भारतीयों में ऐसी क्या कमी है कि वह जाति और धर्म के आधार पर वोट देते हैं?...


user

Vatsal

Engineering Student

1:26
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए भारत जो देश है उसमे अनेक प्रकार की जाती के लोग अनेक धर्म के लोग रहते हैं तो होता क्या है कि यहां पर यह जो आरक्षण वाली चीजें इसने हमारे देश को बांट दिया है जो राजनीति उसने हमारे देश को बांट दिया हम क्या करते हैं किसी एक धर्म को जादा पुरा रेडी देकर दूसरे को डोमिनेटिंग करते जिसका जो भी लाइक अपना धर्म होता है जाति होती है उसको वह तवज्जो देता है जिससे कि हर एक इंसान ऐसा करने लगता है और जाति और धर्म के आधार पर बंटवारा होने लगता है इसीलिए जब चुनाव आते हैं कोई भी राजनेता आखिरकार जातीय धर्म के नाम पर आ जाता है जिससे कि उस जाती है उस धर्म का इंसान एक मत हो जाए और इस तरीके की चौकी यह जो एक क्राइटेरिया बन गया है 10 जाति और धर्म का हर इंसान अपने को एक महसूस करता है कि हां यह मैं अपने ग्रुप को सपोर्ट करना है यदि हम अपने ग्रुप को सपोर्ट नहीं करेंगे किसी दूसरे जातीय धर्म को करेंगे तो वह गलत होगा तो इसीलिए जस्ट बिकॉज़ राजनीति और यह आरक्षण वगैरह की चीजों ने हमारे देश को बांट दिया है इस ग्रुप में तो हर कोई अपने ग्रुप को सपोर्ट करना चाहता है तो इसी वजह से यह जो चीज है खत्म होने के बजाए और ज्यादा बढ़ती जा रही है और पॉलिटिशंस इसका भरपूर फायदा उठाकर बोर्ड ले रहा है

dekhiye bharat jo desh hai usme anek prakar ki jaati ke log anek dharm ke log rehte hai toh hota kya hai ki yahan par yah jo aarakshan wali cheezen isne hamare desh ko baant diya hai jo raajneeti usne hamare desh ko baant diya hum kya karte hai kisi ek dharm ko zyada pura ready dekar dusre ko domineting karte jiska jo bhi like apna dharm hota hai jati hoti hai usko vaah tavajjo deta hai jisse ki har ek insaan aisa karne lagta hai aur jati aur dharm ke aadhaar par batwara hone lagta hai isliye jab chunav aate hai koi bhi raajneta aakhirkaar jatiye dharm ke naam par aa jata hai jisse ki us jaati hai us dharm ka insaan ek mat ho jaaye aur is tarike ki chowki yah jo ek criteria ban gaya hai 10 jati aur dharm ka har insaan apne ko ek mehsus karta hai ki haan yah main apne group ko support karna hai yadi hum apne group ko support nahi karenge kisi dusre jatiye dharm ko karenge toh vaah galat hoga toh isliye just because raajneeti aur yah aarakshan vagera ki chijon ne hamare desh ko baant diya hai is group mein toh har koi apne group ko support karna chahta hai toh isi wajah se yah jo cheez hai khatam hone ke bajaye aur zyada badhti ja rahi hai aur politicians iska bharpur fayda uthaakar board le raha hai

देखिए भारत जो देश है उसमे अनेक प्रकार की जाती के लोग अनेक धर्म के लोग रहते हैं तो होता क्य

Romanized Version
Likes  2  Dislikes    views  10
WhatsApp_icon
6 जवाब
qIcon
ask
ऐसे और सवाल
Loading...
Loading...
user

Kunjansinh Rajput

Aspiring Journalist

1:24
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मेरी सबसे अधिक भारत के लोग अभी तक जाति और धर्म के जो मुद्दे है वह अभी तक समझ नहीं पाए हैं अगर हम देखें सदियों से जो जाति और धर्म के मुद्दे चल रहे हैं इस से 1 वर्षों से भारत के लोगों के लिए जाति और धर्म एक बहुत महत्व की चीज है अगर अनदेखी जितने भी भारत में हिंसा हुआ वश में जातीय धर्म एक बहुत ही बड़ा है नशा है अभी भी हम दूसरों दूसरे लोगों को जाति और धर्म के आधार पर चर्च करते हैं अगर हमको यह पॉलिटिशंस धर्म और जाति के आधार पर ही वोट देते हैं अगर हमसे किए कई सारी पार्टी है जैसे BJP और कांग्रेस है जिन्होंने जाति और धर्म के वोट के हिसाब से वोट मांगे और लोगों ने वोट दिए भी है तो मेरे हिसाब से अब यह समय आ चुका है कि अगर हम जाति और धर्म में एकता मां ने हम लोगों को या राजनेता को जाती धर्म के हिसाब से ना देखे अगर जिस दिन भारतीय लोग इस चीज को देखना बंद कर देंगे या इस पर एक पॉजिटिव क्यों लगेंगे तो उसी टाइम राजनेता भी चीज को बंद कर देंगे और राजनेताओं को भी जाति और धर्म के आधार पर वोट बिल्कुल नहीं मांगना चाहिए क्योंकि इससे सोसाइटी में एकता नहीं होगी एकता झुकता नहीं होगी और इससे हिंसा भी हो सकते हैं जो कि हमने पहले देखे हैं

meri sabse adhik bharat ke log abhi tak jati aur dharm ke jo mudde hai vaah abhi tak samajh nahi paye hain agar hum dekhen sadiyon se jo jati aur dharm ke mudde chal rahe hain is se 1 varshon se bharat ke logo ke liye jati aur dharm ek bahut mahatva ki cheez hai agar andekha jitne bhi bharat mein hinsa hua vash mein jatiye dharm ek bahut hi bada hai nasha hai abhi bhi hum dusro dusre logo ko jati aur dharm ke aadhaar par church karte hain agar hamko yah politicians dharm aur jati ke aadhaar par hi vote dete hain agar humse kiye kai saree party hai jaise BJP aur congress hai jinhone jati aur dharm ke vote ke hisab se vote mange aur logo ne vote diye bhi hai toh mere hisab se ab yah samay aa chuka hai ki agar hum jati aur dharm mein ekta maa ne hum logo ko ya raajneta ko jaati dharm ke hisab se na dekhe agar jis din bharatiya log is cheez ko dekhna band kar denge ya is par ek positive kyon lagenge toh usi time raajneta bhi cheez ko band kar denge aur rajnetao ko bhi jati aur dharm ke aadhaar par vote bilkul nahi maangna chahiye kyonki isse society mein ekta nahi hogi ekta jhukta nahi hogi aur isse hinsa bhi ho sakte hain jo ki humne pehle dekhe hain

मेरी सबसे अधिक भारत के लोग अभी तक जाति और धर्म के जो मुद्दे है वह अभी तक समझ नहीं पाए हैं

Romanized Version
Likes  1  Dislikes    views  9
WhatsApp_icon
play
user

amitkul

CA student,pursuing bcom too

1:28

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आधे कि हमारे भारतीय संस्कृति में अलग-अलग तरह के जाती है धर्म है और लोगों को ऐसा लगता है कि अगर अपने जाति वाला जाने अपने धर माला अपनी भाषा वाला वह हमारी बात समझेगा हमसे अच्छे से बात करके रहेगा हमारे साथ हमारा साथ देगा हमारी बातें सुनेगा हमारी मदद करेगा उनका मानना हो गया एक मेंटलिटी सी हो गई है जिसकी पूरी तरह से अभी की जनता को दोष नहीं दिया सजा दिया जा सकता पुराने थोड़े समय पहले जो राजनेताओं ने अलग-अलग चालीसा लिखकर जातिवाद और धर्म पर जो झगड़े कर आए हैं जो राइट्स हुए मुंबई में मुंबई में पूरे भारत में जो राइट्स हुए थे यह उन्हीं के नतीजे का परिणाम हमें दिखाई दे रहा है कि लोगों को ना दूसरे जातियों पर के नेताओं पर जो है विश्वास कम सा हो गया है उन्हें लगता है कि यह हमारे लिए कोई काम नहीं करने वाले तो उसके लिए उन उन के उन नेताओं को वोट नहीं दे पाते वोट नहीं दिया जाता तो इसीलिए ऐसे यह काफी बहुत बड़ी जो 1 किलो है हमारे इंडियन सिस्टम में भारतीय सिस्टम में कि लोग चाहती और जातिवाद धर्म पर वोट देते हैं ना कि नेता की काबिलियत पर वोट देते

aadhe ki hamare bharatiya sanskriti mein alag alag tarah ke jaati hai dharm hai aur logo ko aisa lagta hai ki agar apne jati vala jaane apne dhar mala apni bhasha vala vaah hamari baat samjhega humse acche se baat karke rahega hamare saath hamara saath dega hamari batein sunegaa hamari madad karega unka manana ho gaya ek mentaliti si ho gayi hai jiski puri tarah se abhi ki janta ko dosh nahi diya saza diya ja sakta purane thode samay pehle jo rajnetao ne alag alag chalisa likhkar jaatiwad aur dharm par jo jhagde kar aaye hain jo rights hue mumbai mein mumbai mein poore bharat mein jo rights hue the yah unhi ke natije ka parinam hamein dikhai de raha hai ki logo ko na dusre jaatiyo par ke netaon par jo hai vishwas kam sa ho gaya hai unhe lagta hai ki yah hamare liye koi kaam nahi karne waale toh uske liye un un ke un netaon ko vote nahi de paate vote nahi diya jata toh isliye aise yah kaafi bahut badi jo 1 kilo hai hamare indian system mein bharatiya system mein ki log chahti aur jaatiwad dharm par vote dete hain na ki neta ki kabiliyat par vote dete

आधे कि हमारे भारतीय संस्कृति में अलग-अलग तरह के जाती है धर्म है और लोगों को ऐसा लगता है कि

Romanized Version
Likes  2  Dislikes    views  9
WhatsApp_icon
user

.

Hhhgnbhh

2:00
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

यह तो समस्या है कि भारतीयों में ऐसी क्या कमी है कि वह धर्म के बेसिस पर वोट डालते हैं तो वह क्या है कि हमारे पूर्वज थे वह किसी और धर्म के लोगों पर इतना ट्रस्ट इतना विश्वास नहीं कर पाते थे जितना मैं अपने धर्म के लोगों पर करते थे कहीं ना कहीं यह भावना जुड़ी रहती थी कि अपने धर्म के लोग हमारे जैसे लोग और यह हम यह हमारी एक फेमली की तरह है यह हमें धोखा नहीं देंगे तो यह रीजन था यह काफी बड़ा रीजन था कि वह अपने धर्म के लोगों पर ज्यादा विश्वास करते थे अन्य दूसरे धर्म के लोगों से उसके बाद उनके बच्चे हुए ऐसे जनरेशन भर्ती नहीं तो जब हम छोटे थे बचपन से यही हमारे धर्म के लोग अच्छे होते हैं होते हैं बाकी धर्म के लोग नहीं होते इसके कारण दो बीवियां थी वह पीढ़ियों से चलता हुआ है और वह धर्म के लोगों को ही ज्यादा सपोर्ट अपने करते थे काफी लोग जो वोट मांगते वह भी धर्म के उस बेसिस पर मांगते हैं पर अगर हम आज कल टाइम देखे तो काफी बदलाव आ रहा है बेशक अभी भी कुछ लोग हिंदू धर्म के बेसिस पर वोट डालते हैं पर आप काफी बदलाव आ रहा है जो आज की नई पीढ़ी है हमारे जैसे वह धर्म को ना देखते हुए फायदे को देखते कि कौन सी पार्टी कितना फायदा करवाएगी देश को तो आज की सोच बदल रही है वह मेरे को लगता है टाइम के साथ-साथ यह सोच पूरी तरीके से भी बदल जाएगी तू यह सोचा यह तो प्रॉब्लम है इंडिया के अंदर धर्म के बेसिस पर वोट करने वाली इसको सिर्फ एक ही से खत्म कर सकती है अगर हम बच्चों को स्कूल टाइम सही है सिखाते हुए आएंगे धर्म से कुछ किसी का लेन-देन नहीं होता है धर्म के बीच पर फैसले नहीं लेनी चाहिए क्योंकि हम बच्चों को बचपन से ही अगर यह सिखा रहे हैं उनके पेरेंट्स धर्म में बहुत ही बड़ी चीज होती है और हमें धर्म के बेसिस पर लेने चाहिए पैसे धर्म पर भरोसा करना चाहिए तो इसी तरीके से हमें बचपन से उन्हें यह से खाना चाहिए उन्हें जागरुक करना चाहिए

yah toh samasya hai ki bharatiyon mein aisi kya kami hai ki vaah dharm ke basis par vote daalte hain toh vaah kya hai ki hamare purvaj the vaah kisi aur dharm ke logo par itna trust itna vishwas nahi kar paate the jitna main apne dharm ke logo par karte the kahin na kahin yah bhavna judi rehti thi ki apne dharm ke log hamare jaise log aur yah hum yah hamari ek femli ki tarah hai yah hamein dhokha nahi denge toh yah reason tha yah kaafi bada reason tha ki vaah apne dharm ke logo par zyada vishwas karte the anya dusre dharm ke logo se uske baad unke bacche hue aise generation bharti nahi toh jab hum chote the bachpan se yahi hamare dharm ke log acche hote hain hote hain baki dharm ke log nahi hote iske karan do biwiyaan thi vaah peedhiyon se chalta hua hai aur vaah dharm ke logo ko hi zyada support apne karte the kaafi log jo vote mangate vaah bhi dharm ke us basis par mangate hain par agar hum aaj kal time dekhe toh kaafi badlav aa raha hai beshak abhi bhi kuch log hindu dharm ke basis par vote daalte hain par aap kaafi badlav aa raha hai jo aaj ki nayi peedhi hai hamare jaise vaah dharm ko na dekhte hue fayde ko dekhte ki kaun si party kitna fayda karavaegi desh ko toh aaj ki soch badal rahi hai vaah mere ko lagta hai time ke saath saath yah soch puri tarike se bhi badal jayegi tu yah socha yah toh problem hai india ke andar dharm ke basis par vote karne wali isko sirf ek hi se khatam kar sakti hai agar hum baccho ko school time sahi hai sikhaate hue aayenge dharm se kuch kisi ka len then nahi hota hai dharm ke beech par faisle nahi leni chahiye kyonki hum baccho ko bachpan se hi agar yah sikha rahe hain unke parents dharm mein bahut hi badi cheez hoti hai aur hamein dharm ke basis par lene chahiye paise dharm par bharosa karna chahiye toh isi tarike se hamein bachpan se unhe yah se khana chahiye unhe jagruk karna chahiye

यह तो समस्या है कि भारतीयों में ऐसी क्या कमी है कि वह धर्म के बेसिस पर वोट डालते हैं तो वह

Romanized Version
Likes  1  Dislikes    views  9
WhatsApp_icon
user

Pragati

Aspiring Lawyer

0:58
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए हम भारतीयों को बहुत पहले से ही यह आदत पड़ी हुई है कि हम जाति और धर्म के आधार पर वोट देते हैं ना कि किसी की काबिलियत और उसके अच्छे कामों की वजह से क्योंकि जब हम छोटे होते हैं तब से ही हम अपने घर में धर्म जाति और आधी चीजों के बारे में सुनते हैं और उनके बारे में पता चलता है हम और उसी के साथ हमारे ओपिनियन बन जाता है कि हम अगर इस धर्म के हैं तो हम इसी धर्म के लोगों को वोट देंगे और अगर हम उसी जाती है तो मूर्ति जाति वालों को वोट देंगे और अगर हम नीची जाति के नेता और रणनीति से नीची जाति के लोगों को वोट देंगे क्योंकि हमें लगता है कि वही वही राजनेता हमारा हमारे बारे में कुछ कर सकता है या हमारी चीज़ें सुन सकता है जो हमारी जाति हमारे धर्म का है और दूसरी जाति वाले हमारी हमारी चीज़ें नहीं सुनेंगे ऐसा हमको लगता है और इसी वजह से हम अपने जाति और धर्म के आधार पर वोट देते

dekhiye hum bharatiyon ko bahut pehle se hi yah aadat padi hui hai ki hum jati aur dharm ke aadhaar par vote dete hai na ki kisi ki kabiliyat aur uske acche kaamo ki wajah se kyonki jab hum chote hote hai tab se hi hum apne ghar mein dharm jati aur aadhi chijon ke bare mein sunte hai aur unke bare mein pata chalta hai hum aur usi ke saath hamare opinion ban jata hai ki hum agar is dharm ke hai toh hum isi dharm ke logo ko vote denge aur agar hum usi jaati hai toh murti jati walon ko vote denge aur agar hum nichi jati ke neta aur rananiti se nichi jati ke logo ko vote denge kyonki hamein lagta hai ki wahi wahi raajneta hamara hamare bare mein kuch kar sakta hai ya hamari chize sun sakta hai jo hamari jati hamare dharm ka hai aur dusri jati waale hamari hamari chize nahi sunenge aisa hamko lagta hai aur isi wajah se hum apne jati aur dharm ke aadhaar par vote dete

देखिए हम भारतीयों को बहुत पहले से ही यह आदत पड़ी हुई है कि हम जाति और धर्म के आधार पर वोट

Romanized Version
Likes    Dislikes    views  197
WhatsApp_icon
user

Ridhima

Mass Communications Student

0:50
Play

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

आप अगर इंडियन हिस्ट्री देखे तो इंडियन संस्कृति को इंडियन हिस्ट्री है वह ज्यादा तक धर्म और जाति के नाम पर ही पूरा डिवाइडेड रहा है और उसी का बेच रहा है इंडियन हिस्ट्री में टाइपिंग को एक हो गया है वह मेंटलिटी बन गई सारी सोसाइटी कि क्यों लोग वोट भी वैसे भेजें कि अपने धर्म के और अपनी जाति के वैसे हिसाब से मेरे हिसाब से वही लग रहा है क्योंकि जब तक वह कमी हटेगी नहीं वह मेंटलिटी हटेगी नहीं कि यह मेरा धर्म का ही जो लड़ने जो खड़ा हुआ है इलेक्शन में वही कर सकता है मेरा मेरा दुख देख सकता है मेरा शौक देख सकता है तो वह जब तक वह मेंटलिटी थोड़ा वह चेंज नहीं होगा आई थिंक तब तक ऐसा ही चलता रहेगा

aap agar indian history dekhe toh indian sanskriti ko indian history hai vaah zyada tak dharm aur jati ke naam par hi pura divided raha hai aur usi ka bech raha hai indian history mein typing ko ek ho gaya hai vaah mentaliti ban gayi saree society ki kyon log vote bhi waise bheje ki apne dharm ke aur apni jati ke waise hisab se mere hisab se wahi lag raha hai kyonki jab tak vaah kami hategi nahi vaah mentaliti hategi nahi ki yah mera dharm ka hi jo ladane jo khada hua hai election mein wahi kar sakta hai mera mera dukh dekh sakta hai mera shauk dekh sakta hai toh vaah jab tak vaah mentaliti thoda vaah change nahi hoga I think tab tak aisa hi chalta rahega

आप अगर इंडियन हिस्ट्री देखे तो इंडियन संस्कृति को इंडियन हिस्ट्री है वह ज्यादा तक धर्म और

Romanized Version
Likes  4  Dislikes    views  26
WhatsApp_icon
qIcon
ask
QuestionsProfiles

Vokal App bridges the knowledge gap in India in Indian languages by getting the best minds to answer questions of the common man. The Vokal App is available in 11 Indian languages. Users ask questions on 100s of topics related to love, life, career, politics, religion, sports, personal care etc. We have 1000s of experts from different walks of life answering questions on the Vokal App. People can also ask questions directly to experts apart from posting a question to the entire answering community. If you are an expert or are great at something, we invite you to join this knowledge sharing revolution and help India grow. Download the Vokal App!