भारत में कृषि सब्सिडी की आवश्यकता क्यों है?...


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Harvinder kaur

Municipal councillor

1:17
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत एक कृषि प्रधान देश है और जो हमारे यहां की कृषि है वह बहुत कुछ मौसम पर निर्भर करती है हर जगह हमें पानी की किल्लत देखने को मिल जाती है कई क्षेत्रों में हरियाणा पंजाब उत्तर प्रदेश में तो वहां पर पानी की कमी नहीं है परंतु जो हमारे दूसरे क्षेत्र हैं जैसे राजस्थान है या उधर गुजरात और पाठक में हमें पानी की कमी देखने को मिल जाती है तो वहां पर हमारे यहां कृषि अच्छी तरह नहीं हो पाती जो उपज है हम वह पशुओं से उतनी अच्छी नहीं ले पाते तो इसमें कृषि प्रधान जो देश है उसमें सब्सिडी की किसानों को इसकी आवश्यकता पड़ती है कि उनके खर्चे बहुत ज्यादा हो जाते हैं जब वह कोई भी फसल बोते हैं उसमें दवाइयों का जो छिड़काव को करते हैं और उस पर ओलावृष्टि है कभी मौसम की मार यानी कि उसके पड़ जाती है तो इस नियम को सब्सिडी की बहुत आवश्यकता है क्योंकि के खर्चे पूरे नहीं होते और जो उसकी रेट है मार्केट रेट है चाहे वह गेहूं है वह चावल है उसके लिए गन्ने की फसल है तो फोन को उसका समर्थन मूल्य पूरी तरह से नहीं मिलता है इसलिए देश में सभी किसानों को सब्सिडी की आवश्यकता पड़ती है और यह सही भी है धन

bharat ek krishi pradhan desh hai aur jo hamare yahan ki krishi hai vaah bahut kuch mausam par nirbhar karti hai har jagah hamein paani ki killat dekhne ko mil jaati hai kai kshetro me haryana punjab uttar pradesh me toh wahan par paani ki kami nahi hai parantu jo hamare dusre kshetra hain jaise rajasthan hai ya udhar gujarat aur pathak me hamein paani ki kami dekhne ko mil jaati hai toh wahan par hamare yahan krishi achi tarah nahi ho pati jo upaj hai hum vaah pashuo se utani achi nahi le paate toh isme krishi pradhan jo desh hai usme subsidy ki kisano ko iski avashyakta padti hai ki unke kharche bahut zyada ho jaate hain jab vaah koi bhi fasal bote hain usme dawaiyo ka jo chhidkav ko karte hain aur us par olavrishti hai kabhi mausam ki maar yani ki uske pad jaati hai toh is niyam ko subsidy ki bahut avashyakta hai kyonki ke kharche poore nahi hote aur jo uski rate hai market rate hai chahen vaah gehun hai vaah chawal hai uske liye ganne ki fasal hai toh phone ko uska samarthan mulya puri tarah se nahi milta hai isliye desh me sabhi kisano ko subsidy ki avashyakta padti hai aur yah sahi bhi hai dhan

भारत एक कृषि प्रधान देश है और जो हमारे यहां की कृषि है वह बहुत कुछ मौसम पर निर्भर करती है

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

अब यह है कि कि जो किसान बूटा डिपेंडेबल वेदर यह आ रहा है आजकल लोग अगर आपकी जान अच्छा है ज्यादा अच्छा है उसके रिकॉर्डिंग पता लगती हो जाती है जिसके लिए सरकार को चाहिए इनको सब्सिडी देने पब्लिक

ab yah hai ki ki jo kisan butta dependable Weather yah aa raha hai aajkal log agar aapki jaan accha hai zyada accha hai uske recording pata lagti ho jaati hai jiske liye sarkar ko chahiye inko subsidy dene public

अब यह है कि कि जो किसान बूटा डिपेंडेबल वेदर यह आ रहा है आजकल लोग अगर आपकी जान अच्छा है ज्य

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Chandraprakash Joshi

Ex-AGM RBI & CEO@ixamBee.com

1:53
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में कृषि में सब्सिडी की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि एक तो अभी भी भारत की 55 से 60% जनता कृषि पर निर्भर है| भले ही कृषि का जीडीपी में योगदान आज 15 परसेंट हो गया है| जो एक आजादी के टाइम पर करीब 50% होता था| लेकिन उसके बावजूद भी क्योंकि हमारी बहुत ज्यादा जनता कृषि पर निर्भर है| अपने एंप्लॉयमेंट के लिए, अपने रोजगार के लिए और अपने जीवन यापन के लिए, तो कृषि क्षेत्र को बनाए रखना, प्रोस्परस होने देना हमारे देश के लिए बहुत ज्यादा जरूरी है| इतनी 50% से अधिक जनता इस पर निर्भर है| और हमारे यहां पर बहुत छोटी छोटी फ्रेगमेंनटेड लैंड होल्डिंगस है| कृषि में उतना मेकनाइजेशन है नहीं और होना भी मुश्किल है| क्योंकि लोगों के पास बहुत छोटी-छोटी जमीने है| उन पर उतना लार्ज स्केल का मेकनाइजेशन जैसे कि अगर यूएस में है| और बहुत सारी कंट्री में होता है| कि मशीने काम करती हैं| इवन फ़र्टिलाइज़र वह छोटे एरोप्लेन से डालते हैं| तो उससे कॉस्ट जो है, लागत जो है, कम हो जाती है| जबकि हमारे देश में बहुत सारा काम मैनुअल होता है| और कृषि में अच्छी लागत है| आज के डेट में अगर आप बात करें| एक और हम मजदूरों को एम नरेगा में मिनिमम जो रोजगार में जो पैसा देते हैं, वह भी ज्यादा हो गया| तो उन सब से लेबर का इनकम बढ़ने से और लेबर का वैज बढ़ने से कृषि में उत्पादन लागत बढ़ गई है| और हम कंपिट करते हैं ग्लोबल मार्केट में| तो हमको कही न कंही सब्सिडी देनी पड़ती है| क्योंकि हमारे यहां पर पर यूनिट प्रोडक्शन कम है| कृषि का आधुनिकरण उतना हुआ नहीं है| छोटी-छोटी जोते हैं मतलब खेत जो छोटे होते हैं| तो उसमें उसने लार्ज स्केल इंडसस्टरलाइजेशन, लार्ज स्केल मॉडर्नाइजेशन शायद पॉसिबल भी नहीं हो पाता है| इसके लिए हमारे यहां पर कृषि में सब्सिडी देनी पड़ती है|

bharat mein krishi mein subsidy ki avashyakta isliye hai kyonki ek toh abhi bhi bharat ki 55 se 60 janta krishi par nirbhar hai bhale hi krishi ka gdp mein yogdan aaj 15 percent ho gaya hai jo ek azadi ke time par kareeb 50 hota tha lekin uske bawajud bhi kyonki hamari bahut zyada janta krishi par nirbhar hai apne employment ke liye apne rojgar ke liye aur apne jeevan yaapan ke liye toh krishi kshetra ko banaye rakhna prosparas hone dena hamare desh ke liye bahut zyada zaroori hai itni 50 se adhik janta is par nirbhar hai aur hamare yahan par bahut choti choti fregamennated land holdings hai krishi mein utana meknaijeshan hai nahi aur hona bhi mushkil hai kyonki logo ke paas bahut choti choti jamine hai un par utana large scale ka meknaijeshan jaise ki agar US mein hai aur bahut saree country mein hota hai ki machinein kaam karti hain even fartilaizar vaah chote aeroplane se daalte hain toh usse cost jo hai laagat jo hai kam ho jaati hai jabki hamare desh mein bahut saara kaam manual hota hai aur krishi mein achi laagat hai aaj ke date mein agar aap baat kare ek aur hum majduro ko M nrega mein minimum jo rojgar mein jo paisa dete hain vaah bhi zyada ho gaya toh un sab se labour ka income badhne se aur labour ka vaij badhne se krishi mein utpadan laagat badh gayi hai aur hum compete karte hain global market mein toh hamko kahi na kahin subsidy deni padti hai kyonki hamare yahan par par unit production kam hai krishi ka aadhunikaran utana hua nahi hai choti choti jote hain matlab khet jo chote hote hain toh usme usne large scale indasastaralaijeshan large scale madarnaijeshan shayad possible bhi nahi ho pata hai iske liye hamare yahan par krishi mein subsidy deni padti hai

भारत में कृषि में सब्सिडी की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि एक तो अभी भी भारत की 55 से 60% जनता

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Hima Agarwal

Journalist

0:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मानती हूं कि जो किसान है उसको उसका लाभकारी मूल्य जो है वह नहीं मिल पाता है जो बोल उत्पाद में अपना पैसा लगाता है उसकी लागत लगातार बढ़ती जा रही है और जूस को मिलने वाला मुनाफा है वह बहुत कम होता जा रहा है इसलिए सब्सिडी कि उसको आवश्यकता है

maanati hoon ki jo kisan hai usko uska labhakari mulya jo hai vaah nahi mil pata hai jo bol utpaad mein apna paisa lagaata hai uski laagat lagatar badhti ja rahi hai aur juice ko milne vala munafa hai vaah bahut kam hota ja raha hai isliye subsidy ki usko avashyakta hai

मानती हूं कि जो किसान है उसको उसका लाभकारी मूल्य जो है वह नहीं मिल पाता है जो बोल उत्पाद म

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SUSHIL LAKRA

Politician

1:22
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

रामेंद्र रामेंद्र ना मरोड़ा खा जाए जिसके लिए एग्रीकल्चर को जोड़ दिया जाए कि छोड़ दिया जाए जहां पर पहुंचना चाहिए वह बेसिक सुविधा नहीं मिल पाता है या तो बोलेंगे हम आम आदमी के रूप में दिया जाए तो बहुत कुछ कर सकते हैं कर सकते हैं इस एग्जांपल मैं बोलता हूं इसमें नहीं हुआ है उसमें कभी भी तो नहीं कर पाते हैं यहां की अकड़ के यहां की कभी रोक तो का कोई इंतजाम पगली कटरा से नहीं है तो हमारे ही भाई लोगों को बिल्कुल भाभी भूमि बंजर पर हो गया

ramendra ramendra na maroda kha jaye jiske liye agriculture ko jod diya jaye ki chod diya jaye jaha par pahunchana chahiye wah basic suvidha nahi mil pata hai ya toh bolenge hum aam aadmi ke roop mein diya jaye toh bahut kuch kar sakte hain kar sakte hain is example main bolta hoon ismein nahi hua hai usme kabhi bhi toh nahi kar paate hain yahan ki akad ke yahan ki kabhi rok toh ka koi intajam pagli katra se nahi hai toh hamare hi bhai logo ko bilkul bhabhi bhoomi banjar par ho gaya

रामेंद्र रामेंद्र ना मरोड़ा खा जाए जिसके लिए एग्रीकल्चर को जोड़ दिया जाए कि छोड़ दिया जाए

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Deepak Verma

Journalist

0:26
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

किसी की मदद करते हैं

kisi ki madad karte hain

किसी की मदद करते हैं

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Minhaj Ahmed

Journalist

1:27
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

उसके बगैर भारत में पर डाल दिया गया है बहुत जरूरी है किसानों का कृषि में काम करने वाले लोग हैं उनको सुना जाए उनको समझा जाए उनके हाथ हो गया दिल खो गया 12 साल तो मतलब उसमें पानी भी है इसमें खेती दिखाई दिए उसने और 3 अन्य मजदूर भी है किसान को क्या मतलब फिर से जो है भारत की ऋण ऋण की दादा की जानी चाहिए * सरकार को बहुत ज्यादा प्रकाश पृथ्वी का क्षेत्रफल

uske bagair bharat mein par daal diya gaya hai bahut zaroori hai kisano ka krishi mein kaam karne wale log hain unko suna jaye unko samjha jaye unke hath ho gaya dil kho gaya 12 saal toh matlab usme pani bhi hai ismein kheti dikhai diye usne aur 3 anya majdur bhi hai kisan ko kya matlab phir se jo hai bharat ki rin rin ki dada ki jani chahiye * sarkar ko bahut zyada prakash prithvi ka kshetrafal

उसके बगैर भारत में पर डाल दिया गया है बहुत जरूरी है किसानों का कृषि में काम करने वाले लोग

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Varinder Pramod

Journalist

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

मैं भारत के जो पहले प्लानिंग कमीशन के विरोध में तुमसे तो देश की कौन खत्म हो जाएगी

main bharat ke jo pehle planning commision ke virodh mein tumse toh desh ki kaun khatam ho jayegi

मैं भारत के जो पहले प्लानिंग कमीशन के विरोध में तुमसे तो देश की कौन खत्म हो जाएगी

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Ghanshyam Mehar

Indian Politician

0:37

चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कृषि सब्सिडी की आवश्यकता क्यों है क्या आज देश का दुकान है वह बहुत आर्थिक दृष्टि से घिरा हुआ है लागत कमाई ₹1000 सब्सिडी नहीं होगी तो मुस्कान धीरे-धीरे काम को छोड़कर जा रहे पलायन करते जा रहे आत्महत्या का मुख्य कारण यह है

krishi subsidy ki avashyakta kyon hai kya aaj desh ka dukaan hai wah bahut aarthik drishti se ghira hua hai laagat kamai Rs subsidy nahi hogi toh muskaan dhire dhire kaam ko chhodkar ja rahe palayan karte ja rahe atmahatya ka mukhya kaaran yeh hai

कृषि सब्सिडी की आवश्यकता क्यों है क्या आज देश का दुकान है वह बहुत आर्थिक दृष्टि से घिरा हु

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

कृषि सब्सिडी के सभी है जो किसान है किसान को उसकी जो पसंद है उसकी पूरा पर उसका पूरा प्राइस लिमिटेड अब दिल्ली कहती किसान की जो किसान की फसल जो जिसको भी बोलते हैं उसकी के 32 वर्ष 1970 के बीच में जो एक नंबर का फेकू सरकारी एम्पलाई था उसकी जो 300 गुना 200 गुना बढ़कर सैलरी होगी गेहूं की बड़ी से 20 गुना इसलिए क्यों जून का वेतन कितना है हमारी कूटनीतिक जीत शाम को उसे हिसाब से अब 300 थी उसकी तो 60000 की बनती है कि कल कब श्रीदेवी की मौत हो गई थी उसके बीच में जो उसका नुकसान होता है इसलिए उसको सेक्स वीडियो

krishi subsidy ke sabhi hai jo kisan hai kisan ko uski jo pasand hai uski pura par uska pura price limited ab delhi kehti kisan ki jo kisan ki fasal jo jisko bhi bolte hain uski ke 32 varsh 1970 ke beech mein jo ek number ka fekun sarkari employee tha uski jo 300 guna 200 guna badhkar salary hogi gehun ki badi se 20 guna isliye kyon june ka vetan kitna hai hamari kutanitik jeet shaam ko use hisab se ab 300 thi uski toh 60000 ki banti hai ki kal kab sridevi ki maut ho gayi thi uske beech mein jo uska nuksan hota hai isliye usko sex video

कृषि सब्सिडी के सभी है जो किसान है किसान को उसकी जो पसंद है उसकी पूरा पर उसका पूरा प्राइस

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Rajesh Rishi

Indian Politician

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

जब सरकारें जनता के टैक्स के रूप में मोटा को सुनना शुरू कर दे तो अपने आप ही की जाती है

jab sarkaren janta ke tax ke roop mein mota ko sunana shuru kar de toh apne aap hi ki jati hai

जब सरकारें जनता के टैक्स के रूप में मोटा को सुनना शुरू कर दे तो अपने आप ही की जाती है

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Karan Janwa

Automobile Engineer

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

देखिए कृषि मार्केट की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र के उद्योग कृषि पर आधारित है और कृषि के साथी पशुपालन मुर्गी पालन यह सभी और मछली पानी के अंदर कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देते हैं तुम्हारे प्राथमिक क्षेत्र में क्षेत्र में व्यवस्था काफी तेजी से निकलेगी लाइट की प्रॉब्लम होती है पानी की प्रॉब्लम होती है मजदूरी के प्रॉब्लम होती आशिक आरबीएसके प्रॉब्लम होती है और पूरे विभिन्न की प्रॉब्लम होती है मशीनों की प्रॉब्लम होती है ब्लू फिल्म पेश करता है और वह अपने परिवार का पालन पोषण भी करता है और मेहनत करता है पढ़ा लिखा नहीं है तो किसानों को हम से सीधे करण को प्रोत्साहित कर सकते हैं ऐसे बहुत से कारक हैं बहुत सेक्टर हैं उनमें से गरीबी और राम ना मिल पाना कालाबाजारी की वजह से आरबीसी पावर जाना

dekhiye krishi market ki arthavyavastha ka mahatvapurna aadhar hai aur prathmik aur dvitiyak kshetra ke udyog krishi par aadharit hai aur krishi ke sathi pashupalan murgi palan yah sabhi aur machli paani ke andar krishi kshetra ko badhawa dete hain tumhare prathmik kshetra mein kshetra mein vyavastha kaafi teji se nikalegi light ki problem hoti hai paani ki problem hoti hai mazdoori ke problem hoti aashik RBSK problem hoti hai aur poore vibhinn ki problem hoti hai machino ki problem hoti hai blue film pesh karta hai aur vaah apne parivar ka palan poshan bhi karta hai aur mehnat karta hai padha likha nahi hai toh kisano ko hum se sidhe karan ko protsahit kar sakte hain aise bahut se kaarak hain bahut sector hain unmen se garibi aur ram na mil paana kalabajari ki wajah se RBC power jana

देखिए कृषि मार्केट की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है और प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्र क

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Dinesh Yadav

Agriculturist

3:00
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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

प्रश्न है भारत में कृषि सब्सिडी की आवश्यकता क्यों है तो इसके बारे में मैं आपको बताना चाहूंगा कि भारत में कृषि सब्सिडी आवश्यकता इसलिए है कि कृषि में जो लागत होता है कृषि में फसल उगाने में जो खर्च पड़ता है उसके मुताबिक के किसानों को उत्पादित फसलों का मूल्य नहीं मिल पाता है क्योंकि लागत खर्चा बढ़ जाता है और उसे मॉर्निंग जो इनकम है वह उसके अनुपात में बहुत कम हुआ करता है कम होता है इस कारण भी कृषि सब्सिडी आवश्यकता है दूसरी आते यह है कि अब किसानों को है कि कभी अतिवृष्टि कभी अनावृष्टि कभी धूप से फसल जल जाता है कभी बारिश में फसल बढ़ जाता है इससे भी किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ता है इसलिए भी किसानों को फसल सब्सिडी चाहिए आवश्यक है किसानों को सब्सिडी देकर उसको प्रोत्साहित करना है प्रोत्साहित किया जाता है क्योंकि किसान के उत्पादित फसल पर ही हमारा पूरा हिंदुस्तान निर्भर करता है कि के किसान के द्वारा उठाए गए फसल अगर नहीं मिले तो फिर हमारे हिंदुस्तान के तमाम लोग खाने के बगैर मोहताज हो जाएंगे खाने के लिए मोहताज हो जाएंगे इसलिए किसानों को फसल सब्सिडी चाहिए एग्रीकल्चर सब्सिडी चाहिए यह किसानों को सब्सिडी आवश्यक है आवश्यक ही नहीं अनिवार्य रूप से उसे मिलनी चाहिए जिससे कि किसान हमारे पूरे हिंदुस्तान के भोजन की व्यवस्था करते हैं इसलिए यह आवश्यक है कि एग्रीकल्चर सब्सिडी चाहिए किसानों को धन्यवाद

prashna hai bharat me krishi subsidy ki avashyakta kyon hai toh iske bare me main aapko batana chahunga ki bharat me krishi subsidy avashyakta isliye hai ki krishi me jo laagat hota hai krishi me fasal ugane me jo kharch padta hai uske mutabik ke kisano ko utpadit fasalon ka mulya nahi mil pata hai kyonki laagat kharcha badh jata hai aur use morning jo income hai vaah uske anupat me bahut kam hua karta hai kam hota hai is karan bhi krishi subsidy avashyakta hai dusri aate yah hai ki ab kisano ko hai ki kabhi ativrishti kabhi anavrishti kabhi dhoop se fasal jal jata hai kabhi barish me fasal badh jata hai isse bhi kisano ko kaafi nuksan ka samana karna padta hai isliye bhi kisano ko fasal subsidy chahiye aavashyak hai kisano ko subsidy dekar usko protsahit karna hai protsahit kiya jata hai kyonki kisan ke utpadit fasal par hi hamara pura Hindustan nirbhar karta hai ki ke kisan ke dwara uthye gaye fasal agar nahi mile toh phir hamare Hindustan ke tamaam log khane ke bagair mohtaaz ho jaenge khane ke liye mohtaaz ho jaenge isliye kisano ko fasal subsidy chahiye agriculture subsidy chahiye yah kisano ko subsidy aavashyak hai aavashyak hi nahi anivarya roop se use milani chahiye jisse ki kisan hamare poore Hindustan ke bhojan ki vyavastha karte hain isliye yah aavashyak hai ki agriculture subsidy chahiye kisano ko dhanyavad

प्रश्न है भारत में कृषि सब्सिडी की आवश्यकता क्यों है तो इसके बारे में मैं आपको बताना चाहूं

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Rahul Bharat

राजनैतिक विश्लेषक

0:54

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

भारत में कृषि के लिए सब्सिडी के इसलिए आवश्यकता है क्योंकि आज भी भारत की कृषि केवल मानसून पर आधारित है पूर्णतया और मौसम ज्ञान में भारत जितना भी आज्ञा क्यों ना हो गया हो अभी भी बहुत कुछ ऐसे जानकारी होती है जो उसे उपलब्ध नहीं हो पाती इसलिए कृषि करना एक जोखिम का काम है और पूरा भारत का हमारा जो आय का साधन कृषि पर ही आधारित है जब तक किसान आत्मनिर्भर नहीं होंगे तब तक भारत उन्नति नहीं कर सकता और अगर किसानों को सब्सिडी जोगिया जाता है अगर नहीं दिया जाता है तो किसानों की स्थिति और भी लगातार दैनिक दैनिक चली जाएगी इसलिए अगर कृषि को बढ़ाना है तो उसमें सब्सिडी देना आवश्यक है

bharat me krishi ke liye subsidy ke isliye avashyakta hai kyonki aaj bhi bharat ki krishi keval monsoon par aadharit hai purnataya aur mausam gyaan me bharat jitna bhi aagya kyon na ho gaya ho abhi bhi bahut kuch aise jaankari hoti hai jo use uplabdh nahi ho pati isliye krishi karna ek jokhim ka kaam hai aur pura bharat ka hamara jo aay ka sadhan krishi par hi aadharit hai jab tak kisan aatmanirbhar nahi honge tab tak bharat unnati nahi kar sakta aur agar kisano ko subsidy jogiya jata hai agar nahi diya jata hai toh kisano ki sthiti aur bhi lagatar dainik dainik chali jayegi isliye agar krishi ko badhana hai toh usme subsidy dena aavashyak hai

भारत में कृषि के लिए सब्सिडी के इसलिए आवश्यकता है क्योंकि आज भी भारत की कृषि केवल मानसून प

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भारत में कैश सब्सिडी की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि भारत में गरीबी ज्यादा है और किसानों को सब्सिडी से कुछ मदद मिलती

bharat me cash subsidy ki avashyakta isliye hai kyonki bharat me garibi zyada hai aur kisano ko subsidy se kuch madad milti

भारत में कैश सब्सिडी की आवश्यकता इसलिए है क्योंकि भारत में गरीबी ज्यादा है और किसानों को स

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भारत में किसान की सब्सिडी के लिए इसलिए दी जाती हैं ताकि किसान को जो भी नुकसान हो सब्सिडी में उनके लिए लाभ मिल सके

bharat me kisan ki subsidy ke liye isliye di jaati hain taki kisan ko jo bhi nuksan ho subsidy me unke liye labh mil sake

भारत में किसान की सब्सिडी के लिए इसलिए दी जाती हैं ताकि किसान को जो भी नुकसान हो सब्सिडी म

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Bhanu

Teacher

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चेतावनी: इस टेक्स्ट में गलतियाँ हो सकती हैं। सॉफ्टवेर के द्वारा ऑडियो को टेक्स्ट में बदला गया है। ऑडियो सुन्ना चाहिये।

क्योंकि किसान भारतीय किसान जो है वह काफी परेशान रहते हैं उनके जो खेती करने के संसाधन है वह प्राप्त नहीं है अगर हिंदी तुम 3 किसानों के पास है इसलिए किसानों के कृषि से संबंधित सब्सिडी होनी चाहिए तथा किसानों के जो ऊपर क्यों होती है उसका जो दाम है वह सरकारी लेवल को बढ़ा दिया जाना चाहिए और जो बिचोली हैं उनका जोश है खत्म कर देना चाहिए जिससे भारतीय किसानों की आय भी बढ़ेगी उनका सुधार भी होगा

kyonki kisan bharatiya kisan jo hai vaah kaafi pareshan rehte hain unke jo kheti karne ke sansadhan hai vaah prapt nahi hai agar hindi tum 3 kisano ke paas hai isliye kisano ke krishi se sambandhit subsidy honi chahiye tatha kisano ke jo upar kyon hoti hai uska jo daam hai vaah sarkari level ko badha diya jana chahiye aur jo bicholi hain unka josh hai khatam kar dena chahiye jisse bharatiya kisano ki aay bhi badhegi unka sudhaar bhi hoga

क्योंकि किसान भारतीय किसान जो है वह काफी परेशान रहते हैं उनके जो खेती करने के संसाधन है वह

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हर किसी के पास हर किसान के पास कोई कभी-कभी रुपया नहीं रहता है इसीलिए थोड़ा सा भी मदद मिल जाता तो बहुत मिल गया इसलिए सबसे टीका आ सकता होता है किसानों के लिए

har kisi ke paas har kisan ke paas koi kabhi kabhi rupya nahi rehta hai isliye thoda sa bhi madad mil jata toh bahut mil gaya isliye sabse tika aa sakta hota hai kisano ke liye

हर किसी के पास हर किसान के पास कोई कभी-कभी रुपया नहीं रहता है इसीलिए थोड़ा सा भी मदद मिल ज

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amitkul

CA student,pursuing bcom too

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भारत में जो एक कृषि सब्सिडी की आवश्यकता है क्योंकि जो अधिकतर जो किसान है वह इतने पढ़े लिखे नहीं है उन्हें पूरी तरह से उन्हें उनकी ज़मीन की कुछ हद तक समझ है वह भी वन एक्सपीरियंस इतने अनुभव पर ही निर्भर निर्भर निर्भर जोशी को 9:00 देखिए इतने सालों से वही सिकंदर याद है पर चलने जैसा चल सन्यासी हो जो है उसे तपास ने की जो सोते सोते हैं कौन के पास नहीं है इसके कारण जो है किसानों है अपने कुछ पैसे को बिना सोचे समझे किसी और चीज पर खर्च कर देता है पर असल में एक कफ़न का टाइम पर ही ऐसा होता है कि प्रॉब्लम कुछ और होती है तो उसके पैसे जो है डूब जाते हैं और वह अपने खेती बाड़ी जो है अपनी किसी को बच्चा नहीं पाता तो किसी सब्सिडी से यह हो सकता है कि किसान की मदद की जाए उसे उठ जा वर बढ़ाने के तरीके सिखाए जाए और इस समय जो उसकी जमीन की हालत है उसे उसे आपका चेहरा कर उसे गोशाला से निकालने की जो है तरकीबें सुनाई जाए अगर यह इस रूप में किसान सब्सिडी मिले तो भारत का भारत के किसानों का बहुत बड़ा जो है कल्याण होगा

bharat mein jo ek krishi subsidy ki avashyakta hai kyonki jo adhiktar jo kisan hai vaah itne padhe likhe nahi hai unhe puri tarah se unhe unki zameen ki kuch had tak samajh hai vaah bhi van experience itne anubhav par hi nirbhar nirbhar nirbhar joshi ko 9 00 dekhiye itne salon se wahi sikandar yaad hai par chalne jaisa chal sanyaasi ho jo hai use tapas ne ki jo sote sote hai kaun ke paas nahi hai iske karan jo hai kisano hai apne kuch paise ko bina soche samjhe kisi aur cheez par kharch kar deta hai par asal mein ek kafan ka time par hi aisa hota hai ki problem kuch aur hoti hai toh uske paise jo hai doob jaate hai aur vaah apne kheti baadi jo hai apni kisi ko baccha nahi pata toh kisi subsidy se yah ho sakta hai ki kisan ki madad ki jaaye use uth ja var badhane ke tarike sikhaye jaaye aur is samay jo uski jameen ki halat hai use use aapka chehra kar use goshala se nikalne ki jo hai tarakeeben sunayi jaaye agar yah is roop mein kisan subsidy mile toh bharat ka bharat ke kisano ka bahut bada jo hai kalyan hoga

भारत में जो एक कृषि सब्सिडी की आवश्यकता है क्योंकि जो अधिकतर जो किसान है वह इतने पढ़े लिखे

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भारत में कृषि सब्सिडी ;

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