सत्याग्रह क्या है और गाँधीजी ने इसका इस्तेमाल क्यों किया?...


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सत्याग्रह जैसा कि इसका नाम ही बताता है, सत्य का आग्रह है| तो महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत्य से अंग्रेजों से लड़ने की ठानी, और उन्होंने सोचा कि हम अंग्रेजो को वैसे हरा नहीं पाएंगे, हम उन को देश से बाहर नहीं निकल पाएंगे| तो उन्होंने सत्याग्रह का आंदोलन शुरु किया और सबसे पहला ऐसा आंदोलन था 1917 में चंपावन में| चंपावन बिहार से उन्होंने सत्याग्रह का आंदोलन अंग्रेजो के खिलाफ शुरू किया, और बाद में उन्होंने बहुत सारे इस तरीके के प्रयोग किए, कि किस तरीके से नॉन कॉर्पोरेशन यानी कि अंग्रेजों के साथ सहयोग ना करके, जिसका हिंदी में असहयोग आंदोलन बोलते हैं, और उन्होंने फास्टिंग करके, जनता को जागरुक कर के, सत्याग्रह आंदोलन को आगे बढ़ाया| गांधी जी की फिलॉसफी यह थी, कि हम अंग्रेजों से लड़ नहीं सकते, तो हम को उनको ऐसा आग्रह करना है| हमको उनको ऐसा प्रयास करना है, बिना लड़े, बिना झगड़ा के, बिना हिंसा किए, कि वह देश छोड़ने पर मजबूर हो जाए| और बाद में जब एक समय बाद गांधी जी को यह लगा, कि अंग्रेजों को देश से निकालना ही सब कुछ नहीं है| तो गांधी जी ने सत्याग्रह का प्रयोग सामाजिक सुधार के लिए भी किया| क्योंकि उन्हें ये एहसास होने लग गया था, कि पॉलिटिकल इंडिपेंडेंट सब कुछ नहीं है, हमारे देश को सामाजिक सुधारों की बहुत ज्यादा जरूरत है| तो वहां पर उन्होंने सत्याग्रह मतलब जनता से आग्रह किया, कि कैसे हम अपने समाज में पहले सुधार लाएं और हमें बहुत ज्यादा प्रोग्रेस की जरूरत है देश की तरक्की के लिए|

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सत्याग्रह जैसा कि इसका नाम ही बताता है, सत्य का आग्रह है| तो महात्मा गांधी ने अहिंसा और सत

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