आपके विचार से सद्गुरु व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा होता है?...


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आपका प्रश्न है कि सद्गुरु व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा होता है गुरु गुरु गुरु अर्थात अर्थात ब्राइटनेस तो गुरु अर्थात जो आपको डांटने से लाइट की तरफ अंधकार से प्रकाश की तरफ इगनोराय से विषम की तरफ से लेकर जा सके और प्रकाश की ओर वही लेकर के जा सकता है जिसका जीवन खुद ही लाइट में हो अर्थात जो खुद ही इनलाइटेंड हो अर्थात जिसके अंदर खुद ही सातों आत्मा के गुण हो ज्ञान प्रेम आनंद शक्ति शांति के सारे गुण उसके अंदर हो वही किसी को गाइड कर सकता है वहीं राह दिखा सकता है तो सबसे पहले बात तो यह है कि जो गुरु है वह ऐसा व्यक्ति होता है जिसको सबसे ज्यादा फॉर्टेंट बात होती है वह यह है कि भगवान पर बहुत ज्यादा फैट होता है हंड्रेड परसेंट उसको भगवान पर निश्चय होता है वह हम्बल होता है बहुत ज्यादा निर्माण चित होता है और नष्ट होता है इमानदार होता है शांत होता है दयालु होता है करुणा से भरा होता है सब उसके मन में सबके लिए आदर का भाव होता है वह अपनी सिद्धियों को कभी भी शो नहीं करता उसके पास सिद्धियां है इस चीज का ज्ञान उसके शिष्य को भी नहीं होता है हर था जिसके पास कौनसी सिद्धियां है उसका मन करुणा से भरा होता है वह हमेशा विजय होता है अपने संस्कारों को परिवर्तन करने में और उसका अपनी कर्म इंद्रियों पर पूरा नियंत्रण होता है कहने का मतलब यह है कि गुरु होता ही वह है जो आपको डॉक्टर से लाइट की तरफ ले कर के जा सके और ढकने से लाइट की तरह वही लेकर जा सकते जो खुद ही इस प्रोसेस से गुजरा हो जिसको खुद मालूम हो कि किस तरह से अपने आप को सेल्फ ट्रांसफॉरमेशन किया जा सकता है वही दूसरों को गाइड कर सकता है क्या इस तरह से अपने आप को ट्रांसफार्म कर सकते हो लेकिन रियालिटी यह है कि कलयुग की इस घोर रात्रि में हर व्यक्ति भले वह सन्यासी हो उदासी हो कोई भी हो गृहस्ती हो कोई भी हो हर कोई अपने आप को इंप्रूव कर रहे हैं हर कोई यह सत्य है कि किसी को किसी से अधिक ज्ञान है किसी को किसी फिल्म में अधिक या नहीं किसी को किसी फिल्म में अधिक ज्ञान है लेकिन किसी को भी पूर्ण ज्ञान नहीं है जिस व्यक्ति को हम यह समझते हैं कि गुरु है पास मैक्सिमम फुल ऑफ नॉलेज हो सकता है लेकिन उसके पास भी पूर्ण ज्ञान नहीं है पूरण चंद केवल परमात्मा में आपके पास है क्योंकि वह सदा लाइट है भगवान सदा इनलाइटेंड है गुरु हमें गाइड कर सकता है कि 10 दिन में एक बार जरूर याद रखना कि अगर गुरु के सानिध्य में रहते रहते हमें गुरु की याद आती है अर्थात उस के सानिध्य में रहते रहते हमें ईश्वर की कम लेकिन गुरु की ज्यादा याद आती है ईश्वर की कृपा कम महसूस होती है गुरु की कृपा सदा महसूस होती है तो वह सच्चा गुरु है ही नहीं यानी गुरु का जो काम था कि वह हमें पर चली और चली ईश्वर की तरफ ले करके जाए वह उस काम को अच्छे से कंप्लीट कर ही नहीं पाया क्योंकि हमें उस गुरु की याद आ रही है हमें हमेशा यह याद आ रहा है कि एक गुरु बहुत अच्छा है इसके अंदर यह गुण है तो पहली बात तो यह है और दूसरी बात यह है कि सतगुरु सतगुरु सतगुरु एनी सत्य गुरु सत्य होता है जो सदा रहता है और सदा सिर्फ ईश्वर रहता है दे के धरातल से ऊपर सदा सिर्फ ईश्वर रहता है इसलिए शिवाय प्रभु परमात्मा के कोई सद्गुरु हो ही नहीं सकता है इसलिए कांस्टेंट ही हमें अपने लिए गुरु को ढूंढने के बजाय ईश्वर से प्रार्थना करनी चाहिए हे प्रभु हे प्यारे रामेश्वर प्रभु हे करुणा से भरे हुए प्रभु मैं आपको पाना चाहता हूं मेरा दिल आपके लिए धड़कता है और मैं आपके बिना नहीं रह सकता हूं आप मुझे मार्गदर्शन दीजिए क्योंकि जब हम खुद ढूंढने के लिए निकलते हैं कि कौन ऐसा टीचर हमें मिले कौन ऐसा गुरु हमें मिले जो हमें ईश्वर से मिल आएगा तो बड़े कठिन प्रोसेस है लेकिन अगर हम ईश्वर से कहेंगे क्योंकि ईश्वर मारा पीता है रामेश्वर से कहेंगे कि हे प्रभु आपको मैं बहुत पसंद करता हूं मैं आपको बहुत चाहता हूं मैं आपसे मिलना चाहता हूं आप ही मुझे गाइड करें कि ऐसा कौन है जो मुझे आपसे मिला दे तो भगवान जिसको हमारे लिए भेजेगा हमारे ट्रांसफॉरमेशन के लिए self-improvement के लिए और पेस्ट गुरु होगा लेकिन सद्गुरु सच्चा गुरु सदा का गुरु तो शिवाय परमात्मा के हो ही नहीं सकता ओके गॉड ब्लेस यू

aapka prashna hai ki sadguru vyakti ka vyaktitva kaisa hota hai guru guru guru arthat arthat brightness toh guru arthat jo aapko dantane se light ki taraf andhakar se prakash ki taraf iganoray se visham ki taraf se lekar ja sake aur prakash ki aur wahi lekar ke ja sakta hai jiska jeevan khud hi light me ho arthat jo khud hi inalaitend ho arthat jiske andar khud hi saton aatma ke gun ho gyaan prem anand shakti shanti ke saare gun uske andar ho wahi kisi ko guide kar sakta hai wahi raah dikha sakta hai toh sabse pehle baat toh yah hai ki jo guru hai vaah aisa vyakti hota hai jisko sabse zyada fartent baat hoti hai vaah yah hai ki bhagwan par bahut zyada fat hota hai hundred percent usko bhagwan par nishchay hota hai vaah humble hota hai bahut zyada nirmaan chit hota hai aur nasht hota hai imaandaar hota hai shaant hota hai dayalu hota hai corona se bhara hota hai sab uske man me sabke liye aadar ka bhav hota hai vaah apni siddhiyon ko kabhi bhi show nahi karta uske paas siddhiyan hai is cheez ka gyaan uske shishya ko bhi nahi hota hai har tha jiske paas kaunsi siddhiyan hai uska man corona se bhara hota hai vaah hamesha vijay hota hai apne sanskaron ko parivartan karne me aur uska apni karm indriyon par pura niyantran hota hai kehne ka matlab yah hai ki guru hota hi vaah hai jo aapko doctor se light ki taraf le kar ke ja sake aur dhakane se light ki tarah wahi lekar ja sakte jo khud hi is process se gujara ho jisko khud maloom ho ki kis tarah se apne aap ko self transafarmeshan kiya ja sakta hai wahi dusro ko guide kar sakta hai kya is tarah se apne aap ko transform kar sakte ho lekin reality yah hai ki kalyug ki is ghor ratri me har vyakti bhale vaah sanyaasi ho udasi ho koi bhi ho grihasti ho koi bhi ho har koi apne aap ko improve kar rahe hain har koi yah satya hai ki kisi ko kisi se adhik gyaan hai kisi ko kisi film me adhik ya nahi kisi ko kisi film me adhik gyaan hai lekin kisi ko bhi purn gyaan nahi hai jis vyakti ko hum yah samajhte hain ki guru hai paas maximum full of knowledge ho sakta hai lekin uske paas bhi purn gyaan nahi hai puran chand keval paramatma me aapke paas hai kyonki vaah sada light hai bhagwan sada inalaitend hai guru hamein guide kar sakta hai ki 10 din me ek baar zaroor yaad rakhna ki agar guru ke sanidhya me rehte rehte hamein guru ki yaad aati hai arthat us ke sanidhya me rehte rehte hamein ishwar ki kam lekin guru ki zyada yaad aati hai ishwar ki kripa kam mehsus hoti hai guru ki kripa sada mehsus hoti hai toh vaah saccha guru hai hi nahi yani guru ka jo kaam tha ki vaah hamein par chali aur chali ishwar ki taraf le karke jaaye vaah us kaam ko acche se complete kar hi nahi paya kyonki hamein us guru ki yaad aa rahi hai hamein hamesha yah yaad aa raha hai ki ek guru bahut accha hai iske andar yah gun hai toh pehli baat toh yah hai aur dusri baat yah hai ki satguru satguru satguru any satya guru satya hota hai jo sada rehta hai aur sada sirf ishwar rehta hai de ke dharatal se upar sada sirf ishwar rehta hai isliye shivay prabhu paramatma ke koi sadguru ho hi nahi sakta hai isliye constant hi hamein apne liye guru ko dhundhne ke bajay ishwar se prarthna karni chahiye hai prabhu hai pyare rameshwar prabhu hai corona se bhare hue prabhu main aapko paana chahta hoon mera dil aapke liye dhadakta hai aur main aapke bina nahi reh sakta hoon aap mujhe margdarshan dijiye kyonki jab hum khud dhundhne ke liye nikalte hain ki kaun aisa teacher hamein mile kaun aisa guru hamein mile jo hamein ishwar se mil aayega toh bade kathin process hai lekin agar hum ishwar se kahenge kyonki ishwar mara pita hai rameshwar se kahenge ki hai prabhu aapko main bahut pasand karta hoon main aapko bahut chahta hoon main aapse milna chahta hoon aap hi mujhe guide kare ki aisa kaun hai jo mujhe aapse mila de toh bhagwan jisko hamare liye bhejega hamare transafarmeshan ke liye self improvement ke liye aur paste guru hoga lekin sadguru saccha guru sada ka guru toh shivay paramatma ke ho hi nahi sakta ok god bless you

आपका प्रश्न है कि सद्गुरु व्यक्ति का व्यक्तित्व कैसा होता है गुरु गुरु गुरु अर्थात अर्थात

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