ऐसा क्यों होता है की ज़्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग नहीं लेते हैं?...


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Ashok Bajpai

Rtd. Additional Collector P.C.S. Adhikari

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ऐसे और सवाल
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Awdhesh Singh

Former IRS, Top Quora Writer, IAS Educator

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह गाना तो उचित नहीं है कि भारत में जो शिक्षित लोग हैं वह राजनीति में पार्टिसिपेट नहीं करते हैं भाग नहीं लेते हैं कि कि आजकल जो पार्लियामेंट के अंदर आप देखें तो इसमें काफी पढ़े लिखे लोग हैं और करीब 90% से ज्यादा लोग ऐसे हैं जो किया तो ग्रेजुएट है या फिर उससे भी ज्यादा क्वालिफाइड है क्योंकि आजकल की जो राजनीति था उसके अंदर बहुत ही ज्यादा गैरकानूनी पैसे की जरूरत होती है गैर कानूनी काम करना पड़ता है क्योंकि आप सीधे रास्ते से जो है वह राजनीति में सफलता नहीं पाते पाते हैं जैसे कि मान लिया कि किसी कंपटीशन में या किसी एग्जाम में अगर आप ऐसी कल्पना करें कि जहां पर चैटिंग पूरी तरीके से अलाउड हो तो उस कंपटीशन में कोई भी आदमी जो है जो अपनी मेहनत से आंसर लिखेगा वह तो फ्री होगा यह तो पक्का ही होते हैं वह इस तरीके का माहौल बना चुके हैं कि जिसमें किसी शरीफ आदमी ईमानदार आने का जो है ईमानदार आदमी का राजनीति में आना करीब करीब हो गया है और जब तक कि माहौल नहीं सुधरता तो तो मैं नहीं समझता कि जो पढ़े लिखे और समझदार और ईमानदार लोग हम राजनीति में आ पाएंगे

yeh gaana to uchit nahi hai ki bharat mein jo shikshit log hain wah rajneeti mein participate nahi karte hain bhag nahi lete hain ki ki aajkal jo parliament ke andar aap dekhen to isme kaafi padhe likhe log hain aur karib 90% se zyada log aise hain jo kiya chahiye to graduate hai ya phir usse bhi zyada qualified hai kyonki aajkal ki jo rajneeti tha uske andar bahut hi zyada gairkanuni paise ki zarurat hoti hai gair kanooni kaam karna padata hai kyonki aap sidhe raste se jo hai wah rajneeti mein safalta nahi paate paate hain jaise ki maan liya ki kisi competition mein ya kisi exam mein agar aap aisi kalpana kare chahiye ki jaha par chatting puri tarike se allowed ho to us chahiye competition mein koi bhi aadmi jo hai jo apni mehnat se answer likhega wah to free hoga yeh to pakka hi hote hain wah is tarike ka chahiye maahaul bana chuke hain ki jisme kisi sharif aadmi imandar aane ka chahiye jo hai imandar aadmi ka chahiye rajneeti mein aana karib karib ho gaya hai aur jab tak ki maahaul nahi sudharata to to main nahi samajhata ki jo padhe likhe aur samajhdar aur imandar log hum rajneeti mein aa payenge

यह गाना तो उचित नहीं है कि भारत में जो शिक्षित लोग हैं वह राजनीति में पार्टिसिपेट नहीं करत

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Govind Saraf

Entrepreneur

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखने के ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग लेते हैं क्योंकि उनका मानना है कि ऐसा दर्द है जहां पर इंसान एक बार पर जाता है तो फिर उसे निकाल ली पाते क्योंकि आप जहां पर दिखेंगे लगभग कितने भी एमिलेज एमपी है बहुत जनों पर आप देखे कोई ना कोई गीत सुन पर चल रहा है उनके झूठ है या सच बुद्धा में नहीं पता लेकिन कैसे चलते रहते हैं कितने मतलब कितने एमएलए एमपी है उन पर बेबुनियाद आरोप भी लगते हैं सियासी दल तेरे जहां पर आरोप प्रत्यारोप का मामला भी दिन आते रहता है जहां पर कितने सारे षडयंत्र कूटनीति आती जाती है कि पढ़े लिखे वर्ग का मानना है कि जिंदगी को एक अच्छे तौर पर एक अच्छे सम्मान के साथ चलना चाहिए और सिर्फ राजनीतिक तरीका नहीं है जिस पर आज तक देश को सर पर सबको इंसाइड बहुत सारे तरीके हैं बिना राजनीति में कैद गए है विदेश की अप सेवा कर सको देशवासियों की हत्या कर सको तो नाराज भी देश वासियों की सेवा कर सकते हैं ज्यादा पसंद करते हैं

dekhne ke jyadatar shikshit bharatiya rajneeti mein bhag lete hain kyonki unka manana hai ki aisa dard hai jaha par insaan ek chahiye baar par jata hai to phir use nikal chahiye lee paate kyonki aap jaha par dikhenge lagbhag kitne bhi Amylage mp hai bahut jano par aap dekhe koi na koi geet sun par chal raha hai unke jhuth hai ya sach buddha chahiye mein nahi pata lekin kaise chalte rehte hain kitne matlab kitne mla mp hai un par bebuniyad aarop bhi lagte hain siyasi dal tere jaha par aarop pratyarop ka chahiye maamla bhi din aate rehta hai jaha par kitne sare shadyantra kutneeti aati jati hai ki padhe likhe varg ka chahiye manana hai ki zindagi ko ek chahiye acche taur par ek chahiye acche samman ke saath chalna chahiye aur sirf raajnitik tarika nahi hai jis par aaj tak desh ko sar par sabko insaid bahut sare tarike hain bina rajneeti mein kaid gaye hai videsh ki up seva kar Sako deshvasiyon ki hatya kar Sako to naaraj bhi desh vasiyo ki seva kar sakte hain chahiye zyada pasand karte hain

देखने के ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग लेते हैं क्योंकि उनका मानना है कि ऐसा दर्

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Chandraprakash Joshi

Ex-AGM RBI & CEO@ixamBee.com

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षित लोग अगर राजनीति में भाग लेना भी चाहे तो ले कैसे? राजनीति में भाग लेने के लिए आपको पैसा तो चाहिए| पॉलिटिकल पार्टी भी ज्वाइन करने के लिए या तो आप बहुत बचपन से उसमें काम कर रहे हैं तो फिर शिक्षा में अंतर आएगा| अगर आप बचपन से पोलिटिकल पार्टी से जुड़े हैं, कॉलेज टाइम से पॉलिटिकल पार्टी से जुड़े हैं तो ओफ़्फ़्कौर्स आप बहुत जबरदस्त शिक्षा शायद ही पा पाए| या आप बहुत बड़े इंडस्ट्रलिस्ट हो और आप पैसा दे पाए पार्टी फंड में, दान दे पाए तो आप पॉलिटिक्स में आ सकते हैं| फिर उसके अलावा कुछ एक्सेप्शनल भी होते हैं जो बहुत अच्छे एजुकेशन बैकग्राउंड के बाद भी शिक्षा से जुड़े हुए हैं| आईआईटीयंस भी हैं पॉलिटिक्स में जैसे की कांग्रेस में जयराम रमेश और बीजेपी में मनोहर पारिकर हैं, बहुत पढ़े-लिखे लोग है| पियुष गोयल हैं, तो ऐसा नहीं कि पढ़े लिखे लोग बिल्कुल नहीं है जयंत सिन्हा है, तो पढ़े लिखे लोग भी जुड़े हुए हैं| लेकिन आम आदमी जो उतनी स्ट्रोंग बैकग्राउंड का नहीं है उसके लिए अपना परिवार को चलाना और रोजी रोटी कमाना पहली प्रायोरिटी हो जाती है| तो वह अपने बच्चों को छोड़कर पॉलिटिक्स ज्वाइन करना बहुत मुश्किल डिसिशन है इसीलिए आदमी वो कर नहीं पाते।

shikshit log agar rajneeti mein bhag lena bhi chahe to le kaise rajneeti mein bhag lene ke liye aapko chahiye paisa to chahiye political party bhi join karne ke liye ya to aap bahut bachpan se usamen chahiye kaam kar rahe hain to phir shiksha mein antar aaega agar aap bachpan se political party se jude hain college time se political party se jude hain to offkaurs aap bahut jabardast shiksha shayad hi pa paye ya aap bahut bade indastralist ho aur aap paisa de paye party fund mein daan de paye to aap politics mein aa sakte hain phir uske alava kuch exceptional bhi hote hain jo bahut acche education background ke baad bhi shiksha se jude huye hain aiaaitiyans bhi hain politics mein jaise ki congress mein jayaram ramesh aur bjp mein manohar parikar hain bahut padhe likhe log hai piyush goyal hain to aisa nahi ki padhe likhe log bilkul nahi hai jayant sinha hai to padhe likhe log bhi jude huye hain lekin aam aadmi jo utani chahiye strong background ka chahiye nahi hai uske liye apna parivar ko chalana aur rozi roti kamana pehli priority ho jati hai to wah apne baccho ko chodkar politics join karna bahut mushkil decision hai isliye aadmi vo kar nahi paate

शिक्षित लोग अगर राजनीति में भाग लेना भी चाहे तो ले कैसे? राजनीति में भाग लेने के लिए आपको

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Dr. Chinmaya Behera

Eco.,Fin., Pol.,life.,&career

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

शिक्षित लोग के पास शिक्षा और डिग्री के अलावा और कुछ नहीं है ना पैसा है ना लोगों का सपोर्ट है ना पार्टी का सपोर्ट है इसलिए शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग नहीं लेते हैं

shikshit log ke paas shiksha aur degree ke alava aur kuch nahi hai na paisa hai na logo ka support hai na party ka support hai isliye shikshit bharatiya rajneeti mein bhag nahi lete hain

शिक्षित लोग के पास शिक्षा और डिग्री के अलावा और कुछ नहीं है ना पैसा है ना लोगों का सपोर्ट

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डॉ सतीश सारस्वत

इलेक्ट्रो होम्योपैथ चिकित्सक एवं सामाजिक कार्यकर्ता

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राजनीति भारतीय समाज की बहुत गंदी हो गई है इसलिए पढ़े लिखे और अच्छे परिवार के लोग राजनीति में जाना नहीं चाहते क्योंकि राजनीति गुंडों की राजनीति हो गई और खून खराबी की राजनीति है बेईमान भ्रष्ट लोगों की राजनीति है इसलिए अक्षर पढ़ने के लोग इसलिए इस राजनीति में नहीं चाहते

raajneeti bharatiya samaj ki bahut gandi ho gayi hai isliye padhe likhe aur acche parivar ke log raajneeti mein jana nahi chahte kyonki raajneeti gundo ki raajneeti ho gayi aur khoon kharabi ki raajneeti hai beiimaan bhrasht logo ki raajneeti hai isliye akshar padhne ke log isliye is raajneeti mein nahi chahte

राजनीति भारतीय समाज की बहुत गंदी हो गई है इसलिए पढ़े लिखे और अच्छे परिवार के लोग राजनीति म

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Suraj Shaw

Entrepreneur, Career Counsellor

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

हेलो फ्रेंड्स देखे राजपूत एक ऐसी कला है जो हर किसी को नहीं आ सकती ना इसके लिए आपको सेक्सी एक्सपीरियंस और एक यूनिट हो राजनीति में जाना चाहते हैं और लोग जा सकते हैं जो स्टार्टिंग से राजनीति में मतलब छात्र युवा नेता बने श्री यूनिवर्सिटी के नेता बने नितिन फिर वह राजनीति में अगर जाता है तो सक्सेसो बातें और जो लोग यह सब एक काम करते हैं वह ज्यादा शिक्षित नहीं हो पाता और जो लोग शिक्षित हो जाते हैं उनको राजनीति नहीं आती तो मेरे ख्याल से तो यही कारण है कि इस क्षेत्र लोग नहीं जाना चाहते और इंडिया की पॉलिटिक्स थोड़ी है अभी खराब इलेक्शन के टाइम को बहुत सारे काम करने पड़ते हैं जो एक पढ़ा लिखा आदमी नहीं करेगा यह भी एक रीजन हो सकता है कि जो झुके झुके वह नहीं जाना चाहते

hello friends dekhe rajput ek aisi kala hai jo har kisi ko nahi aa sakti na iske liye aapko sexy experience aur ek unit ho raajneeti mein jana chahte hain aur log ja sakte hain jo starting se raajneeti mein matlab chatra yuva neta bane shri university ke neta bane nitin phir vaah raajneeti mein agar jata hai toh sakseso batein aur jo log yah sab ek kaam karte hain vaah zyada shikshit nahi ho pata aur jo log shikshit ho jaate hain unko raajneeti nahi aati toh mere khayal se toh yahi karan hai ki is kshetra log nahi jana chahte aur india ki politics thodi hai abhi kharab election ke time ko bahut saare kaam karne padte hain jo ek padha likha aadmi nahi karega yah bhi ek reason ho sakta hai ki jo jhuke jhuke vaah nahi jana chahte

हेलो फ्रेंड्स देखे राजपूत एक ऐसी कला है जो हर किसी को नहीं आ सकती ना इसके लिए आपको सेक्सी

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Rajesh Vishwakarma

Journalist & Bureau Chief

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

राजनीति में नहीं आना चाहते आउट ऑफ कंट्री में मिलता है जो बाहर देशों में मिलता है जो पॉलिटिक्स पॉलिटिक्स और राजनीतिक तौर पर

rajneeti mein nahi aana chahte out of country mein milta hai jo bahar deshon mein milta hai jo politics politics aur raajnitik taur par

राजनीति में नहीं आना चाहते आउट ऑफ कंट्री में मिलता है जो बाहर देशों में मिलता है जो पॉलिटि

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ज्यादातर शिक्षित भारत की राजनीति में भारतीयों ने लेते हैं पुलिस बहन अपने भाई को कंपलीट करता है तो उसका टारगेट होता है कि अपने परिवार को और अपने आप को सिर्फ पढ़ना इसी पर बसे वो आगे बढ़ता है और वह अपना एक लक्ष्य ढूंढता है कि मुझे डॉक्टर बनना है मुझे भी नजर ना आए मुझे बीएसएनल एमपी बनने के बाद ही उसको चोली मिलती है जो सबसे अलग बनने के लिए करोड़ों रुपया खर्चा पड़ता है क्योंकि एक आम आदमी के पास नहीं हो पाता और आम व्यक्ति जो होता है वह आगे निकलता है एडिट करने की वजह से और गीत भी आती है कि राजनीति को गंदा समझते हैं ज्यादातर पढ़े लिखे हैं ऐसा नहीं करना चाहिए पढ़े लिखे लोगों को आगे आना

jyadatar shikshit bharat ki rajneeti mein bharatiyon ne lete hain police behen apne bhai ko complete karta hai toh uska target hota hai ki apne parivar ko aur apne aap ko sirf padhna isi par base vo aage badhta hai aur wah apna ek lakshya dhundhta hai ki mujhe doctor banana hai mujhe bhi nazar na aaye mujhe BSNL mp banne ke baad hi usko choli milti hai jo sabse alag banne ke liye karodo rupya kharcha padta hai kyonki ek aam aadmi ke paas nahi ho pata aur aam vyakti jo hota hai wah aage nikalta hai edit karne ki wajah se aur geet bhi aati hai ki rajneeti ko ganda samajhte hain jyadatar padhe likhe hain aisa nahi karna chahiye padhe likhe logo ko aage aana

ज्यादातर शिक्षित भारत की राजनीति में भारतीयों ने लेते हैं पुलिस बहन अपने भाई को कंपलीट करत

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Vikas Singh

Political Analyst

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए पॉलिटिक्स में बुद्धिजीवी लोग ही होते हैं पॉलिटिक्स में कोई ऐसा वैसा आदमी नहीं आ सकता है और भारतीय जनता पार्टी में आप देखेंगे तो बहुत पढ़े पढ़े लिखे लोग हैं और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जी मैकेनिकल इंजीनियर है मनोहर पारिकर आईआईटियन है प्रधानमंत्री मोदी जी एम ए पॉलीटिकल साइंस और उनका जो प्रैक्टिकल नॉलेज है वह बहुत बड़े-बड़े लोगों से भी ज्यादा है डॉक्टर मनमोहन सिंह बहुत पढ़े-लिखे आदमी है लेकिन देखिए पढ़े-लिखे होने से कुछ नहीं होता है अगर आपके पास काम करने की क्षमता है काम आप कर लेते हो थोड़ा कम पड़े हो लेकिन आप कुछ अच्छा बोल देते हो आपके पास किसी चीज को समझाने की एक्सप्लेनेशन करने की क्षमता है आप अच्छा से कन्वेंस करते हो अच्छा से बोलते हो किसी काम को अच्छे से करते हो तो आप अच्छे हो उसमें पढ़ाई लिखाई का कोई रोल नहीं है पढ़ाई लिखाई देखिए कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी जी ने किया है अब इनको मूंग के दाल में और अरहर की दाल में अंतर पता नहीं है क्योंकि उन्होंने कभी खेती कि नहीं किसानों की बात करते हैं गरीबों की बात करते हैं कभी खेती उन्होंने किया नहीं होगा देखा भी नहीं होगा और गरीबी उन्होंने कभी देखी नहीं है तो क्या कोई गरीबों की बात करेगा और किसानों की बात करेगा किसान और गरीब की वही बात करेगा जो गरीब रहा होगा जिसने यह सब दिन देखा होगा इसलिए आप सभी भारत वासियों से मेरा निवेदन है कि 2019 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को वोट दें ताकि हमारा देश भ्रष्टाचार मुक्त हो सके धन्यवाद

dekhie politics mein buddhijeevi log hi hote hain politics mein koi aisa waisa aadmi nahi aa sakta hai aur bharatiya janta party mein aap dekhenge toh bahut padhe padhe likhe log hain aur bihar ke mukhyamantri nitish kumar ji mechanical engineer hai manohar parrikar aiaaitiyan hai Pradhanmantri modi ji m a political science aur unka jo practical knowledge hai wah bahut bade bade logo se bhi zyada hai doctor manmohan Singh bahut padhe likhe aadmi hai lekin dekhie padhe likhe hone se kuch nahi hota hai agar aapke paas kaam karne ki kshamta hai kaam aap kar lete ho thoda kam pade ho lekin aap kuch accha bol dete ho aapke paas kisi cheez ko samjhane ki explanation karne ki kshamta hai aap accha se convince karte ho accha se bolte ho kisi kaam ko acche se karte ho toh aap acche ho usme padhai likhai ka koi roll nahi hai padhai likhai dekhie congress party ke adhyaksh rahul gandhi ji ne kiya hai ab inko moong ke dal mein aur arahar ki dal mein antar pata nahi hai kyonki unhone kabhi kheti ki nahi kisano ki baat karte hain garibon ki baat karte hain kabhi kheti unhone kiya nahi hoga dekha bhi nahi hoga aur garibi unhone kabhi dekhi nahi hai toh kya koi garibon ki baat karega aur kisano ki baat karega kisan aur garib ki wahi baat karega jo garib raha hoga jisne yeh sab din dekha hoga isliye aap sabhi bharat vasiyo se mera nivedan hai ki 2019 ke chunav mein bharatiya janta party ko vote de taki hamara desh bhrashtachar mukt ho sake dhanyavad

देखिए पॉलिटिक्स में बुद्धिजीवी लोग ही होते हैं पॉलिटिक्स में कोई ऐसा वैसा आदमी नहीं आ सकता

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Daulat Ram Sharma Shastri

Psychologist | Ex-Senior Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में इसलिए भाग नहीं लेते हैं क्योंकि भारत में जो है वो तंत्र है मेरे विचार से जो अपन देखे वह जो डम कोसी की परिभाषा है वह यहां पर सही सार्थक शब्द नहीं है तो शिक्षित भारतीय विचारे जानते हैं कि हमारी चलने वाली नहीं कि भारतीय राजनीति आपाधापी की राजनीति भ्रष्टाचार से परिपूर्ण राजनीति इंक्लूडिंग में सभी दलों के बारे में कहना चाह रहा हूं सभी दलों में आपाधापी दे पाएंगे आप सभी सभी दल एक दूसरे को ब्रिटिश गालियां देते हैं कि आपस में कुर्सियां फेंकते हैं यह एक दूसरे को अनशन बोलते हैं पर सुतल जीवन में ताल जांच करते हैं एक दूसरे के बारे में अंचल बुरी भावना से बुरे शब्दों से खुलेआम मंचों पर बोलते हैं तो शिक्षित बिचारा जानता है इस बात को कि मेरी छीछालेदर कराने से मतलब क्या है इसलिए हर शिक्षित व्यक्ति इस राजनीति के दलदल से दूर करता है और जो लोग शिक्षित कुछ लोग राजनीति में हम भी उन विचारों को कोई महत्व नहीं देता है वह एक कोने में पड़े रहते हैं उनके कोई विचारों को भी सुनता है क्यों किया तो भीड़ तंत्र है यहां तो एक तरह से मौत से रिलेटेड नेता हैं उनकी कॉपी चलती है उसका कारण क्या है उसका कारण सिर्फ यही है जो उस भीड़ तंत्र में जितने अधिक वोटर लगता है इसी के कारण जातिवाद फैलाए हुए धर्म बाद की राजनीति करते हैं जबकि विदेशों में ऐसा नहीं विदेशों की राजनीति में आप पाएंगे जब देश का मुद्दा है रक्षा का मुद्दा है वहां पर सभी को एक मंच पर होते हैं चेक पक्ष हो या विपक्ष हो कि हमारे यहां पर तो विपक्ष में होने का मतलब यह है कि सरकार की आलोचना करनी है क्या उचित है या अनुचित है जबकि उचित के लिए सराहना भी करनी चाहिए और अनुचित के लिए निंदा करनी चाहिए एक सिक्का सही पैटर्न होता है क्योंकि राजनीति में नहीं है

jyadatar shikshit bharatiya rajneeti mein isliye bhag nahi lete hain kyonki bharat mein jo hai vo tantra hai mere vichar se jo apan dekhe wah jo dam kosi ki paribhasha hai wah yahan par sahi sarthak shabdh nahi hai to shikshit bharatiya vichaare jante hain ki hamari chalne wali nahi ki bharatiya rajneeti apadhapi ki rajneeti bhrashtachar se paripurna rajneeti inkluding mein sabhi dalon ke bare mein kehna chah raha hoon sabhi dalon mein apadhapi de payenge aap sabhi sabhi dal ek chahiye dusre chahiye ko british galiya dete hain ki aapas mein kursiyan phenkate hain yeh ek chahiye dusre chahiye ko anshan chahiye bolte hain par sutal jeevan mein taal janch karte hain ek chahiye dusre chahiye ke bare mein anchal buri bhavna se bure shabdon se khuleaam mancho par bolte hain to shikshit bichara jaanta hai is baat ko ki meri chichaledar karane se matlab kya hai isliye har shikshit vyakti is rajneeti ke duldula se dur karta hai aur jo log shikshit kuch log rajneeti mein hum bhi un vicharon ko koi mahatva nahi deta hai wah ek chahiye kone mein pade chahiye rehte hain unke koi vicharon ko bhi sunta hai kyon kiya chahiye to bheed tantra hai yahan to ek chahiye tarah se maut se related neta hain unki copy chalti hai uska kaaran kya hai uska kaaran sirf yahi hai jo us chahiye bheed tantra mein jitne adhik voter lagta hai isi ke kaaran jaatiwad failaye huye dharm baad ki rajneeti karte hain jabki videshon mein aisa nahi videshon ki rajneeti mein aap payenge jab desh ka chahiye mudda hai raksha ka chahiye mudda hai wahan par sabhi ko ek chahiye manch par hote hain check paksh ho ya vipaksh ho ki hamare yahan par to vipaksh mein hone ka chahiye matlab yeh hai ki sarkar ki aalochana karni hai kya uchit hai ya anuchit hai jabki uchit ke liye sarahana bhi karni chahiye aur anuchit ke liye ninda karni chahiye ek chahiye sikka sahi pattern hota hai kyonki rajneeti mein nahi hai

ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में इसलिए भाग नहीं लेते हैं क्योंकि भारत में जो है वो तंत्

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SUSHIL LAKRA

Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रोमांटिक में मैं भी लोकल बॉडीज करता हूं मैं देखता हूं कि कोई अभी युवा और वेटिंग में कोई रुझान नहीं है मतलब कोई इंटरेस्टेड पार्टी में आना नहीं चाहता है क्योंकि इसमें पार्टी हमलों का पार्टी में खाता पड़ता है बहुत खतना बनाई खुद खुद हूं पार्टी में करता हूं भाई लोगों के लिए करता हूं समाज के लिए करता हूं गिरी तब तेरे को भी करता हूं किंतु राजनीतिक पार्टी में लोग आते हैं मीटिंग में बैठते हैं तेरे पाने के चक्कर में आते हैं इसको का किस राजनीतिक दल को संगठन को आगे कैसे बढ़ाया जाए ऐसे लिया जाए ताकि यह संगठन थाने से हमारा समाज का भला होगा इस संगठन के द्वारा हम बचेंगे इस समाधान समाधान के द्वारा हम हम लोग करेंगे अपने समाज का बचा के रखे संस्कृति पर आधारित जाना नहीं चाहते हैं क्योंकि क्योंकि हमारे यहां के इलाके के लोग बैठक में जाना नहीं चाहते हैं लेकिन कन्हाई नहीं दूसरी बार एक महान को देख कर के हम लोग कहीं भी देखते हैं बार पेट खराब हो रहा है रमेश बाबा के निशान यात्रा में कहां आदिवासी गांव के लोग आते हैं

romantic mein main bhi local bodyes karta hoon main dekhta hoon ki koi abhi yuva aur waiting mein koi rujhan nahi hai matlab koi interested party mein aana nahi chahta hai kyonki ismein party hamlo ka party mein khaata padta hai bahut khatana banai khud khud hoon party mein karta hoon bhai logo ke liye karta hoon samaj ke liye karta hoon giri tab tere ko bhi karta hoon kintu raajnitik party mein log aate hain meeting mein baithate hain tere pane ke chakkar mein aate hain isko ka kis raajnitik dal ko sangathan ko aage kaise badhaya jaye aise liya jaye taki yeh sangathan thane se hamara samaj ka bhala hoga is sangathan ke dwara hum bachenge is samadhan samadhan ke dwara hum hum log karenge apne samaj ka bacha ke rakhe sanskriti par aadharit jana nahi chahte hain kyonki kyonki hamare yahan ke ilake ke log baithak mein jana nahi chahte hain lekin kanhai nahi dusri baar ek mahaan ko dekh kar ke hum log kahin bhi dekhte hain baar pet kharab ho raha hai ramesh baba ke nishaan yatra mein kahaan adiwasi gaon ke log aate hain

रोमांटिक में मैं भी लोकल बॉडीज करता हूं मैं देखता हूं कि कोई अभी युवा और वेटिंग में कोई रु

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Abhinandan Kumar Tiwari

Phd, M-Tech software Expect

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ब्लूटूथ ऑफ पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिक्स पार्टी लेट में बहुत ही बदनाम हो चुका था इंडिया में तो कोई भी

bluetooth of politics end politics party late mein bahut hi badnaam ho chuka tha india mein toh koi bhi

ब्लूटूथ ऑफ पॉलिटिक्स एंड पॉलिटिक्स पार्टी लेट में बहुत ही बदनाम हो चुका था इंडिया में तो क

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Kinnari Raval

Singer-Artist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

ज्यादातर लोग नहीं लेते हैं क्योंकि उनका है अनपढ़ है जो अनपढ़ है और पढ़े लिखे उनकी सोच में काफी अंतर है इसीलिए उनकी वजह से यह लोग जो है ना नहीं चाहते हैं उल्टी चौकीदार हूं मैं यह कर रहा हूं आगे बढ़ाओ हमें आगे बढ़ना क्वालिटी बहुत अच्छी है मगर जो उन्होंने किया है वह काफी अच्छा किया है जो जवानों के लिए उन्होंने किया है काम किया है और

jyadatar log nahi lete hain kyonki unka hai anpad hai jo anpad hai aur padhe likhe unki soch mein kaafi antar hai isliye unki wajah se yah log jo hai na nahi chahte hain ulti chaukidaar hoon main yah kar raha hoon aage badhao hamein aage badhana quality bahut achi hai magar jo unhone kiya hai vaah kaafi accha kiya hai jo jawano ke liye unhone kiya hai kaam kiya hai aur

ज्यादातर लोग नहीं लेते हैं क्योंकि उनका है अनपढ़ है जो अनपढ़ है और पढ़े लिखे उनकी सोच में

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Lal Babu Mehta

Zila Adhyaksh BJP

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जाट शिक्षित भाषा में भाग लेना इसलिए नहीं चाहते हैं क्योंकि अभी की जूती चल रही हमारे देश में इस में धनबल का ज्यादा योगदान और जो शिक्षित लोग होते हैं उनके पास धन की कमी होती है और वह अपराधी टीवी की भी नहीं होते हैं राजनीति में भी अपराधी छवि का होना धनबल का प्रयोग होना लोगों को मजबूर कर देता है उनके पक्ष में मतदान करने के लिए क्योंकि यहां पर धन का बहुत बड़ा योगदान है अपराधी छवि के डर से लोग अपना वोट करते हैं नारायण टीम उनका प्रश्न ज्यादा शिक्षित लोग इससे दूर रहना चाहते हैं

jaat shikshit bhasha mein bhag lena isliye nahi chahte hain kyonki abhi ki juti chal rahi hamare desh mein is mein dhanabal ka zyada yogdan aur jo shikshit log hote hain unke paas dhan ki kami hoti hai aur vaah apradhi TV ki bhi nahi hote hain raajneeti mein bhi apradhi chhavi ka hona dhanabal ka prayog hona logo ko majboor kar deta hai unke paksh mein matdan karne ke liye kyonki yahan par dhan ka bahut bada yogdan hai apradhi chhavi ke dar se log apna vote karte hain narayan team unka prashna zyada shikshit log isse dur rehna chahte hain

जाट शिक्षित भाषा में भाग लेना इसलिए नहीं चाहते हैं क्योंकि अभी की जूती चल रही हमारे देश मे

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Vimal Srivastav

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अभी तो बात से मतलब नहीं रखता दूसरा बातचीत भी नहीं लेते यह बात नहीं है लेकिन एक बात की क्षमता होती है कि वह किस का चुनाव करें और अपना बताइए अपना सांसद कैसे बनाए जाते हैं जाते हैं या जो भी

abhi toh baat se matlab nahi rakhta doosra batchit bhi nahi lete yeh baat nahi hai lekin ek baat ki kshamta hoti hai ki wah kis ka chunav karein aur apna bataye apna saansad kaise banaye jaate hain jaate hain ya jo bhi

अभी तो बात से मतलब नहीं रखता दूसरा बातचीत भी नहीं लेते यह बात नहीं है लेकिन एक बात की क्षम

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Anshu Seth

Writer & Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मोनेरा को यह बहुत ही बेले डांसर है और इस पर अगर मैं थोड़ा तुमको बॉलीवुड के साथ कनेक्ट करूं तो कुछ ऐसी हमारी पिक्चर पिक्चर अभी आई है आई है ना यह हमारा अपना भास्कर वालों को बहुत सालों से क्या कहेंगे दादा बनने की पॉलिटिक्स क्यों है बहुत गंदी गेम है तो जो अच्छे और अच्छी सोच वाले पॉजिटिव थिंकिंग वाले लोग हैं उनको इससे दूर रहना चाहिए लेकिन हम लोग भी यह नहीं रह नहीं सकते हैं कि जितनी देर तक इस गंदगी को हम खुद आगे अच्छे लोग आ गया के साथ नहीं करेंगे अभी तक कुछ भी ठीक नहीं होगा क्योंकि एक बड़ी मशहूर कहावत है इंग्लिश में है चेंज इंडिया जब आपको कोई चीज लानी है तो आपको उज्जैन का हिस्सा बनना पड़ेगा तो मेरा है

monera ko yeh bahut hi belle dancer hai aur is par agar main thoda tumko bollywood ke saath connect karu toh kuch aisi hamari picture picture abhi I hai I hai na yeh hamara apna bhaskar walon ko bahut salon se kya kahenge dada banne ki politics kyon hai bahut gandi game hai toh jo acche aur acchi soch wale positive thinking wale log hain unko isse dur rehna chahiye lekin hum log bhi yeh nahi reh nahi sakte hain ki jitni der tak is gandagi ko hum khud aage acche log aa gaya ke saath nahi karenge abhi tak kuch bhi theek nahi hoga kyonki ek badi mashoor kahaavat hai english mein hai change india jab aapko koi cheez lani hai toh aapko ujjain ka hissa banana padega toh mera hai

मोनेरा को यह बहुत ही बेले डांसर है और इस पर अगर मैं थोड़ा तुमको बॉलीवुड के साथ कनेक्ट करूं

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BRAHAM SINGH

Social Activist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भाग ले रहे हैं जिसे हमारी पार्टी के कई आईपीएस जो चुनाव लड़े हैं वह सांसद बने हैं मंत्री बने हैं बहुत सारे असाइनमेंट के बाद भी आए हैं इसमें क्योंकि मैं बहुत बड़ा बदलाव देश में जो नया बन रहा है अभी और गुंडे पब्लिक पब्लिक उतना कम है अब तो जो भी काबिल है जो पढ़ी-लिखी हमको मौका भी जैसे वह हमसे कर रहे हैं हमारी पूरी जी है जो अफगान डेवलपमेंट का देख रहे हो डेवलपमेंट का हरदीप पुरी हो सारे गुंडे मवाली नहीं है

bhag le rahe hain jise hamari party ke kai ips jo chunav lade hain vaah saansad bane hain mantri bane hain bahut saare assignment ke baad bhi aaye hain isme kyonki main bahut bada badlav desh mein jo naya ban raha hai abhi aur gunde public public utana kam hai ab toh jo bhi kaabil hai jo padhi likhi hamko mauka bhi jaise vaah humse kar rahe hain hamari puri ji hai jo afgan development ka dekh rahe ho development ka hardeep puri ho saare gunde mavali nahi hai

भाग ले रहे हैं जिसे हमारी पार्टी के कई आईपीएस जो चुनाव लड़े हैं वह सांसद बने हैं मंत्री बन

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सही प्रशिक्षण विभाग के अधिकारी चकबंदी गुंडागर्दी के दादा सतन सर्कस चल रहा है किसी का 420 का केस चल रहा है जो अपनी हलाल की कमाई करता है उसके लिए शासन काल में औसत बढ़ गई है गरीब आदमी की मुद्दों की सत्र खत्म होगी सिर्फ ओन्ली ओन्ली अमीरों की सशक्त और पैसे वालों की साथ रहेगी जो उनके आने की लोग सोचे ज्यादा है कि हमने क्या लेना जरूरी कर दे एकदम कम कर लेंगे हम को जलाना हमारा काम तो देश के लिए गवर्नमेंट के लिए प्रोग्राम बनाना हमारे कृपालु पड़ेगी

sahi prashikshan vibhag ke adhikari chakbandi gundagardi ke dada satan circus chal raha hai kisi ka 420 ka case chal raha hai jo apni halal ki kamai karta hai uske liye shasan kaal mein ausat badh gayi hai garib aadmi ki muddon ki satra khatam hogi sirf only only amiron ki sashakt aur paise walon ki saath rahegi jo unke aane ki log soche zyada hai ki humne kya lena zaroori kar de ekdam kam kar lenge hum ko jalana hamara kaam toh desh ke liye government ke liye program banana hamare kripalu padegi

सही प्रशिक्षण विभाग के अधिकारी चकबंदी गुंडागर्दी के दादा सतन सर्कस चल रहा है किसी का 420 क

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Sandesh Gajjar

Journalist

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और शिक्षित पॉलिटिक्स एक गंदी राजनीति है शामिल क्यों नहीं होते क्योंकि अच्छे लोग जो जब आएंगे तभी वह देश में सुधार होने पर क्यों नहीं आते क्योंकि जो गंदा है वह देश में पढ़ना नहीं चाहते तो अच्छे आदमी आते हैं अच्छे होते ही है भ्रष्टाचार के प्रति और भ्रष्टाचार

aur shikshit politics ek gandi rajneeti hai shaamil kyon nahi hote kyonki acche log jo jab aayenge tabhi wah desh mein sudhaar hone par kyon nahi aate kyonki jo ganda hai wah desh mein padhna nahi chahte toh acche aadmi aate hain acche hote hi hai bhrashtachar ke prati aur bhrashtachar

और शिक्षित पॉलिटिक्स एक गंदी राजनीति है शामिल क्यों नहीं होते क्योंकि अच्छे लोग जो जब आएंग

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Ashish Singh Hariyovanshi

Public Relation Expert

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लोगों में यह सोच है कि भारत करके पॉलिटिक्स है यह बहुत ही खराब है बहुत ही गंदा है बहुत ही छोटा है तो ज्यादातर भारतीय सेक्स जोगभारती होते हैं वह इसलिए पाटनी लेते हैं अपने नाम के साथ कोई रिश्ता क्या क्या भ्रष्ट योजना नहीं बनाई है देशद्रोही और भी बहुत कुछ और भारत में रहता है तो पॉलिटिक्स से दूर रहता है आज भी नहीं करते लेकिन है तू खुद नहीं होना चाहिए लेकिन अभी ऐसा कि कुछ सालों से यह शिक्षा चेंज आ रहा है कि लोग समझ पा रहे हैं कि कौन अच्छा है कौन था एमपी में देश के काम कर रहा है नहीं कर रहा है उसके बाद जो वोट दे रहे हैं ना कि जातिवाद या फिर वह कष्ट कर पा रहे हो तो अच्छे पढ़े-लिखे लोकगीत पॉलिटिक्स में घुसा केंचुआ धूप में काली पड़ जाए तो ज्यादा अच्छा

logon mein yeh soch hai ki bharat karke politics hai yeh bahut hi kharab hai bahut hi ganda hai bahut hi chota hai toh jyadatar bharatiya sex jogbharti hote hain wah isliye patani lete hain apne naam ke saath koi rishta kya kya bhrasht yojana nahi banai hai deshdrohi aur bhi bahut kuch aur bharat mein rehta hai toh politics se dur rehta hai aaj bhi nahi karte lekin hai tu khud nahi hona chahiye lekin abhi aisa ki kuch salon se yeh shiksha change aa raha hai ki log samajh pa rahe hain ki kaun accha hai kaun tha mp mein desh ke kaam kar raha hai nahi kar raha hai uske baad jo vote de rahe hain na ki jaatiwad ya phir wah kasht kar pa rahe ho toh acche padhe likhe lokgeet politics mein ghusa kenchuaa dhoop mein kali pad jaye toh zyada accha

लोगों में यह सोच है कि भारत करके पॉलिटिक्स है यह बहुत ही खराब है बहुत ही गंदा है बहुत ही छ

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अबे बताता हूं क्योंकि आज के बच्चे जो है अगर मेरी 7 साल की उम्र में बात कर लो बहुत जल्दी बहुत देर से मैसेज होते थे आज के बच्चे से है बहुत जल्दी मैं क्यों हो जाते हैं आज के बच्चे जो है 25 साल तक सरकार को समझने लगते हैं कि जब तक 250 से बनेगा तो उसी जनसंख्या की होगी क्या-क्या करना चाहेगा तो जहां पर कितनी मैक्सनर्व यकीन हो गया है कि नहीं होता है तुम हो गया है वह समझता है कि सबका बर्बाद ना करो या वह दिमाग डिलीट हो गया है जो समाज को छोड़ दो कि समाज में चोट दे रही है कि रमेश सरदारी दे रही है उसे लगे हैं इसलिए लोग जो है और जल्दी की गंदगी को देखते बार्बी है जहां 3 सदस्य भी होता है लेकिन उच्च शिक्षा की उपयोगिता की पहली खेलो को आना पड़ेगा पड़ेगा कैसा ग्रेजुएट है उसके 34 विकेट भी है व्हाट्सएप पर मैसेज दिखाएं देखना है कंप्यूटर शिक्षा जरूरी था कि वो पानी में जाकर के हाथी सारे कीमत पर एक युवक ने अपने खिलाफ खड़े हो सके बीजेपी का भूतनाथ का न्यूज़ हमें चाहिए जो चीज करें करें कि नहीं हो सके और सही है या गलत है और अब दूर नहीं है लड़कों को पढ़े लिखे लोगों के हक में पैसा जो सर्च करें अधिक उत्पादन हो और इतनी बड़ी आबादी है क्या बात है बारिश हो रही है कि अभी आगे बढ़ जाएगी के लोग गरीब तबके के लोग इंजॉय करने का वेतन क्या होगा आज आज हम क्या क्या क्या फिर सागर 130 हो गए जीडीपी पर कितना खाता है कमाता है कि छुट्टी समझावां की ताजा खबर

abe batata hoon kyonki aaj ke bacche jo hai agar meri 7 saal ki umr mein baat kar lo bahut jaldi bahut der se massage hote the aaj ke bacche se hai bahut jaldi main kyon ho jaate hain aaj ke bacche jo hai 25 saal tak sarkar ko samjhne lagte hain ki jab tak 250 se banega toh usi jansankhya ki hogi kya kya karna chahega toh jaha par kitni maiksanarv yakin ho gaya hai ki nahi hota hai tum ho gaya hai vaah samajhata hai ki sabka barbad na karo ya vaah dimag delete ho gaya hai jo samaj ko chod do ki samaj mein chot de rahi hai ki ramesh sardari de rahi hai use lage hain isliye log jo hai aur jaldi ki gandagi ko dekhte barbie hai jaha 3 sadasya bhi hota hai lekin ucch shiksha ki upayogita ki pehli khelo ko aana padega padega kaisa graduate hai uske 34 wicket bhi hai whatsapp par massage dikhaen dekhna hai computer shiksha zaroori tha ki vo paani mein jaakar ke haathi saare kimat par ek yuvak ne apne khilaf khade ho sake bjp ka bhutnath ka news hamein chahiye jo cheez kare karen ki nahi ho sake aur sahi hai ya galat hai aur ab dur nahi hai ladko ko padhe likhe logo ke haq mein paisa jo search kare adhik utpadan ho aur itni badi aabadi hai kya baat hai barish ho rahi hai ki abhi aage badh jayegi ke log garib tabke ke log enjoy karne ka vetan kya hoga aaj aaj hum kya kya kya phir sagar 130 ho gaye gdp par kitna khaata hai kamata hai ki chhutti samjhavan ki taaza khabar

अबे बताता हूं क्योंकि आज के बच्चे जो है अगर मेरी 7 साल की उम्र में बात कर लो बहुत जल्दी बह

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

सबसे पहले तो भाई साहब आपके जो सवाल है उससे मैं सहमत नहीं हूं आपने कहा ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग नहीं देते ऐसा कुछ नहीं है भारतीय राजनीति के अंदर ज्यादातर लोग शिक्षित हैं ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन यहां पर अगर आप ईमानदार लोगों का नाम लेते हैं कि भारतीय राजनीति में ईमानदार विवेकशील लोग भाग क्यों नहीं लेते हैं थोड़ा ज्यादा जो है वह चना रचनात्मक होता ज्यादा थोड़ा जिसको कहीं कि भारतीय राजनीति के अंदर शिक्षित लोग भाग नहीं लेते यह एक मोनोपोली बन चुकी है हालांकि ज्यादातर भारतीय ज्यादातर राजनीतिज्ञ है राजनेता है वह शिक्षित है ऐसी कोई बात नहीं है लेकिन ईमानदार नहीं है और इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि 70 साल में एक परंपरा बना दी है राजनेताओं ने भारत की बात की लोकतंत्र के अंदर की राजनीति है वह बगैर पैसों के नहीं हो सकता है वह पूरा का पूरा सिस्टम बना दिया है ईमानदार नहीं रहते हो पैसा अगर गलत तरीके से कम आते हो तो ईमानदार नहीं रहते हो क्योंकि राजनीति के अंदर तो अच्छा पैसा है वह बहाना पड़ता है क्योंकि यह इन्होंने परंपरा बना दिया एक विधायक का चुनाव है अगर आपके पास 10 15 गाड़ी नहीं है गांव के अंदर आप का काफिला नहीं जाएगा तो हमारे लोगों की मानसिकता यह हुई है कि आप विधायक बनने वाले हो ही नहीं अभिमान दार आदमी साइकिल पर मोटरसाइकिल जाकर बताएगा जी भाई साहब मैं आपके लिए जो है अच्छा काम करूंगा विवेकशील इंसान हूं समाज के अंदर बेहतर बदलाव किस प्रकार लाया जा सकता है चाहे वह गांव की हर समस्या का समाधान को गांव वालों को रोड मैप के द्वारा बता दे लेकिन कव्वाली कहेंगे कि यह क्या विधायक बनेगा इसके पास गाड़ी नहीं है इसके पास गुरुद्वारे के पास काफिला नहीं है मोटर की मतदाता की मानसिकता ऐसी होगी यह कि वह चाहता है कि यहां पर चोर है यहां पर जो धोखा देने वाले लोग हैं वह राजनीति में जब तक मतदाता जागरूक नहीं होगा तब तक राजनीति के अंदर यह पैसों वाला जो सिस्टम है कि बगैर पैसों की राजनीति नहीं की जा सकती यह तब तक खत्म नहीं होगा और मीडिया के द्वारा कुछ उम्मीद जरूर बनी है जिस प्रकार से फेसबुक टि्वटर व्हाट्सएप पर यूट्यूब अरे जैसे वो कल बगैरा यह जो आपके बने हैं इनसे भी है कि लोगों को जल्दी से लोगों को जागरूक किया जा सकता है कि आप आज तक गलत है हमारे दिमाग के अंदर हमारी मानसिकता के अंदर जानबूझकर यह चीजें बैठाई गई की लंबी गाड़ियों वाले ज्यादा काफिले वाले नेता है वह ज्यादा पावरफुल होती है देखो पावरफुल सबसे ज्यादा वोटर होता है अगर वोटर चाहे की विवेकशील इमानदार आदमी राजनीति में चाय तो वोटर का ही भला हुआ क्योंकि विवेकशील लोग राजनीति में जाएंगे इमानदार लोग राजनीति में संगीत उनका बहुमत होगा तो फिर कानून बढ़िया बनेंगे क्योंकि देश का भविष्य और वर्तमान राजनेताओं के हाथ में होता है हमारी जो संविधान निर्मात्री यह जितनी भी संस्थाएं होती है विधानसभा संसद से कानून बनते हैं जनकल्याण के कानून भी बनते हैं और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण लगाने वाली कानून भी बनते हैं महिलाओं की सुरक्षा पर कानून बनता है वह कानून तभी मजबूत होगा जब वहां पर बैठे लोग इमानदार होंगे अगर वहां पर बैठे लोगों का बहुमत इमान तारों का नहीं चोरों का होगा तो फिर वह उतना ही लचीला कानून बनाएंगे ताकि अनाप-शनाप पैसा कमाया जा रहे ईमानदार लोगों को राजनीति राजनीति को एक प्रकार से धब्बा है राजनीति पर लगा दिया कि राजनेताओं ने की राजनीति सिर्फ और सिर्फ चोरों का खेल है ऐसा कुछ नहीं है जब देश का वर्तमान और भविष्य जिस जिस चीज से बढ़ता तू सिर्फ राजनीति राजनीति में शिक्षित विवेकशील ईमानदार लोगों को भाग लेना चाहिए आज नहीं तो कल लेना पड़ेगा नहीं तो देश के अंदर एक नई क्रांति होगी जब वंचित दलित गरीब और बेरोजगार लोग एक इकट्ठा होकर जो है वह इन शासन के खिलाफ हो जो है वह एक प्रकार से मार्च करेंगे कांति करेंगे इन को दबाया जाएगा कत्लेआम होगा लेकिन अंतत जीत सच्चाई की होगी जीत विवेकशील लोगों की होगी तो जरूर इस सवाल के अंदर थोड़ा सा जो है वह दम है कि शिक्षित जो भारतीय पुरातत्व विभाग ने लेते लेकिन ज्यादातर का नहीं ज्यादातर शिक्षित ही है नेता ईमानदार नहीं है वो एक अलग बात है

sabse pehle toh bhai saheb aapke jo sawaal hai usse main sahmat nahi hoon aapne kaha jyadatar shikshit bharatiya raajneeti mein bhag nahi dete aisa kuch nahi hai bharatiya raajneeti ke andar jyadatar log shikshit hain aisi koi baat nahi hai lekin yahan par agar aap imaandaar logo ka naam lete hain ki bharatiya raajneeti mein imaandaar vivekshil log bhag kyon nahi lete hain thoda zyada jo hai vaah chana rachnatmak hota zyada thoda jisko kahin ki bharatiya raajneeti ke andar shikshit log bhag nahi lete yah ek monopoly ban chuki hai halaki jyadatar bharatiya jyadatar rajanitigya hai raajneta hai vaah shikshit hai aisi koi baat nahi hai lekin imaandaar nahi hai aur iska sabse bada karan yah hai ki 70 saal mein ek parampara bana di hai rajnetao ne bharat ki baat ki loktantra ke andar ki raajneeti hai vaah bagair paison ke nahi ho sakta hai vaah pura ka pura system bana diya hai imaandaar nahi rehte ho paisa agar galat tarike se kam aate ho toh imaandaar nahi rehte ho kyonki raajneeti ke andar toh accha paisa hai vaah bahana padta hai kyonki yah inhone parampara bana diya ek vidhayak ka chunav hai agar aapke paas 10 15 gaadi nahi hai gaon ke andar aap ka kaafila nahi jaega toh hamare logo ki mansikta yah hui hai ki aap vidhayak banne waale ho hi nahi abhimaan daar aadmi cycle par motorcycle jaakar batayega ji bhai saheb main aapke liye jo hai accha kaam karunga vivekshil insaan hoon samaj ke andar behtar badlav kis prakar laya ja sakta hai chahen vaah gaon ki har samasya ka samadhan ko gaon walon ko road map ke dwara bata de lekin qawwali kahenge ki yah kya vidhayak banega iske paas gaadi nahi hai iske paas gurudware ke paas kaafila nahi hai motor ki matdata ki mansikta aisi hogi yah ki vaah chahta hai ki yahan par chor hai yahan par jo dhokha dene waale log hain vaah raajneeti mein jab tak matdata jagruk nahi hoga tab tak raajneeti ke andar yah paison vala jo system hai ki bagair paison ki raajneeti nahi ki ja sakti yah tab tak khatam nahi hoga aur media ke dwara kuch ummid zaroor bani hai jis prakar se facebook twitter whatsapp par youtube are jaise vo kal bagaira yah jo aapke bane hain inse bhi hai ki logo ko jaldi se logo ko jagruk kiya ja sakta hai ki aap aaj tak galat hai hamare dimag ke andar hamari mansikta ke andar janbujhkar yah cheezen baithaai gayi ki lambi gadiyon waale zyada kafile waale neta hai vaah zyada powerful hoti hai dekho powerful sabse zyada voter hota hai agar voter chahen ki vivekshil imaandaar aadmi raajneeti mein chai toh voter ka hi bhala hua kyonki vivekshil log raajneeti mein jaenge imaandaar log raajneeti mein sangeet unka bahumat hoga toh phir kanoon badhiya banenge kyonki desh ka bhavishya aur vartaman rajnetao ke hath mein hota hai hamari jo samvidhan nirmatri yah jitni bhi sansthayen hoti hai vidhan sabha sansad se kanoon bante hain jankalyan ke kanoon bhi bante hain aur bhrashtachar par niyantran lagane wali kanoon bhi bante hain mahilaon ki suraksha par kanoon baata hai vaah kanoon tabhi majboot hoga jab wahan par baithe log imaandaar honge agar wahan par baithe logo ka bahumat imman taaron ka nahi choron ka hoga toh phir vaah utana hi lachila kanoon banayenge taki anap shanap paisa kamaya ja rahe imaandaar logo ko raajneeti raajneeti ko ek prakar se dhabba hai raajneeti par laga diya ki rajnetao ne ki raajneeti sirf aur sirf choron ka khel hai aisa kuch nahi hai jab desh ka vartaman aur bhavishya jis jis cheez se badhta tu sirf raajneeti raajneeti mein shikshit vivekshil imaandaar logo ko bhag lena chahiye aaj nahi toh kal lena padega nahi toh desh ke andar ek nayi kranti hogi jab vanchit dalit garib aur berozgaar log ek ikattha hokar jo hai vaah in shasan ke khilaf ho jo hai vaah ek prakar se march karenge kanti karenge in ko dabaya jaega katleam hoga lekin antat jeet sacchai ki hogi jeet vivekshil logo ki hogi toh zaroor is sawaal ke andar thoda sa jo hai vaah dum hai ki shikshit jo bharatiya puratatva vibhag ne lete lekin jyadatar ka nahi jyadatar shikshit hi hai neta imaandaar nahi hai vo ek alag baat hai

सबसे पहले तो भाई साहब आपके जो सवाल है उससे मैं सहमत नहीं हूं आपने कहा ज्यादातर शिक्षित भार

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यह हमारे देश की देख त्रासदी भी है कि जो शिक्षक भारतीय है वह राजनीति में भाग नहीं लेते यही कारण है कि जब इस जो लोकतंत्र क्या है उसमें हिस्सा नहीं लेते जा वोट डालने जाते इसी कारण में जो अशिक्षित लोग है वह विधानसभा लोकसभा और राज्यसभा में बैठकर देश का देश के लिए क़ानून बनाते हैं अगर यही पढ़ा-लिखा वर्ग अगर यही पढ़ा-लिखा बंद मतदान बूथ तक मतदान बूथ पर जाकर अपने वोट का इस्तेमाल करेगा तू जो शिक्षक और अपराधी लोग हैं वह विधानसभा और लोकसभा में नहीं जा सकेंगे हमारी तो जो शिक्षक वर्ग एवं को यही अपील है कि वे लोकतंत्र प्रिया में अपना-अपना हिस्सा जरूर डालें ताकि जो देश की 125 करोड़ जनता का 125 करोड़ जनता के लिए जो नीतियां बनती है उसमें कम से कम जो नीति धारक है जो नीति बनाने वाले हैं वह पढ़े लिखे लोग ही अपराधियों क्योंकि जैसे लोग बैठेंगे जैसे लोकनीति बनाएंगे वह अपने हिसाब से बुलाएंगे अगर अपराधी बैठे हैं तो अपराधी तो आपने तो आम लोगों का तो पैदा को देखेंगे शिक्षक लोगों को राजनीति में हिस्सा लेना चाहिए

yah hamare desh ki dekh trasadi bhi hai ki jo shikshak bharatiya hai vaah raajneeti mein bhag nahi lete yahi karan hai ki jab is jo loktantra kya hai usme hissa nahi lete ja vote dalne jaate isi karan mein jo ashikshit log hai vaah vidhan sabha lok sabha aur rajya sabha mein baithkar desh ka desh ke liye kaanoon banate hain agar yahi padha likha varg agar yahi padha likha band matdan booth tak matdan booth par jaakar apne vote ka istemal karega tu jo shikshak aur apradhi log hain vaah vidhan sabha aur lok sabha mein nahi ja sakenge hamari toh jo shikshak varg evam ko yahi appeal hai ki ve loktantra priya mein apna apna hissa zaroor Daalein taki jo desh ki 125 crore janta ka 125 crore janta ke liye jo nitiyan banti hai usme kam se kam jo niti dharak hai jo niti banane waale hain vaah padhe likhe log hi apradhiyon kyonki jaise log baitheange jaise lokniti banayenge vaah apne hisab se bulaayenge agar apradhi baithe hain toh apradhi toh aapne toh aam logo ka toh paida ko dekhenge shikshak logo ko raajneeti mein hissa lena chahiye

यह हमारे देश की देख त्रासदी भी है कि जो शिक्षक भारतीय है वह राजनीति में भाग नहीं लेते यही

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सामान्यतया अपने तक के अनुभव में मैंने पाया है कि समाज का वह तबका जो एक सीमा तक सेक्सी शॉट शिक्षित हो जाता है इसके बाद वह खुद को इस कदर बुद्धिजीवी मानने लगता है कि उसको निजी स्वार्थ से इतर कुछ दिखता ही नहीं है जिसकी वजह से वह सहित को ही साधने में लगे रहते हैं और उन्हें परहित से कोई मतलब नहीं रह जाता इस वजह से हो या तो राजनीति में भाग नहीं लेते और अगर उनमें से कुछ अपवाद के रूप में भाग लेते भी हैं तो वह उज्जवल राजनीति नहीं बल्कि एक अस्वस्थ राजनीति का हिस्सा होता है उसमें भी वह अपना सहित खोजते हैं और अपनी जेब जेब भरने में लगे रहते हैं

samanyataya apne tak ke anubhav me maine paya hai ki samaj ka vaah tabaka jo ek seema tak sexy shot shikshit ho jata hai iske baad vaah khud ko is kadar buddhijeevi manne lagta hai ki usko niji swarth se itra kuch dikhta hi nahi hai jiski wajah se vaah sahit ko hi sadhane me lage rehte hain aur unhe parhit se koi matlab nahi reh jata is wajah se ho ya toh raajneeti me bhag nahi lete aur agar unmen se kuch apavad ke roop me bhag lete bhi hain toh vaah ujjawal raajneeti nahi balki ek aswasth raajneeti ka hissa hota hai usme bhi vaah apna sahit khojate hain aur apni jeb jeb bharne me lage rehte hain

सामान्यतया अपने तक के अनुभव में मैंने पाया है कि समाज का वह तबका जो एक सीमा तक सेक्सी शॉट

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अभी की पॉलिटिक्स इंडिया का पॉलीटिकल की तरह से हो गया कि आप कितना झूठ बोला कि आप मान लेते हैं आपको आप पॉलिटिक्स नाम ही गंदा हो गया एक तरफ से कोई उस में जाना नहीं चाहता है अब जैसे जैसे कि अभी हमारी तत्कालीन सरकार है अभी हम केवल में मैं तो हमारे से सदर अस्पताल हुआ तो यहां तो आपको सुविधा मिलनी चाहिए लेकिन विशेष सुविधा मिली कि नहीं पाता लोगों को अभी लोगों को बेसिक सुविधा नहीं मिल पा रहा है और पढ़े-लिखे नहीं चाहते हैं क्योंकि पहले जो हमारे नेता लोग तो वह जो बोलते थे वह होता था करते थे अब ऐसा कोई कुछ नहीं करता है

abhi ki politics india ka political ki tarah se ho gaya ki aap kitna jhuth bola ki aap maan lete hain aapko aap politics naam hi ganda ho gaya ek taraf se koi us mein jana nahi chahta hai ab jaise jaise ki abhi hamari tatkalin sarkar hai abhi hum keval mein main toh hamare se sadar aspatal hua toh yahan toh aapko suvidha milani chahiye lekin vishesh suvidha mili ki nahi pata logo ko abhi logo ko basic suvidha nahi mil paa raha hai aur padhe likhe nahi chahte hain kyonki pehle jo hamare neta log toh vaah jo bolte the vaah hota tha karte the ab aisa koi kuch nahi karta hai

अभी की पॉलिटिक्स इंडिया का पॉलीटिकल की तरह से हो गया कि आप कितना झूठ बोला कि आप मान लेते ह

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मित्रों जय हिंद नमस्कार आज का सवाल है ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग नहीं लेते हैं दोस्तों इस सवाल का जवाब देने के लिए मेरे सामने कई प्रश्न आ रहे हैं शिक्षित लोग बचपन से ही अपने परिवार के और अपने माहौल के ऐसी व्यवस्था में फंसे हुए कि मतलब उनका बचपन और उनका एजुकेशन और उन पर होने वाले संस्कार उनको ऐसे बताते हैं कि अच्छी पढ़ाई करो अच्छे इंसान बनो अच्छे नंबर लाओ जैसे-जैसे वह बच्चा बचपन से लेकर कॉलेज तक पढ़े पूरी करता है उसके आसपास के मांस कॉल में उसे ऐसे संस्कार दिए जाते हैं कि उसे बस एक अच्छा इंसान बनना है अच्छा एजुकेशन करना है अच्छी लाइफ जीनी है नौकरी करनी है क्या कोई वेबसाइट करना है तो बस उसी ही माहौल में उसको बड़ा किया जाता है मतलब उसका पालन पोषण होता है अब शिक्षित लोगों का यह बड़ा बैकवर्ड प्वाइंट है कि राजनीति के बारे में वह लोग चर्चा तो करते हैं पर भाग नहीं लेते वह भी व्यवस्था में जाना ही नहीं चाहते क्योंकि उनको ऐसे लगता है कि राजनेता बनना आम आदमी का खेल नहीं है राजनीति हमारा काम नहीं है राजनीति में हम नहीं आ सकते हैं राजनीति गंदा खेल राजनीति से हमें जोड़ना नहीं है हमें अपने घर-परिवार कितनी बातों में व्यस्त रहना है तो बताइए मित्रों अगर ऐसी सोच रखे वह इंसान जी रहा है उसे सिर्फ उसके परिवार की और उसके अपने आपकी फिक्र है उसे देश की फिक्र नहीं है उसे ना तो समाज की नाइस व्यवस्था की कोई फिकर है जिसे वह बदलना चाहता है अगर वह अंदर के पूरे विचारों के साथ अपने देव को छेड़ देगा कि नहीं इस व्यवस्था को मैं बदलूंगा इस सिस्टम को में बदलना चाहता हूं मुझे मेरे देश के लिए कुछ करना है मैं अच्छे कार्य करना चाहता हूं यह जो भावना लेकर जो इंसान जीता है वही इंसान राजनीति में आ सकता है भले फिरोक गली का प्रश्न सफाई का प्रश्न पानी व्यवस्था हो लाइट हो अपने आस पास होने वाले अपराधों का विषय हो कोई भी गलत काम हो रहा है चोरी हो रही है अन्याय हो रहा है उसके खिलाफ अगर वह आवाज उठाने की हिम्मत करता है वह सवाल उसके मन में आता है कि क्या मैं यह बदल नहीं सकता हूं इस व्यवस्था को बदलने के लिए मेरे कोई चार्ज नहीं है मैं ऐसा कुछ कदम उठा सकता हूं जिसकी वजह से मेरी राजनीति या मेरा अगला प्रश्न अगला भविष्य में अपने बच्चों को अच्छा देना चाहता हूं जैसे अपने देश के पंतप्रधान अभी हम लोगों को यही बात बता दें कि अपने देश को आगे ले जाना है बदलना है और इस व्यवस्था को बदलना है तो उन्होंने चाय बेचते हुए पंत प्रधान पद हासिल किया इस सफर में उन्होंने कई संकटों को कई प्रश्नों को अपने जीवन में पेश किया और वह आज वॉइस बड़े पद पर जा पहुंचे हैं कि पूरे वर्ल्ड का मतलब पूरी दुनिया को अपनी दुनिया में पृथ्वी पर जो 200 देश है सबको एक कामयाब प्रधानमंत्री के रूप में अपना प्रजेंटेशन दिया गया है तो मित्रों कहने का मतलब यह है कि कोई भी आम आदमी अशिक्षित आदमी राजनीति में भाग नहीं लेता है इसका कारण यही है कि वह इस झंझट में पड़ना नहीं चाहते हैं उनको यह झंझट नहीं चाहिए ज्यादा जिम्मेदारी हो लेना नहीं चाहते इसीलिए और आदमी जो भाग नहीं लेते हैं मेरा इन सभी लोगों से एक ही सवाल है अपना कोई उत्तरदायित्व नहीं है हमारी जिम्मेदारी नहीं है हम इस देश के प्रति अपना कुछ भी जिम्मेदारी लेने का प्रयास नहीं कर सकते क्या हमारा जीवन सिर्फ सीमित रहेगा हम सिर्फ अपने बच्चों के लिए पत्नी के लिए मां-बाप के लिए भाई बहन के लिए जिएंगे हमारा देश हमारा समाज के हमारे लिए कोई महत्व नहीं रखता है मित्रों शिक्षित लोग इस भारत को और ज्यादा आगे ले जा सकते हैं तो मेरी सभी मित्रों से विनती है कि ज्यादा से ज्यादा शिक्षित लोग इस राजनीति में आना चाहिए और इस देश को बदलना चाहिए भले आप गली से लेकर आपका जो भी सफर हो आप तय कर सकते हैं पर आप सभी को कोशिश जरूर करनी चाहिए आपको सफलता मिले या ना मिले वह बात की बात है लेकिन आपने कोशिश नहीं की यह गलत बात है तो मैं फिर से आपको सभी मित्रों को एक बार सच्चे दिल से आह्वान करता हूं कि अपने परिवार से अपने मित्रों से सभी से एक बार आप जरूर प्रश्न पूछे कि मैं राजनीति में आ सकता हूं अगर वह लोग कहते हैं आपके अंदर वह घर से और आपके अंदर टैलेंट है तो जरूर आप कोशिश कीजिए मुझे यकीन है आप आपके गांव में आपके शहर में आपके जिले में आपके देश में बदलाव ला सकते हैं मित्रों आपको मेरी आज के बाद कैसी लगी आप जरूर मुझे कमेंट में डालिए और में अनेक सवालों का जवाब देना चाहता हूं यह मेरी शुरुआती कोशिश है जो विचार में करता हूं वह विचार में आपके आप तक शेयर करना चाहता हूं इसके आगे जो भी सवाल अच्छे लगेंगे उन सवालों पर में जरूर जवाब देने की कोशिश करूंगा आज के लिए नहीं रुकता हूं जय हिंद जय महाराष्ट्र जय शिवाजी

mitron jai hind namaskar aaj ka sawaal hai jyadatar shikshit bharatiya raajneeti me bhag nahi lete hain doston is sawaal ka jawab dene ke liye mere saamne kai prashna aa rahe hain shikshit log bachpan se hi apne parivar ke aur apne maahaul ke aisi vyavastha me fanse hue ki matlab unka bachpan aur unka education aur un par hone waale sanskar unko aise batatey hain ki achi padhai karo acche insaan bano acche number laao jaise jaise vaah baccha bachpan se lekar college tak padhe puri karta hai uske aaspass ke maas call me use aise sanskar diye jaate hain ki use bus ek accha insaan banna hai accha education karna hai achi life gini hai naukri karni hai kya koi website karna hai toh bus usi hi maahaul me usko bada kiya jata hai matlab uska palan poshan hota hai ab shikshit logo ka yah bada backward point hai ki raajneeti ke bare me vaah log charcha toh karte hain par bhag nahi lete vaah bhi vyavastha me jana hi nahi chahte kyonki unko aise lagta hai ki raajneta banna aam aadmi ka khel nahi hai raajneeti hamara kaam nahi hai raajneeti me hum nahi aa sakte hain raajneeti ganda khel raajneeti se hamein jodna nahi hai hamein apne ghar parivar kitni baaton me vyast rehna hai toh bataiye mitron agar aisi soch rakhe vaah insaan ji raha hai use sirf uske parivar ki aur uske apne aapki fikra hai use desh ki fikra nahi hai use na toh samaj ki nice vyavastha ki koi fikar hai jise vaah badalna chahta hai agar vaah andar ke poore vicharon ke saath apne dev ko ched dega ki nahi is vyavastha ko main badlunga is system ko me badalna chahta hoon mujhe mere desh ke liye kuch karna hai main acche karya karna chahta hoon yah jo bhavna lekar jo insaan jita hai wahi insaan raajneeti me aa sakta hai bhale firok gali ka prashna safaai ka prashna paani vyavastha ho light ho apne aas paas hone waale apradho ka vishay ho koi bhi galat kaam ho raha hai chori ho rahi hai anyay ho raha hai uske khilaf agar vaah awaaz uthane ki himmat karta hai vaah sawaal uske man me aata hai ki kya main yah badal nahi sakta hoon is vyavastha ko badalne ke liye mere koi charge nahi hai main aisa kuch kadam utha sakta hoon jiski wajah se meri raajneeti ya mera agla prashna agla bhavishya me apne baccho ko accha dena chahta hoon jaise apne desh ke pantpradhan abhi hum logo ko yahi baat bata de ki apne desh ko aage le jana hai badalna hai aur is vyavastha ko badalna hai toh unhone chai bechte hue pant pradhan pad hasil kiya is safar me unhone kai sankaton ko kai prashnon ko apne jeevan me pesh kiya aur vaah aaj voice bade pad par ja pahuche hain ki poore world ka matlab puri duniya ko apni duniya me prithvi par jo 200 desh hai sabko ek kamyab pradhanmantri ke roop me apna prajenteshan diya gaya hai toh mitron kehne ka matlab yah hai ki koi bhi aam aadmi ashikshit aadmi raajneeti me bhag nahi leta hai iska karan yahi hai ki vaah is jhanjhat me padhna nahi chahte hain unko yah jhanjhat nahi chahiye zyada jimmedari ho lena nahi chahte isliye aur aadmi jo bhag nahi lete hain mera in sabhi logo se ek hi sawaal hai apna koi uttardayitva nahi hai hamari jimmedari nahi hai hum is desh ke prati apna kuch bhi jimmedari lene ka prayas nahi kar sakte kya hamara jeevan sirf simit rahega hum sirf apne baccho ke liye patni ke liye maa baap ke liye bhai behen ke liye jeeenge hamara desh hamara samaj ke hamare liye koi mahatva nahi rakhta hai mitron shikshit log is bharat ko aur zyada aage le ja sakte hain toh meri sabhi mitron se vinati hai ki zyada se zyada shikshit log is raajneeti me aana chahiye aur is desh ko badalna chahiye bhale aap gali se lekar aapka jo bhi safar ho aap tay kar sakte hain par aap sabhi ko koshish zaroor karni chahiye aapko safalta mile ya na mile vaah baat ki baat hai lekin aapne koshish nahi ki yah galat baat hai toh main phir se aapko sabhi mitron ko ek baar sacche dil se aahvaan karta hoon ki apne parivar se apne mitron se sabhi se ek baar aap zaroor prashna pooche ki main raajneeti me aa sakta hoon agar vaah log kehte hain aapke andar vaah ghar se aur aapke andar talent hai toh zaroor aap koshish kijiye mujhe yakin hai aap aapke gaon me aapke shehar me aapke jile me aapke desh me badlav la sakte hain mitron aapko meri aaj ke baad kaisi lagi aap zaroor mujhe comment me daaliye aur me anek sawalon ka jawab dena chahta hoon yah meri shuruati koshish hai jo vichar me karta hoon vaah vichar me aapke aap tak share karna chahta hoon iske aage jo bhi sawaal acche lagenge un sawalon par me zaroor jawab dene ki koshish karunga aaj ke liye nahi rukata hoon jai hind jai maharashtra jai shivaji

मित्रों जय हिंद नमस्कार आज का सवाल है ज्यादातर शिक्षित भारतीय राजनीति में भाग नहीं लेते है

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Amit Alok

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जेनरेशन ऑफ पॉलिटिक्स इज ऑल टाइम हाई अभी पॉलिटिक्स का जो d-generation है वह काफी है आई हो गया है मतलब मोरल पॉलिटिक्स तो रहा ही नहीं और इस कारण लोग इससे पॉलिटिक्स 9th वाइट करते हैं कुछ लेकर आगे बढ़ने की कोशिश करते हैं तो वैसे लोग अभी भी हैं और आ रहे हैं पॉलिटिक्स में लेकिन इन जनरल यूज कार

generation of politics is all time high abhi politics ka jo d generation hai vaah kaafi hai I ho gaya hai matlab moral politics toh raha hi nahi aur is karan log isse politics 9th white karte hain kuch lekar aage badhne ki koshish karte hain toh waise log abhi bhi hain aur aa rahe hain politics mein lekin in general use car

जेनरेशन ऑफ पॉलिटिक्स इज ऑल टाइम हाई अभी पॉलिटिक्स का जो d-generation है वह काफी है आई हो

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Sharvan Kumar

Business Owner

0:29
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए ज्यादातर शिक्षित लोग भारत में राजनीतिक में भाग इसलिए नहीं लेते हैं क्योंकि हमारे भारत देश में राजनीतिक जो होती है वह जा कहीं ना कहीं जाति के आधार पर होती है भेदभाव के आधार पर होता है इसलिए हमारे देश के शिक्षित लोग राजनीति में भाग लेना नहीं चाहते हैं

dekhiye jyadatar shikshit log bharat me raajnitik me bhag isliye nahi lete hain kyonki hamare bharat desh me raajnitik jo hoti hai vaah ja kahin na kahin jati ke aadhar par hoti hai bhedbhav ke aadhar par hota hai isliye hamare desh ke shikshit log raajneeti me bhag lena nahi chahte hain

देखिए ज्यादातर शिक्षित लोग भारत में राजनीतिक में भाग इसलिए नहीं लेते हैं क्योंकि हमारे भार

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Sa Sha

Journalist since 1986

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

एक बार किसी विश्वविद्यालय में राहुल गांधी के आर्थिक वहां उन्होंने युवा वर्ग को राजनीति में अपना कैरियर बनाने का सुझाव दे डाला युवा वर्ग का राजनीति से जुड़ना और राजनीति को करियर के तौर पर अपना नाम तो बातें हैं वैसे तो राजनीति से कोई भी अछूता नहीं है लेकिन राजनीति नौकरी और व्यवसाय खेती की तरह आजीविका नहीं होनी चाहिए ऐसा हो रहा है इसलिए हमारी राजनीति भ्रष्ट होती जा रही है मेरा मानना है कि राजनीति अब देश या जनसेवा से जुड़ा मामला कतई नहीं रह गया है पर हां आज देश की राजनीति में फैली गंदगी को साफ करने के लिए जरूरी है कि शिक्षित युवा वर्ग राजनीति में अगर ऐसा होता है तो यह अच्छा ही होगा यहां यह भी कहना चाहूंगी कि राजनीति का अर्थ केवल चुनाव लड़ना नहीं है क्रिकेट सिनेमा सोशल मीडिया में उल्टी रहने के बजाय युवा पीढ़ी राजनीति सोच से ऊपर उठकर देश में बदलाव के मद्देनजर भ्रष्टाचार महंगाई बेरोजगारी खेती और किसान की समस्या जैसे मुद्दों पर सरकार का ध्यान खींचने में सक्रिय देश की समस्याओं के प्रति संवेदनशील हो और अपनी योग्यता और ऊर्जा के अनुरूप देश को समाधान का रास्ता दिखाएं

ek chahiye baar kisi vishwavidyala mein rahul gandhi ke aarthik wahan unhone yuva varg ko rajneeti mein apna carrier banane ka chahiye sujhaav de dala yuva varg ka chahiye rajneeti se judana aur rajneeti ko career ke taur par apna naam to batein hain waise to rajneeti se koi bhi achuta nahi hai lekin rajneeti naukri aur vyavasaya kheti ki tarah aajiwika nahi honi chahiye chahiye aisa ho raha hai isliye hamari rajneeti bhrasht hoti ja rahi hai mera manana hai ki rajneeti ab desh ya jansewa se juda maamla qty nahi rah gaya hai par haan aaj desh ki rajneeti mein faili gandagi ko saaf karne ke liye zaroori hai ki shikshit yuva varg rajneeti mein chahiye agar aisa hota hai to yeh accha hi hoga yahan yeh bhi kehna chahungi ki rajneeti ka chahiye arth kewal chunav ladna nahi hai chahiye cricket cinema social media chahiye mein ulti rehne ke bajay yuva pidhi rajneeti soch se upar uthakar desh mein badlav ke maddenajar bhrashtachar mahangai berojgari kheti aur kisan chahiye ki samasya jaise muddon par sarkar ka chahiye dhyan kheenchne mein sakriy desh ki samasyaon ke prati samvedansheel ho aur apni yogyata aur urja ke anurup desh ko samadhan ka chahiye rasta dikhaen

एक बार किसी विश्वविद्यालय में राहुल गांधी के आर्थिक वहां उन्होंने युवा वर्ग को राजनीति में

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