एक मनोवैज्ञानिक के रूप में, आपको सबसे ज़्यादा परेशान करने वाले व्यक्ति कौन से मिले हैं?...


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Kankan Sarmah

Psychologist

1:20

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ऑल डीजे सेजर डिस्टर्बिग जितने सारे डिजीज होता है जो भी बीमारियां होता है कितने सारे लोग आते हैं मेरे पास सोया दूसरे के पास क्यों जाएंगे क्योंकि आपके पास प्रॉब्लम है असली सेना के पास नहीं है उसका साधन नहीं है अगर है भी तो आपके हिसाब से कैसे नेताओं के वह आपके पास नहीं है तो बीमार तो दिखे दीवाने कोई छोटा या कोई बड़ा कुछ रहता नहीं है डिमांड ऐसा है कि कोई नहीं काम कुछ प्रॉब्लम सपोर्ट नहीं कर पाते हो आपने आपसे व्हाट्सएप पर नहीं आ सकते हो वहां से अब निकल नहीं सकते हो डीजे होता है लेकिन उसका कितना मतलब गहराई पर कितना डेट पर गए हैं वह जानना बहुत जरूरी होता है एक बच्चे के लिए मान ली देख साल साल के बच्चे जो अटेंशन अटेंशन डिफिसिट बेटी पर तो उसके लिए बहुत बड़ा डिजीज है इसीलिए थोड़ा पेरेंट्स और फिर 1 डिग्री से जैसे कि फिजिक्स एंड जेनेलिया डस में होते तो वह भी है दोनों में कितना देर आए पर है उसका इंपल्सिविटी कितना है वह देखना जल्दी हो सके

all DJ sejar distarbig jitne saare disease hota hai jo bhi bimariyan hota hai kitne saare log aate hain mere paas soya dusre ke paas kyon jaenge kyonki aapke paas problem hai asli sena ke paas nahi hai uska sadhan nahi hai agar hai bhi toh aapke hisab se kaise netaon ke vaah aapke paas nahi hai toh bimar toh dikhe deewane koi chota ya koi bada kuch rehta nahi hai demand aisa hai ki koi nahi kaam kuch problem support nahi kar paate ho aapne aapse whatsapp par nahi aa sakte ho wahan se ab nikal nahi sakte ho DJ hota hai lekin uska kitna matlab gehrai par kitna date par gaye hain vaah janana bahut zaroori hota hai ek bacche ke liye maan li dekh saal saal ke bacche jo attention attention difisit beti par toh uske liye bahut bada disease hai isliye thoda parents aur phir 1 degree se jaise ki physics and jeneliya ds mein hote toh vaah bhi hai dono mein kitna der aaye par hai uska impalsiviti kitna hai vaah dekhna jaldi ho sake

ऑल डीजे सेजर डिस्टर्बिग जितने सारे डिजीज होता है जो भी बीमारियां होता है कितने सारे लोग आत

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Dr.Nisha Joshi

Psychologist

3:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक मनोवैज्ञानिक के रूप में आपको सबसे ज्यादा परेशान करने वाले व्यक्ति कौन थे मिले थे सबसे ज्यादा परेशान करने वाले व्यक्तियों में से कोई नहीं मिलता है जब कोई अपनी प्रॉब्लम लेकर आता है या तो कोई प्रॉब्लम नहीं लेकिन उनका रिलेटिव उन लोग दूसरे इंसान को लेकर आता है और तब हम समझते हैं कि यह मानसिक रोगी है इसको प्रॉब्लम प्रॉब्लम का सलूशन करते करते हो कभी-कभी परेशान कभी-कभी हम भी तो इंसान है ना कभी-कभी हम भी परेशान उस टाइम पर हो जाते हैं जबकि कोई आपकी जो पैनिक पेशेंट है ठीक है क्लाइंट के लिए बहुत ज्यादा परेशान है अपने ऊपर भी हावी होते कुछ चीजें लेकर मरने के लिए भी आ जाते हैं जब हम हॉस्पिटल में थे 323 341 34 उस टाइम पर दवाई लेने घर के पास आता था साइकिल के पास और हमारे पास काउंसलिंग करवाता था और उस दिन हमने काउंसलिंग उसका किया तो पता नहीं बचाना को हाय पर हो गया तो जो चीज थी वहां ऑफिस में था उसने पकड़ कर मारने की कोशिश की थी तो उस दिन वह भी हुआ लेकिन पीछे से उसकी बीवी ने वह लैपटॉप ले लिए थे और वह गुस्से में आकर दरवाजे खिड़की दरवाजा बंद करके बाहर चला गया लेकिन उनको पकड़ ली थी फिर हम उनको अंदर विभाग में काफी समय और उसके बाद दूसरे डिपार्टमेंट मीटिंग है तो उसको काट लो सीधा दाता उसे वैसा ही करता है उसमें भी संभालना पड़ता है और कोई नहीं कोई प्रॉब्लम हो रही है इसलिए सो रही है करना हमारा काम रहता है फिल्म में आगे बढ़ते जाते हैं अनुभव होता है

ek manovaigyanik ke roop mein aapko sabse zyada pareshan karne waale vyakti kaun the mile the sabse zyada pareshan karne waale vyaktiyon mein se koi nahi milta hai jab koi apni problem lekar aata hai ya toh koi problem nahi lekin unka relative un log dusre insaan ko lekar aata hai aur tab hum samajhte hain ki yah mansik rogi hai isko problem problem ka salution karte karte ho kabhi kabhi pareshan kabhi kabhi hum bhi toh insaan hai na kabhi kabhi hum bhi pareshan us time par ho jaate hain jabki koi aapki jo panic patient hai theek hai client ke liye bahut zyada pareshan hai apne upar bhi haavi hote kuch cheezen lekar marne ke liye bhi aa jaate hain jab hum hospital mein the 323 341 34 us time par dawai lene ghar ke paas aata tha cycle ke paas aur hamare paas kaunsaling karwata tha aur us din humne kaunsaling uska kiya toh pata nahi bachaana ko hi par ho gaya toh jo cheez thi wahan office mein tha usne pakad kar maarne ki koshish ki thi toh us din vaah bhi hua lekin peeche se uski biwi ne vaah laptop le liye the aur vaah gusse mein aakar darwaze khidki darwaja band karke bahar chala gaya lekin unko pakad li thi phir hum unko andar vibhag mein kaafi samay aur uske baad dusre department meeting hai toh usko kaat lo seedha data use waisa hi karta hai usme bhi sambhaalna padta hai aur koi nahi koi problem ho rahi hai isliye so rahi hai karna hamara kaam rehta hai film mein aage badhte jaate hain anubhav hota hai

एक मनोवैज्ञानिक के रूप में आपको सबसे ज्यादा परेशान करने वाले व्यक्ति कौन थे मिले थे सबसे ज

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Porshia Chawla Ban

Psychologist

1:53
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जी देखिए अगर आए मनोवैज्ञानिक के रूप में आप बात करें तो परेशान करने वाले व्यक्ति वह खुद परेशानी में है और वह इंटेंशनली तो किसी को परेशान नहीं करते हैं उनको खुद इस चीज का बोध नहीं होता है कि उनकी वजह से कोई परेशान हो रहा है यहां हमको थोड़ा सा संवेदनशील होना पड़ता है और यह बात समझनी पड़ती है फिर भी अगर आप ने सवाल पूछा है तो जवाब में मैं सिर्फ इतना कहना चाहूंगी कि परेशानी ज्यादा मुझे उन लोगों से महसूस होती है कि जो लोग इस बात की पहचान भी कर लेते हैं क्योंकि तकलीफ क्या है यह बात मान भी लेते हैं कि इसको इस तरीके से सुलझाया जाए के लिए उपयोग उपाय जो है प्रयोग में लाया जाए तो वह बाहर आ जाएंगे जिससे लेकिन उसके बावजूद भी वह काम नहीं करना चाहते हैं वह चाहते हैं कि हमने जो फीस दी है हमने जो परामर्श लिया है अब बस इससे हो गया लेकिन यह समझने की बात यहां पर यह रहती है कि यह कैसी है मन के ऊपर काम करने वाली बात की जो इंसान को खुद उस पर मेहनत कर दी हैं यह कैसी दवा है कि जिसको आप खरीद मिली है तो वह दवा काम तभी करेंगे जब आप उसको उपयोग में लाएंगे क्योंकि थेरेपी उसी तरह से काम करती है दवाई खा लेने से शरीर पर असर पड़ता है लेकिन इसको घर में पैसा डालना है तो जो बातें बताई गई हैं उन बातों पर काम करना जरूरी है वह मेहनत किए बिना तो उसका कोई सलूशन नहीं होने वाला है तो यह बात अगर सामने वाला समझ जाएगी उसका इनपुट भी उतना ही रहेगा जितना थैरेपिस्ट का रहेगा तो बहुत आसान हो जाता है और जो हमारा गोल है लगते हैं वह पूरा हो जाता है यानी कि जो भी परेशानी है व्यक्ति को उससे उसको निजात मिल जाती है धन्यवाद

ji dekhiye agar aaye manovaigyanik ke roop mein aap baat kare toh pareshan karne waale vyakti vaah khud pareshani mein hai aur vaah intentionally toh kisi ko pareshan nahi karte hain unko khud is cheez ka bodh nahi hota hai ki unki wajah se koi pareshan ho raha hai yahan hamko thoda sa samvedansheel hona padta hai aur yah baat samajhni padti hai phir bhi agar aap ne sawaal poocha hai toh jawab mein main sirf itna kehna chahungi ki pareshani zyada mujhe un logo se mehsus hoti hai ki jo log is baat ki pehchaan bhi kar lete hain kyonki takleef kya hai yah baat maan bhi lete hain ki isko is tarike se sulajhaya jaaye ke liye upyog upay jo hai prayog mein laya jaaye toh vaah bahar aa jaenge jisse lekin uske bawajud bhi vaah kaam nahi karna chahte hain vaah chahte hain ki humne jo fees di hai humne jo paramarsh liya hai ab bus isse ho gaya lekin yah samjhne ki baat yahan par yah rehti hai ki yah kaisi hai man ke upar kaam karne wali baat ki jo insaan ko khud us par mehnat kar di hain yah kaisi dawa hai ki jisko aap kharid mili hai toh vaah dawa kaam tabhi karenge jab aap usko upyog mein layenge kyonki therapy usi tarah se kaam karti hai dawai kha lene se sharir par asar padta hai lekin isko ghar mein paisa dalna hai toh jo batein batai gayi hain un baaton par kaam karna zaroori hai vaah mehnat kiye bina toh uska koi salution nahi hone vala hai toh yah baat agar saamne vala samajh jayegi uska input bhi utana hi rahega jitna thairepist ka rahega toh bahut aasaan ho jata hai aur jo hamara gol hai lagte hain vaah pura ho jata hai yani ki jo bhi pareshani hai vyakti ko usse usko nijat mil jaati hai dhanyavad

जी देखिए अगर आए मनोवैज्ञानिक के रूप में आप बात करें तो परेशान करने वाले व्यक्ति वह खुद परे

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