कई युवा अधिकारी IAS, IPS या IRS में इतने निराश क्यों हो जाते हैं कि वे उस सेवा से इस्तीफा दे देते हैं जो उन्हें इतनी मेहनत के बाद मिली थी?...


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P Narahari (IAS)

IAS Officer-2001Batch-MP Cadre

1:58
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जो युवा अधिकारी आईएएस आईपीएस एआईआरएस से इस्तीफा देते हैं ऐसे लोगों की तादाद बहुत कम है मैं समझता हूं कि यह एक परसेंट से भी बहुत नीचे हैं जो युवा आईएएस जैसे प्रीमीयर सर्विस में आते हैं निश्चित ही बहुत ही योगी होते हैं और कुछ करने की ललक के साथ में ऐसे सर्विसेस में आते हैं परंतु जो लोग सर्विस छोड़ कर जाते हैं वह या तो व्यवस्था में ही मर्डर नहीं पाते हैं या फिर उन्होंने सेवा भाव से ऐसे प्रशासनिक सेवा में जो आए हैं सेवा भाव छोड़कर कुछ और चीजें देखकर इस सर्विस में जो आए हैं वह एहसास करते हैं कि वह गलत सेवा में आए हैं या फिर गलत कह दिया जवाब में आए हैं ऐसे में वह निराश भोकर कुछ हद तक सेवा छोड़कर चले जाते हैं परंतु अधिकांश थाना अधिकारी युवा अधिकारी जो इस प्रशासनिक सेवा में आते हैं वह सर्विस में रहते हैं हमें यह समझना बहुत जरूरी है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा भारतीय पुलिस सेवा जैसे सेवाएं यह सर्विस ओरिएंटेड है हमें सेवा करने के लिए बहुत अच्छा मौका देते हैं ऐसे में यह सेवाएं निश्चित ही बहुत ही उत्कृष्ट श्रेणी के हैं और कम उम्र में जिलों को संभालना तत्पश्चात शासन-प्रशासन के लिए पॉलिसी डिसीजन से लेना इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य करते हैं ऐसे में निश्चित ही यह बहुत ही महत्वपूर्ण है और अधिक से अधिक युवा वर्ग को ऐसे सेवाओं में आना चाहिए काम करना चाहिए शुभकामनाएं

jo yuva adhikari IAS ips AIRS se istifa dete hain aise logo ki tadad bahut kam hai samajhata hoon ki yeh ek percent se bhi bahut niche hain jo yuva IAS jaise primiyar service mein aate hain nishchit hi bahut hi yogi hote hain aur kuch karne ki lalak ke saath mein aise services mein aate hain parantu jo log service chod kar jaate hain wah ya toh vyavastha mein hi murder nahi paate hain ya phir unhone seva bhav se aise prashasnik seva mein jo aaye hain seva bhav chhodkar kuch aur cheezen dekhkar is service mein jo aaye hain wah ehsaas karte hain ki wah galat seva mein aaye hain ya phir galat keh diya jawab mein aaye hain aise mein wah nirash bhokar kuch had tak seva chhodkar chale jaate hain parantu adhikaansh thana adhikari yuva adhikari jo is prashasnik seva mein aate hain wah service mein rehte hain humein yeh samajhna bahut zaroori hai ki bharatiya prashasnik seva bharatiya police seva jaise sevayen yeh service oriented hai humein seva karne ke liye bahut accha mauka dete hain aise mein yeh sevayen nishchit hi bahut hi utkrisht shreni ke hain aur kam umar mein jilon ko sambhaalna tatpashchat shasan prashasan ke liye policy decision se lena ismein atyant mahatvapurna karya karte hain aise mein nishchit hi yeh bahut hi mahatvapurna hai aur adhik se adhik yuva varg ko aise sewaon mein aana chahiye kaam karna chahiye subhkamnaayain

जो युवा अधिकारी आईएएस आईपीएस एआईआरएस से इस्तीफा देते हैं ऐसे लोगों की तादाद बहुत कम है मैं

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Manoranjan Behera (IRS)

IRS (INCOME TAX) -2018

1:59

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Vinod Kumar Pandey

Life Coach | Career Counsellor ::Relationship Counsellor :: Parenting Counsellor

3:35
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपके प्रश्न के उत्तर में मैं यही कहना चाहूंगा कि ज्यादातर लोग जब अपने कैरियर का चुनाव करते हैं तो वह अपने व्यक्तित्व को इग्नोर करते हैं अपनी पर्सनालिटी को अपनी क्षमता को और अपनी प्रतिभा को इग्नोर करके कैरियर का चुनाव कहीं ना कहीं बाहरी आकर्षण को देखकर करते हैं जिसका उनको बाद में बहुत नुकसान उठाना पड़ता है इसीलिए मेरा यही कहना होता है कि जब भी अपने जीवन के कैरियर का चुनाव करें तो हमेशा अपने व्यक्तित्व को सबसे ऊपर रखकर देखने की कोशिश करें कि क्या वह जॉब जवाब करने की सोच रहे हैं वह आपके हिसाब का है आपका व्यक्तित्व वहां दिलाओ करेगा उसके लिए सूट करेगा या नहीं करेगा उसके बाद ही उस कैरियर का चुनाव करें ज्यादातर लोग जो उस कैरियर का आकर्षण होता है उसको देखकर चूस कर लेते हैं जैसे उसमें पावर कितना है उसमें पैसा कितना उसमें इज्जत कितना उसमें सम्मान कितना है लेकिन जब हम वह बन जाते हैं तब कहीं ना कहीं वहां पर हमारा व्यक्तित्व घुटन महसूस करता है और तब वहां पर हमें दिक्कत होनी शुरु होती है इसलिए ध्यान रहे जब भी अपने कैरियर जॉब का चुनाव करें तो आप अपने आप को प्राथमिकता के आधार पर अगर करने की कोशिश करेंगे तो वह जगह वह लक्ष्या वह कार्य आपको कभी भी तनाव नहीं देगा आपको किसी प्रकार की परेशानी नहीं देगी ज्यादातर लोग जो कैरियर का चुनाव आईएएस पीसीएस का अपने आकर्षण के आधार पर कर लेते हैं वहां जाकर के कहीं ना कहीं उनका व्यक्तित्व उनकी सोच समझ उस जॉब के हिसाब से बहुत अच्छी नहीं होती फिर वह कहीं ना कहीं उसके अंदर घुटन महसूस करते हैं उनको विचारों की स्वतंत्रता नहीं होती बहुत सारी ऐसी चीजें होती है जो उस जाम में जाकर के उन लोगों को महसूस होता है और तब वहां पर वह हर सेकेंड घुटन महसूस होती है इसीलिए वह कहीं ना कहीं उस जॉब को छोड़ देते हैं क्योंकि ध्यान रहे आकर्षण केवल अभी तक आपको अच्छा लगता है जब तक वह चीजें आपको मिलती नहीं है लेकिन जब वह चीज आपको मिल जाती है तब उससे आपको अनुभव कैसा हो रहा है अच्छा या बुरा हो ज्यादा मैटर करने लगता है यही चीज इस जॉब के साथ होता है ज्यादातर लोग का व्यक्तित्व कुछ अलग प्रकार का होता है स्वतंत्रता का नेचर होता है लेकिन जब वह इस जॉब में जाते हैं तब उन्हें महसूस होता है कि यहां उनको पोस्ट बहुत अच्छी मिल गई है लेकिन उनको कई लोगों के अंडर में बहुत सारे दबाव के नीचे कार्य करना पड़ता है और जो स्वतंत्रप्रभात के लोग होते हैं वह कहीं ना कहीं दबाव में कार्य करने में बहुत असमर्थ होते हैं फिर उनको बहुत दिक्कत का सामना उठाना पड़ता है बहुत परेशानी होती है और इसीलिए कहीं ना कहीं वह तंग आकर के उस जॉब को छोड़ देते हैं ध्यान रखेंगे कि कुछ लोग अपने उस दवाओं को तबाह को झेल लेते हैं और नौकरी करते हैं जिंदगी गुजार देते हैं लेकिन जो उस दबाव को स्तनों को नहीं खेल पाता वह कहीं ना कहीं उस जॉब को छोड़ देता है इसीलिए मेरा यही कहना है कि जब भी आप अपने जीवन में अपने लक्ष्य तय करें तो उस जो भी लक्ष्य है जो नौकरी है जो जॉब है उसके नीचे को अपने व्यक्तित्व के साथ मैच करने की कोशिश करिए कि क्या मैं उस जॉब में जा कर के खुश रहो पाऊंगा और उसके फायदे और नुकसान दोनों देख कर के ही निर्णय लेने की कोशिश करें और जीवन में आने वाले कभी परेशानी से बच सकें मेरे शुभकामनाएं आपके लिए धन्यवाद

aapke prashna ke uttar mein main yahi kehna chahunga ki jyadatar log jab apne carrier ka chunav karte hain toh vaah apne vyaktitva ko ignore karte hain apni personality ko apni kshamta ko aur apni pratibha ko ignore karke carrier ka chunav kahin na kahin bahri aakarshan ko dekhkar karte hain jiska unko baad mein bahut nuksan uthana padta hai isliye mera yahi kehna hota hai ki jab bhi apne jeevan ke carrier ka chunav kare toh hamesha apne vyaktitva ko sabse upar rakhakar dekhne ki koshish kare ki kya vaah job jawab karne ki soch rahe hain vaah aapke hisab ka hai aapka vyaktitva wahan dilao karega uske liye suit karega ya nahi karega uske baad hi us carrier ka chunav kare jyadatar log jo us carrier ka aakarshan hota hai usko dekhkar chus kar lete hain jaise usme power kitna hai usme paisa kitna usme izzat kitna usme sammaan kitna hai lekin jab hum vaah ban jaate hain tab kahin na kahin wahan par hamara vyaktitva ghutan mehsus karta hai aur tab wahan par hamein dikkat honi shuru hoti hai isliye dhyan rahe jab bhi apne carrier job ka chunav kare toh aap apne aap ko prathamikta ke aadhar par agar karne ki koshish karenge toh vaah jagah vaah lakshya vaah karya aapko kabhi bhi tanaav nahi dega aapko kisi prakar ki pareshani nahi degi jyadatar log jo carrier ka chunav IAS pcs ka apne aakarshan ke aadhar par kar lete hain wahan jaakar ke kahin na kahin unka vyaktitva unki soch samajh us job ke hisab se bahut achi nahi hoti phir vaah kahin na kahin uske andar ghutan mehsus karte hain unko vicharon ki swatantrata nahi hoti bahut saree aisi cheezen hoti hai jo us jam mein jaakar ke un logo ko mehsus hota hai aur tab wahan par vaah har second ghutan mehsus hoti hai isliye vaah kahin na kahin us job ko chod dete hain kyonki dhyan rahe aakarshan keval abhi tak aapko accha lagta hai jab tak vaah cheezen aapko milti nahi hai lekin jab vaah cheez aapko mil jaati hai tab usse aapko anubhav kaisa ho raha hai accha ya bura ho zyada matter karne lagta hai yahi cheez is job ke saath hota hai jyadatar log ka vyaktitva kuch alag prakar ka hota hai swatantrata ka nature hota hai lekin jab vaah is job mein jaate hain tab unhe mehsus hota hai ki yahan unko post bahut achi mil gayi hai lekin unko kai logo ke under mein bahut saare dabaav ke niche karya karna padta hai aur jo swatantraprabhat ke log hote hain vaah kahin na kahin dabaav mein karya karne mein bahut asamarth hote hain phir unko bahut dikkat ka samana uthana padta hai bahut pareshani hoti hai aur isliye kahin na kahin vaah tang aakar ke us job ko chod dete hain dhyan rakhenge ki kuch log apne us dawaon ko tabah ko jhel lete hain aur naukri karte hain zindagi gujar dete hain lekin jo us dabaav ko stanon ko nahi khel pata vaah kahin na kahin us job ko chod deta hai isliye mera yahi kehna hai ki jab bhi aap apne jeevan mein apne lakshya tay kare toh us jo bhi lakshya hai jo naukri hai jo job hai uske niche ko apne vyaktitva ke saath match karne ki koshish kariye ki kya main us job mein ja kar ke khush raho paunga aur uske fayde aur nuksan dono dekh kar ke hi nirnay lene ki koshish kare aur jeevan mein aane waale kabhi pareshani se bach sake mere subhkamnaayain aapke liye dhanyavad

आपके प्रश्न के उत्तर में मैं यही कहना चाहूंगा कि ज्यादातर लोग जब अपने कैरियर का चुनाव करते

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Kumar Raghav

Career Counsellor Cum Motivational Speaker

0:42
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आपका सवाल जो है लाजमी है कई युवा अधिकारी आईएसआईपी अभी आया रस इतने निराश क्यों हो जाते हैं कि मैं उस सेवा से इस्तीफा दे देते हैं जो उन्हें इतनी मेहनत के बाद मिलती है तो मैं आपसे बस इतना ही कहना चाहूंगा कि जितनी शिद्दत से आप जितनी मेहनत से जितना आपको पहले जिज्ञासु रहते हैं कि हम को किसी तरह कितना भी मेहनत करना पड़े लेकिन मुझे यूपीएससी पास करना है तो उसी हिसाब से अपने काम के प्रति भी समर्थन आपको रहना पड़ेगा यह एक सेवा है यह देश की सेवा राष्ट्र की सेवा है तो मुझे जहां तक लगता है कि अगर आप अच्छे से काम करेंगे निष्ठा पूर्वक काम करेंगे तो आपको यह नौबत नहीं आएगी

aapka sawaal jo hai lajmi hai kai yuva adhikari ISIP abhi aaya ras itne nirash kyon ho jaate hain ki main us seva se istifa de dete hain jo unhe itni mehnat ke baad milti hai toh main aapse bus itna hi kehna chahunga ki jitni shiddat se aap jitni mehnat se jitna aapko pehle jigyasu rehte hain ki hum ko kisi tarah kitna bhi mehnat karna pade lekin mujhe upsc paas karna hai toh usi hisab se apne kaam ke prati bhi samarthan aapko rehna padega yah ek seva hai yah desh ki seva rashtra ki seva hai toh mujhe jaha tak lagta hai ki agar aap acche se kaam karenge nishtha purvak kaam karenge toh aapko yah naubat nahi aayegi

आपका सवाल जो है लाजमी है कई युवा अधिकारी आईएसआईपी अभी आया रस इतने निराश क्यों हो जाते हैं

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Dr. Rajesh Raval

Director, Rainbow Academy

2:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो मित्र आपने पूछा है कई युवा अधिकारी आईएएस आईपीएस और आईएएस में इतने निराश क्यों हो जाते हैं कि वह उस सेवा से इस्तीफा दे देते जो इतनी मेहनत के बाद में देखिए यह इस प्रकार की जॉब आईएएस आईपीएस और आईएएस इंडिया की टॉप लेवल की जॉब मानी जाती है उसको पाने के लिए बहुत लोग प्रयत्न करते हैं लेकिन इनमें से कुछ गिने-चुने लोगों को ये पोस्ट मिल पाती है उसकी वजह है उनके आईक्यू लेवल आइक्यू लेवल और उनका नॉलेज तो यह सब कुछ क्लियर करने के बाद ही मिल पाती है इसकी जॉब फिर जब सिस्टम के काम शुरू सिस्टम के साथ काम शुरू करते हैं तो उस सिस्टम में उनका आइक्यू लेवल बैठता नहीं है या तो उस सिस्टम के साथ हूं फॉलो नहीं कर पाता करना नहीं चाहते हैं यह सबसे बड़ी वजह होती है कि उन्होंने जो अपना एक लेवल दिखाया था एग्जाम के टाइम या अपना नॉलेज दिखाया था वह कुछ कर दिखाने के लिए दिखाया था हर एक युवा के मन में होता है कि वह देश के लिए कुछ कर दिखने पावर का इस्तेमाल करें लेकिन उस पावर को सिस्टम में जब इस्तेमाल करना शुरू करते हैं तो सिस्टम में कुछ अड़चन आती है जिसकी वजह से वह अपने फोन का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं जैसे आपने देखा होगा जम्मू कश्मीर में अभी अभी आईपीएस ऑफिसर ने इस्तीफा दिया आईएएस अफसर को तो जानते ही हैं जो इस्तीफा दे या तो पॉलिटिक्स ज्वाइन करते हैं या किसी और सामाजिक कार्य में लग जाते हैं उसी तरह आईपीएस लिए अपने सिस्टम से तंग आकर करते हैं कहना नहीं चाहता हूं कि सिस्टम गलत है लेकिन वह उसके साथ अपना तालमेल को सेट नहीं कर पाते यही होती है उनको तो पता ही है कि वह तो कुछ भी कर ले देने वाले लोग कुछ अलग किसम के होते हैं और उनका एक ही बहुत ऊंचा होता है

hello mitra aapne puchha hai kai yuva adhikari IAS ips aur IAS mein itne nirash kyon ho jaate hain ki wah us seva se istifa de dete jo itni mehnat ke baad mein dekhie yeh is prakar ki job IAS ips aur IAS india ki top level ki job maani jati hai usko pane ke liye bahut log prayatn karte hain lekin inmein se kuch gine chune logo ko ye post mil pati hai uski wajah hai unke IQ level IQ level aur unka knowledge toh yeh sab kuch clear karne ke baad hi mil pati hai iski job phir jab system ke kaam shuru system ke saath kaam shuru karte hain toh us system mein unka IQ level baithta nahi hai ya toh us system ke saath hoon follow nahi kar pata karna nahi chahte hain yeh sabse badi wajah hoti hai ki unhone jo apna ek level dikhaya tha exam ke time ya apna knowledge dikhaya tha wah kuch kar dikhane ke liye dikhaya tha har ek yuva ke man mein hota hai ki wah desh ke liye kuch kar dikhne power ka istemal karein lekin us power ko system mein jab istemal karna shuru karte hain toh system mein kuch adachan aati hai jiski wajah se wah apne phone ka istemal nahi kar paate hain jaise aapne dekha hoga jammu kashmir mein abhi abhi ips officer ne istifa diya IAS officer ko toh jante hi hain jo istifa de ya toh politics join karte hain ya kisi aur samajik karya mein lag jaate hain usi tarah ips liye apne system se tang aakar karte hain kehna nahi chahta hoon ki system galat hai lekin wah uske saath apna talmel ko set nahi kar paate yahi hoti hai unko toh pata hi hai ki wah toh kuch bhi kar le dene wale log kuch alag kisam ke hote hain aur unka ek hi bahut uncha hota hai

हेलो मित्र आपने पूछा है कई युवा अधिकारी आईएएस आईपीएस और आईएएस में इतने निराश क्यों हो जात

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Anil Ramola

Yoga Instructor | Engineer

1:26
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हमें कुछ समय से लिखा है कि हमारे बहुत से युवा आईएएस और आईपीएस आईएएस बनने के बाद भी कहा है कि एक आईएस है वो पूरी जिंदगी पढ़ाई करता है अच्छे मार्क्स आता है और एक बहुत अच्छे हैं पद पर निर्विरोध होता है वह हमारी जो राजनीतिक होते सांसदों से उनसे मिलना क्यों नहीं मिल पाता बल्कि उल्टा होता है उनके ऊपर जो ऑर्डर देने का कार्य करता है वहां का सांसद होता है एमएलए मंत्री जिसने कभी ढंग से पढ़ाई नहीं की कभी कुछ नहीं किया और वह उसको ऑर्डर देता है कि वो उसके ऑर्डर को मान पाए तो इस वजह से कुछ लोग निराश होकर आए थे और दूसरे के लेते हैं जिनमें कि मैं आज हमारे राजनीतिक नेता होते हैं वह किस तरीके से हमारे जो अधिकारी हैं उन पर वस्तु दुखी करते हैं उनके नीचा दिखाने का प्रयास करते हैं ऐसी ऐसी फीलिंग से लोगों ने बताइए अपनी टीम में कैसा फील ज्यादा इतना सब कुछ करने के बाद एक जाहिल गवार जो नेता होता है उसकी सुननी पड़ती है तो ऐसी नौकरी है क्या फायदा तो इसलिए ऐसे किसी समय देखने को मिलते हैं धन्यवाद

hamein kuch samay se likha hai ki hamare bahut se yuva IAS aur ips IAS banne ke baad bhi kaha hai ki ek ias hai vo puri zindagi padhai karta hai acche marks aata hai aur ek bahut acche hain pad par nirvirodh hota hai vaah hamari jo raajnitik hote sansadon se unse milna kyon nahi mil pata balki ulta hota hai unke upar jo order dene ka karya karta hai wahan ka saansad hota hai mla mantri jisne kabhi dhang se padhai nahi ki kabhi kuch nahi kiya aur vaah usko order deta hai ki vo uske order ko maan paye toh is wajah se kuch log nirash hokar aaye the aur dusre ke lete hain jinmein ki main aaj hamare raajnitik neta hote hain vaah kis tarike se hamare jo adhikari hain un par vastu dukhi karte hain unke nicha dikhane ka prayas karte hain aisi aisi feeling se logo ne bataye apni team mein kaisa feel zyada itna sab kuch karne ke baad ek jaahil gavar jo neta hota hai uski sunnani padti hai toh aisi naukri hai kya fayda toh isliye aise kisi samay dekhne ko milte hain dhanyavad

हमें कुछ समय से लिखा है कि हमारे बहुत से युवा आईएएस और आईपीएस आईएएस बनने के बाद भी कहा है

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