भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीची नजरों से क्यों देखा जाता है?...


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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह लोगों की बीमार सोच का नतीजा है कि भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीचे नजरों से देखा जाता है| उन्हें कई तरह की भेदभाव का सामना करना पड़ता है, जैसे कि पूजा के स्थानों में प्रवेश नहीं करने दिया जाता है उन्हें| परिवार के दूसरे लोगों से दूरी बनाकर रखने को बोला जाता है| वह अपने बाल नहीं बना सकती हैं, किसी भी प्रकार का मेकअप नहीं कर सकती हैं| उन्हें खाना भी अलग खिलाया जाता है, ऐसा लगता है जैसे कि वो घर की सदस्य नहीं है| उन्हें किचन में भी प्रवेश करना वर्जित होता है| तो मेरा ऐसा मानना है कि जब भी आप कोई भी महिला मासिक धर्म में होती है तो उसके साथ इस तरह का भेदभाव करना बिल्कुल भी उचित नहीं है| पहले के टाइम से ही हमारे यहां हिंदू समाज या दूसरी समाज में भी चलता आ रहा है| और खास करके जो लोगों अन एजुकेडेट है, बिल्कुल पढ़े-लिखे नहीं है| वही इस तरह की चीजों को और बढ़ावा देते हैं| लेकिन धीरे-धीरे हम जैसे एजुकेशन से इन सब चीजों का भी प्रभाव कम होता जा रहा है|

yah logo ki bimar soch ka natija hai ki bharat mein mahilaon ko maasik dharm ke samay niche nazro se dekha jata hai unhe kai tarah ki bhedbhav ka samana karna padta hai jaise ki puja ke sthano mein pravesh nahi karne diya jata hai unhe parivar ke dusre logo se doori banakar rakhne ko bola jata hai vaah apne baal nahi bana sakti hain kisi bhi prakar ka makeup nahi kar sakti hain unhe khana bhi alag khilaya jata hai aisa lagta hai jaise ki vo ghar ki sadasya nahi hai unhe kitchen mein bhi pravesh karna varjit hota hai toh mera aisa manana hai ki jab bhi aap koi bhi mahila maasik dharm mein hoti hai toh uske saath is tarah ka bhedbhav karna bilkul bhi uchit nahi hai pehle ke time se hi hamare yahan hindu samaj ya dusri samaj mein bhi chalta aa raha hai aur khaas karke jo logo an ejukedet hai bilkul padhe likhe nahi hai wahi is tarah ki chijon ko aur badhawa dete hain lekin dhire dhire hum jaise education se in sab chijon ka bhi prabhav kam hota ja raha hai

यह लोगों की बीमार सोच का नतीजा है कि भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीचे नजरों से द

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Dr Meena Patil

Obstetrician and Gynecologist

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Bhagwan Dass

Sexologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा कुछ नहीं है समय बदल चुका है लोगों की सोच बदल चुकी है उनको कोई नहीं थी ना करो फिर लेकर आया था यह तो अपनी अपनी सोच के ऊपर डिपेंड करता है अगर कोई महिला खुद को भी ऐसा मान ले कि कोई मुझे गलत नजर से देख रहा है यानी की नजरों से देख रहा है तू ही उसकी सोच है समय में काफी बदलाव हो चुके हैं अब सब इस चीज के बारे में बात करते हैं ओपन स्विच ऑफ देते हैं सैनिटरी पैड्स यूज करते हैं तो मेरे ख्याल में अब यह चीजें जो है बातें जो हैं यह नकली करनी चाहिए

aisa kuch nahi hai samay badal chuka hai logo ki soch badal chuki hai unko koi nahi thi na karo phir lekar aaya tha yah toh apni apni soch ke upar depend karta hai agar koi mahila khud ko bhi aisa maan le ki koi mujhe galat nazar se dekh raha hai yani ki nazro se dekh raha hai tu hi uski soch hai samay mein kaafi badlav ho chuke hain ab sab is cheez ke bare mein baat karte hain open switch of dete hain sanitary pads use karte hain toh mere khayal mein ab yah cheezen jo hai batein jo hain yah nakli karni chahiye

ऐसा कुछ नहीं है समय बदल चुका है लोगों की सोच बदल चुकी है उनको कोई नहीं थी ना करो फिर लेकर

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Ashok Clinic

Sexologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीची नजरों से क्यों देखा जाता है जी ऐसा कुछ नहीं है आपकी गलतफहमी है यह तो ईश्वर का दिया हुआ तोहफा है आदमियों को अलग दिया है औरतों को अलग दिया है इसमें कोई भी फिक्र करने की बात नहीं ना ही कोई हीन भावना गाने की बात है महिलाओं को कोई भी मासिक धर्म से नीचे नहीं देखा सबको पता है अभी मासिक धर्म होता है शरीर की प्रक्रिया है मासिक धर्म नहीं होता है और शादीशुदा है तो बच्चा पेट में आता है अगर मासिक धर्म नहीं हो तो बच्चा कैसे आएगा जो कुछ अपने नियम बनाया हुआ है उसके मुताबिक है आप अपने आप को हीन भावना से बिल्कुल मत सोचिए मत देखिए ऐसा आजकल कोई नहीं छोड़ता दुनिया कहां की कहां पहुंच गई है अब कहां सोच रहे हैं

bharat mein mahilaon ko maasik dharm ke samay nichi nazro se kyon dekha jata hai ji aisa kuch nahi hai aapki galatfahamee hai yah toh ishwar ka diya hua tohfa hai adamiyo ko alag diya hai auraton ko alag diya hai isme koi bhi fikra karne ki baat nahi na hi koi heen bhavna gaane ki baat hai mahilaon ko koi bhi maasik dharm se niche nahi dekha sabko pata hai abhi maasik dharm hota hai sharir ki prakriya hai maasik dharm nahi hota hai aur shaadishuda hai toh baccha pet mein aata hai agar maasik dharm nahi ho toh baccha kaise aayega jo kuch apne niyam banaya hua hai uske mutabik hai aap apne aap ko heen bhavna se bilkul mat sochiye mat dekhiye aisa aajkal koi nahi chodta duniya kahaan ki kahaan pohch gayi hai ab kahaan soch rahe hain

भारत में महिलाओं को मासिक धर्म के समय नीची नजरों से क्यों देखा जाता है जी ऐसा कुछ नहीं है

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Nirmal Gupta

M Phil . Sanskrit & Hindi Prof

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऐसा नहीं है कि यह आराम से ही ऐसा था कि औरतों को महावारी के समय नीचे नजरों से देखा जाता था भारत में यह जो औरत को माहवारी के दिनों में अलग से रखने की प्रथा है इसके पीछे बहुत ही बड़ा साइंटिफिक वैज्ञानिक रीज़न था अगर आप अच्छे से इसको समझे क्योंकि जब लड़की को माहवारी होती है तो इतना उसके शरीर में कमजोरी आ जाती है वह किसी भी तरह का इंफेक्शन कैच कर सकती है बीमार हो सकती है ऐसा माना जाता था ऐसा है कि उस समय उसकी जो बॉडी की मिलती है वह काफी लोग हो जाती है इसलिए लड़की को उस समय पूरा आराम देने के लिए यह प्रथा शुरू कर दी गई थी की उसको ज्यादा काम नहीं करने दिया जाए उसको आराम करने दिया जाए कम से कम फिजिकल रिलेशन वह करें बिना मतलब इधर उधर नहीं था उसको भेजा जाता था और इसलिए उसे आराम से एक तरफ को बैठने के लिए आराम करने के लिए कहा जाता था और दूसरा क्योंकि इतनी ज्यादा कोई सफाई के हाइजीनिक प्रोडक्ट जो साधन नहीं होते थे तो क्योंकि ऐसा हो सकता था कि वह खुद को साफ सफाई से ना रख सके तो इसलिए उसको रसोई में या कहीं और जाने से मना किया जाता था दोनों कारण है यह तो यह कि वह ज्यादा थके नहीं दूसरा यह कि वह सकता है वह साफ सफाई ना अपनी रख सके इतने अच्छे से पानी आपको पता है बहुत ज्यादा अच्छे से अभी तक भी अवेलेबल नहीं है पानी नहीं होता था सब सफाई के साधन नहीं होते थे तो इसलिए रोका जाता था कि वह ज्यादा कामों में हाथ न लगाए और अपना आराम करें लेकिन धीरे-धीरे जीवन जो कुछ इधर उधर की और बढ़ते गए अनपढ़ता बढ़ती गई लोगों में प्रथा पर्दा प्रथा भारत में शुरू हुई तो उसमें इन लोग इन चीजों को होने वाली बहन बना दिया गया कि पता नहीं उसको क्या हुआ है उसे अलग रखना है हम उसकी अस्सलाम असली महत्व जो था उसको भूल

aisa nahi hai ki yah aaram se hi aisa tha ki auraton ko Mahavari ke samay niche nazro se dekha jata tha bharat mein yah jo aurat ko mahwari ke dino mein alag se rakhne ki pratha hai iske peeche bahut hi bada scientific vaigyanik region tha agar aap acche se isko samjhe kyonki jab ladki ko mahwari hoti hai toh itna uske sharir mein kamzori aa jaati hai vaah kisi bhi tarah ka infection catch kar sakti hai bimar ho sakti hai aisa mana jata tha aisa hai ki us samay uski jo body ki milti hai vaah kaafi log ho jaati hai isliye ladki ko us samay pura aaram dene ke liye yah pratha shuru kar di gayi thi ki usko zyada kaam nahi karne diya jaaye usko aaram karne diya jaaye kam se kam physical relation vaah kare bina matlab idhar udhar nahi tha usko bheja jata tha aur isliye use aaram se ek taraf ko baithne ke liye aaram karne ke liye kaha jata tha aur doosra kyonki itni zyada koi safaai ke haijinik product jo sadhan nahi hote the toh kyonki aisa ho sakta tha ki vaah khud ko saaf safaai se na rakh sake toh isliye usko rasoi mein ya kahin aur jaane se mana kiya jata tha dono karan hai yah toh yah ki vaah zyada thake nahi doosra yah ki vaah sakta hai vaah saaf safaai na apni rakh sake itne acche se paani aapko pata hai bahut zyada acche se abhi tak bhi available nahi hai paani nahi hota tha sab safaai ke sadhan nahi hote the toh isliye roka jata tha ki vaah zyada kaamo mein hath na lagaye aur apna aaram kare lekin dhire dhire jeevan jo kuch idhar udhar ki aur badhte gaye anapdhata badhti gayi logo mein pratha parda pratha bharat mein shuru hui toh usme in log in chijon ko hone wali behen bana diya gaya ki pata nahi usko kya hua hai use alag rakhna hai hum uski assalam asli mahatva jo tha usko bhool

ऐसा नहीं है कि यह आराम से ही ऐसा था कि औरतों को महावारी के समय नीचे नजरों से देखा जाता था

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत में लिटरेसी रेट बहुत ज्यादा नहीं है और जो पढ़े लिखे लोग नहीं है आज के समय में उनकी ही मानसिकता है ऐसी है कि अगर कोई महिला के मासिक धर्म चल रहे हैं तो वह और शुद्ध नहीं है वह इन सीरियल है लेकिन पहले के समय में और बल्कि आज के समय में भी कुछ जगहों पर ठोका मासिक धर्म के टाइम पर महिलाओं को रसोईघर में नहीं घुसने दिया जाता मंदिरों में तुम बहुत बिल्कुल बहन है उनका जाना ऐसे समय में और जो बहुत ही सादा रूढ़िवादी सोच रहे हो क्या को महिलाओं को एक अलग कमरे में ही रख देते जैसे कि उन्हें कोई बीमारी है क्या 8:00 से क्यों नहीं छोड़ेंगे उनके पास आएंगे तो उनको भी को बीमारी लग जाएगी बल्कि इसमें भी ऐसा नहीं होता तू ही लोगों की सोच है और बहुत गलत सोच रही थी अगर मासिक धर्म नहीं होंगे तो कोई भी जनरेशन आगे नहीं बढ़ेगी जनरेशन की फुल स्टॉप लग जाएगा सभी घरों में सबको ही बच्चे चाहिए और अगर वह मासिक धर्म को या पीड़ित को लेकर एसडीएम करेंगे तो यह उनकी मानसिकता ही डर जाता है समय के साथ-साथ चेंजेस आ रहे है लेकिन आज के समय में महिलाओं को अच्छे से ठीक नहीं किया जाता PH के टाइम पर जो कि बिल्कुल गलत है और यह बंद हो जाना चाहिए लोगों को महिलाओं को इसके बारे में शिक्षित किया जाना चाहिए और बल्कि आज के लोग बहुत सारे लोगों के पास तो सेंड आपकी पुस्तक खरीदने के पैसे नहीं होते तो ऐसे ही से ऐसी कोई स्कीम या कुछ ऐसा करना चाहिए कि और महिलाओं को यह सब चीजें मिल सके आसानी से ताकि जून के दिमाग में एक नगमा है वह खत्म हो जाए

dekhiye bharat mein literacy rate bahut zyada nahi hai aur jo padhe likhe log nahi hai aaj ke samay mein unki hi mansikta hai aisi hai ki agar koi mahila ke maasik dharm chal rahe hain toh vaah aur shudh nahi hai vaah in serial hai lekin pehle ke samay mein aur balki aaj ke samay mein bhi kuch jagaho par thokaa maasik dharm ke time par mahilaon ko rasoi ghar mein nahi ghusne diya jata mandiro mein tum bahut bilkul behen hai unka jana aise samay mein aur jo bahut hi saada rudhivadi soch rahe ho kya ko mahilaon ko ek alag kamre mein hi rakh dete jaise ki unhe koi bimari hai kya 8 00 se kyon nahi chodenge unke paas aayenge toh unko bhi ko bimari lag jayegi balki isme bhi aisa nahi hota tu hi logo ki soch hai aur bahut galat soch rahi thi agar maasik dharm nahi honge toh koi bhi generation aage nahi badhegi generation ki full stop lag jaega sabhi gharon mein sabko hi bacche chahiye aur agar vaah maasik dharm ko ya peedit ko lekar sdm karenge toh yah unki mansikta hi dar jata hai samay ke saath saath changes aa rahe hai lekin aaj ke samay mein mahilaon ko acche se theek nahi kiya jata PH ke time par jo ki bilkul galat hai aur yah band ho jana chahiye logo ko mahilaon ko iske bare mein shikshit kiya jana chahiye aur balki aaj ke log bahut saare logo ke paas toh send aapki pustak kharidne ke paise nahi hote toh aise hi se aisi koi scheme ya kuch aisa karna chahiye ki aur mahilaon ko yah sab cheezen mil sake aasani se taki june ke dimag mein ek nagma hai vaah khatam ho jaaye

देखिए भारत में लिटरेसी रेट बहुत ज्यादा नहीं है और जो पढ़े लिखे लोग नहीं है आज के समय में उ

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Ridhima

Mass Communications Student

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हिंदू धर्म में मीट सेटिंग वुमन को अपवित्र और खराब माना जाता है लेकिन अपवित्रता मासिक धर्म खत्म होने के साथ ही समाप्त हो जाती है इसके अनुसार उन्हें घर पर ना रहकर पास में एक झोपड़ी या कुटिया में रहना चाहिए उन्हें अलग बर्तन में खाने को मिलेगा लेकिन वह खाना खुद नहीं बनाएगी उनके नहाने और बाल कंघी करने पर पाबंदी रहती है इसके साथ ही उंहें पूजा घर में जाने की पाबंदी रहती है लेकिन साउथ के कुछ मंदिर है जिसमें पीरियड को धूमधाम से मनाया जाता है सबसे पहले हम इस बात को स्पष्ट करना चाहिए कि इस पुरानी मान्यताओं की इन बातों का हिंदू धर्म ही नहीं बल्कि अंय धर्म के लोग भी मानते हैं जहां पर महिलाओं को महावारी के समय पवित्र परिसर में प्रवेश करने की अनुमति नहीं है वही ईसाई इस्लाम यहूदी और बौद्ध धर्म के लोग भी हिंदू धर्म मुकेश अंबानी महिलाओं को महावारी के सामने के समय हिंद दृष्टि से देखते हुए उन्हें हर चीज हर किसी चीजों से दूर रखते हैं मासिक धर्म में पीरियड पहले से गंदगी करीना और शानू से जुड़ा आ रहा है और जो अभी भी कंटिन्यू हो गया कल कॉलेज का कहना है कि यह सब डर और भय से भी जुड़ा होता है जिसके कारण महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार कर आ गया है मेरे साथी की एक स्त्री जाति से द्वेष का एक संकेत है जहां एक ऐसी चीज जो श्रेणी या फेमिनिन है उसे ढूंढो डिस्गस्टिंग को घोषित घोषित कर दिया गया है वह भी सारे मेल सोसायटी के लोगों लोगों से लोगों का जो जिसका असली डोमिनियन थे अभी भी सोसाइटी में

hindu dharm mein meat setting woman ko apavitra aur kharab mana jata hai lekin apavitrata maasik dharm khatam hone ke saath hi samapt ho jaati hai iske anusaar unhe ghar par na rahkar paas mein ek jhopdi ya kuttiya mein rehna chahiye unhe alag bartan mein khane ko milega lekin vaah khana khud nahi banayegi unke nahane aur baal kanghi karne par pabandi rehti hai iske saath hi unhen puja ghar mein jaane ki pabandi rehti hai lekin south ke kuch mandir hai jisme period ko dhumadham se manaya jata hai sabse pehle hum is baat ko spasht karna chahiye ki is purani manyataon ki in baaton ka hindu dharm hi nahi balki any dharm ke log bhi maante hain jaha par mahilaon ko Mahavari ke samay pavitra parisar mein pravesh karne ki anumati nahi hai wahi isai islam yahudi aur Baudh dharm ke log bhi hindu dharm mukesh ambani mahilaon ko Mahavari ke saamne ke samay hind drishti se dekhte hue unhe har cheez har kisi chijon se dur rakhte hain maasik dharm mein period pehle se gandagi kareena aur shanu se juda aa raha hai aur jo abhi bhi continue ho gaya kal college ka kehna hai ki yah sab dar aur bhay se bhi juda hota hai jiske karan mahilaon ke saath aisa vyavhar kar aa gaya hai mere sathi ki ek stree jati se dvesh ka ek sanket hai jaha ek aisi cheez jo shreni ya feminine hai use dhundho disgusting ko ghoshit ghoshit kar diya gaya hai vaah bhi saare male sociaty ke logo logon se logo ka jo jiska asli dominiyan the abhi bhi society mein

हिंदू धर्म में मीट सेटिंग वुमन को अपवित्र और खराब माना जाता है लेकिन अपवित्रता मासिक धर्म

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Sameer Tripathy

Political Critic

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