मैं अपना आत्मविश्वास कैसे बढ़ा सकता हूँ?...


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vedprakash singh

Psychologist

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मैं अपना आत्मविश्वास कैसे बढ़ा सकता हूं यह सवाल है बार-बार सवाल आते हैं आजकल लोगों के लगता है कि आत्मविश्वास की कमी हो गई है कोई बात नहीं आपको सबसे पहले यह पता लगाना है कि आपके आत्मविश्वास कमजोर क्यों हैं इन्हीं पर ध्यान देना उल्टा सोच ना विनाश काले विपरीत बुद्धि उल्टा जैसे आप सोचोगे आशीष सही बनोगे दुनिया के किसी भी महापुरुष का कहानी उल्टा के देख लो उसने भी पहले बुरा गाती पाया है इसके बाद ही अच्छा आदमी को पहले सुख बता क्यों दुखा फिर सुख आता नहीं लेता है तो फिर लोग उस को भगवान मानने लगती ऐसा ही हुआ है तो आपको अपने कॉन्फिडेंस बढ़ाने के लिए सबसे पहले आपको आत्मविश्वास के ऊंचाइयों को ही सोचना होगा पॉजिटिव हो रहा हूं मैं आकाश को छोरा हूं मैं ऐसे बढ़ रहा हूं मैं इन चीजों में तो सबसे पहले आपको किन चीजों में आत्मविश्वास बढ़ाने यह भी सोचने वाली बात है आपको किताब के पढ़ने हैं या फिर आपको एक किसान है जिसमें आत्मविश्वास बढ़ाने हैं या फिर टीचर है जिसमें आत्मविश्वास बढ़ाने हैं उन चीजों को तो आप भली-भांति जानते हो क्योंकि इस प्रश्न में नहीं है उन चीजों के बारे में आपको एक लंबा सा लिस्ट तैयार कर लेने ग्रुप एक ग्रुप B12 स्तंभ स्तंभन इसे बोलते हिंदी में आपको उसमें लिख नहीं है नेगेटिव पॉजिटिव नेगेटिव का मतलब बुरे विचार ब्लॉक में आते पॉजिटिव थॉट मतलब सही विचार क्योंकि आप लोग कुछ इंग्लिश वाले होंगे कुछ हिंदी वाले दोनों बातें बोली होगी बस ए हिंदुस्तान हिंदी है वैसे बीच में हिंदी में बोलने के लिए कहा गया तो वह विचार आप इसमें लिख सकती हो उनमें आपको देखना है कि यह देखना है कि आपके लिए कौन सा चलेगा कौन सा बुरा जो आपके लिए जितना ज्यादा बुरा रहेगा आप लेकिन एक बात याद रखना जिंदगी में कभी इसके अलावा दूसरा छोटा नहीं नहीं देना जब कभी भी आए यदि ऐसा जिंदगी में कभी न कभी करना ही पड़ेगा तब आ गया तो ठीक है नहीं तो वैसे आईना तो आप सोच लेना मेरे पास इतने निकट है मैं इतनी निकट ही था उसका करूंगा क्या आप वही तो उसको छोड़ देना क्योंकि आत्मविश्वास ही होते हैं ना दो तरह के होते हैं एक होते जो हाई लेवल होते हैं कि लो लेवल जो हाई लेवल होता है उन चीजों पर विश्वास नहीं करते जो लो लेवल का होता है इनका चोरों से भरे रहते हैं इन्हीं कपड़ों से भरे रहते हैं और कचरा तो आपको कचरा ही है बताइए कच्चे तो कचरा ही है वैज्ञानिक लोग कितनी गलतियां करते हैं तो एक जिंदगी में एक बल्ब का अविष्कार करते लोग क्या बोलते वैज्ञानिक ने बल्ब का आविष्कार किया आप एक थी और तो देखो कितनी गलतियां की है वैज्ञानिक तो एक बल्ब का आविष्कार किया और हम लोग 124 गलतियां करते हैं लोग बोलते हैं बेकार है कोई काम का नहीं ऐसी बात नहीं है हम लोग भी गलतियां कर सकते हम भी आगे बढ़ सकते हैं लेकिन अपने आप सोचकर गलतियां नहीं करनी गलती हो जाती है करने नहीं है प्रेम हो जाता है प्रेम करने नहीं है ना कोई बात है आपको जो है सबसे पहले आपके आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए उन कामों को चुनना होगा जो आप करना चाहते हैं फिर आपको क्या करना है उन कामों में आपको कौशल बढ़ाने हैं कुशलता दिखाने के काम में कैसे कुशलता में दिखाओ कुशल कारीगर बनने हैं कुशल वर्कर बंद है अपनी अपनी कुशल बंद है दूसरे के लिए नहीं अपने लिए बंधन कुशल जीवन जीने वाले हो सकते हैं कुशल नागरिक बनने हैं जो सीनियर सिटीजन होता है उस तरीके से भी बढ़िया जैसे एक नागरिकता भी देश में लागू है इसके बाद आपको अपनी नॉलेज पर ध्यान देना है कि आपका नॉलेज पॉजिटिव या नेगेटिव आपका सोच सही होना चाहिए सही का मतलब यह नहीं कि बिल्कुल सही क्योंकि सत्य एक बीमारी है जिसको लग जाना और पक्की बात है जिंदा नहीं रह पाएगा इसलिए आप सच के रास्ते पर मत जाना यह महात्मा बुध वाले सत्य की बात नहीं कर रहा हूं मैं क्योंकि आप पूरे सब पर चले जाओगे तो दुनिया आपको जीने नहीं देगी इसलिए पूरे सत्य मत जाना परिवार भी टिका हुआ तो झूठ कुछ बकवास पर हर चीज झूठ पर दिखाऊंगा शब्द का बोलबाला नहीं झूठ का है यदि आप सत्य बोलते हो तो आप एक ही बात बोलोगे लेकिन झूठ झूठ का आंसर बहुत होता है सबका एक ही आंसर होता है झूठ तो लोग तरीके तरीके से उन बातों को बोल लेकिन सबका सारे लोग एक ही बोलेगा उसका आंसर एक माली जब गणित का सवाल बनाएंगे तो गलत उत्तर में कितने गलत होगी और सही में एक ही उत्तर होगा चाहे कितने तरीके से बनाई से कोई मतलब नहीं है झूठ का आंसर ज्यादा गलत का कम सॉरी दोनों तो एक ही होगा मतलब सही का एक ही और गलत का भाव ज्यादा हो गया इसीलिए आपको अपने ललित को बढ़ाने हैं नॉलेज के बाद आपको देखना है क्या आपकी जो एटीट्यूट है वह सही रहे मतलब क्या आप दिखाओगे कि हमारे से ऐसे ऐसे हर कोई दिखाता है आपको यह भी सही दिखाने समझदारी से बोलने और तीसरा आपका है या स्किल जैसे आपकी कौशल बढ़ेगी आपमें स्माइल है कि मतलब मुस्कुराहट होगी आप थोड़ा सा मुस्कुरा दो ना कि लोग तो खुशियां लोग तो इतने बेहाल हैं किसी को आज तक दिखाना आजकल लोग घर में भी सही से नहीं बोल पाते हैं क्योंकि आप आदमी को दो-तीन काम करना चाहिए बिना मतलब का रोना चाहिए मतलब का रोना चाहे बिना मतलब का हंसना चाहिए मतलब का हंसना चाहिए इटारसी जॉब करोगे तो कभी दुखी नहीं होता क्योंकि बिना मतलब करोगे तो एक दिन रोना पड़ेगा तो बुरा हाल होगा ही नहीं आप खुशहाल होगे बिना मतलब का यदि रहोगे वही हाल है उसमें भी मतलब का जो है सो बोलोगे उसमें भी एक दिन बोलना पड़ेगा तो फिर बाद में नहीं तो बुरा हाल हो जाती तो करते हैं बाकी यह दो नहीं कर पाते हैं तो आपको ध्यान यह देना है कि हमारा जो आदत है हैबिट्स एक कभी न बीतें जो हैबिट्स हैं अवैध शेगाव इज एनीथिंग ऑन हैबिट्स आदत आपके गए तो सारे कुछ लेंगे हर किसी जानवर का एक आदत होता हर आदमी का एक आदत होता है वह तो आपकी है ही लेकिन आपकी आदत ना जाए जो आपके आत्मविश्वास वाली है उसी के कारण तो आप सवाल पूछो कि आज में विश्वास तो वही आदत को पकड़ना है जो आप की एक आदत है बुराई हो चुके उनको पकड़ना है आदत रखोगे फिर भी हानि है लेकिन एक आदत नहीं रखोगे तो कोई काम का नहीं हुआ आदत तो आपको बना नहीं पढ़ेंगे तो आप काम करोगे ही नहीं फिर भी एक सवाल है लेकिन ज्यादातर आदत बनाना भी अच्छी बात नहीं है अब किसी को सिगरेट पीने की आदत है इसी को मंदिर जाने की आदत है दोनों तो बात बराबर है बोलता मैं मंदिर नहीं जाता मन नहीं लगता है इसीलिए जाता है ताकि मन लगे उसको एक बोलता मैं सिगरेट पीता हूं तो मन नहीं लगता नहीं पीता हूं तब उनको बोलो सिगरेट पियोगे तो कोई हानि तो नहीं है तू बोलेगा नहीं मंदिर नहीं जाओगे हानि तो नहीं है नहीं तो जब हानि नहीं है तो छोड़ दो फिर बोलता मन नहीं लगता मतलब एक आदत है यह क्या जानते हो आदत वाली बात थोड़ी है एक तो मंदिर जाते हो ऊपर से आप मंदिर में कुछ याचना करते हो कि हमें यह चाहिए हमारे साथ यह कर दिया आप उनकी उनकी बुराई करते हो बुरा क्या करना वहां पर कागज में लिख के मंदिर में गिरा दूं चिट्ठी पढ़ लेंगे अपने अपने आप ही चिट्ठी पढ़ लेंगे मतलब क्या हमारा आत्मविश्वास कमजोर है इसीलिए हमारे साथ ऐसा हो रहा है किसी के साथ जब आती हो जाती है और आत्मविश्वास बढ़ाने के लिए सबसे बड़ी जरूरत थी हम आपको दिल और दिमाग दोनों से सोचना होगा क्योंकि मर्द जो है दिमाग से सोचना और दिल से सोचती है आजकल औरत भी दिल से सोचने लगी है और मर्द भी दिमाग से दिल से सोचने लगे औरत भी दिमाग सोचने लगी लेकिन एक बात और दोनों से दोनों को सोचना चाहिए क्योंकि दोनों से आप सोचोगे तो आपको कोई हानि नहीं पहुंचाएगा क्योंकि आप देश सोचोगे तो दिमाग वाले हानि पहुंचाएंगे दिमाग सो सो चुके थे दिलवाले दोनों से सोचोगे तो आप कोई भी गाली देगा आप हंसने लगे फिर बात ही खत्म बात ही खत्म बात सफा हर रोग दफा

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मैं अपना आत्मविश्वास कैसे बढ़ा सकता हूं यह सवाल है बार-बार सवाल आते हैं आजकल लोगों के लगता

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