari uski ek mahanata ki batein bhagat Singh jis umr mein the jo ki ek shadi ki umr kaise keh sakte hain us umr mein vaah samaaj ki chinta karte rahe ho desh ki chinta kar rahe hain aur desh ki janta ke liye unhone apne aap ko fansi ke takhte tak pahuncha diya mahatma gandhi ne bhi ek sadhaaran jeevan ji aap aur zindagi par sadhaaran jeevan jeete hue unhone desh hit ke liye apne aap ko yah praan tyag diye pandit jawaharlal nehru jyoti dhanwan kul mein utpann hue the aur poore jeevan sukh mein acche se aaram bhi kar sakte the parantu unhone jab desh prem unke jaaga samaaj ki chinta hui unhone apna jeevan bhi desh ke karya mein bhog diya toh isse uske pashchat bhi koi kadi mein hum naam lenge toh indira gandhi tak ke naam aate hain aur aaj vartmaan mein narendra modi tak apne jeevan desh ke liye jo kar rahe hain jeevan laga rakhe hain toh kya kaam udaharan hai toh isme koi hai agar yadi haan toh kaise toh unki 1 run ki mannata unke vichar unka anushasnatmak tha unka desh prem aur apne samaksh badi aur iske siva samaaj hit ke drishtikon se pramukh yah sab cheezen unhone ne us karya ko rone laga toh isi prakar yadi aap is aage badhenge vicharon ko unche sthar bhi le jaenge bade sapna dekhenge desh hit mein karya karne ka sochenge jaldi se dekhe aap ek acche nagarik desh ke lekar aayenge aur aap usmein nishchit ke safal honge aur apna naam samaaj mein nahi ghar parivar mein nahi desh hit mein bhi likha jaega is ummid ke saath dhanyavad

जो किसी को अपने व्यस्त जीवन भर सामाजिक चिंता थे कैसे दूर करने में सक्षम थे यदि हां तो कैसे

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