क्या दलित विमर्श के नाम पर राजनीति हो रही है?...


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Ritesh Kashyap

Journalist, Speaker, Writer, Blogger

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आज के समय में दलितों के नाम पर जबरदस्त राजनीति की जा रही है इसमें कुछ हद तक मीडिया का भी हाथ है अगर देखा जाए तो दलितों पर राजनीति करने वाले लोग दलित समुदाय से ही ज्यादातर आ रहे हैं उदाहरण के तौर पर अगर एक आदिवासी पढ़ा लिखा हो जाता है तो वह लोग अपनी नौकरी अपने जीवन यापन में व्यस्त मशगूल हो जाते हैं तो दलितों का राजनीति करने वाले दलितों पर राजनीति करने वाले नेता गण का यही मानना है कि जितना कम से कम वह लोग पड़े रहेंगे उनके जुलूस उनकी सभाओं में उनकी भीड़ बढ़ती रहेगी इसीलिए उन्हें आगे बढ़ने नहीं दिया जा रहा है ऐसे कई दलित नेता है जो दलितों के नाम पर राजनीति करते हैं मगर हजारों हजार एक दलितों के जमीन उन्हीं के कब्जे में है

aaj ke samay me dalito ke naam par jabardast raajneeti ki ja rahi hai isme kuch had tak media ka bhi hath hai agar dekha jaaye toh dalito par raajneeti karne waale log dalit samuday se hi jyadatar aa rahe hain udaharan ke taur par agar ek adiwasi padha likha ho jata hai toh vaah log apni naukri apne jeevan yaapan me vyast mashagul ho jaate hain toh dalito ka raajneeti karne waale dalito par raajneeti karne waale neta gan ka yahi manana hai ki jitna kam se kam vaah log pade rahenge unke jhullus unki sabhaon me unki bheed badhti rahegi isliye unhe aage badhne nahi diya ja raha hai aise kai dalit neta hai jo dalito ke naam par raajneeti karte hain magar hazaro hazaar ek dalito ke jameen unhi ke kabje me hai

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Sachin Bharadwaj

Faculty - Mathematics

1:06

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देखे दोस्त मुझे लगता है कि हमारे देश में कुछ लोगों ने अपनी दादी से दलितों को ढाल बनाकर ही स्टार्ट की थी आज भी हमारे देश में ऐसे लीडर है जो केवल दलित दस्तक का स्टेज पॉलिटिक्स करते हैं जब भी हमारे देश के अंदर इलेक्शन होता है हमने कभी नहीं सुना कोई भी पॉलिटिकल लीडर डेवलपमेंट की बात कर रहा हूं ठीक है मॉडर्नाइजेशन की बात कर रहा हूं तो कभी हम लोगों ने ऐसा नहीं देखा कि रोटी कपड़ा और मकान की बात करता हूं केवल कांच की बात की जाती क्रीड की बात की जाती तो मुझे लगता है इस तरह कि जब तक रजनी तुम्हारे देश में होती रहेगी अत्याचार होता रहेगा जिस तरह से हमने अभी देखा मुंबई में पुणे के अंदर विधानसभा इलेक्शन हुआ था और जो कि मुझे लगता है कि पॉलिटिकली मोटिवेटर तो मुझे लगता है कि सबसे पहले जो दलित विमर्श के नाम पर राजनीति हो रही हो बंद होनी चाहिए और यह इंग्लिश हमको नहीं लेना है पॉलिटिकल लीडर को भी लेना है अब सब को एक साथ लेना है मुझे लगता है कि जब हम सब का स्पेस पॉलिटिक्स को अवार्ड करेंगे काश के नाम पर वोट देना बंद करेंगे तो मुझे लगता है चीजें अपने आप धीरे-धीरे सुधारना स्टार्ट हो जाएंगे

dekhe dost mujhe lagta hai ki hamare desh mein kuch logo ne apni dadi se dalito ko dhal BA nakar hi start ki thi aaj bhi hamare desh mein aise leader hai jo keval dalit dastak ka stage politics karte hai jab bhi hamare desh ke andar election hota hai humne kabhi nahi suna koi bhi political leader development ki BA at kar raha hoon theek hai madarnaijeshan ki BA at kar raha hoon toh kabhi hum logo ne aisa nahi dekha ki roti kapda aur makan ki BA at karta hoon keval kanch ki BA at ki jaati creed ki BA at ki jaati toh mujhe lagta hai is tarah ki jab tak rajni tumhare desh mein hoti rahegi atyachar hota rahega jis tarah se humne abhi dekha mumbai mein pune ke andar vidhan sabha election hua tha aur jo ki mujhe lagta hai ki politically motivator toh mujhe lagta hai ki sabse pehle jo dalit vimarsh ke naam par raajneeti ho rahi ho BA nd honi chahiye aur yah english hamko nahi lena hai political leader ko bhi lena hai ab sab ko ek saath lena hai mujhe lagta hai ki jab hum sab ka space politics ko award karenge kash ke naam par vote dena BA nd karenge toh mujhe lagta hai cheezen apne aap dhire dhire sudharna start ho jaenge

देखे दोस्त मुझे लगता है कि हमारे देश में कुछ लोगों ने अपनी दादी से दलितों को ढाल बनाकर ही

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Jyoti Mehta

Ex-History Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी हां मुझे लगता है कि राजनीति दलित विमर्श के नाम पर हो रही है यह भारत का दुर्भाग्य है की विभिन्न धर्म और संप्रदाय के लोगों का आपस में स्नेह और भाई चारे के साथ रहते हुए भी कुछ मुट्ठी भर लोग उनकी एकता और अखंडता को अपने स्वार्थ के लिए छिन्न-भिन्न कर देते हैं सत्ता पक्ष और विपक्ष की नजरों में दलित वोट का पटना भविष्य की राजनीति को खतरे में डाल ले जाता है एक तरफ भारत के सर्वोच्च पद पर दलित है दूसरी तरफ देश में हो रही दलित अत्याचार की खबरें जनता को परेशान और विचलित कर देती है और देश के कई प्रांतों में दलितों की राजनीतिक मूवमेंट भी दिखाई दे रहा है इस से साफ जाहिर है कि दलितों की हालत भले ही नहीं सुधरी हो लेकिन उनको लेकर वर्तमान राजनीतिक चरम पर है

ji haan mujhe lagta hai ki raajneeti dalit vimarsh ke naam par ho rahi hai yah bharat ka durbhagya hai ki vibhinn dharm aur sampraday ke logo ka aapas mein sneh aur bhai chaare ke saath rehte hue bhi kuch mutthi bhar log unki ekta aur akhandata ko apne swarth ke liye chinn bhinn kar dete hai satta paksh aur vipaksh ki nazro mein dalit vote ka patna bhavishya ki raajneeti ko khatre mein daal le jata hai ek taraf bharat ke sarvoch pad par dalit hai dusri taraf desh mein ho rahi dalit atyachar ki khabren janta ko pareshan aur vichalit kar deti hai aur desh ke kai praaton mein dalito ki raajnitik movement bhi dikhai de raha hai is se saaf jaahir hai ki dalito ki halat bhale hi nahi sudhari ho lekin unko lekar vartaman raajnitik charam par hai

जी हां मुझे लगता है कि राजनीति दलित विमर्श के नाम पर हो रही है यह भारत का दुर्भाग्य है की

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