वास्तविक अवसाद के बीच अंतर क्या है और ज़्यादा तर लोग क्या सोचते हैं कि उनको ऐसी कोई बीमारी है?...


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Sanika Dharaskar

Clinical Psychologist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

इंसान बहुत रोता रहता है किधर मन नहीं लगता है काम भी उसका फोकस नहीं होता है कि मुझे काम करना है बोलो नहीं आते अकेले अकेले रहना पसंद करते हैं बहुत काम करने से वजन कम करने की वजह से होता होती है

insaan bahut rota rehta hai kidhar man nahi lagta hai kaam bhi uska focus nahi hota hai ki mujhe kaam karna hai bolo nahi aate akele akele rehna pasand karte hain bahut kaam karne se wajan kam karne ki wajah se hota hoti hai

इंसान बहुत रोता रहता है किधर मन नहीं लगता है काम भी उसका फोकस नहीं होता है कि मुझे काम करन

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Dr Monalisa Ghosh

Psychologist, Counselling, Psychologist, Healer

1:36

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

वास्तविक अवसाद के सवाल है कि क्या होता है मुझे लगता है कि शायद आप चीजों को डिप्रेशन के साथ शायद आप कनेक्ट करना चाहते कि डिप्रेशन जिसे अवतार कहते हैं और हम आम जीवन में भी कई बार दुखी होते हैं आप परेशान होते हैं किसी काम में मन नहीं लगता है और अब साथ में भी सारे लक्षण होते हैं अंतर क्या होता है कि हम कभी कभी दुखी हो जाते अपने सामान्य जीवन में वापस आ जाते हैं 1 महीने से ज्यादा की होती है एक महीने में खुशी मिलती थी या नहीं मिलती थी आप अपने दैनिक काम से जब बिल्कुल लोन लेते हैं हर चीज से विमुख हो जाते किसी चीज में इंटरेस्ट नहीं लेते हैं और लंबे समय तक दुखी हो सकते हैं कोई ऐसी कोई ऐसी दुर्लभ बीमारी है बीमारी नहीं है मानसिक बीमारियों के श्रेणी में आती है और मानसिक बीमारियों के भी कई तरह के कई तरह के प्रकार हैं उसमें भी बहुत गंभीर नहीं होते हैं अगर इन स्थितियों को नजरअंदाज किया जाए लंबे समय तक दूसरी स्थिति गंभीर हो सकते हैं

vastavik avsad ke sawaal hai ki kya hota hai mujhe lagta hai ki shayad aap chijon ko depression ke saath shayad aap connect karna chahte ki depression jise avatar kehte hain aur hum aam jeevan mein bhi kai baar dukhi hote hain aap pareshan hote hain kisi kaam mein man nahi lagta hai aur ab saath mein bhi saare lakshan hote hain antar kya hota hai ki hum kabhi kabhi dukhi ho jaate apne samanya jeevan mein wapas aa jaate hain 1 mahine se zyada ki hoti hai ek mahine mein khushi milti thi ya nahi milti thi aap apne dainik kaam se jab bilkul loan lete hain har cheez se vimukh ho jaate kisi cheez mein interest nahi lete hain aur lambe samay tak dukhi ho sakte hain koi aisi koi aisi durlabh bimari hai bimari nahi hai mansik bimariyon ke shreni mein aati hai aur mansik bimariyon ke bhi kai tarah ke kai tarah ke prakar hain usme bhi bahut gambhir nahi hote hain agar in sthitiyo ko najarandaj kiya jaaye lambe samay tak dusri sthiti gambhir ho sakte hain

वास्तविक अवसाद के सवाल है कि क्या होता है मुझे लगता है कि शायद आप चीजों को डिप्रेशन के साथ

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