क्या भारत की प्रगति चाइना की तुलना में कम होने के कारण पश्चिमीकरण फैला है?...


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देखिये पाश्चातीकरण को मैं रीज़न नहीं मान सकता कि इस वजह से भारत की विकास दर चाइना से कम है, क्योंकि एक तो भारत में बहुत ज्यादा पाश्चातीकरण है, यह भी सही नहीं है| हम लोग इंग्लिश जरुर जादा जानते हैं क्योंकि हमारे यहां 200 सालों तक अंग्रेजों ने शासन किया| लेकिन बाकी चीजों में ऐसा भारत में कोई बहुत ज्यादा पाश्चातीकरण नहीं है, थोड़ा कुछ शहरों को छोड़ दो| उसमें भी बहुत सिलेक्टेड लोग है, अदरवाइज आज हमारे जो कल्चरल रूट्स से वह बहुत डीप है| अब आर्थिक डेवलपमेंट की बात आती है तो चाइना ने 1980 के दशक में ग्लोबलाइजेशन अपनी इकॉनमी में किया था| और वंहा पर कम्युनिस्ट गवर्मेंट रही है, जो हर गवर्नमेंट पॉलिसी को बहुत अच्छे से बहुत टाइटली इंप्लीमेंट कर पाती है| और हमने जो ग्लोबलाइजेशन की पॉलिसी कीवह करीब चाइना से 10 - 12 साल बाद शुरू की, उसके बावजूद भी हमारे यहां पर कोई गवर्नमेंट उतनी स्ट्रांग नहीं है, हमारे यहां पर कोलूशन गवर्मेंट रही है, डेमोक्रेटिक सेट अप है| एक कोशी सेटल स्ट्रक्चर है, स्टेट गवर्नमेंट अपने तरीके से काम करती हैं| तो वह जो सरकारी नीतियां हैं जिससे आर्थिक विकास हो सकता है उनके इंप्लीमेंटेशन में बहुत ज्यादा टाइम लग जाता है और वह बहुत स्लो तरीके से हो पाती है| जबकि चाइना में एक बहुत स्ट्रांग कम्युनिस्ट डेवलपमेंट है, और वहां पर वह अपनी आर्थिक विकास की नीतियों को बहुत स्ट्रांग ली लागू कर पाती हैं, इसके चलते चाइना में विकास दर तेज हुई है| जबकि हमारे यहां पर सोशल इश्यूज और करप्शन और लोकल पॉलिटिक्स अच्छी आर्थिक नीतियों को लागू भी नहीं होने देती है| पॉलिटिक्स के नाम पर उसका बहुत विरोध होता है, और हम एक डेमोक्रेटिक सेट अप है तो जनता यह सब इकनोमिक समझ नहीं सकती है| और वह दूसरी पार्टी आ जाती है, जो उन्हें फ्री की चीजें दे रहा होता है, उनको जनता वोट देती है उसके इकनोमिक कोन्सेक़ुएन्केस लोग समझते नहीं है| तो हमारे यहां पर आर्थिक डेवलपमेंट की दर इसलिए स्लो है, क्योंकि चाइना का उसका इंप्लीमेंटेशन हमसे बहुत अच्छा है|

dekhiye pashchatikaran ko main reason nahi maan sakta ki is wajah se bharat ki vikas dar china se kam hai kyonki ek toh bharat mein bahut zyada pashchatikaran hai yah bhi sahi nahi hai hum log english zaroor zyada jante hain kyonki hamare yahan 200 salon tak angrejo ne shasan kiya lekin baki chijon mein aisa bharat mein koi bahut zyada pashchatikaran nahi hai thoda kuch shaharon ko chhod do usmein bhi bahut selected log hai otherwise aaj hamare jo cultural roots se vaah bahut deep hai ab aarthik development ki baat aati hai toh china ne 1980 ke dashak mein globalization apni economy mein kiya tha aur vanha par communist government rahi hai jo har government policy ko bahut acche se bahut taitali implement kar pati hai aur humne jo globalization ki policy kivah kareeb china se 10 12 saal baad shuru ki uske bawajud bhi hamare yahan par koi government utani strong nahi hai hamare yahan par kolushan government rahi hai democratic set up hai ek koshi settle structure hai state government apne tarike se kaam karti hain toh vaah jo sarkari nitiyan hain jisse aarthik vikas ho sakta hai unke implementation mein bahut zyada time lag jata hai aur vaah bahut slow tarike se ho pati hai jabki china mein ek bahut strong communist development hai aur wahan par vaah apni aarthik vikas ki nitiyon ko bahut strong li laagu kar pati hain iske chalte china mein vikas dar tez hui hai jabki hamare yahan par social issues aur corruption aur local politics achi aarthik nitiyon ko laagu bhi nahi hone deti hai politics ke naam par uska bahut virodh hota hai aur hum ek democratic set up hai toh janta yah sab economic samajh nahi sakti hai aur vaah dusri party aa jaati hai jo unhe free ki cheezen de raha hota hai unko janta vote deti hai uske economic konsequenkes log samajhte nahi hai toh hamare yahan par aarthik development ki dar isliye slow hai kyonki china ka uska implementation humse bahut accha hai

देखिये पाश्चातीकरण को मैं रीज़न नहीं मान सकता कि इस वजह से भारत की विकास दर चाइना से कम है,

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