क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था सही है?...


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Sapna

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आपका प्रश्न है क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था सही है तो मैं अपने अनुभव के आधार पर बताना चाहूंगी कि जो शिक्षा की व्यवस्था है वह सिर्फ कागजों और फाइलों पर सही है वह हकीकत में देखा जाए तो शिक्षा व्यवस्था बिल्कुल सही नहीं है और जो शिक्षा की व्यवस्था जिनकी वजह से सही चलती है जैसे हमारे शिक्षक तो वह शिक्षक देखने के शिक्षक होते हैं वह में शिक्षक का बुरा नहीं होता शिक्षक में आंख जो आदर्श शिक्षक होना चाहिए ऐसे शिक्षक नहीं होते इसलिए भारत के जो शिक्षा व्यवस्था है वह व्यवस्था हकीकत में बिल्कुल नहीं है सपना शर्मा

aapka prashna hai kya bharat ki shiksha vyavastha sahi hai toh main apne anubhav ke aadhar par batana chahungi ki jo shiksha ki vyavastha hai vaah sirf kagazo aur filon par sahi hai vaah haqiqat me dekha jaaye toh shiksha vyavastha bilkul sahi nahi hai aur jo shiksha ki vyavastha jinki wajah se sahi chalti hai jaise hamare shikshak toh vaah shikshak dekhne ke shikshak hote hain vaah me shikshak ka bura nahi hota shikshak me aankh jo adarsh shikshak hona chahiye aise shikshak nahi hote isliye bharat ke jo shiksha vyavastha hai vaah vyavastha haqiqat me bilkul nahi hai sapna sharma

आपका प्रश्न है क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था सही है तो मैं अपने अनुभव के आधार पर बताना चाहू

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क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था सही है यह काफी बाजी प्रश्न है और मैं इस पर कुछ प्रकाश डालना चाहूंगा देखिए जब बात आती है शिक्षा की तो शिक्षा के विभिन्न पहलू होते आप देखिएगा किस शिक्षा हमें औपचारिक और अनौपचारिक दो रूपों से प्राप्त होती है अनौपचारिक शिक्षा जो समाज में घटित घटनाएं हैं व्यक्ति हैं धर्म है संस्थाएं हैं उनसे प्राप्त होती और औपचारिक शिक्षा जो है विद्यालय शिक्षा जिसको हम कहते हैं वह शिक्षकों से प्राप्त तो हमारे यहां जो शिक्षण व्यवस्था है मेरे ख्याल से वह सुदृढ़ नहीं है उसमें बहुत सारी कमी है अब जैसे हमारे यहां शिक्षा का एक मूल साधन मैं जहां तक देखता हूं कि विद्यालय में बुक से अवेलेबल करा दिए जाते हैं चौक और बोर्ड अवेलेबल करा दिया जाता है थोड़ा बहुत टीएलएम बल्ला बल्ला करा करके और कह दिया जाता है कि हां आप बच्चों को शिक्षित कर इतना ही होता कहीं-कहीं थोड़ी और फैसिलिटी जहां होती है वह बच्चों को प्रैक्टिकल वगैरह भी करा दिया जाता है 12 क्लास बेबी और यही हम मान लेते हैं कि हमारी जिम्मेदारी खत्म लेकिन मेरा जो मानना है मेरी जो धारणा है जो रिसर्च है अभी तक शिक्षा पर मुझे लगता है कि हम लोगों में बहुत सारी कमी है और इन कमियों को हमारे पूजनीय महात्मा गांधी ने बखूबी समझा था और उन्होंने शिक्षा में बेसिक शिक्षा में कुछ परिवर्तन किया था उन्होंने शिक्षा को रोजगार पदक बना दिया था रोजगार से जोड़ दिया था तत्कालीन जो सुविधाएं थीं जैसे खेती करना चरखा चलाना सूट काटना गुड बनाना खेती करना तरह-तरह के फूलों का फूलों का उत्पादन करना इन सब की जानकारी दो बच्चों को विद्यालय में ही दे देना चाहते थे इनकी व्यवस्था उन्होंने अपनी शिक्षा में किया और आज की सरकार इन बातों को समझ नहीं पाई उन्होंने बेसिक कांसेप्ट दिया था जिस कांसेप्ट को हम समझ नहीं पाए और जब हम देखते हैं शिक्षण व्यवस्था जो पश्चिमी कंट्री है यूरोप में अमेरिका ले लीजिए कैलेंडर लीजिए जर्मनी इटली तो हमारे यहां के शिक्षण व्यवस्था से उनकी व्यवस्था काफी सुदृढ़ है हमें यह मानना होगा कि हम उनसे काफी पिछड़े हैं हमारी शिक्षा व्यवस्था काफी पिछड़ी हुई उसका कारण है कि हमारे रक्षक वहां के शिक्षकों की तरह प्रशिक्षित नहीं है जो सुविधाएं बेसिक रिक्रूटमेंट वह के विद्यालयों को प्रवाहित किया जाता है वह हमें हमारे यहां के विद्यालयों में शिक्षकों को प्रोवाइड नहीं किया जाता नहीं सरकार जो है शिक्षा पर उनकी तरह खर्च कर पाती है तो मेरा यह मानना है कि अगर हमें अपनी शिक्षा को सुदृढ़ करना है तो एक विद्यालय को कला के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी और विज्ञान के क्षेत्र में भी संपन्न होना अति आवश्यक है इसके लिए सरकार को चाहिए कि प्रत्येक विद्यालय में यह व्यवस्था करें कि उसका टेंस जो उस में बच्चों की संख्या कम से कम 2000 3000 तक को एक बड़ा विद्यालय है उसका अप्लाई कैंपस सो जा बच्चे क्रिकेट हॉकी फुटबॉल इन सभी खेलों को खेल सके उनकी बारीकियों को सीख सके संगीत के लिए अलग व्यवस्था हो नृत्य के लिए अलग व्यवस्था हो भाषाओं को भी प्रारंभिक स्तर से ही जैसे फ्रेंच है इटालियन है जन्म जर्मनी की भाषा है बच्चे सीखे या नहीं बचपन से ही उनमें इन सभी चीजों का सभी कौशलों का विकास हो सिनेमा उद्योग आजकल मोबाइल जो है काफी चला हुआ है तो उन्हें फोटोग्राफी वीडियोग्राफी इस तरह कॉन्टेंट भी वह बना करके वीडियो शूट करके डेटिंग करके डाल इन सभी कौशल कौशल होने देना होगा ताकि बच्चे हर क्षेत्र से जब वह पढ़ कर बाहर निकले तो हर क्षेत्र से वह कुछ ना कुछ जानते हो ज्ञान अर्जित उन्होंने कर लिया हो और वह किसी ना किसी क्षेत्र से इनकम कर पाया और अपना परिवार चलाता है इससे बच्चे बेरोजगार नहीं होंगे सरकार के सामने हाथ नहीं कल आएंगे कंप्यूटर का ज्ञान अति आवश्यक है उन्हें वर्ल्ड वाइड अभी जो चल रहा है जो ट्रेन में है उन सभी चीजों की शिक्षा देनी चाहिए तो सरकार प्रत्येक विद्यालय जहां पर 200 बच्चे पैदा नहीं कर सकती इसलिए विद्यालय को ऐसा बनाया जहां दो तीन चार पांच हजार तक बच्चे पढ़े विद्यालय के पास काफी बढ़ाओ हर तरह की सुविधा हो और बच्चे के लिए लॉकर हो जा सके उनके लिए लाभ प्राप्त

kya bharat ki shiksha vyavastha sahi hai yah kaafi baazi prashna hai aur main is par kuch prakash dalna chahunga dekhiye jab baat aati hai shiksha ki toh shiksha ke vibhinn pahaloo hote aap dekhiega kis shiksha hamein aupcharik aur unaupcharik do roopon se prapt hoti hai unaupcharik shiksha jo samaj me ghatit ghatnaye hain vyakti hain dharm hai sansthayen hain unse prapt hoti aur aupcharik shiksha jo hai vidyalaya shiksha jisko hum kehte hain vaah shikshakon se prapt toh hamare yahan jo shikshan vyavastha hai mere khayal se vaah sudridh nahi hai usme bahut saari kami hai ab jaise hamare yahan shiksha ka ek mul sadhan main jaha tak dekhta hoon ki vidyalaya me book se available kara diye jaate hain chauk aur board available kara diya jata hai thoda bahut TLM balla balla kara karke aur keh diya jata hai ki haan aap baccho ko shikshit kar itna hi hota kahin kahin thodi aur facility jaha hoti hai vaah baccho ko practical vagera bhi kara diya jata hai 12 class baby aur yahi hum maan lete hain ki hamari jimmedari khatam lekin mera jo manana hai meri jo dharana hai jo research hai abhi tak shiksha par mujhe lagta hai ki hum logo me bahut saari kami hai aur in kamiyon ko hamare pujaniya mahatma gandhi ne bakhubi samjha tha aur unhone shiksha me basic shiksha me kuch parivartan kiya tha unhone shiksha ko rojgar padak bana diya tha rojgar se jod diya tha tatkalin jo suvidhaen thi jaise kheti karna charkha chalana suit kaatna good banana kheti karna tarah tarah ke fulo ka fulo ka utpadan karna in sab ki jaankari do baccho ko vidyalaya me hi de dena chahte the inki vyavastha unhone apni shiksha me kiya aur aaj ki sarkar in baaton ko samajh nahi payi unhone basic concept diya tha jis concept ko hum samajh nahi paye aur jab hum dekhte hain shikshan vyavastha jo pashchimi country hai europe me america le lijiye calendar lijiye germany italy toh hamare yahan ke shikshan vyavastha se unki vyavastha kaafi sudridh hai hamein yah manana hoga ki hum unse kaafi pichade hain hamari shiksha vyavastha kaafi pichhadi hui uska karan hai ki hamare rakshak wahan ke shikshakon ki tarah prashikshit nahi hai jo suvidhaen basic recruitment vaah ke vidhayalayo ko pravahit kiya jata hai vaah hamein hamare yahan ke vidhayalayo me shikshakon ko provide nahi kiya jata nahi sarkar jo hai shiksha par unki tarah kharch kar pati hai toh mera yah manana hai ki agar hamein apni shiksha ko sudridh karna hai toh ek vidyalaya ko kala ke kshetra me praudyogiki aur vigyan ke kshetra me bhi sampann hona ati aavashyak hai iske liye sarkar ko chahiye ki pratyek vidyalaya me yah vyavastha kare ki uska tense jo us me baccho ki sankhya kam se kam 2000 3000 tak ko ek bada vidyalaya hai uska apply campus so ja bacche cricket hockey football in sabhi khelo ko khel sake unki barikiyon ko seekh sake sangeet ke liye alag vyavastha ho nritya ke liye alag vyavastha ho bhashaon ko bhi prarambhik sthar se hi jaise french hai italian hai janam germany ki bhasha hai bacche sikhe ya nahi bachpan se hi unmen in sabhi chijon ka sabhi kaushalon ka vikas ho cinema udyog aajkal mobile jo hai kaafi chala hua hai toh unhe photography videography is tarah content bhi vaah bana karke video choot karke dating karke daal in sabhi kaushal kaushal hone dena hoga taki bacche har kshetra se jab vaah padh kar bahar nikle toh har kshetra se vaah kuch na kuch jante ho gyaan arjit unhone kar liya ho aur vaah kisi na kisi kshetra se income kar paya aur apna parivar chalata hai isse bacche berozgaar nahi honge sarkar ke saamne hath nahi kal aayenge computer ka gyaan ati aavashyak hai unhe world wide abhi jo chal raha hai jo train me hai un sabhi chijon ki shiksha deni chahiye toh sarkar pratyek vidyalaya jaha par 200 bacche paida nahi kar sakti isliye vidyalaya ko aisa banaya jaha do teen char paanch hazaar tak bacche padhe vidyalaya ke paas kaafi badhao har tarah ki suvidha ho aur bacche ke liye locker ho ja sake unke liye labh prapt

क्या भारत की शिक्षा व्यवस्था सही है यह काफी बाजी प्रश्न है और मैं इस पर कुछ प्रकाश डालना

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Kriti

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत की शिक्षा व्यवस्था से कहीं कहीं कुछ भी है और कहीं नहीं भी है क्योंकि जो वैसे तो सब कुछ अच्छा ही है लेकिन जो रिजर्वेशन वाली चीज है वह ठीक नहीं है क्योंकि कई जो स्टूडेंट जॉब करते हैं अच्छा कॉलेज उनको सिर्फ रिजर्वेशन के कारण कॉलेज नहीं मिल पाता है सरकारी नौकरी नहीं मिल पाती है तो इस चीज के लिए थोड़े से हम मतलब हर कोई जो है वह नाखुश है बाकी जो भी चीजें शिक्षा को लेकर कुछ हद तक सही है

dekhiye bharat ki shiksha vyavastha se kahin kahin kuch bhi hai aur kahin nahi bhi hai kyonki jo waise toh sab kuch accha hi hai lekin jo reservation wali cheez hai vaah theek nahi hai kyonki kai jo student job karte hain accha college unko sirf reservation ke karan college nahi mil pata hai sarkari naukri nahi mil pati hai toh is cheez ke liye thode se hum matlab har koi jo hai vaah nakhush hai baki jo bhi cheezen shiksha ko lekar kuch had tak sahi hai

देखिए भारत की शिक्षा व्यवस्था से कहीं कहीं कुछ भी है और कहीं नहीं भी है क्योंकि जो वैसे तो

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं अपने दिमाग से सोचता हूं कि मैं कुछ कर लूंगा पर करना चाहता हूं पर जब करने के लिए शुरू करता हूं तू तो मन ही नहीं लगता है कारण क्या है

main apne dimag se sochta hoon ki main kuch kar lunga par karna chahta hoon par jab karne ke liye shuru karta hoon tu toh man hi nahi lagta hai karan kya hai

मैं अपने दिमाग से सोचता हूं कि मैं कुछ कर लूंगा पर करना चाहता हूं पर जब करने के लिए शुरू क

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