क्या आप हमें अपने बचपन के दिनों के बारे में कुछ बता सकते हैं?...


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Kumar lalit

Life Coach , Love Guru , Hotel Cunsultant, Motivational Speekar

1:07
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आप मेरे बचपन के बारे में जानना चाहते हैं बट अपनी उम्र तो बताएं आप क्या है आप कौन हैं और मेरे जीवन में मेरे बचपन के दिन किस्तों के बारे में आप जानना चाहते हैं उनमें से थोड़ी उनके ऊपर थोड़ी झलक डालें कि मेरी है जो पैदा होने से 1 साल का था तब की बताओ वह नहीं बता पाऊंगा यह पैदा होने से 3 साल तक के किस्से भी नहीं बता पाऊंगा हां अगर उसके आगे के थोड़े बहुत जानने हो तो मैं जरूर बता सकता हूं बट आप अपना इंटरेस्ट जाहिर करें मेरी जिंदगी बड़ी लंबी है मैं 55 साल का आदमी हूं तो मुझे अगर मेरी जिंदगी का ज्ञान लेना है उसके कुछ पाठ के बारे में बताएं कौन से पार्ट स्कूल का कॉलेज का जीवन का शादी का आशिकी का प्रेम का लड़ाई का दोस्ती का मैं 15 दिन तक अपनी स्टोरी सुनाता रहूंगा रात सुनते रहेंगे धन्यवाद

aap mere bachpan ke bare me janana chahte hain but apni umar toh bataye aap kya hai aap kaun hain aur mere jeevan me mere bachpan ke din kiston ke bare me aap janana chahte hain unmen se thodi unke upar thodi jhalak Daalein ki meri hai jo paida hone se 1 saal ka tha tab ki batao vaah nahi bata paunga yah paida hone se 3 saal tak ke kisse bhi nahi bata paunga haan agar uske aage ke thode bahut jaanne ho toh main zaroor bata sakta hoon but aap apna interest jaahir kare meri zindagi badi lambi hai main 55 saal ka aadmi hoon toh mujhe agar meri zindagi ka gyaan lena hai uske kuch path ke bare me bataye kaun se part school ka college ka jeevan ka shaadi ka aashiqui ka prem ka ladai ka dosti ka main 15 din tak apni story sunata rahunga raat sunte rahenge dhanyavad

आप मेरे बचपन के बारे में जानना चाहते हैं बट अपनी उम्र तो बताएं आप क्या है आप कौन हैं और मे

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Nikhil Dhanraj Nippanikar

IAS 2018 Batch, BIHAR Cadre

1:25
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बचपन बचपन का टाइम दिया था वह तो बहुत दिनों से बना हुआ नहीं करेंगे तो गुड मॉर्निंग video.com

bachpan bachpan ka time diya tha vaah toh bahut dino se bana hua nahi karenge toh good morning video com

बचपन बचपन का टाइम दिया था वह तो बहुत दिनों से बना हुआ नहीं करेंगे तो गुड मॉर्निंग video.co

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मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हूं और दोनों ही मेरे माता-पिता एक ग्रामीण परिवेश से आते हैं इसीलिए बचपन बेहद ही सामान्य रहा हालांकि मेरी मां अध्यापिका है और उनका अध्यापिका होना और मेरे माता-पिता दोनों का ही शुरू से पढ़ाई लिखाई के प्रति काफी सजग होना और उनका यह सोचना कि उनके बच्चे वह खुद जैसा जीवन जी रहे हैं उससे कुछ बेहतर जीवन जिए कुछ आगे बढ़े तो इसी चीजों को देखते हुए घर का माहौल इसी तरीके कारा पढ़ाई-लिखाई पर काफी जोर रहा शुरू से और इन्हीं चीजों को देखते हुए मैं बचपन से ही काफी मेहनत ही थी पढ़ाई लिखाई करती रहती थी और अच्छी किस्मत थी कि अच्छे विद्यालय में पढ़ने का मौका मिला अच्छे शिक्षक भी मुझे मिले जो आज भी मैं उनको याद करती हूं और इस वजह से एक सामान्य परिवार से होते हुए भी मुझे यह मौका मिला और मेरी मेहनत रंग लाई और आप लोगों में से अगर कोई लोग ऐसे परिवेश से आते हैं ग्रामीण परिवेश से या सामान्य परिवारों से आते हैं तो आप लोग भी बिल्कुल अपना यह सपना साकार कर सकते मेरा यही संदेश है आप सबके लिए

main ek madhyamwargiye parivar se aati hoon aur dono hi mere mata pita ek gramin parivesh se aate hain isliye bachpan behad hi samanya raha halaki meri maa adhyapika hai aur unka adhyapika hona aur mere mata pita dono ka hi shuru se padhai likhai ke prati kaafi sajag hona aur unka yah sochna ki unke bacche vaah khud jaisa jeevan ji rahe hain usse kuch behtar jeevan jiye kuch aage badhe toh isi chijon ko dekhte hue ghar ka maahaul isi tarike kara padhai likhai par kaafi jor raha shuru se aur inhin chijon ko dekhte hue main bachpan se hi kaafi mehnat hi thi padhai likhai karti rehti thi aur achi kismat thi ki acche vidyalaya mein padhne ka mauka mila acche shikshak bhi mujhe mile jo aaj bhi main unko yaad karti hoon aur is wajah se ek samanya parivar se hote hue bhi mujhe yah mauka mila aur meri mehnat rang lai aur aap logo mein se agar koi log aise parivesh se aate hain gramin parivesh se ya samanya parivaron se aate hain toh aap log bhi bilkul apna yah sapna saakar kar sakte mera yahi sandesh hai aap sabke liye

मैं एक मध्यमवर्गीय परिवार से आती हूं और दोनों ही मेरे माता-पिता एक ग्रामीण परिवेश से आते ह

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Isha Pant

IPS Officer

1:52

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Rohini Katoch Sepat

Indian Police Officer

0:51

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Mittali Sethi

IAS 2017 Batch

5:47
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नमस्कार जी बिल्कुल मेरा बचपन मेरे पिताजी एक बैंक में बैंक मैनेजर थे मेरी मां भी बैंक में काम करती थी एक परिवार में मेरा एक छोटा भाई भी था और जहां तक बचपन के दिनों की बात है बहुत सुकून से बहुत दम अभिना अर्चन के काटा है बचपन इंद्रसेंस की कभी ऐसा नहीं लगा हमें कि हमारे पैरेंट्स ने हमको किसी चीज की कमी महसूस होने दी पर बहुत ही सादा जैसे एक मिली क्लास फैमिली रहती है मैं जालंधर से हूं तो जालंधर में एक छोटा सा घर था हमारा जब बहुत छोटे थे तो बहुत छोटा घर धीरे धीरे थोड़ा घर बढ़ा हुआ और जैसे कमल खिला शामिल ही रहती है वैसे ही हमें बड़ा किया गया और थोड़ी सी चीजें मेरे केस में बहुत अच्छी थी मेरी मां ने हमेशा यह ध्यान दिया कि मुझे उतना ही पढ़ने का मौका मिले जितना मेरे भाई को पढ़ने का मौका मिले और उसकी वजह से मुझे ऐसा लगता है कि बहुत पर पड़ा मेरी मां वैष्णो देवी पति की लड़की अगर मुझे पढ़ाई करनी है तो रसोई का घर काम किसी को करना है तो हम दोनों उतना ही काम करें कोई काम करे कभी ऐसा ना लगे मुझे कि मुझे रसोई का काम करना पड़ रहा है और उससे मेरी पढ़ाई अफेक्ट हो रही है तू मेरी ग्रेजुएशन के लिए मुझे हॉस्टल में रहना पड़ा अमृतसर में तो मेरे पेरेंट्स ने बिल्कुल मुझे जाने दिया मेरी पोस्ट ग्रेजुएशन के लिए मुझे चेन्नई जाना पड़ा जो बहुत दूर था उसके लिए भी मेरे बैलेंस ने बिल्कुल ऐसा नहीं बोला कि आप घर के पास ही रहे क्योंकि आप लड़की है या आपको गूगल रसोई का काम सिखाना है मेरी मां मेरी पट एक लड़की जीवन में जो थोड़ी लाइफ स्किल्स रहती है जैसे की गाड़ी चलाना बल्ब चेंज करना है यह जो बेसिक बेसिक चीज रहती है वह मैं भी सीखो और बहुत ध्यान देती थी वह सब चीजों का थोड़ा थोड़ी इश्यूज बीच-बीच में आते रहते थे जैसे एक नार्मल फैमिलीज में यीशु रहते हैं मेरी फैमिली में भी सूरते थे और वह सब पार करके ही पढ़ाई की है और घर की सुसाइड कर के साथ साथ में पढ़ाई की है लेकिन नाम घर से मैं थोड़ा जल्दी बाहर निकल गई थी क्योंकि मेरा ग्रेजुएशन के टाइम पर मैं हॉस्टल में रही और उसके बाद तो मैंने पंजाबी छोड़ दिया तो उसके बाद ही मुझे लगता है कि पैरंट्स के साथ था वह थोड़ा एक लोंग डिस्टेंस रिलेशनशिप बन गया बचपन अच्छा था बहुत दोस्त नहीं थे माय स्टडी पूरी अगर स्कूल में पढ़ी मैप दसवीं तक इतना जरूर बोलूंगी कि घर पर ऐसा एनवायरमेंट हो ना आपको बहुत जरूरी है कि इक्वल ऑफ यूनिटी आपको लगे कि आपको मिले और कभी-कभी बहुत सारी चीजों में मुझे ऐसा भी लगा कि मुझे झगड़ा भी करना पड़ा आ चुकी है सोसायटी के थोड़ी सी जेंडर स्टीरियोटाइप्स रहते ही हैं एस्पेशली लड़कियों के लिए और वह चीजें मुझे हमेशा ऐसा लगा कि मुझे घर के ही मांगनी पड़ी कभी-कभी इज्जत करनी पड़ी और कहना पड़ा कि नहीं मुझे तो यह करना ही है और कभी-कभी बात करनी पड़ी अपने पेरेंट्स से बहुत लंबी बैठ कर के देखिए मेरी लाइफ का जो परपज है या जो मुझे लगता है मुझे करना है वह आप तो आपको मुझे करना ही देना पड़ेगा क्योंकि आधे भाई इसमें खुश रहूंगी नहीं और अगर मैं कुछ नहीं रहूंगी तो आप खुश कैसे रहेंगे तो यह थोड़ा बहुत जिंदगी के मोड़ पर बहुत कमेंट पर यह सब चीजें भी करनी पड़ी पर ऐसा जरूर लगा कि यह सब करने की वजह से ही हम थोड़ा जिंदगी में हिम्मत भी आई और नारियल हुआ के कभी कभी जवाब यह चीज है अपने पेरेंट्स के साथ करते हैं तो आपको तीन चीजें बहुत बार बाहर जाकर सोसायटी के साथ भी करनी पड़ती है क्योंकि यह जरूरी नहीं है कि हर कोई आपको उतना ही समझ पाए जितना आप खुद को समझते हैं तो कभी-कभी आपको अपने शब्दों से अपने अरगुमेंट से लोगों को समझाना पड़ता है कि हमें जो चाहिए वह हमें क्यों चाहिए और कभी-कभी जग्गू नहीं माने तो जिद्दी करनी पड़ती है और यह सोचना पड़ता है कि अच्छा यह नहीं माने तो शायद मैं छोड़कर मैं भी करूंगी जो मुझे करना है बट वह कॉम्प्रोमाइज उसके कौनसी-कौनसी आपको खुद भुगतने भी पड़ेंगे पर मुझे लगता है कि यह अच्छी क्वालिटी है जिंदगी में सीखने के लिए और कंप्रोमाइज कहां करना है और कहां नहीं करना यह बहुत अच्छी सीखने की चीजें हैं और जितना आपको आपके पैरेंट्स यह चीजें सिखाएं बचपन से उतना ही अच्छा रहता है एक आखिरी चीज जरूर बोलूंगी कि पेरेंट्स को मिस ऐसा लगता है कि वह अपने बच्चों को जो बोलेंगे बच्चे कैसे करेंगे लेकिन आए सिंह के बच्चे सबसे ज्यादा ही सीखते हैं जो उनके पेरेंट्स खुद करते हैं तो जैसे कि मेरी मां एक वाकिंग वूमेन थी तो मेरे दिल में कभी यह बार डाली ही नहीं गई कि मुझे घर पर बैठना है या मुझे काम नहीं करना है तो मुझे हमेशा बड़ा ऐसे ही यह सोचकर किया गया कि मैं एक इंडिपेंडेंट एक्जिस्टेंस मेरा होगा मेरा एक फाइनेंशली डिस्टेंस होगा कि मैं अपने पैसे खुद कम आऊंगी और उस पर वह पैसे खर्च करने का जो निर्णय है वह मैं खुद लूंगी तो उसकी वजह से मुझे लगता है कि मुझे पर्सनली लाइफ में बहुत फायदा हुआ है

namaskar ji bilkul mera bachpan mere pitaji ek bank mein bank manager the meri maa bhi bank mein kaam karti thi ek parivar mein mera ek chota bhai bhi tha aur jaha tak bachpan ke dino ki baat hai bahut sukoon se bahut dum abhina archan ke kaata hai bachpan indrasens ki kabhi aisa nahi laga hamein ki hamare pairents ne hamko kisi cheez ki kami mehsus hone di par bahut hi saada jaise ek mili class family rehti hai jalandhar se hoon toh jalandhar mein ek chota sa ghar tha hamara jab bahut chote the toh bahut chota ghar dhire dhire thoda ghar badha hua aur jaise kamal khila shaamil hi rehti hai waise hi hamein bada kiya gaya aur thodi si cheezen mere case mein bahut achi thi meri maa ne hamesha yah dhyan diya ki mujhe utana hi padhne ka mauka mile jitna mere bhai ko padhne ka mauka mile aur uski wajah se mujhe aisa lagta hai ki bahut par pada meri maa vaishno devi pati ki ladki agar mujhe padhai karni hai toh rasoi ka ghar kaam kisi ko karna hai toh hum dono utana hi kaam kare koi kaam kare kabhi aisa na lage mujhe ki mujhe rasoi ka kaam karna pad raha hai aur usse meri padhai affect ho rahi hai tu meri graduation ke liye mujhe hostel mein rehna pada amritsar mein toh mere parents ne bilkul mujhe jaane diya meri post graduation ke liye mujhe Chennai jana pada jo bahut dur tha uske liye bhi mere balance ne bilkul aisa nahi bola ki aap ghar ke paas hi rahe kyonki aap ladki hai ya aapko google rasoi ka kaam sikhaana hai meri maa meri pat ek ladki jeevan mein jo thodi life skills rehti hai jaise ki gaadi chalana bulb change karna hai yah jo basic basic cheez rehti hai vaah main bhi sikho aur bahut dhyan deti thi vaah sab chijon ka thoda thodi issues beech beech mein aate rehte the jaise ek normal faimilij mein yeshu rehte hain meri family mein bhi surte the aur vaah sab par karke hi padhai ki hai aur ghar ki suicide kar ke saath saath mein padhai ki hai lekin naam ghar se main thoda jaldi bahar nikal gayi thi kyonki mera graduation ke time par main hostel mein rahi aur uske baad toh maine punjabi chod diya toh uske baad hi mujhe lagta hai ki Parents ke saath tha vaah thoda ek long distance Relationship ban gaya bachpan accha tha bahut dost nahi the my study puri agar school mein padhi map dasavi tak itna zaroor bolungi ki ghar par aisa environment ho na aapko bahut zaroori hai ki equal of unity aapko lage ki aapko mile aur kabhi kabhi bahut saree chijon mein mujhe aisa bhi laga ki mujhe jhadna bhi karna pada aa chuki hai sociaty ke thodi si gender stiriyotaips rehte hi hain especially ladkiyon ke liye aur vaah cheezen mujhe hamesha aisa laga ki mujhe ghar ke hi mangani padi kabhi kabhi izzat karni padi aur kehna pada ki nahi mujhe toh yah karna hi hai aur kabhi kabhi baat karni padi apne parents se bahut lambi baith kar ke dekhiye meri life ka jo purpose hai ya jo mujhe lagta hai mujhe karna hai vaah aap toh aapko mujhe karna hi dena padega kyonki aadhe bhai isme khush rahungi nahi aur agar main kuch nahi rahungi toh aap khush kaise rahenge toh yah thoda bahut zindagi ke mod par bahut comment par yah sab cheezen bhi karni padi par aisa zaroor laga ki yah sab karne ki wajah se hi hum thoda zindagi mein himmat bhi I aur nariyal hua ke kabhi kabhi jawab yah cheez hai apne parents ke saath karte hain toh aapko teen cheezen bahut baar bahar jaakar sociaty ke saath bhi karni padti hai kyonki yah zaroori nahi hai ki har koi aapko utana hi samajh paye jitna aap khud ko samajhte hain toh kabhi kabhi aapko apne shabdon se apne aragument se logo ko samajhana padta hai ki hamein jo chahiye vaah hamein kyon chahiye aur kabhi kabhi jaggu nahi maane toh jiddi karni padti hai aur yah sochna padta hai ki accha yah nahi maane toh shayad main chhodkar main bhi karungi jo mujhe karna hai but vaah compromises uske kaunsi kaun se aapko khud bhugatane bhi padenge par mujhe lagta hai ki yah achi quality hai zindagi mein sikhne ke liye aur compromise kahaan karna hai aur kahaan nahi karna yah bahut achi sikhne ki cheezen hain aur jitna aapko aapke pairents yah cheezen sikhaye bachpan se utana hi accha rehta hai ek aakhiri cheez zaroor bolungi ki parents ko miss aisa lagta hai ki vaah apne baccho ko jo bolenge bacche kaise karenge lekin aaye Singh ke bacche sabse zyada hi sikhate hain jo unke parents khud karte hain toh jaise ki meri maa ek Walking women thi toh mere dil mein kabhi yah baar dali hi nahi gayi ki mujhe ghar par baithana hai ya mujhe kaam nahi karna hai toh mujhe hamesha bada aise hi yah sochkar kiya gaya ki main ek independent ekjistens mera hoga mera ek financially distance hoga ki main apne paise khud kam aaungi aur us par vaah paise kharch karne ka jo nirnay hai vaah main khud lungi toh uski wajah se mujhe lagta hai ki mujhe personally life mein bahut fayda hua hai

नमस्कार जी बिल्कुल मेरा बचपन मेरे पिताजी एक बैंक में बैंक मैनेजर थे मेरी मां भी बैंक में क

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Dr Devansh Yadav

Additional Deputy Commissioner at ADC Bordumsa, Government of Arunachal Pradesh

0:50
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मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में हुआ और क्योंकि घर वाले मथुरा में ही सेटल थे तो पढ़ाई लिखाई भी वहीं पर हुई फैमिली एक मिडिल क्लास बैकग्राउंड से है तो हमेशा पढ़ाई-लिखाई पर बहुत जोर था हमेशा हमारे जमाने में मोबाइल वगैरा होते नहीं थे ना इसका समय था तो खेलकूद में पूरे समय स्कूल के बाद घर से बाहर रहते थे और खेलकूद में भी आप देखेंगे उत्तर प्रदेश के सभी जो छोटे शहर होते हैं जगह बहुत कम होती हैं इक्का-दुक्का ग्राउंड होते हैं आस-पास तो वहीं पर जाकर सब लोग मिलते थे तो सब अलग-अलग बैकग्राउंड के लोग आते थे तो एक प्रकार से बहुत जिसको बोलते हैं विभिन्न वर्गों के दोस्त बने और एक बहुत ही अच्छा यादगार समय उनके साथ रहा

mera janam uttar pradesh ke mathura jile mein hua aur kyonki ghar waale mathura mein hi settle the toh padhai likhai bhi wahi par hui family ek middle class background se hai toh hamesha padhai likhai par bahut jor tha hamesha hamare jamane mein mobile vagera hote nahi the na iska samay tha toh khelkud mein poore samay school ke baad ghar se bahar rehte the aur khelkud mein bhi aap dekhenge uttar pradesh ke sabhi jo chote shehar hote hai jagah bahut kam hoti hai ikka dukka ground hote hai aas paas toh wahi par jaakar sab log milte the toh sab alag alag background ke log aate the toh ek prakar se bahut jisko bolte hai vibhinn vargon ke dost bane aur ek bahut hi accha yaadgaar samay unke saath raha

मेरा जन्म उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में हुआ और क्योंकि घर वाले मथुरा में ही सेटल थे तो पढ

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Surendra Sharma

Padmashree Awardee and Haasy Kavi

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बचपन के दिनों के बारे में मिली यह नहीं पता मेरे कल क्या खाए एकांत प्रिय व्यक्ति का किसी से भी बात करने में मुझे कोई दोस्तों की कंपनी कॉलेज के अंदर हुई तो मैं लोगों को मिलने लगा बात करने लगा और इतनी जबरदस्त कंपनी की 1 साल निवासी राम स्तुति राम के नाम से पता लग जाए बैलेंस जो डेल्टा में और उसमें भूकंप लेख इंग्लिश में 1 साल की हो गया 1 साल में मुझे इसमें क्षेत्र का ताजा

bachpan ke dinon ke bare mein mili yeh nahi pata mere kal kya khaye ekant priya vyakti ka kisi se bhi baat karne mein mujhe koi doston ki company college ke andar hui toh main logo ko milne laga baat karne laga aur itni jabardast company ki 1 saal niwasi ram stuti ram ke naam se pata lag jaye balance jo delta mein aur usme bhukamp lekh english mein 1 saal ki ho gaya 1 saal mein mujhe ismein kshetra ka taaza

बचपन के दिनों के बारे में मिली यह नहीं पता मेरे कल क्या खाए एकांत प्रिय व्यक्ति का किसी से

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Dr Jayadev Sarangi

Worked at Indian Administrative Service (AGMUT), Formerly SECRETARY,GOVERNMENT OF NCT OF DELHI/Goa Government .Formerly Expert UNODC

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जैसे मेक कालाहांडी का नाम आपने सुना होगा उड़ीसा के काफी चर्चा में रहता है जहां इतना ज्यादा प्रगति नहीं है और ट्राईबल डोमिनेटेड एरिया है वहां पर मेरे पिताजी काफी दुखी थे और वहां पर काफी अच्छा काम करते हुए समाज सेवा में भी तो कभी कबार जब कलेक्टर से मिलने के लिए हम लोग जाते थे पिताजी के साथ तो कोई भी समस्या लेकर जाते थे तो वह मिनटों में उसकी समाधान लोगों के लिए कर देते थे जिसे हमारी जहां पर खेती है वहां पर काफी ट्राईबल डोमिनेशन है तो यूं ही काफी छोटी छोटी समस्या होंगे तो पिताजी के साथ में कलेक्टर एसपी के साथ कर ली मिलने जाता था बचपन में तो लगता था कि एक खुशी है जिस कुर्सी के माध्यम से जनता की कोई भी सेवा करना बड़ा आसान है दिमाग में ऐसे बनता गया इसके बाद जब हम स्कूल की पढ़ाई पूरी की है चिल्ली पनीर चिल्ली आने के लिए पिताजी को कितना दूर जाओगे उड़ीसा से उस समय तो इसमें इतना भी साधन नहीं था हमको जाना है किस लिए जाना है नहीं हमने तो सिविल सर्विसेज एग्जामिनेशन दिल्ली जाकर ही देना है ताकि देश के लिए कुछ कर सके पिताजी ने हां कर दिया और उसकी शुरुआत हो गई

jaise make kalahandi ka naam aapne suna hoga odisha ke kaafi charcha mein rehta hai jaha itna zyada pragati nahi hai aur trible domineted area hai wahan par mere pitaji kaafi dukhi the aur wahan par kaafi accha kaam karte hue samaj seva mein bhi toh kabhi kabar jab collector se milne ke liye hum log jaate the pitaji ke saath toh koi bhi samasya lekar jaate the toh vaah minaton mein uski samadhan logo ke liye kar dete the jise hamari jaha par kheti hai wahan par kaafi trible domineshan hai toh yun hi kaafi choti choti samasya honge toh pitaji ke saath mein collector SP ke saath kar li milne jata tha bachpan mein toh lagta tha ki ek khushi hai jis kursi ke madhyam se janta ki koi bhi seva karna bada aasaan hai dimag mein aise baata gaya iske baad jab hum school ki padhai puri ki hai Chilly paneer Chilly aane ke liye pitaji ko kitna dur jaoge odisha se us samay toh isme itna bhi sadhan nahi tha hamko jana hai kis liye jana hai nahi humne toh civil services examination delhi jaakar hi dena hai taki desh ke liye kuch kar sake pitaji ne haan kar diya aur uski shuruat ho gayi

जैसे मेक कालाहांडी का नाम आपने सुना होगा उड़ीसा के काफी चर्चा में रहता है जहां इतना ज्यादा

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Ghanshyamvan

मंदिर सेवा

1:24
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हम बचपन में खेत खजाने में भेजे थे हम के मौसम में पेड़ों पर छोड़ चुके हैं और आम और जामुन अच्छे लोगों के खेत में गन्ना जूस और होली के टाइम पर होली होली नच ने करते हैं और मोटर ऑन कर खाते थे पैदल स्कूल में जाते थे और रात में बसता होता था तो क्यों जी की शरीयत पर भी देते थे बचपन में हमारा भाइयों से पहन लो से अधिक प्यार था अरे माता-पिता हमें बहुत लाड प्यार से रखते थे और पान पर थे हम आपस में मिलजुल कर रहते गांव से दूर जाते थे हमारे गांव में 5 लीटर की खोली था छठी से हम दूसरे गांव में पढ़ने जा करते थे गांव के रास्ते में बेरी के पेड़ थे उनसे फिर चुन चुन कर खूब बचाते हुए उसने भी जाते हो क्या नीचे

hum bachpan me khet khajaane me bheje the hum ke mausam me pedon par chhod chuke hain aur aam aur jamun acche logo ke khet me ganna juice aur holi ke time par holi holi nach ne karte hain aur motor on kar khate the paidal school me jaate the aur raat me basta hota tha toh kyon ji ki shareeyat par bhi dete the bachpan me hamara bhaiyo se pahan lo se adhik pyar tha are mata pita hamein bahut lada pyar se rakhte the aur pan par the hum aapas me miljul kar rehte gaon se dur jaate the hamare gaon me 5 litre ki kholi tha chathi se hum dusre gaon me padhne ja karte the gaon ke raste me berry ke ped the unse phir chun chun kar khoob bachate hue usne bhi jaate ho kya niche

हम बचपन में खेत खजाने में भेजे थे हम के मौसम में पेड़ों पर छोड़ चुके हैं और आम और जामुन अच

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Santosh Kumar Singh

Teacher(अध्यापक)

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बचपन बहुत खूबसूरत होता है हर जिंदगी में कभी लौटकर आता नहीं है इंसान सोचता है कि इसको हमारे बढ़ रही है लेकिन सच तो है उसका हर 1 सेकेंड हर एक दिन कम होता जाता है दुनिया वही है आसमान नहीं धरती नहीं लेकिन लोग बदल गए कुछ नहीं बदला ना धरती जखराना स्वर ना सूरत में सारे ना चांद सितारे बदनसीब इंसान तो बचपन यह चीज मां की लोरी गांव में घूमना बच्चे अपने दोस्तों के साथ खेलना झगड़ा करना और छोटी-मोटी चोरियां करना पर ले जाना उस दिन जब याद आते थे वह आंखों में आंसू आता है काश फिर वापस आ जाए लेकिन इंसान का एक सेकंड कर चला जाता है तो वापस नहीं आता इंसान की एक एक सेकंड एक 1 मीटर बहुत कीमती होती उनको भी चाय मत जाने दो उसको जिंदगी को ऐसा करो क्योंकि जिंदगी में सब कुछ बदलता मछला

bachpan bahut khoobsurat hota hai har zindagi me kabhi lautkar aata nahi hai insaan sochta hai ki isko hamare badh rahi hai lekin sach toh hai uska har 1 second har ek din kam hota jata hai duniya wahi hai aasman nahi dharti nahi lekin log badal gaye kuch nahi badla na dharti jakhrana swar na surat me saare na chand sitare badnaseeb insaan toh bachpan yah cheez maa ki lori gaon me ghumana bacche apne doston ke saath khelna jhagda karna aur choti moti choriyan karna par le jana us din jab yaad aate the vaah aakhon me aasu aata hai kash phir wapas aa jaaye lekin insaan ka ek second kar chala jata hai toh wapas nahi aata insaan ki ek ek second ek 1 meter bahut kimti hoti unko bhi chai mat jaane do usko zindagi ko aisa karo kyonki zindagi me sab kuch badalta machala

बचपन बहुत खूबसूरत होता है हर जिंदगी में कभी लौटकर आता नहीं है इंसान सोचता है कि इसको हमार

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Ramakant

Teacher

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मेरा बचपन बहुत ही सामान्य रहा मैं यह शाम एक छोटे से गांव में गांव से बिलॉन्ग रखता हूं प्लान करता हूं मेरे परिवार में ज्यादा लोग पढ़े-लिखे नहीं थे स्वयं की दृढ़ इच्छा और आत्म बल से पढ़ लिखकर इस स्थान पर पहुंचा मैं सबको यही संदेश देना चाहता हूं कि अगर फॉर्म की दृढ़ इच्छा है आत्मबल है उस करने की अपने अंदर चश्मा है तो हम जरूर कुछ ना कुछ कर पाएंगे हम एक लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ना चाहिए सफलता चाहे जितनी मिले लेकिन हमें घबराना नहीं चाहिए मेरे जीवन में बहुत सारी असफलताएं हैं अंत में मुझे सफलता मिली हंड्रेड परसेंट डिक्रिप्ट होने के कारण भी सफलता प्राप्त किया

mera bachpan bahut hi samanya raha main yah shaam ek chote se gaon me gaon se Belong rakhta hoon plan karta hoon mere parivar me zyada log padhe likhe nahi the swayam ki dridh iccha aur aatm bal se padh likhkar is sthan par pohcha main sabko yahi sandesh dena chahta hoon ki agar form ki dridh iccha hai atmabal hai us karne ki apne andar chashma hai toh hum zaroor kuch na kuch kar payenge hum ek lakshya banakar aage badhana chahiye safalta chahen jitni mile lekin hamein ghabrana nahi chahiye mere jeevan me bahut saari asafaltaye hain ant me mujhe safalta mili hundred percent dikript hone ke karan bhi safalta prapt kiya

मेरा बचपन बहुत ही सामान्य रहा मैं यह शाम एक छोटे से गांव में गांव से बिलॉन्ग रखता हूं प्ला

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बचपना जीवन का एक सच है जो कभी न मिलता है ना मिटने देता है कई कठिनाई जीवन में आते हैं और कई कट नहीं चली हैप्पी खेलते कुत्ते लोग आज हम लोग बढ़ते बहुत मस्ती करते हुए रहते हैं पर जीवन में कभी-कभी थोड़ा थोड़ा गलती होते हुए भी हम फिर सुधार करने लगते हैं कि नहीं यह हमसे गलती हो रही है और वही लोग जो गलती ना सोच कर गलती को मान कर चलते हैं उड़ाए भटक जाते हैं फिर जब कुछ अवस्थाएं होती हैं घटने में सबको लगता है कुछ पहले यह गलती ना किए होते तो आज यह दिन हमें ना देखना पड़ता

bachapana jeevan ka ek sach hai jo kabhi na milta hai na mitne deta hai kai kathinai jeevan me aate hain aur kai cut nahi chali happy khelte kutte log aaj hum log badhte bahut masti karte hue rehte hain par jeevan me kabhi kabhi thoda thoda galti hote hue bhi hum phir sudhaar karne lagte hain ki nahi yah humse galti ho rahi hai aur wahi log jo galti na soch kar galti ko maan kar chalte hain udaye bhatak jaate hain phir jab kuch avasthae hoti hain ghatane me sabko lagta hai kuch pehle yah galti na kiye hote toh aaj yah din hamein na dekhna padta

बचपना जीवन का एक सच है जो कभी न मिलता है ना मिटने देता है कई कठिनाई जीवन में आते हैं और कई

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बचपन के दिनों में तो हम बहुत मिलेगी आजा तेरे यार वाह क्या दिन थे वह क्या-क्या नहीं करते थे यार मत कराओ उन दिनों की याद फिर से बचपन में जाने का मन करता है चलो क्या कर सकते हैं अभी आगे किस्मत में नहीं था वह नहीं मिला यार विवाह वह भी नहीं मिला जिससे प्यार हुआ वह भी नहीं मिला चलो जी राणा जी लेंगे आपकी बचपन तो यार बहुत खूबसूरत होता है कोई टेंशन नहीं कोई किसी चीज की चिंता नहीं बस दिन निकालो और अपने मजे करो मस्ती करो कभी कुछ के लोगों भी कुछ खेलो डिजिटल दुनिया मीडिया का जमाना नहीं था तब कंचे खेलते थे गुल्ली डंडा खेलते थे झूले जुलते जे बेड़ो बिल्सी बांध के खंड में नहाते थे नदी में देखते थे स्कूल से आने के बाद वह भैंस की पूंछ पर लटक के भैंस के ऊपर बैठकर तय हुआ क्या दिन थे मोमेंट्स मिस यू चाइल्डहुड लव यू ऑल बूम बूम

bachpan ke dino mein toh hum bahut milegi aajad tere yaar wah kya din the vaah kya kya nahi karte the yaar mat karao un dino ki yaad phir se bachpan mein jaane ka man karta hai chalo kya kar sakte hai abhi aage kismat mein nahi tha vaah nahi mila yaar vivah vaah bhi nahi mila jisse pyar hua vaah bhi nahi mila chalo ji rana ji lenge aapki bachpan toh yaar bahut khoobsurat hota hai koi tension nahi koi kisi cheez ki chinta nahi bus din nikalo aur apne maje karo masti karo kabhi kuch ke logo bhi kuch khelo digital duniya media ka jamana nahi tha tab kanche khelte the gulli danda khelte the jhule julte je bedo bilsi bandh ke khand mein nahaate the nadi mein dekhte the school se aane ke baad vaah bhains ki puch par latak ke bhains ke upar baithkar tay hua kya din the moments miss you childhood love you all boom boom

बचपन के दिनों में तो हम बहुत मिलेगी आजा तेरे यार वाह क्या दिन थे वह क्या-क्या नहीं करते थे

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मैं बचपन में बहुत ही सराहनीय था था और मैं आज भी बहुत ही शरारती हूं मुझे बचपन की सारी यादें याद आती है बचपन बहुत अच्छा जीवन है चालू इज द बेस्ट

main bachpan me bahut hi sarahniya tha tha aur main aaj bhi bahut hi shararti hoon mujhe bachpan ki saari yaadain yaad aati hai bachpan bahut accha jeevan hai chaalu is the best

मैं बचपन में बहुत ही सराहनीय था था और मैं आज भी बहुत ही शरारती हूं मुझे बचपन की सारी यादें

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मनिया प्रवचन सुनाने तेजाजी लेकिन अब सामान्य परिवार से तो आती है एक और बात है आपके बारे में आप किस कैटेगरी में आती अब जन्म में तो नहीं हो कभी पवार हो मैं भी ग्रामीण क्षेत्र में से आता हूं लेकिन जब मैं परिवार में हूं ब्लॉक करता हूं बहुत से बच्ची है जरनल कैटेगरी वाले जो बहुत अच्छे लाइक बच्चे हैं उनको भी आगे बढ़ने का मौका मिलना चाहिए जो सम्माननीय वर्ग के आरक्षण के अधीन आकर उनकी रिपोर्ट हो जाता है कुछ मारे को नई डेवलपमेंट लानी चाहिए कि एक एससीबीसी का लड़का भी सामान्य परिवार वाले के जनरल कैटेगरी वाले के साथ ही कक्षा में बैठ कर पढ़ सके और आगे जाकर उनकी बातें सुनी और उनके साथ कंप्लीट करें तब जाकर शिक्षा ले आज के दिन में कितना बारिश है हमारे यहां डॉक्टर नहीं है क्योंकि हमारे यह जो हॉस्पिटल है वहां पर सभी आरक्षित मोस्टली आरक्षित डॉक्टर लगी हुई है उनको उस बीमारी के बारे में ज्यादा नॉलेज तो नहीं है कितनी फास्ट नॉलेज है वह है पैरामेडिकल इंस्टिट्यूट के पास या आपके जो प्राइवेट डॉक्टर कि उनके पास फास्ट नॉलेज है हम यह चाहते हैं कि हर कैटेगरी में कैटेगरी को आरक्षण दिया जाए परंतु प्रताप सिंह दिया जाए कि उसका दुरुपयोग

maniya pravachan sunaane tejaji lekin ab samanya parivar se toh aati hai ek aur baat hai aapke bare me aap kis category me aati ab janam me toh nahi ho kabhi power ho main bhi gramin kshetra me se aata hoon lekin jab main parivar me hoon block karta hoon bahut se bachi hai jarnal category waale jo bahut acche like bacche hain unko bhi aage badhne ka mauka milna chahiye jo sammananiya varg ke aarakshan ke adheen aakar unki report ho jata hai kuch maare ko nayi development lani chahiye ki ek SCBC ka ladka bhi samanya parivar waale ke general category waale ke saath hi kaksha me baith kar padh sake aur aage jaakar unki batein suni aur unke saath complete kare tab jaakar shiksha le aaj ke din me kitna barish hai hamare yahan doctor nahi hai kyonki hamare yah jo hospital hai wahan par sabhi arakshit Mostly arakshit doctor lagi hui hai unko us bimari ke bare me zyada knowledge toh nahi hai kitni fast knowledge hai vaah hai paramedical institute ke paas ya aapke jo private doctor ki unke paas fast knowledge hai hum yah chahte hain ki har category me category ko aarakshan diya jaaye parantu pratap Singh diya jaaye ki uska durupyog

मनिया प्रवचन सुनाने तेजाजी लेकिन अब सामान्य परिवार से तो आती है एक और बात है आपके बारे में

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