सात्विक, राजसिक और तामसिक में क्या अंतर है?...


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Dr. Mitramahesh

Ayurvedic Doctors

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सात्विक राजसिक और तामसिक में फर्क यह है कि आपको माता हर कभी मत करिए और जो प्याज और लहसुन का प्रयोग लोगों ने विंदू ने छोड़ दिया है एक साथ इस तरह सीता के नाम पर उसको अपना ही उसको को भोजन के साथ अच्छी तरह से खाइए आपको सभी ने एक बड़ी शक्ति मिलेगी कोई मांसाहार नहीं है क्या उसको राजसिक तामसिक नहीं समझ कर किया तो साथ पिक्चर यह उसकी राशि काम सीख उसकी परिधि की सीमा में रहकर के कुछ अच्छे अच्छे ही साकारी पदार्थों का आप लोगों ने जो त्याग कर दिया है एक विकृत विचारधाराओं के नाम पर उस पर छोड़िए सा सिक्का और राष्ट्रीयता और उसे बिल्कुल वैज्ञानिक आहार पद्धति यह है कि आप जीव जंतुओं का विनाश करके उसका भोजन मत करिए आप जो मुद्दा ना फल सब्जी डीजे कठोर में देरी जो बोलते हैं उसका उसका प्रयोग करिए भारतीय पद्धति में कोई अगर अनुसार आप लोग भोजन बनाई हो भोजन को खाइए भारतीय पद्धति का भोजन आपको सभी के अंदर सभी प्रकार की शक्ति देते हैं और सभी को बहुत शशि कपूर और पवित्र और अच्छे ढंग से बना करके रखते हैं आप लोग इसका प्रयोग करिए और अच्छे वरसानी के बलशाली बनने और अब देखिए कि हिंदुओं की जो मातृशक्ति थीम प्राचीन काल की जो दीदी का एक थी और देविका ओके पास हथियार थे और देविका उन्हें महारत आइए सरस्वती असुरों का विनाश किया था उन्होंने कभी मांसाहार ने किया था कभी शराब नहीं पिया था तो यह देवी के नाम पर लोग शराब पीते हैं और उसके बकरे टुकड़े करके काट करके उसका खाना खाते हैं वह जो भेजता है उसको भी सरकार के खाते हैं आपके जो देवी देवता के वाहनों को मारकर काटकर के हिंदू लोग खा जाते हैं तो यह शुद्धता है और तामसिक था वहां पर आती है और आपकी विचारधारा और अधर्म का विनाश हो चुका है और विनाश होने की तैयारी में आप लोग जाएंगे यदि ऐसी है विचारधारा अपनाएंगे तो तो आप सात्विकता का जो है मूलभूत हमने जो भेज बताया है उसके अनुसार आप खानपान देखिए इसमें जो प्याज और लहसुन का उपयोग मत करिए उसे शरीफ में भयंकर सकती आती है अरे भाई रिश्तो को विनाश करने में जीवन में सारी परियों सर जी मां आप लोग काम सीखता वाली मांसाहार का सेवन मत करिए और लोगों के ऊपर आर्थिक रूप से लूटपाट मत चलाइए कि आपने एक करोड़ों का और 100 करोड़ का फायदा लिया और लोगों को गरीब बनाया यह मत करिए आप जो प्रजा है उसको सहायता करिए जो जो हिंदू दो एससी एसटी में या तो दूसरे गरीब वर्कर दोगे और लोगों को आपका व्यापार धंधा का लाभ पहुंचाए और उनके जीवन स्तर को ऊपर उठाने के लिए भी अप्रैल पर करिए ऋषि दयानंद वेद धर्म का व्यवस्थापन करने का संगठन बनाया है आर्य समाज नाम का उसकी विचारधारा को जानिए सत्यप्रकाश ऋग्वेद भाष्य भूमिका संस्कार विधि के जानकार के उसके परिणाम में आपका शरीर बहुत ही सुदृढ़ होगा आप की विचारधारा तेज बनने की विचारधारा का प्रकाश आप दुनिया भर में चलाएंगे और उस सच्ची शास्त्री करता तभी प्रकट होगी आप हमारे आर्यसमाज जावेद hospitals.com को अच्छी तरह से पढ़िए सुनिए और हमारा संपर्क करें धन्यवाद

Satvik raajsik aur tamasik me fark yah hai ki aapko mata har kabhi mat kariye aur jo pyaaz aur lehsun ka prayog logo ne vindu ne chhod diya hai ek saath is tarah sita ke naam par usko apna hi usko ko bhojan ke saath achi tarah se khaiye aapko sabhi ne ek badi shakti milegi koi mansahaari nahi hai kya usko raajsik tamasik nahi samajh kar kiya toh saath picture yah uski rashi kaam seekh uski paridhi ki seema me rahkar ke kuch acche acche hi sakari padarthon ka aap logo ne jo tyag kar diya hai ek vikrit vichardharaon ke naam par us par chodiye sa sikka aur rastriyata aur use bilkul vaigyanik aahaar paddhatee yah hai ki aap jeev jantuon ka vinash karke uska bhojan mat kariye aap jo mudda na fal sabzi DJ kathor me deri jo bolte hain uska uska prayog kariye bharatiya paddhatee me koi agar anusaar aap log bhojan banai ho bhojan ko khaiye bharatiya paddhatee ka bhojan aapko sabhi ke andar sabhi prakar ki shakti dete hain aur sabhi ko bahut shashi kapur aur pavitra aur acche dhang se bana karke rakhte hain aap log iska prayog kariye aur acche varsani ke balshali banne aur ab dekhiye ki hinduon ki jo matrishakti theme prachin kaal ki jo didi ka ek thi aur devika ok paas hathiyar the aur devika unhe maharat aaiye saraswati asuron ka vinash kiya tha unhone kabhi mansahaari ne kiya tha kabhi sharab nahi piya tha toh yah devi ke naam par log sharab peete hain aur uske bakre tukde karke kaat karke uska khana khate hain vaah jo bhejta hai usko bhi sarkar ke khate hain aapke jo devi devta ke vahanon ko marakar katkar ke hindu log kha jaate hain toh yah shuddhta hai aur tamasik tha wahan par aati hai aur aapki vichardhara aur adharma ka vinash ho chuka hai aur vinash hone ki taiyari me aap log jaenge yadi aisi hai vichardhara apanaenge toh toh aap satwikata ka jo hai mulbhut humne jo bhej bataya hai uske anusaar aap khanpan dekhiye isme jo pyaaz aur lehsun ka upyog mat kariye use sharif me bhayankar sakti aati hai are bhai rishto ko vinash karne me jeevan me saari pariyon sir ji maa aap log kaam sikhata wali mansahaari ka seven mat kariye aur logo ke upar aarthik roop se lutpat mat chalaiye ki aapne ek karodo ka aur 100 crore ka fayda liya aur logo ko garib banaya yah mat kariye aap jo praja hai usko sahayta kariye jo jo hindu do SC ST me ya toh dusre garib worker doge aur logo ko aapka vyapar dhandha ka labh pahunchaye aur unke jeevan sthar ko upar uthane ke liye bhi april par kariye rishi dayanand ved dharm ka vyavasthapan karne ka sangathan banaya hai arya samaj naam ka uski vichardhara ko janiye sathyaprakash rigved bhashya bhumika sanskar vidhi ke janakar ke uske parinam me aapka sharir bahut hi sudridh hoga aap ki vichardhara tez banne ki vichardhara ka prakash aap duniya bhar me chalayenge aur us sachi shastri karta tabhi prakat hogi aap hamare aryasamaj javed hospitals com ko achi tarah se padhiye suniye aur hamara sampark kare dhanyavad

सात्विक राजसिक और तामसिक में फर्क यह है कि आपको माता हर कभी मत करिए और जो प्याज और लहसुन क

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सात्विक आहार व है जिसमें हमारी बुद्धि जीत शास्त्री के लिए अमी की शाकाहारी भोजन सुषमा स्वराज ने निरामिष तामसिक में अंडा मीट सासारिए तामसिक आहार और ऋतिक में ज्यादा यह मिलता लेकिन नासिक में ज्यादा मिलता हूं साले शाही का मासिक वेतन

Satvik aahaar va hai jisme hamari buddhi jeet shastri ke liye ami ki shakahari bhojan sushma swaraj ne niramish tamasik mein anda meat sasariye tamasik aahaar aur ritik mein zyada yah milta lekin nashik mein zyada milta hoon saale shahi ka maasik vetan

सात्विक आहार व है जिसमें हमारी बुद्धि जीत शास्त्री के लिए अमी की शाकाहारी भोजन सुषमा स्वरा

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तामसिक राजसिक ही हमारी योग में कैटेगरी है तीन तरह की नेचर होता है पूरे ब्रह्मांड में भी विश्वकर्मा मतलब मनुष्य कभी नहीं चल रही तीन तरह की कैटेगरी में बांटा गया है और भोजन का भी तो साथ वह होता है जो भी जल्दी हजम हो जाता है और लाइट होता है वह साथी होता है जो थोड़ा सा चटकदार दिखा देता है और जो हमको देता है जाने अपराधी प्रवृत्ति में डाल देता है अब आप देखिए जो भी ड्राइंग करते हैं किसी का मर्डर करने जाते हैं वह अल्कोहल की कर जाते हैं क्योंकि उनके एकदम को हल किया जो नॉनवेज खाता है वह बड़ा क्रूर व्यक्ति होता है पावर अटैक आर्ट अटैक न्यूज के नीचे होता है तो यह चीज है जो है वह तामसिक जाती है

tamasik raajsik hi hamari yog mein category hai teen tarah ki nature hota hai poore brahmaand mein bhi vishvakarma matlab manushya kabhi nahi chal rahi teen tarah ki category mein baata gaya hai aur bhojan ka bhi toh saath vaah hota hai jo bhi jaldi hajam ho jata hai aur light hota hai vaah sathi hota hai jo thoda sa chatkadar dikha deta hai aur jo hamko deta hai jaane apradhi pravritti mein daal deta hai ab aap dekhiye jo bhi drying karte hain kisi ka murder karne jaate hain vaah alcohol ki kar jaate hain kyonki unke ekdam ko hal kiya jo nonveg khaata hai vaah bada krur vyakti hota hai power attack art attack news ke niche hota hai toh yah cheez hai jo hai vaah tamasik jaati hai

तामसिक राजसिक ही हमारी योग में कैटेगरी है तीन तरह की नेचर होता है पूरे ब्रह्मांड में भी वि

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Dr. Amit Hardia

Panchkarma Specialist

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बेसिकली जो सात्विक भोजन होता है शरीर के पोषण के साथ-साथ मन को भी जो है प्रश्न करता है जैसा कि आयुर्वेद में बताया कि सभी देशवासियों को एकदम मिट्टी के अनुयाई आयुर्वेदिक दोहे प्रश्न करना उसको भी नियंत्रित करना उसको भी पोस्ट करना ऐसा माना गया है और ऐसा करने पर ही जो होता है वह सुखमय और निरोगी रहता है जुरासिक भोजन होता है वह जो हमारे शरीर में जो है उसका करता है गर्मी पैदा करता है जिसके कारण जो है इस जन्म में जो रूप होते हैं चित्र सोने वाले रोग वह हो जाते हैं इसलिए जो है और आशिक भोजन अमित बताया गया इसके अलावा होता है रचने में भारी होता है और शरीर में जो है उसको बढ़ाने वाला हो रहा आलस्य इनको पैदा करता है रितिक भोजन को भी नहीं लेना चाहिए

basically jo Satvik bhojan hota hai sharir ke poshan ke saath saath man ko bhi jo hai prashna karta hai jaisa ki ayurveda mein bataya ki sabhi deshvasiyon ko ekdam mitti ke anuyayi ayurvedic dohe prashna karna usko bhi niyantrit karna usko bhi post karna aisa mana gaya hai aur aisa karne par hi jo hota hai vaah sukhmay aur nirogee rehta hai jurassic bhojan hota hai vaah jo hamare sharir mein jo hai uska karta hai garmi paida karta hai jiske karan jo hai is janam mein jo roop hote hain chitra sone waale rog vaah ho jaate hain isliye jo hai aur aashik bhojan amit bataya gaya iske alava hota hai rachne mein bhari hota hai aur sharir mein jo hai usko badhane vala ho raha aalasya inko paida karta hai hrithik bhojan ko bhi nahi lena chahiye

बेसिकली जो सात्विक भोजन होता है शरीर के पोषण के साथ-साथ मन को भी जो है प्रश्न करता है जैसा

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जैसे की चंचलता रात के बिना नेट के बिना चलता नहीं होगी इंद्र का अपने विषय पर चिंतन योग्य योग्य बिल्कुल सहयोग नहीं होना यह कहलाता है प्रज्ञा अपराध शाखा ने सब्जेक्ट से प्रॉपर सहयोग होना सात्विक भावनाओं में सहयोग होना अपने विषय से नाता है आपका प्रभाव बिल्कुल ही सहयोग नहीं होना

jaise ki chanchalata raat ke bina net ke bina chalta nahi hogi indra ka apne vishay par chintan yogya yogya bilkul sahyog nahi hona yeh kehlata hai pragya apradh shakha ne subject se proper sahyog hona Satvik bhavnao mein sahyog hona apne vishay se nataa hai aapka prabhav bilkul hi sahyog nahi hona

जैसे की चंचलता रात के बिना नेट के बिना चलता नहीं होगी इंद्र का अपने विषय पर चिंतन योग्य यो

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Dr. Alok Sharma

Ayurvedic Doctor

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साथी कहा वाला व्यक्ति किसी से द्वेष नहीं सकता अपना कार्य स्वछता पूर्वक स्वस्तिका सामान्य कार्य कर सकता है क्लासिक व्यक्ति जो है युद्ध में उसको खोज जल्दी आएगा और वह चढ़ाई चले के काम क्या-क्या करेगा काम शिकार वाला व्यक्ति जो सेवन करेगा वह गिरा रहेगा उसमें उदासी रहेगी डिफरेंस लेकर टिकट रहेगा

sathi kaha vala vyakti kisi se dvesh nahi sakta apna karya svachta purvak swastika samanya karya kar sakta hai classic vyakti jo hai yudh mein usko khoj jaldi aayega aur vaah chadhai chale ke kaam kya kya karega kaam shikaar vala vyakti jo seven karega vaah gira rahega usme udasi rahegi difference lekar ticket rahega

साथी कहा वाला व्यक्ति किसी से द्वेष नहीं सकता अपना कार्य स्वछता पूर्वक स्वस्तिका सामान्य क

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Yog Guru Gyan Ranjan Maharaj

Founder & Director - Kashyap Yogpith

4:20
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हम का क्वेश्चन है राजसिक तामसिक और 71 मैं क्या अंतर है दीक्षित सात्विक भोजन खाना है उसके नाम से ही प्रतीत होता है सात्विक भोजन करने वाला व्यक्ति सही में स्थापित प्रवृत्ति का होता है और राजसिक भोजन जो होता है उस सही चीज है क्यों राजाओं के लिए काफी काफी धनवान व्यक्ति के लिए उचित होता है जिसमें बहुत सारी चीजें संलग्न होते हैं गेहुआ मक्खन हुआ आपको बहुत सारे तरह के चीज होते हैं जो कि राजसी प्रवृत्ति के भोजन करने के लिए बने हो और तामसिक तो आप समझ ही रहे तामसिक भोजन में मीट मछली अंडे उसके बाद वहीं अगर का समावेश होता है तो व्यक्ति अति क्रोधी उसका प्रकृति बहुत ही खतरनाक टाइप का अपराधी प्रवृत्ति का व्यक्ति होता है क्योंकि खाना एक ऐसा चीज है कि जैसा आप खाना खाएंगे वैसे ही आपके प्रति बनेगी यह हम नहीं कह रहे हैं बहुत पहले से मुहावरा चले आ रहा है जैसा खाओगे अन्न वैसा रहेगा मन जैसा आप भोजन करेंगे वैसा ही आपका विचार होगा वैसा ही आपका आचरण होगा इसलिए भोजन से ही उस व्यक्ति के अंदर क्या गुण पैदा होगा और भोजन ही बता देता है भोजन करने वाला व्यक्ति ठीक होगा राष्ट्रीय भोजन करने वाला व्यक्ति राजा के समान होगा राजा भी कुछ कम नहीं होते हैं अभी छोटी सी गलती पर बड़े-बड़े 10 लोगों को दंडित कर देते और तामसिक जिसमें तमाशा आशा तामसी आचरण वाले व्यक्ति ही अपराधी बन जाते हैं केवल बन जाते हैं बदमाश बन जाते हैं उनमें दोस्त नहीं होता है उनके भोजन में दोष होता है जिसके अपराधी बन जाते हैं इसलिए तामसिक भोजन व्यक्ति को करना ही नहीं चाहिए तामसिक भोजन करने से छनछन व्यक्ति को क्रोध का समावेश मस्तिष्क में होता है और रो क्रोध के वजह से कुछ भी करने के लिए हत्या करने और कराने के लिए उतारू हो जाते हैं इसलिए व्यक्ति को भोजन करना चाहिए ना कि राजसिक और तामसिक दूसरी बात यह है राजसिक और तामसिक भोजन में एक और चीज देखने को पाया गया है अगर व्यक्ति की स्थिति अच्छी नहीं है आवारा प्राणी राजसिक भोजन करना शुरू कर दिए तो आपके दैनिक स्थिति खराब हो जाएंगे वही स्थिति तामसिक भोजन में भी है कि व्यक्ति के पास ऐसा नहीं है साधारण कमाने वाला है अगर तामसिक भोजन करना शुरू कर देगा तो यह सब सारे राजसिक और तामसिक भोजन काफी मांगे भजनों में इनका गणना की जाती है इसलिए व्यक्ति को आर्थिक स्थिति भी बहुत जल्दी खराब हो जाती है भोजन करने से राष्ट्रीय करता हमसे क्योंकि इसमें काफी पैसा खर्च होता है इसलिए जिससे खाने में जिससे भोजन को करने में काफी पैसे खर्च निश्चित तौर पर उसका रिजल्ट भी वैसा ही होगा इसलिए व्यक्ति को सात्विक भोजन ही करना चाहिए ना कि राजसिक और तामसिक धन्यवाद

hum ka question hai raajsik tamasik aur 71 main kya antar hai dixit Satvik bhojan khana hai uske naam se hi pratit hota hai Satvik bhojan karne vala vyakti sahi me sthapit pravritti ka hota hai aur raajsik bhojan jo hota hai us sahi cheez hai kyon rajaon ke liye kaafi kaafi dhanwan vyakti ke liye uchit hota hai jisme bahut saari cheezen sanlagn hote hain gehua makhan hua aapko bahut saare tarah ke cheez hote hain jo ki rajsi pravritti ke bhojan karne ke liye bane ho aur tamasik toh aap samajh hi rahe tamasik bhojan me meat machli ande uske baad wahi agar ka samavesh hota hai toh vyakti ati krodhi uska prakriti bahut hi khataranaak type ka apradhi pravritti ka vyakti hota hai kyonki khana ek aisa cheez hai ki jaisa aap khana khayenge waise hi aapke prati banegi yah hum nahi keh rahe hain bahut pehle se muhavara chale aa raha hai jaisa khaoge ann waisa rahega man jaisa aap bhojan karenge waisa hi aapka vichar hoga waisa hi aapka aacharan hoga isliye bhojan se hi us vyakti ke andar kya gun paida hoga aur bhojan hi bata deta hai bhojan karne vala vyakti theek hoga rashtriya bhojan karne vala vyakti raja ke saman hoga raja bhi kuch kam nahi hote hain abhi choti si galti par bade bade 10 logo ko dandit kar dete aur tamasik jisme tamasha asha taamsi aacharan waale vyakti hi apradhi ban jaate hain keval ban jaate hain badamash ban jaate hain unmen dost nahi hota hai unke bhojan me dosh hota hai jiske apradhi ban jaate hain isliye tamasik bhojan vyakti ko karna hi nahi chahiye tamasik bhojan karne se chanchan vyakti ko krodh ka samavesh mastishk me hota hai aur ro krodh ke wajah se kuch bhi karne ke liye hatya karne aur karane ke liye utaru ho jaate hain isliye vyakti ko bhojan karna chahiye na ki raajsik aur tamasik dusri baat yah hai raajsik aur tamasik bhojan me ek aur cheez dekhne ko paya gaya hai agar vyakti ki sthiti achi nahi hai awaara prani raajsik bhojan karna shuru kar diye toh aapke dainik sthiti kharab ho jaenge wahi sthiti tamasik bhojan me bhi hai ki vyakti ke paas aisa nahi hai sadhaaran kamane vala hai agar tamasik bhojan karna shuru kar dega toh yah sab saare raajsik aur tamasik bhojan kaafi mange bhajanon me inka ganana ki jaati hai isliye vyakti ko aarthik sthiti bhi bahut jaldi kharab ho jaati hai bhojan karne se rashtriya karta humse kyonki isme kaafi paisa kharch hota hai isliye jisse khane me jisse bhojan ko karne me kaafi paise kharch nishchit taur par uska result bhi waisa hi hoga isliye vyakti ko Satvik bhojan hi karna chahiye na ki raajsik aur tamasik dhanyavad

हम का क्वेश्चन है राजसिक तामसिक और 71 मैं क्या अंतर है दीक्षित सात्विक भोजन खाना है उसके

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नमस्कार आपका सवाल है सात्विक राजसिक और तामसिक में क्या अंतर है तू सात्विक सात्विक शब्द सत्र से आया राशि शतरंज और तम इन तीनों से ही सात्विक राजसिक और तामसिक यह शब्द आए तो सात्विक राजसिक और तामसिक इनका हम इस्तेमाल करते हैं और हार के साथ ही कहा राशि का हाल तामसिक आहार सात्विक आहार जो सात्विक आहार होता है वह जैसे कि हम जैसे कि न्यूट्रल मिलेगी जो सब गुणों से रहित हो सात्विक आहार है सात्विक आहार हमारे मन मस्तिष्क को शांत रखता है और राशि का हाल है उसके बाद आता राशि का हार राशि का हार रजत जिसके अंदर भरा पड़ा है उसमें अलग-अलग तरह की पोस्ट डालते हैं जिन जिन जिन खाने को हम ग्रहण करते हैं इस राशि का हर को हमारे ग्रहण करने के बाद हमारे अंदर का जो गुण होता है वह रजोगुण दिखा अभी कहां खाना खाया तो साथी खाने से हमारे अंदर की होती है और तामसी तामसी खाना में आता है मांस मदिरा किस प्रकार की इससे हमारे हमारे अंदर ही आलस्य आने से और राम सीता बढ़ती है तो इन तीनों में यही अंतर है सात्विक राजसिक और तमाशा

namaskar aapka sawaal hai Satvik raajsik aur tamasik me kya antar hai tu Satvik Satvik shabd satra se aaya rashi shatranj aur tum in tatvo se hi Satvik raajsik aur tamasik yah shabd aaye toh Satvik raajsik aur tamasik inka hum istemal karte hain aur haar ke saath hi kaha rashi ka haal tamasik aahaar Satvik aahaar jo Satvik aahaar hota hai vaah jaise ki hum jaise ki neutral milegi jo sab gunon se rahit ho Satvik aahaar hai Satvik aahaar hamare man mastishk ko shaant rakhta hai aur rashi ka haal hai uske baad aata rashi ka haar rashi ka haar rajat jiske andar bhara pada hai usme alag alag tarah ki post daalte hain jin jin jin khane ko hum grahan karte hain is rashi ka har ko hamare grahan karne ke baad hamare andar ka jo gun hota hai vaah rajogun dikha abhi kaha khana khaya toh sathi khane se hamare andar ki hoti hai aur taamsi taamsi khana me aata hai maas madira kis prakar ki isse hamare hamare andar hi aalasya aane se aur ram sita badhti hai toh in tatvo me yahi antar hai Satvik raajsik aur tamasha

नमस्कार आपका सवाल है सात्विक राजसिक और तामसिक में क्या अंतर है तू सात्विक सात्विक शब्द सत्

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Vinita Mishra

Meditation

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हरि ओम नमस्कार कृष्णा सात्विक राजसिक और तामसिक में क्या अंतर है होते हैं हमें गुण भी होते हैं तो तनु और ऋषि से हमारा मुझे भी कहीं ना कहीं जुड़ा हुआ है और राशि की कैटेगरी का गंध रहित गंध नहीं होती और हम उसका सेवन मन की शांति के लिए कर सकते हैं हमारे मन को प्रभावित कर हमारे मन के विचारों में एक नई ऊर्जा को लेकर आए पूजन करते वक्त हमारा मन प्रसन्न होता है आज से रूप में हम देख पाएंगे अच्छे हो जो होता है और सात्विक का मिलाजुला रूप में बहुत सी ऐसी चीजें होती है जो हमारे मन में एकता मचलता का भाव प्रकट कर दिया हमारा मन शांत नहीं रहा था उससे तुम अपनी जीभ के स्वाद हेतु लेते हैं और उससे हमें कोई लाभ नहीं होता उससे मन के आशीर्वाद के लिए होता है हर नंबर पर हम बात करते हैं तामसिक तामसिक में आ जाती जितनी भी उमस भरी मस्त मस्त मतलब अंधकार जो मन में अंधकार को पैदा कर दे होता हमसे इतनी भी तली हुई चीजें हैं जितना भी जंग फूड हो गया हम जितना भी अपने स्वाद ही तू खाते हैं स्वास्थ्य की दृष्टि से ना खाते हुए अपने स्वार्थ की दृष्टि से खाते हैं वह तामसिक भोजन में आ जाता है स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा नहीं है उसको तांत्रिक भाग में रखा जाता है वह हमारे मन में एक निराशा का भाव पैदा करता है मन में आलस्य को लेकर आता है मन के विचारों को बहुत ही पवित्र भाग देता है मन में हमेशा हमेशा ही हलचल और विकारों को पैदा करता है तू ही तामसिक भोजन के गुण होते हैं तो यह सारे इन तीनों का डिग्री सुनते इस प्रकार से

hari om namaskar krishna Satvik raajsik aur tamasik me kya antar hai hote hain hamein gun bhi hote hain toh tanu aur rishi se hamara mujhe bhi kahin na kahin juda hua hai aur rashi ki category ka gandh rahit gandh nahi hoti aur hum uska seven man ki shanti ke liye kar sakte hain hamare man ko prabhavit kar hamare man ke vicharon me ek nayi urja ko lekar aaye pujan karte waqt hamara man prasann hota hai aaj se roop me hum dekh payenge acche ho jo hota hai aur Satvik ka milajula roop me bahut si aisi cheezen hoti hai jo hamare man me ekta machlata ka bhav prakat kar diya hamara man shaant nahi raha tha usse tum apni jeebh ke swaad hetu lete hain aur usse hamein koi labh nahi hota usse man ke ashirvaad ke liye hota hai har number par hum baat karte hain tamasik tamasik me aa jaati jitni bhi umas bhari mast mast matlab andhakar jo man me andhakar ko paida kar de hota humse itni bhi tali hui cheezen hain jitna bhi jung food ho gaya hum jitna bhi apne swaad hi tu khate hain swasthya ki drishti se na khate hue apne swarth ki drishti se khate hain vaah tamasik bhojan me aa jata hai swasthya ki drishti se accha nahi hai usko tantrika bhag me rakha jata hai vaah hamare man me ek nirasha ka bhav paida karta hai man me aalasya ko lekar aata hai man ke vicharon ko bahut hi pavitra bhag deta hai man me hamesha hamesha hi hulchul aur vikaron ko paida karta hai tu hi tamasik bhojan ke gun hote hain toh yah saare in tatvo ka degree sunte is prakar se

हरि ओम नमस्कार कृष्णा सात्विक राजसिक और तामसिक में क्या अंतर है होते हैं हमें गुण भी होते

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Narendar Gupta

प्राकृतिक योगाथैरिपिस्ट एवं योगा शिक्षक,फीजीयोथैरीपिस्ट

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Ashish Lavania

Yoga Trainer

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