आयुर्वेद में अग्नि के कितने प्रकार हैं?...


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Pinkesh Negi

Yoga Ayurveda

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आयुर्वेद में अग्नि कितने प्रकार के होते हैं आयुर्वेद में अग्नि 13 प्रकार की होती है जिनमें से जो है प्रथम जो अग्निया होती है वह होता गनी इनकी पंचमहाभूत की अपनी अपनी अपनी होती है जो पंचमहाभूत ओं को अपनी अपनी अपनी अपनी अग्नि के द्वारा वह अपने-अपने भूत का बॉडी में बैलेंस करते हैं उनका डाइजेस्ट करती है जिनमें से आकाश अग्नि पृथ्वी अग्नि वायु अग्नि अग्नि अग्नि और जल अग्नि तो इस प्रकार से यह पांच प्रकार की अग्नि होती है और सात धातु अकेली होती है सात धातु अग्निहोत्रा साथ में रक्त आदमी मान सारणी में दाग में 80 आगंतुक रागिनी मजाक ने इस प्रकार चाहिए जो सप्तधातु है यह तक नहीं होती यह टोटल हो गई 12 अग्नि अग्नि होती है जिससे हम कैसे बात करनी जो हमारे पाचन तंत्र में स्थिति और खाने को जो है टाइप करने में हमारी हेल्प करते जिसकी सहायता से हम हमारी बॉडी में जो प्राथमिक जो धातु बनती है रस्ता तो इसमें पहले पाठक आदमी की क्रिया होने के बाद यह रास्ता तू में परिवर्तित हो जाती है और रस्ता तू कि इसमें क्रिया होने के बाद यह रात धातु में परिवर्तित हो जाता है फिर रक्त धातु रूप जब बनती है तो उसके बाद इसमें रखता करने की क्रिया होती है फिर वह जो आपका जो भोजन है वह मानस में परिवर्तित किस प्रकार से यह क्रम चलता रहता है और इस प्रकार से हमारी बॉडी में 13 अग्निया होती है जो हमारे पूरे शरीर का डाइजेशन को क्या करती है बनाए रखिए ऐसा नहीं कि पाशा का कि नहीं आप बॉडी में जरूरी और पाठक अग्नि आपकी डाइजेशन करती है ऐसा बिल्कुल भी नहीं है जब तक यह सातों अग्नि अपना अपना कार्य समय प्रकार से नहीं करेगी तब तक आपका डाइजेशन नहीं होता अब आप डॉक्टर के पास जाते हो डॉक्टर आपको कहता है कि आपका खाना पचता है तो टेशन हमेशा बोलता हां मेरा खाना पचता है लेकिन फिर भी दे उसका जब वेट बढ़ावा तो यह कहां गड़बड़ कहां पर आ रही है कहां पर है तो इसे हम नहीं कहेंगे कि उसका डाइजेशन वह बोलता है कि मेरा टाइम पर आता है अच्छा जाता है लेकिन कहीं ना कहीं तो उसका खराब होगा तभी तो उसका जब वजन बढ़ रहा है तो यहां पर मैं कहना चाहूंगा ऐसी स्थिति में का वजन कब बनता है जो फैट है वह कब बनता है अब यह स्थिति कार्य जैसे रस से क्या बनता है रक्त क्या बनता है रक्त रक्त से क्या बनता मामा उनसे क्या बनता में मांस के बाद ही उसने फ्रेंड बनना शुरू होता है तो यहां पड़ रहा है इसलिए यहां पर रूप बसंत औरतों के साथ काम करने लगी ऐसा मेरा

ayurveda me agni kitne prakar ke hote hain ayurveda me agni 13 prakar ki hoti hai jinmein se jo hai pratham jo agniya hoti hai vaah hota gunny inki panchamahabhut ki apni apni apni hoti hai jo panchamahabhut on ko apni apni apni apni agni ke dwara vaah apne apne bhoot ka body me balance karte hain unka Digest karti hai jinmein se akash agni prithvi agni vayu agni agni agni aur jal agni toh is prakar se yah paanch prakar ki agni hoti hai aur saat dhatu akeli hoti hai saat dhatu agnihotra saath me rakt aadmi maan sarni me daag me 80 aagantuk ragini mazak ne is prakar chahiye jo saptadhatu hai yah tak nahi hoti yah total ho gayi 12 agni agni hoti hai jisse hum kaise baat karni jo hamare pachan tantra me sthiti aur khane ko jo hai type karne me hamari help karte jiski sahayta se hum hamari body me jo prathmik jo dhatu banti hai rasta toh isme pehle pathak aadmi ki kriya hone ke baad yah rasta tu me parivartit ho jaati hai aur rasta tu ki isme kriya hone ke baad yah raat dhatu me parivartit ho jata hai phir rakt dhatu roop jab banti hai toh uske baad isme rakhta karne ki kriya hoti hai phir vaah jo aapka jo bhojan hai vaah manas me parivartit kis prakar se yah kram chalta rehta hai aur is prakar se hamari body me 13 agniya hoti hai jo hamare poore sharir ka digestion ko kya karti hai banaye rakhiye aisa nahi ki pasha ka ki nahi aap body me zaroori aur pathak agni aapki digestion karti hai aisa bilkul bhi nahi hai jab tak yah saton agni apna apna karya samay prakar se nahi karegi tab tak aapka digestion nahi hota ab aap doctor ke paas jaate ho doctor aapko kahata hai ki aapka khana pachta hai toh teshan hamesha bolta haan mera khana pachta hai lekin phir bhi de uska jab wait badhawa toh yah kaha gadbad kaha par aa rahi hai kaha par hai toh ise hum nahi kahenge ki uska digestion vaah bolta hai ki mera time par aata hai accha jata hai lekin kahin na kahin toh uska kharab hoga tabhi toh uska jab wajan badh raha hai toh yahan par main kehna chahunga aisi sthiti me ka wajan kab banta hai jo fat hai vaah kab banta hai ab yah sthiti karya jaise ras se kya banta hai rakt kya banta hai rakt rakt se kya banta mama unse kya banta me maas ke baad hi usne friend banna shuru hota hai toh yahan pad raha hai isliye yahan par roop basant auraton ke saath kaam karne lagi aisa mera

आयुर्वेद में अग्नि कितने प्रकार के होते हैं आयुर्वेद में अग्नि 13 प्रकार की होती है जिनमें

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Dr. Amit Hardia

Panchkarma Specialist

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अग्नि आज ही साथ सरकार की बताई है उसमें जो है जो सबसे महत्वपूर्ण है वह हमारी जेठानी जो कि शरीर में उठाना को टाइट करने के लिए इंपॉर्टेंट हो जाती है और हम सभी जानते हैं कि पंचमहाभूत होते हैं तो उनके आधार पर इस जल जल जला कि नहीं होती है एक पृथ्वी की अग्नि यदि परीक्षा दी हुई एक तो है जो मैंने बताया मुख्य घटक नहीं होती है वह है इसके अलावा जो है एक आकाश आकाश मा भूत की अग्नि होती है और इस तरीके से यह पूरी पांचवा हुतात्मा कर दिया और एक चर्चा नहीं होती है और इसका ऐड नहीं होती है क्योंकि शरीर में बलवान मेरा इसके लिए उत्तरदाई होती एनर्जी को क्रोध

agni aaj hi saath sarkar ki batai hai usme jo hai jo sabse mahatvapurna hai vaah hamari jethani jo ki sharir mein uthana ko tight karne ke liye important ho jaati hai aur hum sabhi jante hain ki panchamahabhut hote hain toh unke aadhaar par is jal jal jala ki nahi hoti hai ek prithvi ki agni yadi pariksha di hui ek toh hai jo maine bataya mukhya ghatak nahi hoti hai vaah hai iske alava jo hai ek akash akash ma bhoot ki agni hoti hai aur is tarike se yah puri panchava hutatma kar diya aur ek charcha nahi hoti hai aur iska aid nahi hoti hai kyonki sharir mein balwan mera iske liye uttardai hoti energy ko krodh

अग्नि आज ही साथ सरकार की बताई है उसमें जो है जो सबसे महत्वपूर्ण है वह हमारी जेठानी जो कि श

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कितने प्रकार की होती हैं प्रकार की धातु धातु अधातु की अपनी रसोई मजा शुक्र अपनी-अपनी उनके आदमी फिर आप की होती है पंचमहाभूत की अग्नि और कुतिया की प्रधान यात्रा की और उसी प्रकार के अभी के जो इनकी होते हैं कि बेशर्म आदमी साफ आदमी पिक्चर आदमी और जो है कि मंदाग्नि जोकर प्रकृति वाले मंदाकिनी से ग्रसित होते हैं और जो पर के दीवाने होते हैं उनकी पिक्स नहीं होती है और प्रधान होते हैं और प्रधान होते हैं उनके विषय में होती है

kitne prakar ki hoti hain prakar ki dhatu dhatu adhatu ki apni rasoi maza shukra apni apni unke aadmi phir aap ki hoti hai panchamahabhut ki agni aur kutiya ki pradhan yatra ki aur usi prakar ke abhi ke jo inki hote hain ki besharam aadmi saaf aadmi picture aadmi aur jo hai ki mandagni joker prakriti wale mandakini se grasit hote hain aur jo par ke deewane hote hain unki picks nahi hoti hai aur pradhan hote hain aur pradhan hote hain unke vishay mein hoti hai

कितने प्रकार की होती हैं प्रकार की धातु धातु अधातु की अपनी रसोई मजा शुक्र अपनी-अपनी उनके आ

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Arjun Vaidya

CEO of Dr Vaidya’s

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Dr. Reena Arora

Ayurvedic Doctor

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आयुर्वेद में अग्नि तेरा प्रकार की है मेल एक ही आदमी है जिसको का याद नहीं कहते हैं साथ भाग लिया है और 5 बोतल लिया है

ayurveda mein agni tera prakar ki hai male ek hi aadmi hai jisko ka yaad nahi kehte hain saath bhag liya hai aur 5 bottle liya hai

आयुर्वेद में अग्नि तेरा प्रकार की है मेल एक ही आदमी है जिसको का याद नहीं कहते हैं साथ भाग

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Dr. Uma shankar Chaturvedi

Retired Professor (Ayurvedic)

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छत्तीसगढ़ जापानी 1757 512

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