कोई एक इंसान दूसरे की बुराई क्यों करता है?...


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Ruchi Garg

Counsellor and Psychologist(Gold MEDALIST)

0:30

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए तो इंसान दूसरे की बुराई रात तक करता है जब उसे कोई और बुरा भला बोल देता है उसके दिल को लग जाती है तो उसकी बुराई करना शुरू कर देता है कुछ लोग ऐसे भी होते हैं कि उनका नेचर ऐसा होता है उनके उनके स्वभाव में ऐसा होता है क्यों नहीं खुद को दूसरों की बुराई करके अच्छा लगता है उन्हें लगता है मैं तो अच्छा हूं या की मौत सामने वाला बुरा है तू दूसरों की बुराई करने में लग जाते हैं उन्हें नीचा दिखाने के लिए

dekhie toh insaan dusre ki burayi raat tak karta hai jab use koi aur bura bhala bol deta hai uske dil ko lag jati hai toh uski burayi karna shuru kar deta hai kuch log aise bhi hote hain ki unka nature aisa hota hai unke unke swabhav mein aisa hota hai kyon nahi khud ko dusro ki burayi karke accha lagta hai unhein lagta hai toh accha hoon ya ki maut saamne vala bura hai tu dusro ki burayi karne mein lag jaate hain unhein nicha dikhane ke liye

देखिए तो इंसान दूसरे की बुराई रात तक करता है जब उसे कोई और बुरा भला बोल देता है उसके दिल क

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Vinod Kumar Pandey

Life Coach | Career Counsellor ::Relationship Counsellor :: Parenting Counsellor

2:02
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अपने प्रश्न किया है कि कोई एक इंसान दूसरे की बुराई क्यों करता है इसके लिए व्यक्ति का दृष्टिकोण जिम्मेदार होता है क्योंकि जो व्यक्ति अपने अंदर जैसा व्यवहार करता है अपने आपसे जैसा वह व्यवहार करता है उसी प्रकार का वह व्यवहार दुनिया के साथ करता या लोगों के साथ करता है अगर कोई व्यक्ति अपने मन में बहुत शांत है अपने आप को अच्छा समझता है अपने अंदर वह अपने आप को बहुत अच्छा महसूस करता है तो उसका व्यवहार भी कहीं ना कहीं दूसरों के लिए बहुत अच्छा होता है लेकिन जो व्यक्ति अपने आप से नफरत करता है अपने आप से बुराई देखने का प्रयास करता है वही व्यक्ति दूसरों के साथ भी बुरा बर्ताव करता है उसकी बुराई करता है इसलिए यह बहुत जरूरी है कि अपने अंदर कि आप वातावरण को अपने आप जो आपकी धारणा उसको अच्छा करके अब दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार अपने आप करते चले जाएंगे क्योंकि ध्यान रखेंगे दुनिया में जो कुछ किसी व्यक्ति के पास होता है वह दूसरों को देता है जैसे अगर आम को आप काटने की कोशिश करेंगे तो उसमें आम का ही रस निकलेगा किसी दूसरे फल का रस नहीं निकल सकता ठीक उसी प्रकार से जिस मनुष्य का जो गुण होता है जो उसके अंदर व्यक्तित्व होता है जो उसके अंदर अच्छाई या बुराई होती है वहीं दूसरे व्यक्ति के लिए उसके निकलता है अगर उसके अंदर अच्छा व्यक्तित्व है अच्छी सोच है अच्छी मानसिकता है तो दूसरे व्यक्ति के लिए वह अच्छा सब कुछ करेगा लेकिन अगर किसी के अंदर बुराई है तो वह सिर्फ और सिर्फ बाहर बुराई ही निकलेगा इसलिए मेरी शुभकामनाएं आपके साथ आप अपने अंदर की केवल अच्छाई को बनाए रखें दूसरों के साथ अच्छा व्यवहार करें और अपने जीवन में सब कुछ अच्छा महसूस करें और जो लोग आपकी बुराई कर रहे हैं आपके आसपास बुराई कर रहे हैं उनको अपने ईश्वर से दुआ करिए कि उनको सद्बुद्धि मिले और उनके मन में शांति आए क्योंकि जब उनके मन में शांति आएगी तब अपने आपको दूसरों के लिए जो बुराई करना बंद कर देंगे कामनाएं धन्यवाद

apne prashna kiya hai ki koi ek insaan dusre ki burayi kyon karta hai iske liye vyakti ka drishtikon zimmedar hota hai kyonki jo vyakti apne andar jaisa vyavhar karta hai apne aapse jaisa vaah vyavhar karta hai usi prakar ka vaah vyavhar duniya ke saath karta ya logo ke saath karta hai agar koi vyakti apne man mein bahut shaant hai apne aap ko accha samajhata hai apne andar vaah apne aap ko bahut accha mehsus karta hai toh uska vyavhar bhi kahin na kahin dusro ke liye bahut accha hota hai lekin jo vyakti apne aap se nafrat karta hai apne aap se burayi dekhne ka prayas karta hai wahi vyakti dusro ke saath bhi bura bartaav karta hai uski burayi karta hai isliye yah bahut zaroori hai ki apne andar ki aap vatavaran ko apne aap jo aapki dharana usko accha karke ab dusro ke saath accha vyavhar apne aap karte chale jaenge kyonki dhyan rakhenge duniya mein jo kuch kisi vyakti ke paas hota hai vaah dusro ko deta hai jaise agar aam ko aap katne ki koshish karenge toh usme aam ka hi ras niklega kisi dusre fal ka ras nahi nikal sakta theek usi prakar se jis manushya ka jo gun hota hai jo uske andar vyaktitva hota hai jo uske andar acchai ya burayi hoti hai wahi dusre vyakti ke liye uske nikalta hai agar uske andar accha vyaktitva hai achi soch hai achi mansikta hai toh dusre vyakti ke liye vaah accha sab kuch karega lekin agar kisi ke andar burayi hai toh vaah sirf aur sirf bahar burayi hi niklega isliye meri subhkamnaayain aapke saath aap apne andar ki keval acchai ko banaye rakhen dusro ke saath accha vyavhar kare aur apne jeevan mein sab kuch accha mehsus kare aur jo log aapki burayi kar rahe hai aapke aaspass burayi kar rahe hai unko apne ishwar se dua kariye ki unko sadbuddhi mile aur unke man mein shanti aaye kyonki jab unke man mein shanti aayegi tab apne aapko dusro ke liye jo burayi karna band kar denge kamanaen dhanyavad

अपने प्रश्न किया है कि कोई एक इंसान दूसरे की बुराई क्यों करता है इसके लिए व्यक्ति का दृष्ट

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