नरक चतुर्दशी अर्थात छोटी दीपावली के विषय में समझाएं?...


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Pt.Sudhakar shukla

🦚Birth kundli Specialist🌹 भारत भाग्य विधाता🚩

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नरक चतुर्दशी यह नाम इस दिन को इसलिए पड़ा क्योंकि दीपावली के 1 दिन पहले अर्थात कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी दीपावली के 1 दिन पहले अमावस्या के एक दिन पहले अमावस्या को प्रभु राम अयोध्या वापस आए अर्थात सभी प्रकार से 14 वर्ष बाद में रहने के बाद अपने उद्देश्य में सफल होने के बाद उनको अयोध्या वापस आना था अर्थात 14 वर्ष का उनके समय की अवधि पूर्ण हो रही थी अतः आप उस दिन उनके वापस आने का समय पूरा हो रहा था जिसे आप भी अगले दिन खुश होने वाले हो जैसे मान लेते हैं कि आपके पिता जी आपको कोई फोन देने वाले हो या आपको अगले दिन उपहार आने वाला हूं लेकिन यदि आपको पता चले कि हम को उपहार मिल सकता है एक बहुत अच्छा लेकिन आपके मन में शंका या हो कि क्या देने वाला देगा अर्थात होने की संभावना थोड़ा कम हो तो आपका वह दिन बहुत कठिनाई के साथ व्यतीत होता है अर्थात आप खुशी हर प्रकार से इस प्रकार से जाहिर करेंगे कि हमको मिले या ना मिले मैं तो खुश रहता हूं लेकिन यदि आपको लालसा बहुत श्रेष्ठ ताकि हो और आपके मन में थोड़ा सा ऐसी समस्या हो कि क्या होगा या नहीं होगा हो सकता है ना ही हो तो आपके मन में दोनों के भाव अर्थात आप को कष्टकारी होते हैं और इसी कारण से इसका नाम नरक चतुर्थी बड़ा भगवान उसके अगले दिन आने वाले थे लेकिन भारत समेत सभी लोगों को या पूर्ण पता नहीं था कि राम हो सकता है क्रोधित होकर गए हो तो वापिस ना आए तो या सभी के मन में भाव था और सभी लोग बहुत पीड़ित थे कि अगर वह नहीं आए तो क्या होगा उन्हें कैसे पता चलेगा कि वह कहां है कौन है कैसे हैं तो हम उनको कैसे ढूंढ लेंगे यह मन में भावनाए थी अर्थात वह लोग चिंतित भी थे और ज्यादा चिंता थोड़ा सा कष्टकारी होता है और इसीलिए इस चतुर्थी को नरक चतुर्दशी कहा गया यही इसकी प्रथम मान्यता है और इस दिन व्यक्तियों के मन में बहुत ज्यादा चिंताएं थी और इस कारण से इसका नाम नरक चतुर्थी पड़ा इसका महत्व यह है कि इस दिन जी सदैव व्यक्तियों की सदैव दीपावली रहती है दीपोत्सव मनाया जाता है तो इस दिन भी व्यक्ति हर प्रकार से अपने परिवार में वह सभी चीजें उपस्थित करना चाहता है जिससे उसके जीवन में खानपान के अच्छे अच्छे हो और साफ-सफाई अच्छी तरीके से वह पूजन पाठ में उसके इसी प्रकार की कमी ना आए तो इस दिन व्यक्ति थोड़ा चिंतित रहता है और इसीलिए इस दिन को नरक चतुर्दशी कहते हैं तो याद दिन विशेष से होता है अर्थात आज के युग में भी दीपावली के 1 दिन पहले लोग अपने घर में खुशियां बटोरने के लिए थोड़ी चिंता करते हैं कि हमारे पास किस चीज की कमी है कैसे हो पाएगा तू ही आज भी थोड़ा बहुत प्रभावित करता है व्यक्तियों के जीवन में ओरिया उस समय सबसे ज्यादा था क्योंकि प्रभु राम जी आने वाले थे और सभी लोगों को समय तक पूरे राज्य को पूरे भारत को या इंतजार था कि प्रभु राम अयोध्या में आ करके अपनी राजधानी का रास्ता माली चक्रवर्ती सम्राट पर तो इस कारणवश सभी के मन में यह अपेक्षा थी कि प्रभु राम ने इतना अच्छा अच्छा कार्य किया है पूरे देश में सुबह आकर राज करें और पूरी प्रजा को एक समान देखें यह उनके मन की इच्छा थी लेकिन किसी को भरोसा पूर्ण रूप से नहीं ताकि भगवान राम अयोध्या वापस आ करके ऐसा करेंगे इस कारण से वह चिंतित जय हिंद जय भारत भारत माता की जय वंदे मातरम जय श्री राम

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नरक चतुर्दशी यह नाम इस दिन को इसलिए पड़ा क्योंकि दीपावली के 1 दिन पहले अर्थात कार्तिक मास

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