सिंधु घाटी सभ्यता कैसी थी?...


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Deepak

Godly Sewa Mai Samrpit

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नमस्कार मित्रों सिंधु घाटी की सभ्यता आपको इसके बारे में बिल्कुल सच्चाई और एकदम ओरिजिनल बात बताते हैं आज तक इसके बारे में शायद लोगों को 0.11% ईसाई मालूम होगा सिंधु घाटी की सभ्यता से ढाई हजार साल पहले की सभ्यता है और जो भारत की सभ्यता थी भारत में पहले आज से 5000 साल पहले भारत स्वर्ग था जिसे हेविंग जन्नत पैराडाइज स्वर्गीय सतयुग कहा जाता था वह स्वर्णिम युग था उसके बाद में जैसे-जैसे सोने की दुनिया थे गोल्डन एज कहलाता था वह दुनिया स्वर्ग था हीरे जवाहरात उसे पूरा लगा हुआ एकदम हर प्रकार से भरपूर और उस जमाने में उस समय इस धरती पर रहने वाले जो भी थे स्वर्ग में वह सब देवी देवता खिलाते थे क्योंकि सतयुग स्वभाव कलयुग को नर्क कहते हैं और यह सरगना धरती पर ही होता है कोई आकाश में स्वर्ग नर्क नहीं होता है तो उस समय में इस धरती को स्वर्ग कहते थे क्रश जी ने भी बोला था कि उनका हुए 2000 साल हुए उन्होंने भी बोला था कि यह भारत आज से 3000 साल पहले स्वर्ग था एविन था तो उनको आयुर्वेद 2000 और वह बताएं मुझ से 3000 साल पहले ही स्वर्ग इसका मतलब 5000 साल टोटल हुए और काउंटिंग में 5000 साल की है कोई लाखों बस का युग नहीं होता है लाखो वर्ष के घर बात होती कि लाखों साल पहले स्वर्ग था या सतयुग की तिल्ला खुशाल की काउंटिंग है क्या भारत के प्रश्न ना इस्लाम का कैलेंडर है भारत लागू कर करना क्रिश्चियन का है ना भारतवासियों का कृष्ण का कैलेंडर 2020 चल रहा है इंग्लिश कैलेंडर और हिंदू अपना जो भारतीय संस्कृति का कैलेंडर है 2047 2075 76 चल रहा है और इस्लाम कैलेंडर चल रहा है 2023 तो आंकड़ा 2000 का यह लाखों वर्क अकाउंटिंग तो है 5000 साल पहले भारत मात्र 5000 साल को जैसे कि शास्त्रों में लिख दिया गया गलती यह हुई कि भगवान ने कहा वेदव्यास जी को क्योंकि आज से 1000 साल पहले भी भेजी का जन्म होता है क्या रवि सैनी और उन्होंने वेद लिखा गीता लिखी उनके चरणों से 4000 साल पहले की घटना घटी थी ये महाभारत की तो उन्होंने जो शास्त्र लिखा था उसमें भगवान ने कहा कि 5000 लख लख बोला लिखने के लिए 5000 लाडली का दूसरा कहां पर कितना बार जन्म लेते हैं तो भगवान ने कहा 84 84 लाख भुला लिखो उन्होंने 8400000 उसके काउंटिंग आज तक नहीं आई किसी और यही 5000 साल पहले जो भारत स्वर्ग था उस वक्त सोने की दुनिया थी फिर धीरे-धीरे 1250 कल जो पुराना हुआ यह थोड़े यहां पर जनसंख्या भी बढ़ गई देवी देवताओं की नौ लाख से शुरुआत हुई थी आबादी परिवर्तन और अंत होते-होते दो करोड़ में और वहां पर वहां के बाद में दो कुरुक्षेत्र का युग की शुरुआत होती है फिर वह 1250 आ जाती है उसमें भी आबादी बढ़ती बढ़ती 33436 करो हो जाती है आबादी इस प्रकार से 36 करोड़ हो जाती है आबादी और आत्मा में क्वालिटी भी गिर जाती थोड़ी जैसे पहले 16 कला संपूर्ण नेतृत्व नेतृत्व में 14 कलाकृतियों के अंत में आते-आते जब 33 कोर से 36 करोड़ आबादी हो जाती है तो यहां पर सोने की दुनिया थी वह चांदी की दूरी हो जाती तेरी तारीफ में और प्रीता के बाद में फिर को परेशा जाता तो सोने चांदी तो थी तो सरी उस वक्त भी लेकिन वहीं पर वह सिंधु घाटी की सभ्यता जो भारत में पहले स्वर्ग यहां से आबादी बढ़ती जाती थी बढ़ते बढ़ते बढ़ते पाकिस्तान जो आज सिंध पाकिस्तान में चला गया वहां पर यह सभ्यता रहने लगी थी और जब यह सभ्यता जो सिंधु घाटी की सभ्यता पहले सिंध कहलाती थी और वहां से जो पाकिस्तान को पार करते हुए पत्र चंद्र कुमार करते हैं जो भारत में आते थे लोग तो सऊदी अरब की साइड से आने वाली सलाम वालेकुम भारत को सिंधु की जगह पर हिंदू बोलते थे हिंदू हिंदू से जिंदगी जगह पर नाम हिंदी निकलता है हिंदू हिंदुस्तान बोलने लगे और वह सिंधु घाटी की सभ्यता का नहीं लगती लेकिन उस वक्त आते जाते थे लेकिन हर मुस्लिम नहीं थे जब तेरा युग का अंत होता था क्योंकि वहां पर देवी-देवताओं का प्रसार होता चला गया और भारत से बढ़ते हुए देवी देवताओं की आबादी पाकिस्तान से जींद में पड़ता है सॉरी सिंध पाकिस्तान के अंदर जो सीन पड़ता उस से होते हुए अफगानिस्तान से होते हुए और आगे बढ़ने लगी थी और वहां पर कहते हैं कि जब यह 12 से 50 साल तक आयु कभी जो पूरा होता है और द्वापर युग शुरुआत होने वाला हूं यहां पर एक विनाश होता है और वह देवी देता है सारे समाप्त हो जाते हैं महाविनाशनी पृथ्वी जीरो डिग्री पर थी वह जोकर 23 डिग्री नीचे झुक जाती है और इस झुकने के कारण पृथ्वी पर एक महा प्रलय के रूप होता है जिसमें किसी की धरती ऊपर ऊपर की नीचे चली जाती है और इसमें सब कुछ मिट जाता है पूरे भारत एकदम सफाया हो जाता कहीं कहीं एरिया जो होते हैं भारत का वह कुछ बचा हुआ रहता जो जो जोड़ी भूत और पूरा खत्म हो जाता है वही सिंधु घाटी की सभ्यताओं में जो पूरा तहत रहे हो जाता पूरा ढक जाता है और कुछ भी मिलता फिर यहां के जगह पर से फिर नया युग की शुरुआत होता और जो हर बात ही बची हुई युवती उनसे फिर नई जनरेसन जन्म लेते हैं लेकिन यह भूल जाते हैं कि हम पिछले जन्म में भूल जाते हैं कि देवी देवता थे लेकिन यह खुदाई में फिर सोने चांदी के रोजा मिलते रहते और यह सबसे दो घाटी की सभ्यता आज हमारी कश्ती वहां की सारी हीरे जवाहरात सोने चांदी तेज आने लग जाते हैं खाली हो जाता है पूरा मिट्टी का दीवार बचाता है जिसको आज भी लोगों सिंधु घाटी की सभ्यता और वहीं से फिर यह खाली होने को तो फिर भारत के अंदर इंट्री होती है ऑफिस द्वापर से तो आपको मालूम है कि 2000 साल से फिर भारत को लूटा जाने लग गया जो बाहर से विदेशी आते थे और भारत को लूट के ले कर जाने लगे इसी प्रकार से यह सिंधु घाटी की सभ्यता को हो या भारत की सभ्यता को यही थी भारत की संस्कृति उनसे जुड़ी हुई थी और आज वह दो ढाई हजार सबसे भारत खाली होते-होते एकदम कल ऑफिस से जीरो डिग्री पर आने वाली है पृथ्वी जो फिर से यह सिंधु घाटी की सभ्यता 5000 साल पूरा होने जा रहा है 5000 साल का जो 5000 साल में फिर से रिपीट करता है फिर से चाहती हो जाएगा फिर से देवी देवता जाएंगे इस धरती पर ऑफिस से ढाई हजार साल बाद तो फिर से पृथ्वी चुकी है जो पहले से 3 घंटे का फिल्म आप कितनी बार रिपीट कर दो देखोगी वही सीन भाई डायलॉग करेगा ठीक है ऐसे ही यही सीन वही डायलॉग रिपीट किया जाता है और इस सृष्टि रंगमंच में रिपीट होता रहता है और बार-बार वही खेल चलता रहता है प्रकाश पाठक है आध्यात्मिक ज्ञान के आधार पर हम को इन बातों को समझा है क्या बताएं जो ओरिजिनल एकदम सत्य के नमस्कार

namaskar mitron sindhu ghati ki sabhyata aapko iske bare me bilkul sacchai aur ekdam original baat batatey hain aaj tak iske bare me shayad logo ko 0 11 isai maloom hoga sindhu ghati ki sabhyata se dhai hazaar saal pehle ki sabhyata hai aur jo bharat ki sabhyata thi bharat me pehle aaj se 5000 saal pehle bharat swarg tha jise having jannat pairadaij swargiya satayug kaha jata tha vaah swarnim yug tha uske baad me jaise jaise sone ki duniya the golden age kehlata tha vaah duniya swarg tha heere javahrat use pura laga hua ekdam har prakar se bharpur aur us jamane me us samay is dharti par rehne waale jo bhi the swarg me vaah sab devi devta khilaate the kyonki satayug swabhav kalyug ko nark kehte hain aur yah sargana dharti par hi hota hai koi akash me swarg nark nahi hota hai toh us samay me is dharti ko swarg kehte the crush ji ne bhi bola tha ki unka hue 2000 saal hue unhone bhi bola tha ki yah bharat aaj se 3000 saal pehle swarg tha aiwein tha toh unko ayurveda 2000 aur vaah bataye 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नमस्कार मित्रों सिंधु घाटी की सभ्यता आपको इसके बारे में बिल्कुल सच्चाई और एकदम ओरिजिनल बात

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