शशि थरूर कहते हैं की UN में हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा नहीं होनी चाहिए, क्या आप इसका समर्थन करते हैं?...


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Sefali

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी मे शशि थरूर के बयान से की यू एन में हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा नहीं होनी चाहिए, इस स्टेटमेंट से सहमत नहीं हू क्यूंकि जितने भी कंट्री से यूएन में आते हैं उनकी अपनी अपनी लैंग्वेज होती है जिससे वो अपने देश को रिप्रेजेंट करते हैं और ट्रांसलेटर जो होते हैं, वो ट्रांसलेट करते हैं, अपनी भाषा में, तो भारत क्यों न हिंदी यूज़ करें इस चीज के लिए और हिंदी ऐसी लैंग्वेज है भारत की, जो की मेजोरिटी स्पीकिंग लैंग्वेज है तो मेजोरिटी ऑफ़ दी पॉपुलेशन जो भारत की ओर हिंदी से, हिंदी में ही बात करती है तो क्यों ना हिंदी यूज़ हो उस जगह पे, तो मेरे हिसाब से यह कहना ही बहुत गलत की हिंदी का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए यूएन मेंl

ji mein shashi tharur ke bayan se ki you en mein hindi bharat ki adhikarik bhasha nahi honi chahiye is statement se sahmat nahi hoon kyunki jitne bhi country se un mein aate hain unki apni apni language hoti hai jisse vo apne desh ko represent karte hain aur translator jo hote hain vo translate karte hain apni bhasha mein toh bharat kyon na hindi use karen is cheez ke liye aur hindi aisi language hai bharat ki jo ki majority speaking language hai toh majority of di population jo bharat ki aur hindi se hindi mein hi baat karti hai toh kyon na hindi use ho us jagah pe toh mere hisab se yah kehna hi bahut galat ki hindi ka istemal nahi hona chahiye un mein

जी मे शशि थरूर के बयान से की यू एन में हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा नहीं होनी चाहिए, इस स्ट

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

विकी मुझे लगता है यह शशि थरूर ने इस तरह का बयान दिया है ना टेंशन के अंदर की भारत की ऑफिशियल लैंग्वेज हिंदी है उसको यूनाइटेड नेशन की आधिकारिक भाषा नहीं होना चाहिए तो मुझे बहुत ही शर्मनाक बहुत ही बेहूदा पेट कम उनका बयान है दूसरा मैं यह कहना चाहूंगा मुझे लगता है कि जिस देश में वह व्यक्ति मिस्टर शशि थरूर रहते हैं उस देश की के बारे में स्टेशन को इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए उस देश की राष्ट्रीय भाषा के बारे इस तरह की बात नहीं करनी चाहिए आज हमारे देश की जो हिंदी भाषा है उसको विश्व पटल पर एक पहचान की जरूरत है तो मुझे लगता है कि ना टेंशन किस तरह का कोई डिसीजन लेता तो बहुत ही अच्छा होगा यूनाइटेड नेशन शशि थरूर के समर्थन करने या न करने से नहीं चलता है उनको खुद डिसाइड करना है क्यों हिंदी को ऐड करना चाहते नहीं करना चाहती

vicky mujhe lagta hai yah shashi tharur ne is tarah ka bayan diya hai na tension ke andar ki bharat ki official language hindi hai usko united nation ki adhikarik bhasha nahi hona chahiye toh mujhe bahut hi sharmnaak bahut hi behuda pet kam unka bayan hai doosra main yah kehna chahunga mujhe lagta hai ki jis desh mein vaah vyakti mister shashi tharur rehte hain us desh ki ke bare mein station ko is tarah ki baat nahi karni chahiye us desh ki rashtriya bhasha ke bare is tarah ki baat nahi karni chahiye aaj hamare desh ki jo hindi bhasha hai usko vishwa patal par ek pehchaan ki zaroorat hai toh mujhe lagta hai ki na tension kis tarah ka koi decision leta toh bahut hi accha hoga united nation shashi tharur ke samarthan karne ya na karne se nahi chalta hai unko khud decide karna hai kyon hindi ko aid karna chahte nahi karna chahti

विकी मुझे लगता है यह शशि थरूर ने इस तरह का बयान दिया है ना टेंशन के अंदर की भारत की ऑफिशिय

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Swati

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए 2016 में पार्लियामेंट सेशन के दौरान सुषमा स्वराज ने लिखा था गवर्नमेंट के एक रिप्लाई के तौर पर कि तुमको हमीनपुर एयरपोर्ट कर रही है हिंदी कोई को पीछे ले मुस्कुराने की वजह और अब जब बीजेपी मेंबर लक्ष्मण गिलुवा इन रामा देवी ने पूछा की क्या स्थिति है जा रहे हैं और हिंदी को यूएन की वोटर आई क्या मुझ बनाने के लिए तो सुषमा स्वराज ने बुलाकर 12930 हो कहां जा रही थी बोर्ड चाहिए यानी कि 2014 बोर्ड चाहिए और राधा की हिंदी को यूएन केक लैंग्वेज बनाया जा सके और हमारा देश तो सक्षम है हम तो तैयार है इतने पैसे खर्च करने को लेकिन जो छोटे घंटे से जैसे की मोरिशियस हेलो पर नहीं कर पाएंगे उन्होंने यह भी बोला कि दोस्ती समय बहुत श्री श्री रसायन जो हिंदी भारत से हूं तो यह लैंग्वेज जरूरी है इसकी रिस्पांस में थरूर शशि थरूर ने कहा कि क्या परपस है हिंदी कोई कुछ बनाने का ब्राइटनेस इन में उन्होंने बोला कि अगर कोई ऐसा इंसान या तो प्राइम मिनिस्टर मिनिस्टर तमिलनाडु से वेस्ट बंगाल से हिंदी ना भूल सकता हूं उन्होंने बोला कि हिंदी तो भारत की नेशनल लैंग्वेज ही नहीं है उसको हिंदी इंडिया में इतना दर्द नहीं मिला तो आगे जाकर क्या ही फायदा होगा मैं इस बात का समर्थन नहीं करती क्योंकि आज भारत का क्या के पहुंच चुके हैं और हमें इंटरनेशनल को पहचान मिली है उसमें माय लैंग्वेज काफी इंपॉर्टेंट है तो जरूर अगर हो सके तो हिंदी को एक हीरोइन की उतरा इस्लाम को जरूर पढ़ना चाहिए

dekhiye 2016 mein parliament session ke dauran sushma swaraj ne likha tha government ke ek reply ke taur par ki tumko haminpur airport kar rahi hai hindi koi ko peeche le muskurane ki wajah aur ab jab bjp member lakshman giluva in rama devi ne poocha ki kya sthiti hai ja rahe hain aur hindi ko un ki voter I kya mujhse banaane ke liye toh sushma swaraj ne bulakar 12930 ho kahaan ja rahi thi board chahiye yani ki 2014 board chahiye aur radha ki hindi ko un cake language banaya ja sake aur hamara desh toh saksham hai hum toh taiyar hai itne paise kharch karne ko lekin jo chhote ghante se jaise ki morishiyas hello par nahi kar payenge unhone yah bhi bola ki dosti samay bahut shri shri rasayan jo hindi bharat se hoon toh yah language zaroori hai iski response mein tharur shashi tharur ne kaha ki kya parpas hai hindi koi kuch banaane ka brightness in mein unhone bola ki agar koi aisa insaan ya toh prime minister minister tamil nadu se west bengal se hindi na bhool sakta hoon unhone bola ki hindi toh bharat ki national language hi nahi hai usko hindi india mein itna dard nahi mila toh aage jaakar kya hi fayda hoga main is baat ka samarthan nahi karti kyonki aaj bharat ka kya ke pahunch chuke hain aur hamein international ko pehchaan mili hai usmein my language kafi important hai toh zaroor agar ho sake toh hindi ko ek heroine ki utara islam ko zaroor padhna chahiye

देखिए 2016 में पार्लियामेंट सेशन के दौरान सुषमा स्वराज ने लिखा था गवर्नमेंट के एक रिप्लाई

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Amber Rai

सुनो ..सुनाओ..सीखो!

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

और नहीं भी देखें मैं ऐसा स्टेटमेंट का जो है बिल्कुल भी समर्थन नहीं करता हूं तो शशि थरूर ने कहा है कि यूएन में हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा नहीं होनी चाहिए तो यह बिल्कुल गलत है क्योंकि अगर जो नेता है अगर वह हिंदी में भाषण देना चाहते हैं यूनाइटेड नेशंस में तो वह जरुर देंगे और हिंदी हमारी मातृभाषा है हमारी मातृभूमि की भाषा है हमारी कंट्री को रिप्रेजेंट करता है हिंदी तो वह जरूर उसको कहना चाहिए और ऐसा नहीं है कि होना यूनाइटेड नेशन में हिंदी बोलने से कोई प्रॉब्लम होता है बाकी जो दूसरे कंट्री हैं वह लोग भी कोई कोई तो है अपनी लैंग्वेज में बोलते हैं और वहां पर टूटा जो रहते वाक्यों के लिए उसको ट्रांसलेट करते हैं जिनको समझ नहीं आता है तो मैं समझता कि हमारे कंट्री को रिप्रेजेंट करते समय अगर हिंदी बोला जाता है तो कोई भी इस में दिक्कत वाली बात नहीं है या शर्मसार होने वाली बात नहीं है अटल बिहारी वाजपेई ने भी जब 2000 से 2001 के समय में यूनाइटेड नेशंस में हिंदी में ही अपना जो था वह भाषण दिया था और एक कथा क्या भाषण दिया था और सब ने जो है उनकी भाषा की प्रशंसा की थी तो मैं समझता हूं कि बिल्कुल हिंदी में देना चाहिए और इस बात को जो है न खाना नहीं चाहिए

aur nahi bhi dekhen main aisa statement ka jo hai bilkul bhi samarthan nahi karta hoon toh shashi tharur ne kaha hai ki un mein hindi bharat ki adhikarik bhasha nahi honi chahiye toh yah bilkul galat hai kyonki agar jo neta hai agar vaah hindi mein bhashan dena chahte hain united nations mein toh vaah zaroor denge aur hindi hamari matribhasha hai hamari matribhoomi ki bhasha hai hamari country ko represent karta hai hindi toh vaah zaroor usko kehna chahiye aur aisa nahi hai ki hona united nation mein hindi bolne se koi problem hota hai baki jo dusre country hain vaah log bhi koi koi toh hai apni language mein bolte hain aur wahan par tuta jo rehte vaakyon ke liye usko translate karte hain jinako samajh nahi aata hai toh main samajhata ki hamare country ko represent karte samay agar hindi bola jata hai toh koi bhi is mein dikkat waali baat nahi hai ya sharmasar hone waali baat nahi hai atal bihari vajpayee ne bhi jab 2000 se 2001 ke samay mein united nations mein hindi mein hi apna jo tha vaah bhashan diya tha aur ek katha kya bhashan diya tha aur sab ne jo hai unki bhasha ki prashansa ki thi toh main samajhata hoon ki bilkul hindi mein dena chahiye aur is baat ko jo hai na khana nahi chahiye

और नहीं भी देखें मैं ऐसा स्टेटमेंट का जो है बिल्कुल भी समर्थन नहीं करता हूं तो शशि थरूर ने

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Sameer Tripathy

Political Critic

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Bhaskar Saurabh

Politics Follower | Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं शशि थरूर जी की बात से सहमत हूं उन्होंने कहा है कि यूनाइटेड नेशन में हिंदी भारत की आधिकारिक भाषा नहीं होनी चाहिए और अगर यह हो भी जाती है तो इस से कोई ऐसा बड़ा पर पसंद नहीं होगा जिससे कि भारत को फायदा हो अभी यूनाइटेड नेशंस में छह ऑफिशियल लैंग्वेज हैं लेकिन सिर्फ इंग्लिश और फ्रेंच ही वर्क इन लैंग्वेज है अगर हिंदी को यूनाइटेड नेशन में एक ऑफिशियल लैंग्वेज बनाना है तो भारत को कम से कम दो तिहाई मेजोरिटी बोर्ड की जरूरत होगी और यह पा लेना भी काफी मुश्किल होगा कि भारत का सपोर्ट बाकी देश करें और हिंदी को ऑफिशियल लैंग्वेज यूनाइटेड नेशन का बना दें हम अपने देश में भी देख सकते हैं कि सिर्फ हिंदी ही ऑफिशियल लैंग्वेज नहीं है भारत कि तू अगर अपने देश में ही हिंदी को इतना महत्व नहीं दिया जा रहा है तो यूनाइटेड नेशन में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने से क्या फायदा होगा और एक प्रॉब्लम आ गई थी जहां पर यह होता है कि अगर कोई एक्सटर्नल मिनिस्टर ऐसा आया जो कि तमिलनाडु या फिर केरल का हो और उसको हिंदी अच्छे से नहीं आती हो तो वह भारत की आधिकारिक भाषा अगर हिंदी होती है यूनाइटेड नेशन में तो उस समय उसको कई परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है

main shashi tharur ji ki baat se sahmat hoon unhone kaha hai ki united nation mein hindi bharat ki adhikarik bhasha nahi honi chahiye aur agar yah ho bhi jaati hai toh is se koi aisa bada par pasand nahi hoga jisse ki bharat ko fayda ho abhi united nations mein cheh official language hain lekin sirf english aur french hi work in language hai agar hindi ko united nation mein ek official language banana hai toh bharat ko kam se kam do tihai majority board ki zaroorat hogi aur yah paa lena bhi kafi mushkil hoga ki bharat ka support baki desh karen aur hindi ko official language united nation ka bana dein hum apne desh mein bhi dekh sakte hain ki sirf hindi hi official language nahi hai bharat ki tu agar apne desh mein hi hindi ko itna mahatva nahi diya ja raha hai toh united nation mein hindi ko adhikarik bhasha banaane se kya fayda hoga aur ek problem aa gayi thi jahan par yah hota hai ki agar koi external minister aisa aaya jo ki tamil nadu ya phir kerala ka ho aur usko hindi acche se nahi aati ho toh vaah bharat ki adhikarik bhasha agar hindi hoti hai united nation mein toh us samay usko kai pareshaaniyon ka samana karna pad sakta hai

मैं शशि थरूर जी की बात से सहमत हूं उन्होंने कहा है कि यूनाइटेड नेशन में हिंदी भारत की आधिक

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